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पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ में किया गया विश्व पर्यावरण दिवस 2026 का आयोजन

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

एनएसएस पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ ने माय भारत, चंडीगढ़ तथा स्टूडेंट्स फॉर डेवलपमेंट, चंडीगढ़ के सहयोग से डॉ. एसएसबीयूआईसीईटी मैदान, ए.सी. जोशी पुस्तकालय के समक्ष, पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ में विश्व पर्यावरण दिवस 2026 का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम प्रो. रेणु विग, कुलपति, पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ के नेतृत्व में आयोजित किया गया, जिसमें एनएसएस कार्यक्रम अधिकारियों, स्वयंसेवकों, विद्यार्थियों, संकाय सदस्यों तथा युवा संगठनों ने सक्रिय भागीदारी की।

कार्यक्रम का आयोजन डॉ. अनुपम बहरी, कार्यक्रम समन्वयक, एनएसएस, पंजाब विश्वविद्यालय; डॉ. नेमी चंद गोलिया, राज्य संपर्क अधिकारी, चंडीगढ़; तथा श्री विनय कुमार, जिला युवा अधिकारी, चंडीगढ़ के मार्गदर्शन में किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ गणमान्य अतिथियों के स्वागत के साथ हुआ, जिसके पश्चात औपचारिक उद्घाटन समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर उपस्थित विशिष्ट अतिथियों में डॉ. नेमी चंद गोलिया, राज्य संपर्क अधिकारी, चंडीगढ़; डॉ. नमिता गुप्ता, अधिष्ठाता छात्र कल्याण (महिला), पंजाब विश्वविद्यालय; योगेश कुमार रावल, अधिष्ठाता छात्र कल्याण, पंजाब विश्वविद्यालय; प्रो. (डॉ.) कश्मीर सिंह, सह-अधिष्ठाता छात्र कल्याण (एडीएसडब्ल्यू), पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़; प्रो. प्रशांत गौतम, होटल प्रबंधन विभाग, पंजाब विश्वविद्यालय; प्रो. विशाल शर्मा, फॉरेंसिक विज्ञान विभाग, पंजाब विश्वविद्यालय; गुरप्रीत चौधरी, स्टूडेंट्स फॉर डेवलपमेंट, चंडीगढ़; तथा सुश्री प्रीतिका, माय भारत प्रतिनिधि शामिल थे।
युवा विकास तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनके योगदान के सम्मान में एनएसएस स्वयंसेवकों एवं आयोजकों द्वारा गणमान्य अतिथियों का सम्मान किया गया।

कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण वृक्षारोपण अभियान रहा, जिसके दौरान गणमान्य अतिथियों, एनएसएस स्वयंसेवकों तथा प्रतिभागियों द्वारा पौधारोपण किया गया, ताकि पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा दिया जा सके तथा हरित परिसर को प्रोत्साहित किया जा सके।

सभा को संबोधित करते हुए गणमान्य अतिथियों ने पर्यावरण संरक्षण, सतत जीवनशैली, अपशिष्ट में कमी तथा संरक्षण प्रयासों में युवाओं की सक्रिय भागीदारी की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को जिम्मेदार पर्यावरण संरक्षक बनने तथा स्वच्छ, हरित और अधिक टिकाऊ भविष्य के निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।

उत्सव के अंतर्गत विद्यार्थियों में पर्यावरण जागरूकता तथा रचनात्मकता को बढ़ावा देने के लिए पोस्टर निर्माण, स्लोगन लेखन तथा गमला सजावट प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण तथा सतत विकास पर आधारित नवीन विचारों एवं कलात्मक अभिव्यक्तियों का प्रदर्शन किया।

प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार वितरण समारोह के दौरान सम्मानित किया गया, जहाँ गणमान्य अतिथियों द्वारा प्रमाण-पत्र एवं पुरस्कार प्रदान किए गए। सभी प्रतिभागियों के प्रयासों एवं रचनात्मकता की सराहना की गई।

एनएसएस स्वयंसेवकों द्वारा एक स्वच्छता अभियान भी आयोजित किया गया, जिसने स्वच्छ पर्यावरण बनाए रखने में सामुदायिक सहभागिता के संदेश को और सुदृढ़ किया।

कार्यक्रम के अंतर्गत पर्यावरण प्रतिज्ञा भी दिलाई गई, जिसमें सभी प्रतिभागियों ने प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करने, प्रदूषण को कम करने तथा अपने दैनिक जीवन में पर्यावरण-अनुकूल व्यवहार अपनाने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम का समापन डॉ. अनुपम बहरी, कार्यक्रम समन्वयक, एनएसएस, पंजाब विश्वविद्यालय द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने कुलपति, गणमान्य अतिथियों, संकाय सदस्यों, एनएसएस कार्यक्रम अधिकारियों, स्वयंसेवकों, माय भारत, स्टूडेंट्स फॉर डेवलपमेंट तथा सभी प्रतिभागियों का कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम का समापन राष्ट्रभक्ति की भावना के साथ सामूहिक रूप से “वंदे मातरम्” के गायन द्वारा हुआ, जिसके साथ विश्व पर्यावरण दिवस 2026 समारोह का सफलतापूर्वक समापन हुआ।

