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PM Modi-Putin Meeting: रूस-यूक्रेन और ईरान युद्ध पर चर्चा, भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर भी मंथन

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। इस साल दोनों नेताओं की यह दूसरी मुलाकात है। इससे पहले 31 अगस्त 2026 को बिश्केक में 26वें एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं की मुलाकात हुई थी।

बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन ने भारत-रूस द्विपक्षीय संबंधों और सहयोग की प्रगति की व्यापक समीक्षा की। दोनों नेताओं ने राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, कौशल गतिशीलता और लोगों के बीच संपर्क सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा की।

रूस-यूक्रेन और ईरान युद्ध पर हुई चर्चा

बैठक में रूस-यूक्रेन युद्ध के साथ-साथ ईरान से जुड़े संघर्ष पर भी दोनों नेताओं ने विचार साझा किए। पश्चिम एशिया और काला सागर क्षेत्र में जारी संघर्षों के कारण समुद्री व्यापार और भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर भी चर्चा हुई।

हॉर्मुज और ब्लैक सी क्षेत्र में फंसे भारतीय जहाजों और भारतीय जहाजकर्मियों की स्थिति भी बातचीत का महत्वपूर्ण हिस्सा रही। प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि संघर्षों के समाधान का सही रास्ता बातचीत और कूटनीति है। उन्होंने कहा कि भारत शांति स्थापित करने के प्रयासों में सहयोग देने के लिए तैयार है।

INNOPROM India को लेकर भी चर्चा

दोनों नेताओं ने रूस की अंतरराष्ट्रीय औद्योगिक प्रदर्शनी ‘इनोप्रोम इंडिया’ (INNOPROM India) का स्वागत किया। यह प्रदर्शनी पहली बार भारत में 9 से 11 सितंबर 2026 तक आयोजित की गई। मोदी और पुतिन ने प्रदर्शनी का दौरा भी किया और इसमें भाग लेने वाले लोगों से बातचीत की।

दोनों नेताओं ने माना कि इस तरह के आयोजन भारत और रूस के बीच व्यापार एवं औद्योगिक संबंधों को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

BRICS में भारत-रूस सहयोग पर जोर

बैठक में बहुपक्षीय मंचों पर भारत-रूस सहयोग पर भी चर्चा हुई। खास तौर पर 2026 में भारत की अध्यक्षता में BRICS के तहत दोनों देशों के बीच सहयोग को लेकर विचारों का आदान-प्रदान किया गया।

दोनों नेताओं ने प्रमुख क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी अपने विचार साझा किए और भारत-रूस की ‘विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी’ को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

पीएम मोदी को पुतिन ने रूस आने का दिया निमंत्रण

राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 24वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए रूस आने का निमंत्रण दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने निमंत्रण स्वीकार कर लिया है।

दोनों देशों के बीच शिखर सम्मेलन की तारीख राजनयिक माध्यमों से आपसी सुविधा के अनुसार तय की जाएगी। नेताओं ने कहा कि भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत-रूस की रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूती दिखा रही है।

वार्ड-70 के बच्चों को मिला नया स्पोर्ट्स पार्क, MLA मदन लाल बग्गा ने किया उद्घाटन

लुधियाना / सत्ता संदेश

लुधियाना नॉर्थ विधानसभा क्षेत्र के वार्ड नंबर 70 में कैलाश चौक, गांधी स्ट्रीट के पास नवनिर्मित स्पोर्ट्स पार्क का उद्घाटन विधायक चौधरी मदन लाल बग्गा ने स्थानीय निवासियों की मौजूदगी में किया। करीब 14.70 लाख रुपये की लागत से तैयार इस पार्क से इलाके के बच्चों और युवाओं को घर के पास ही खेल सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

उद्घाटन के दौरान MLA मदन लाल बग्गा ने कहा कि लंबे समय से खेलों में रुचि रखने वाले स्थानीय बच्चों को प्रैक्टिस के लिए दूर-दराज के इलाकों में जाना पड़ता था। इसके अलावा, निजी कोचिंग सेंटरों की फीस भी कई परिवारों के लिए चुनौती बनी हुई थी। अब नए स्पोर्ट्स पार्क के बनने से बच्चे अपने घर के नजदीक मुफ्त में अभ्यास कर सकेंगे और अपनी खेल प्रतिभा को निखार सकेंगे।

इस मौके पर विधायक बग्गा ने बच्चों को फुटबॉल, क्रिकेट किट, बैडमिंटन सेट और बास्केटबॉल सहित विभिन्न खेलों का सामान भी वितरित किया। खेल सामग्री मिलने पर बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिला।

MLA बग्गा ने कहा कि उनका उद्देश्य लुधियाना नॉर्थ विधानसभा क्षेत्र के हर वार्ड में बच्चों और युवाओं के लिए बेहतर खेल सुविधाएं उपलब्ध करवाना है। उन्होंने कहा कि खेलों को बढ़ावा देने से युवाओं को सकारात्मक गतिविधियों से जुड़ने और नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित किया जा सकता है।

कार्यक्रम में काउंसलर अमन बग्गा खुराना, ब्लॉक प्रेसिडेंट कामराज शर्मा, वार्ड सेक्रेटरी सनी वासन, पुनीत मनोचा, जीतू सेठी, बॉबी राय, कमल बातिश, ईशान शर्मा, अनिल शर्मा, यूथ विंग ब्लॉक कोऑर्डिनेटर राहुल रुद्र, यूथ विंग वार्ड प्रेसिडेंट गीतिक गुगलानी सहित बड़ी संख्या में स्थानीय निवासी मौजूद रहे।

गांव लिब्रा में मिल्क प्रोड्यूसर अवेयरनेस कैंप आयोजित, डेयरी किसानों को दी योजनाओं की जानकारी

लुधियाना / सत्ता संदेश

डेयरी डेवलपमेंट विभाग की ओर से डिप्टी डायरेक्टर डेयरी डेवलपमेंट, जिला लुधियाना के नेतृत्व में ब्लॉक खन्ना के गांव लिब्रा में एक दिवसीय मिल्क प्रोड्यूसर अवेयरनेस कैंप आयोजित किया गया। कैंप में क्षेत्र के डेयरी किसानों ने हिस्सा लिया और विभाग की विभिन्न गतिविधियों एवं योजनाओं की जानकारी प्राप्त की।

