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भारत की अगुवाई में BRICS का बड़ा फैसला, कृषि सहयोग को मिली नई दिशा

इंदौर / सत्ता संदेश

इंदौर में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) देशों की कृषि मंत्रिस्तरीय और अधिकारी स्तरीय बैठकों का समापन आज एक सर्वसम्मत ‘इंदौर डिक्लेरेशन’ के साथ हुआ जिसमें खाद्य सुरक्षा, किसान कल्याण, जलवायु-सहनीय खेती, कृषि व्यापार और डिजिटल एग्रीकल्चर को नई दिशा देने वाले कई ऐतिहासिक निर्णय लिए गए। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वैश्विक संकट और अनिश्चितताओं के बीच ब्रिक्स देशों की यह बैठक पूरी दुनिया के लिए आशा, विश्वास और सामूहिक जिम्मेदारी का सशक्त संदेश लेकर आई है।

बैठक का स्वरूपताकत और संदर्भ

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने सहयोगी मंत्रियों श्री रामनाथ ठाकुर और श्री भागीरथ चौधरी तथा वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में मीडिया से चर्चा में कहा कि कृषि समूह की मंत्री स्तरीय तथा उससे पहले अधिकारी स्तरीय, दोनों बैठकें सानंद, सार्थक और सफलतापूर्वक संपन्न हुई हैं। उन्होंने बताया कि सदस्य और सहयोगी देशों के लगभग 60 विदेशी प्रतिनिधियों सहित कुल लगभग 100 प्रतिनिधियों ने इस बैठक में भाग लिया जिससे यह स्पष्ट होता है कि कृषि और खाद्य सुरक्षा के प्रश्न पर ब्रिक्स देशों के बीच कितना गहरा जुड़ाव और गंभीरता है।

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ब्रिक्स देश दुनिया की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं, इनके पास वैश्विक कृषि भूमि का करीब 42 प्रतिशत हिस्सा है और विश्व के खाद्यान्न उत्पादन में भी लगभग 42 प्रतिशत योगदान इन्हीं देशों का है, इसलिए इनकी सामूहिक आवाज वैश्विक मंच पर एक प्रभावी शक्ति के रूप में उभरी है।

उन्होंने इस बात पर भी गर्व व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इस बार ब्रिक्स की अध्यक्षता भारत के पास है और ब्रिक्स के कृषि समूह की दोनों बैठकें- अधिकारी स्तर और मंत्री स्तर, इसी परिप्रेक्ष्य में इंदौर में संपन्न हुई हैं।

चार मुख्य प्राथमिकताएंकिसानखाद्य सुरक्षा और जलवायु

श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में चार प्रमुख प्राथमिकताओं पर गहन विमर्श हुआ- दुनिया और ब्रिक्स देशों की खाद्य सुरक्षा (फूड सिक्योरिटी) और पौष्टिक आहार,

ब्रिक्स देशों के बीच कृषि व्यापार और सहयोग को बढ़ावा, जलवायु परिवर्तन की चुनौती के बीच रीजेनेरेटिव फार्मिंग, जलवायु अनुकूल और सतत कृषि पद्धतियाँ, खाद्य प्रणालियों और कृषि क्षेत्र में नवाचार, तकनीक और साझेदारी को मजबूत करना। उन्होंने विशेष रूप से रेखांकित किया कि भरपूर अनाज उपलब्ध हो, साथ ही पोषणयुक्त भोजन भी सभी तक पहुंचे और जो अन्नदाता किसान दुनिया को भोजन देता है, उसकी आजीविका सुरक्षित और बेहतर हो, इन्हीं सवालों को बैठक की सोच के केंद्र में रखा गया।

श्री चौहान ने कहा कि छोटे और सीमांत किसान, जिन्हें कई देशों में फैमिली फार्मर्स भी कहा जाता है, उन पर विशेष फोकस रखते हुए एक अलग सत्र आयोजित किया गया, जिसमें उनकी कठिनाइयों, इनपुट्स की उपलब्धता, ऋण प्रवाह, उचित कीमत और बाजार से जुड़ाव पर विस्तार से चर्चा हुई।

इंदौर डिक्लेरेशन’: किसानकेंद्रित वैश्विक घोषणापत्र

केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह ने बताया कि व्यापक विचार-विमर्श के बाद जो संयुक्त घोषणा पत्र तैयार हुआ, उसे सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया और इंदौर में अपनाए जाने के कारण इसे ‘इंदौर डिक्लेरेशन’ के नाम से जाना जाएगा। उन्होंने कहा कि इस घोषणा पत्र का केंद्र किसान है- किसान को केंद्र में रखकर खाद्य सुरक्षा, पोषण, आजीविका, कृषि व्यापार, नवाचार, निवेश, क्लाइमेट रेज़िलिएंट खेती और सतत कृषि विकास को आगे बढ़ाने की साझा प्रतिबद्धता इस डिक्लेरेशन में दर्ज की गई है।

श्री चौहान ने जोर देकर कहा कि यह दस्तावेज केवल सहमति का कागज़ नहीं है, बल्कि ब्रिक्स देशों की सामूहिक इच्छाशक्ति, साझा उत्तरदायित्व और कृषि को माध्यम बनाकर अधिक सुरक्षित, समृद्ध और टिकाऊ भविष्य गढ़ने की प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सदस्य देशों ने तय किया है कि इंदौर डिक्लेरेशन में दर्ज सभी पहलों को ज़मीन पर उतारने के लिए मिलकर, सामूहिक और सतत प्रयास किए जाएंगे, ताकि इसके लाभ वास्तविक रूप से किसानों, ग्रामीण समुदायों और खाद्य प्रणालियों तक पहुंच सकें।

चार नई संस्थागत पहलेंनेटवर्क और फोरम

1. सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस ऑन एग्रोइकोलॉजी एंड रीजेनेरेटिव एग्रीकल्चर

श्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि पहली बड़ी पहल BRICS Network of Centres of Excellence on Agro-Ecology and Regenerative Agriculture की स्थापना है। उन्होंने कहा कि यह नेटवर्क प्राकृतिक, जैविक और पुनर्योजी कृषि पद्धतियों पर संयुक्त रिसर्च, अनुभव-साझेदारी और क्षमता निर्माण का प्लेटफॉर्म बनेगा, जिसके माध्यम से सदस्य देश एक-दूसरे की सर्वोत्तम प्रथाओं से सीख सकेंगे और जलवायु अनुकूल एवं टिकाऊ कृषि प्रणालियों को बढ़ावा दे सकेंगे।

उन्होंने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत लंबे समय से प्राकृतिक खेती, जैविक खेती और रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग पर जोर देता आया है, अत्यधिक रसायन प्रयोग से होने वाले खतरों के प्रति चेतावनी देता रहा है और अब ब्रिक्स देशों ने भी इसकी महत्ता को स्वीकार करते हुए इस नेटवर्क की स्थापना पर सहमति व्यक्त की है।

केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह ने जानकारी दी कि भारत में इस नेटवर्क के अंतर्गत प्राकृतिक खेती से जुड़े सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान, मोदीपुरम (Indian Institute of Farming Systems Research) को महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है, जो संयुक्त रिसर्च, नॉलेज शेयरिंग और ट्रेनिंग में अहम योगदान देगा।

2. BRICS Network on Digital Agriculture

दूसरी प्रमुख पहल BRICS Network on Digital Agriculture की स्थापना है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, भू-स्थानिक तकनीक, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा आधारित कृषि समाधानों के क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा देगा। श्री चौहान ने कहा कि यह नेटवर्क आधुनिक प्रौद्योगिकी और कृषि नवाचार के बीच एक सशक्त सेतु का काम करेगा, जिससे विकसित हो रही तकनीकों को अधिक मजबूत बनाकर सीधे किसानों तक पहुंचाया जा सके। उन्होंने बताया कि इस नेटवर्क का समन्वय भारत में IIT, दिल्ली द्वारा किया जाएगा, जबकि सभी सदस्य देश इसमें शामिल होकर अपने अनुभव, इनोवेशन और नीतिगत पहल साझा करेंगे, ताकि डिजिटल एग्रीकल्चर के क्षेत्र में सामूहिक प्रगति सुनिश्चित हो सके।

3. Global Forum on Farmers’ Rights in Seed Systems

तीसरी महत्वपूर्ण घोषणा Global Forum on Farmers’ Rights in Seed Systems की स्थापना से जुड़ी है, जिसका उद्देश्य किसानों के बीज संबंधी अधिकारों, देशी बीजों की विविधता और पारंपरिक ज्ञान की रक्षा करना है। श्री चौहान ने कहा कि भारत जैसे देशों में सैकड़ों–हजारों वर्षों से खेती होती आई है और कई परंपरागत बीज, जो हमारी जैव विविधता और सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक हैं, आज अस्तित्व संकट का सामना कर रहे हैं; नई किस्में और हाइब्रिड बीज जरूरी हैं, लेकिन उनके साथ–साथ देसी बीजों का संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि यह फोरम इस बात पर काम करेगा कि परंपरागत बीज विलुप्त न हों, उनकी उपलब्धता बनी रहे, जलवायु परिवर्तन और खाद्य सुरक्षा के संदर्भ में उनकी भूमिका को पहचाना जाए और किसानों के पारंपरिक ज्ञान को भी सहेज कर रखा जाए।

4. BRICS AgriN – Agro Input, Genetic Resources and Information Network

चौथी बड़ी पहल BRICS AgriN (Agro Inputs, Genetic Resources and Information Network) की स्थापना है, जो सदस्य देशों के बीच कृषि आदानों, बीजों और अनुवांशिक संसाधनों के क्षेत्र में सहयोग को सुदृढ़ करेगा। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने बताया कि यह नेटवर्क सूचना आदान-प्रदान, क्षमता निर्माण, तकनीकी सहयोग और साझेदारी को बढ़ावा देगा, ताकि अलग-अलग देशों में उपलब्ध श्रेष्ठ किस्में, जेनेटिक संसाधन और इनपुट्स की जानकारी साझा हो सके और व्यावहारिक समाधान विकसित किए जा सकें।

उन्होंने कहा कि इससे उन देशों और किसानों को खास लाभ मिलेगा, जिन्हें अभी तक ऐसे संसाधनों और सूचनाओं की सीमित पहुंच ही मिल पाती थी।

पहले से चल रही पहलों को मजबूती और व्यापार पर फोकस

श्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि पहले से स्थापित BRICS Agricultural Research Platform को और सुदृढ़ करते हुए एक सशक्त ‘Knowledge to Action Hub’ के रूप में विकसित करने पर सहमति बनी है, ताकि अनुसंधान केवल लैब तक सीमित न रहे, बल्कि तेजी से किसानों के खेत तक पहुंचे।

उन्होंने कहा कि नवाचारों का सीमित दायरे से बाहर निकलकर व्यापक प्रसार हो, अधिक से अधिक देशों और किसानों तक नई तकनीक व समाधान पहुंचें, यही इस हब का प्रमुख लक्ष्य होगा और यही असली ‘Lab to Land’ मॉडल है।

उन्होंने कहा कि कृषि व्यापार और सहयोग के क्षेत्र में निष्पक्ष, समतामूलक, समावेशी और पारदर्शी बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था के प्रति ब्रिक्स देशों ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और भारत द्वारा आयोजित विशेष संवाद के माध्यम से BRICS Grain Exchange जैसी पहल पर विचार-विमर्श को नई गति दी गई।

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने कहा कि सदस्य देशों के बीच वन-टू-वन द्विपक्षीय बैठकों में भी कृषि व्यापार को आसान बनाने, कस्टम और अन्य बाधाओं को कम करने, रिसर्च और तकनीक के आदान-प्रदान तथा व्यापारिक सहयोग बढ़ाने पर विस्तार से चर्चा हुई, जिससे आने वाले समय में आपसी व्यापार को नई दिशा मिलेगी।

जलवायु परिवर्तनएलनीनोकार्बन क्रेडिट और फूड लॉस

श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जब दुनिया जलवायु परिवर्तन के खतरों से जूझ रही है, ऐसे समय में रीजेनेरेटिव फार्मिंग, जलवायु अनुकूल और सतत कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करना साझा जिम्मेदारी है, क्योंकि धरती केवल आज की पीढ़ी के लिए नहीं, आने वाली पीढ़ियों के लिए भी है।

अल-नीनो के संभावित प्रभावों पर प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि इसका असर भारत सहित एशिया-प्रशांत के कई देशों पर पड़ सकता है, लेकिन देश अपनी पूरी तैयारियां कर रहे हैं और ब्रिक्स देशों के बीच सूचनाओं के आदान–प्रदान और सहयोग के माध्यम से इन चुनौतियों का सामना करने की रणनीति पर भी चर्चा हुई है।

कार्बन क्रेडिट के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि इसका एक स्थापित सिस्टम है और जो किसान निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करते हुए कार्बन क्रेडिट हासिल करते हैं, उन्हें लाभ मिलता है; जलवायु अनुकूल खेती, कार्बन-संवेदनशील नीतियां और रीजेनेरेटिव एग्रीकल्चर इस दिशा में व्यावहारिक रास्ते हैं।

