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करवा चौथ की छुट्टी और स्कूलों का दोहरा रवैया

जितेंद्र कुमार / संपादक / सत्ता संदेश

भारत त्योहारों का देश है। यहाँ लगभग हर महीने कोई न कोई पर्व आता है। दिवाली, होली, ईद, क्रिसमस, रक्षाबंधन, नवरात्रि, गुरुपर्व… सूची लंबी है। इन त्योहारों पर स्कूल बंद होते हैं। बच्चे खुश होते हैं, परिवार खुश होते हैं। लेकिन इस खुशी के पीछे एक सच्चाई भी छिपी है—पढ़ाई का नुकसान।

अब इस सूची में करवा चौथ भी जुड़ गया है। कई स्कूलों में करवा चौथ के नाम पर एक दिन की छुट्टी घोषित की जा रही है। सवाल यह है कि क्या यह जरूरी है?

करवा चौथ मुख्य रूप से विवाहित महिलाओं का व्रत है। इसमें पति की लंबी उम्र की कामना की जाती है। यह घर-परिवार का पर्व है। स्कूलों से इसका सीधा संबंध नहीं बनता। फिर भी स्कूल बंद कर दिए जा रहे हैं। जबकि कई अन्य जरूरी और गैर-जरूरी छुट्टियाँ पहले से ही कैलेंडर में दर्ज हैं।

समस्या यहीं खत्म नहीं होती। स्कूल साल भर में कई दिनों के लिए बंद रहते हैं। फिर जब सिलेबस अधूरा रह जाता है, तो बच्चों पर बोझ डाल दिया जाता है। अतिरिक्त क्लासें, होमवर्क का ढेर, परीक्षा का दबाव—सब बच्चों के हिस्से में आता है। अभिभावक भी चिंतित रहते हैं। शिक्षक भी दबाव में रहते हैं कि कैसे पूरा कोर्स कराया जाए।

यह दोहरा रवैया समझ से परे है। एक तरफ त्योहारों के नाम पर छुट्टियाँ बढ़ाई जा रही हैं, दूसरी तरफ बच्चों से कहा जा रहा है कि वे ज्यादा मेहनत करें। शिक्षा का उद्देश्य ज्ञान देना और व्यक्तित्व का विकास करना है, न कि कैलेंडर भरना।

कुछ त्योहारों पर छुट्टी उचित है—जहाँ सांस्कृतिक महत्व बहुत गहरा हो या अधिकांश छात्र-शिक्षक प्रभावित हों। लेकिन हर छोटे-बड़े पर्व पर स्कूल बंद करना शिक्षा व्यवस्था को कमजोर बनाता है। करवा चौथ जैसे पर्व पर छुट्टी की बजाय, स्कूलों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जो बच्चे व्रत रख रहे हों या घर में कोई विशेष व्यवस्था हो, उन्हें थोड़ी छूट दी जाए। लेकिन पूरे स्कूल को बंद करना जरूरी नहीं।

सरकारों और स्कूल प्रबंधन को चाहिए कि वे छुट्टियों की सूची पर गंभीरता से विचार करें। जरूरी राष्ट्रीय और धार्मिक पर्वों को तो रखा जाए, लेकिन बाकी छुट्टियों को सीमित किया जाए। साथ ही, जब छुट्टियाँ दी जाएँ तो सिलेबस की योजना भी उसी हिसाब से बनाई जाए, ताकि बच्चों पर अनावश्यक दबाव न पड़े।

भारत त्योहारों का देश जरूर है, लेकिन शिक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। त्योहार और पढ़ाई दोनों साथ-साथ चल सकते हैं—बशर्ते हम संतुलन बनाएँ। करवा चौथ की छुट्टी इस संतुलन को और बिगाड़ने वाली साबित न हो, यही कामना है।

ESTIC 2026: पीएम मोदी ने वैज्ञानिकों से 3 साल में ठोस नतीजे देने को कहा, 5,000 से अधिक प्रतिनिधि शामिल

ESTIC 2026 के पहले दिन भारत मंडपम में 5,000 से अधिक प्रतिनिधि शामिल हुए। पीएम मोदी ने वैज्ञानिकों से तीन साल में ठोस तकनीकी परिणाम देने का आह्वान किया।

