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PM Modi-Putin Meeting: रूस-यूक्रेन और ईरान युद्ध पर चर्चा, भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर भी मंथन

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। इस साल दोनों नेताओं की यह दूसरी मुलाकात है। इससे पहले 31 अगस्त 2026 को बिश्केक में 26वें एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं की मुलाकात हुई थी।

बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन ने भारत-रूस द्विपक्षीय संबंधों और सहयोग की प्रगति की व्यापक समीक्षा की। दोनों नेताओं ने राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, कौशल गतिशीलता और लोगों के बीच संपर्क सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा की।

रूस-यूक्रेन और ईरान युद्ध पर हुई चर्चा

बैठक में रूस-यूक्रेन युद्ध के साथ-साथ ईरान से जुड़े संघर्ष पर भी दोनों नेताओं ने विचार साझा किए। पश्चिम एशिया और काला सागर क्षेत्र में जारी संघर्षों के कारण समुद्री व्यापार और भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर भी चर्चा हुई।

हॉर्मुज और ब्लैक सी क्षेत्र में फंसे भारतीय जहाजों और भारतीय जहाजकर्मियों की स्थिति भी बातचीत का महत्वपूर्ण हिस्सा रही। प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि संघर्षों के समाधान का सही रास्ता बातचीत और कूटनीति है। उन्होंने कहा कि भारत शांति स्थापित करने के प्रयासों में सहयोग देने के लिए तैयार है।

INNOPROM India को लेकर भी चर्चा

दोनों नेताओं ने रूस की अंतरराष्ट्रीय औद्योगिक प्रदर्शनी ‘इनोप्रोम इंडिया’ (INNOPROM India) का स्वागत किया। यह प्रदर्शनी पहली बार भारत में 9 से 11 सितंबर 2026 तक आयोजित की गई। मोदी और पुतिन ने प्रदर्शनी का दौरा भी किया और इसमें भाग लेने वाले लोगों से बातचीत की।

दोनों नेताओं ने माना कि इस तरह के आयोजन भारत और रूस के बीच व्यापार एवं औद्योगिक संबंधों को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

BRICS में भारत-रूस सहयोग पर जोर

बैठक में बहुपक्षीय मंचों पर भारत-रूस सहयोग पर भी चर्चा हुई। खास तौर पर 2026 में भारत की अध्यक्षता में BRICS के तहत दोनों देशों के बीच सहयोग को लेकर विचारों का आदान-प्रदान किया गया।

दोनों नेताओं ने प्रमुख क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी अपने विचार साझा किए और भारत-रूस की ‘विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी’ को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

पीएम मोदी को पुतिन ने रूस आने का दिया निमंत्रण

राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 24वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए रूस आने का निमंत्रण दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने निमंत्रण स्वीकार कर लिया है।

दोनों देशों के बीच शिखर सम्मेलन की तारीख राजनयिक माध्यमों से आपसी सुविधा के अनुसार तय की जाएगी। नेताओं ने कहा कि भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत-रूस की रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूती दिखा रही है।

विद्युत क्षेत्र में 5G तकनीक का इस्तेमाल, NPTI फरीदाबाद में कार्यशाला

फरीदाबाद / सत्ता संदेश

विद्युत क्षेत्र में संचार व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, तेज, विश्वसनीय और दक्ष बनाने की दिशा में 5G प्रौद्योगिकी की संभावनाओं पर चर्चा के लिए राष्ट्रीय विद्युत प्रशिक्षण संस्थान (NPTI), फरीदाबाद में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। दूरसंचार विभाग (DoT) और NPTI के संयुक्त सहयोग से आयोजित कार्यशाला का विषय “विद्युत क्षेत्र में विश्वसनीयता एवं दक्षता बढ़ाने में 5G प्रौद्योगिकी का उपयोग” रहा।

कार्यशाला का संयुक्त रूप से उद्घाटन दूरसंचार विभाग के महानिदेशक अनिल कुमार गुप्ता तथा राष्ट्रीय विद्युत प्रशिक्षण संस्थान के महानिदेशक श्री हेमंत जैन ने किया। कार्यक्रम में केंद्रीय एवं राज्य विद्युत उपक्रमों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ दूरसंचार क्षेत्र, उद्योग, शिक्षाविदों, स्टार्ट-अप्स और अन्य संबंधित हितधारकों ने भाग लिया।

अपने संबोधन में महानिदेशक दूरसंचार श्री अनिल कुमार गुप्ता ने आधुनिक विद्युत प्रणालियों के लिए सुरक्षित, विश्वसनीय और रियल-टाइम संचार व्यवस्था के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्युत उपक्रमों, दूरसंचार क्षेत्र, उद्योग, स्टार्ट-अप्स और शिक्षाविदों से NPTI स्थित 5G यूज़ केस लैब का उपयोग करते हुए विद्युत क्षेत्र के लिए व्यावहारिक समाधान विकसित करने और उन्हें बड़े स्तर पर लागू करने की दिशा में काम करने का आह्वान किया।

