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नए भारत के दिल की धड़कनों में बसते हैं बिरसा : रंजना चोपड़ा

भारत जब अपने स्वतंत्रता संग्राम के महान सेनानियों को याद करता है तब छोटानागपुर के जंगलों से एक नाम अपनी दृढ़ नैतिक ताकत के साथ उभरता है। यह नाम भगवान बिरसा मुंडा का है जिन्हें ‘धरती आबा’ यानी भूमि के रक्षक के रूप में पूजा जाता है। वह एक ऐतिहासिक हस्ती से आगे बढ़ कर गरिमा, प्रतिरोध और जनजातीय आत्मसम्मान के जीवंत प्रतीक भी हैं। उनकी सोच थी कि जनजातीय पहचान की रक्षा की जाए, समानता सार्थक हो और विकास आम जन तक न्याय के साथ पहुंचे। उनका यह सिद्धांत अब भी विकसित भारत की ओर देश की यात्रा को निर्देशित करता है। राष्ट्र ने पिछले 12 वर्षों में समावेशी विकास पर नए सिरे से बल दिया है। बिरसा मुंडा के सिद्धांत आज भी नए भारत की नीतियों, शासन और आकांक्षाओं को आकार दे रहे हैं। 

विरासत को मिला उसका सही स्थान

भगवान बिरसा मुंडा की विरासत देश भर में जनजातीय समुदायों के गीतों, आख्यानों, सामूहिक यादों में लंबे समय से जिंदा है। माननीय प्रधानमंत्री ने 2021 में बिरसा मुंडा के जन्म दिवस 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस घोषित कर उनकी विरासत को राष्ट्रीय मान्यता दी। इस मान्यता को और गहराई देते हुए बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर 15 नवंबर 2024 से 15 नवंबर 2025 तक जनजातीय गौरव वर्ष मनाया गया। इस दौरान जनजातीय गौरव और विरासत के जश्न में समूचे राष्ट्र में 2 लाख से ज्यादा कार्यक्रम आयोजित किए गए जिनकी पहुंच 3 करोड़ से अधिक नागरिकों तक रही।

देश भर में, इन आयोजनों ने जनजातीय जीवन की समृद्धि और विविधता को प्रदर्शित किया। नागालैंड के हॉर्नबिल महोत्सव और केरल के जनजातीय साहित्यिक महोत्सव से लेकर, झारखंड के राष्ट्रीय जनजातीय फिल्म महोत्सव और तेलंगाना की ‘कैनो स्प्रिंट चैम्पियनशिप’ (डोंगी चालन प्रतियोगिता) तक, इन कार्यक्रमों ने जनजातीय संस्कृति, रचनात्मकता, खेल और लोककथाओं को राष्ट्रीय पटल पर खड़ा किया। कुल मिलाकर, इनमें अलग-अलग संस्कृतियों और समुदायों का प्रतिनिधित्व करने वाले 11 लाख से अधिक जनजातीय नागरिकों की भागीदारी देखी गई। ये आयोजन इस बात की घोषणा थे कि आधुनिक भारत को आकार देने में जनजातीय विरासत एक जीवंत और सक्रिय शक्ति है।

जनजातीय सशक्तिकरण और समावेशन की दिशा में पिछले बारह वर्षों के निरंतर और केंद्रित राष्ट्रीय प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए, ‘जनजातीय गरिमा उत्सव 2026’ इस गति को चार विषयगत सप्ताहों के माध्यम से आगे ले जा रहा है, जो मिलकर जनजातीय विकास के संपूर्ण आयाम को दर्शाते हैं। विशेष रूप से इसका तीसरा सप्ताह भारत के भविष्य से जुड़े एक बेहद महत्वपूर्ण प्रश्न पर केंद्रित है: हम उन व्यक्तियों और समुदायों को कैसे पहचानें जिन्होंने इस राष्ट्र को आकार दिया और हम आने वाली पीढ़ी को उस विरासत को आगे बढ़ाने के लिए कैसे सशक्त बनाएं?

इतिहास में विस्मृत नामों की पुनर्स्थापना

इस प्रश्न का उत्तर तलाशने की शुरुआत उन अनेक जनजातीय नायकों को पहचान देने से होती है, जिनका योगदान बहुत लंबे समय तक मुख्यधारा के ऐतिहासिक आख्यानों से गायब रहा। देश के जनजातीय क्षेत्रों में, शिक्षकों, कलाकारों, पारंपरिक चिकित्सकों और समाज सुधारकों की पीढ़ियों ने इन समुदायों को संजो कर रखा है और उनकी सांस्कृतिक पहचान को जीवित रखा है। उनकी कहानियाँ भारत की राष्ट्रीय स्मृति में एक सही और न्यायसंगत स्थान की हकदार हैं और उनके  इन योगदानों को दस्तावेजों में दर्ज करने तथा उन्हें याद रखने के निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

देश भर के जनजातीय अनुसंधान संस्थान (टीआरआई) मौखिक इतिहास का  दस्तावेजीकरण करने, स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों को रिकॉर्ड करने और जनजातीय भाषाओं व सांस्कृतिक परंपराओं को संरक्षित करने के प्रयास में एक केंद्रीय भूमिका निभा रहे हैं। वर्तमान में, 26 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों के 29 जनजातीय अनुसंधान संस्थान इस कार्य में जुटे हुए हैं, जिसके तहत 222 जनजातीय भाषाओं में 355 का प्रारंभिक दस्तावेजीकरण किया जा चुका है। ये प्रयास भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य सांस्कृतिक ज्ञान को संजोकर रखने में मदद कर रहे हैं।