कैंप के दौरान डेयरी किसानों को पशुओं को बीमारियों से बचाने, संतुलित आहार देने, पशुओं की उचित देखभाल और स्वास्थ्य संबंधी जरूरी उपायों के बारे में जागरूक किया गया। विशेषज्ञों ने किसानों को पशुओं के बेहतर स्वास्थ्य और दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक तरीके अपनाने की सलाह दी।

इस दौरान डेयरी किसानों को डेयरी लोन केस से संबंधित जरूरी जानकारी भी दी गई। विभाग की ओर से किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया गया, ताकि डेयरी व्यवसाय को और अधिक लाभदायक बनाया जा सके।

अधिकारियों ने किसानों को बताया कि विभाग की योजनाओं और सुविधाओं का सही तरीके से लाभ उठाकर डेयरी किसान अपने व्यवसाय को मजबूत कर सकते हैं और दूध उत्पादन के क्षेत्र में बेहतर परिणाम हासिल कर सकते हैं।

जवाहर नवोदय विद्यालय में 9वीं और 11वीं कक्षा में एडमिशन प्रक्रिया जारी, 30 सितंबर तक करें आवेदन

लुधियाना / सत्ता संदेश

जवाहर नवोदय विद्यालय, धनांसू में शैक्षणिक सत्र 2027-28 के लिए कक्षा 9वीं और 11वीं में खाली सीटों पर एडमिशन की प्रक्रिया जारी है। इन कक्षाओं में प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तारीख 30 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है। प्रवेश परीक्षा 10 अप्रैल 2027 को आयोजित की जाएगी।

जवाहर नवोदय विद्यालय, धनांसू की प्रिंसिपल निशि गोयल ने बताया कि कक्षा 9वीं और 11वीं में उपलब्ध रिक्त सीटों को भरने के लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाएगी। इच्छुक और योग्य विद्यार्थी निर्धारित समय सीमा के भीतर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

कक्षा 9वीं में एडमिशन के लिए विद्यार्थी का लुधियाना जिले का स्थायी निवासी होना जरूरी है और उसे शैक्षणिक सत्र 2026-27 में किसी सरकारी या मान्यता प्राप्त स्कूल में कक्षा 8वीं में अध्ययनरत होना चाहिए। कक्षा 9वीं में प्रवेश के लिए विद्यार्थी का जन्म 1 मई 2012 से 31 जुलाई 2014 के बीच होना चाहिए।

इसी तरह, कक्षा 11वीं में एडमिशन के लिए विद्यार्थी का लुधियाना जिले का स्थायी निवासी होना और शैक्षणिक सत्र 2026-27 में किसी सरकारी या मान्यता प्राप्त स्कूल में कक्षा 10वीं में पढ़ना जरूरी है। कक्षा 11वीं में प्रवेश के लिए जन्म तिथि 1 जून 2010 से 31 जुलाई 2012 के बीच निर्धारित की गई है।

इच्छुक विद्यार्थी कक्षा 9वीं में एडमिशन के लिए https://cbseitms.nic.in/2026/nvsix_6 और कक्षा 11वीं के लिए https://cbseitms.nic.in/2026/nvsxi_11 के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।

प्रिंसिपल निशि गोयल ने सभी इच्छुक एवं पात्र विद्यार्थियों से अपील की है कि वे अंतिम तारीख का इंतजार किए बिना समय रहते अपना ऑनलाइन आवेदन जमा करें, ताकि आवेदन प्रक्रिया में किसी प्रकार की परेशानी न हो।

स्पोर्ट्स होमलैंड पंजाब 2026: SSS स्कूल घुधनी की कबड्डी टीम रही अव्वल, विभिन्न मुकाबलों में खिलाड़ियों ने दिखाया दमखम

लुधियाना / सत्ता संदेश

स्पोर्ट्स होमलैंड पंजाब 2026 के तहत लुधियाना जिले के विभिन्न ब्लॉकों में चल रहे ब्लॉक स्तरीय खेल मुकाबलों के दूसरे चरण के तीसरे दिन खिलाड़ियों ने विभिन्न खेलों में शानदार प्रदर्शन किया। कुमकलां, डेहलों, जगराओं, दोराहा और समराला ब्लॉकों में आयोजित मुकाबलों में खिलाड़ियों ने एथलेटिक्स, वॉलीबॉल और कबड्डी सहित विभिन्न खेलों में हिस्सा लिया।

ब्लॉक दोराहा में संत ईशर सिंह स्टेडियम, गांव घलोटी में आयोजित कबड्डी सर्कल स्टाइल अंडर-17 लड़कों के मुकाबलों में SSS स्कूल घुधनी की टीम ने पहला स्थान हासिल किया। SSS स्कूल रौनी दूसरे और सरकारी हाई स्कूल जरगढ़ी की टीम तीसरे स्थान पर रही। वहीं अंडर-17 लड़कों के वॉलीबॉल शूटिंग मुकाबलों में कैम्ब्रिज इंटरनेशनल स्कूल पायल ने पहला, ऑक्सफोर्ड सीनियर सेकेंडरी स्कूल पायल ने दूसरा और सरकारी हाई स्कूल जरखड़ी ने तीसरा स्थान हासिल किया। इस दौरान ब्लॉक दोराहा के SHO जसनप्रीत सिंह सरहान ने खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया।

ब्लॉक कुमकलां के सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल साहनेवाल खुर्द में आयोजित मुकाबलों में वॉलीबॉल स्मैशिंग अंडर-14 लड़कों के वर्ग में अर्बन एस्टेट जमालपुर ने पहला स्थान हासिल किया। परफेक्ट पब्लिक स्कूल दूसरे और भैणी शालू की टीम तीसरे स्थान पर रही। अंडर-17 वर्ग में अर्बन एस्टेट जमालपुर प्रथम, दयाल पब्लिक स्कूल द्वितीय और दर्शन एकेडमी स्कूल लुधियाना तृतीय रहा। अंडर-21 वर्ग में अर्बन एस्टेट जमालपुर ने पहला, डिसेंट पब्लिक स्कूल ने दूसरा और मुंडियां कलां ने तीसरा स्थान हासिल किया।

वॉलीबॉल स्मैशिंग लड़कियों के अंडर-17 वर्ग में अर्बन एस्टेट जमालपुर पहले, डिसेंट पब्लिक स्कूल दूसरे और मुंडियां कलां तीसरे स्थान पर रहा। अंडर-21 वर्ग में मुंडियां कलां की टीम ने पहला स्थान हासिल किया, जबकि दर्शन एकेडमी स्कूल तीसरे स्थान पर रहा।

