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पंजाब निकाय चुनाव के नतीजे आज होगें घोषित, सुबह 8 बजे से शुरु हुई वोटों गिनती

पंजाब / सत्ता संदेश

पंजाब में शुक्रवार को 8 नगर निगमों बठिंडा, अबोहर, बटाला, बरनाला, कपूरथला, मोगा, पठानकोट और मोहाली के नतीजे घोषित होंगे। इसके साथ ही 75 नगर कौंसिल, 20 नगर पंचायतों के नतीज भी आएंगे। निकाय चुनाव में आम आदमी पार्टी, बीजेपी, कांग्रेस और शिरोमणि अकाली में कांटे की टक्कर थी। 26 मई को इन चुनावों के लिए मतदान हुआ था।

आपको बता दें कि ईवीएम की जगह इस बार बैलेट पेपर से चुनाव कराया गया था। 35 लाख 45 हजार 567 वोटरों में से करीब 64% ने इस मतदान में हिस्सा लिया है। इस बार निकाय चुनाव में कुल 7555 उम्मीदवार मैदान में प्रत्याशी के तौर पर खड़े हुए। इसमें 1613 नगर निगम 5142 नगर कौंसिल और नगर पंचायत के लिए 800 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे।

मतगणना के लिए 115 काउंटिंग सेंटर बनाए गए

बता दें कि पंजाब में 26 मई को 8 नगर निगम, 75 नगर काउंसिल और 21 नगर पंचायतों समेत कुल 104 निकायों के लिए वोट डाले गए थे।मतगणना के लिए राज्यभर में 115 काउंटिंग सेंटर बनाए गए हैं। राज्य चुनाव आयोग के निर्देशानुसार सभी केंद्रों पर सुबह 8 बजे से गिनती शुरू हो गई है। आयोग का अनुमान है कि दोपहर 12 बजे तक अधिकांश निकायों के परिणाम स्पष्ट हो जाएंगे।

राजनीतिक दलों के लिए सत्ता का सेमीफाइनल

ये निकाय चुनाव राजनीतिक दलों के लिए सत्ता का सेमीफाइनल है। ऐसे में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के लिए ये इलेक्शन काफी अहम है।उधर, विपक्षी दलों ने भी इस बार पूरी ताकत झोंकी. चुनाव प्रचार के दौरान जमकर सत्ता पक्ष और विपक्ष की ओर से जमकर जुबानी जंग भी देखने को मिली। इस चुनाव में मुकाबला आम आदमी पार्टी की डबल इंजन सरकार की चाह और विपक्ष की घेराबंदी के बीच नजर आया।

रणनीतिकार की भूमिका में नजर आए AAP के नेता

आम आदमी पार्टी के लिए यह चुनाव परफॉर्मेंस टेस्ट से कम नहीं है क्योंकि करीब 7 महीने बाद विधानसभा चुनाव होने हैं। इस चुनाव के जरिए आम आदमी पार्टी ये भी देखना चाहती है कि उसके साढ़े चार साल के कार्यकाल के बाद शहरी वोटर्स के बीच पार्टी की पकड़ कितनी मजबूत है। यही वजह है कि पार्टी के कई बड़े चेहरे रणनीतिकार की भूमिका में नजर आए।

आषाढ़ी वारी और मानसून का हवाला देते हुए कांग्रेस ने महाराष्ट्र में एसआईआर प्रक्रिया एक महीने टालने की मांग की

मुंबई / / सत्ता संदेश

महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। विपक्षी कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग से इस प्रक्रिया को कम से कम एक महीने के लिए स्थगित करने की मांग की है। पार्टी ने इसके पीछे आषाढ़ी वारी तीर्थयात्रा और मानसून के दौरान भारी बारिश की संभावना का हवाला दिया है।

कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोकलिंगम को पत्र लिखकर कहा है कि वर्तमान परिस्थितियों में एसआईआर प्रक्रिया को आगे बढ़ाना व्यवहारिक रूप से कठिन हो सकता है और इससे कई पात्र मतदाता सूची से वंचित रह सकते हैं।