NPTI के महानिदेशक श्री हेमंत जैन ने विद्युत क्षेत्र में क्षमता निर्माण, अनुसंधान और उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाने के लिए संस्थान की प्रतिबद्धता दोहराई। वहीं, अपर महानिदेशक दूरसंचार, हरियाणा LSA श्री आर. शाक्य ने दूरसंचार और विद्युत क्षेत्रों के बीच निरंतर समन्वय को जरूरी बताते हुए उच्च प्रभाव वाले 5G उपयोग मामलों की पहचान और उनके प्रभावी कार्यान्वयन पर जोर दिया।

कार्यशाला के दौरान तकनीकी विषयों पर अलग-अलग केंद्रित सत्र आयोजित किए गए। पहले सत्र में विद्युत उत्पादन और नेटवर्किंग में 5G के उपयोग पर चर्चा हुई। इसमें विद्युत उपक्रमों के लिए प्राइवेट 5G नेटवर्क, उत्पादन-पारेषण-वितरण प्रणालियों के साथ 5G का एकीकरण, SCADA/PLC प्रणालियां, LAN/WAN और नेटवर्क ऑपरेशन सेंटर की आवश्यकताओं के साथ स्मार्ट-ग्रिड संचार वास्तुकला जैसे विषय शामिल रहे।

दूसरे सत्र में विद्युत क्षेत्र के लिए नियामकीय ढांचे और स्पेक्ट्रम उपयोग के उदारीकरण पर चर्चा की गई। इसमें प्राइवेट 5G स्पेक्ट्रम आवंटन, कैप्टिव एवं नॉन-कैप्टिव नेटवर्क, कैप्टिव नॉन-पब्लिक नेटवर्क (CNPN), लाइसेंसिंग एवं अनुपालन आवश्यकताओं तथा विद्युत उपक्रमों के लिए स्पेक्ट्रम नियोजन से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।

तीसरे सत्र में विद्युत क्षेत्र में उभरती तकनीकों के उपयोग पर विशेष ध्यान दिया गया। विशेषज्ञों ने AI/ML आधारित प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस, अधिक नवीकरणीय ऊर्जा की स्थिति में रियल-टाइम ग्रिड बैलेंसिंग, AI आधारित लोड फोरकास्टिंग और परिसंपत्ति प्रबंधन, IoT एवं एज-कंप्यूटिंग, एडवांस्ड मीटरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर (AMI), एकीकृत संचार तकनीकों तथा विद्युत क्षेत्र में ड्रोन के इस्तेमाल पर चर्चा की।

कार्यशाला के चौथे सत्र में विद्युत क्षेत्र से जुड़ी साइबर सुरक्षा चुनौतियों पर विचार किया गया। इसमें IoT उपकरणों और नेटवर्क की सुरक्षा, SCADA एवं IoT नेटवर्क की सुरक्षा, साइबर खतरों का परिदृश्य, साइबर घटना के प्रति प्रतिक्रिया और सुरक्षा के बेहतर उपायों जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।

कार्यशाला के समापन पर प्रतिभागियों ने NPTI स्थित 5G यूज़ केस लैब का दौरा किया। यह प्रयोगशाला दूरसंचार विभाग की “100 5G Use Case Labs” पहल के अंतर्गत स्थापित की गई है। इसे विद्युत क्षेत्र के लिए 5G आधारित समाधानों के विकास, परीक्षण एवं सत्यापन, क्षमता निर्माण तथा क्षेत्र-विशिष्ट अनुप्रयोगों के विकास के लिए महत्वपूर्ण मंच के रूप में रेखांकित किया गया।

कार्यशाला के दौरान साझेदारियों को बढ़ावा देने, प्राथमिकता वाले पायलट प्रोजेक्ट्स की पहचान करने और 5G सहित उभरती तकनीकों के प्रभावी उपयोग के माध्यम से अधिक विश्वसनीय, सुरक्षित, दक्ष और भविष्य के लिए तैयार विद्युत क्षेत्र के निर्माण की साझा प्रतिबद्धता व्यक्त की गई।

पंजाब के युवाओं के लिए प्रधानमंत्री तक पहुंच का मौका, 30 सितंबर तक खुला ‘विकसित भारत क्विज़’

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

पंजाब के युवाओं के लिए प्रधानमंत्री के समक्ष अपनी प्रतिभा और विचार प्रस्तुत करने का अवसर सामने आया है। माय भारत पंजाब ने युवाओं से ‘विकसित भारत क्विज़’ में भाग लेने की अपील की है। यह क्विज़ विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग (VBYLD) 2027 का पहला चरण है और इसमें 30 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन भाग लिया जा सकता है।

प्रेस क्लब, चंडीगढ़ में मीडिया को संबोधित करते हुए माय भारत पंजाब की राज्य निदेशक (प्रभारी) रश्मीत कौर ने बताया कि क्विज़ पांच चरणों वाली पूरी तरह योग्यता-आधारित चयन प्रक्रिया का प्रवेश द्वार है। चयनित युवाओं को जनवरी 2027 में नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय संवाद में केंद्रीय मंत्रियों, सचिवों और प्रधानमंत्री के समक्ष अपने विचार रखने का अवसर मिलेगा।

VBYLD 2027 का आयोजन युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा किया जा रहा है, जबकि माय भारत इसकी कार्यकारी एजेंसी है। वर्ष 1995 से आयोजित राष्ट्रीय युवा महोत्सव को वर्ष 2025 में विकसित भारत @2047 के लक्ष्य के अनुरूप पुनर्गठित कर विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग का रूप दिया गया था। पिछले संस्करण में देशभर से 50 लाख से अधिक युवाओं ने क्विज़ में हिस्सा लिया था और करीब 3,000 युवाओं का चयन राष्ट्रीय संवाद के लिए हुआ था।

कौन ले सकता है हिस्सा?