सीमा सुरक्षा बल ने विश्व पर्यावरण दिवस पर वृक्षारोपण अभियान चलाया

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

सीमा सुरक्षा बल, पश्चिमी कमान ने शुक्रवार को ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ के अवसर पर बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान चलाया, जो पर्यावरण संरक्षण और सतत जीवन यापन के प्रति बल की अटूट प्रतिबद्वता को रेखांकित करता है।

सतीश एस खण्डारे, अपर महानिदेशक, पश्चिमी कमान, सीमा सुरक्षा बल ने एक पौधा लगाकर औपचारिक रूप से अभियान का शुभारंभ किया। इस कार्यक्रम में अधिकारियों, जवानों और नागरिकों ने सक्रिय रूप से भाग लिया, जो पर्यावरण संरक्षण के प्रति बल की प्रतिबद्वता को दर्शाता है।

सीमा सुरक्षा बल के लखनौर परिसर में नीम, पीपल, अशोक और फलों के वृक्षों सहित स्थानीय पौधे रोपित किए गए। इस अवसर पर बोलते हुए, अपर महानिदेशक, पश्चिमी कमान ने पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रत्येक नागरिक और वर्दीधारी कर्मियों की दायित्व पर जोर दिया, और एक हरित और सतत भारत के प्रति सीमा सुरक्षा बल के संकल्प को दोहराया। बेहतर जीविका सुनिश्चित करने के लिए विश्व पर्यावरण दिवस और मानसून के मौसम के दौरान ऐसे अभियानों में सीमा सुरक्षा बल द्वारा हर साल पौधे लगाए जाते हैं।

यह वृक्षारोपण अभियान कश्मीार से गुजरात तक सभी सीमांत मुख्यालयों में बीओपी स्तर तक आयोजित किया गया, जिसमें कार्मिकों के परिजनों ने भी पूरे उत्साह और जोश के साथ लिया। मरूस्थलीकरण, मृदा अपरदन आदि जैसी पर्यावरणीय समस्याओं से निपटने के लिए इस वृक्षारोपण अभियान में रेगिस्तान, खाड़ी और बंजर भूमि प्रमुख क्षेत्र हैं। इस वृक्षारोपण अभियान के दौराने पश्चिमी सीमा के पूरे क्षेत्र में 65 हजार से अधिक पौधें लगाए गए हैं।

अपर महानिदेशक, पश्चिमी कमान ने इस बात पर भी जोर दिया कि सीमा सुरक्षा बल राष्ट्र की सीमाओं की रक्षा के अपने प्राथमिक उद्देश्यों के साथ-साथ अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति भी हमेशा प्रतिबद्ध रहा है।

त्रिपुरा में BSF जवानों के बीच पहुंचे अमित शाह, लंकामूरा सीमा चौकी का निरीक्षण कर बढ़ाया हौसला

दिल्ली / सत्ता संदेश

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सीमा सुरक्षा बल की लंकामूरा सीमा चौकी का निरीक्षण किया और बीएसएफ के जवानों के साथ संवाद किया। गृह मंत्री ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में वृक्षारोपण अभियान के अंतर्गत अगर पौधे का रोपण किया। इस अवसर पर त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा, केन्द्रीय गृह सचिव, निदेशक, आसूचना ब्यूरो, सचिव, सीमा प्रबंधन और महानिदेशक, सीमा सुरक्षा बल सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

अमित शाह ने कहा कि 2019 से लेकर आज तक हमारे सभी केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के जवानों ने लगभग 7.5 करोड़ से अधिक वृक्ष लगाने का काम किया है। इस वर्ष 40 लाख से 60 लाख वृक्ष लगाएंगे और लगाए हुए वृक्षों में से जो वृक्ष जीवित नहीं रह सके, उन सभी वृक्षों को दोबारा लगाने का काम किया जाएगा।