पत्र में कहा गया है कि आषाढ़ी एकादशी के अवसर पर पंढरपुर की वार्षिक वारी यात्रा में पश्चिमी महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और विदर्भ के 20 से अधिक जिलों से लाखों ‘वारकरी’ श्रद्धालु शामिल होते हैं। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग अपने घरों से दूर रहते हैं, जिससे बूथ स्तर के अधिकारियों (बीएलओ) द्वारा चलाए जा रहे घर-घर सर्वेक्षण में वे शामिल नहीं हो पाएंगे।

कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि इस अवधि में मतदाता सूची पुनरीक्षण जारी रहा, तो तीर्थयात्रा पर गए श्रद्धालुओं के नाम सूची से हटने का खतरा पैदा हो सकता है। पार्टी का कहना है कि यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए गंभीर चिंता का विषय है, क्योंकि इससे योग्य मतदाता मतदान अधिकार से वंचित हो सकते हैं।

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि निर्वाचन आयोग ने 14 मई को एसआईआर कार्यक्रम की घोषणा की थी। इसके तहत लगभग 72 प्रतिशत मैपिंग कार्य पूरा हो चुका है। प्रक्रिया का पहला चरण 19 जून तक जारी है, जबकि दूसरा चरण 30 जून से 29 जुलाई तक प्रस्तावित है, जिसमें बीएलओ घर-घर जाकर मतदाता गणना प्रपत्र वितरित और एकत्र करेंगे।

कांग्रेस नेता ने कहा कि इसी अवधि में महाराष्ट्र में मानसून अपने चरम पर होता है, खासकर मुंबई महानगर क्षेत्र, कोंकण, पुणे और सतारा जैसे इलाकों में भारी वर्षा की संभावना रहती है। उन्होंने तर्क दिया कि खराब मौसम के कारण न केवल लोगों की आवाजाही प्रभावित होगी, बल्कि प्रशासनिक कार्यों में भी बाधा आ सकती है।

सपकाल ने कहा कि चुनावी सूची जैसी संवेदनशील प्रक्रिया को ऐसी परिस्थितियों में लागू करना व्यावहारिक कठिनाइयां पैदा कर सकता है। उन्होंने निर्वाचन आयोग से आग्रह किया कि जनहित को ध्यान में रखते हुए एसआईआर कार्यक्रम को कम से कम एक महीने के लिए स्थगित किया जाए, ताकि कोई भी पात्र मतदाता सूची से बाहर न रह जाए।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले समय में महाराष्ट्र की राजनीति में और तूल पकड़ सकता है, खासकर जब राज्य में बड़े धार्मिक आयोजन और मौसमी चुनौतियां एक साथ सामने आ रही हैं।

केरलम में वीडी सतीशन ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ: 20 मंत्रियों के साथ यूडीएफ सरकार का आगाज

नेशनल डेस्क : केरलम में आज से सत्ता की एक नई शुरुआत हुई है, जहाँ कांग्रेस नेता वीडी सतीशन ने मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की है। तिरुवनंतपुरम के सेंट्रल स्टेडियम में आयोजित इस शपथ ग्रहण समारोह में उनके साथ 20 विधायकों ने भी मंत्री पद की शपथ ली। इस ऐतिहासिक अवसर पर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत कांग्रेस के कई दिग्गज नेता मौजूद रहे।

मंत्रिमंडल का स्वरूप: मुख्यमंत्री सतीशन के इस नए मंत्रिमंडल में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन का विशेष ध्यान रखा गया है। कैबिनेट में 14 नए चेहरों को शामिल किया गया है, जबकि दो महिलाएं और दो अनुसूचित जाति के सदस्यों को भी स्थान मिला है। कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला, के मुरलीधरन और सनी जोसेफ को मंत्रिमंडल में जगह दी गई है।