राष्ट्रीय विमर्श में जनजातीय आवाज़ों को फिर से स्थापित करने का प्रयास ‘जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालयों’ के माध्यम से भी आकार ले रहा है, जिनकी परिकल्पना स्मृति और पहचान के स्थलों के रूप में की गई है। जनजातीय कार्य मंत्रालय ने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में जनजातीय समुदायों की भूमिका को सम्मानित करने के लिए 10 राज्यों में ऐसे 11 संग्रहालयों को मंज़ूरी दी है। इनमें से चार संग्रहालयों का उद्घाटन पहले ही किया जा चुका है, जिनमें रांची में भगवान बिरसा मुंडा और नवा रायपुर में शहीद वीर नारायण सिंह को समर्पित संग्रहालय शामिल हैं। इन संस्थानों के जरिए जनजातीय वीरों की गाथाओं के दस्तावेजीकरण और उन पर आधारित कार्यक्रमों के आयोजन से इन्हें भारत की सामूहिक ऐतिहासिक याद में स्थाई रूप से पिरोया जा रहा है।

मशाल थामने वालों को सशक्तिकरण 

अतीत को सम्मानित करने के साथ ही, यह यात्रा स्वाभाविक रूप से वर्तमान पीढ़ी को सशक्त बनाने की ओर बढ़ती है। यह बदलाव उन जनजातीय छात्रों की बढ़ती संख्या में सबसे स्पष्ट रूप से दिखाई देता है, जिन्हें मंत्रालय के छात्रवृत्ति कार्यक्रमों का लाभ मिल रहा है। अकेले चालू वर्ष में ही, पांच छात्रवृत्ति योजनाओं के तहत 26,01,979 जनजातीय छात्रों को सहायता प्रदान की गई है, जिसके लिए कुल 3825.54 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया गया है। इनमें से कई छात्र अपने परिवारों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले पहले व्यक्ति हैं, जो न केवल अपनी व्यक्तिगत आकांक्षाओं को, बल्कि पूरे समुदाय की आशाओं को आगे बढ़ा रहे हैं। विशेष बात यह है कि वर्तमान छात्रवृत्ति लाभार्थियों में से 56% से अधिक महिलाएं हैं।

एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों (ईएमआरएस) का विस्तार भी शिक्षा तक पहुँच और अवसरों के प्रति इसी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। स्वीकृत ईएमआरएस संस्थानों की संख्या वर्ष 2013-14 के 167 से बढ़कर वर्ष 2025-26 में 723 हो गई है, जो 330% से अधिक की वृद्धि है – जबकि इसी अवधि के दौरान पहले से चल रहे स्कूलों की संख्या 123 से बढ़कर 499 हो गई है। छात्रों के नामांकन में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है, जो 0.34 लाख से बढ़कर 1.56 लाख छात्र हो गई है। जनजातीय क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण आवासीय शिक्षा प्रदान करके, ईएमआरएस संस्थान मजबूत शैक्षिक नींव तैयार करने और देश भर के जनजातीय बच्चों के लिए अवसरों का विस्तार करने में मदद कर रहे हैं।

ये आंकड़े केवल योजनाओं के विस्तार को ही नहीं दर्शाते; बल्कि ये एक बड़े संरचनात्मक बदलाव का प्रतिनिधित्व करते हैं। छात्रवृत्तियाँ और फेलोशिप वास्तव में आत्मविश्वास, प्रतिनिधित्व और नेतृत्व में किया जाने वाला निवेश हैं। हमारी प्रतिबद्धता अडिग है: किसी भी आदिवासी छात्र को भौगोलिक स्थिति, पृष्ठभूमि या शिक्षण संस्थानों तक सीमित पहुँच के कारण अवसरों से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।

महिला सशक्तिकरण की सबसे सच्ची अभिव्यक्ति

शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे इस बदलाव के साथ-साथ, जनजातीय महिलाओं के नेतृत्व में भी जमीनी स्तर पर एक महत्वपूर्ण बदलाव आ रहा है। पीढ़ियों से, जनजातीय महिलाएं अपनी संस्कृति, प्राकृतिक संसाधनों और सामुदायिक जीवन की मूक संरक्षक रही हैं – वे परिवारों और परंपराओं को सहेजती आई हैं। भारत में लगभग 5.20 करोड़ जनजातीय महिलाएं हैं, जो कुल जनजातीय आबादी का लगभग आधा हिस्सा हैं। समावेशी विकास में उनका नेतृत्व अब मुख्य भूमिका निभा रहा है।

वर्तमान में, 4,712 वन धन विकास केंद्र स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिनमें से 3,365 कार्यरत हैं। इनसे 12.9 लाख से अधिक लोग लाभान्वित हो रहे हैं और इन लाभार्थियों में आधे से अधिक संख्या महिलाओं की है। ये प्रयास एक ओर जहाँ जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जनजातीय महिलाओं के लिए व्यापक आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं।

