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‘युवा भारत की सबसे बड़ी ताकत, विकसित भारत के निर्माण में निभाएंगे अहम भूमिका’: मनसुख मांडविया

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के साथ राष्ट्रीय राजधानी के त्यागराज स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में आयोजित ‘विकसित भारत के लिए युवा: माय भारत युवा सम्मेलन’ को संबोधित किया।
इस सम्मेलन में देश भर से 6,000 से अधिक युवा प्रतिभागियों ने भाग लिया, जो छात्रों, युवा पेशेवरों, युवा महिलाओं, उद्यमियों, कंटेंट क्रिएटर्स, नवाचारों, उभरते दिग्गजों और उपलब्धि हासिल करने वालों सहित विविध पृष्ठभूमि वाले युवाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं।
इसमें राष्ट्र निर्माण में युवाओं की परिवर्तनकारी भूमिका और 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में भारत की यात्रा को दर्शाया गया है।

उन्होंने कहा, “युवा हमारी शक्ति, हमारा गौरव, हमारा संकल्प और हमारा भविष्य हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में, युवा भारतीयों को नवाचार करने, उत्कृष्टता हासिल करने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के अभूतपूर्व अवसर मिले हैं। चाहे स्टार्टअप हो, खेल हो, सार्वजनिक सेवा हो, उद्यमिता हो या रचनात्मक क्षेत्र, युवा भारतीय अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं और देश की वैश्विक प्रतिष्ठा को बढ़ा रहे हैं।”

डॉ. मांडविया ने माय भारत की हालिया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड उपलब्धि की भी सराहना की और युवाओं से इस मंच के कार्यक्रमों, स्वयंसेवी अवसरों और राष्ट्र निर्माण की पहलों में सक्रिय रूप से भाग लेने का आग्रह किया।
डॉ. मांडविया ने युवाओं से अपनी क्षमता को पहचानने और उत्कृष्टता के लिए प्रयास करने का आह्वान करते हुए कहा “यह समय युवाओं का है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने एक विकसित भारत की परिकल्पना की है जो युवा भारतीयों के विचारों, नवाचार और आकांक्षाओं से आकार लेता है। हमें मिलकर एक प्रतिस्पर्धी, आत्मविश्वासी और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण करना होगा जो 140 करोड़ नागरिकों के सपनों को साकार करे।”
दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के युवा अपनी प्रतिभा, दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत के माध्यम से देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तैयार हैं।

उन्होंने राष्ट्र निर्माण में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देते हुए, कहा कि भारत के युवा मेहनती, दूरदर्शी, रचनात्मक और साहसी हैं, और एक युवा भारतीय द्वारा हासिल की गई हर उपलब्धि देश को विकसित भारत की ओर बढ़ने में मदद करती है।
उन्होंने कहा कि उत्कृष्टता किसी भी क्षेत्र में दृढ़ता, अनुशासन और समर्पण पर आधारित होती है, और उन्होंने खेल, उद्यमिता, कंटेंट क्रिएशन, कला और सार्वजनिक सेवा के क्षेत्र में युवा भारतीयों की उपलब्धियों की सराहना की।
युवा सम्मेलन के दौरान, अभिनेता विक्रांत मैसी ने प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में भारत की रचनात्मक अर्थव्यवस्था की उल्लेखनीय वृद्धि का उल्लेख किया और डिजिटल सशक्तिकरण तथा नवाचार के माध्यम से सृजित अवसरों पर जोर दिया।

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मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दी शुभकामनाएं, कहा- भारत विकास और आत्मविश्वास के नए दौर में

छत्तीसगढ़ / सत्ता संदेश

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में देश आत्मविश्वास, सुरक्षा, सुशासन और विकास के नए युग की ओर तेजी से बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी अपने संदेश में प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल को राष्ट्रसेवा और गरीब कल्याण को समर्पित बताया। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश ने कई क्षेत्रों में ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं और भारत की वैश्विक पहचान पहले से अधिक मजबूत हुई है।

