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PUNJAB TOP-10 NEWS, चुटकियों में पढ़े बड़ी दिन भर की खबरें…23-04-2026

पंजाब डेस्क: आज राज्य में राजनीतिक सरगर्मियों से लेकर सुरक्षा और जन-समस्याओं तक कई अहम घटनाक्रम हुए हैं। भाजपा ने गठबंधन की अटकलों को खत्म करते हुए अकेले चुनाव लड़ने का मन बनाया है, वहीं लुधियाना और चंडीगढ़ से कुछ चिंताजनक खबरें भी सामने आई हैं। आइए, विस्तार से जानते हैं आज की बड़ी खबरें।

1. पंजाब चुनाव में भाजपा किसी से गठबंधन नहीं करेगी: पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 के लिए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने शिरोमणि अकाली दल (SAD) के साथ गठबंधन की सभी अटकलों को खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा पंजाब में अकेले चुनाव लड़ेगी और नए स्वरूप में मैदान में उतरेगी। नबीन के अनुसार, पार्टी का संगठन चुनाव को ध्यान में रखकर पूरी तरह तैयार है और इसमें किसी का सहयोग नहीं लिया जाएगा।

2. सांसद अमृतपाल सिंह 2 दिन के पुलिस रिमांड पर: खडूर साहिब के सांसद अमृतपाल सिंह को अजनाला कोर्ट ने 2 दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत नजरबंदी 22 अप्रैल को समाप्त हो गई थी, जिसके बाद अजनाला थाने में घुसने और पुलिस के साथ झड़प से जुड़े पुराने मामलों में कार्रवाई तेज कर दी गई है।

3. स्कूलों और रेलवे ट्रैक को उड़ाने की धमकी: लुधियाना के तीन स्कूलों और रेलवे ट्रैक को बम से उड़ाने का धमकी भरा ईमेल मिला है। स्प्रिंग डेल, डीएवी और मानव रचना स्कूलों में सुबह ईमेल मिलने के बाद तुरंत छुट्टी कर दी गई। पुलिस और बम स्क्वायड की टीमों ने गहन सर्च ऑपरेशन चलाया है, हालांकि स्कूल प्रशासन और अभिभावकों में काफी डर का माहौल है।

4. चंडीगढ़ में ‘जॉम्बी ड्रग’ का खौफ: चंडीगढ़ में एक युवक सड़क किनारे एक घंटे तक बिना किसी हलचल के स्टैच्यू बनकर बैठा रहा, जिसे ‘जॉम्बी ड्रग’ (जाइलेजीन) के असर से जोड़कर देखा जा रहा है। यह नशा इंसान के सेंट्रल नर्वस सिस्टम को सुन्न कर देता है जिससे शरीर की जागरूकता खत्म हो जाती है। शहर में इस तरह के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं।

5. भीषण गर्मी में बिजली के लंबे कट: पावरकॉम ने लुधियाना, जालंधर और अमृतसर सहित कई जिलों में 3 से 10 घंटे के लंबे बिजली कट लगाने का शेड्यूल जारी किया है। विभाग इसे सालाना मेंटेनेंस का हिस्सा बता रहा है, लेकिन भीषण गर्मी और हीटवेव के बीच इन लंबे शटडाउन से आम जनता में भारी गुस्सा है।

6. 3 साल की मासूम बच्ची आग में झुलसी: लुधियाना में एक 3 साल की बच्ची माचिस से खेलते समय खुद को आग लगा बैठी और 60% तक झुलस गई। बच्ची की नायलॉन की फ्रॉक ने तुरंत आग पकड़ ली थी। पिता ने उसे बचाने की कोशिश की जिसमें उनके हाथ भी झुलस गए, बच्ची का इलाज सिविल अस्पताल में चल रहा है।

7. NRIs के लिए OCI कार्ड के नियमों में ढील: भारत सरकार ने ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (OCI) कार्ड के नियमों में बदलाव किया है, जिससे अब NRI भारत पहुँचते ही तुरंत इसके लिए आवेदन कर सकेंगे। अब उन्हें 6 महीने तक भारत में रुकने की आवश्यकता नहीं होगी। हालांकि, विदेशी मूल के पति/पत्नी के लिए नियमों को पहले से सख्त कर दिया गया है।

8. बहू से तंग आकर सास ने की आत्महत्या: अबोहर में एक महिला ने नहर में कूदकर जान दे दी और अपनी मौत का जिम्मेदार अपनी बड़ी बहू को ठहराया है। आत्महत्या से पहले महिला ने एक ऑडियो रिकॉर्ड कर बहू को भेजा था, जिसमें उसने परिवार में होने वाले क्लेश का जिक्र किया था।

9. चंडीगढ़ में जज सस्पेंड, वीडियो वायरल होने पर कार्रवाई: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ में तैनात एक जज को आपत्तिजनक वीडियो वायरल होने के बाद सस्पेंड कर दिया है। जज को रोहतक ट्रांसफर किया गया है। हालांकि जज का दावा है कि वीडियो मॉर्फ्ड है और उन्हें 1.5 करोड़ रुपये के लिए ब्लैमेल किया जा रहा था।