फूड लॉस पर तकनीकी चर्चाओं का उल्लेख करते हुए श्री चौहान ने कहा कि कटाई से लेकर बाजार तक जो खाद्य हानि होती है, उसे कैसे कम किया जाए और जो खाद्यान्न बचकर वेस्ट के रूप में कार्बन गैसों का उत्सर्जन बढ़ाता है, उसे कैसे रोका जाए- इन मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

खाद और इनपुट कीमतेंछोटे किसान और टेक्नोलॉजी

वैश्विक संकट, युद्ध और कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि के कारण उर्वरकों की लागत बढ़ने और किसानों पर पड़ने वाले असर के सवाल पर केंद्रीय कृषि मंत्री श्री चौहान ने स्पष्ट कहा कि भारत सरकार ने यह निर्णय लिया है कि किसानों को सस्ती दर पर ही खाद मिलती रहेगी। उन्होंने कहा कि यूरिया की बोरी 266 रुपये और DAP की बोरी 1350 रुपये की दर से ही उपलब्ध कराई जाती रहेगी, बढ़ी हुई लागत का पूरा अतिरिक्त भार केंद्र सरकार अपने ऊपर ले रही है और संकट की इस स्थिति में किसानों के साथ खड़ा रहना सरकार का धर्म है।

उन्होंने यह भी कहा कि पेस्टिसाइड और केमिकल फर्टिलाइजर के असंतुलित और अत्यधिक उपयोग से गंभीर खतरे पैदा होते हैं, इसलिए भारत प्राकृतिक खेती, जैविक खेती और रसायनों के संतुलित उपयोग पर मिशन मोड में काम कर रहा है, ‘खेत बचाओ’ जैसे अभियानों के जरिए जागरूकता बढ़ा रहा है और वैकल्पिक समाधानों को बढ़ावा दे रहा है।

टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और छोटे किसानों तक आधुनिक तकनीक पहुंचाने पर उन्होंने कहा कि हर किसान महंगी मशीनरी नहीं खरीद सकता, इसलिए देश भर में Custom Hiring Centres और समूह आधारित मॉडल के माध्यम से मशीनरी किराये पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है, जिससे छोटे किसान भी ड्रोन, आधुनिक औजार और अन्य उपकरणों का लाभ ले सकें।

युवामहिलाएं और नवाचारभविष्य की दिशा

श्री चौहान ने कहा कि युवाओं और महिलाओं की भागीदारी बढ़े बिना कृषि क्षेत्र में दीर्घकालिक बदलाव संभव नहीं, इसलिए बैठक में इस पर विशेष चर्चा की गई और संयुक्त घोषणा में भी इसे स्पष्ट रूप से दर्ज किया गया है।

उन्होंने बताया कि भारत में agri-startups, agri-business, agri-preneurship और टेक्नोलॉजी आधारित सेवाओं के माध्यम से युवा तेजी से कृषि क्षेत्र की ओर आकर्षित हो रहे हैं, कई हजार स्टार्टअप सक्रिय हैं और त्वरित सफलता के उदाहरण भी सामने आ रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने कहा कि नवाचार और तकनीक के उपयोग में युवा सबसे अधिक प्रभावी भूमिका निभा रहे हैं, इसलिए ब्रिक्स देशों के बीच अनुभव और नीतिगत पहल साझा करके इस प्रवृत्ति को और गति देने की आवश्यकता है, जिससे भविष्य की कृषि अधिक स्मार्ट, टिकाऊ और लाभकारी बन सके।

इंदौरवैश्विक कृषि कूटनीति का नया मंच

इंदौर की मेजबानी की विशेष प्रशंसा करते हुए केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मालवा की परंपरा के अनुरूप यहां जिस आत्मीय आतिथ्य और सत्कार से प्रतिनिधियों का स्वागत हुआ, उससे सभी ‘गद्गद और प्रसन्न’ है; 56 दुकान, राजवाड़ा और मांडू की सैर उनके मन में लंबे समय तक स्मृति के रूप में अंकित रहेगी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘एक पेड़ मां के नाम’ आह्वान को आगे बढ़ाते हुए मेघदूत गार्डन में सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने वृक्षारोपण कर ‘ब्रिक्स वाटिका’ (वृक्षारोपण स्थल) की स्थापना की, इससे पहले यहां ग्लोबल पार्क और यूरो–रशियन पार्क भी स्थापित हो चुके हैं। चौहान ने मध्य प्रदेश सरकार, मुख्यमंत्री और उनकी टीम, साथ ही भारत सरकार के कृषि विदेश, पशुपालन व मत्स्य, वाणिज्य, फूड प्रोसेसिंग, नीति आयोग सहित सभी विभागों के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि यह आयोजन ‘Whole of Government Approach’ और ‘Team India’ की सफलता का जीवंत उदाहरण है, जिसने ब्रिक्स देशों की इंदौर बैठक को अभूतपूर्व और ऐतिहासिक बना दिया।

डीआरडीओ ने राष्ट्र की अगली पीढ़ी की रक्षा क्षमताओं का किया प्रदर्शन

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने राष्ट्र की रक्षा तैयारियों को और अधिक सुदृढ़ करते हुए, दुश्मन के हर प्रकार के संभावित खतरों से निपटने में सक्षम कई महत्वपूर्ण तकनीकों का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया है। इस क्रम में, 10 और 11 जून को लगातार तीन फ्लाइट-टेस्ट किए गए, जिनका उद्देश्य लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों के विरुद्ध मल्टी-लेयर्ड डिफेंस और मध्यम दूरी की एंटी-शिप क्षमता को प्रदर्शित करना था।


इस दौरान मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस क्षमता का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया गया, जिसमें इंटरसेप्टर मिसाइलों ने अपने निर्धारित लक्ष्यों को सफलतापूर्वक भेद दिया। इन सिस्टम्स को मिसाइल से जुड़े नए खतरों का सामना करने के लिए आधुनिक तकनीकों के साथ डिजाइन और विकसित किया गया है।


इन परीक्षणों ने भारत को उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल कर दिया है, जिनके पास अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों तक को रोकने की क्षमता वाली बीएमडी प्रणाली मौजूद है। साथ ही, नौसेना की मध्यम दूरी की एंटी-शिप मिसाइल का पहला फ़्लाइट-टेस्ट भी सफलतापूर्वक किया गया। इन परीक्षणों का अवलोकन डीआरडीओ और रक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा किया गया।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इन महत्वपूर्ण तकनीकों के सफल प्रदर्शन के लिए डीआरडीओ को बधाई दी है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष श्री राजेश कुमार सिंह ने इन परीक्षणों की बारीकी से निगरानी की और डीआरडीओ तथा इंडस्ट्री के सम्मिलित प्रयासों की सराहना की।

दुनिया में शांति के लिए, लेखकों को फिर से एक्टिव लिटरेचर बनाने की ज़रूरत है- डॉ. एस पी सिंह