साय ने अपने संदेश में लिखा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘प्रधान सेवक’ के रूप में राष्ट्रसेवा, सुशासन और गरीब कल्याण को समर्पित सफल 12 वर्ष पूर्ण करने पर हार्दिक बधाई एवं अभिनंदन। प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में आज भारत आत्मविश्वास, सुरक्षा और विकास के नए युग की ओर अग्रसर है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियों और योजनाओं का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचा है। गरीबों, किसानों, महिलाओं और युवाओं के कल्याण के लिए शुरू की गई विभिन्न योजनाओं ने देश के विकास को नई गति दी है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने वैश्विक मंच पर अपनी अलग पहचान बनाई है और दुनिया में देश की प्रतिष्ठा लगातार बढ़ी है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी के 12 वर्षों के कार्यकाल को भारतीय राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में बड़े बदलावों के दौर के रूप में देखा जा रहा है। डिजिटल इंडिया, आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया, स्वच्छ भारत मिशन और बुनियादी ढांचे के विस्तार जैसे कई अभियानों ने देश के विकास मॉडल को नई दिशा दी है।

प्रधानमंत्री मोदी ने वर्ष 2014 में पहली बार देश के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी। इसके बाद वर्ष 2019 में दोबारा केंद्र की सत्ता संभाली और लगातार तीसरे कार्यकाल में भी उनकी सरकार विकास, सुशासन और राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कह रही है।

हर काम देश के नाम’

सैनिकों के स्वास्थ्य और परिवार की भलाई को मजबूत करने के लिए  सप्त शक्ति कमान 11 एवं 12 मई 2026 को दो दिवसीय लैंडमार्क वेलनेस सेमिनार “ ऑगमेंटेड  वैलनेस : फिट  फॉर  ड्यूटी , फिट  फॉर  लाइफ   ” का आयोजन करने जा रही है।

चंडीगढ़: /सत्ता संदेश

भारतीय सेना गर्व के साथ संवर्धित वेलनेस नामक उच्च प्रभाव वाला दो दिवसीय वेलनेस सेमिनार आयोजित करने जा रही है। यह सेमिनार सैनिकों, अधिकारियों और उनके परिवारों के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है। इसका शीर्षक “वेलनेस सेमिनार” है। यह सेमिनार आज के कठिन परिचालन वातावरण में सेवा कर रहे सैन्य कर्मियों द्वारा सामना की जाने वाली शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक, वित्तीय और आध्यात्मिक चुनौतियों का समाधान करेगा।

वेलनेस सेमिनार बठिंडा मिलिट्री स्टेशन के सागत सिंह ऑडिटोरियम में 11 एवं 12 मई 2026 को आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम को तीन शक्तिशाली सत्रों के साथ तैयार किया गया है, जो अत्याधुनिक स्वास्थ्य विज्ञान को युद्धकालीन सैन्य अनुभव के साथ जोड़कर व्यावहारिक और क्रियान्वयन योग्य रणनीतियाँ प्रदान करता है, जिससे  सेना की परिचालन तैयारी और दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभों में सीधी वृद्धि होगी।

आधुनिक सैन्य जीवन, असाधारण शारीरिक फिटनेस, मानसिक दृढ़ता, भावनात्मक बुद्धिमत्ता, वित्तीय समझदारी और आध्यात्मिक शक्ति की मांग करता है। यह सेमिनार प्रतिभागियों को प्रमाण-आधारित उपकरण और सेवा/सेवानिवृत्त सैन्य नेताओं तथा क्षेत्र के विशेषज्ञों के समय-परीक्षित ज्ञान से सुसज्जित करेगा ताकि “संतुलित योद्धा” का निर्माण किया जा सके, जो मिशन के लिए सदैव तैयार रहे तथा व्यक्तिगत और पारिवारिक कल्याण भी बनाए रखे। यह सेमिनार जीवनशैली संबंधी रोगों में कमी, बेहतर तनाव प्रबंधन, मजबूत परिवार समर्थन प्रणालियों तथा संगठनात्मक लचक में सीधा योगदान देगा।

