ब्रेकिंग न्यूज़
PUNJAB TOP-10 NEWS, चुटकियों में पढ़े बड़ी दिन भर की खबरें…29-04-2026

पंजाब डेस्क: पंजाब और चंडीगढ़ की आज की बड़ी खबरों के बुलेटिन में आपका स्वागत है। आज राज्य में राजनीतिक उथल-पुथल से लेकर सुरक्षा और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी कई बड़ी घटनाएं सामने आईं। जहाँ एक ओर आम आदमी पार्टी में मची अंतर्कलह को शांत करने के लिए मनीष सिसोदिया ने जालंधर में कमान संभाली, वहीं पटियाला में रेलवे ट्रैक को उड़ाने की एक बड़ी आतंकी साजिश को समय रहते नाकाम कर दिया गया। इसके अलावा, ऑस्ट्रेलिया से डिपोर्ट किए गए पंजाबियों की घर वापसी और मोहाली के स्कूल में छात्रों पर हुए मधुमक्खियों के हमले जैसी महत्वपूर्ण खबरों ने सबका ध्यान खींचा। आइए विस्तार से जानते हैं आज की 10 प्रमुख खबरें।”

पंजाब AAP की बड़ी बैठक: जालंधर में मनीष सिसोदिया ने विधायकों और ऑब्जर्वर्स के साथ करीब साढ़े 3 घंटे मीटिंग की। यह बैठक 6 राज्यसभा सांसदों के पार्टी छोड़ने के बाद गुटबाजी रोकने के लिए बुलाई गई थी, जहाँ सिसोदिया ने भाजपा को “गद्दारों की पार्टी” कहा।

ऑस्ट्रेलिया से भारतीयों की वापसी: ऑस्ट्रेलिया से 15 भारतीयों को डिपोर्ट किया जा रहा है, जिनमें 11 पंजाबी हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान उन्हें रिसीव करने खुद दिल्ली जा रहे हैं और उन्होंने इस मामले में एजेंटों के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं।

रेलवे ट्रैक उड़ाने की साजिश नाकाम: पटियाला के पास अंबाला-अमृतसर रेल कॉरिडोर पर विस्फोटक लगाते समय एक युवक की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई। पुलिस जांच में इसके पीछे पाकिस्तान का हाथ होने का शक है; यदि धमाका होता तो 20 किमी इलाके में दम घुटने जैसे हालात हो सकते थे।

लुधियाना कारोबारी का रोता हुआ वीडियो: लुधियाना में ‘कवर किंग’ नाम के कारोबारी ने गैंगस्टर की धमकियों से परेशान होकर वीडियो जारी किया है। उसने कहा कि गैंगस्टर उसे और उसकी बहन को जान से मारने की धमकी दे रहे हैं और परिवार की फोटो का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं।

चंडीगढ़ में 2 करोड़ की रंगदारी: चंडीगढ़ के एक कारोबारी से रोहित गोदारा गैंग के नाम पर 2 करोड़ रुपए की मांग की गई है। पुलिस ने इस मामले में गोदारा गैंग के दो शूटरों को हथियारों के साथ गिरफ्तार किया है, जो किसी बड़ी वारदात की फिराक में थे।

मोहाली स्कूल में मधुमक्खियों का हमला: फेज-7 स्थित सेंट सोल्जर स्कूल में मधुमक्खियों के झुंड ने छात्रों पर हमला कर दिया, जिससे 40 बच्चे घायल हो गए। अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया है।

आरोपी युवक का मुंडन और चप्पलों की माला: लुधियाना में अपनी लिव-इन पार्टनर की बेरहमी से पिटाई करने और उसका वीडियो बनाने वाले आरोपी को लोगों ने पकड़ लिया। जनता ने उसे चप्पलों की माला पहनाई और उसका सिर मुंडवा दिया।

नर्सिंग छात्रा की आत्महत्या: मुक्तसर के गांव बादल में एक नर्सिंग छात्रा ने हॉस्टल में फांसी लगा ली। इस घटना के सदमे से उसकी दो रूममेट्स समेत 6 अन्य छात्राओं की तबीयत बिगड़ गई, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

मेयर पति की विवादित कॉल रिकॉर्डिंग: लुधियाना की मेयर के पति रवि आनंद पर एक लेडी प्रिंसिपल ने अश्लील चैटिंग और फोटो मांगने के आरोप लगाए हैं। सामने आई एक कॉल रिकॉर्डिंग में वह कथित तौर पर 9 बार प्रिंसिपल से उसकी फोटो मांगते सुने जा सकते हैं।

कनाडा में निहंग सिंह से मारपीट: कनाडा में एक ट्रांसपोर्ट कंपनी के ऑफिस में एक निहंग की दाढ़ी खींचने और मारपीट का वीडियो वायरल हुआ है। विवाद एक ट्रक ड्राइवर के पैसों के लेनदेन को लेकर हुआ था, जिसके बाद कंपनी मालिक ने माफी मांग ली है।

ऊना में भीषण सड़क हादसा: 200 फीट गहरी खाई में गिरी कार, आग लगने से लुधियाना के 2 श्रद्धालुओं की मौत

नेशनल डेस्क: हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के भरवाईं क्षेत्र में बुधवार को एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ, जिसमें लुधियाना के दो श्रद्धालुओं की मौत हो गई। यह हादसा उस समय हुआ जब दोनों मृतक माता श्री चिंतपूर्णी मंदिर के दर्शन कर वापस लौट रहे थे।प्राप्त जानकारी के अनुसार, उनकी स्विफ्ट डिजायर कार (PB 10 KH 7531) अचानक अपना नियंत्रण खो बैठी और 200 फीट गहरी खाई में जा गिरी। खाई में गिरने के बाद कार में एक जोरदार धमाका हुआ और उसमें भीषण आग लग गई।