10. दामाद ने ससुर का घर फूँका: लुधियाना में एक व्यक्ति ने पुरानी रंजिश के चलते अपने ससुर के घर में डीजल छिड़ककर आग लगा दी। इस घटना में घर का कीमती सामान जल गया। पुलिस ने आरोपी दामाद को गिरफ्तार कर लिया है और डीजल की केनी भी बरामद कर ली है।

उत्तराखंड के टिहरी में दर्दनाक हादसा: 300 मीटर गहरी खाई में गिरा वाहन, 8 लोगों की मौत

नेशनल डेस्क : उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहाँ गुरुवार को नैल-कोटी कॉलोनी मार्ग पर एक वाहन अनियंत्रित होकर लगभग 300 मीटर गहरी खाई में गिर गया। इस भीषण सड़क हादसे में 8 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 2 लोग गंभीर रूप से घायल हैं। हादसे का शिकार हुए सभी लोग घनसाली क्षेत्र के थ्योलधार गांव के रहने वाले थे। बताया जा रहा है कि ये सभी लोग हरिद्वार में एक अंतिम संस्कार में शामिल होने के बाद अपने गांव वापस लौट रहे थे। घटना की जानकारी मिलते ही एसडीआरएफ (SDRF), पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और राहत अभियान शुरू किया।

घायलों को तत्काल डीएच बौरारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनकी स्थिति नाजुक बनी हुई है। टिहरी की डीएम नितिका खंडेलवाल के अनुसार, प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि चालक को नींद आने के कारण वाहन पर से नियंत्रण खो गया और यह दुर्घटना हुई। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से दिवंगतों की आत्मा की शांति की प्रार्थना की और जिला प्रशासन को घायलों के बेहतर इलाज के लिए उचित निर्देश दिए हैं।Uttarakhand News, Tehri Garhwal, Road Accident, Chamba-Koti Road,

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: 84 जजों के तबादले; विशेष एनआरआई और एनआईए अदालतें गठित

चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 84 जजों के तबादले और नई नियुक्तियों के आदेश जारी किए हैं। इन आदेशों के तहत पंजाब के 38 और हरियाणा के 46 जजों को स्थानांतरित किया गया है।

मुख्य तबादले और नियुक्तियां:

•निर्भय सिंह गिल को जालंधर से स्थानांतरित कर फतेहगढ़ साहिब में तैनात किया गया है।

•हरिंदर सिद्धू का तबादला पटियाला से चंडीगढ़ किया गया है।

•श्री तरनतारन सिंह बिंद्रा को फाजिल्का से रूपनगर भेजा गया है।

•जितेंद्र पाल सिंह को पठानकोट से एसबीएस नगर नियुक्त किया गया है।

विशेष अदालतों का गठन

इस आदेश की एक प्रमुख विशेषता नए न्यायालयों की स्थापना है। प्रशासनिक सुधारों के तहत नवनिर्मित स्पेशल एनआरआई कोर्ट (Special NRI Court) में श्री हरीश आनंद, श्री जसविंदर सिंह-I, सुश्री रश्मि कपिला और डॉ. मनदीप मित्तल को तैनात किया गया है। इसके अतिरिक्त, मोहाली (एस.ए.एस. नगर) में एनआईए (NIA Act) मामलों की सुनवाई के लिए श्री हरदीप सिंह को विशेष अदालत का प्रभार सौंपा गया है। हाई कोर्ट के अनुसार, ये नियुक्तियां और तबादले मुख्य रूप से प्रशासनिक आवश्यकताओं और रिक्त पदों को भरने के उद्देश्य से किए गए हैं।

बंगाल और तमिलनाडु चुनाव: पहले चरण में मतदाताओं ने रचा इतिहास; 91.78 फीसदी मतदान के साथ टूटा रिकॉर्ड

नेशनल डेस्क : पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव के पहले चरण के दौरान मतदाताओं में भारी उत्साह देखने को मिला, जिससे मतदान के पिछले सारे रिकॉर्ड टूट गए हैं। पश्चिम बंगाल की 152 सीटों पर पहले चरण में रिकॉर्ड 91.78 फीसदी मतदान दर्ज किया गया है। वहीं, तमिलनाडु की सभी 234 सीटों पर एक ही चरण में मतदान संपन्न हुआ, जहाँ 84.35 प्रतिशत वोटिंग हुई है, जो 1952 के बाद से अब तक का सबसे अधिक मतदान है।

बंगाल में पिछले चुनावों के मुकाबले भारी वोटिंग :बंगाल में इस बार का मतदान प्रतिशत पिछले कई वर्षों के मुकाबले कहीं अधिक रहा। आंकड़ों के अनुसार, 2011 में 84%, 2016 में 82.66% और 2021 में 81.56% मतदान हुआ था। इस बार दक्षिण दिनाजपुर में सबसे ज्यादा 93 फीसदी से अधिक मतदान हुआ। इसके अलावा कूच बिहार (92%+), जलपाईगुड़ी (91%+) और उत्तर दिनाजपुर (90%+) जैसे जिलों में भी बंपर वोटिंग दर्ज की गई।