17 अगस्त 2026 को 15 से 29 वर्ष की आयु वाला कोई भी युवा इस अभियान में भाग ले सकता है। पंजीकरण और सभी डिजिटल चरण पूरी तरह निःशुल्क हैं तथा माय भारत पोर्टल पर कई भाषाओं में उपलब्ध हैं। जो युवा पहले से माय भारत पोर्टल पर पंजीकृत हैं, उन्हें दोबारा पंजीकरण कराने की जरूरत नहीं होगी और वे सीधे क्विज़ में हिस्सा ले सकते हैं।

पंजाब के युवाओं के लिए क्या है थीम?

VBYLD 2027 में राष्ट्रीय विषयों के बजाय देश को 10 क्षेत्रीय समूहों में बांटा गया है। पंजाब, दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (नीति नगर) समूह में रखा गया है।

इस समूह की थीम “भविष्य का सुशासन, शहरी रूपांतरण एवं नागरिक सेवाएं” है। प्रतिभागियों के सामने यह विचार रखने की चुनौती होगी कि भारत वर्ष 2047 तक दुनिया की सबसे कुशल, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित शासन व्यवस्था कैसे विकसित कर सकता है। जिला स्तर के विषयों में इसी थीम को पंजाब की स्थानीय परिस्थितियों से जोड़कर आगे बढ़ाया जाएगा।

पांच चरणों में होगा चयन

  • विकसित भारत क्विज़: माय भारत पोर्टल पर 30 सितंबर 2026 तक
  • विकसित भारत निबंध: चयनित प्रतिभागियों द्वारा 500 शब्दों का निबंध
  • जिला चैंपियनशिप: नवंबर 2026 में; प्रत्येक जिले के शीर्ष 50 प्रतिभागी प्रस्तुति देंगे
  • राज्य VBYLD: नवंबर-दिसंबर 2026 में राज्य मुख्यालय पर
  • राष्ट्रीय संवाद: 10 से 12 जनवरी 2027 तक नई दिल्ली में

VBYLD 2027 में केवल विकसित भारत चैलेंज ट्रैक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, डिजाइन फॉर भारत, हैक फॉर सोशल कॉज़ और यूथ सहित अन्य ट्रैक भी शामिल किए गए हैं। सांस्कृतिक ट्रैक में लोक नृत्य, लोक गीत, चित्रकला, वक्तृत्व और कविता लेखन जैसी विधाओं को शामिल किया गया है।

रश्मीत कौर ने युवाओं से समय सीमा से पहले इसमें भाग लेने की अपील करते हुए कहा कि यह केवल प्रतिभा प्रदर्शन का मंच नहीं, बल्कि देश के भविष्य के नेतृत्व की खोज का अभियान है। उनके मुताबिक, 2047 में देश की संस्थाओं को नेतृत्व देने वाले युवा आज पंजाब के हर जिले में मौजूद हैं और जरूरत है कि कोई भी युवा इस अवसर से वंचित न रह जाए।

पंजीकरण: mybharat.gov.in

ब्रिक्स समिट के लिए दिल्ली में जुटेंगे दिग्गज नेता, पुतिन-शी जिनपिंग समेत कई राष्ट्राध्यक्ष होंगे शामिल

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारत की मेजबानी में 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन होने जा रहा है। सम्मेलन में ब्रिक्स के सदस्य देशों के साथ नए सदस्य देशों के शीर्ष नेता भी हिस्सा लेंगे। सम्मेलन से पहले दुनिया के प्रमुख नेताओं का भारत पहुंचना शुरू हो गया है।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत पहुंच चुके हैं। वहीं चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ईरान के राष्ट्रपति मसऊद पेज़ेशकियन, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी, इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के भी सम्मेलन में शामिल होने की उम्मीद है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस भी विशेष अतिथि के तौर पर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।

भारत की अध्यक्षता में इस बार ब्रिक्स सम्मेलन का मुख्य विषय “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” यानी लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास रखा गया है। बैठक में ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने से लेकर वैश्विक व्यापार, सुरक्षा, डिजिटल तकनीक और जलवायु परिवर्तन जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी।

सम्मेलन में सीमा पार भुगतान और आपसी व्यापार को बढ़ावा देने तथा स्थानीय मुद्राओं में लेनदेन के लिए सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हो सकती है। इसके अलावा पश्चिम एशिया और यूक्रेन में जारी संघर्षों से पैदा हुए ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा और वैश्विक सप्लाई चेन से जुड़े संकट भी प्रमुख एजेंडे में रहेंगे।

आतंकवाद और सुरक्षा के मुद्दे पर सीमा पार आतंकवाद, टेरर फंडिंग और साइबर खतरों से निपटने के लिए सहयोग बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है। वहीं डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल पेमेंट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सुरक्षित इस्तेमाल को लेकर साझा ढांचे पर भी चर्चा संभावित है।