आग इतनी भयानक थी कि कार पूरी तरह उसकी चपेट में आ गई, जिससे कार सवार दोनों व्यक्तियों की मौके पर ही मौत हो गई।हादसे में एक अन्य व्यक्ति गंभीर रूप से झुलस गया है, जिसकी पहचान फिलहाल नहीं हो पाई है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संजीव भाटिया और मंदिर अधिकारी संजीव प्रभाकर ने घटनास्थल का जायजा लिया। पुलिस ने मामला दर्ज कर हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है।

धार में भीषण सड़क हादसा: पिकअप और स्कॉर्पियो की भिड़ंत में 12 मजदूरों की मौत, 25 से ज्यादा घायल

नेशनल डेस्क : मध्य प्रदेश के धार जिले में बुधवार रात एक हृदयविदारक सड़क हादसा हुआ, जिसमें 12 मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई। यह दुर्घटना तिरला थाना क्षेत्र में उस समय हुई जब मजदूरों से भरी एक पिकअप वाहन अनियंत्रित होकर सड़क के दूसरी ओर जा गिरी और सामने से आ रही एक स्कॉर्पियो से जोरदार टक्कर हो गई।इस भीषण हादसे में मरने वालों में महिलाएं, पुरुष और बच्चे भी शामिल हैं।

टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि 25 से अधिक लोग घायल हुए हैं, जिन्हें इलाज के लिए तत्काल जिला भोज अस्पताल पहुंचाया गया। अस्पताल में घायलों की आमद से अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जहाँ फिलहाल सभी का उपचार जारी है।स्थानीय पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। यह रिपोर्ट शिव चौबे द्वारा जबलपुर से अपडेट की गई है।

पीएम मोदी ने 594 किमी लंबे एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड गंगा एक्सप्रेस-वे का किया उद्घाटन

दिल्ली/सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के हरदोई जिलें में 594 किलोमीटर लंबे एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया। भगवान नरसिम्हा की पवित्र भूमि और कुछ किलोमीटर दूर बहने वाली मां गंगा की दिव्य उपस्थिति को नमन करते हुए अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि पूरा क्षेत्र नदी की आध्यात्मिक और पोषणकारी कृपा से धन्य एक तीर्थस्थल है।


प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार ने अवसंरचना निर्माण की गति को अभूतपूर्व रूप से तेज किया है। उन्‍होंने बताया कि देश के सबसे लंबे हरित गलियारे वाले एक्सप्रेसवे में से एक, गंगा एक्सप्रेसवे, को पांच वर्ष से भी कम समय में पूरा किया गया है। तेज गति से आधुनिकीकरण के अपने विजन को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि यह वर्तमान सरकार के काम की गति है! यह वर्तमान सरकार के काम करने का तरीका है।


इस एक्सप्रेसवे के रणनीतिक महत्व को बताते हुए पीएम ने कहा कि लगभग 600 किमी लंबा यह मार्ग पश्चिमी उत्तर प्रदेश के वाणिज्यिक केंद्रों को मध्य उत्तर प्रदेश के कृषि प्रधान क्षेत्रों और पूर्वी उत्तर प्रदेश के सांस्कृतिक स्थलों से जोड़ेगा। इससे बारह जिलों के करोड़ों नागरिकों को लाभी मिलेगा। मोदी ने कहा कि गंगा एक्सप्रेसवे सिर्फ एक तेज रफ्तार सड़क नहीं है। यह नई संभावनाओं, नए सपनों और नए अवसरों का द्वार है।


एक्सप्रेसवे के कनेक्टिविटी लाभों पर प्रकाश डालते हुए पीएम ने कहा कि यह उत्तर प्रदेश के एक छोर को दूसरे छोर से जोड़ता है, साथ ही राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की अपार संभावनाओं को भी करीब लाता है, जिसके किनारों पर वाहनों के दौड़ने के साथ-साथ नए औद्योगिक अवसर सृजित होंगे।


अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में राज्य की उभरती भूमिका को रेखांकित करते हुए मोदी ने नोएडा में हाल ही में हुए सेमीकंडक्टर परियोजना की आधारशिला रखे जाने का उल्‍लेख करते हुए कहा कि यह राज्‍य भविष्‍य की एआई आधारित अर्थव्‍यवस्‍था में अग्रणी बन रहा है।


उन्‍होंने राज्‍य में कनेक्टिविटी के व्‍यापक विस्‍तार का उल्‍लेख करते हुए कहा कि पहले जहां बहुत कम हवाई अड्डे थे, आज 21 हवाई अड्डें सं‍चालित हो रहे हैं, जिनमें 5 अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे शामिल हैं। उन्‍होंने नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का भी उल्‍लेख किया, जो गंगा एक्सप्रेसवे कॉरिडोर से कुछ ही घंटों की दूरी पर है।


उत्तर प्रदेश के अतीत और वर्तमान की तुलना करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि एक पिछला दौर था, जब राज्‍य अपराध और अराजकता से जुड़ा था, लेकिन आज कानून-व्‍यवस्‍था एक मिसाल बन गई है। मोदी ने कहा कि अब उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था का उदाहरण पूरे देश में दिया जाता है।


भारत की व्यापक सभ्यतागत और आर्थिक महत्वाकांक्षाओं के संदर्भ में उत्तर प्रदेश के विकास को रखते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्य का परिवर्तन राष्ट्र के मूल संकल्प को साकार करता है। श्री मोदी ने कहा कि आज पूरा देश एक ही संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है – विकसित भारत का संकल्प! इस संकल्प को पूरा करने में उत्तर प्रदेश की एक महत्वपूर्ण भूमिका है।
वैश्विक अस्थिरता और भारत के उदय के बाहरी विरोध को स्वीकार करते हुए प्रधानमंत्री ने बाहरी खतरों के बावजूद विकास के प्रति राष्ट्र की अटूट प्रतिबद्धता की पुष्टि की। श्री मोदी ने कहा कि हम न केवल सुरक्षित हैं, बल्कि विकास की नई उपलब्धियां भी हासिल कर रहे हैं। हम आत्मनिर्भर भारत अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं। हम अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे का निर्माण कर रहे हैं।