हिंसक झड़पें और EVM में गड़बड़ी के आरोप :रिकॉर्ड तोड़ मतदान के बीच बंगाल के कई हिस्सों से हिंसा की खबरें भी सामने आईं। बीरभूम के खैराशोल में भारी अशांति और केंद्रीय सुरक्षा बलों के साथ मारपीट की घटनाएं दर्ज की गईं। इसके अलावा, दुबराजपुर के बुधपुर गांव (बूथ नंबर 65) में ग्रामीणों ने EVM में गड़बड़ी का आरोप लगाया। उनका दावा था कि TMC उम्मीदवार का बटन दबाने पर वोट BJP उम्मीदवार के खाते में जा रहा था, जिसके विरोध में लोगों ने प्रदर्शन भी किया।

राजनीतिक दिग्गजों के दावे: भारी मतदान के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्वास जताया कि पहले चरण की वोटिंग BJP की प्रचंड जीत का संकेत दे रही है। वहीं, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दावा किया है कि राज्य में एक बार फिर TMC की ही सरकार बनेगी। इसी बीच, बंगाल BJP के नेता सुवेंदु अधिकारी ने 2021 की एक पुरानी घटना का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने ‘बदला’ ले लिया है और राज्य में बदलाव की लहर साफ दिख रही है।

अगला चरण और नतीजों की तारीख: तमिलनाडु में मतदान संपन्न होने के साथ ही अब बंगाल में दूसरे चरण के लिए 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे, जिसमें 1448 उम्मीदवार मैदान में होंगे। सभी चरणों के बाद वोटों की गिनती 4 मई को सुबह 8 बजे शुरू की जाएगी।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय 24 से 26 अप्रैल, 2026 तक चंडीगढ़ में “अंत्योदय का संकल्प, अमृत काल का प्रतिबिंब- विकसित भारत के संकल्प के साथ” विषय-वस्‍तु पर राष्ट्रीय चिंतन शिविर का आयोजन करेगा

चंडीगढ़/ सत्ता संदेश

केंद्र और राज्य सरकारें तीन दिवसीय शिविर में सामाजिक न्याय व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर विचार-विमर्श करेंगी

केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार राज्य मंत्रियों की उपस्थिति में चिंतन शिविर की अध्यक्षता करेंगे

शिविर में समावेश पोर्टल, एनएमबीए 2.0, सेतु और स्‍माइल ऐप्स सहित कई प्रमुख ऐप्स लॉन्च किए जाएंगे
चंडीगढ़, 23 अप्रैल, 2026: सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर 24 से 26 अप्रैल, 2026 तक चंडीगढ़ में “अंत्योदय का संकल्प, अमृत काल का प्रतिबिंब– विकसित भारत @2047” विषय-वस्‍तु पर तीन दिवसीय चिंतन शिविर का आयोजन करेगा। यह विषय-वस्‍तु अमृत काल और विकसित भारत के विजन के अनुरूप समावेशी सशक्तिकरण के प्रति मंत्रालय की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

इस शिविर का उद्देश्य सामाजिक न्याय संबंधी पहलों के क्रियान्वयन को सुदृढ़ करना, प्रमुख योजनाओं के अंतिम चरण कार्यान्वयन में सुधार करना और हाशिए पर पड़े समुदायों के समावेशी और सतत सशक्तिकरण के लिए एक व्यावहारिक रूप-रेखा विकसित करना है।

उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार करेंगे। इस अवसर पर राज्य मंत्री श्री बी.एल. वर्मा और श्री रामदास अठावले भी उपस्थित रहेंगे। इस कार्यक्रम में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मंत्रियों तथा अधिकारियों के साथ-साथ सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग और दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के सचिव और वरिष्ठ अधिकारी भी भाग लेंगे।

कार्यक्रम का शुभारंभ मंत्रालय की प्रमुख योजनाओं की प्रदर्शनी से होगा। इस अवसर पर, समावेश पोर्टल, एनएमबीए 2.0 ऐप, सेतु ऐप और स्‍माइल ऐप सहित कई महत्वपूर्ण डिजिटल और नीतिगत पहलों का शुभारंभ किया जाएगा। मनोभ्रंश (डिमेंशिया) देखभाल गृहों के लिए न्यूनतम मानकों और भिक्षुक गृहों के लिए आदर्श दिशानिर्देशों पर एक पुस्तक का भी विमोचन किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा संस्थान और विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों के बीच समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।

तीन दिनों तक चलने वाले चिंतन शिविर में संरचित विषयगत चर्चाएं और समूह सत्र आयोजित किए जाएंगे। समूह सत्रों में प्रमुख विषयगत क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। 25 अप्रैल को छात्रवृत्ति वितरण और शिक्षा तक पहुंच, नशा मुक्त भारत इकोसिस्‍टम, स्वच्छता कार्य में गरिमा और मिशन ज़ीरो के तहत स्वच्छता संबंधी मौतों, वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल और विकलांग बच्चों के लिए प्रारंभिक युक्ति जैसे विषयों पर चर्चा होगी। 26 अप्रैल को क्षेत्र आधारित सामाजिक-आर्थिक विकास, हाशिए पर पड़े समुदायों का समावेशन और पहचान, ऋण तक पहुंच और वित्तीय सशक्तिकरण, दिव्‍यांगजनों के लिए सुलभता और प्रमाणन जैसे विषयों पर सत्र आयोजित किए जाएंगे।

