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गुणवत्ता नवाचार एवं अनुपालन से भारत के फार्मा निर्यात को गति देने पर जोर

फार्मा मॅकटेक एवं लैबनेक्स्ट एक्सपो 2026 से पूर्व उच्चस्तरीय संगोष्ठी आयोजित

चंडीगढ़, 10 अप्रैल 2026 – उद्योग जगत के अग्रणी, सरकारी अधिकारी एवं विभिन्न हितधारक आज होटल शिवालिक व्यू में आयोजित एक उच्चस्तरीय संगोष्ठी में एकत्रित हुए। इस संगोष्ठी का विषय था—
“गुणवत्ता नवाचार एवं अनुपालन के माध्यम से भारत के फार्मास्यूटिकल्स, फार्मा मशीनरी एवं उपकरण निर्यात का विस्तार”।

यह आयोजन आगामी फार्मा मॅकटेक एवं लैबनेक्स्ट एक्सपो 2026 के दूसरे संस्करण के लिए एक महत्वपूर्ण पूर्व कार्यक्रम के रूप में आयोजित किया गया।

संगोष्ठी की शुरुआत भारत के उच्च मात्रा वाले जेनेरिक उत्पादक से उच्च मूल्य वाले वैश्विक नवाचार केंद्र की ओर परिवर्तन पर सारगर्भित चर्चा के साथ हुई। वर्ष 2030 तक इस क्षेत्र के 50 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने की संभावना के मद्देनज़र, “विकसित भारत @2047” के तहत भारत को “फार्मा पावरहाउस” बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

इस मिशन के अंतर्गत जटिल बायोप्रोसेसिंग उपकरणों एवं उन्नत प्रयोगशाला उपकरणों में आत्मनिर्भरता (आत्मनिर्भर भारत) पर बल दिया गया, साथ ही पारंपरिक विनिर्माण से आगे बढ़ते हुए एआई आधारित ऑटोमेशन एवं सतत विनिर्माण जैसी फार्मा 4.0 तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया गया।
संगोष्ठी में भारत सरकार द्वारा नियामक ढांचे एवं निर्यात प्रोत्साहन पहलों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

मुख्य वक्ता के रूप में श्री यश गर्ग, आईएएस, महानिदेशक, आयुक्त, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, हरियाणा ने राज्य सरकार की विभिन्न पहलों पर प्रकाश डालते हुए हरियाणा को फार्मा मशीनरी एवं लैब उपकरण निर्माण एवं निर्यात के लिए एक संभावित केंद्र बताया।

वहीं श्री उत्पल कुमार आचार्य, संयुक्त महानिदेशक (डीजीएफटी, लुधियाना) ने निर्यात को सरल बनाने एवं नवाचार आधारित गुणवत्ता निर्माण को बढ़ावा देने हेतु सरकार की नीतियों पर प्रकाश डाला।

इस अवसर पर ईईपीसी इंडिया द्वारा आगामी फार्मा मॅकटेक एवं लैबनेक्स्ट एक्सपो 2026 पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी गई तथा एक्सपो का आधिकारिक ब्रोशर भी जारी किया गया।

उद्योग प्रतिनिधियों ने एक्सपो के प्रति गहरी रुचि व्यक्त की तथा वैश्विक मानकों के अनुरूप गुणवत्ता निर्माण समाधान, उभरते नवाचार, ऊर्जा दक्ष तकनीकें, उन्नत डायग्नोस्टिक एवं विश्लेषणात्मक उपकरणों तथा बायोफार्मा अनुसंधान की बदलती आवश्यकताओं के क्षेत्रों में भागीदारी की इच्छा जताई।

साथ ही रिवर्स बायर-सेलर मीट (RBSM) के माध्यम से अमेरिका, यूरोप, पश्चिम एशिया एवं अफ्रीका जैसे उभरते बाजारों के खरीदारों से सीधे संपर्क के अवसरों पर भी चर्चा हुई।

कार्यक्रम में अन्य प्रमुख वक्ताओं में श्री अरुण शुक्ला (ईईपीसी इंडिया), डॉ. प्रदीप मट्टू (पूर्व संयुक्त औषधि आयुक्त), डॉ. गोविंद शंकर पांडे (सीईओ एवं एमडी, गैंप टेक्नोलॉजीज प्रा. लि.) तथा श्री जे. इमाम (सीनियर वाइस प्रेसिडेंट–वर्क्स, अरिस्टो फार्मास्यूटिकल्स प्रा. लि.) शामिल थे।

वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि सरकारी नियामक सहयोग एवं उद्योग नवाचार के बीच बेहतर समन्वय ही वर्ष 2047 तक भारत के इंजीनियरिंग निर्यात को 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने का आधार बनेगा।

यह संगोष्ठी ईईपीसी इंडिया द्वारा आयोजित की गई, जो इंजीनियरिंग क्षेत्र में व्यापार एवं निवेश प्रोत्साहन की प्रमुख संस्था है, जिसे वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार का समर्थन प्राप्त है।

होर्मुज खुलवाए बिना युद्ध खत्म करने के इच्छुक हैं ट्रंप: वॉल स्ट्रीट जर्नल

वाशिंगटन, 31 मार्च (भाषा) अमेरिकी समाचार पत्र द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने प्रशासनिक अधिकारियों का हवाला देते हुए बताया कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने करीबी सहयोगियों से कहा है कि वह होर्मुज जलडमरुमध्य मोटे तौर पर बंद रहने की सूरत में भी ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान खत्म करने के लिए तैयार हैं, जो बाद में किसी और समय फिर से शुरू किया जा सकता है।

वॉल स्ट्रीट जर्नल की खबर के अनुसार हालिया दिनों में ट्रंप और उनके सहयोगियों द्वारा यह अनुमान लगाया है कि जलडमरुमध्य को जबरन खुलवाने के लिए एक अभियान चलाने से संघर्ष ट्रंप की निर्धारित समयसीमा, यानी चार-छह सप्ताह से आगे बढ़ जाएगा।

खबर के अनुसार ट्रंप ने फैसला किया है कि अमेरिका को ईरान की नौसेना को कमजोर करने और उसके मिसाइल भंडार को नुकसान पहुंचाने जैसे अपने मुख्य उद्देश्यों को हासिल करने के बाद मौजूदा सैन्य संघर्ष को धीरे-धीरे समाप्त करना चाहिए, और साथ ही तेहरान पर कूटनीतिक दबाव डालकर व्यापार के मुक्त प्रवाह को फिर से शुरू करने के लिए मजबूर करना चाहिए।

खबर में अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि अगर यह प्रयास विफल रहता है, तो अमेरिका यूरोप और खाड़ी क्षेत्र में अपने सहयोगियों पर दबाव डालेगा कि वे जलडमरूमध्य को फिर खुलवाने के लिए आगे आएं।

सोमवार को एक संवाददाता सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यालय ‘व्हाइट हाउस’ की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति और पेंटागन प्रमुख ने हमेशा सैन्य अभियान के लिए चार से छह सप्ताह की अनुमानित समयसीमा बताई है।

उन्होंने कहा, “आज 30 दिन हो गए हैं।”

लेविट ने यह संकेत भी दिया कि अरब देशों से भी ईरान में जारी सैन्य अभियान का बोझ साझा करने के लिए कहा जा सकता है।

जब यह पूछा गया कि क्या कुवैत, यूएई और सऊदी अरब जैसे देशों को ईरान में जारी सैन्य अभियान का खर्च उठाना चाहिए तो उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि यह ऐसा मुद्दा है जिसमें राष्ट्रपति काफी रुचि ले सकते हैं। मैं इस पर उनसे पहले कुछ नहीं कहूंगी, लेकिन निश्चित रूप से यह एक विचार है और मुझे लगता है कि वह इस बारे में आपको ज्यादा जानकारी दे पाएंगे।”

अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमला कर दिया था, जिसके बाद ईरान ने पलटवार किया और पूरे खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष फैल गया। होर्मुज जलडमरुमध्य दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण रणनीतिक मार्ग है।

होर्मुज जलडमरुमध्य फारस की खाड़ी को हिंद महासागर से जोड़ने वाला एक संकरा समुद्री मार्ग है, जो फिलहाल काफी हद तक बंद है। इसके कारण रोजाना गुजरने वाले सैकड़ों जहाजों की आवाजाही लगभग बंद हो गई है।