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उत्तर प्रदेश में कड़ी सुरक्षा के बीच शांतिपूर्ण ढंग से अदा हुई बकरीद की नमाज, ड्रोन से रखी गई निगरानी

लखनऊ / सत्ता संदेश

Uttar Pradesh के विभिन्न जिलों में ईद-उल-अज़हा यानी बकरीद का पर्व गुरुवार को शांतिपूर्ण माहौल में मनाया गया। राज्यभर में मस्जिदों और ईदगाहों में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने विशेष नमाज अदा कर देश में अमन, भाईचारे और खुशहाली की दुआ मांगी। त्योहार को देखते हुए प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए थे और संवेदनशील इलाकों में ड्रोन कैमरों से निगरानी की गई।

अधिकारियों के अनुसार, राजधानी लखनऊ सहित मेरठ, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, अलीगढ़, बरेली, मुरादाबाद और अन्य जिलों में सुबह से ही सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। नमाज के दौरान वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी लगातार हालात पर नजर बनाए हुए थे।

पुलिस प्रशासन ने संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया था। कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई और प्रमुख चौराहों पर सुरक्षा जांच अभियान भी चलाया गया। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पीएसी और रैपिड एक्शन फोर्स के जवानों को भी तैनात किया गया था।

अधिकारियों ने बताया कि आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए कई संवेदनशील इलाकों में ड्रोन कैमरों से निगरानी रखी गई। इसके अलावा सीसीटीवी कैमरों और कंट्रोल रूम के जरिए भी गतिविधियों पर नजर रखी गई ताकि किसी भी अप्रिय घटना को तुरंत रोका जा सके।

त्योहार के दौरान लोगों ने एक-दूसरे को बकरीद की शुभकामनाएं दीं और आपसी भाईचारे का संदेश दिया। मस्जिदों और ईदगाहों में नमाज के बाद लोगों ने गले मिलकर खुशी जाहिर की। कई जगहों पर सामाजिक संगठनों और स्थानीय प्रशासन की ओर से यातायात और भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी।

प्रशासन ने पहले ही लोगों से शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की थी। धार्मिक नेताओं ने भी लोगों से कानून का पालन करने और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने का संदेश दिया। अधिकारियों के अनुसार, पूरे प्रदेश में बकरीद का त्योहार शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ और कहीं से किसी बड़ी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।

राज्य सरकार ने त्योहार को लेकर पहले से ही जिलाधिकारियों और पुलिस अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए थे। सोशल मीडिया पर भी निगरानी रखी गई ताकि अफवाहों और भड़काऊ संदेशों पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान तकनीक आधारित निगरानी और प्रशासनिक सतर्कता कानून-व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उत्तर प्रदेश में बकरीद के दौरान अपनाई गई सुरक्षा व्यवस्था को इसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

बकरीद क्या है और क्यों मनाई जाती है? जाने त्याग और विश्वास का पर्व, भारतीय अर्थव्यवस्था में ₹50,000 करोड़ का योगदान

नई दिल्ली: दुनियाभर के साथ-साथ भारत में भी मुसलमान बकरीद (ईद-उल-अज़हा) का त्योहार बड़े उत्साह के साथ मना रहे हैं। इस्लामी कैलेंडर के आखिरी महीने ‘ज़िल-हिज्जा’ की 10 तारीख को मनाया जाने वाला यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था में भी एक बड़ी भूमिका निभाता है।

इतिहास और महत्व बकरीद की कहानी: करीब 2000 ईसा पूर्व पैगंबर इब्राहिम और उनके बेटे इस्माइल के त्याग से जुड़ी है। यह त्योहार ईश्वर पर अटूट भरोसे और बलिदान का संदेश देता है। इस दिन कुर्बानी के गोश्त को गरीबों और जरूरतमंदों में बांटने की परंपरा है, जो इस्लाम में ‘ज़कात’ की तरह दान का संदेश देती है।

अर्थव्यवस्था पर बड़ा प्रभाव : जानकारों के अनुसार, केवल बकरीद के मौके पर भारत में जानवरों से जुड़ा कारोबार करीब 50,000 करोड़ रुपये तक पहुँच जाता है। एक अनुमान के मुताबिक, इस अवसर पर करीब 1.5 करोड़ जानवरों की कुर्बानी दी जाती है। इस कारोबार से न केवल पशुपालक, बल्कि चारा बेचने वाले, वेटनरी डॉक्टर, ट्रांसपोर्टर, कसाई और चमड़ा कारोबारी भी जुड़े होते हैं।

पशुपालन और गोट फॉर्मिंग : भारत के कई राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और बिहार में पशुपालन ग्रामीण रोजगार का अहम जरिया है। यूपी में यादव और गुर्जर, राजस्थान में रबारी और मालधारी, तथा गुजरात के कच्छ-सौराष्ट्र में मालधारी समुदाय पारंपरिक रूप से इस उद्योग से जुड़े हैं। वर्तमान में ‘गोट फॉर्मिंग’ का कारोबार भी तेजी से फल-फूल रहा है, जिससे पिछड़े वर्ग, दलित और आदिवासी समाज के लोग आर्थिक रूप से सशक्त हो रहे हैं।

महंगे बकरों की मांग : इस साल मंडियों में बकरों की भारी मांग देखी गई, जहाँ कुछ खास नस्ल के बकरों की कीमत 50 लाख रुपये तक रही। यहाँ तक कि एक विशेष निशान वाले बकरे की कीमत 4 करोड़ रुपये तक बताई गई है।