आगे बढ़ती हुई विरासत 

समारोह, स्मरण, शिक्षा और महिला नेतृत्व मिलकर एक बड़ी और निरंतर आगे बढ़ने वाली कहानी का हिस्सा बनते हैं—एक ऐसी कहानी, जिसमें जनजातीय समुदाय आत्मविश्वास और सम्मान के साथ भारत के भविष्य को नया आकार दे रहे हैं। ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ और ‘प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महा अभियान’  जैसी पहलों के माध्यम से, समन्वय और सहयोग के नए प्रतिमान के ज़रिए जमीनी स्तर पर क्रांतिकारी बदलाव आ रहा है। जनजातीय विद्वानों का उभरना, गुमनाम नायकों की पहचान और जनजातीय महिलाओं का बढ़ता नेतृत्व, यह सब मिलकर इस बात को दर्शाता है कि भगवान बिरसा मुंडा की विरासत आज के आधुनिक भारत में भी जीवंत है।

आज, भारत के 10.5 करोड़ से भी ज़्यादा आदिवासी नागरिक, देश की कहानी का एक सबसे प्रभावशाली और प्रगतिशील अध्याय हैं। वे राष्ट्रीय प्रगति के हाशिए पर नहीं हैं, बल्कि ‘विकसित भारत’ के संकल्प में सबसे मजबूत योगदान देने वालों में से हैं — जहाँ विद्वान नए कीर्तिमान रच रहे हैं, महिलाएँ नेतृत्व की नई परिभाषा गढ़ रही हैं और गुमनाम नायकों को आखिरकार राष्ट्रीय पहचान मिल रही है। इस यात्रा में, ‘धरती आबा’ की विरासत आगे बढ़ रही है।

पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ में किया गया विश्व पर्यावरण दिवस 2026 का आयोजन

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

एनएसएस पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ ने माय भारत, चंडीगढ़ तथा स्टूडेंट्स फॉर डेवलपमेंट, चंडीगढ़ के सहयोग से डॉ. एसएसबीयूआईसीईटी मैदान, ए.सी. जोशी पुस्तकालय के समक्ष, पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ में विश्व पर्यावरण दिवस 2026 का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम प्रो. रेणु विग, कुलपति, पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ के नेतृत्व में आयोजित किया गया, जिसमें एनएसएस कार्यक्रम अधिकारियों, स्वयंसेवकों, विद्यार्थियों, संकाय सदस्यों तथा युवा संगठनों ने सक्रिय भागीदारी की।

कार्यक्रम का आयोजन डॉ. अनुपम बहरी, कार्यक्रम समन्वयक, एनएसएस, पंजाब विश्वविद्यालय; डॉ. नेमी चंद गोलिया, राज्य संपर्क अधिकारी, चंडीगढ़; तथा श्री विनय कुमार, जिला युवा अधिकारी, चंडीगढ़ के मार्गदर्शन में किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ गणमान्य अतिथियों के स्वागत के साथ हुआ, जिसके पश्चात औपचारिक उद्घाटन समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर उपस्थित विशिष्ट अतिथियों में डॉ. नेमी चंद गोलिया, राज्य संपर्क अधिकारी, चंडीगढ़; डॉ. नमिता गुप्ता, अधिष्ठाता छात्र कल्याण (महिला), पंजाब विश्वविद्यालय; योगेश कुमार रावल, अधिष्ठाता छात्र कल्याण, पंजाब विश्वविद्यालय; प्रो. (डॉ.) कश्मीर सिंह, सह-अधिष्ठाता छात्र कल्याण (एडीएसडब्ल्यू), पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़; प्रो. प्रशांत गौतम, होटल प्रबंधन विभाग, पंजाब विश्वविद्यालय; प्रो. विशाल शर्मा, फॉरेंसिक विज्ञान विभाग, पंजाब विश्वविद्यालय; गुरप्रीत चौधरी, स्टूडेंट्स फॉर डेवलपमेंट, चंडीगढ़; तथा सुश्री प्रीतिका, माय भारत प्रतिनिधि शामिल थे।
युवा विकास तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनके योगदान के सम्मान में एनएसएस स्वयंसेवकों एवं आयोजकों द्वारा गणमान्य अतिथियों का सम्मान किया गया।

कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण वृक्षारोपण अभियान रहा, जिसके दौरान गणमान्य अतिथियों, एनएसएस स्वयंसेवकों तथा प्रतिभागियों द्वारा पौधारोपण किया गया, ताकि पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा दिया जा सके तथा हरित परिसर को प्रोत्साहित किया जा सके।

सभा को संबोधित करते हुए गणमान्य अतिथियों ने पर्यावरण संरक्षण, सतत जीवनशैली, अपशिष्ट में कमी तथा संरक्षण प्रयासों में युवाओं की सक्रिय भागीदारी की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को जिम्मेदार पर्यावरण संरक्षक बनने तथा स्वच्छ, हरित और अधिक टिकाऊ भविष्य के निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।

उत्सव के अंतर्गत विद्यार्थियों में पर्यावरण जागरूकता तथा रचनात्मकता को बढ़ावा देने के लिए पोस्टर निर्माण, स्लोगन लेखन तथा गमला सजावट प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण तथा सतत विकास पर आधारित नवीन विचारों एवं कलात्मक अभिव्यक्तियों का प्रदर्शन किया।

प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार वितरण समारोह के दौरान सम्मानित किया गया, जहाँ गणमान्य अतिथियों द्वारा प्रमाण-पत्र एवं पुरस्कार प्रदान किए गए। सभी प्रतिभागियों के प्रयासों एवं रचनात्मकता की सराहना की गई।

एनएसएस स्वयंसेवकों द्वारा एक स्वच्छता अभियान भी आयोजित किया गया, जिसने स्वच्छ पर्यावरण बनाए रखने में सामुदायिक सहभागिता के संदेश को और सुदृढ़ किया।