प्रत्येक समूह कार्यान्वयन की वर्तमान स्थिति का आकलन करेगा, कमियों की पहचान करेगा और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों तथा नवोन्‍मेषी समाधानों को साझा करेगा। समूह निर्धारित समयसीमाओं के साथ अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक अनुशंसाएं प्रस्तुत करेंगे। यह सुनिश्चित करने के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया तैयार की गई है ताकि चर्चाएं संरचित, साक्ष्य-आधारित और परिणाम-उन्मुख रहें।

चिंतन शिविर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए सफल मॉडलों के आदान-प्रदान और समन्वय को सुदृढ़ करने के लिए एक सहयोगी मंच के रूप में कार्य करेगा। इससे प्राप्त परिणामों से सामाजिक न्याय कार्यक्रमों में संयोजन, डिजिटल नवोन्‍मेषण और बेहतर शासन पर केंद्रित व्यावहारिक सुधार एजेंडा में योगदान मिलने की उम्मीद है।

इन विचार-विमर्शों के परिणामस्वरूप बेहतर समन्वय, सामुदायिक भागीदारी और प्रौद्योगिकी-आधारित कार्यान्वयन के माध्यम से भारत के सामाजिक न्याय ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार होगा। समापन दिवस पर एक प्रेस वार्ता आयोजित की जाएगी जिसमें प्रमुख परिणामों और भविष्‍य की रणनीति को साझा किया जाएगा।

यंत्र की चमक बताएगी शरीर में निकोटिन की मात्रा

*लेखक: राजेश चंद्र बाली

भारत सरकार के नैनो विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान (इंस्ट), मोहाली ने एक नई सामग्री विकसित की है जो फ्लोरोमेट्रिक सेंसिंग के माध्यम से मानव शरीर में निकोटिन और कोटिनिन की मात्रा का पता लगा सकती है। फ्लोरोमेट्रिक सेंसिंग एक ऐसी तकनीक है जो फ्लोरोसेंट उत्सर्जन का उपयोग करके विभिन्न मापदंडों को मापती है।

वर्तमान मामले में, यह सामग्री, जो एक सेंसर के रूप में कार्य करती है, निकोटीन या कोटीनिन के संपर्क में आने पर तेजी से चमकने लगती है, जिससे स्वास्थ्य क्षेत्र में तंबाकू के संपर्क का शीघ्र पता लगाने और समय पर कार्रवाई करने में यह उपयोगी सिद्ध हो सकती है। आमतौर पर इस सामग्री की चमक बहुत कम होती है, लेकिन जब यह सेंसर इन हानिकारक रसायनों के संपर्क में आता है, तो इसकी चमक अत्यधिक तीव्र हो जाती है। इससे अनुसंधान मौजूदा तरीकों की तुलना में काफी आसान और त्वरित हो जाता है। नई तकनीक से, छोटी से छोटी मात्रा की भी तेजी और सटीकता से पहचान की जा सकती है, जो स्वास्थ्य सेवाओं और अनुसंधान के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है।

यह सामग्री एक लौह-आधारित धातु-जैविक फ्रेमवर्क (एफई-एमओएफ) है, जिसका सामान्य अर्थ है कि यह लोहे और जैविक अणुओं से बनी एक बहुत ही सूक्ष्म संरचना है। यह संरचना मानव बाल से हजारों गुना छोटी होती है और इसमें बहुत छोटे छिद्र होते हैं जो अन्य अणुओं को फंसाने और उनके साथ क्रिया करने की क्षमता रखते हैं।

आईएनएसटी (इंस्टीट्यूट ऑफ नैनो साइंस एंड टेक्नोलॉजी) की वैज्ञानिक मोनिका सिंह ने अपनी शोध छात्रा अर्शमिंदर कौर के साथ मिलकर इस तकनीक को विकसित किया है। उन्होंने कहा कि यह अभी इन विट्रो चरण में है, लेकिन जैविक प्रणालियों में उपयोग के लिए सुरक्षित पाया गया है। प्रयोगों में यह साबित हुआ कि यह जैव-अनुकूल है, जिसका अर्थ है कि यह जीवित कोशिकाओं को नुकसान नहीं पहुंचाता है। यह एक बड़ी उपलब्धि है क्योंकि इससे कोशिका स्तर पर वास्तविक समय की निगरानी संभव हो पाती है। उन्होंने कहा कि लंबे समय में, इस तकनीक का उपयोग रक्त के नमूनों के माध्यम से शरीर में निकोटीन और कोटिनिन की प्रतिशत मात्रा का पता लगाने के लिए भी किया जा सकेगा।