लुधियाना / सत्ता संदेश

गुजरांवाला गुरु नानक खालसा कॉलेज, लुधियाना और पंजाबी लोक विरासत अकादमी द्वारा मिलकर आयोजित एक समारोह की अध्यक्षता करते हुए, दुनिया में शांति आंदोलन के लीडर, पंजाबी कवि सुरजीत रामपुरी के जन्म शताब्दी वर्ष का उद्घाटन करते हुए, गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी के पूर्व वाइस चांसलर डॉ. एस पी सिंह ने कहा है कि दुनिया में शांति के लिए पंजाबी लेखकों को फिर से एकजुट होने की ज़रूरत है। सुरजीत रामपुरी, प्रो. मोहन सिंह, अजायब चित्रकार, संतोख सिंह धीर, तेरा सिंह चान और प्यारा सिंह सेहराई जैसे लेखकों को हमारी सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम हर युद्ध भड़काने वाले के खिलाफ अपनी आवाज़ उठाएं। अगर आज के ज़्यादातर लेखक सिर्फ दर्शकों की तरह युद्ध देख रहे हैं, तो इससे क्रूर साम्राज्य के दांत और तेज़ हो जाएंगे। इस अवसर पर उन्होंने डॉ. लखविंदर सिंह जोहल के संपादन में प्रकाशित पत्रिका “कवि लोक” के “सुरजीत रामपुरी विशेषांक” को प्रो. जगमोहन सिंह (शहीद भगत सिंह जी के भतीजे), प्रो. गुरभजन सिंह गिल, स. हरशरण सिंह नरूला और प्रिंसिपल डॉ. राजिंदर कौर मल्होत्रा ​​के साथ समर्पित किया। कवि लोक के इस विशेषांक का संपादन सुरिंदर रामपुरी ने किया है। इस अवसर पर बोलते हुए प्रो. जगमोहन सिंह ने कहा कि मैं 1960-61 में लेखक संघ रामपुर की बैठकों में लगातार शामिल होता रहा हूं और लेखकों की संगठन शक्ति को देखता रहा हूं। मैंने सुरजीत रामपुरी, गुरचरण रामपुरी और मल्ल सिंह रामपुरी को रामपुर के पीपल के नीचे नए लेखकों के लिए प्रेरणा बनते देखा है। पंजाबी लोक विरासत अकादमी लुधियाना के चेयरमैन प्रो. गुरभजन सिंह गिल ने कहा कि आज कवि लोक के सुरजीत रामपुरी विशेषांक के बहाने हमें यह विचार करना होगा कि अपने पूर्वजों के प्रति हमारा नजरिया कितना जिम्मेदाराना है। डॉ. लखविंदर जोहल और सुरिंदर रामपुरी ने पहल की है और हमें भी जगाया है।


इस इवेंट में डॉ. लखविंदर सिंह जोहल, प्रो. और सुरिंदर रामपुरी ने भी सुरजीत रामपुरी पर अपने विचार रखे। डॉ. जोहल ने कहा कि दूरदर्शन के DDG एस. अलबेल सिंह ग्रेवाल की सलाह पर उन्होंने सुरजीत रामपुरी पर एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनाई थी।


सुरिंदर रामपुरी ने कहा कि 1984 में सुरजीत रामपुरी के रिटायर होने के बाद, रामपुर में रहने के दौरान उनके साथ उनके करीबी रिश्ते थे। उन्होंने बताया कि कवि लोक के इस अंक में गुरबचन सिंह भुल्लर, डॉ. वनीता, धर्म सिंह कमीआना, डॉ. परमिंदर सिंह बेनीपाल, डॉ. गगन दीप, डॉ. सिमरनजीत सिंह, डॉ. आतम हमराही, डॉ. सुखपाल कौर समराला, डॉ. सरबजीत सिंह, गुरभजन सिंह गिल, सुरजीत रामपुरी की बेटी कमलप्रीत कौर, उनके छोटे भाई हरनेक सिंह मांगट, राम सरूप अणखी, भूपिंदर सिंह पीसीएस, तेलू राम कुहारा, डॉ. रणधीर सिंह चंद, डॉ. सरदूल सिंह औजला, प्रिंसिपल तख्त सिंह, प्रो. ब्रह्मजगदीश सिंह, प्रिं. करतार सिंह कालरा, डॉ. बलजीत कौर रियार, नॉवेलिस्ट जसवंत सिंह कंवल, रामपुरी के हमेशा साथ देने वाले अजायब चिटकर और सुखमिंदर रामपुरी, भगवंत सिंह, -अमर हांडा, डॉ. एस. एन. सेवक, गुरदयाल दलाल, मनमोहन सिंह दौन, प्रो. सुलखन मीत, सुरिंदर रामपुरी, उनकी कविता और मिलिट्री लाइफ की यादों पर उनकी ऑटोबायोग्राफी और रामपुर स्कूल ऑफ पोएट्री पब्लिश हो चुकी हैं। इसके अलावा, सुरजीत रामपुरी जी की बायोग्राफी, कुछ चुनी हुई रचनाएं, इसके अलावा दलजीत कौर चाना, उल्फत बाजवा, सतीश गुलाटी, प्रो. रविंदर भट्टल, हरभजन सिंह मंगत, साधु राम शर्मा रामपुरी, गुरसेवक सिंह ढिल्लों की रचनाएं शामिल की गई हैं।

डॉ. मंदीप कौर रंधावा ने स्टेज का संचालन किया, जबकि त्रैलोचन लोची और गुरसेवक सिंह ढिल्लों की रचनाएं तरन्नम में सुनाई गईं और माहौल सुरीला हो गया। इस अवसर पर गुरदयाल दलाल, तेलू राम कोहाड़ा, दीप दिलबर, सतीश गुलीटी, राजदीप तूर, पंजाबी साहित्य अकादमी के उपाध्यक्ष सहजप्रीत सिंह मांगट, जिला भाषा अधिकारी डॉ. संदीप शर्मा, लेखक संघ रामपुर के पूर्व अध्यक्ष अनिल फतेहगढ़ जट्टां, गुरसेवक सिंह ढिल्लों तरन सिंह बल, अजैब चित्कार के पुत्र सुखपाल सिंह, प्रिंसिपल परमजीत सिंह ग्रेवाल, मंदीप कौर भामरा, प्रो. अमनजीत कौर, दीप जगदीप सिंह, प्रो. मनीषा शर्मा, नवनीत सिंह सेखा और एस. अवतार सिंह के राजिंदर सिंह संधू मौजूद थे।