कार्यक्रम के अंतर्गत पर्यावरण प्रतिज्ञा भी दिलाई गई, जिसमें सभी प्रतिभागियों ने प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करने, प्रदूषण को कम करने तथा अपने दैनिक जीवन में पर्यावरण-अनुकूल व्यवहार अपनाने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम का समापन डॉ. अनुपम बहरी, कार्यक्रम समन्वयक, एनएसएस, पंजाब विश्वविद्यालय द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने कुलपति, गणमान्य अतिथियों, संकाय सदस्यों, एनएसएस कार्यक्रम अधिकारियों, स्वयंसेवकों, माय भारत, स्टूडेंट्स फॉर डेवलपमेंट तथा सभी प्रतिभागियों का कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम का समापन राष्ट्रभक्ति की भावना के साथ सामूहिक रूप से “वंदे मातरम्” के गायन द्वारा हुआ, जिसके साथ विश्व पर्यावरण दिवस 2026 समारोह का सफलतापूर्वक समापन हुआ।

सीमा सुरक्षा बल ने विश्व पर्यावरण दिवस पर वृक्षारोपण अभियान चलाया

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

सीमा सुरक्षा बल, पश्चिमी कमान ने शुक्रवार को ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ के अवसर पर बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान चलाया, जो पर्यावरण संरक्षण और सतत जीवन यापन के प्रति बल की अटूट प्रतिबद्वता को रेखांकित करता है।

सतीश एस खण्डारे, अपर महानिदेशक, पश्चिमी कमान, सीमा सुरक्षा बल ने एक पौधा लगाकर औपचारिक रूप से अभियान का शुभारंभ किया। इस कार्यक्रम में अधिकारियों, जवानों और नागरिकों ने सक्रिय रूप से भाग लिया, जो पर्यावरण संरक्षण के प्रति बल की प्रतिबद्वता को दर्शाता है।

सीमा सुरक्षा बल के लखनौर परिसर में नीम, पीपल, अशोक और फलों के वृक्षों सहित स्थानीय पौधे रोपित किए गए। इस अवसर पर बोलते हुए, अपर महानिदेशक, पश्चिमी कमान ने पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रत्येक नागरिक और वर्दीधारी कर्मियों की दायित्व पर जोर दिया, और एक हरित और सतत भारत के प्रति सीमा सुरक्षा बल के संकल्प को दोहराया। बेहतर जीविका सुनिश्चित करने के लिए विश्व पर्यावरण दिवस और मानसून के मौसम के दौरान ऐसे अभियानों में सीमा सुरक्षा बल द्वारा हर साल पौधे लगाए जाते हैं।

यह वृक्षारोपण अभियान कश्मीार से गुजरात तक सभी सीमांत मुख्यालयों में बीओपी स्तर तक आयोजित किया गया, जिसमें कार्मिकों के परिजनों ने भी पूरे उत्साह और जोश के साथ लिया। मरूस्थलीकरण, मृदा अपरदन आदि जैसी पर्यावरणीय समस्याओं से निपटने के लिए इस वृक्षारोपण अभियान में रेगिस्तान, खाड़ी और बंजर भूमि प्रमुख क्षेत्र हैं। इस वृक्षारोपण अभियान के दौराने पश्चिमी सीमा के पूरे क्षेत्र में 65 हजार से अधिक पौधें लगाए गए हैं।

अपर महानिदेशक, पश्चिमी कमान ने इस बात पर भी जोर दिया कि सीमा सुरक्षा बल राष्ट्र की सीमाओं की रक्षा के अपने प्राथमिक उद्देश्यों के साथ-साथ अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति भी हमेशा प्रतिबद्ध रहा है।

खेत बचाओ अभियान’ बना जन-आंदोलन, 9.42 लाख से अधिक किसानों ने अपनाया संतुलित उर्वरक उपयोग

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के तहत राष्ट्रव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ के अंतर्गत संतुलित उर्वरक उपयोग, मिट्टी की उर्वरता संरक्षण तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए व्यापक जन-जागरूकता गतिविधियां जारी हैं। बृहस्पतिवार तक अभियान के अंतर्गत 9.42 लाख से अधिक किसानों को विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से जोड़ा जा चुका है।

अभियान के तहत देशभर में अब तक 17,834 जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिनमें लगभग 6.983 लाख किसानों ने भाग लिया। इसके अतिरिक्त 3,698 प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से 1,57,438 प्रतिभागियों को संतुलित उर्वरक उपयोग, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन तथा वैज्ञानिक खेती की तकनीकों की जानकारी प्रदान की गई।

किसानों को व्यवहारिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 8,850 प्रदर्शनों का आयोजन किया गया, जिनमें जैविक एवं वैकल्पिक पोषक स्रोतों के उपयोग तथा समेकित पोषक तत्व प्रबंधन संबंधी तकनीकों का प्रदर्शन किया गया।

अभियान के अंतर्गत पंचायत स्तर तक जनप्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित करते हुए 5,237 पंच, सरपंच एवं जिला परिषद सदस्यों को भी जोड़ा गया। वहीं, उर्वरकों के विवेकपूर्ण उपयोग के संदेश को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए 9,609 इनपुट डीलरों के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किए गए।