कुमकलां में एथलेटिक्स के अंडर-14 लड़कों के 60 मीटर मुकाबले में अंश राज ने पहला, नमन भाटिया ने दूसरा और चिराग ने तीसरा स्थान हासिल किया। 600 मीटर में साहिल कुमार प्रथम, पवनदीप सिंह द्वितीय और सुखप्रीत सिंह तृतीय रहे। लड़कियों के अंडर-14 वर्ग में 60 मीटर में अंशिका राय प्रथम, अशरा द्वितीय और साक्षी तृतीय रहीं। 600 मीटर में साक्षी ने पहला, दिव्यांशी सिंह ने दूसरा और प्रीति कुमारी ने तीसरा स्थान हासिल किया। शॉट पुट में रिया गुप्ता प्रथम, दीक्षा सरमा द्वितीय और रामदीप कौर तृतीय रहीं।

ब्लॉक डेहलों के संतोख सिंह मर्दिंग स्टेडियम, गांव दुलय में एथलेटिक्स मुकाबलों के दौरान लड़कों की 60 मीटर दौड़ में सुखमनप्रीत सिंह ने पहला, वंस ने दूसरा और करण सिंह ने तीसरा स्थान हासिल किया। 600 मीटर में सुखमनप्रीत सिंह प्रथम, जसविंदर सिंह द्वितीय और जसकरन सिंह तृतीय रहे। लड़कियों के अंडर-14 वर्ग में 60 मीटर में प्रभजोत कौर प्रथम, जशनप्रीत कौर द्वितीय और फलक तृतीय रहीं। लंबी कूद में जसनूर कौर प्रथम, वंशिका द्वितीय और अवनीत कौर तृतीय रहीं, जबकि शॉट पुट में दिलमेहक कौर ने पहला स्थान हासिल किया।

ब्लॉक जगराओं के कलगीधर स्टेडियम, कमालपुरा में अंडर-14 लड़कों की 60 मीटर दौड़ में सुखमनजीत सिंह प्रथम, वरिंदर सिंह द्वितीय और दिलजान तृतीय रहे। 600 मीटर में दिलजान सिंह ने पहला, दिलजोत सिंह ने दूसरा और एकमजीत सिंह ने तीसरा स्थान हासिल किया। शॉट पुट में इशान सिंह प्रथम, दिलराज सिंह द्वितीय और खुशप्रीत सिंह तृतीय रहे। अंडर-21 लड़कों की 800 मीटर दौड़ में विशाल ने पहला, महकप्रीत सिंह ने दूसरा और गौरज सिंह ने तीसरा स्थान हासिल किया।

जगराओं में लड़कियों के अंडर-14 वर्ग की 60 मीटर दौड़ में जसलीन कौर प्रथम, गुरलीन कौर द्वितीय और हरमनदीप कौर तृतीय रहीं। 600 मीटर में जसलीन कौर ने पहला, गुरलीन कौर ने दूसरा और सुखप्रीत कौर ने तीसरा स्थान हासिल किया। शॉट पुट में गुरनूर कौर प्रथम, गुरलीन कौर द्वितीय और तनप्रीत कौर तृतीय रहीं। वॉलीबॉल स्मैशिंग अंडर-14 लड़कों में SSS स्कूल गिद्दड़विंडी ने पहला और गांव सोहियां ने दूसरा स्थान हासिल किया। लड़कियों के अंडर-14 वर्ग में गुरु हरगोबिंद पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल सिधवान खुर्द प्रथम और SSS स्कूल गिद्दड़विंडी दूसरे स्थान पर रहा।

ब्लॉक समराला के सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, गांव मानकी में भी एथलेटिक्स मुकाबलों में खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। अंडर-14 लड़कों की 60 मीटर दौड़ में एकमजोत सिंह ने पहला, मनवीर सिंह ने दूसरा और गुरप्रीत सिंह ने तीसरा स्थान हासिल किया। 600 मीटर में एकमजोत सिंह प्रथम, दीपक कुमार द्वितीय और जगदीप सिंह तृतीय रहे। लंबी कूद में मनवीर सिंह प्रथम, जगदीप सिंह द्वितीय और गुरप्रीत सिंह तृतीय रहे, जबकि शॉट पुट में हसनप्रीत सिंह ने पहला स्थान हासिल किया।

प्रशासन की ओर से बताया गया कि ब्लॉक स्तरीय खेलों के तीसरे चरण में 12 से 14 सितंबर तक 4 म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन, खन्ना, लुधियाना-2 और रायकोट में भी विभिन्न खेल मुकाबलों का आयोजन किया जाएगा। इन प्रतियोगिताओं का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के खिलाड़ियों को खेलों के लिए बेहतर मंच उपलब्ध करवाना और उनकी प्रतिभा को आगे बढ़ाने के अवसर प्रदान करना है।

विद्युत क्षेत्र में 5G तकनीक का इस्तेमाल, NPTI फरीदाबाद में कार्यशाला

फरीदाबाद / सत्ता संदेश

विद्युत क्षेत्र में संचार व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, तेज, विश्वसनीय और दक्ष बनाने की दिशा में 5G प्रौद्योगिकी की संभावनाओं पर चर्चा के लिए राष्ट्रीय विद्युत प्रशिक्षण संस्थान (NPTI), फरीदाबाद में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। दूरसंचार विभाग (DoT) और NPTI के संयुक्त सहयोग से आयोजित कार्यशाला का विषय “विद्युत क्षेत्र में विश्वसनीयता एवं दक्षता बढ़ाने में 5G प्रौद्योगिकी का उपयोग” रहा।

कार्यशाला का संयुक्त रूप से उद्घाटन दूरसंचार विभाग के महानिदेशक अनिल कुमार गुप्ता तथा राष्ट्रीय विद्युत प्रशिक्षण संस्थान के महानिदेशक श्री हेमंत जैन ने किया। कार्यक्रम में केंद्रीय एवं राज्य विद्युत उपक्रमों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ दूरसंचार क्षेत्र, उद्योग, शिक्षाविदों, स्टार्ट-अप्स और अन्य संबंधित हितधारकों ने भाग लिया।