इस मैटीरियल का एक और महत्वपूर्ण लाभ यह है कि यह पानी में और विभिन्न परिस्थितियों में भी प्रभावी ढंग से कार्य करता है। यह शरीर में मौजूद अन्य सामान्य पदार्थों से प्रभावित नहीं होता है, जिससे यह सटीक परिणाम देता है। अनेक बार उपयोग करने के बाद भी यह मैटीरियल प्रभावी तरीके से काम करता रहता है, जिससे यह पुन: प्रयोज्य और लागत-प्रभावी बन जाता है।

यह शोध विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पहली बार इस तरह की सामग्री का उपयोग कोटिनिन की व्यापक फ्लोरोसेंस के माध्यम से पहचान के लिए किया गया है। यह साधारण परीक्षण किटों के विकास के लिए नई संभावनाएँ खोलता है, जो धूम्रपान करने वालों के लिए और दूसरे हाथ के धुएँ के संपर्क की निगरानी के लिए लाभदायक हो सकती हैं।

वैज्ञानिकों का मानना ​​है कि भविष्य में यह तकनीक डॉक्टरों, शोधकर्ताओं और स्वास्थ्य कर्मचारियों को तंबाकू के संपर्क का तेजी से पता लगाने तथा समय पर कार्रवाई करने में मदद करेगी। यह जन स्वास्थ्य अभियानों को भी समर्थन दे सकती है क्योंकि यह आसान और किफ़ायती परीक्षण विधियाँ प्रदान कर सकती है। कुल मिलाकर, यह नवीनतम सामग्री बेहतर स्वास्थ्य निगरानी और धूम्रपान-मुक्त समाज की ओर एक आशाजनक कदम है, क्योंकि हर साल दुनिया भर में लाखों लोग तंबाकू जनित बीमारियों के कारण अपनी जान गंवा देते हैं।

*(लेखक भारतीय सूचना सेवा अधिकारी हैं और वर्तमान में आकाशवाणी, जालंधर में सहायक निदेशक, समाचार-सह-क्षेत्रीय समाचार प्रमुख के रूप में तैनात हैं।)

कैप्शन: प्रोजेक्ट पर कार्यरत शोध छात्रा अर्शमिंदर कौर।

पंचायत से संसद तक: नारी नेतृत्व, डिजिटल सुशासन और विकसित

                   प्रो. एस. पी. सिंह बघेल

जब कोई राष्ट्र अपनी जड़ों को सींचता है, तो उसकी शाखाएं आसमान छूती हैं। भारत की वे जड़ें उसकी पंचायतें हैं और उन पंचायतों की आत्मा आज उसकी महिलाएं हैं। 24 अप्रैल 1993 को 73वें संविधान संशोधन के माध्यम से जब गांवों की सरकार को संवैधानिक मान्यता मिली, तो भारतीय लोकतंत्र ने एक नया अध्याय लिखा। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में पंचायती राज को नई ऊर्जा और दिशा मिली है। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि सत्ता केवल दिल्ली के गलियारों तक सीमित न रहे, बल्कि देश के अंतिम गांव की दहलीज़ तक पहुंचे। ‘विकसित भारत 2047’ का विजन 2.5 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों की मजबूत नींव पर आधारित है, जो देश की लगभग 64 प्रतिशत जनसंख्या की जीवनरेखा हैं।

लोकतंत्र की पाठशाला: नारी नेतृत्व का उदय

राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस 2026 एक विशेष गौरव के साथ मनाया जा रहा है। नारी शक्ति वंदन सम्मेलन में माननीय प्रधानमंत्री जी ने पंचायती राज संस्थाओं को देश में महिला नेतृत्व की सबसे बड़ी पाठशाला बताया – यह उस वास्तविकता की स्वीकृति थी जो आज ग्रामीण भारत में प्रतिदिन घटित हो रही है।

देशभर में पंचायती राज संस्थाओं में निर्वाचित प्रतिनिधियों की कुल संख्या 32 लाख से अधिक है। वर्तमान में उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार, 24,41,781 निर्वाचित प्रतिनिधियों में से 12,14,885 महिलाएँ हैं, जो कुल का लगभग 49.75 प्रतिशत हैं। 21 राज्यों तथा 2 केन्द्र शासित प्रदेशों ने पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत तक आरक्षण लागू किया है। पिछले चार वर्षों में संचयी रूप से 33.50 लाख महिला प्रतिनिधियों को नेतृत्व एवं सुशासन पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया है – और 2025-26 में ही 9.37 लाख महिला प्रतिनिधियों को प्रशिक्षित किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 47.7 प्रतिशत की वृद्धि है।