किसान उत्पादक संगठनों, स्वयं सहायता समूहों तथा किसान हित समूहों के माध्यम से भी अभियान को मजबूती मिली है। अब तक 8,383 किसान-सदस्यों ने इन कार्यक्रमों में भाग लेकर वैज्ञानिक पोषक प्रबंधन की जानकारी प्राप्त की है।

व्यापक जनसंपर्क गतिविधियों के अंतर्गत देशभर में 60,477 स्थानों पर बैनर, पोस्टर एवं होर्डिंग्स प्रदर्शित   किए गए। इसके साथ ही 1,027 रेडियो एवं सामुदायिक रेडियो वार्ताओं तथा 240 टीवी एवं डिजिटल मीडिया कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों और आमजन तक अभियान का संदेश पहुंचाया गया।

सोशल मीडिया मंचों के प्रभावी उपयोग से अभियान की पहुंच में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। विभिन्न डिजिटल प्लेटफार्मों के माध्यम से अब तक लगभग 3.505 करोड़ लोगों तक अभियान का संदेश पहुंच चुका है।

अभियान का उद्देश्य संतुलित उर्वरक उपयोग अपनाने, मृदा परीक्षण आधारित पोषक तत्व प्रबंधन को बढ़ावा देने, टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाकर मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने तथा भावी पीढ़ियों के लिए स्वस्थ और उत्पादक कृषि भूमि का संरक्षण सुनिश्चित करना है।

मनीला में भारत-फिलीपींस व्यापार एवं निवेश संयुक्त कार्य समूह की 14वीं बैठक, आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर जोर

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारत-फिलीपींस व्यापार एवं निवेश संयुक्त कार्य समूह की 14वीं बैठक आज 5 जून, 2026 को फिलीपींस के मनीला में आयोजित की गई। बैठक की सह-अध्यक्षता वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के वाणिज्य विभाग के संयुक्त सचिव श्री अमित वर्मा और फिलीपींस के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार समूह के व्यापार एवं उद्योग विभाग के अवर सचिव एलन बी. गेप्टी ने की। संबंधित मंत्रालयों, विभागों और संगठनों के प्रतिनिधि भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इसमें शामिल हुए।

दोनों पक्षों ने भारत और फिलीपींस के बीच द्विपक्षीय व्यापार में बढोतरी को सराहा जो 2025-26 में 3.9 अरब डॉलर तक पहुंच गया है और अच्‍छी प्रगति का संकेतक है। बातचीत में द्विपक्षीय व्यापार और निवेश रुझान, प्राथमिकता वाले उत्पादों और सेवाओं की पहचान तथा विभिन्न क्षेत्रों में संवर्धन गतिविधियों और सहयोग पर चर्चा हुई। बैठक में फिल्म, ऊर्जा, निर्माण और अवसंरचना, सूचना प्रौद्योगिकी/ सूचना और संचार प्रौद्योगिकी/व्यावसायिक प्रक्रिया प्रबंधन/आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और औषधि जैसे विविध क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर बातचीत हुई। दोनों पक्ष इन क्षेत्रों में गहन सहयोग से दीर्घकालिक लाभ प्राप्‍त करने पर सहमत हुए। उन्‍होंने माना कि इससे दोनों देश अधिक प्रभावी तरीके से अपने विकास लक्ष्य प्राप्त कर सकेंगे और पारस्परिक सहयोग ढांचा मजबूत होगा।

बातचीत में व्यापार सुगमता के लिए कारोबारी माहौल में सुधार भी अन्‍य प्रमुख मुद्दा रहा। सीमा शुल्क सहयोग और इस सुगम बनाने, कृषि क्षेत्र में सहयोग और विशिष्ट उत्पादों के लिए बाजार पहुंच तथा राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार जैसे विषय शामिल रहे।

बैठक में आसियान-भारत व्यापार समझौते की समीक्षा शीघ्र संपन्‍न करने और उसके बाद भारत-फिलीपींस के बीच द्विपक्षीय प्राथमिकता व्यापार समझौते पर बातचीत पर भी चर्चा हुई।

बैठक में द्विपक्षीय आर्थिक संबंध सुदृढ बनाने के रणनीतिक महत्व को रेखांकित किया गया।  दोनों देशों ने अधिक सक्रिय और परस्‍पर लाभकारी साझेदारी प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

14वें संयुक्त कार्य समूह की बैठक से इतर दौरान 4 जून को फिलीपींस में कार्यगत भारतीय व्यवसायियों के साथ एक संवाद सत्र भी आयोजित किया गया। इसमें व्यापार, निवेश, बाजार अवसरों और भारत-फिलीपींस वाणिज्यिक संबंधों को और गहन बनाने के उपायों पर चर्चा हुई।

भारत-फिलीपींस व्यापार एवं निवेश संयुक्त कार्य समूह की अगली बैठक नई दिल्ली में आयोजित होगी। भारत-फिलीपींस व्यापार और निवेश संयुक्त कार्य समूह माल और सेवा क्षेत्र में व्‍यापार संवर्धन तथा निवेश संबंधों को मजबूत करने पर विशेष बल के साथ ही दोनों देशों के लिए वैश्विक, क्षेत्रीय और द्विपक्षीय घटनाक्रमों पर विचार साझा करने का मंच भी रहा है।

त्रिपुरा में BSF जवानों के बीच पहुंचे अमित शाह, लंकामूरा सीमा चौकी का निरीक्षण कर बढ़ाया हौसला