गोयल की अगुवाई में चाइल्ड वेलफेयर काउंसिल की अहम मीटिंग, दो प्रोजेक्ट्स पर फोकस
  • चाइल्ड वेलफेयर के लिए काउंसिल एक्टिव हुई, ‘प्रोजेक्ट स्पेस’ और अर्ली इंटरवेंशन सेंटर को मिलेगी मजबूती
  • लुधियाना चाइल्ड वेलफेयर काउंसिल ने गवर्नेंस और इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने के लिए उठाए ठोस कदम
  • डिप्टी कमिश्नर को सौंपी जाएंगी दो डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट, स्टेट लेवल पर मदद लेने की तैयारी

लुधियाना / सत्ता संदेश

चाइल्ड वेलफेयर काउंसिल, लुधियाना को फिर से खड़ा करने के लिए दो बड़े प्रोजेक्ट्स और प्लान किए गए गवर्नेंस पर फोकस लुधियाना डिस्ट्रिक्ट चाइल्ड वेलफेयर इंफ्रास्ट्रक्चर और गवर्नेंस को बढ़ाने के एक अहम कदम के तौर पर, चाइल्ड वेलफेयर काउंसिल (CWC) की एक अहम मीटिंग लुधियाना के सतलुज क्लब में असिस्टेंट कमिश्नर (जनरल), लुधियाना पायल गोयल की अध्यक्षता में हुई ताकि काउंसिल को स्ट्रेटेजिकली एक्टिव और फिर से खड़ा किया जा सके।

इस मीटिंग में डिस्ट्रिक्ट रेड क्रॉस सोसाइटी लुधियाना के सेक्रेटरी नवनीत जोशी, मेडिकल ऑफिसर डॉ. अमनदीप कौर और डॉ. मीटिंग में गुरप्रीत सिंह, आउटरीच वर्कर रितु सूद, प्रिंसिपल हरनीत सिंह भाटिया के साथ-साथ कमेटी के खास मेंबर श्रीमती सहित जाने-माने लोगों ने एक्टिव हिस्सा लिया। पप्पू अविनाश, पूनम बिंद्रा, परवीन नारंग, सपना मित्तल, सुखमिंदर सिंह कैरों और किरणजीत कौर गिल।

चेयरपर्सन ने ज़ोर दिया कि चाइल्ड वेलफेयर काउंसिल (CWC) को एक प्रोएक्टिव, हाई-फंक्शनिंग ऑर्गेनाइज़ेशनल बॉडी में बदलना चाहिए जो टाइमलाइन और मेज़रेबल रिज़ल्ट पर चले। लगातार रफ़्तार बनाए रखने के लिए, काउंसिल ने चल रहे इनिशिएटिव्स का रिव्यू करने और एडमिनिस्ट्रेटिव रुकावटों को दूर करने के लिए महीने में एक बार फॉर्मल मीटिंग करने का मैंडेट बनाया। इसके अलावा, फाइनेंशियल मैनेजमेंट, ऑडिटिंग और कॉर्पोरेट कम्प्लायंस को स्ट्रीमलाइन करने के लिए, पूनम बिंद्रा को ऑफिशियली ट्रेज़रर अपॉइंट किया गया और काउंसिल ने शुरुआती काम शुरू करने और आने वाले प्रोजेक्ट्स को सपोर्ट करने के लिए तुरंत 10 लाख रुपये जुटाने का टारगेट रखा। मज़बूत एडमिनिस्ट्रेटिव और स्टेट-लेवल सपोर्ट पाने के लिए, काउंसिल ने लुधियाना के डिप्टी कमिश्नर (DC), हिमांशु जैन को दो डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट्स (DPRs) वाली एक फॉर्मल फ़ाइल जमा करने के लिए एक स्ट्रेटेजिक एक्शन प्लान अपनाया है।

डिप्टी कमिश्नर के रिव्यू के बाद, चाइल्ड वेलफेयर काउंसिल इन खास पहलों को पंजाब के मुख्यमंत्री के सामने पेश करेगी, जो स्टेट चाइल्ड वेलफेयर काउंसिल के वाइस प्रेसिडेंट भी हैं, ताकि स्टेट-लेवल सपोर्ट और बजट का बंटवारा हो सके। तुरंत लागू करने की कोशिशों को दो अलग-अलग प्रोजेक्ट कैटेगरी में बांटा गया है। कैटेगरी A के लिए, जिसमें “प्रोजेक्ट स्पेस” शामिल है, इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स और टाइमलाइन को फाइनल करने के लिए GLADA के एडिशनल चीफ एडमिनिस्ट्रेटर (ACA) के साथ तुरंत एक डेडिकेटेड कोऑर्डिनेशन मीटिंग की जाएगी। कैटेगरी B के लिए, जिसमें “ACEs अर्ली इंटरवेंशन सेंटर” शामिल है, चाइल्ड वेलफेयर काउंसिल से एक खास वर्किंग सब-कमेटी बनाई गई है जो खास तौर पर ऑपरेशनल ज़रूरतों पर नज़र रखेगी, जिसे हफ्ते में एक बार जल्दी रिव्यू मीटिंग करने का काम सौंपा गया है।

सेशन खत्म करते हुए, चेयरपर्सन ने सभी सदस्यों से प्रोफेशनल अप्रोच बनाए रखने की अपील की, और दोहराया कि इन ज़रूरी वेलफेयर पहलों की सफलता पूरी तरह से उनकी एक्टिव भागीदारी पर निर्भर करती है। मीटिंग चेयरपर्सन के धन्यवाद प्रस्ताव के साथ खत्म हुई।

‘मिशन क्लीन पंजाब’ के लुधियाना पहुंचे हरजोत सिंह बैंस…सफाई सेवकों के साथ ली चाय संग चुस्की
  • आप सफाई सेवकों से शहरों को स्वच्छ रखने के ढंग-तरीके जान सकते हैं : हरजोत बैंस
  • मिशन क्लीन पंजाब’ को सिर्फ फाइलों और जुर्मानों से नहीं चलाया जा सकता : स्थानीय निकाय मंत्री

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

लुधियाना के डी.एम.सी. अस्पताल के बाहर सुबह का माहौल आम तौर पर एक जैसा ही होता है; एम्बुलेंसों के सायरन, मरीजों के रिशतेदारों की भागदौड़, चाय बेचने वालों की आवाजें लगाते हैं। लेकिन शुक्रवार सुबह उस समय यह माहौल बदला हुआ दिखा, जब पंजाब के स्थानीय निकाय मंत्री स. हरजोत सिंह बैंस कार  से बाहर निकले। उनके साथ कोई काफिला नहीं था, कोई लाल बत्ती वाली गाड़ी नहीं थी, कोई अधिकारी फाइलें लेकर उनके पीछे नहीं आ रहा था। वह लुधियाना नगर निगम के क्षेत्रों की अचानक चेकिंग करने आए थे। वह सीधे सफाई सेवकों की एक टीम के पास गए जो अस्पताल के पास एक सड़क की सफाई कर रहे थे।