गंगा एक्सप्रेसवे को इस व्यापक विकास प्रतिमान का प्रतीक बताते हुए प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में उत्तर प्रदेश के लोगों पर भरोसा जताया कि वे उभरते अवसरों को वास्तविक समृद्धि में बदल देंगे। श्री मोदी ने कहा कि मुझे विश्वास है कि गंगा एक्सप्रेसवे जो अवसर लेकर आएगा, उत्‍तर प्रदेश के लोग उन अवसरों को अपनी कड़ी मेहनत और प्रतिभा से साकार कर देंगे।

नए ज़िम्मेदार ऑनलाइन गेमिंग इकोसिस्टम का निर्माण

श्री एस. कृष्णन

ऑनलाइन गेमिंग के लिए एक राष्ट्रीय ढाँचा स्थापित करने की दिशा में भारत की पहल अवसर और जोखिम के संगम से उत्पन्न हुई है। बीते एक दशक में डिजिटल गेमिंग का तेजी से विस्तार हुआ है, जिसे बड़े पैमाने पर स्मार्टफोन अपनाने, किफायती इंटरनेट कनेक्टिविटी और तकनीक का उपयोग करने और उस पर निर्भर रहने वाली युवा आबादी का समर्थन मिला है। इस विकास ने नवाचार, कौशल विकास, रचनात्मक उद्योगों और रोजगार सृजन के लिए सार्थक अवसरों का सृजन किया है । मनोविनोद के लिए  गेमिंग और संगठित प्रतिस्पर्धी प्रारूपों ने भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देने की क्षमता भी प्रदर्शित की है।

इन अवसरों के साथ-साथ, ऑनलाइन मनी गेमिंग—विशेष रूप से सट्टेबाजी और दांव लगाने वाले (यानी बेटिंग वेजरिंग) प्लेटफॉर्मों के अनियंत्रित विस्तार ने गंभीर सामाजिक और आर्थिक चिंताओं को भी जन्‍म दिया। ऐसे अनेक सेवा प्रदाता राज्य सीमाओं के पार या विदेशी क्षेत्रों से संचालित होते थे, जो घरेलू सुरक्षा उपायों को नज़रअंदाज़ करते थे और कानूनों को लागू करना कठिन बनाते थे। दबाव बनाने वाले विज्ञापनों और मनोवैज्ञानिक रूप से प्रभावित करने वाले डिज़ाइन फीचर्स ने कमजोर उपयोगकर्ताओं में लत जैसी प्रवृत्तियों और वित्तीय नुकसान को बढ़ावा दिया। वित्तीय संकट, डिजिटल भुगतान प्रणालियों के दुरुपयोग और अस्पष्ट अंतरराष्ट्रीय वित्तीय लेन-देन की रिपोर्ट्स ने धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय अस्थिरता से जुड़े जोखिमों को उजागर किया। इन परिस्थितियों ने एक ऐसे राष्ट्रीय ढाँचे की आवश्यकता को रेखांकित किया, जो व्यक्तियों—विशेषकर युवाओं—की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए गेमिंग इकोसिस्टम के वैध हिस्सों को जिम्मेदारी से विकसित होने में सक्षम बनाए।  

ऑनलाइन सोशल गेम्स और ई-स्पोर्ट्स नामक संगठित प्रतिस्पर्धी प्रारूपों जैसे वैध गेमिंग क्षेत्रों की सहायता के लिए एकीकृत संस्थागत ढाँचे का अभाव भी उतना ही महत्वपूर्ण था। डेवलपर्स के पास श्रेणीकरण की ऐसी कोई प्रक्रिया नहीं थी, जिसका पहले से अनुमान लगाया जा सके और उपयोगकर्ताओं को अक्सर वैध मनोरंजन और अवैध  सट्टेबाजी के बीच फर्क समझने में कठिनाई होती थी। अत: इसका उद्देश्य केवल हानिकारक गतिविधियों पर रोक लगाना नहीं, बल्कि एक संतुलित ढाँचा भी स्थापित करना था, जो उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करे और जिम्मेदार नवाचार को भी संभव बनाए।

ऑनलाइन खेल संवर्धन और विनियमन अधिनियम, 2025, (पीआरओजीए) इसी संतुलित दृष्टिकोण को दर्शाता है, जिसे डेवलपर्स, ई-स्पोर्ट्स संगठनों, कानूनी विशेषज्ञों, प्रौद्योगिकी पेशेवरों और सामाजिक संगठनों के हितधारकों के साथ व्यापक परामर्श के बाद अंतिम रूप दिया गया है। प्राप्त प्रतिक्रियाओं में लगातार पारदर्शी श्रेणीकरण, पूर्वानुमेय अनुपालन दायित्वों और वैध प्रारूपों के लिए व्‍यवस्थित व सरल मान्यता प्रक्रियाओं की आवश्यकता पर जोर दिया गया। हितधारकों ने अवैध सट्टेबाजी प्लेटफॉर्मों  के खिलाफ समन्वित कार्रवाई मजबूत करते हुए वैध मनोरंजक और प्रतिस्पर्धी गेमिंग को बढ़ावा देने का समर्थन किया।

संचालन स्तर पर, यह ढाँचा परस्पर संबद्ध तीन चरणों—अवधारण, मान्यता और पंजीकरण—पर आधारित एक व्‍यवस्थित श्रृंखला प्रस्तुत करता है। ये चरण क्रमिक रूप से कार्य करते हैं और इन्हें पीआरओजीए तथा उसके नियमों में दी गई वैधानिक परिभाषाओं के साथ समझना आवश्यक है।