सशक्त पंचायत नेत्री अभियान और नारी शक्ति वंदन अधिनियम

‘सशक्त पंचायत नेत्री अभियान’ महिला निर्वाचित प्रतिनिधियों को उनकी संवैधानिक जिम्मेदारियों, अधिकारों और नेतृत्व क्षमताओं के प्रति सजग और सक्षम बनाता है। ‘महिला-हितैषी ग्राम पंचायत’ और ‘निर्भय रहो’ जैसी पहलें महिलाओं को जमीनी लोकतंत्र में सुरक्षित और सशक्त भागीदारी के लिए प्रेरित कर रही हैं। ‘निर्भय रहो’ निर्भया फंड के अंतर्गत संचालित है और यह कानूनी जागरूकता, सामाजिक संवेदनशीलता एवं तकनीकी सशक्तिकरण को एकीकृत करते हुए ग्रामीण शासन में महिलाओं और बालिकाओं के लिए अनुकूल वातावरण निर्मित कर रही है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम – लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान करते हुए – भारतीय लोकतंत्र में उनकी भूमिका को स्थायी और सशक्त रूप से स्थापित करता है। पंचायतों की पाठशाला में तैयार महिला नेतृत्व ही विधानसभाओं और संसद में बदलाव की वाहक बनेगी।

सोलहवाँ वित्त आयोग: संसाधनों में अभूतपूर्व वृद्धि

वित्तीय सशक्तिकरण किसी भी संस्था की कार्यक्षमता की आत्मा होती है। 16वें वित्त आयोग ने 2026 से 2031 की अवधि के लिए ग्रामीण स्थानीय निकायों को 4.35 लाख करोड़ रुपये का ऐतिहासिक आवंटन किया है – जो 15वें वित्त आयोग की तुलना में 84 प्रतिशत अधिक है। वित्त वर्ष 2026-27 में ही 1.40 लाख करोड़ रुपये का अनुदान आवंटित है। यह वित्तीय सुदृढ़ता पंचायतों को केवल खर्च करने की क्षमता नहीं देती, बल्कि उन्हें विकास के एजेंडा को स्वयं निर्धारित करने का आत्मविश्वास भी प्रदान करती है। स्व-स्रोत राजस्व नीति और प्रदर्शन-आधारित अनुदान ने पंचायतों में जवाबदेही और प्रतिस्पर्धा – दोनों को एक साथ प्रोत्साहित किया है।

समावेशी और पारदर्शी शासन

‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ का मार्गदर्शक मंत्र पंचायती राज मंत्रालय के प्रत्येक कदम का आधार है। ई-ग्राम स्वराज मंच के माध्यम से देशभर की ग्राम पंचायतों ने 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक के ऑनलाइन भुगतान संसाधित किए हैं। सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली से एकीकृत यह मंच प्रत्येक लेनदेन को सीधे विक्रेताओं और सेवा प्रदाताओं तक वास्तविक समय में पहुंचाता है। 2.5 लाख से अधिक पंचायतों और 1.6 करोड़ वेंडर्स का इससे जुड़ना डिजिटल सुशासन की व्यापक स्वीकृति का प्रमाण है। वर्ष 2025-26 में 2.5 लाख से अधिक पंचायतों ने सतत् विकास लक्ष्यों को 9 थीम्स में विभाजित कर अपनी विकास योजनाएँ स्वयं तैयार कीं – ग्रामीण विकास को लक्ष्य-उन्मुख और परिणाम-केंद्रित बनाते हुए।

पेसा रैंकिंग: अनुसूचित क्षेत्रों में स्वशासन की नई पहल

पंचायती राज मंत्रालय ने पहली बार 25 जनवरी 2026 को वर्ष 2024–25 के लिए पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम, 1996 (पेसा) के अंतर्गत राज्यों के प्रदर्शन की राज्यवार रैंकिंग जारी की। इसका उद्देश्य स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना, पारदर्शिता और जवाबदेही को सुदृढ़ करना तथा अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा आधारित स्वशासन को मजबूत करना है।

इस रैंकिंग में महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और हिमाचल प्रदेश फ्रंट रनर श्रेणी में रहे; राजस्थान, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना परफॉर्मर श्रेणी में रखे गए हैं, जबकि आंध्र प्रदेश और गुजरात आकांक्षी श्रेणी में शामिल हैं। यह रैंकिंग दस पेसा राज्यों – आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान और तेलंगाना – की प्रगति, क्षमता और संभावनाओं को रेखांकित करती है। सहकारी संघवाद की भावना के अनुरूप, मंत्रालय पेसा के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्यों के साथ निरंतर समन्वय और सहयोग कर रहा है।

सभासार और एआई-सक्षम शासन: जनभाषा में जनतंत्र की आवाज

पंचायती राज मंत्रालय ने कृत्रिम मेधा को शासन के केंद्र में लाकर एक नई क्रांति का सूत्रपात किया है। 14 अगस्त 2025 को लॉन्च ‘सभासार’ अब 23 भारतीय भाषाओं में ग्राम सभा की कार्यवाही दर्ज करता है। 1,11,486 ग्राम पंचायतें इसका उपयोग कर चुकी हैं – भाषा अब भागीदारी के मार्ग में बाधा नहीं।

स्वामित्व योजना: संपत्ति अधिकारों से आर्थिक सशक्तिकरण

स्वामित्व योजना ने ड्रोन सर्वेक्षण के माध्यम से 3.30 लाख गांवों में सर्वे पूरा कर 3.13 करोड़ से अधिक संपत्ति कार्ड तैयार किए हैं। यह ग्रामीण परिवारों को बैंक ऋण और औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जोड़ रहा है, संपत्ति को आर्थिक संपदा में बदलने का अवसर दे रहा है, भूमि एवं संपत्ति से जुड़े विवादों को कम कर रहा है, और ग्राम पंचायतों के लिए एक स्थायी तथा पारदर्शी राजस्व स्रोत के रूप में उभर रहा है।