जलवायु परिवर्तन के बीच क्लाइमेट एक्शन और ग्रीन फाइनेंस भी सम्मेलन का महत्वपूर्ण मुद्दा रहेगा। विकासशील देशों के लिए स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण अनुकूल परियोजनाओं में वित्तीय सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जा सकता है।

ब्रिक्स सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विभिन्न राष्ट्राध्यक्षों के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। खास तौर पर प्रधानमंत्री मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच संभावित मुलाकात पर नजर रहेगी। दोनों देशों के बीच सीमा से जुड़े मुद्दों और द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने पर बातचीत की संभावना जताई जा रही है। वहीं प्रधानमंत्री मोदी और व्लादिमीर पुतिन के बीच रक्षा, ऊर्जा और निवेश समेत कई मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।

ब्रिक्स सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब वैश्विक स्तर पर व्यापार, युद्ध, ऊर्जा सुरक्षा, तकनीक और बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में हैं। ऐसे में भारत की अध्यक्षता में होने वाले इस सम्मेलन को वैश्विक दक्षिण और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए अहम मंच के तौर पर देखा जा रहा है।

18वां ब्रिक्स सम्मेलन : भारत दौरे पर आएंगे राष्ट्रपति जिंनपिं, पीएम मोदी के साथ करेंगे द्विपक्षीय बैठक

नई दिल्ली। भारत और चीन के रिश्तों में लंबे समय से चले आ रहे तनाव के बीच एक बड़ी कूटनीतिक हलचल सामने आई है। वर्ष 2020 में गलवान घाटी में हुई खूनी झड़प के बाद पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच औपचारिक द्विपक्षीय बैठक होने की संभावना जताई जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शी जिनपिंग 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आ सकते हैं। ऐसे में संभावित मोदी-जिनपिंग मुलाकात पर भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं।

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

18वें ब्रिक्स सम्मेलन की भारत में मेजबानी

भारत 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। इसी सम्मेलन में शामिल होने के लिए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत पहुंचने की संभावना है। यदि उनका दौरा होता है तो गलवान हिंसा और उसके बाद पैदा हुए सीमा तनाव के बाद यह उनका पहला भारत दौरा होगा।

गलवान घाटी में जून 2020 में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के संबंधों में काफी गिरावट आई थी। सीमा पर तनाव के साथ-साथ राजनीतिक, आर्थिक और कूटनीतिक स्तर पर भी दोनों देशों के बीच दूरी बढ़ गई थी।

हालांकि, पिछले कुछ समय में सैन्य और राजनयिक स्तर पर हुई बातचीत के जरिए सीमा पर तनाव कम करने की कोशिशें लगातार जारी रही हैं। दोनों देशों के बीच कई दौर की वार्ता के बाद कुछ तनाव वाले क्षेत्रों से सैनिकों की वापसी भी हुई है।

सीमा विवाद के बीच बातचीत की कोशिश

गलवान के बाद भारत और चीन के बीच सैन्य कमांडरों तथा राजनयिकों के स्तर पर लगातार बातचीत होती रही है। हाल ही में कजाकिस्तान के बिश्केक में आयोजित एससीओ सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग एक ही मंच पर नजर आए थे और दोनों नेताओं ने हाथ भी मिलाया था। हालांकि, उस समय दोनों के बीच औपचारिक द्विपक्षीय बैठक नहीं हुई थी।

ऐसे में यदि नई दिल्ली में दोनों नेताओं के बीच आमने-सामने बातचीत होती है तो इसे भारत-चीन संबंधों में तनाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा सकता है। हालांकि, सीमा विवाद अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और कई मुद्दों पर दोनों देशों के बीच मतभेद बरकरार हैं।

डोभाल की चीन यात्रा से बनी बातचीत की जमीन

शी जिनपिंग के संभावित भारत दौरे से पहले भारत की ओर से भी उच्चस्तरीय कूटनीतिक प्रयास किए गए हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल चीन का दौरा कर चुके हैं। इसके अलावा भारत-चीन सीमा मामलों पर परामर्श एवं समन्वय के लिए बने वर्किंग मैकेनिज्म तथा दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों के बीच भी बातचीत हुई है।

इन उच्चस्तरीय संपर्कों को दोनों देशों के बीच संवाद आगे बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, लद्दाख में तनाव कम होने के बावजूद अरुणाचल प्रदेश को लेकर चीन और भारत के बीच विवाद बना हुआ है। चीन अरुणाचल प्रदेश को ‘जंगनान’ यानी दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा बताता है, जबकि भारत उसके इस दावे को पूरी तरह खारिज करता है।

ब्रिक्स सम्मेलन में गुटेरेस भी होंगे शामिल

18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के भी शामिल होने की संभावना है। 12 और 13 सितंबर को होने वाले सम्मेलन में गुटेरेस 13 सितंबर को मुख्य सत्र को संबोधित करेंगे। इस दौरान उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य वैश्विक नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकों की भी संभावना है।

गुटेरेस अपने संबोधन में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की जरूरत पर जोर दे सकते हैं। उनका कहना है कि मौजूदा वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियां 1945 के दौर जैसी नहीं हैं, इसलिए अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में भी मौजूदा वास्तविकताओं के अनुरूप बदलाव जरूरी है।

भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की मांग करता रहा है। ऐसे में ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान इस मुद्दे के साथ-साथ पश्चिम एशिया में जारी संकट, वैश्विक अर्थव्यवस्था और बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।

लालगंज में निर्माणाधीन पुल का लॉन्चर गिरा, छह कर्मचारी घायल; दो की हालत गंभीर

वैशाली के लालगंज में भारतमाला परियोजना के तहत एनएच-139डब्ल्यू पर निर्माणाधीन पुल का लॉन्चर गिरने से छह कर्मचारी घायल हो गए। दो घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है।

बिहार / सत्ता संदेश

बिहार के वैशाली जिले के लालगंज थाना क्षेत्र में भारतमाला परियोजना के तहत बनाए जा रहे एनएच-139डब्ल्यू फोरलेन पर गुरुवार को बड़ा हादसा हो गया। निर्माण कार्य के दौरान एक निर्माणाधीन पुल का भारी-भरकम लॉन्चर अचानक नीचे गिर गया। इसकी चपेट में आने से साइट पर काम कर रहे कई कर्मचारी घायल हो गए। हादसे के बाद निर्माण स्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

हादसे के तुरंत बाद मौके पर मौजूद कर्मचारियों और स्थानीय लोगों ने घायलों को लालगंज रेफरल अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल में छह घायल कर्मचारियों का इलाज किया गया। इनमें से दो की हालत गंभीर बताई जा रही है। चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद दोनों गंभीर घायलों को बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल रेफर कर दिया। हादसे की खबर मिलते ही घायलों के परिजन और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग अस्पताल पहुंच गए।

घटना की जानकारी मिलने के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर भी जुट गए और हंगामा शुरू कर दिया। ग्रामीणों और घायलों के परिजनों ने निर्माण कार्य में सुरक्षा मानकों को लेकर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि इतनी बड़ी राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना के निर्माण के दौरान पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए थे और तकनीकी स्तर पर भी जरूरी सावधानियां नहीं बरती गईं।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि हादसे की जानकारी मिलने के बाद परियोजना से जुड़े कुछ वरिष्ठ अधिकारी और ठेकेदार मौके से चले गए। इससे लोगों में नाराजगी और बढ़ गई। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय थाना पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित किया और आक्रोशित ग्रामीणों को शांत कराया। अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण कर हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है।

फिलहाल यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि लॉन्चर गिरने के पीछे तकनीकी खराबी थी या निर्माण कार्य के दौरान किसी स्तर पर लापरवाही हुई। जांच के बाद ही हादसे की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।

इस हादसे ने एक बार फिर बड़े निर्माण कार्यों में श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों, उपकरणों और तकनीकी व्यवस्थाओं की निगरानी कितनी प्रभावी है, यह भी जांच का अहम हिस्सा रहेगा। प्रशासन की ओर से कहा गया है कि जांच के बाद जिम्मेदारी तय की जाएगी और लापरवाही सामने आने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

Karnataka : सतीश जारकीहोली के ठिकानों पर ED की छापेमारी, परिवार के ठिकाने भी खंगाले

कर्नाटक के लोक निर्माण मंत्री सतीश जारकीहोली से जुड़े ठिकानों पर ED की तलाशी दूसरे दिन भी जारी रही। गोकाक और बेलगावी में परिवार व करीबियों के ठिकानों पर जांच हुई।

कर्नाटक/ सत्ता संदेश

कर्नाटक के लोक निर्माण मंत्री सतीश जारकीहोली से जुड़े ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की तलाशी गुरुवार को लगातार दूसरे दिन भी जारी रही। बेलगावी में मंत्री के परिवार के सदस्यों और उनके करीबी लोगों से जुड़े कई ठिकानों पर जांच एजेंसी ने कार्रवाई की। यह जांच कथित अवैध विदेशी निवेश से जुड़े मामले में की जा रही है।

ईडी अधिकारियों ने गोकाक स्थित सतीश जारकीहोली के आवास पर भी तलाशी ली। कार्रवाई के दौरान उनकी पत्नी और बेटी के अलावा सांसद प्रियंका जारकीहोली भी घर पर मौजूद थीं। इसके साथ ही बेलगावी में मंत्री के परिवार के सदस्य वाई. मंजूनाथ के आवास पर भी जांच एजेंसी ने तलाशी ली।

जांच का दायरा मंत्री के करीबी सहयोगियों और स्टाफ तक भी पहुंचा। ईडी ने सतीश जारकीहोली के करीबी सहयोगी बताए जा रहे गिरीश सोनावलकर के घर की तलाशी ली। इसके अलावा मंत्री के निजी सचिव मालागौड़ा पाटिल के आवास पर भी जांच की गई।

तलाशी के दौरान ईडी अधिकारियों ने सतीश जारकीहोली से जुड़े चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को भी समन किया। अधिकारियों ने चार्टर्ड अकाउंटेंट प्रदीप कुमार इंदी और सैदप्पा गडागी से वित्तीय लेनदेन और अकाउंटिंग से संबंधित जानकारी मांगी। कार्रवाई के दौरान एक प्रिंटर और कुछ दस्तावेज जब्त किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।

