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‘खेत बचाओ अभियान’ से 2.71 करोड़ लोग जुड़े, 7 लाख किसान जागरूक

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के अंतर्गत भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने अपने राष्ट्रव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ के अंतर्गत महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं जो मृदा स्वास्थ्य, संतुलित उर्वरक उपयोग और टिकाऊ कृषि पर केंद्रित है। ‘खेत बचाओ अभियान’ ने किसानों और हितधारकों को वैज्ञानिक पोषक तत्व प्रबंधन के बारे में जागरूक करने के लिए विभिन्न मंचों के माध्यम से देश भर में व्यापक पहुंच स्थापित की है।

इस अभियान में अब तक कुल 12,979 जागरूकता शिविर और सेमिनार आयोजित किए गए हैं। इसमें 7.17 लाख किसानों को प्रत्यक्ष रूप से शामिल किया गया है। क्षमता निर्माण के लिए 3,145 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए जिनमें 1,11,509 प्रतिभागियों ने भाग लिया। हरी खाद, जैव उर्वरक और जैविक स्रोतों पर 7,928 क्षेत्र प्रदर्शनों के माध्यम से व्यावहारिक ज्ञान प्रदान किया गया।

जमीनी स्तर पर भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए पंचायत, सरपंच और जिला परिषद सदस्यों की सक्रिय भागीदारी के साथ 4,916 जनप्रतिनिधि सम्मेलन आयोजित किए गए। उर्वरक आपूर्ति श्रृंखला की भूमिका को पहचानते हुए, संतुलित उर्वरक उपयोग के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए उर्वरक डीलरों के साथ 9,609 संवाद आयोजित किए गए।

इस अभियान में किसान संगठनों का भी उपयोग किया गया जिसके अंतर्गत किसान संगठनों, स्वयं सहायता समूहों और किसान समूह के माध्यम से 8,383 किसान सदस्यों को जोड़ा गया। व्यापक प्रचार के लिए बैनर, पोस्टर और होर्डिंग्स सहित प्रचार सामग्री को देश भर में 53,616 स्थानों पर प्रदर्शित किया गया। 944 रेडियो वार्ता और 200 टीवी/डिजिटल कार्यक्रमों सहित 1,144 मीडिया प्रसारणों के माध्यम से संदेश को और अधिक प्रभावी बनाया गया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से डिजिटल प्रचार ने अभियान की पहुंच को 2.712 करोड़ लोगों तक पहुंचाया है।

केंद्रीय कृषि मंत्री की अध्यक्षता में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की एक्सपेंडिचर फाइनेंस कमेटी पर हुई उच्च-स्तरीय बैठक


भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के कार्यों की केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने की विस्तृत समीक्षा

इंटीग्रेटेड और सस्टेनेबल फार्मिंग को बढ़ावा देकर किसानों की आय भी बढ़ाएंगे और धरती माँ को भी बचाएंगे- केंद्रीय मंत्री

भारतीय कृषि को अधिक उत्पादक, कम लागत वाली तथा लाभकारी पेशा बनाने के लिए करेंगे हरसंभव प्रयास- श्री शिवराज सिंह चौहान

कृषि देश की बड़ी आबादी की जीविका का प्रमुख साधन और भारतीय अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार स्तंभ- केंद्रीय कृषि मंत्

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की एक्सपेंडिचर फाइनेंस कमेटी (EFC) से संबंधित एक उच्च स्तरीय बैठक केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आज 12, सफदरजंग रोड स्थित उनके कैंप कार्यालय में आयोजित की गई।

बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। इस अवसर पर आईसीएआर के महानिदेशक तथा डेयर सचिव डॉ एम एल जाट ने केंद्रीय कृषि मंत्री को देशभर में आईसीएआर के अंतर्गत संचालित विभिन्न कार्यक्रमों एवं गतिविधियों की जानकारी विस्तार से दी। उन्होंने भविष्य की कार्ययोजना से भी केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया तथा बताया कि भारतीय कृषि एवं किसान बहनों-भाइयों को अधिकतम लाभ पहुंचाने के लिए परिषद किस प्रकार कार्य कर रही है।

बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि कृषि देश की बड़ी आबादी की जीविका का प्रमुख साधन है और भारतीय अर्थव्यवस्था को एक मजबूत आधार प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि हमारी सम्पूर्ण कोशिश और ऊर्जा इस दिशा में केंद्रित होनी चाहिए कि भारतीय कृषि को अधिक उत्पादक, कम लागत वाली तथा लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सके।

केंद्रीय मंत्री ने इंटीग्रेटेड फार्मिंग के व्यापक प्रचार-प्रसार पर विशेष बल देते हुए कहा कि किसान बहन-भाइयों को इसे व्यावहारिक रूप से अपनाने के लिए प्रेरित किया जाए। उन्होंने कहा कि इससे किसानों की आय में वृद्धि होगी तथा सतत कृषि (सस्टेनेबल फार्मिंग) को मजबूती मिलेगी।