नए भारत की एमएसएमई क्रांति के केंद्र में है नारी शक्ति
  • शोभा करंदलाजे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा और विधानसभाओं में एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने वाले नारी शक्ति वंदन अधिनियम का सितंबर 2023 में संसद में समर्थन करते हुए विश्वास व्यक्त किया था कि भारत तभी आगे बढ़ सकता जब देश की नारियां भी इसके साथ ही उन्नति करें। उनका यह विश्वास एमएसएमई क्षेत्र (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम) में सरकार के काम में हर रोज दिखाई देता है।

एमएसएमई  क्षेत्र को अक्सर भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी कहा जाता है। लेकिन अगर गहराई से देखें तो इसके दिल में महिला उद्यमियों का मूक बल बसता है। आखिरकार आज इस मूक बल को वह राष्ट्रीय मान्यता, संस्थागत समर्थन और नीतिगत गति मिल रही है जिसका वह हमेशा से हकदार है।

आँकड़े बयां करते हैं कहानी

भारत के एमएसएमई  इकोसिस्टम में महिलाओं की भागीदारी का दायरा लगातार बढ़ रहा है। 2026 की शुरुआत तक, ‘उद्यम पंजीकरण पोर्टल’ और ‘उद्यम असिस्ट प्लेटफॉर्म’ पर 3.11 करोड़ से अधिक महिला-नेतृत्व वाले उद्यम पंजीकृत हुए हैं। वास्तव में, ‘उद्यम’ और ‘उद्यम असिस्ट’ पंजीकरण के अनुसार, देश के कुल पंजीकृत एमएसएमई में महिला-स्वामित्व वाले उद्यमों की हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत है और ये रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। महिला उद्यमियों के लिए सबसे प्रभावशाली सुधारों में से एक ‘उद्यम पंजीकरण पोर्टल’ के माध्यम से पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाना है। पूरी तरह से ऑनलाइन, कागज रहित और स्व-घोषणा पर आधारित इस व्यवस्था ने उस नौकरशाही बाधा को समाप्त कर दिया, जो महिलाओं के लिए एक बड़ी रुकावट बनी हुई थी। जनवरी 2023 में शुरू किए गए ‘उद्यम असिस्ट प्लेटफॉर्म’ ने अनौपचारिक क्षेत्रों में कार्यरत उन महिलाओं तक पहुँच बनाकर इस दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया, जिनके पास ‘पैन’ नंबर या ‘जीएसटीएन’  नहीं था। इसने उन्हें प्राथमिकता क्षेत्र में दिए जाने वाले ऋण और सरकारी योजनाओं के लाभों के दायरे में लाने का काम किया।

सरकार ने महिलाओं को विकास वाहक के रूप में अपने आर्थिक एजेंडे के केंद्र में रखने का निर्णय लिया है।

आर्थिक शक्ति के रूप में नारी शक्ति

प्रधानमंत्री मोदी ने लगातार इस बात पर ज़ोर दिया है कि महिलाओं को सशक्त बनाना केवल एक सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय रणनीति है। उन्होंने ही कहा था कि  जब महिलाएं सशक्त होती हैं, तो परिवार सशक्त होते हैं और जब परिवार सशक्त होते हैं, तो राष्ट्र निरंतर मज़बूत होता जाता है।

‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ राजनीतिक क्षेत्र में इस दर्शन की सबसे स्पष्ट अभिव्यक्ति है। लेकिन आर्थिक क्षेत्र में, विशेष रूप से एमएसएमई क्षेत्र में महिलाओं के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता एक व्यापक और बहुआयामी नीतिगत ढांचे के रूप में सामने आई है, जो ऋण, कौशल, बाज़ार तक पहुंच, पहचान और गरिमा जैसे पहलुओं को समाहित करती है।

