ब्रेकिंग न्यूज़
ज्वेलरी बिल का ‘हिडन’ गणित: क्या आप भी दे रहे हैं सोने पर 2 बार टैक्स? खरीदारी से पहले जान लें ये नियम

बिजनेस डेस्क । शादी-ब्याह और त्योहारों के सीजन में सोने की खरीदारी करने वाले ग्राहकों को अक्सर ज्वेलरी बिल देखकर झटका लगता है। सोने की बढ़ती कीमतों के बीच बिल में दो तरह के GST जुड़ने से लोग अक्सर भ्रमित हो जाते हैं कि उन पर डबल टैक्स क्यों लगाया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह कोई “डबल टैक्स” नहीं बल्कि सरकार के अलग-अलग टैक्स नियम हैं, जिन्हें समझना हर ग्राहक के लिए जरूरी है।

सोने और मेकिंग चार्ज पर अलग-अलग टैक्स : बिल के गणित को समझें तो, जब भी आप सोना खरीदते हैं तो उसकी वास्तविक मार्केट वैल्यू पर 3% GST लगाया जाता है। यह टैक्स सोने की धातु की कीमत पर होता है। इसके अलावा, ज्वेलरी बनाने में लगने वाली मेहनत यानी मेकिंग चार्ज को सरकार एक सेवा (Service) मानती है, जिस पर अलग से 5% GST वसूला जाता है। यही कारण है कि ग्राहकों को बिल में दो अलग-अलग टैक्स दिखाई देते हैं।

क्या यह सच में डबल टैक्स है? तकनीकी रूप से देखा जाए तो ग्राहक एक ही चीज पर दो बार टैक्स नहीं दे रहा होता। पहला टैक्स सोने की धातु पर है और दूसरा ज्वेलरी बनाने की सेवा पर। हालांकि, दोनों के एक साथ जुड़ने से बिल की कुल रकम काफी बढ़ जाती है।

पुराना सोना बदलने पर मिलता है फायदा: अगर आप अपने पुराने गहनों को बदलकर नई ज्वेलरी बनवाते हैं, तो आपको केवल मेकिंग चार्ज और उस पर लगने वाले 5% GST का भुगतान करना होगा। लेकिन, यदि आप पुराना सोना बेचकर पैसे लेते हैं और फिर नया गहना खरीदते हैं, तो आपको पूरी कीमत पर दोबारा 3% GST देना पड़ेगा।

खरीदारी करते समय इन बातों का रखें ध्यान:हमेशा डिटेल्ड बिल लें, जिसमें गोल्ड वैल्यू, मेकिंग चार्ज और GST अलग-अलग दर्शाया गया हो। सोने की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए BIS हॉलमार्क जरूर देखें। टैक्स का बोझ कम करने के लिए गोल्ड एक्सचेंज के विकल्प पर विचार करें।