संस्थागत क्षमता निर्माण

राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान के अंतर्गत 2022-23 से अब तक संचयी रूप से 1.62 करोड़ से अधिक निर्वाचित प्रतिनिधियों और पदाधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया है – केवल 2025-26 में 45.24 लाख लोग प्रशिक्षित हुए। आईआईएम और आईआईटी के साथ साझेदारी में नेतृत्व विकास कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। ‘मेरी पंचायत, मेरा अधिकार’ अभियान के तहत 2.15 लाख पंचायतों ने 954 सेवाओं का सिटिजन चार्टर तैयार किया है।

विकसित भारत 2047: गांव से उठेगी नई सुबह

‘विकसित भारत 2047’ का लक्ष्य केवल आर्थिक विकास नहीं – यह सामाजिक न्याय, पर्यावरणीय संतुलन और समावेशी प्रगति का व्यापक दृष्टिकोण है। 21 राज्यों में 50 प्रतिशत महिला भागीदारी, 3 लाख करोड़ का डिजिटल लेनदेन, 23 भाषाओं में ग्राम सभा की आवाज, 16वें वित्त आयोग का ऐतिहासिक आवंटन और सशक्त पंचायत नेत्री अभियान – ये सब मिलकर विकसित भारत की नींव की ईंटें हैं। राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के इस अवसर पर देश की उन 14 लाख से अधिक महिला प्रतिनिधियों को सादर नमन, जो प्रतिदिन अपने गांव और देश को बेहतर बनाने में जुटी हैं। यही नारी शक्ति है, यही नव भारत की तैयारी है।

लेखक केंद्रीय पंचायती राज राज्य मंत्री हैं

पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर सुल्तानपुर में आपातकालीन लैंडिंग सुविधा (ईएलएफ) सक्रिय की गई

दिल्ली /सत्ता संदेश

भारतीय वायु सेना ने 22 अप्रैल, 2026 को उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर दिन और रात दोनों समय ‘आपातकालीन लैंडिंग सुविधा’ (ईएलएफ) को सक्रिय किया, जिससे रक्षा संबंधी तैयारियों को मजबूत करने के लिए उसकी संचालन क्षमता प्रदर्शित हुई। उत्तर प्रदेश के पंचायती राज और अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री श्री ओम प्रकाश राजभर, वायु सेना प्रमुख बी. मणिकांतन, एओसी-इन-सी, सीएसी और अन्य अधिकारी भारतीय वायु सेना के विमानों द्वारा ईएलएफ संचालन को देखने के लिए उपस्थित थे।

भारतीय वायु सेना की संचालन क्षमता का प्रदर्शन जैगुआर, मिराज-2000, सुखोई-30 एमकेआई, सी-295 और एएन-32 सहित विभिन्न प्रकार के विमानों के बेड़े, एमआई-17 वी5 हेलीकॉप्टर और गरुड़ कमांडो टीम के संचालन के माध्यम से किया गया। भारतीय वायु सेना ने यूपीईआईडीए और स्थानीय नागरिक प्रशासन के साथ मिलकर दिन और रात दोनों समय इन आपातकालीन विमान बेड़े को कम से कम समय में सक्रिय करने के लिए अपनी मानक संचालन प्रक्रियाओं का मान्यीकरण किया।

इस अभियान ने मानक रनवे की अनुपलब्धता के दौरान भी निर्बाध संचालन करने की भारतीय वायु सेना की क्षमता को काफी हद तक बढ़ाया है, जिससे इसकी संचालन क्षमता का प्रदर्शन हुआ है। इसने वायु सेना के कुशल विमान चालक दल और जमीनी चालक दल की अल्प सूचना पर ऐसे एक्सप्रेसवे हवाई पट्टियों को सक्रिय करने की क्षमता को प्रदर्शित किया है। राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे पर रणनीतिक रूप से विकसित ये हवाई पट्टियां संचालन संबंधी मजबूती को काफी हद तक बढ़ाती हैं और आपात स्थितियों के दौरान महत्वपूर्ण बलों को कई गुणा बढ़ाने में मददगार हैं, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा और आपदा मोचन क्षमताओं को मजबूती मिलती है।

भारतीय वायु सेना की संचालन संबंधी आवश्यकताओं और यूपीईआईडीए के असैनिक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रबंधन तथा स्थानीय नागरिक प्रशासन के सहयोग से निर्मित यह सहयोगात्मक ढांचा, ऐसे राजमार्गीय हवाई पट्टियों की संचालन व्यवहार्यता को अधिकतम करता है। ईएलएफ को सक्रिय बनाने में तीनों संगठनों द्वारा प्रदर्शित तालमेल न केवल राष्ट्र की समग्र रणनीतिक स्थिति को मजबूत करता है, बल्कि क्षेत्र में आपदा जोखिम न्यूनीकरण (एचएडीआर) क्षमताओं को भी बढ़ाता है।