महिलाओं के लिए तैयार की गई एक नीतिगत संरचना

एमएसएमई मंत्रालय ने अपने हर बड़े कार्यक्रम और योजना में महिलाओं के सशक्तिकरण को व्यवस्थित रूप से शामिल किया है।

ये सभी मिलकर, आपूर्ति पक्ष पर आठ मुख्य श्रेणियों के माध्यम से उद्यमियों को सहायता प्रदान करते हैं: तकनीक तक पहुँच, ऋण और वित्त तक पहुँच, डिजिटलीकरण को बढ़ावा, अवसरंचना सहायता, औपचारिकीकरण और समावेशन, बाज़ार तक पहुँच, और उद्योग-स्तरीय कौशल विकास।

पिछले पाँच वर्षों में, प्रधानमंत्री रोज़गार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के तहत 3.2 लाख से ज़्यादा महिलाओं के स्वामित्व वाले उद्यमों को सहायता दी गई है। हाल के आँकड़ों के अनुसार, पीएमईजीपी के कुल लाभार्थियों में से 39% महिलाएँ हैं जो इस योजना की रूपरेखा और महिलाओं की कुछ कर दिखाने की ललक, दोनों को दर्शाता है।

सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट महिला ऋणदाताओं को 90 प्रतिशत तक का बढ़ा हुआ गारंटी कवर प्रदान करता है। इससे बैंक बिना कुछ गिरवी रखे महिलाओं को ऋण देने के लिए तैयार हैं।

इसके अतिरिक्त, सार्वजनिक खरीद नीति  में संशोधन कर यह अनिवार्य किया गया कि केंद्रीय मंत्रालय, विभाग और सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम अपनी वार्षिक खरीद का कम से कम 3 प्रतिशत हिस्सा महिला-स्वामित्व वाले सूक्ष्म और लघु उद्यमों से ही खरीदें। इससे महिला उद्यमियों के लिए एक सुनिश्चित और अनुमानित बाज़ार तैयार होता है, जिससे सरकारी खर्च को महिलाओं के व्यवसाय की वृद्धि में बदला जा रहा है। यह देखकर खुशी होती है कि वित्त वर्ष 2025-26 में, केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों/केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों द्वारा की गई कुल खरीद का 3.5 प्रतिशत हिस्सा महिला एमएसएमई  से ही खरीदा गया था।

‘जेडइडी’ (जीरो डिफेक्ट जीरो इफेक्ट) प्रमाणन योजना के तहत, महिला-स्वामित्व वाले एमएसएमई को प्रमाणन शुल्क पर सौ प्रतिशत सब्सिडी मिलती है। ये विस्तृत विवरण काफी महत्वपूर्ण हैं और ये मंत्रालय के प्रयासों को दर्शाते हैं। मंत्रालय ने इस बारे में गहराई से विचार किया है कि महिलाओं को कहाँ कहाँ बाधाओं का सामना करना पड़ता है और ठीक उन्हीं बाधाओं को दूर करने के लक्ष्य के साथ सहायता दी गई।

‘महिला कॉयर योजना’, के तहत कॉयर क्षेत्र में काम करने वाली महिला कारीगरों को विशेष कौशल विकास और वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। ‘एमएसएमई- व्यापार सशक्तिकरण और विपणन’ के तहत महिलाओं को मार्केटिंग के लिए मदद करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिसके अंतर्गत 5 लाख लाभार्थियों में से 50 प्रतिशत महिलाओं को शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है। ‘यशस्विनी अभियान’ में, एमएसएमई  योजनाओं और पंजीकरण से मिलने वाले लाभों के बारे में महिलाओं को जानकारी देने के लिए पूरे देश में विशेष जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। विशेष रूप से महिला उद्यमियों के लिए आयोजित ‘एमएसएमई आइडिया हैकाथॉन’ 3.0 के तहत 18,888 से अधिक आइडिया प्राप्त हुए, जो स्पष्ट रूप से यह दर्शाता है कि महिलाओं में रचनात्मक और उद्यमशीलता की ऊर्जा का भंडार मौजूद है, जो बस बाहर आने का इंतज़ार कर रहा है।