दिल्ली / सत्ता संदेश

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सीमा सुरक्षा बल की लंकामूरा सीमा चौकी का निरीक्षण किया और बीएसएफ के जवानों के साथ संवाद किया। गृह मंत्री ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में वृक्षारोपण अभियान के अंतर्गत अगर पौधे का रोपण किया। इस अवसर पर त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा, केन्द्रीय गृह सचिव, निदेशक, आसूचना ब्यूरो, सचिव, सीमा प्रबंधन और महानिदेशक, सीमा सुरक्षा बल सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

अमित शाह ने कहा कि 2019 से लेकर आज तक हमारे सभी केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के जवानों ने लगभग 7.5 करोड़ से अधिक वृक्ष लगाने का काम किया है। इस वर्ष 40 लाख से 60 लाख वृक्ष लगाएंगे और लगाए हुए वृक्षों में से जो वृक्ष जीवित नहीं रह सके, उन सभी वृक्षों को दोबारा लगाने का काम किया जाएगा।

गृह मंत्री ने कहा कि पीएम मोदी ने पर्यावरण संरक्षण के लिए कई प्रकार के कदम एक साथ उठाए हैं। इस दिशा में एक प्रकार से भारत का मॉडल पेरिस सम्मेलन में आदर्श मॉडल के रूप में स्वीकारा गया। उन्होंने कहा कि हमने पेरिस घोषणा के हर बिंदु को समयपूर्व पूरा कर ऋग्वेद के पर्यावरण की रक्षा के संदेश के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को विश्व के सामने साबित किया है। उन्होंने कहा कि सीएपीएफ के सभी जवान बड़े मनोयोग के साथ एक वृक्ष को अपना परिजन मानकर इसकी देखभाल कर रहे हैं। यह सरकारी आदेशों से प्रेरित कार्यक्रम नहीं होना चाहिए, बल्कि सहज आदत होनी चाहिए, क्योंकि यही आदत हमें बचा सकती है।

अमित शाह ने कहा कि आज सीमा सुरक्षा बल की 37वीं वाहिनी में जवानों के आवास का ई- लोकार्पण और बीएसएफ 97वीं वाहिनी में क्वार्टर गार्ड परिसर का ई-शिलान्यास किया गया है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने सामीओं की रक्षा करने वाले हमारे जवानों की सुविधा बढ़ाने के लिए कई प्रकार के काम किए हैं। जवानों और उनके परिवार के स्वास्थ्य की चिंता और उनके परिवार के रहने के लिए मकान की चिंता भी की है। वृक्षारोपण अभियान के अंतर्गत CAPFs, असम राइफल्स, राष्ट्रीय सुरक्षा गारद, दिल्ली पुलिस, NCB, NCRB, NIA, BPR&D, NDRF, NDMA और ISCS सहित गृह मंत्रालय के सभी कार्यालयों ने देशभर में 5 लाख से अधिक पौधे लगाए।

रुद्रपुर, हल्द्वानी और काशीपुर में TRAI ने परखी मोबाइल नेटवर्क की गुणवत्ता, सेवाओं का किया विस्तृत आकलन

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण- ट्राई ने रुद्रपुर शहर में गदरपुर, दिनेशपुर, जयनगर, खेमपुर/खानपुर, बिंद्ट खेड़ा, रुद्रपुर, बिलहरा, लालपुर और किच्छा तथा हल्द्वानी शहर में काठगोदाम, हलद्वानी, ट्रांसपोर्ट नगर, गोरापड़ाव और मोटाहल्दू तथा काशीपुर शहर में प्रतापपुर, कचनालगाजी, काशीपुर, धमार खेड़ा, रामनगर, ढकिया कलां, सुल्तानपुर और पट्टी कलां में मोबाइल नेटवर्क गुणवत्ता जांच की।

ट्राई ने उत्तर प्रदेश लाइसेंस सेवा क्षेत्र – यूपीडब्ल्यू एलएसए के तहत अप्रैल 2026 में रुद्रपुर, हल्द्वानी और काशीपुर शहरों में आयोजित स्वतंत्र ड्राइव टेस्ट- आईडीटी के निष्कर्ष से दूरसंचार उपभोक्ताओं को अवगत कराने के लिए इसे जारी किया है। इस ड्राइव टेस्ट का उद्देश्य दूरसंचार सेवा प्रदाताओं द्वारा प्रदान की जाने वाली मोबाइल नेटवर्क सेवाओं (वॉयस और डेटा दोनों) की वास्तविक समय गुणवत्ता आकलन और इसका सत्यापन करना है। स्वतंत्र ड्राइव टेस्ट के दौरान, ट्राई, कॉल ड्रॉप रेट, कॉल सेटअप सक्सेस रेट, डेटा डाउनलोड और अपलोड प्रदर्शन आदि प्रमुख सेवा गुणवत्ता मापदंडों के लिए दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के प्रदर्शन को रिकॉर्ड करता है, जिन्हें बाद में उपभोक्ताओं को सूचित करने और सेवा प्रदाताओं को अपनी सेवा में सुधार करने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु प्रकाशित किया जाता है।