ईडी की कार्रवाई के बीच कांग्रेस ने केंद्र की भाजपा सरकार पर राजनीतिक बदले की भावना से केंद्रीय जांच एजेंसियों के इस्तेमाल का आरोप लगाया है। धारवाड़ कांग्रेस के जिला अध्यक्ष सदानंद डंगनावर ने कहा कि ईडी की कार्रवाई राजनीतिक रूप से प्रेरित है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा कांग्रेस के मंत्रियों और मुख्यमंत्री के कामकाज की सफलता को स्वीकार नहीं कर पा रही है।

डंगनावर ने दावा किया कि केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई के बावजूद कर्नाटक की कांग्रेस सरकार को अस्थिर नहीं किया जा सकता। उनके मुताबिक मुख्यमंत्री और कैबिनेट मंत्री एकजुट होकर राज्य के हित में काम कर रहे हैं।

इससे पहले कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और मंत्री प्रियंक खरगे भी ईडी की कार्रवाई पर सवाल उठा चुके हैं। दोनों नेताओं ने कार्रवाई को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए केंद्र सरकार पर केंद्रीय जांच एजेंसियों के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया था।

फिलहाल ईडी की तलाशी और जांच जारी है। कथित अवैध विदेशी निवेश से जुड़े मामले में जांच एजेंसी किन दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है, इसका पूरा विवरण जांच आगे बढ़ने के बाद ही स्पष्ट होगा।

ISRO का बड़ा कदम: CE20 क्रायोजेनिक इंजन का 220 kN थ्रस्ट पर सफल हॉट टेस्ट, LVM3 की बढ़ेगी पेलोड क्षमता

ISRO ने CE20 क्रायोजेनिक इंजन का 220 kN बढ़े हुए थ्रस्ट पर सफल फ्लाइट एक्सेप्टेंस हॉट टेस्ट किया। इससे LVM3 की पेलोड क्षमता बढ़ाने और गगनयान मिशन को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अपने CE20 क्रायोजेनिक इंजन का 220 किलो न्यूटन (kN) के बढ़े हुए थ्रस्ट पर ‘फ्लाइट एक्सेप्टेंस हॉट टेस्ट’ सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। यह परीक्षण 9 सितंबर 2026 को तमिलनाडु के महेंद्रगिरी स्थित इसरो प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स (IPRC) में किया गया।

इस सफल परीक्षण को भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए अहम उपलब्धि माना जा रहा है। इससे भविष्य के LVM3 मिशनों में पेलोड क्षमता बढ़ाने और गगनयान कार्यक्रम को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

इसरो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए बताया कि आने वाले LVM3 मिशन के C32 अपर स्टेज के लिए निर्धारित CE20 क्रायोजेनिक इंजन का 220 kN के बढ़े हुए थ्रस्ट पर फ्लाइट एक्सेप्टेंस हॉट टेस्ट सफल रहा। परीक्षण के दौरान LOX टैंक प्रेशराइजेशन मॉड्यूल (LTPM) के प्रदर्शन को भी सफलतापूर्वक प्रदर्शित किया गया। यह मॉड्यूल गगनयान मिशन के C32 स्टेज के लिए विकसित किया गया है।

CE20 इंजन LVM3 लॉन्च व्हीकल के अपर क्रायोजेनिक स्टेज को शक्ति प्रदान करता है। इसरो भविष्य के LVM3 मिशनों के लिए 22 टन थ्रस्ट क्षमता वाले अपग्रेडेड C32 स्टेज पर काम कर रहा है। इसका उद्देश्य रॉकेट की पेलोड क्षमता को और बढ़ाना है, जिससे भविष्य में अधिक भारी उपग्रहों और अन्य पेलोड को अंतरिक्ष में भेजने की क्षमता मजबूत होगी।

इस सफल परीक्षण से पहले मार्च 2026 में भी महेंद्रगिरी स्थित परीक्षण सुविधा में CE20 इंजन का 22 टन थ्रस्ट स्तर पर समुद्र तल पर हॉट टेस्ट किया गया था। उस परीक्षण में नोजल प्रोटेक्शन सिस्टम और मल्टी-एलिमेंट इग्नाइटर का इस्तेमाल किया गया था। 165 सेकंड तक चले उस परीक्षण में इंजन और परीक्षण सुविधा ने अपेक्षित प्रदर्शन किया था।

CE20 इंजन के हाई-एरिया-रेशियो नोजल की समुद्र तल पर टेस्टिंग तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण होती है। कम एग्जिट प्रेशर के कारण नोजल के अंदर फ्लो सेपरेशन हो सकता है, जिससे तेज कंपन और थर्मल स्ट्रेस पैदा होने की आशंका रहती है। ऐसे में सफल फ्लाइट एक्सेप्टेंस हॉट टेस्ट अपग्रेडेड C32 स्टेज को आगामी LVM3 मिशनों में इस्तेमाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

इसरो की यह उपलब्धि ऐसे समय सामने आई है, जब 5 सितंबर को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से GSLV-F17 के जरिए एडवांस्ड अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट-05 (EOS-05) का सफल प्रक्षेपण किया गया था। लगातार सफल परीक्षण और प्रक्षेपण भारत की बढ़ती अंतरिक्ष क्षमताओं को और मजबूत कर रहे हैं।

UIDAI ने लॉन्च किया आधार फेस ऑथेंटिकेशन SDK और सैंडबॉक्स, एक ही ऐप में मिलेगा आसान प्रमाणीकरण