सहयोगी दलों की भूमिका: गठबंधन के प्रमुख सहयोगी दल आईयूएमएल (IUML) के कोटे से पांच नेताओं—पीके कुन्हालीकुट्टी, एन शम्सुद्दीन, केएम शाजी, पीके बशीर और वीई अब्दुल गफूर ने मंत्री पद की शपथ ली है। इसके अलावा, यूडीएफ (UDF) ने थिरुवनचूर राधाकृष्णन को विधानसभा अध्यक्ष और शनिमोल उस्मान को उपाध्यक्ष के रूप में नामित किया है।

वीडी सतीशन ने इस जीत को राज्य में कांग्रेस की सबसे बड़ी जीत में से एक बताया है और कहा है कि विभागों के आवंटन की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है।

सपा और कांग्रेस में भारत की आस्था के प्रति सम्मान नहीं : योगी आदित्यनाथ

लखनऊ, 16 फरवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए सोमवार को कहा कि आक्रांताओं का महिमामंडन और देशद्रोही तत्वों के समर्थन में बयानबाजी करना किसी राष्ट्रद्रोह से कम नहीं है तथा इन दलों की प्रवृत्ति यह दिखाती है कि उनमें ‘भारत की आस्था’ के प्रति कोई सम्मान नहीं है।

योगी ने विधान परिषद में अपने संबोधन में कहा कि ‘भारत की आस्था’ उत्तर प्रदेश में निवास करती है।

उन्होंने कहा, ‘‘ प्रदेश अपनी विरासत पर गौरव की अनुभूति करता है और विरासत से युक्त विकास ही एक उज्जवल भविष्य की आधारशिला होता है, लेकिन अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए अगर कोई उन आक्रांताओं का महिमामंडन करता है, जिन्होंने भारत की आत्मा पर प्रहार किया और ‘भारत की आस्था’ को रौंदने का कार्य किया तो आज का नया उत्तर प्रदेश इसको स्वीकार करने को तैयार नहीं है।’’

मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा, ”आक्रांताओं का महिमामंडन करना, देशद्रोही तत्वों के समर्थन में बयानबाजी करना और राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति अपमानजनक टिप्पणी करना किसी राष्ट्रद्रोह से कम नहीं है।”

योगी ने कहा, ”अगर हम आक्रांताओं का महिमामंडन कर रहे हैं और राष्ट्र के प्रतीकों यानी तिरंगे और राष्ट्रीय गीत का अपमान कर रहे हैं, तो एक प्रकार से हम संविधान की अवहेलना कर रहे हैं।”

उन्होंने सवाल किया कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस एक तरफ संविधान के नाम पर जनता की आंखों में धूल झोंकने का काम कर रहे हैं और दूसरी तरफ वंदे मातरम जैसे राष्ट्रीय गीत का विरोध कर रहे हैं।

योगी ने आरोप लगाया, ‘‘ सपा और कांग्रेस के सदस्य धड़ल्ले से बोल रहे हैं कि वह वंदे मातरम के लिए नहीं खड़े होंगे। यानी हिंदुस्तान में रहोगे और भारत के राष्ट्रगान तथा राष्ट्रीय गीत को गाने में दिक्कत होती है? यह चीज नहीं चल सकती हैं।’’

उन्होंने कहा, ”मुझे आश्चर्य होता है कि समाजवादी पार्टी के लोग गाजी (सूफी संत सैयद सालार गाजी) के मेले का समर्थन करते हैं। गाजी भारत की परंपरा और संस्कृति को रौंदने के लिए आया था। श्रावस्ती के तत्कालीन नरेश महाराजा सुहेलदेव के नेतृत्व में हिंदू राजाओं ने उसको रौंद डाला। सम्मान तो सुहेलदेव को मिलना चाहिए था और हमें आनंद की अनुभूति होती है कि हमारी ‘डबल इंजन’ की सरकार ने महाराजा सुहेलदेव के नाम पर बहराइच में उनका भव्य स्मारक बनाया है।”

योगी ने समाजवादी पार्टी पर लोकमाता अहिल्याबाई के नाम पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि आजादी के बाद लोकमाता अहिल्याबाई को ‘डबल इंजन’ की सरकार ने सम्मान दिया है।