अपने संबोधन में महानिदेशक दूरसंचार श्री अनिल कुमार गुप्ता ने आधुनिक विद्युत प्रणालियों के लिए सुरक्षित, विश्वसनीय और रियल-टाइम संचार व्यवस्था के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्युत उपक्रमों, दूरसंचार क्षेत्र, उद्योग, स्टार्ट-अप्स और शिक्षाविदों से NPTI स्थित 5G यूज़ केस लैब का उपयोग करते हुए विद्युत क्षेत्र के लिए व्यावहारिक समाधान विकसित करने और उन्हें बड़े स्तर पर लागू करने की दिशा में काम करने का आह्वान किया।

NPTI के महानिदेशक श्री हेमंत जैन ने विद्युत क्षेत्र में क्षमता निर्माण, अनुसंधान और उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाने के लिए संस्थान की प्रतिबद्धता दोहराई। वहीं, अपर महानिदेशक दूरसंचार, हरियाणा LSA श्री आर. शाक्य ने दूरसंचार और विद्युत क्षेत्रों के बीच निरंतर समन्वय को जरूरी बताते हुए उच्च प्रभाव वाले 5G उपयोग मामलों की पहचान और उनके प्रभावी कार्यान्वयन पर जोर दिया।

कार्यशाला के दौरान तकनीकी विषयों पर अलग-अलग केंद्रित सत्र आयोजित किए गए। पहले सत्र में विद्युत उत्पादन और नेटवर्किंग में 5G के उपयोग पर चर्चा हुई। इसमें विद्युत उपक्रमों के लिए प्राइवेट 5G नेटवर्क, उत्पादन-पारेषण-वितरण प्रणालियों के साथ 5G का एकीकरण, SCADA/PLC प्रणालियां, LAN/WAN और नेटवर्क ऑपरेशन सेंटर की आवश्यकताओं के साथ स्मार्ट-ग्रिड संचार वास्तुकला जैसे विषय शामिल रहे।

दूसरे सत्र में विद्युत क्षेत्र के लिए नियामकीय ढांचे और स्पेक्ट्रम उपयोग के उदारीकरण पर चर्चा की गई। इसमें प्राइवेट 5G स्पेक्ट्रम आवंटन, कैप्टिव एवं नॉन-कैप्टिव नेटवर्क, कैप्टिव नॉन-पब्लिक नेटवर्क (CNPN), लाइसेंसिंग एवं अनुपालन आवश्यकताओं तथा विद्युत उपक्रमों के लिए स्पेक्ट्रम नियोजन से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।

तीसरे सत्र में विद्युत क्षेत्र में उभरती तकनीकों के उपयोग पर विशेष ध्यान दिया गया। विशेषज्ञों ने AI/ML आधारित प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस, अधिक नवीकरणीय ऊर्जा की स्थिति में रियल-टाइम ग्रिड बैलेंसिंग, AI आधारित लोड फोरकास्टिंग और परिसंपत्ति प्रबंधन, IoT एवं एज-कंप्यूटिंग, एडवांस्ड मीटरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर (AMI), एकीकृत संचार तकनीकों तथा विद्युत क्षेत्र में ड्रोन के इस्तेमाल पर चर्चा की।

कार्यशाला के चौथे सत्र में विद्युत क्षेत्र से जुड़ी साइबर सुरक्षा चुनौतियों पर विचार किया गया। इसमें IoT उपकरणों और नेटवर्क की सुरक्षा, SCADA एवं IoT नेटवर्क की सुरक्षा, साइबर खतरों का परिदृश्य, साइबर घटना के प्रति प्रतिक्रिया और सुरक्षा के बेहतर उपायों जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।

कार्यशाला के समापन पर प्रतिभागियों ने NPTI स्थित 5G यूज़ केस लैब का दौरा किया। यह प्रयोगशाला दूरसंचार विभाग की “100 5G Use Case Labs” पहल के अंतर्गत स्थापित की गई है। इसे विद्युत क्षेत्र के लिए 5G आधारित समाधानों के विकास, परीक्षण एवं सत्यापन, क्षमता निर्माण तथा क्षेत्र-विशिष्ट अनुप्रयोगों के विकास के लिए महत्वपूर्ण मंच के रूप में रेखांकित किया गया।

कार्यशाला के दौरान साझेदारियों को बढ़ावा देने, प्राथमिकता वाले पायलट प्रोजेक्ट्स की पहचान करने और 5G सहित उभरती तकनीकों के प्रभावी उपयोग के माध्यम से अधिक विश्वसनीय, सुरक्षित, दक्ष और भविष्य के लिए तैयार विद्युत क्षेत्र के निर्माण की साझा प्रतिबद्धता व्यक्त की गई।

भूमिगत संरचना की सटीक जानकारी से बदलेगा भारत का इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार, ICAR की ‘मृदा आसूचना’ बनी नई ताकत

एम.एल. जाट और एन.जी. पाटिल

भारत अभूतपूर्व और ऐतिहासिक गति से अपने डिजिटल, फिजि़कल (भौतिक) और फिजिटल (फिजिकल+डिजिटल) भविष्य का निर्माण कर रहा है। देश हर वर्ष औसतन 4.5 लाख से अधिक रूट किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर केबल नेटवर्क का विस्तार कर रहा है, जबकि साथ ही लगभग 11,000 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण और 6,500 किलोमीटर रेलवे ट्रैक का विद्युतीकरण किया जा रहा है और हर वर्ष लगभग 5,000 किलोमीटर रेलवे ट्रैक जोड़े जा रहे हैं। इस व्यापक विस्तार का अर्थ है कि देशभर में डिजिटल कनेक्टिविटी के 22.8 लाख किलोमीटर के आश्चर्यजनक विस्तार वाले बहुवर्षीय राष्ट्रीय विस्तार के साथ-साथ, देश प्रतिदिन लगभग 30 किलोमीटर राजमार्ग और 12 से 15 किलोमीटर नई रेल लाइनों का निर्माण कर रहा है। फिर भी, जैसे-जैसे ये विस्तृत परिवहन गलियारे, अल्ट्रा-मेगा सौर पार्क और विशाल डिजिटल नेटवर्क विस्तार पा रहे हैं, कृषि विज्ञान के नेतृत्व में एक शांत तकनीकी सहयोग भूमि की सतह के ठीक नीचे हो रहा है।