अवधारण एक नियामक प्रवेश द्वार के रूप में कार्य करता है, जिसके माध्यम से किसी भी गेम की जांच और उसका श्रेणीकरण किया जाता है। यह प्रत्‍येक ऑनलाइन गेम के लिए अनिवार्य नहीं है, बल्कि केवल सीमित और निर्धारित परिस्थितियों में ही आवश्यक होता है। सबसे ज्‍यादा महत्वपूर्ण बात यह है कि ई-स्पोर्ट्स की मान्यता से पहले अवधारण अनिवार्य होता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रतिस्पर्धी प्रारूप वैधानिक सुरक्षा मानकों का पालन करते हैं और सट्टेबाजी के तत्वों से मुक्त रहते हैं। इसके अलावा, अवधारण आमतौर पर उन स्थितियों में आवश्यक होता है, जब किसी गेम के ऑनलाइन मनी गेमिंग की परिभाषा के दायरे में आने की आशंका हो, जब अधिसूचित ऑनलाइन सोशल गेम्स की श्रेणियों के लिए श्रेणीकरण जरूरी हो, जब शिकायतों या खुफिया सूचनाओं से प्रतिबंधित गतिविधियों को सक्षम करने वाले संभावित वित्तीय तत्वों का संकेत मिले, या जब भारतीय ऑनलाइन गेमिंग प्राधिकरण (ओजीएआई) जनहित में जांच का निर्देश दे। अवधारण प्रारंभिक श्रेणीकरण को संभव बनाकर, अवैध वित्तीय मॉडलों को गेमिंग इकोसिस्‍टम में प्रवेश करने से रोकता है, जबकि वैध प्रारूपों को नियामक स्पष्टता के साथ आगे बढ़ने की अनुमति देता है।

अवधारण के बाद, पात्र प्रारूपों को मान्यता दी जा सकती है। ई-स्पोर्ट्स की मान्यता राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम, 2025 के अंतर्गत विनियमित होती है, जिसमें संगठित मल्टीप्लेयर गेमप्ले, पूर्व-निर्धारित प्रतिस्पर्धात्मक नियम और परिणाम केवल मानसिक कौशल, शारीरिक दक्षता या रणनीतिक निर्णय लेने जैसे कारकों पर आधारित होना आवश्यक है। प्रतिभागिता शुल्क की अनुमति केवल प्रतियोगिता से संबंधित प्रशासनिक खर्चों और प्रदर्शन-आधारित पुरस्कार संरचनाओं को समर्थन देने के लिए ही दी जा सकती है। हालांकि, किसी भी रूप में सट्टेबाजी या दांव लगाना पूरी तरह से प्रतिबंधित रहता है। मान्यता से पहले अनिवार्य अवधारण यह सुनिश्चित करता है कि मान्यता प्राप्त ई-स्पोर्ट्स प्रारूप सभी वैधानिक सुरक्षा मानकों का पालन करते हैं।

इसके समानांतर, यह ढाँचा ऑनलाइन सोशल गेम्स के पंजीकरण के लिए एक मार्ग स्थापित करता है, जो वित्तीय सट्टेबाजी के लिए नहीं, बल्कि मुख्यतः मनोरंजन और सामाजिक सहभागिता के उद्देश्य से बनाए गए होते हैं। ऑनलाइन सोशल गेम्स की केवल उन्‍हीं श्रेणियों का ही पंजीकरण करने की आवश्‍यकता होगी, जिन्‍हें सरकार द्वारा विशेष रूप से अधिसूचित किया गया हो। जहाँ श्रेणीकरण की निश्चितता होना आवश्यक है, वहाँ पंजीकरण से पहले अवधारण किया जा सकता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनमें सट्टेबाजी के तत्व मौजूद नहीं हैं।

इस श्रृंखला का अंतिम चरण पंजीकरण है, जो नियामक दृश्यता प्रदान करता है तथा संतुलित निगरानी और लागू की जा सकने वाली जवाबदेही सुनिश्चित करता है। पंजीकरण आमतौर पर ई-स्पोर्ट्स की मान्यता के बाद होता है या फिर ऑनलाइन सोशल गेम्स की अधिसूचित श्रेणियों पर लागू होता है। यह उन मामलों में भी निर्देशित किया जा सकता है, जहाँ  निर्धारण के परिणाम औपचारिक निगरानी की आवश्यकता दर्शाते हैं या जहाँ ओजीएआई जनहित में ऐसी निगरानी को आवश्यक समझता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि  पंजीकरण पूरे प्लेटफॉर्म पर नहीं ,बल्कि प्रत्येक ऑनलाइन गेम सेवा प्रदाता के अलग-अलग खेलों पर लागू होता है, जिससे अनुपालन यथोचित बना रहता है और साथ ही प्राधिकरणों को अधिकृत खेलों का एक विश्वसनीय रिकॉर्ड बनाए रखने में सहायता मिलती है।

यह वर्तमान ढाँचा प्रतिक्रियात्मक प्रवर्तन से आगे बढ़कर सक्रिय और निवारक शासन की ओर परिवर्तन दर्शाता है। अनुकूल अवधारण प्रारंभिक फिल्‍टर के रूप में कार्य करता है, मान्यता वैधता का स्पष्ट फर्क स्थापित करती है, और पंजीकरण नियामक दृश्यता प्रदान करते हुए सही निगरानी और लागू की जा सकने वाली जवाबदेही सुनिश्चित करता है। साथ ही, अवैध ऑनलाइन मनी गेमिंग के खिलाफ कार्यान्‍वयन को, विशेष रूप से विदेशी ऑपरेटरों को लक्षित करते हुए समन्वित ब्लॉकिंग, जांच-आधारित ओजीएआई की कार्रवाई और वित्तीय व्यवधान के उपायों के माध्यम से मजबूत किया गया है। यह दो-स्तरीय दृष्टिकोण ढाँचे की मूल विचारधारा: वैध संस्थाओं के लिए हल्के फुल्‍के नियमन तथा अवैध संचालकों के खिलाफ सख्त कार्यान्‍वयन  को प्रतिबिंबित करता है।