स्थानीय निकाय मंत्री ने एक छोटा-सा स्टूल खींचा, जिसका इस्तेमाल सड़क किनारे चाय बेचने वाले करते हैं और सफाई कर्मचारियों के बीच बैठ गए और कहा, “चाय लाओ, बैठो, आओ विचार-विमर्श करें।” उन्होंने सफाई सेवकों से सफाई, जल की निकासी और सुरक्षा उपकरणों के बारे में फीडबैक लेने में लगभग 20 मिनट बिताए।

स. हरजोत सिंह बैंस ने कहा, “जो लोग इस शहर को हर रोज साफ रखते हैं, वे इसे बेहतर बनाने के सबसे अच्छे तरीके बता सकते हैं। आप बंद कमरे में बैठकर इन तरीकों के बारे में नहीं सीख सकते। इस बारे में आपको सफाई सेवक बेहतर ढंग से बता सकते हैं।”

स. बैंस ने कहा, “मिशन क्लीन पंजाब सिर्फ फाइलों और जुर्मानों से नहीं चलेगा। अगर हम स्वच्छ शहर चाहते हैं तो हमें उन व्यक्तियों का सम्मान करना चाहिए जो उन्हें स्वच्छ रखते हैं। सम्मान को प्राथमिकता दो। बाकी सब काम उसके बाद होंगे। मुख्यमंत्री स. भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार सफाई सेवकों के कल्याण के लिए पूरी तरह वचनबद्ध है।”

पूर्वोत्तर में डीआरआई की बड़ी कार्रवाई: 14 करोड़ रुपये की 71 लाख विदेशी सिगरेट स्टिक जब्त, चार गिरफ्तार

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

विदेशी सिगरेट की तस्करी के विरूद्ध बड़ी कार्रवाई में, राजस्व खुफिया निदेशालय- डीआरआई ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में कई समन्वित अभियान चलाए हैं।

पूर्वोत्तर क्षेत्र में मई 2026 से, डीआरआई के अभियानों में तस्करी से लाए गए विदेशी मूल की 71 लाख सिगरेट स्टिक जब्त की गई है, जिनका कुल मूल्य लगभग 14 करोड़ रुपये है। इस सिलसिले में 4 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

डीआरआई ने प्रमुख अभियानों में 11 जून 2026 को मिजोरम में मोंड, एक्ससो, ओआरआईएस और पैट्रॉन जैसे ब्रांडों की 45 लाख से अधिक विदेशी सिगरेट जब्त किए। यह अभियान असम राइफल्स की 34वीं बटालियन की सहायता से चलाया गया। इस मामले में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है। प्रारंभिक जांच से पता चला कि सिगरेट की तस्करी भारत-म्यांमार सीमा पर स्थित जोखावथर सेक्टर के रास्ते म्यांमार से की गई थी।

पिछले कुछ सप्ताह में चलाए गए विभिन्न अभियानों में विदेशी ब्रांड के और 26 लाख सिगरेट जब्त किए गए हैं और 3 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

गृह मंत्री अमित शाह ने अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा तैयारियों पर की बैठक

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में श्री अमरनाथ यात्रा 2026 की तैयारियों पर सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में जम्मू-कश्मीर के उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, केंद्रीय गृह सचिव, थलसेना प्रमुख, आसूचना ब्यूरो के निदेशक, जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव एवं पुलिस महानिदेशक, केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के महानिदेशक और गृह मंत्रालय, भारतीय सेना और जम्मू एवं कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।


गृह मंत्री ने निर्देश दिया कि सभी सुरक्षा एजेंसियों के समन्वित प्रयासों से यात्रा के लिए एकीकृत एवं अभेद्य सुरक्षा कवच तैयार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था में ड्रोन, CCTV निगरानी, सर्विलांस सिस्टम तथा अन्य आधुनिक तकनीकों के व्यापक उपयोग के साथ पारंपरिक सुरक्षा तंत्र को और सुदृढ़ किया जाए।


अमित शाह ने कहा कि यात्रा के दौरान विभिन्न CAPFs और जम्मू-कश्मीर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी शिविर स्थलों पर निरंतर मौजूद रहकर व्यवस्थाओं की निगरानी करें। साथ ही, श्रद्धालुओं के पंजीकरण, आवास, स्वास्थ्य सेवाओं एवं आपदा प्रबंधन सहित सभी आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित हो।


गृह मंत्री ने कहा कि मौसम की स्थिति एवं पूर्वानुमान के अनुरूप ही श्रद्धालुओं के जत्थों के आगे बढ़ाने की व्यवस्था की जाए। साथ ही, यात्रा मार्ग के अतिरिक्त अन्य प्रमुख पर्यटन स्थलों पर सुदृढ़ सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि श्रद्धालु सुरक्षित रूप से पर्यटन का आनंद ले सकें।
बैठक में गृह मंत्री को बताया गया कि यात्रा से जुड़े स्थानीय लोगों एवं पशुओं के पंजीकरण की व्यवस्था के साथ उनके लिए QR कोड युक्त पहचान पत्र जारी किए जाएंगे। इसके अलावा, पशुओं के स्वास्थ्य परीक्षण हेतु शिविरों का आयोजन किया जाएगा।

छोटे शहरों से ग्लोबल कैंपस तक: स्कॉलरशिप कैसे सपनों को उड़ान भरने में मदद करती है : सुधांश पंत

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारत के गांवों और छोटे शहरों से लेकर ऑक्सफ़ोर्ड और जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के गलियारों और हरे-भरे बगीचों तक, नेशनल ओवरसीज़ स्कॉलरशिप (NOS) स्कीम अलग-अलग महाद्वीपों में उम्मीदों की यात्रा को ताकत दे रही है।


त्रिपुरा के एक दूर-दराज़ और पिछड़े गांव में, दीपायन भौमिक ने कभी आर्किटेक्ट बनने का सपना देखा था, जबकि वे इंटरनेशनल एजुकेशन से जुड़े मौकों से बहुत दूर पले-बढ़े थे। फिर भी, पढ़ाई में लगन और नेशनल ओवरसीज़ स्कॉलरशिप के सपोर्ट से, दीपायन ने जर्मनी की स्टटगार्ट यूनिवर्सिटी से आर्किटेक्चर और अर्बन डिज़ाइन में मास्टर ऑफ़ साइंस की डिग्री हासिल की।