उन्होंने कहा, ‘‘ काशी विश्वनाथ धाम में लोकमाता अहिल्याबाई की एक भव्य प्रतिमा स्थापित कराई गई है लेकिन समाजवादी पार्टी लोकमाता के नाम पर लोगों को गुमराह कर रही है। यह लोग राम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम का विरोध करते हैं या उसी तरह के तत्वों को प्रश्रय देते हैं। यह प्रवृत्ति दिखाती है कि इनके मन में भारत की आस्था के प्रति कोई सम्मान नहीं है।’’

मुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी पर अपने शासनकाल में जन्माष्टमी के आयोजन, कांवड़ यात्रा और अयोध्या की 84 कोसी परिक्रमा को रोकने का आरोप लगाया और साथ ही कहा कि कांग्रेस ने तो उच्चतम न्यायालय में कहा था कि राम और कृष्ण दोनों मिथक हैं।

योगी ने कहा कि समाजवादी पार्टी ने अपने समय में राम भक्तों पर गोलियां चलवाई थी और मंदिर निर्माण के मार्ग में बाधा पैदा करने के लिए अपने अधिवक्ता तैयार किए थे, लेकिन हिंदुस्तान में कोई भारत की आस्था को कैद करके नहीं रख सकता। वह आखिरकार विजयी हुई और अयोध्या में प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर का निर्माण हो गया।

कांग्रेस का कैप्टन को ‘घर वापसी’ का ऑफर: ईडी नोटिस के बाद गरमाई पंजाब की सियासत; बेटी बोली- ‘भाजपा में ही रहेंगे पिता’

पंजाब डेस्क : पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को लेकर राज्य की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा एक पुराने मामले में कैप्टन को समन (Notice) जारी किए जाने के बाद, कांग्रेस ने उन्हें पार्टी में वापस लौटने का न्योता दिया है।

भूपेश बघेल ने दिया ऑफर: कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल ने कैप्टन के प्रति सहानुभूति दिखाते हुए उन्हें ‘घर वापसी’ का ऑफर दिया है। बघेल ने कहा कि यदि कैप्टन कांग्रेस में लौटने पर विचार करते हैं, तो पार्टी इस पर विचार कर सकती है, हालांकि अंतिम फैसला हाईकमान ही लेगा। उन्होंने कैप्टन को पंजाब की राजनीति का एक बड़ा और प्रभावशाली चेहरा बताया।

बेटी जय इंदर कौर का दो टूक जवाब: कांग्रेस की इस पेशकश पर कैप्टन अमरिंदर सिंह की बेटी और पंजाब भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष जय इंदर कौर ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। उन्होंने कहा कि उनके पिता भाजपा में ही रहेंगे और कहीं नहीं जा रहे हैं। ईडी नोटिस पर उन्होंने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब उन्हें नोटिस मिला है, और वे जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं।

सियासी बयानबाजी और आरोप: कांग्रेस विधायक परगट सिंह ने आरोप लगाया है कि जैसे ही कैप्टन ने पंजाब के मुद्दों और भाजपा की समझ पर सवाल उठाए, उन्हें ईडी का समन भेज दिया गया। उन्होंने इसे केंद्रीय एजेंसियों के जरिए दबाव बनाने की रणनीति करार दिया। दूसरी ओर, 84 वर्षीय कैप्टन अमरिंदर सिंह लगातार पंजाब में भाजपा और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के गठबंधन की वकालत कर रहे हैं ताकि 2027 के चुनावों में मजबूती से उतरा जा सके।

कैप्टन का राजनीतिक सफर: कैप्टन अमरिंदर सिंह तीन बार पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष और दो बार मुख्यमंत्री रहे हैं। 2021 में मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने के बाद उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी थी और अपनी नई पार्टी ‘पंजाब लोक कांग्रेस’ बनाई, जिसका सितंबर 2022 में उन्होंने भाजपा में विलय कर दिया था।