कार्यान्‍वयन  के अलावा, यह ढाँचा जिम्मेदार इकोसिस्‍टम के विकास के लिए भी अनुकूल परिस्थितियाँ तैयार करता है। स्पष्ट नियामक मार्ग वैध गेमिंग के विकास, प्रतिस्पर्धी अवसंरचना और सहायक डिजिटल सेवाओं में निवेश को प्रोत्साहित करते हैं। ई-स्पोर्ट्स की मान्यता संगठित प्रतियोगिताओं और पेशेवर भागीदारी को सक्षम बनाती है, जबकि विनियमित श्रेणियाँ विकास, अनुपालन, साइबर सुरक्षा और इवेंट प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में नए अवसरों में सहायता देती हैं।

पीआरओजीए के माध्यम से शुरू किया गया यह परिवर्तन बिखरी हुई प्रतिक्रियाओं से आगे बढ़कर पूर्वानुमेय शासन की ओर बदलाव को दर्शाता है। निवारक श्रेणीकरण, वैध मान्यता और जवाबदेह पंजीकरण को एक साथ जोड़कर यह ढाँचा एक स्थिर वातावरण तैयार करता है, जहाँ नवाचार जनहित की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए जिम्मेदारी के साथ विकसित हो सकता है।

(लेखक इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), भारत सरकार में सचिव हैं।)

***

रेलवे ईडीएफसी के साथ 24 घंटे की गश्त तेज करेगा, ड्रोन निगरानी शुरू की जाएगी: श्री रवनीत सिंह, रेल राज्य मंत्री एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री

केंद्रीय मंत्री ने अंबाला रेलवे मंडल के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विस्फोट स्थल का निरीक्षण किया

पटियाला/सत्ता संदेश

केंद्रीय मंत्री श्री रवनीत सिंह ने आज शंभू के पास हाल ही में हुए विस्फोट स्थल का दौरा किया और ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (ईडीएफसी) के साथ सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की। मीडिया को संबोधित करते हुए, मंत्री ने पंजाब में रेलवे अवसंरचना को निशाना बनाकर हो रही बार-बार की घटनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की और सुरक्षा तथा निगरानी को मजबूत करने के लिए सख्त और तत्काल कदमों का आश्वासन दिया।

श्री रवनीत सिंह ने घोषणा की कि रेलवे ईडीएफसी के साथ 24 घंटे की गश्त को तेज करेगा और निगरानी कवरेज को काफी बढ़ाया जाएगा। वर्तमान में, अंबाला मंडल के पंजाब क्षेत्र में 173 सीसीटीवी कैमरे पहले ही स्थापित किए जा चुके हैं और आगे भी स्थापना जारी है। कॉरिडोर के सुनसान और संवेदनशील हिस्सों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जहां ड्रोन निगरानी सहित उन्नत मॉनिटरिंग तरीकों को लागू किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, प्रमुख रेलवे कर्मी ट्रैक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार जमीनी गश्त करेंगे।

मंत्री ने बताया कि यह तीन महीने के भीतर और लगभग 35 किलोमीटर की दूरी के भीतर दूसरी ऐसी घटना है। इससे पहले की घटना 23 जनवरी को एनएच-44 से लगभग 800–900 मीटर की दूरी पर हुई थी, जबकि नवीनतम विस्फोट स्थल उसी राजमार्ग से लगभग 300 मीटर दूर स्थित है। प्रारंभिक आकलन से संकेत मिलता है कि असामाजिक तत्व राजमार्ग से आसान पहुंच मार्गों का उपयोग कर रेलवे ट्रैक को निशाना बना रहे हो सकते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि बाहरी संलिप्तता के संकेत भी मिल रहे हैं, जहां शत्रुतापूर्ण तत्व रेलवे जैसी महत्वपूर्ण अवसंरचना को निशाना बनाकर क्षेत्र को अस्थिर करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये कृत्य न केवल सुरक्षा के लिए खतरा हैं, बल्कि राज्य में आर्थिक गतिविधियों को बाधित करने के सीधे प्रयास भी हैं।

ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, जो साहनेवाल को पश्चिम बंगाल से जोड़ता है, एक महत्वपूर्ण आर्थिक धुरी है, जहां प्रतिदिन लगभग 30 ट्रेनें चलती हैं और औद्योगिक तथा कृषि वस्तुओं का परिवहन करती हैं। इस नेटवर्क में किसी भी प्रकार का व्यवधान राज्य और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए झटका साबित होता है।

मंत्री ने लोको पायलट की सतर्कता की सराहना की, जिन्होंने प्रभाव का आभास होते ही तुरंत ट्रेन रोक दी, जिससे एक संभावित बड़े हादसे को टाल दिया गया। आपातकालीन प्रतिक्रिया और सुरक्षा टीमों को तुरंत स्थल पर तैनात किया गया।

सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, मंत्री ने कहा कि रेलवे संपत्तियों की सुरक्षा, यात्रियों और माल परिवहन की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा निर्बाध आर्थिक गतिविधि बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

प्रो. मोहन सिंह मेमोरियल फाउंडेशन ने पाली देतवालिया के पुत्र के निधन पर शोक जताया

लुधियाना/सत्ता संदेश

लुधियाना, 29 अप्रैल: प्रोफेसर मोहन सिंह मेमोरियल फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने प्रसिद्ध गायक और गीतकार पाली देतवालिया के इकलौते पुत्र मनजोत सिंह (38) के असमय निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है।

यहां जारी एक बयान में, फाउंडेशन के प्रधान राजीव कुमार लवली, प्रगट सिंह सरपरस्त, चेयरमैन गुरनाम सिंह ढालीवाल, सरपरस्त डॉ. गुरभजन गिल, दिलबाग सिंह खतराए कलां, अमरिंदर सिंह जस्सोवाल, कला प्रेमी डॉ. निर्मल जोड़ा, सरपरस्त कृष्ण कुमार बावा, सरपरस्त मलकीयत सिंह दाखा तथा कोऑर्डिनेटर प्रिथीपाल सिंह बडाला ने शोक संतप्त परिवार के साथ संवेदना व्यक्त की हे। उन्होंने ईश्वर से दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करने तथा परिवार को इस दुख को सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना की है।