बड़े परियोजनाओं के लिए बोली लगाने वालों को अक्सर पहले से मिट्टी की खुदाई की लागत का अनुमान तैयार करना पड़ता है, भले ही पहले से कोई भूवैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध न हो। चूंकि परियोजनाओं की निविदा प्रक्रिया की समय-सीमा बहुत कम होती है, इसलिए त्वरित और विश्वसनीय मृदा संबंधी आंकड़े इस जोखिम को काफी हद तक कम कर सकते हैं—विशेषकर तब, जब परियोजना भारत के बाहर स्थित हो और स्थानीय भू-भाग संबंधी आंकड़ों तक पहुंच कठिन हो। इसके अलावा, बोली जीतने के बाद, परियोजना क्रियान्वयन-कर्ताओं को बार-बार आने वाली करोड़ों रुपये की समस्या का सामना करना पड़ता है: नरम मिट्टी में आसानी से खुदाई करते हुए इंजीनियरिंग दल अचानक भूमिगत चट्टान की कठोर दीवार से टकरा जाता है, या भ्रामक काली कपास मिट्टी पर बनाई गई नई सड़क में दरारें पड़ने लगती हैं और वह उखड़ने लगती है। काम रुक जाता है, मशीनरी बेकार खड़ी रहती है और परियोजना की लागत आसमान छूने लगती है। इस महत्वपूर्ण सूचना अंतराल को पाटने के लिए, नागपुर स्थित आईसीएआर–राष्ट्रीय मृदा सर्वेक्षण एवं भूमि उपयोग नियोजन ब्यूरो (एनबीएसएस एवं एलयूपी) के वैज्ञानिकों ने एक क्रांतिकारी प्रतिमान विकसित किया है: मृदा आसूचना-आधारित पूर्वानुमानात्मक इंजीनियरिंग। दशकों से उपलब्ध मृदा विज्ञान संबंधी आंकड़ों को उन्नत मशीन लर्निंग के साथ जोड़कर, आईसीएआर बुनियादी ढांचा योजनाकारों को जमीन में पहली फावड़ी लगने से पहले ही पृथ्वी के बारे में “एक्स-रे दृष्टि” प्रदान कर रहा है—यह सिद्ध करते हुए कि कृषि अनुसंधान खेतों से कहीं आगे राष्ट्रीय विकास का एक आधारभूत चालक है।

गति और विस्तार की अनदेखी की गई चुनौतियां

भारत में वर्तमान अवसंरचना विस्तार की अत्यधिक तीव्र गति के कारण पारंपरिक नियोजन स्वयं एक बाधा बन गया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, भारत का कुल डिजिटल फुटप्रिंट लगभग 19.35 लाख रूट किलोमीटर से बढ़कर 42.36 लाख रूट किलोमीटर से अधिक हो गया है, जो कई वर्षों में हुए व्यापक विस्तार को दर्शाता है। इसी हालिया पांच-वर्षीय अवधि में, देश ने 57,125 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण किया है। इसी दौरान, भारतीय रेलवे ने 33,000 से अधिक रूट किलोमीटर का विद्युतीकरण किया है, जो औसतन लगभग 6,600 किलोमीटर प्रतिवर्ष है और ब्रॉड गेज नेटवर्क के विद्युतीकरण को लगभग 99.6% तक पहुंचाता है, जिसकी दर प्रतिदिन 15 से अधिक रूट किलोमीटर के विद्युतीकरण की है। स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में, भारत ने अपनी प्रमुख सौर योजना के तहत 54 से 56 बड़े पैमाने के सौर पार्कों को मंजूरी दी है, जिनकी स्वीकृत क्षमता लगभग 39.5 गीगावाट है, जिससे 100 से अधिक सार्वजनिक और निजी पार्कों में कुल ग्राउंड-माउंटेड सौर क्षमता 122 गीगावाट से अधिक हो गई है।

इन विशाल कार्यों में शामिल कई सरकारी और निजी एजेंसियां—चाहे वे भूमिगत संचार लाइनों को बिछाने, विद्युत पारेषण टावर खड़े करने या विशाल सौर संरचनाओं को आधार प्रदान करने का काम कर रही हों—सटीक भूमिगत आंकड़ों पर अत्यधिक निर्भर रहती हैं। फिर भी, पारंपरिक प्रारंभिक भू-तकनीकी सर्वेक्षण में काफी समय और लागत लगती है। चूँकि, परियोजनाएं इतनी तेजी से आगे बढ़ रही हैं, ये महत्वपूर्ण मृदा जांच अक्सर छोड़ दी जाती हैं या सीमित कर दी जाती हैं। इसका परिणाम? अनिश्चित विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर), भ्रामक लागत अनुमान और बोलीदाताओं के लिए गंभीर वित्तीय जोखिम।

कृषि-अवसंरचना संबंध

आईसीएआर-एनबीएसएस एवं एलयूपी ने इस सूचना-अंतराल को एक प्रमाणित, समय-परीक्षित प्रौद्योगिकी के माध्यम से दूर किया है, जो पूरे भारत और कई अन्य देशों में काम करती है। उपग्रह रिमोट सेंसिंग और मशीन लर्निंग का उपयोग करके, आईसीएआर स्थल-विशिष्ट भू-तकनीकी मृदा गुणों, जैसे मृदा की गहराई, अंतिम वहन क्षमता (सिविल इंजीनियरिंग संरचना को सहारा देने में निर्णायक कारक), स्‍थूल घनत्व आदि का पूर्वानुमान लगाता है, जिसके लिए भूमि की धीमी, महंगी और विघटनकारी ड्रिलिंग की आवश्यकता नहीं होती।

यह पद्धति पूरी तरह स्वचालित पाइपलाइन के अंतर्गत बहु-स्रोत भू-स्थानिक इनपुट पर मशीन-लर्निंग रिग्रेशन मॉडल का उपयोग करती है। उपग्रह चित्रों, डिजिटल एलिवेशन मॉडल, भू-भाग की ढलान संबंधी व्युत्पन्न आंकड़ों, लिथोलॉजी और भूजल स्तर को संसाधित करके, आईसीएआर का मृदा वर्गीकरण इंजन सटीक, स्थल-विशिष्ट पूर्वानुमान तैयार करता है। यह प्रणाली मृदा की गहराई (नरम, कठोर या मिश्रित परतों की गहराई) और अन्य मापदंडों का सटीक पूर्वानुमान लगाती है। इन मापदंडों का उपयोग इंजीनियरिंग एजेंसियों द्वारा प्रारंभिक भू-तकनीकी डिजाइन, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने और बोली-पूर्व लागत अनुमान के लिए सीधे किया जाता है।