श्री चौहान ने कहा कि वैज्ञानिक कृषि आज समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भारत सहित विश्वभर में जलवायु परिवर्तन की समस्या अब प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देने लगी है। इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्यों की कृषि-जलवायु (एग्रो-क्लाइमेटिक) परिस्थितियों के अनुरूप राज्यवार कृषि रोडमैप तैयार करने की दिशा में राज्यों की सहमति से तेजी से कार्य किया जाए।

अधिकारियों ने केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया कि आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, असम एवं राजस्थान जैसे राज्यों के अनुरोध पर इस दिशा में कार्य प्रगति पर है तथा शीघ्र ही इन राज्यों का स्वतंत्र कृषि रोडमैप तैयार किया जाएगा।

आईसीएआर की कार्ययोजना पर संतोष प्रकट करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री ने और अधिक ऊर्जा और उत्साह से अधिकारियों को कार्य करने के निर्देश दिए जिससे समयपूर्व लक्ष्यों को हासिल किया जा सके। बैठक में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

शिवराज सिंह चौहान का बड़ा फैसला: लीची संकट पर विशेषज्ञ कमेटी गठित

नई दिल्ली/सत्ता संदेश

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बिहार के लीची किसानों की परेशानी को गंभीरता से लेते हुए त्वरित और संवेदनशील पहल की है। किसानों द्वारा लीची स्टिंग बग से फसल को हो रहे नुकसान का मुद्दा उठाए जाने के बाद श्री शिवराज सिंह के निर्देश पर तुरंत एक विशेषज्ञ कार्यबल (टास्क फोर्स) गठित किया गया, जो प्रभावित इलाकों का दौरा कर रिपोर्ट और समाधान देगा।

केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ में 7 मई को आयोजित कृषक संवाद कार्यक्रम के दौरान किसानों ने लीची स्टिंग बग के कारण फसल को हो रहे भारी नुकसान का मुद्दा केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के समक्ष उठाया था। इस पर चौहान ने तत्काल संज्ञान लिया और विशेषज्ञ कार्यबल के गठन का निर्देश दिया।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र, मुजफ्फरपुर द्वारा 7 मई को जारी आदेश के अनुसार, यह टास्क फोर्स लीची स्टिंग बग की वर्तमान स्थिति का आकलन करेगा, प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेगा, फसल क्षति का वैज्ञानिक अध्ययन करेगा और किसानों को राहत पहुंचाने के लिए तात्कालिक तथा दीर्घकालिक उपाय सुझाएगा। साथ ही यह कार्यबल किसानों के लिए जरूरी परामर्श, विस्तार गतिविधियों और राज्य व केंद्र स्तर पर आवश्यक हस्तक्षेप संबंधी सुझाव भी देगा। आदेश के अनुसार, इस विशेषज्ञ कार्यबल का गठन विभिन्न संस्थानों के वैज्ञानिकों, अधिकारियों और विशेषज्ञों को शामिल कर किया गया है। इसमें राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र, मुजफ्फरपुर के निदेशक को अध्यक्ष बनाया गया है।

इसमें निम्न सदस्य लिए गए हैं – उद्यान-सह-बिहार राज्य बागवानी मिशन के निदेशक, बिहार सरकार द्वारा नामित प्रतिनिधि, पौधा संरक्षण, कृषि विभाग, बिहार सरकार के निदेशक द्वारा नामित प्रतिनिधि, डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा, समस्तीपुर के कीट वैज्ञानिक द्वारा नामित प्रतिनिधि, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, भागलपुर के प्रधान वैज्ञानिक (कीट विज्ञान) द्वारा नामित प्रतिनिधि, एकीकृत बागवानी विकास मिशन द्वारा नामित प्रतिनिधि, पूर्वी क्षेत्र के लिए भाकृअनुप-अनुसंधान परिसर और पहाड़ी एवं पठारी क्षेत्र के लिए कृषि प्रणाली अनुसंधान केंद्र, रांची के वैज्ञानिक डॉ. जयपाल सिंह चौधरी, राष्ट्रीय कृषि कीट संसाधन ब्यूरो, बेंगलुरु के डॉ. एम. सम्पत कुमार, भाकृअनुप-राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र, मुजफ्फरपुर वैज्ञानिक (कीट विज्ञान) डॉ. इप्सिता सामल तथा प्रधान वैज्ञानिक (कीट विज्ञान) डॉ. विनोद कुमार (सदस्य सचिव)।

आदेश के मुताबिक, यह कार्यबल बिहार के लीची उत्पादक जिलों के मुख्य प्रभावित प्रखंडों का जल्द दौरा करेगा। इसके बाद यह टीम एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के समक्ष प्रस्तुत करेगी ताकि समय रहते जरूरी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।