चार देशों के दूतों ने राष्ट्रपति को अपने परिचय पत्र प्रस्तुत किए

दिल्ली /सत्ता संदेश

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज (23 अप्रैल, 2026) राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में लाओ पीडीआर, कांगो, नामीबिया और गिनी बिसाऊ के राजदूतों द्वारा प्रस्तुत उनके परिचय पत्र स्वीकार किए।

जिन लोगों ने अपने प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए, वे थे:

1. लाओ पीपुल्स डेमोक्रेटिक रिपब्लिक की राजदूत श्रीमती विथया ज़ायावोंग,

2. कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य की राजदूत श्रीमती एमिली अयाजा मुशोबेकवा,

3. नामीबिया गणराज्य के उच्चायुक्त विंग कमांडर एलेक्स लुन्याज़ो टुकुहुपवेले (सेवानिवृत्त),

4. गिनी-बिसाऊ गणराज्य के राजदूत श्री एंटोनियो सेरिफो एम्बालो।

काहिरा में भारत और मिस्र के बीच 11वीं संयुक्त रक्षा समिति की बैठक आयोजित हुई

दिल्ली /सत्ता संदेश

भारत-मिस्र संयुक्त रक्षा समिति (जेडीसी) ने 20 से 22 अप्रैल, 2026 तक काहिरा में आयोजित अपनी 11 वीं बैठक में द्विपक्षीय रक्षा सहयोग बढ़ाने की दिशा में सार्थक चर्चा की। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संयुक्त सचिव (अंतर्राष्ट्रीय सहयोग) श्री अमिताभ प्रसाद ने किया। भारतीय प्रतिनिधिमंडल में  रक्षा मंत्रालय और रक्षा बलों के वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल थे। मिस्र के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व रक्षा बलों और रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने किया।

दोनों पक्षों ने पिछली संयुक्त रक्षा सम्मेलन बैठक के बाद से हुई प्रगति की व्यापक समीक्षा की। रक्षा सहयोग के लिए दोनों पक्षो ने एक दूरदर्शी रूपरेखा तैयार की। उन्होंने वर्ष 2026-27 के लिए एक द्विपक्षीय रक्षा सहयोग योजना पर सहमति व्यक्त की। इस योजना का मुख्य उद्देश्य संरचित सैन्य अंतःक्रिया तंत्रों का विस्तार करना, संयुक्त प्रशिक्षण आदान-प्रदान को मजबूत करना, समुद्री सुरक्षा सहयोग को बढ़ाना, सैन्य अभ्यासों के दायरे और जटिलता को बढ़ाना और रक्षा उत्पादन एवं प्रौद्योगिकी में सहयोग को बढ़ावा देना है।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय रक्षा उद्योग की तेजी से बढ़ती विनिर्माण क्षमताओं पर एक प्रस्तुति दी। प्रस्तुति में यह दर्शाया गया कि इसका उत्पादन 20 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक हो चुका है। भारत 100 से अधिक देशों को लगभग 4 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के उत्पाद निर्यात कर रहा है। दोनों पक्षों ने रक्षा उद्योग सहयोग योजना विकसित करने के लिए मिलकर काम करने पर सहमति व्यक्त की। रक्षा उद्योग सहयोग भारत-मिस्र रक्षा संबंधों का एक प्रमुख स्तंभ बनकर उभर रहा है। दोनों पक्ष रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में सह-विकास और सह-उत्पादन के अवसरों की खोज कर रहे हैं।

इस बैठक के दौरान नौसेना-से-नौसेना स्टाफ वार्ता का उद्घाटन किया गया। हिंद महासागर क्षेत्र में नौवहन की स्वतंत्रता को बढ़ावा देने में भारतीय नौसेना द्वारा निभाई गई उत्कृष्ट भूमिका को प्रस्तुत किया गया। समुद्री सुरक्षा को बढ़ावा देने में भारत के सूचना संलयन केंद्र द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला गया।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने मिस्र की वायु सेना (ईएएफ) के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल अमर अब्देल रहमान साकर से भी मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने दोनों देशों की वायु सेनाओं के बीच घनिष्ठ सहयोग के लिए मिस्र की वायु सेना कमांडर को धन्यवाद दिया।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने हेलीपोलिस युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सर्वोच्च बलिदान देने वाले भारतीय वीरों को श्रद्धांजलि दी।

भारत-मिस्र रक्षा साझेदारी में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सितंबर 2022 में रक्षा मंत्री की मिस्र यात्रा के दौरान रक्षा क्षेत्र में सहयोग पर हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (एमओयू) थी। द्विपक्षीय संबंधों को वर्ष 2023 में रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत किया गया। 11 वीं बैठक ने दोनों देशों के बीच घनिष्ठ संबंधों की पुष्टि की। दोनों देशों ने क्षेत्रीय सुरक्षा एवं स्थिरता के प्रति उनकी पारस्परिक प्रतिबद्धता को सुदृढ़ किया।