UIDAI ने Global Fintech Fest 2026 में Aadhaar Face Authentication SDK और Sandbox लॉन्च किया। इससे बैंकिंग, फिनटेक और सरकारी ऐप्स में एक ही ऐप के जरिए सुरक्षित फेस ऑथेंटिकेशन आसान होगा।

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 में आधार फेस ऑथेंटिकेशन SDK (Software Development Kit) और आधार फेस ऑथेंटिकेशन सैंडबॉक्स लॉन्च किया है। इस पहल का उद्देश्य सरकारी विभागों, बैंकों, फिनटेक कंपनियों और अन्य संस्थाओं के डिजिटल एप्लिकेशन में आधार फेस ऑथेंटिकेशन को आसानी से एकीकृत करना है।

नए SDK की मदद से UIDAI की फेस ऑथेंटिकेशन सुविधा को सीधे Android और iOS के मूल मोबाइल एप्लिकेशन में शामिल किया जा सकेगा। इससे उपयोगकर्ताओं को प्रमाणीकरण के लिए अलग-अलग ऐप के बीच जाने की जरूरत नहीं होगी और पूरी प्रक्रिया एक ही एप्लिकेशन के भीतर पूरी की जा सकेगी।

UIDAI के अनुसार, रेडी-टू-यूज SDK में AI/ML आधारित लाइवनेस डिटेक्शन और एंटी-स्पूफिंग जैसी क्षमताएं शामिल हैं। यह प्रमाणीकरण डेटा के सुरक्षित प्रबंधन और एन्क्रिप्शन को भी सपोर्ट करता है तथा उपभोक्ता स्मार्टफोन पर काम करने के लिए डिजाइन किया गया है। इससे सरकारी सेवाओं, बैंकिंग, बीमा, ब्रोकिंग और अन्य डिजिटल सेवाओं में फेस ऑथेंटिकेशन को अपनाना आसान हो सकता है।

इसके साथ ही UIDAI ने आधार फेस ऑथेंटिकेशन सैंडबॉक्स भी लॉन्च किया है। यह एक सुरक्षित और नियंत्रित वातावरण उपलब्ध कराता है, जहां संगठन अपने एप्लिकेशन को उत्पादन में लागू करने से पहले पूरी फेस ऑथेंटिकेशन प्रक्रिया का एकीकरण, परीक्षण और सत्यापन कर सकते हैं।

सैंडबॉक्स के माध्यम से डेवलपर और क्वालिटी एश्योरेंस टीमें यूजर प्रोविजनिंग और सहमति, चेहरे की पहचान, लाइवनेस चेक, ऑथेंटिकेशन, एरर मैनेजमेंट और एक्शन वेरिफिकेशन जैसे प्रमुख चरणों का परीक्षण कर सकेंगी। इसमें बाहरी बायोमेट्रिक हार्डवेयर की आवश्यकता नहीं होगी। इसके अलावा अमान्य डिजिटल सिग्नेचर, नेटवर्क बाधा, टाइमआउट और संभावित स्पूफिंग प्रयासों जैसे विफलता परिदृश्यों का भी परीक्षण किया जा सकेगा।

UIDAI के मुताबिक, SDK और सैंडबॉक्स की शुरुआत बैंकिंग और फिनटेक क्षेत्र की लंबे समय से चली आ रही उस जरूरत को पूरा करती है, जिसमें मोबाइल एप्लिकेशन के भीतर ही सुरक्षित और आसान ग्राहक ऑनबोर्डिंग की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की जा रही थी।

इस सुविधा से उपयोगकर्ता अनुभव भी सरल होगा। उदाहरण के लिए, किसी बैंकिंग, बीमा या ब्रोकिंग ऐप में ग्राहक सीधे उसी ऐप के भीतर आधार फेस ऑथेंटिकेशन कर सकेगा। इससे पहले इसी तरह की प्रक्रिया के लिए FaceRD नामक बैकग्राउंड ऐप की आवश्यकता पड़ती थी, जिससे ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया लंबी होती थी और उपयोगकर्ता को अतिरिक्त ऐप पर निर्भर रहना पड़ता था। नए SDK के बाद आधार फेस ऑथेंटिकेशन के लिए कई ऐप की आवश्यकता कम हो जाएगी।

UIDAI द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित AI/ML आधारित फेस ऑथेंटिकेशन समाधान को वर्ष 2021 में लॉन्च किया गया था। UIDAI के अनुसार, इस तकनीक के जरिए अब तक 500 करोड़ से अधिक लेनदेन प्रोसेस किए जा चुके हैं। इसे केंद्र सरकार के मंत्रालयों एवं विभागों, राज्य सरकारों, बैंकों, NBFC, दूरसंचार कंपनियों, ब्रोकरेज फर्मों और प्रमाणन प्राधिकरणों समेत करीब 200 संस्थाओं ने अपनाया है। इस तकनीक को नवाचार श्रेणी में प्रधानमंत्री का लोक प्रशासन उत्कृष्टता पुरस्कार 2023 भी प्राप्त हुआ है।