गृह मंत्री ने कहा कि पीएम मोदी ने पर्यावरण संरक्षण के लिए कई प्रकार के कदम एक साथ उठाए हैं। इस दिशा में एक प्रकार से भारत का मॉडल पेरिस सम्मेलन में आदर्श मॉडल के रूप में स्वीकारा गया। उन्होंने कहा कि हमने पेरिस घोषणा के हर बिंदु को समयपूर्व पूरा कर ऋग्वेद के पर्यावरण की रक्षा के संदेश के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को विश्व के सामने साबित किया है। उन्होंने कहा कि सीएपीएफ के सभी जवान बड़े मनोयोग के साथ एक वृक्ष को अपना परिजन मानकर इसकी देखभाल कर रहे हैं। यह सरकारी आदेशों से प्रेरित कार्यक्रम नहीं होना चाहिए, बल्कि सहज आदत होनी चाहिए, क्योंकि यही आदत हमें बचा सकती है।

अमित शाह ने कहा कि आज सीमा सुरक्षा बल की 37वीं वाहिनी में जवानों के आवास का ई- लोकार्पण और बीएसएफ 97वीं वाहिनी में क्वार्टर गार्ड परिसर का ई-शिलान्यास किया गया है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने सामीओं की रक्षा करने वाले हमारे जवानों की सुविधा बढ़ाने के लिए कई प्रकार के काम किए हैं। जवानों और उनके परिवार के स्वास्थ्य की चिंता और उनके परिवार के रहने के लिए मकान की चिंता भी की है। वृक्षारोपण अभियान के अंतर्गत CAPFs, असम राइफल्स, राष्ट्रीय सुरक्षा गारद, दिल्ली पुलिस, NCB, NCRB, NIA, BPR&D, NDRF, NDMA और ISCS सहित गृह मंत्रालय के सभी कार्यालयों ने देशभर में 5 लाख से अधिक पौधे लगाए।

“विश्व पर्यावरण दिवस पर राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ की हरित पहल, वृक्षारोपण और पौध वितरण कार्यक्रम आयोजित”

दिल्ली / सत्ता संदेश

राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ (आरएवी), नई दिल्ली ने विश्व पर्यावरण दिवस 2026 को वृक्षारोपण अभियान और पौध वितरण कार्यक्रम के माध्यम से मनाया, और इस तरह विद्यापीठ ने पर्यावरण संरक्षण और सतत जीवन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। यह कार्यक्रम इस वर्ष के विश्व पर्यावरण दिवस के विषय, प्रकृति से प्रेरित, जलवायु के लिए, हमारे भविष्य के लिए” के अनुरूप आयोजित किया गया था।

इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ के शासी निकाय के अध्यक्ष वैद्य देवेंद्र त्रिगुणा; राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ की निदेशक डॉ. वंदना सिरोहा; राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा प्रणाली आयोग (एनसीआईएसएम) में आचार संहिता और पंजीकरण बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सुश्रुत कनौजिया; और एनसीआईएसएम के चिकित्सा मूल्यांकन और रेटिंग बोर्ड के पूर्व सदस्य डॉ. बीएल मेहरा ने भाग लिया।

इस उत्सव के अंतर्गत, विद्यापीठ परिसर में संकाय सदस्यों, अधिकारियों, कर्मचारियों और छात्रों ने वृक्षारोपण अभियान में भाग लिया, जिससे पर्यावरण संरक्षण और पारिस्थितिक स्थिरता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की पुष्टि हुई। इस पहल का उद्देश्य पर्यावरण जागरूकता को बढ़ावा देना और हरित आवरण बढ़ाने तथा पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सामूहिक कार्रवाई को प्रोत्साहित करना था। इस कार्यक्रम में औषधीय पौधों के संरक्षण के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया, जो आयुर्वेदिक स्वास्थ्य सेवा और भारत की समृद्ध पारंपरिक ज्ञान विरासत का आधार हैं।

गणमान्य हस्तियों ने आयुर्वेद के पारिस्थितिक दर्शन पर प्रकाश डाला, जो मनुष्य और प्रकृति के अंतर्संबंध पर बल देता है। पंचमहाभूत सिद्धांत और लोक-पुरुष साम्य की अवधारणाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पर्यावरणीय संतुलन मानव स्वास्थ्य और कल्याण के लिए मूलभूत है। उन्होंने आगे कहा कि आयुर्वेदिक सिद्धांत अनवरत जीवनशैली, सजग उपभोग और प्राकृतिक संसाधनों के उत्तरदायित्वपूर्ण उपयोग को प्रोत्साहित करते हैं, जिससे समकालीन पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने में पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों की प्रासंगिकता और भी पुष्ट होती है।

इस कार्यक्रम की एक ख़ास विशेषता विद्यापीठ के अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच पौधों का वितरण था। इस पहल का उद्देश्य प्रतिभागियों को अपने समुदायों में वृक्षारोपण और देखभाल के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रोत्साहित करना था।

प्रतिभागियों ने सतत जीवन शैली के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की, वहीं इस आयोजन ने पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास और प्रकृति के साथ सामंजस्य को बढ़ावा देने में आयुर्वेद की निरंतर प्रासंगिकता पर जोर दिया।