गौरतलब है कि मनजोत सिंह पिछले कुछ दिनों से बीमार थे। मंगलवार को उनका निधन हो गया था और आज उनके पैतृक गांव देतवाल में अंतिम संस्कार किया गया। वह अपने पीछे पिता पाली देतवालिया के अलावा, पत्नी और दो छोटे बच्चे छोड़ गए हैं।

भारत के साइबर सुरक्षा ऑडिट इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय वार्षिक सम्मेलन का

विषय : ‘भविष्य के लिए तैयार ऑडिट के माध्यम से डिजिटल भारत को सुरक्षित करना: अनुकूलन, आश्वासन, प्रगति’

दिल्ली /सत्ता संदेश

भारत के साइबर सुरक्षा ऑडिट इकोसिस्टम को आगे बढ़ाने और देश की समग्र साइबर लचीलापन को मजबूत करने के लिए, सीईआरटी-इन ने तीन दिवसीय राष्ट्रीय वार्षिक सम्मेलन – “सीईआरटी-इन संवाद 2026” – का सफलतापूर्वक आयोजन किया, जिसमें नीति निर्माताओं, उद्योग और नियामक निकायों के मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारियों (सीआईएसओ), सीईआरटी-इन सूचीबद्ध ऑडिटिंग संगठनों के प्रतिनिधियों और देश भर के साइबर सुरक्षा पेशेवरों सहित 500 से अधिक प्रतिनिधियों को एक साथ लाया गया।

यह सम्मेलन बीआईटीएस पिलानी, गोवा के सहयोग से आयोजित किया गया और 27 से 29 अप्रैल, 2026 तक बीआईटीएस पिलानी के केके बिरला गोवा परिसर में हुआ। सम्मेलन का विषय “भविष्य के लिए तैयार ऑडिट के माध्यम से डिजिटल भारत को सुरक्षित करना: अनुकूलन, आश्वासन, प्रगति”।

उद्घाटन समारोह में गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत उपस्थित थे। सम्मेलन का आयोजन और संचालन सीईआरटी-इन के महानिदेशक डॉ. संजय बहल के मार्गदर्शन में किया गया। इसमें गोवा के पुलिस महानिरीक्षक श्री के.आर. चौरसिया (आईपीएस), वरिष्ठ निदेशक श्री एस.एस. शर्मा, सीईआरटी-इन, निदेशक प्रो. सुमन कुंडू, बीआईटीएस पिलानी, के.के. बिरला गोवा परिसर, निदेशक डॉ. निरुपम मेहरोत्रा, निदेशक बैंकर्स इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल डेवलपमेंट (बीआईआरडी), लखनऊ, वैज्ञानिक ‘ई’ और टीम लीड एश्योरेंस श्री आशुतोष बहुगुणा, सीईआरटी-इन, प्रबंध निदेशक श्री शशि धरन, भारत प्रदर्शनी, और वैज्ञानिक ‘डी’ श्री अभिषेक सोलंकी उपस्थित हुए।

अपने उद्घाटन भाषण में, गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने कहा कि गोवा पारंपरिक रूप से अपने “सूरज, रेत और समुद्र” के लिए जाना जाता है, लेकिन राज्य अब साइबर सुरक्षा के केंद्र के रूप में भी उभर रहा है। उन्होंने कहा कि देश और विदेश से प्रतिनिधि न केवल गोवा की प्राकृतिक सुंदरता का अनुभव करने के लिए, बल्कि भारत के डिजिटल भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सार्थक विचार-विमर्श में शामिल होने के लिए भी एकत्र हुए थे। उन्होंने राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा तैयारियों का मार्गदर्शन करने में भारत की नोडल साइबर सुरक्षा एजेंसी के रूप में सीईआरटी-इन द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया।

अपने मुख्य भाषण में, सीईआरटी-इन के वरिष्ठ निदेशक श्री सरमा ने इस आयोजन के महत्व को रेखांकित किया और उभरते साइबर खतरों से निपटने में सहयोग के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संवाद 2026 ऑडिटिंग संगठनों को अपनी प्रथाओं को उन्नत करने, ज्ञान का आदान-प्रदान करने और सामूहिक रूप से अधिक साइबर-सुगम भारत के निर्माण में योगदान करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है।

बीआईटीएस पिलानी, केके बिरला गोवा कैंपस के निदेशक प्रोफेसर सुमन कुंडू ने भारतीय संगठनों के सामने उभरते साइबर खतरों के बारे में बात की और डिजिटल बुनियादी ढांचे, महत्वपूर्ण प्रणालियों और संवेदनशील डेटा की सुरक्षा के लिए साइबर सुरक्षा ऑडिट को मजबूत करने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया। सीईआरटी-इन के कदम की प्रशंसा की, उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह सम्मेलन सूचना सुरक्षा ऑडिटिंग संगठनों को अपनी क्षमताओं को बढ़ाने और ऑडिट मानकों को बेहतर बनाने में मदद करेगा।

गोवा इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड की मुख्य कार्यकारी अधिकारी और कार्यकारी निदेशक सुश्री रेवती कुमार ने एक विशेष संबोधन दिया, जिसमें उन्होंने गोवा सरकार द्वारा शुरू की गई पहलों पर प्रकाश डाला और राज्य की साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सीईआरटी-इन के साथ सहयोग हेतु एक दूरदर्शी रोडमैप की रूपरेखा प्रस्तुत की।