पारंपरिक क्षेत्र सर्वेक्षणों की तुलना में, यह डिजिटल समाधान लागत और समय दोनों में 75% की कमी करता है। तीन सदस्यों की एक छोटी टीम प्रतिदिन लगभग 1,000 किलोमीटर लंबे मार्ग को संसाधित कर सकती है, जिससे यह बड़े पैमाने पर, समयबद्ध राष्ट्रीय नियोजन के लिए विशेष रूप से उपयुक्त बन जाता है। भारतभर में 50,000 किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में इस पूर्वानुमानात्मक दृष्टिकोण का सत्यापन करने के बाद, क्षेत्र में सत्यापित आंकड़ों के मुकाबले लगभग 80% की पूर्वानुमान सटीकता (R² मान लगातार 0.78 से अधिक) प्राप्त हुई है, यहां तक कि कम आंकड़ों वाले क्षेत्रों में भी। अब इन परिकलन विधियों (एल्गोरिदम) को मानकीकृत कर दिया गया है।

वैश्विक उपस्थिति और वाणिज्यिक विश्वसनीयता

इस प्रणाली का भारत के अत्यंत विविध भौगोलिक क्षेत्रों में कठोर क्षेत्र-परीक्षण किया गया है—उत्तराखंड और असम के हिमालयी पर्वतीय क्षेत्रों से लेकर राजस्थान के थार मरुस्थल तथा दक्कन के पठार और सिंधु-गंगा के मैदानों तक। क्षेत्रीय आंकड़ों के आधार पर मानकीकृत की गई यह प्रौद्योगिकी अब राष्ट्रीय सीमाओं से आगे बढ़ चुकी है। प्रमुख सार्वजनिक और निजी अवसंरचना कंपनियां भारत और अंतरराष्ट्रीय क्षेत्रों में 2,00,000 से अधिक रूट-किलोमीटर का मानचित्रण करने के लिए इस प्रणाली को अपना चुकी हैं, जिससे आईसीएआर के अनुसंधान पारितंत्र के लिए संसाधन जुटाने के साथ-साथ बहुमूल्य विदेशी मुद्रा की बचत भी हो रही है और भारतीय कंपनियों को आगे बढ़ने तथा वैश्विक कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बनाया जा रहा है।

अडानी ट्रांसमिशन लिमिटेड, स्टरलाइट टेक्नोलॉजीज़ लिमिटेड, टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड और केईसी इंटरनेशनल लिमिटेड सहित प्रमुख वैश्विक अवसंरचना कंपनियों ने इस समाधान को अपनाया है। केईसी इंटरनेशनल जैसी अंतरराष्ट्रीय कंपनी, जो 100 से अधिक देशों में पारेषण लाइनों को डिजाइन और इनका निर्माण करती है, के लिए मृदा संबंधी आंकड़े वित्तीय अस्तित्व के लिए एक महत्वपूर्ण निर्धारक हैं। नींव संबंधी गतिविधियां और परियोजना जोखिम पूरी तरह से मृदा के प्रकार पर निर्भर करते हैं। ऐसे उद्योग में जहां 6,000 करोड़ रुपये से अधिक के राजस्व आधार पर मार्जिन में मामूली 0.1% की कमी भी 6 करोड़ रुपये के वार्षिक नुकसान में बदल जाती है, सटीक मृदा आसूचना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, नाइजर, रूस, केन्या, मोरक्को, मोल्दोवा, मैक्सिको, मलेशिया, अबू धाबी, नेपाल, बांग्लादेश और ट्यूनीशिया जैसे भौगोलिक रूप से जटिल देशों में पारेषण लाइन परियोजनाओं के लिए बोली लगाते समय, मृदा संबंधी आंकड़ों की कमी या वास्‍तविक स्थिति का निष्‍पक्ष/सही प्रतिनिधित्‍व न करने वाले आंकड़े लाभप्रदता को प्रभावित कर सकते हैं। आईसीएआर की प्रौद्योगिकी विश्वसनीय तृतीय-पक्ष सत्यापन प्रदान करती है, जो ग्राहकों या परियोजना प्रबंधकों द्वारा मृदा की स्थिति के संबंध में किए गए दावों की जांच के लिए एक निष्पक्ष सत्यापनकर्ता के रूप में कार्य करती है, जिससे बोली लगाने में विश्वास बढ़ता है। छोटी लागत वाली निविदाओं के मामले में, जहां समय या वित्तीय सीमाओं के कारण भौतिक सर्वेक्षण संभव नहीं होते, यह पूर्वानुमानात्मक आंकड़ा इस कमी को पूरा करता है।

राष्ट्रीय प्रगति की प्रेरक

इस आंकड़े और विश्लेषण की सफलता ने अवसंरचना क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों को आईसीएआर की प्रौद्योगिकी को विभिन्न व्यावसायिक इकाइयों में व्यापक रूप से लागू करने के लिए प्रेरित किया है, जिससे इसकी उपयोगिता विद्युत पारेषण लाइनों से आगे बढ़कर रेलवे, सौर ऊर्जा प्रतिष्ठानों और भूमिगत केबलिंग तक विस्तृत हो गई है।

उन्नत मृदा विज्ञान का उपयोग करके राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निर्माण गलियारों के जोखिम को कम करते हुए, कृषि अनुसंधान ने स्वयं को भारत की व्यापक आर्थिक वृद्धि के एक अपरिहार्य चालक के रूप में सिद्ध कर दिया है। यह प्रौद्योगिकी दर्शाती है कि मृदा विज्ञान में निवेश केवल देश का पेट नहीं भरता, बल्कि उसके वैश्विक भविष्य की आधारशिला भी तैयार करता है। इस सफलता के आधार पर, आईसीएआर के वैज्ञानिक अब 90 मीटर रिजॉल्यूशन वाले मृदा गहराई मानचित्र और हाल ही में इसी रिजॉल्यूशन वाले मृदा बनावट मानचित्र जैसे पूर्वानुमानात्मक डिजिटल मृदा मानचित्र भी आत्मविश्वास के साथ तैयार कर रहे हैं। ये मानचित्र निकट भविष्य में भारत को डिजिटल कृषि की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ाएंगे, विशेष रूप से भारत के किसानों को भूखंड-विशिष्ट समाधान उपलब्ध कराने में।

(लेखक एम.एल. जाट कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग (डीएआरई) के सचिव और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक हैं, एन.जी. पाटिल आईसीएआर-राष्ट्रीय मृदा सर्वेक्षण एवं भूमि उपयोग नियोजन ब्यूरो (एनबीएसएस एवं एलयूपी), नागपुर के निदेशक हैं)