पश्चिम बंगाल चुनाव: कांग्रेस अकेले लड़ेगी चुनाव, खरगे के आवास पर हुई बैठक में लिया गया बड़ा फैसला

नेशनल डेस्क: पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस ने अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में यह निर्णय लिया गया कि कांग्रेस बंगाल में अकेले चुनाव लड़ेगी। इस फैसले की पुष्टि कांग्रेस के प्रभारी महासचिव गुलाम अहमद मीर ने की है।

ममता बनर्जी ने भी किया था अकेले लड़ने का ऐलान: कांग्रेस के इस फैसले से पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी यह साफ कर दिया था कि उनकी पार्टी बंगाल में अकेले चुनाव लड़ेगी। उन्होंने कहा था कि बंगाल में सभी पार्टियां TMC के खिलाफ लड़ती हैं और वे इसके लिए तैयार हैं।

लेफ्ट के साथ गठबंधन पर संशय: गौरतलब है कि साल 2016 और 2021 के चुनावों में कांग्रेस का वामदलों (Left Front) के साथ सीट-शेयरिंग समझौता था। हालांकि, इस बार कांग्रेस ने अब तक लेफ्ट के साथ गठबंधन में कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि पार्टी बिना किसी बैसाखी के चुनावी मैदान में उतरना चाहती है।

क्या है कांग्रेस की रणनीति? बंगाल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि ममता बनर्जी राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के खिलाफ लड़ने की बात करती हैं, लेकिन राज्य में वे सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस और माकपा (CPI-M) को ही पहुँचाती हैं। सूत्रों के अनुसार, ममता बनर्जी नहीं चाहतीं कि राज्य का अल्पसंख्यक वोट बैंक विभाजित हो, जबकि कांग्रेस इस वोट बैंक पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है।

एप्सटीन फाइल’ के मामले पर स्पष्टीकरण दें प्रधानमंत्री: कांग्रेस
   नयी दिल्ली, एक फरवरी (भाषा) कांग्रेस ने अमेरिका में जारी “एप्सटीन फाइल” में हुए “खुलासों” के बाद रविवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को इस मामले पर स्पष्टीकरण देना चाहिए।
 कांग्रेस के संगठन महासचिव के. सी. वेणुगोपाल ने ‘एक्स’ पोस्ट किया, “एप्सटीन फाइल के नए बैच की रिपोर्ट इस बात की बड़ी चेतावनी हैं कि किस तरह के लोगों की प्रधानमंत्री मोदी तक पहुंच है और वह विदेशी दबाव/हेरफेर के प्रति कितने संवेदनशील हैं।”
  उन्होंने कहा, “कांग्रेस मांग करती है कि प्रधानमंत्री स्वयं इन खुलासों पर सामने आकर सच बताएं, जो गंभीर सवाल खड़े करते हैं।”
   कांग्रेस नेता ने सवाल किया, “क्या उन्होंने जेफ्री एप्सटीन से मुलाकात की? या उन्होंने किसी को उससे मिलने भेजा? एप्सटीन के साथ उनकी बातचीत में क्या-क्या शामिल था?”
  वेणुगोपाल ने दावा किया कि उतनी ही चिंताजनक एक रिपोर्ट यह भी है कि जब भारत की विदेश नीति में बड़ा बदलाव हो रहा था, तब प्रधानमंत्री मोदी एप्सटीन जैसे “दागी” लोगों की धुन पर “नाच-गा रहे” थे।
 उनका कहना है, “भारत के लोगों को जवाब चाहिए।”
 कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा, “प्रधानमंत्री को स्वयं स्पष्टीकरण देना चाहिए।”
  कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी सवाल किया कि क्या 2019 के लोकसभा चुनाव के आसपास प्रधानमंत्री मोदी एप्सटीन संपर्क में थे।
 भाजपा ने शनिवार को कांग्रेस पर प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ भ्रामक सूचना फैलाने का आरोप लगाया था और कहा था कि कांग्रेस ने जेफ्री एप्सटीन से जुड़ी जांच फाइलों के एक सामान्य ईमेल अंश को तोड़-मरोड़कर राजनीतिक रूप से बदनाम करने की कोशिश की है।
 विदेश मंत्रालय ने जेफरी एपस्टीन से संबंधित जांच फाइलों में प्रधानमंत्री मोदी के संदर्भ को शनिवार को सिरे से खारिज करते हुए इसे ‘‘एक दोषी अपराधी के तुच्छ चिंतन से अधिक कुछ नहीं’’ करार दिया।   
पंजाब : जिला परिषद और पंचायत समिति के नतीजों में AAP की बड़ी बढ़त, पटियाला में शानदार जीत