इस कार्यक्रम में साइबर सुरक्षा क्षेत्र में कई ऐतिहासिक विकास हुए। इनमें एएमबीएके (ऑडिट मॉनिटरिंग, बेंचमार्किंग, एनालिसिस और काइनेटिक इंटरवेंशन) का शुभारंभ और उभरते डोमेन पर कार्य समूहों द्वारा प्रगति रिपोर्ट जारी करना शामिल था। इसके अतिरिक्त, सीईआरटी-इन ने बीआईआर और नाबार्ड के सहयोग से ग्रामीण वित्तीय संस्थानों (आरएफआई) के लिए एक उन्नत साइबर सुरक्षा प्रमाणन पाठ्यक्रम शुरू किया, जो कौशल विकास, संस्थागत क्षमता निर्माण और जमीनी स्तर पर सक्षमता के लिए एक मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

इस कार्यक्रम का एक मुख्य आकर्षण श्री एस.एस. शर्मा द्वारा संचालित भविष्य का ऑडिट: अगली पीढ़ी के साइबर सुरक्षा ऑडिट के माध्यम से उभरती प्रौद्योगिकियों को सुरक्षित करना” विषय पर पैनल चर्चा थी। इस पैनल में भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई), सैटकॉम इंडस्ट्री एसोसिएशन ऑफ इंडिया, सीआरआईएस, बीएसई लिमिटेड और एयरटेल पेमेंट्स बैंक के प्रतिष्ठित प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सम्मेलन के दौरान वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों और उद्योग जगत के अग्रणी विशेषज्ञों ने भी कई ज्ञानवर्धक सत्र प्रस्तुत किए।

तीन दिवसीय कार्यक्रम में समानांतर प्रबंधन और तकनीकी ट्रैक शामिल थे, जिसमें 200 से अधिक प्रस्तुतियों में से 87 से अधिक प्रस्तुतियों का चयन किया गया था, जो अत्याधुनिक साइबर सुरक्षा ऑडिट प्रथाओं का प्रतिनिधित्व करते थे। इनमें शामिल विषयों में यूएवी और उपग्रहों जैसी अंतरिक्ष संपत्तियों की साइबर सुरक्षा; स्वचालित ऑडिट के लिए उभरते उपकरण; आईओटी सहित अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों को सुरक्षित करना, उन्नत साइबर क्षमताओं के साथ उभरते फ्रंटियर एआई मॉडल, ब्लॉकचेन और क्वांटम संचार और पोस्ट क्वांटम क्रिप्टोग्राफी (पीक्यूसी) जैसे एआई संचालित साइबर जोखिम; एसबीओएम, सीबीओएम, क्यूबीओएम और एचबीओएम कार्यान्वयन; एआई संचालित रेड टीमिंग के तरीके; आपूर्ति श्रृंखला ऑडिट; और क्लाउड सिस्टम, एपीआई और परिचालन प्रौद्योगिकी जैसे जटिल वातावरण के ऑडिट के लिए अभिनव दृष्टिकोण।

प्रतिभागियों ने साइबर सुरक्षा ऑडिट के भविष्य को आकार देने वाले नवीनतम रुझानों, उपकरणों और कार्यप्रणालियों की गहन जानकारी प्राप्त की। मुख्य चर्चा में उभरते स्वचालन उपकरण, रणनीतिक जोखिम प्रबंधन, ऑडिट फ्रेमवर्क और जटिल डिजिटल वातावरण के आकलन के लिए समान दृष्टिकोण शामिल थे। प्रतिनिधियों ने साइबर सुरक्षा ऑडिट की तैयारी को मजबूत करने के लिए व्यावहारिक रणनीतियों के साथ प्रस्थान किया, जिसमें सक्रिय जोखिम मूल्यांकन, आसान परीक्षण, प्रक्रिया स्वचालन और अनुपालन सुदृढ़ीकरण पर विशेष बल दिया

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के 80वें सर्वे में भारत की स्वास्थ्य प्रणाली में बदलाव और प्रगति उजागर