आधार फेस ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल पेंशनभोगियों द्वारा डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र जमा करने, आयुष्मान भारत लाभार्थियों के पंजीकरण, DBT योजनाओं, आधार-सक्षम भुगतान, e-KYC के जरिए सिम एक्टिवेशन, PM E-DRIVE, प्रधानमंत्री आवास योजना और PM किसान जैसी विभिन्न सेवाओं में लाभार्थी प्रमाणीकरण के लिए किया जा रहा है।

इस अवसर पर UIDAI ने “प्लेबुक ऑन ईज ऑफ ऑनबोर्डिंग” भी लॉन्च की। यह गाइड BFSI संस्थाओं को अपने ग्राहकों, कर्मचारियों और अन्य व्यावसायिक भागीदारों के पहचान सत्यापन के लिए UIDAI के ऑथेंटिकेशन इकोसिस्टम से जुड़ने में मदद करेगी।

Supreme Court Decision: इतने साल तक किराए पर रहा किराएदार, तो हो जाएगा कब्जा

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

सुप्रीम कोर्ट ने एक नया नियम जारी किया है कि अगर कोई किसी की जमीन पर लंबे समय से कब्जा करके बैठा है तो वह जमीन उसकी ही हो जाएगी। उसे ही उस प्रॉपटी का मालिक मान लिया जाएगा।

अगर आपकी प्रॉपटी पर कोई इंसान लंबे समय से कब्जा करके बैठा है। और आप उसे वहां से हटाने में बेगौरी कर रहें है तो ये आपके लिए बहुत बुरी बात है।

उसे वहां से हटाने में देरी करना आपका भारी नुकसान करवा सकता है। अगर आपकी किसी अचल संपत्ति पर किसी ने कब्जा जमा लिया है तो उसे वहां से हटाने में लेट लतीफी नहीं करें।

अपनी संपत्ति पर दूसरे के अवैध कब्जे को चुनौती देने में देर की तो संभव है कि वह आपके हाथ से हमेशा के लिए निकल जाए।

12 वर्ष के अंदर उठाना होगा कदम

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार, अगर वास्तविक या वैध मालिक अपनी अचल संपत्ति को दूसरे के कब्जे से वापस पाने के लिए समयसीमा के अंदर कदम नहीं उठा पाएंगे

तो उनका मालिकाना हक समाप्त हो जाएगा और उस अचल संपत्ति पर जिसने कब्जा कर रखा है, उसी को कानूनी तौर पर मालिकाना हक दे दिया जाएगा।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट कर दिया कि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण को इस दायरे में नहीं रखा जाएगा। यानी, सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे को कभी भी कानूनी मान्यता नहीं मिल सकती है।

तीन जजों की बेंच ने की कानून की व्याख्या

लिमिटेशन ऐक्ट 1963 के तहत निजी अचल संपत्ति पर लिमिटेशन (परिसीमन) की वैधानिक अवधि 12 साल जबकि सरकारी अचल संपत्ति के मामले में 30 वर्ष है। यह मियाद कब्जे के दिन से शुरू होती है।

सुप्रीम कोर्ट के जजों जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस एस अब्दुल नजीर और जस्टिस एमआर शाह की बेंच ने इस कानून के प्रावधानों की व्याख्या करते हुए कहा कि कानून उस व्यक्ति के साथ है

जिसने अचल संपत्ति पर 12 वर्षों से अधिक से कब्जा कर रखा है। अगर 12 वर्ष बाद उसे वहां से हटाया गया तो उसके पास संपत्ति पर दोबारा अधिकार पाने के लिए कानून की शरण में जाने का अधिकार है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

बेंच ने कहा, ‘हमारा फैसला है कि संपत्ति पर जिसका कब्जा है, उसे कोई दूसरा व्यक्ति बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के वहां से हटा नहीं सकता है। अगर किसी ने 12 साल से अवैध कब्जा कर रखा है

तो कानूनी मालिक के पास भी उसे हटाने का अधिकार भी नहीं रह जाएगा। ऐसी स्थिति में अवैध कब्जे वाले को ही कानूनी अधिकार, मालिकाना हक मिल जाएगा।

हमारे विचार से इसका परिणाम यह होगा कि एक बार अधिकार (राइट), मालिकाना हक (टाइटल) या हिस्सा (इंट्रेस्ट) मिल जाने पर उसे वादी कानून के अनुच्छेद 65 के दायरे में तलवार की तरह इस्तेमाल कर सकता है,

वहीं प्रतिवादी के लिए यह एक सुरक्षा कवच होगा। अगर किसी व्यक्ति ने कानून के तहत अवैध कब्जे को भी कानूनी कब्जे में तब्दील कर लिया तो जबर्दस्ती हटाए जाने पर वह कानून की मदद ले सकता है।’

12 वर्ष के बाद हाथ से निकल जाएगी संपत्ति

फैसले में स्पष्ट किया गया है कि अगर किसी ने 12 वर्ष तक अवैध कब्जा जारी रखा और उसके बाद उसने कानून के तहत मालिकाना हक प्राप्त कर लिया तो उसे असली मालिक भी नहीं हटा सकता है।

अगर उससे जबर्दस्ती कब्जा हटवाया गया तो वह असली मालिक के खिलाफ भी केस कर सकता है और उसे वापस पाने का दावा कर सकता है क्योंकि असली मालिक 12 वर्ष के बाद अपना मालिकाना हक खो चुका होता है।