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारत को विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने की दिशा में उभरते विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सम्मेलन (ESTIC 2026) का आयोजन नई दिल्ली के भारत मंडपम में किया जा रहा है। 27 अक्टूबर को सम्मेलन के पहले दिन 5,000 से अधिक वैश्विक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इनमें प्रमुख वैज्ञानिक, नीति निर्माता, शोधकर्ता, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और डीप-टेक स्टार्टअप शामिल रहे। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधान को औद्योगिक विकास, जनहित और व्यावहारिक तकनीकी समाधानों से जोड़ना है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उद्घाटन संबोधन में वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और युवा नवप्रवर्तकों से तीन साल की परिचालन अवधि के भीतर ठोस, मापने योग्य और व्यापक तकनीकी परिणाम हासिल करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक उपलब्धियां केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उन्हें वास्तविक जीवन की समस्याओं का समाधान करने, आत्मनिर्भर भारत को मजबूत बनाने और मानव कल्याण में योगदान देने वाला होना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), क्वांटम प्रौद्योगिकी, उन्नत सामग्री और जैव प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में भारत की वैश्विक क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया।

भारत विज्ञान और तकनीक का वैश्विक सह-निर्माता बन रहा है: डॉ. जितेंद्र सिंह

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने सम्मेलन में कहा कि भारत विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अपनी भूमिका को लगातार विस्तार दे रहा है। उन्होंने बताया कि देश अब केवल तकनीकों का उपभोक्ता नहीं, बल्कि अत्याधुनिक वैज्ञानिक समाधानों के विकास में योगदान देने वाला वैश्विक सह-निर्माता बन रहा है।

उन्होंने भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम के विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2014 में देश में लगभग 400 स्टार्टअप थे, जबकि अब इनकी संख्या 2.3 लाख से अधिक हो गई है। उन्होंने यह भी बताया कि अनुमानित 50 से 60 प्रतिशत स्टार्टअप श्रेणी-2 और श्रेणी-3 शहरों में स्थित हैं, जो देश में तकनीकी उद्यमिता के व्यापक प्रसार को दर्शाता है।

डॉ. सिंह ने जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की आनुवंशिक और फीनोटाइपिक विविधता को महत्वपूर्ण संसाधन बताते हुए जीन संश्लेषण, सिस्टम बायोलॉजी और परमाणु चिकित्सा में स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

नोबेल पुरस्कार विजेताओं ने साझा किए वैज्ञानिक शोध के नए आयाम

सम्मेलन के पहले दिन दो नोबेल पुरस्कार विजेताओं ने प्रमुख व्याख्यान दिए। वर्ष 2017 के रसायन विज्ञान नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर जोआचिम फ्रैंक ने क्रायो-इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी (Cryo-EM) के माध्यम से जैविक अणुओं की संरचना को समझने और औषधि विकास में इसकी भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि उच्च-रिजॉल्यूशन इमेजिंग और कम्प्यूटेशनल तकनीकों की मदद से जटिल आणविक संरचनाओं का त्रि-आयामी अध्ययन किया जा सकता है, जिससे दवाओं के विकास और जैविक लक्ष्यों की पहचान में मदद मिलती है।

वहीं, वर्ष 1993 के फिजियोलॉजी या मेडिसिन के नोबेल पुरस्कार विजेता सर रिचर्ड जे. रॉबर्ट्स ने जीन स्प्लिसिंग, माइक्रोबियल जीनोमिक्स और प्रतिबंध-संशोधन एंजाइमों से जुड़ी वैज्ञानिक प्रक्रियाओं पर चर्चा की। उनके व्याख्यान में जैव प्रौद्योगिकी की मदद से कृषि, सार्वजनिक स्वास्थ्य और रोग निदान के क्षेत्र में संभावनाओं को भी रेखांकित किया गया।

AI, उन्नत विनिर्माण और सिंथेटिक बायोलॉजी पर विशेष चर्चा

ESTIC 2026 के पहले दिन विभिन्न तकनीकी क्षेत्रों पर समानांतर सत्र आयोजित किए गए। उन्नत विनिर्माण सत्र में डिजिटल ट्विन, सहयोगी रोबोटिक्स, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग और मेट्रोलॉजी जैसी तकनीकों पर चर्चा हुई। इसका उद्देश्य शोध और इंजीनियरिंग को औद्योगिक उत्पादन से जोड़ना तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों की आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूत करना था।

जनरेटिव और ऑटोनॉमस AI सत्र में स्वदेशी बड़े भाषा मॉडल, उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग, एजेंटिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सुरक्षित AI अनुप्रयोगों पर विचार-विमर्श किया गया। सत्र में घरेलू AI क्षमताओं के विकास और इन तकनीकों के जिम्मेदार इस्तेमाल के लिए जरूरी ढांचे पर जोर दिया गया।