जर्मनी में रहने, पढ़ाई करने और काम करने से उन्हें एक अलग-अलग तरह के इंटरनेशनल माहौल का सामना करना पड़ा, जिसने न सिर्फ़ उनकी पढ़ाई की समझ को बदला, बल्कि समाज, सस्टेनेबिलिटी और अर्बन डेवलपमेंट के प्रति उनके नज़रिए को भी बदल दिया। आर्किटेक्चर और अर्बन डिज़ाइन के लिए भारतीय और जर्मन दोनों तरीकों से प्रेरणा लेकर, वे अपनी सीख का इस्तेमाल करने के इरादे से भारत लौट आए। आज, दीपायन अपनी खुद की आर्किटेक्चरल प्रैक्टिस चलाते हैं, अपने प्रोफेशनल काम से समाज में योगदान देते हैं और दूसरों के लिए मौके भी बनाते हैं। वह उन सैकड़ों अनुसूचित जाति के स्टूडेंट्स में से एक हैं जिनकी ज़िंदगी की दिशा नेशनल ओवरसीज़ स्कॉलरशिप (NOS) की वजह से पूरी तरह बदल गई है। यह भारत सरकार की एक पहल है जो टॉप विदेशी यूनिवर्सिटीज़ में पोस्टग्रेजुएट और डॉक्टरेट की पढ़ाई के लिए फंड देती है। इस स्कीम में ट्यूशन, ट्रैवल, रहने का खर्च और दूसरी एकेडमिक ज़रूरतें शामिल हैं, जिससे यह पक्का होता है कि किसी वर्ल्ड-क्लास यूनिवर्सिटी में एडमिशन मिलना स्टूडेंट के परिवार की आर्थिक हालत पर निर्भर नहीं करता।


ऐसी सैकड़ों कहानियाँ हैं जहाँ परिवारों ने पहली बार पासपोर्ट देखा है और ऐसे कई माता-पिता हैं जो अपने बच्चों को दूर देशों में भेज देते हैं, जबकि उन्होंने खुद देश के कॉलेजों में कदम भी नहीं रखा है।


2014 से, NOS स्कीम ने UK से जर्मनी, US से ऑस्ट्रेलिया तक, 21 देशों की यूनिवर्सिटीज़ में सालाना 8 लाख रुपये से कम कमाने वाले परिवारों के स्टूडेंट्स की मदद की है। ऐसे कई परिवारों के लिए, विदेशी यूनिवर्सिटी में एडमिशन के लिए अप्लाई करने के लिए भी उन्हें पास के किसी साइबरकैफ़े में जाना पड़ता था। डॉ. वैथिलिंगम राजेंद्रन, एक सीनियर साइंटिस्ट, जिन्होंने यूनाइटेड स्टेट्स में ओक्लाहोमा स्टेट यूनिवर्सिटी से केमिस्ट्री में PhD की, दिहाड़ी मज़दूरी करने वाले माता-पिता के बेटे के तौर पर बड़े हुए। उन्होंने अपनी स्कूलिंग और अंडरग्रेजुएट एजुकेशन पास के सरकारी इंस्टीट्यूशन से पूरी की और हायर स्टडीज़ के दौरान पैसे की तंगी से जूझते रहे। फिर भी, पक्के इरादे और लगातार कोशिशों से, उन्होंने अपनी डॉक्टरेट की पढ़ाई कामयाबी से पूरी की और एक शानदार साइंटिफिक करियर बनाया।


ये स्टूडेंट्स सिर्फ़ एक डिग्री या ज़्यादा सैलरी वाली नौकरी नहीं लाते, बल्कि अपने समुदाय के लोगों के लिए उम्मीदें, कई मौके और उम्मीदें भी लाते हैं। नेशनल ओवरसीज़ स्कॉलरशिप जैसी स्कॉलरशिप को अक्सर सिर्फ़ फाइनेंशियल मदद प्रोग्राम के तौर पर देखा जाता है। असल में, ये ह्यूमन कैपिटल और नॉलेज क्रिएशन में लंबे समय के इन्वेस्टमेंट हैं। डेवलप्ड देश सिर्फ़ सड़कों, पुलों या एयरपोर्ट से नहीं बनते। वे क्लासरूम में भी बनते हैं। हर स्टूडेंट जो ऐसी स्कॉलरशिप लेकर बॉर्डर पार करता है, वह भारत के विज़न ‘विकसित भारत@2047’ में योगदान देने का कॉन्फिडेंस और काबिलियत लेकर वापस आता है। यह एक स्कॉलरशिप का बढ़ता हुआ रिटर्न है। स्कॉलरशिप का महत्व सिर्फ़ पढ़ाई के लिए पैसे देने में ही नहीं है, बल्कि उन स्टूडेंट्स के लिए एक स्थिरता का इकोसिस्टम बनाने में भी है जो अक्सर पहली बार एकेडमिक और सोशल दुनिया में कदम रख रहे होते हैं। कई पहली पीढ़ी के स्टूडेंट्स के लिए, चुनौती सिर्फ़ एडमिशन पाने तक ही सीमित नहीं होती। यह उसके बाद के सफ़र को बनाए रखना, महंगे शहरों में रहने का खर्च मैनेज करना, किताबें या डिजिटल डिवाइस खरीदना, रहने का खर्च उठाना और ऐसे मौकों के साथ आने वाले दूसरे खर्चों को भी मैनेज करना होता है। स्कॉलरशिप एक ज़रूरी सपोर्ट सिस्टम की तरह काम करती है जो स्टूडेंट्स को रोज़मर्रा की ऐसी चुनौतियों की चिंता करने के बजाय सीखने पर ध्यान देने में मदद करती है।


स्कॉलरशिप बिना किसी दिखावे के चलती है। कोई दिखावटी कैंपेन नहीं होते और कोई सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट नहीं होता। 12 सालों में, 764 स्टूडेंट्स को उनकी एकेडमिक मेरिट के आधार पर सबसे जाने-माने इंटरनेशनल कॉलेजों में एडमिशन लेने के लिए चुना गया है। कई मायनों में, नेशनल ओवरसीज़ स्कॉलरशिप स्कीम हर स्टूडेंट को दी जाने वाली मदद के कारण अलग है। किसी बड़ी ग्लोबल यूनिवर्सिटी में हायर एजुकेशन कर रहे एक अकेले स्कॉलर के लिए, कोर्स के दौरान ट्यूशन फीस, रहने का खर्च, हवाई जहाज का किराया, इंश्योरेंस और दूसरे एकेडमिक खर्चों को कवर करने वाली कुल फाइनेंशियल मदद अक्सर 1 करोड़ रुपये से ज़्यादा होती है और 1.5 करोड़ रुपये तक भी जा सकती है। 2 करोड़।
दुनिया में कुछ ही पब्लिक स्कॉलरशिप प्रोग्राम हैं जो समाज में आगे बढ़ने की चाह रखने वाले बैकग्राउंड के किसी एक स्टूडेंट पर इतना बड़ा इन्वेस्टमेंट करते हैं। इस सपोर्ट की अहमियत सिर्फ़ दी जाने वाली फाइनेंशियल मदद में ही नहीं है, बल्कि इससे क्या हासिल होने वाला है, इसमें भी है। यह फाइनेंशियल मदद पक्का करने के लिए एक नेशनल कमिटमेंट की सोच रखता है।

