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जिला प्रशासन रोकथाम योग्य मातृ मृत्यु को समाप्त करने के लिए Dayanand Medical College & Hospital के साथ एमओयू करेगा

उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं में जीवनरक्षक देखभाल सुनिश्चित करने के लिए डिप्टी कमिश्नर ने मिशन जीवनी के तहत रेफरल और ‘गोल्डन ऑवर’ पर जोर दिया

लुधियाना / सत्ता संदेश

मातृ मृत्यु दर को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए जिला प्रशासन ने Dayanand Medical College & Hospital के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) करने की घोषणा की है। इस पहल के तहत सिविल अस्पताल से हर माह कम से कम 20 उच्च जोखिम और अत्यधिक उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था के मामलों को विशेषज्ञ और समयबद्ध उपचार उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही नर्सिंग छात्र स्वयंसेवकों द्वारा हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी की ट्रैकिंग के लिए भी MoU किया जाएगा।

जिला मिशन जीवनी के तहत आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए डिप्टी कमिश्नर हिमांशु जैन ने ‘गोल्डन ऑवर’ के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी हाई-रिस्क मामलों को सीधे Civil Hospital Ludhiana में रेफर किया जाए, ताकि सब-डिविजनल या अन्य केंद्रों के कारण होने वाली देरी से बचा जा सके।

डिप्टी कमिश्नर ने टालने योग्य मातृ मृत्यु पर ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाते हुए कहा कि जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की जल्द पहचान और सतत निगरानी जरूरी है। उन्होंने स्त्री रोग विशेषज्ञों और आशा वर्करों को निर्देश दिया कि ओपीडी स्लिप पर स्पष्ट रूप से ‘हाई-रिस्क’ या ‘वेरी हाई-रिस्क’ अंकित किया जाए, ताकि तुरंत उचित उपचार सुनिश्चित हो सके।

मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने के लिए उन्होंने निर्देश दिया कि हर गर्भवती महिला को मुख्यमंत्री सेहत बीमा योजना के तहत पंजीकृत किया जाए, जिससे मुफ्त और कैशलेस इलाज मिल सके। प्रवासी महिलाओं के लिए Ayushman Bharat Yojana के तहत नामांकन अनिवार्य करने को कहा गया।

इसके अलावा, जोनल लाइसेंसिंग अथॉरिटी द्वारा औचक निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं, ताकि सभी स्वास्थ्य केंद्रों में MTP किट की उपलब्धता और तैयारियों की जांच की जा सके।

बैठक में पिछले दो महीनों के मातृ मृत्यु मामलों की केस-टू-केस समीक्षा की गई, जिसमें प्रसव पूर्व देखभाल, रेफरल में देरी और आपातकालीन सेवाओं की कमियों की पहचान की गई। आशा वर्करों, डॉक्टरों और वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारियों ने इसमें भाग लिया। साथ ही UDID (Unique Disability ID) कार्ड की जांच प्रक्रिया को सुचारु बनाने पर भी चर्चा हुई।

कमेटी ने क्लिनिकल प्रोटोकॉल के सख्त पालन, समय पर मरीज की स्थिति को स्थिर करने और प्रभावी रेफरल प्रणाली पर जोर दिया। किसी भी स्तर पर देरी या लापरवाही पाए जाने पर जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में प्रमुख रूप से सिविल सर्जन डॉ. रामनदीप कौर, डॉ. बिशव मोहन, डॉ. आशिमा, डॉ. अमनप्रीत, डॉ. रोहित रांपल, जेडएलए दिनेश गुप्ता सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

यह पहल ‘गोल्डन ऑवर’ पर विशेष ध्यान और संस्थागत समन्वय के माध्यम से जिले में सुरक्षित मातृत्व और नवजात स्वास्थ्य सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।