दिल्ली/सत्ता संदेश

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के 80वें दौर के घरेलू उपभोग: स्वास्थ्य सर्वेक्षण के निष्कर्ष देश भर में स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच में महत्वपूर्ण वृद्धि को उजागर करते हैं, जो लक्षित सरकारी हस्तक्षेपों, सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और बीमा कवरेज में वृद्धि द्वारा समर्थित है।
देश भर के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों को कवर करते हुए, सर्वेक्षण में 1,39,732 परिवारों का सर्वेक्षण किया गया – जिनमें ग्रामीण क्षेत्रों में 76,296 और शहरी क्षेत्रों में 63,436 परिवार शामिल थे – जिससे स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच, सामर्थ्य और उपयोग के पैटर्न में ठोस, जमीनी स्तर की अंतर्दृष्टि प्राप्त हुई।
एनएसओ के 80वें दौर के निष्कर्ष सरकार द्वारा स्वास्थ्य क्षेत्र में वर्षों से किए जा रहे सार्वजनिक निवेश में निरंतर वृद्धि पर आधारित हैं। बजट आवंटन में वृद्धि से प्राथमिक, माध्यमिक और तृतीयक स्तरों पर स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना का महत्वपूर्ण विस्तार हुआ है, मानव संसाधन मजबूत हुए हैं और निवारक, प्रोत्साहक और उपचारात्मक देखभाल पर केंद्रित प्रमुख पहलों को बढ़ावा मिला है। सार्वजनिक व्यय में स्वास्थ्य को दी जाने वाली यह निरंतर प्राथमिकता देश भर में परिवारों पर स्वास्थ्य सेवाओं के वित्तीय बोझ को कम करने, सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने और वितरण में सुधार लाने में महत्वपूर्ण रही है।
वर्ष 2025 में प्रति अस्पताल में भर्ती होने पर औसत चिकित्सा व्यय 11,285 रुपये दर्ज किया गया है, जो दर्शाता है कि देश में आधे से अधिक अस्पताल में भर्ती होने के मामलों में अपेक्षाकृत कम खर्च होता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि केवल कुछ ही मामलों में अधिक खर्च के कारण औसत में वृद्धि देखी गई है। इससे पता चलता है कि अधिक खर्च व्यापक नहीं है, बल्कि विशेष उपचार की आवश्यकता वाले विशिष्ट मामलों तक ही सीमित है। इसके अलावा, सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में भर्ती होने वाले आधे से अधिक मामलों में ओओपीई केवल 1,100 रुपये है। सरकार की 2015 में शुरू की गई मुफ्त दवा सेवा पहल और मुफ्त निदान पहल ने देश के सबसे दूरस्थ क्षेत्रों में भी लोगों को मुफ्त दवाएं और निदान सेवाएं उपलब्ध कराई हैं। प्राथमिक एवं आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं की सुलभता में आए इस महत्वपूर्ण बदलाव में देश भर में स्थित 1.84 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का भी योगदान है।
आयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और विभिन्न राज्य योजनाओं सहित सरकार द्वारा वित्तपोषित स्वास्थ्य बीमा कवरेज के तेजी से विस्तार के साथ वित्तीय जोखिम सुरक्षा में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। देश में इन सरकारी स्वास्थ्य वित्तपोषित/बीमा योजनाओं के अंतर्गत आने वाली जनसंख्या का प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों में 12.9 प्रतिशत से बढ़कर 45.5 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 8.9 प्रतिशत से बढ़कर 31.8 प्रतिशत हो गया है, जो तीन गुना से अधिक की वृद्धि दर्शाता है। यह स्वास्थ्य संबंधी भारी खर्चों से कमजोर आबादी की सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवा तक समान पहुंच को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
सर्वेक्षण में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य परिणामों में निरंतर प्रगति को भी दर्शाया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में संस्थागत प्रसव 2017-18 में 90.5 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 95.6 प्रतिशत हो गए हैं, जबकि शहरी क्षेत्रों में इसी अवधि में यह 96.1 प्रतिशत से बढ़कर 97.8 प्रतिशत हो गए हैं। यह सरकार द्वारा गुणवत्ता आश्वासन, जननी सुरक्षा योजना, जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम, प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान जैसी योजनाओं के माध्यम से सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा देने और गुणवत्तापूर्ण मातृ स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को मजबूत करने के निरंतर प्रयासों को दर्शाता है। सर्वेक्षण में यह भी बताया गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग दो-तिहाई (66.8 प्रतिशत) प्रसव सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में होते हैं, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 47 प्रतिशत (लगभग आधा) है।

स्व-गणना का अंतिम दिन 30 अप्रैल को*

चंडीगढ़ /सत्ता संदेश

*हरियाणा में वास्तविक आवास सूचीकरण व जनगणना अभियान 1 मई से होगा शुरू*

चंडीगढ़, 29 अप्रैल, 2026: गृह मंत्रालय, हरियाणा के जनगणना संचालन निदेशक डॉ. ललित जैन ने हरियाणा के सभी निवासियों से अपील की है कि वे 30 अप्रैल को स्व-गणना पूर्ण करें, क्योंकि यह इस सुविधा का अंतिम दिन है। उन्होंने सूचित किया कि हरियाणा में 2.45 लाख से अधिक घरों ने पहले ही स्व-गणना पूरी कर ली है, जो नया रिकॉर्ड स्थापित करता है व राज्य भर में मजबूत जन भागीदारी व जागरूकता को दर्शाता है। विशेष रूप से, युवाओं में स्व-गणना हेतु उल्लेखनीय उत्साह देखा गया।

स्व-गणना एक सरल प्रक्रिया है व http://se.census.gov.in पोर्टल पर जाकर 5–7 मिनट में पूर्ण की जा सकती है। पूर्ण होने पर नागरिकों को एक विलक्षण आईडी नंबर प्राप्त होगा, जिसे फील्ड विजिट के दौरान गणक के साथ साझा करना अनिवार्य है।

डॉ. जैन ने बताया कि वास्तविक आवास सूचीकरण व जनगणना अभियान हरियाणा भर में 1 मई, 2026 से प्रारंभ होगा। उन्होंने आम जनता से अपने क्षेत्रों में आने वाले सभी गणकों व पर्यवेक्षकों को पूर्ण सहयोग देने व सही, सटीक व अपडेटिड जानकारी प्रदान करने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि नागरिकों द्वारा दी गई सभी जानकारी पूर्ण गोपनीय रखी जाएगी व किसी व्यक्ति या संस्था के साथ साझा नहीं की जाएगी।

अभियान के महत्व पर जोर देते हुए डॉ. जैन ने कहा कि जनगणना राष्ट्रीय दायित्व है जिसके माध्यम से प्रत्येक नागरिक राष्ट्र के विकास, नीति निर्माण व संसाधनों के समान वितरण में योगदान देता है। उन्होंने आगे सूचित किया कि जनगणना अधिकारियों को आवश्यक जानकारी देने से इंकार या उनके साथ असहयोग जनगणना अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध है। उन्होंने सभी नागरिकों से इस राष्ट्रीय अभियान में सक्रिय भागीदारी करने व अपनी जनगणना के उचित रिकॉर्ड सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

डॉ. जैन ने राज्य के सभी जिला प्रशासनों के प्रति आभार व्यक्त किया, कहा कि प्रत्येक जिले ने जनगणना अभियान संचालन हेतु व्यापक व उत्कृष्ट तैयारियां की हैं। उन्होंने जोड़ा कि गणक व पर्यवेक्षक जनगणना प्रक्रिया के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ हैं व पूर्ण समर्पण व प्रतिबद्धता से कर्तव्य निभाने की अपेक्षा है। विभाग उनके पूर्ण समर्थन में खड़ा है। किसी कठिनाई हेतु नागरिक, गणक या पर्यवेक्षक अपने संबंधित पर्यवेक्षक या तहसीलदार से संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा, जनगणना विभाग का हेल्पलाइन नंबर 1855 भी उपलब्ध है, जहां हर शिकायत या समस्या पर उचित कार्रवाई की जाएगी।