टिकाऊ सड़क पुनर्निर्माण और गड्ढों की मरम्मत के लिए CSIR-CRRI और MCD की रणनीतिक साझेदारी

दिल्ली / सत्ता संदेश

CSIR – केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान और दिल्ली नगर निगम के बीच 10 जून को सड़कों के कार्यात्मक और संरचनात्मक मूल्यांकन, निर्माण गुणवत्ता पर्यवेक्षण और एमसीडी के इंजीनियरों तथा कर्मचारियों की क्षमता निर्माण के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओए) पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर, सीएसआईआर-सीआरआरआई द्वारा विकसित लौह और इस्पात स्लैग समुच्चय आधारित त्वरित गड्ढा मरम्मत तकनीक – इकोफिक्स के कार्यान्वयन के लिए एक द्विपक्षीय प्रौद्योगिकी प्रबंधन समझौते पर भी हस्ताक्षर किए गए।

इस साझेदारी का उद्देश्य वैज्ञानिक सड़क मूल्यांकन, गुणवत्ता आश्वासन और नवीन रखरखाव प्रौद्योगिकियों को अपनाते हुए दिल्ली के सड़क बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता, स्थायित्व और निरंतरता को बढ़ाना है।

इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए MCD आयुक्त संजीव खीरवार, आईएएस ने शहरी सड़क नियोजन और रखरखाव में प्रौद्योगिकी आधारित दृष्टिकोणों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह सहयोग एमसीडी की तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करेगा और साथ ही इकोफिक्स जैसी तकनीकों के माध्यम से त्वरित और अधिक टिकाऊ मरम्मत को सक्षम बनाएगा।

CSIR- के निदेशक डॉ. चौधरी रवि शेखर ने अतिथिगणों का स्वागत करते हुए सड़क क्षेत्र में संस्थान के सात दशकों के योगदान पर प्रकाश डाला और कहा कि यह साझेदारी एमसीडी को सड़क मूल्यांकन, गुणवत्ता पर्यवेक्षण और टिकाऊ प्रौद्योगिकियों के कार्यान्वयन में तकनीकी सहायता प्रदान करेगी। उन्होंने आगे कहा कि स्टील स्लैग रोड टेक्नोलॉजी- इकोफिक्स, रेजुपेव और एमएसएस+ जैसी प्रौद्योगिकियां संसाधन संरक्षण, चक्रीय अर्थव्यवस्था के सिद्धांतों और कार्बन उत्सर्जन में कमी को बढ़ावा देती हैं।

इस पहल का नेतृत्व CSIR-CRRI के फ्लेक्सिबल पेवमेंट डिवीजन के प्रमुख सतीश पांडे कर रहे हैं, जो स्टील स्लैग रोड और इकोफिक्स तकनीक के आविष्कारक भी हैं। उन्होंने प्रतिभागियों को सहयोग के उद्देश्यों और अपेक्षित परिणामों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक सड़क मूल्यांकन, गुणवत्ता पर्यवेक्षण और उन्नत रखरखाव तकनीकों को अपनाने से सड़क की उपयोगिता, टिकाऊपन और जीवनचक्र प्रदर्शन में सुधार होगा, साथ ही रखरखाव संबंधी व्यवधानों को भी कम किया जा सकेगा।

कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण इकोफिक्स के उपयोग के लिए प्रौद्योगिकी प्रबंधन समझौते पर हस्ताक्षर करना था। इकोफिक्स एक त्वरित और टिकाऊ गड्ढा मरम्मत तकनीक है जिसे संसाधित लोहे और इस्पात स्लैग एग्रीगेट का उपयोग करके विकसित किया गया है। यह तकनीक औद्योगिक उप-उत्पादों का उपयोग करके टिकाऊ सड़क रखरखाव के माध्यम से अपशिष्ट से धन-संपन्नता के राष्ट्रीय दृष्टिकोण का समर्थन करती है, जिससे स्थायित्व में सुधार होता है और वायु प्रदूषण जैसे पर्यावरणीय प्रभावों को कम किया जा सकता है। बेहतर सड़क स्थिति और समय पर रखरखाव से सड़क पर धूल का उत्पादन कम होने की उम्मीद है, जबकि इस्पात स्लैग और पुनर्चक्रण-आधारित तकनीकों का उपयोग प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को बढ़ावा देता है और चक्रीय अर्थव्यवस्था प्रथाओं का समर्थन करता है।

जेनेवा में 114वें अंतर्राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन के दौरान सामाजिक न्याय समन्वय समूह की वैश्विक गठबंधन बैठक आयोजित

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

केन्द्रीय श्रम एवं रोजगार तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे स्विट्जरलैंड के जेनेवा में आयोजित हो रहे 114वें अंतर्राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन (आईएलसी) में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रही हैं।

शोभा करंदलाजे ने 11 जून 2026 को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में 114वें अंतर्राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन (आईएलसी) के दौरान आयोजित वैश्विक सामाजिक न्याय गठबंधन (जीसीएसजे) के समन्वय समूह की बैठक में भाग लिया।

अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन द्वारा 2023 में स्थापित वैश्विक सामाजिक न्याय गठबंधन, बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने और राजनीतिक प्रतिबद्धताओं को ठोस कार्रवाई में बदलने के लिए बनाया गया एक बहु-हितधारक मंच है। विभिन्न भागीदारों को एक साथ लाकर, यह गठबंधन बहुपक्षीय प्रणाली में सामंजस्य, समन्वय और दक्षता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

इस बैठक के दौरान करंदलाजे ने आईएलओ के महानिदेशक, बांग्लादेश, मोल्दोवा, ब्राजील, स्विट्जरलैंड के श्रम मंत्रियों, बेल्जियम के उप मंत्री और अन्य विशिष्ट भागीदारों से मुलाकात की।

भारत ने आईएलओ, सरकारों, नियोक्ताओं और श्रमिकों के संगठनों और अन्य हितधारकों के साथ मिलकर गठबंधन के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिए देश की प्रतिबद्धता की भी पुष्टि की।

भारत समावेशी विकास को बढ़ावा देने, सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों को सुदृढ़ करने, जिम्मेदार व्यावसायिक कार्यप्रणालियों का समर्थन करने और न्यायसंगत एवं लचीले श्रम बाजारों के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के माध्यम से गठबंधन के कार्य के अगले चरण में सक्रिय रूप से योगदान देने के लिए तत्पर है।