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PEC में विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर नुक्कड़ नाटक, मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता का दिया संदेश

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी) में विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन स्टूडेंट काउंसलिंग सेल (SCC), PEC की ओर से ड्रामेटिक्स क्लब और आर्ट एंड फोटोग्राफिक क्लब के सहयोग से किया गया।

इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों और परिसर में आत्महत्या की रोकथाम, भावनात्मक स्वास्थ्य तथा समय पर मनोवैज्ञानिक सहायता लेने के महत्व को लेकर जागरूकता फैलाना था।

नुक्कड़ नाटक के माध्यम से विद्यार्थियों ने भावनात्मक तनाव और मानसिक परेशानी के शुरुआती संकेतों को पहचानने का संदेश दिया। प्रस्तुति में यह भी बताया गया कि मुश्किल परिस्थितियों से गुजर रहे व्यक्ति की बात सहानुभूति के साथ सुनना, उसे भावनात्मक सहयोग देना और जरूरत पड़ने पर पेशेवर मदद लेने के लिए प्रोत्साहित करना कितना महत्वपूर्ण है।

कार्यक्रम के दौरान मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर खुलकर बातचीत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। नुक्कड़ नाटक के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जुड़े सामाजिक कलंक और झिझक को कम करने तथा लोगों को बिना संकोच पेशेवर सहायता लेने के लिए प्रेरित किया गया।

कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि आत्महत्या की रोकथाम केवल किसी एक व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी है। समय पर मिलने वाली सहायता, सहानुभूतिपूर्ण संवाद और सार्थक बातचीत किसी व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकती है।

यह पहल परिसर में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता, भावनात्मक मजबूती और विद्यार्थियों के समग्र कल्याण को बढ़ावा देने के प्रति पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

कार्यक्रम का आयोजन डॉ. राजेश भाटिया, निदेशक, प्रो. पुनीत चावला, डीन स्टूडेंट अफेयर्स (DSA) तथा प्रो. सुलता भंडारी, प्रभारी (P/I), स्टूडेंट काउंसलिंग सेल (SCC), पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी) के मार्गदर्शन में किया गया।

PEC में पेटेंट खोज और ड्राफ्टिंग पर व्याख्यान, विद्यार्थियों को IPR की दी महत्वपूर्ण जानकारी

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी), चंडीगढ़ में स्नातकोत्तर (PG) और पीएचडी विद्यार्थियों के लिए बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) विषय पर व्याख्यानों की श्रृंखला आयोजित की गई। कार्यक्रम का आयोजन डीन, प्रायोजित अनुसंधान एवं औद्योगिक परामर्श (SRIC) कार्यालय की ओर से सीनेट हॉल में किया गया।

कार्यक्रम में प्रो. उमेश शर्मा, डीन, SRIC तथा प्रो. संदीप कुमार, एसोसिएट डीन, SRIC (IPR) का सहयोग रहा। व्याख्यानों का संचालन सुश्री संगीता नागर, वरिष्ठ वैज्ञानिक, M/s S.S. Rana & Co., नई दिल्ली तथा श्रीमती सोनू राठौर, मुख्य तकनीकी अधिकारी द्वारा किया गया।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को पेटेंट खोज, पेटेंट योग्यता और नवीनता के आकलन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी गई। इसके साथ ही विश्वविद्यालयों और अनुसंधान एवं विकास संस्थानों के लिए पेटेंट ड्राफ्टिंग की मूलभूत प्रक्रिया पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

व्याख्यानों का उद्देश्य विद्यार्थियों को उनके अनुसंधान और नवाचारों को बौद्धिक संपदा के रूप में सुरक्षित करने की प्रक्रिया से परिचित कराना था। विशेषज्ञों ने पेटेंट से संबंधित आवश्यक जानकारियां साझा करते हुए शोध कार्यों को प्रभावी ढंग से संरक्षित करने के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला।

इस कार्यक्रम से PG और पीएचडी विद्यार्थियों को अपने शोध एवं नवाचारों के संरक्षण, पेटेंट प्रक्रिया की समझ विकसित करने तथा अपने अनुसंधान को बौद्धिक संपदा में परिवर्तित करने की दिशा में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई।

भारत की भूली-बिसरी लौकी-वर्गीय सब्जियों पर वैज्ञानिकों की जेनेटिक नजर, बेहतर पैदावार की उम्मीद

मोहाली / सत्ता संदेश

लौकी, तोरई, करेला, नेनुआ और चिचिंडा जैसी सब्जियां भले ही भारतीय रसोई में बेहद आम हों, लेकिन कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में लंबे समय तक इन फसलों को अपेक्षाकृत कम महत्व मिला। अब वैज्ञानिक इन ‘भूली-बिसरी’ या ‘अनाथ फसलों’ की पैदावार और उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए इनके जेनेटिक रहस्यों को समझने में जुटे हैं।

लौकी-वर्गीय सब्जियां उत्तर भारत के गांवों में आम तौर पर घरों और खेतों में मचान पर उगती दिखाई देती हैं। ये सस्ती और आसानी से उपलब्ध होने वाली सब्जियां हैं, लेकिन पोषण की दृष्टि से इनका महत्व काफी अधिक है। ऐसे समय में जब भारतीय भोजन में चावल और गेहूं जैसे मुख्य खाद्य पदार्थों की हिस्सेदारी अधिक है, ये सब्जियां शरीर को कई जरूरी विटामिन और खनिज उपलब्ध कराती हैं।

कृषि वैज्ञानिक ऐसी फसलों को ‘अनाथ फसलें’ कहते हैं। इनका महत्व स्थानीय स्तर पर बहुत अधिक होता है, लेकिन वैज्ञानिक अनुसंधान और आधुनिक ब्रीडिंग में इन्हें चावल, गेहूं, कपास और टमाटर जैसी प्रमुख फसलों की तुलना में लंबे समय तक कम प्राथमिकता मिली।

ज्यादा नर फूल, कम फल बनना बड़ी चुनौती

लौकी-वर्गीय फसलों की एक प्रमुख समस्या इनके फूलों की प्रकृति है। इन पौधों में नर फूलों की संख्या मादा फूलों के मुकाबले बहुत अधिक होती है। जबकि फल केवल मादा फूलों से बनता है। इसके अलावा मादा फूल परागण के लिए बहुत कम समय के लिए तैयार रहता है और इसके लिए मधुमक्खियों जैसे परागण करने वाले कीटों पर निर्भर रहना पड़ता है।

इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ता है। पौधा लंबे समय तक तेजी से बढ़ता है, लेकिन उसकी ऊर्जा का बड़ा हिस्सा ऐसे नर फूलों के निर्माण में खर्च हो जाता है जो फल नहीं देते।

इसे आसान भाषा में समझें तो किसान के लिए यह ऐसी व्यवस्था है जिसमें संसाधन ज्यादा खर्च हो रहे हैं, लेकिन उसके मुकाबले फल कम मिल रहे हैं।

IISER मोहाली की टीम तलाश रही जेनेटिक समाधान

इसी समस्या का समाधान तलाशने के लिए इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (IISER) मोहाली में डॉ. रवि देवानी की टीम, फ्रांस के पेरिस-सैक्ले स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ प्लांट साइंसेज में डॉ. बेंदहमाने के रिसर्च ग्रुप के साथ मिलकर काम कर रही है।

वैज्ञानिकों का लक्ष्य अधिक खाद या कीटनाशक के इस्तेमाल के बजाय उन जेनेटिक निर्देशों को समझना है, जो पौधे में यह तय करते हैं कि फूल नर बनेगा या मादा।

इस शोध के लिए फिलहाल लौकी को शुरुआती मॉडल के तौर पर देखा जा रहा है। लौकी का जीनोम मैप किया जा चुका है और इसमें नए जेनेटिक निर्देशों को शामिल करने की तकनीक भी उपलब्ध है। ऐसे में वैज्ञानिकों के लिए यह दूसरी कम-अनुसंधान वाली लौकी-वर्गीय फसलों की दिशा में आगे बढ़ने का महत्वपूर्ण आधार बन सकती है।

हाइब्रिड बीज उत्पादन में भी हो सकता है फायदा

आज बेहतर हाइब्रिड बीज तैयार करने के लिए बीज कंपनियों को दो अलग-अलग पौधों के बीच नियंत्रित क्रॉस कराना पड़ता है। इसके लिए एक पौधे के नर फूल से पराग लेकर उसे दूसरे पौधे के मादा फूल तक पहुंचाना पड़ता है। यह प्रक्रिया समय लेने वाली और श्रमसाध्य होती है, जिसका असर बीज उत्पादन की लागत पर भी पड़ता है।

खरबूजे और खीरे जैसी कुछ फसलों में वैज्ञानिक ऐसी प्लांट लाइनों को विकसित करने में सफल रहे हैं जिनमें अधिकांश फूल मादा होते हैं। इससे पौधे की ऊर्जा फल उत्पादन की दिशा में अधिक इस्तेमाल हो सकती है और हाइब्रिड बीज उत्पादन की प्रक्रिया भी आसान हो सकती है।

भारतीय लौकी-वर्गीय सब्जियों में इस तरह की रणनीति पर अभी काफी काम किया जाना बाकी है।

जलवायु परिवर्तन और मधुमक्खियों की घटती संख्या भी चुनौती

लौकी-वर्गीय फसलों के लिए केवल फूलों का लिंग ही चुनौती नहीं है। परागण के लिए कीटों पर निर्भरता भी भविष्य में बड़ी समस्या बन सकती है।

बढ़ती गर्मी, हीट वेव और परागण करने वाले कीटों की घटती संख्या ऐसी फसलों के उत्पादन को प्रभावित कर सकती है। अगर मादा फूल के थोड़े समय के परागण योग्य रहने के दौरान पर्याप्त परागण नहीं हुआ, तो फल बनने की संभावना कम हो जाती है।

इसीलिए वैज्ञानिक ऐसे पौधों की संभावनाएं तलाश रहे हैं जिन्हें परागण की इस निर्भरता से कम प्रभावित किया जा सके।

हर्माफ्रोडाइट फूल और पार्थेनोकार्पी पर भी नजर

शोध की एक दिशा ऐसे फूलों की ओर है जिनमें नर और मादा दोनों प्रजनन अंग एक ही फूल में मौजूद हों। ऐसे हर्माफ्रोडाइट फूल कुछ परिस्थितियों में बाहरी परागण पर निर्भरता कम कर सकते हैं।

दूसरी महत्वपूर्ण संभावना ‘पार्थेनोकार्पी’ है। इसका अर्थ है बिना निषेचन के फल का विकसित होना। अगर लौकी-वर्गीय फसलों में ऐसी क्षमता विकसित की जा सके, तो फल बनने के लिए समय पर मधुमक्खियों या अन्य परागण करने वाले कीटों की मौजूदगी पर निर्भरता कम हो सकती है।

इससे गर्मी की लहरों और कमजोर परागण वाले मौसम में भी उत्पादन को स्थिर रखने में मदद मिल सकती है।

खीरे और खरबूजे से मिले जेनेटिक संकेत

डॉ. बेंदहमाने और डॉ. रवि देवानी की टीम ने खरबूजे और खीरे में फूलों के लिंग को नियंत्रित करने वाले जेनेटिक स्विच की पहचान से जुड़े महत्वपूर्ण शोध किए हैं। इन शोधों को ‘साइंस’, ‘नेचर’ और ‘नेचर प्लांट्स’ जैसे प्रतिष्ठित वैज्ञानिक जर्नल्स में प्रकाशित किया जा चुका है।

हालांकि, सबसे बड़ा सवाल अब यह है कि क्या लौकी और उससे जुड़ी दूसरी फसलों में भी फूलों के लिंग को नियंत्रित करने वाले वही जेनेटिक स्विच मौजूद हैं।

लौकी और खीरे के बीच विकासवादी दूरी काफी पुरानी है। दोनों का अंतिम साझा पूर्वज करोड़ों वर्ष पहले मौजूद था। इतने लंबे समय में दोनों पौधों के जेनेटिक निर्देशों में काफी बदलाव हो चुके हैं। इसलिए यह जरूरी नहीं कि खीरे में काम करने वाला जेनेटिक स्विच लौकी में भी उसी तरह काम करे।

यही सवाल अब वैज्ञानिकों के लिए अगले चरण के शोध का केंद्र है। अगर इन फसलों में फूलों के लिंग, परागण और फल बनने की प्रक्रिया को जेनेटिक स्तर पर बेहतर ढंग से नियंत्रित करने में सफलता मिलती है, तो भारत की पारंपरिक और लंबे समय से उपेक्षित लौकी-वर्गीय सब्जियों की उत्पादकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।