इंटरनल डेटा टेस्टिंग डिवाइस को शहरों, भीडभाड वाले सार्वजनिक स्‍थलों, सार्वजनिक परिवहन केंद्रों आदि विभिन्न उपयोग परिवेशों में सभी दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के मोबाइल नेटवर्क प्रदर्शन आकलन के लिए डिज़ाइन किया गया है। इस प्रकार के ड्राइव टेस्टिंग में, 2जी, 3जी, 4जी और 5जी नेटवर्क पर सभी सेवा प्रदाताओं के सिम कार्ड का उपयोग कर लाइव डेटा और वॉयस सेशन किए जाते हैं। इसमें कई उन्नत टेस्ट हैंडसेट का इस्‍तेमाल किया जाता है, और उन्नत सॉफ्टवेयर सिस्टम का उपयोग कर इस पूरे कार्य की वास्तविक समय में निगरानी और विश्लेषण किया जाता है।

ट्राई ने अपनी निर्धारित एजेंसी के माध्यम से 6 अप्रैल 2026 से 9 अप्रैल 2026 के दौरान उत्तर प्रदेश पश्चिमी क्षेत्र में रुद्रपुर, हल्द्वानी और काशीपुर शहरों में 408 किलोमीटर (सिटी ड्राइव), 14 हॉटस्पॉट स्थानों और 3.2 किलोमीटर (वॉक टेस्ट) संचालित किया। ये परीक्षण ट्राई के भोपाल स्थित क्षेत्रीय कार्यालय के परिवीक्षण में किए गए। ड्राइव टेस्ट रिपोर्ट में प्रस्तुत अवलोकन, ड्राइव टेस्ट के दिन/समय पर परीक्षण क्षेत्र/मार्ग पर दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के प्रदर्शन दर्शाते हैं।

“विश्व पर्यावरण दिवस पर राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ की हरित पहल, वृक्षारोपण और पौध वितरण कार्यक्रम आयोजित”

दिल्ली / सत्ता संदेश

राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ (आरएवी), नई दिल्ली ने विश्व पर्यावरण दिवस 2026 को वृक्षारोपण अभियान और पौध वितरण कार्यक्रम के माध्यम से मनाया, और इस तरह विद्यापीठ ने पर्यावरण संरक्षण और सतत जीवन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। यह कार्यक्रम इस वर्ष के विश्व पर्यावरण दिवस के विषय, प्रकृति से प्रेरित, जलवायु के लिए, हमारे भविष्य के लिए” के अनुरूप आयोजित किया गया था।

इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ के शासी निकाय के अध्यक्ष वैद्य देवेंद्र त्रिगुणा; राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ की निदेशक डॉ. वंदना सिरोहा; राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा प्रणाली आयोग (एनसीआईएसएम) में आचार संहिता और पंजीकरण बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सुश्रुत कनौजिया; और एनसीआईएसएम के चिकित्सा मूल्यांकन और रेटिंग बोर्ड के पूर्व सदस्य डॉ. बीएल मेहरा ने भाग लिया।

इस उत्सव के अंतर्गत, विद्यापीठ परिसर में संकाय सदस्यों, अधिकारियों, कर्मचारियों और छात्रों ने वृक्षारोपण अभियान में भाग लिया, जिससे पर्यावरण संरक्षण और पारिस्थितिक स्थिरता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की पुष्टि हुई। इस पहल का उद्देश्य पर्यावरण जागरूकता को बढ़ावा देना और हरित आवरण बढ़ाने तथा पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सामूहिक कार्रवाई को प्रोत्साहित करना था। इस कार्यक्रम में औषधीय पौधों के संरक्षण के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया, जो आयुर्वेदिक स्वास्थ्य सेवा और भारत की समृद्ध पारंपरिक ज्ञान विरासत का आधार हैं।

गणमान्य हस्तियों ने आयुर्वेद के पारिस्थितिक दर्शन पर प्रकाश डाला, जो मनुष्य और प्रकृति के अंतर्संबंध पर बल देता है। पंचमहाभूत सिद्धांत और लोक-पुरुष साम्य की अवधारणाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पर्यावरणीय संतुलन मानव स्वास्थ्य और कल्याण के लिए मूलभूत है। उन्होंने आगे कहा कि आयुर्वेदिक सिद्धांत अनवरत जीवनशैली, सजग उपभोग और प्राकृतिक संसाधनों के उत्तरदायित्वपूर्ण उपयोग को प्रोत्साहित करते हैं, जिससे समकालीन पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने में पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों की प्रासंगिकता और भी पुष्ट होती है।

इस कार्यक्रम की एक ख़ास विशेषता विद्यापीठ के अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच पौधों का वितरण था। इस पहल का उद्देश्य प्रतिभागियों को अपने समुदायों में वृक्षारोपण और देखभाल के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रोत्साहित करना था।

प्रतिभागियों ने सतत जीवन शैली के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की, वहीं इस आयोजन ने पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास और प्रकृति के साथ सामंजस्य को बढ़ावा देने में आयुर्वेद की निरंतर प्रासंगिकता पर जोर दिया।

भारत की ऊर्जा रणनीति में वेनेजुएला की अहम भूमिका, कार्यवाहक राष्ट्रपति से मिले हरदीप सिंह पुरी

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री श्री हरदीप सिंह पुरी ने 4 जून 2026 को नई दिल्ली में वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी एलोइना रोड्रिगेज गोमेज से मुलाकात की। इस दौरान मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों के प्रमुख भी उपस्थित थे। दोनों नेताओं ने भारत व वेनेजुएला के बीच एक स्थायी ऊर्जा साझेदारी के निर्माण के अवसरों पर चर्चा की।

बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत और वेनेजुएला के बीच एक स्वाभाविक साझेदारी है जिसकी जड़ें दोनों देशों के बीच लंबे समय से चली आ रही मित्रता में निहित हैं। उन्होंने वेनेजुएला में ऊर्जा क्षेत्र के पुनर्निर्माण के प्रति भारत के मजबूत समर्थन को दोहराते हुए कहा कि भारतीय कंपनियां वहां अपनी भागीदारी और उपस्थिति बढ़ाने के लिए तत्पर हैं। भारत की ऊर्जा विविधीकरण रणनीति में वेनेजुएला की महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार करते हुए, उन्होंने वेनेजुएला के साथ ऊर्जा व्यापार को और मजबूत करने की भारत की इच्छा व्यक्त की।

भारत को वेनेजुएला का विश्वसनीय सहयोगी बताते हुए, कार्यवाहक राष्ट्रपति ने भारतीय कंपनियों को वेनेजुएला के तेल और गैस क्षेत्र में सुधार हेतु सक्रिय भूमिका निभाने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने ऊर्जा क्षेत्र में भारत और वेनेजुएला के बीच मौजूद पूरकताओं पर प्रकाश डाला और सहयोग बढ़ाने के अवसरों का पता लगाने के लिए भारतीय प्रतिनिधिमंडल को वेनेजुएला आने का निमंत्रण भी दिया।

पृष्ठभूमि

विश्व का सबसे बड़ा ज्ञात तेल भंडारों का देश वेनेजुएला, भारत के लिए कच्चे तेल का प्रमुख पारंपरिक आपूर्तिकर्ता है। भारत का उन्नत शोधन उद्योग वेनेजुएला के भारी कच्चे तेल को प्रभावी ढंग से संसाधित करने के लिए विशेष रूप से सक्षम है। भू-राजनीतिक और आपूर्ति संबंधी बाधाओं के कारण खाड़ी देशों से कच्चे तेल के आयात पर असर पड़ने के कारण, भारत ऊर्जा विविधीकरण के लिए वेनेजुएला के साथ एक रणनीतिक साझेदार के रूप में जुड़ रहा है। अप्रैल और मई 2026 के दौरान वेनेजुएला भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति करने वाले शीर्ष देशों में से एक बनकर उभरा है, जो भविष्य की संभावनाओं को दर्शाता है। वेनेजुएला से भारत का औसत मासिक आयात वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 64.027 टन मीट्रिक टन से बढ़कर वित्त वर्ष 2026-27 के अप्रैल-मई में 1,047.148 टन मीट्रिक टन हो गया।

भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों की वेनेजुएला के अपस्ट्रीम क्षेत्र में 2008 से ही मजबूत उपस्थिति है, जो उनकी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाती है। ओरिनोको बेल्ट में स्थित सैन क्रिस्टोबल और पेट्रोकाराबोबो-1 परियोजनाओं में भारत का वेनेजुएला के तेल क्षेत्र में कुल निवेश लगभग 1 अरब अमेरिकी डॉलर है।

“दिल्ली को मिली 18 नमो ऑक्सीजन पार्कों की सौगात, विश्व पर्यावरण दिवस पर हरित पहलों का आगाज़”

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के अवसर पर दिल्ली में 18 ‘नमो ऑक्सीजन पार्क’ का उद्घाटन किया। इस अवसर पर ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान तहत कई पर्यावरण संबंधी पहलों की शुरुआत की गई। मैदनगढ़ी स्थित नमो ऑक्सीजन पार्क में आयोजित इस कार्यक्रम ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में शहरी हरियाली को बढ़ाने, वायु गुणवत्ता सुधारने और समुदाय की भागीदारी से पर्यावरण संरक्षण को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

भूपेंद्र यादव ने कहा कि वर्तमान समय में मानवता के समक्ष जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता में कमी और भूमि क्षरण जैसी तीन बड़ी पर्यावरणीय चुनौतियां हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्वकर्ता के रूप में उभरा है। उन्होंने कहा कि भारत ने सौर ऊर्जा क्षमता वृद्धि के मामले में विश्व भर में अग्रणी बनने, पीएम सूर्य घर योजना का कार्यान्वयन, अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन की स्थापना, अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट एलायंस (आईबीसीए) का शुभारंभ, रामसर आर्द्रभूमि स्थलों का विस्तार और जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन के तहत राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) लक्ष्यों को समय से पहले प्राप्त करने जैसी कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं।

दिल्ली के पर्यावरण को बेहतर बनाने के प्रयासों का उल्लेख करते हुए श्री यादव ने कहा कि दिल्ली सरकार, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के सहयोग से, सड़क की धूल, वाहनों से निकलने वाले धुएं और औद्योगिक प्रदूषण सहित वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों से निपटने के लिए कई कदम उठा रही है। इनमें ऑनलाइन निरंतर उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (ओसीईएमएस) की स्थापना, वायु प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों (एपीसीडी) की तैनाती, सड़कों की मशीनीकृत गहन सफाई और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना शामिल हैं।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली की वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए हरित क्षेत्र बढ़ाना सबसे महत्वपूर्ण उपायों में से एक है। उन्होंने घोषणा की कि दिल्ली सरकार ने इस वर्ष पूरे शहर में 15 लाख पेड़ लगाने का लक्ष्य रखा है। पर्यावरण संरक्षण में नागरिकों की भूमिका का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण अभियान के साथ-साथ वृक्षारोपण के बाद उनकी देखभाल और संरक्षण के लिए भी सामुदायिक भागीदारी आवश्यक है।