इसके अलावा, मंत्रालय के पास एक समर्पित महिला उद्यमिता प्रकोष्ठ है, जो विभिन्न योजनाओं के बीच समन्वय स्थापित करके, महिलाओं के लिए प्राप्त परिणामों की निगरानी और मूल्यांकन करके, तथा इकोसिस्टम के हितधारकों के साथ जुड़कर महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए एक नोडल केंद्र के रूप में कार्य करता है।

इन सभी पहलों ने जेंडर टारगेटिंग (लैंगिक लक्ष्यीकरण) और अभिसरण पर ध्यान केंद्रित किया है। ये कदम योजनाओं के भीतर केवल एक सब्सिडी प्रावधान के रूप में ‘महिलाओं के समावेश’ से आगे बढ़कर, महिला-अनुकूल उद्यमिता सहायता के लिए एक अधिक सुविचारित और व्यापक ढांचे की ओर बढ़ने के सफर को दर्शाते हैं।

कौशल, आत्मविश्वास, समुदाय

क्रेडिट और बाज़ारों से परे, सरकार ने यह माना है कि उद्यमिता कौशल और आत्मविश्वास का भी विषय है। विशेष रूप से पूर्वोत्तर में, जहाँ महिलाएँ पारंपरिक रूप से अपने समाज की आर्थिक रीढ़ रही हैं, लक्षित उद्यमिता विकास कार्यक्रमों ने यह सुनिश्चित किया है कि प्रशिक्षित प्रतिभागियों में महिलाओं की संख्या सबसे अधिक हो।

स्वयं सहायता समूहों को एमएसएमई सहायता तंत्रों के साथ एकीकृत किया गया है, जिससे महिला उद्यमियों के ऐसे समुदाय बने हैं जो एक-दूसरे का सहयोग करते हैं। वे न केवल अपना व्यवसाय खड़ा करते हैं, बल्कि आपस में जुड़कर एक मजबूत नेटवर्क भी तैयार करते हैं।

यह एक ऐसी सरकार है जो निरंतर प्रगति की ओर अग्रसर है। प्रत्येक बजट, प्रत्येक योजना और प्रत्येक पोर्टल का सरलीकरण उस विशाल इमारत की एक ईंट के समान है, जिसकी नींव प्रधानमंत्री मोदी ने एक सरल, किंतु क्रांतिकारी विचार के साथ रखी थी—कि भारत की महिलाएं एक ऐसी शक्ति हैं जिन्हें अब स्वतंत्र और सशक्त होने का अवसर मिलना चाहिए।

हर उद्यम में नारी शक्तिकी भावना

नारी शक्ति वंदन अधिनियम ने दुनिया को बताया कि भारत की महिलाएँ यहाँ की संसद का हिस्सा हैं। इस सरकार की एमएसएमई नीतियां दुनिया को यह बता रही हैं कि भारत की महिलाएँ देश के बाजारों, कारखानों, उसकी निर्यात श्रृंखलाओं, उसके नवाचार केंद्रों और उसके बोर्डरूम्स की भी हकदार हैं।

ये उसी एक सत्य की अभिव्यक्तियाँ हैं, जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने 2047 तक ‘विकसित भारत’ के अपने विज़न का आधार बनाया है। एक विकसित भारत वह भारत है, जहाँ 3 करोड़ से भी ज़्यादा महिला उद्यमी (और यह संख्या लगातार बढ़ रही है) विकास की असली ताकत हैं।

अभी हम उस लक्ष्य तक पूरी तरह नहीं पहुँचे हैं, लेकिन इस सरकार की देखरेख में और प्रधानमंत्री के पक्के इरादों के साथ, हम यकीनन उस राह पर आगे बढ़ रहे हैं।

(लेखिका केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा श्रम एवं रोजगार मंत्रालय में राज्य मंत्री हैं।)