वेब डेस्क पंजाब: पंजाब में जिला परिषद और ब्लॉक समिति चुनाव के नतीजे बुधवार, 17 दिसंबर, 2025 को घोषित किए गए। इन चुनावों में सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) ने ग्रामीण और शहरी इलाकों में बड़ी जीत की बढ़त बनाई है। AAP के पंजाब प्रेसिडेंट अमन अरोड़ा ने दावा किया है कि पार्टी ने म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन, म्युनिसिपल काउंसिल और नगर पंचायतों के कुल 977 वार्ड में से 50 परसेंट से ज़्यादा जीतकर इतिहास रच दिया है।

जिला परिषद और ब्लॉक समिति की पार्टी-वाइज डिटेल्स:

राज्य भर में 22 जिला परिषदों के 347 इलाकों और 153 पंचायत समितियों के 2,838 इलाकों के लिए वोटों की गिनती चल रही है। बता दे कई जगह पर अभी भी गिनती हो रही है। ताज़ा जानकारी के मुताबिक, अलग-अलग पार्टियों को मिली सीटें इस तरह हैं:

कुल ज़िला परिषद सीटें – 347

AAP – 79

अकाली दल -9

कांग्रेस- 21

BJP-01

आज़ाद – 2

ब्लॉक समिति सीटें – 2838

AAP – 1185

अकाली दल -244

कांग्रेस- 342

BJP-28

आज़ाद – 78

इलाके के नतीजों की एक झलक:पटियाला:

पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के गढ़ पटियाला में आम आदमी पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 53 वार्ड में से 43 पर जीत हासिल की है। इसके साथ ही, AAP अपना मेयर चुनने के लिए पूरी तरह तैयार है। यहां, BJP और कांग्रेस को सिर्फ़ 4-4 वार्ड मिले, जबकि अकाली दल को 2 वार्ड मिले।

मोहाली: मोहाली के कुल 52 ज़ोन में से आम आदमी पार्टी ने 24 सीटें जीती हैं। कांग्रेस को 14 और अकाली दल को 12 सीटें मिलीं, जबकि 2 सीटें इंडिपेंडेंट कैंडिडेट को मिलीं। खरड़ ब्लॉक में AAP ने 7 और कांग्रेस ने 5 सीटें जीतीं।

लुधियाना और जालंधर: शहरी इलाकों में, AAP लुधियाना और जालंधर नगर निगमों में बहुमत से चूक गई, लेकिन इन दोनों जगहों पर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। लुधियाना के 95 वार्डों में से AAP ने 41 सीटें जीतीं। जालंधर के 85 वार्डों में से AAP ने 38 वार्ड जीते।अमृतसर और फगवाड़ा: अमृतसर नगर निगम चुनावों में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। अमृतसर के कुल 85 वार्डों में से कांग्रेस ने 40 सीटें जीतीं, जबकि AAP को 24 सीटें मिलीं। फगवाड़ा के 50 वार्डों में से कांग्रेस 22 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी।

नवांशहर: जिला परिषद के 10 ज़ोन में से कांग्रेस ने 6 और AAP ने 4 सीटें जीतीं।दूसरे झटके: हालांकि, स्पीकर संधवान समेत AAP के कई बड़े नेता अपने ही गांवों से चुनाव हार गए हैं।