सिस्टम और सिंथेटिक बायोलॉजी सत्र में जैविक प्रणालियों के डिजाइन, परीक्षण और विकास से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। इसमें सटीक बायोथेरेप्यूटिक्स, बायोफोर्टिफाइड फसलें, मेटाबोलिक पाथवे डिजाइन और कचरे से उपयोगी उत्पाद तैयार करने वाली बायोमैन्युफैक्चरिंग जैसी संभावनाओं को रेखांकित किया गया।

स्टार्टअप प्रदर्शनी में दिखे नई तकनीकों के प्रोटोटाइप

डॉ. जितेंद्र सिंह ने सम्मेलन के दौरान स्टार्टअप प्रदर्शनी और पोस्टर ट्रैक का उद्घाटन किया। यहां डीप-टेक अनुसंधान, तकनीकी प्रोटोटाइप और शोध परियोजनाओं को प्रदर्शित किया गया। प्रदर्शनी ने स्टार्टअप्स, निवेशकों, उद्योग जगत, अकादमिक संस्थानों और नीति निर्माताओं को एक-दूसरे से जुड़ने तथा तकनीकी सहयोग के अवसर तलाशने का मंच दिया।

भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर अजय के. सूद ने मूलभूत वैज्ञानिक अनुसंधान, औद्योगिक विस्तार और नियामक नीतियों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने क्वांटम संचार, जनरेटिव AI, सेमीकंडक्टर निर्माण, उन्नत विनिर्माण और डीप ओशन मिशन सहित सम्मेलन के 12 प्रमुख विषयगत प्राथमिकता क्षेत्रों का उल्लेख किया।

आत्मनिर्भर भारत के लिए विज्ञान और विघटनकारी तकनीकों पर मंथन

सम्मेलन के पहले दिन शाम को “आत्मनिर्भर भारत के लिए विज्ञान और विघटनकारी प्रौद्योगिकियां” विषय पर पैनल चर्चा आयोजित की गई। इसकी अध्यक्षता प्रोफेसर अजय के. सूद ने की। चर्चा में रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भरता, बौद्धिक संपदा का व्यावसायीकरण, डीप-टेक फंडिंग और शोध संस्थानों से उद्योग तक तकनीक के हस्तांतरण जैसे मुद्दों पर विचार किया गया।

सम्मेलन में एक लाख करोड़ रुपये के अनुसंधान, विकास एवं नवाचार कोष तथा अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) जैसे तंत्रों के माध्यम से शोध को व्यावसायिक उत्पादों में बदलने की संभावनाओं पर भी जोर दिया गया।

ESTIC 2026 विज्ञान, सरकार, उद्योग और स्टार्टअप जगत के बीच सहयोग को मजबूत करने का मंच है। सम्मेलन का व्यापक उद्देश्य भारत की वैज्ञानिक क्षमताओं को बढ़ावा देना, स्वदेशी तकनीकों के विकास को गति देना और अनुसंधान के परिणामों को देश के आर्थिक विकास तथा मानव कल्याण से जोड़ना है।

Tawang International Tourism Mart 2026: 29 अक्टूबर से होगा आयोजन, 22 देशों के प्रतिनिधि होंगे शामिल

अरुणाचल प्रदेश के तवांग में 29 से 31 अक्टूबर तक 14वें अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मार्ट का आयोजन होगा। 22 देशों के 43 अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के शामिल होने की उम्मीद है।

अरुणाचल प्रदेश / सत्ता संदेश

तपूर्वोत्तर भारत की पर्यटन संभावनाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने के लिए 29 से 31 अक्टूबर, 2026 तक अरुणाचल प्रदेश के तवांग में 14वें अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मार्ट (ITM) का आयोजन किया जाएगा। केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय, अरुणाचल प्रदेश सरकार और पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों के सहयोग से आयोजित होने वाला यह तीन दिवसीय कार्यक्रम होटल विवांता, तवांग में होगा। इसमें देश-विदेश के पर्यटन क्षेत्र से जुड़े हितधारक भाग लेंगे और क्षेत्र में पर्यटन विकास तथा व्यावसायिक साझेदारियों को मजबूत करने पर चर्चा करेंगे।

केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, पर्यटन एवं पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी तथा अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू 29 अक्टूबर को उद्घाटन समारोह में शामिल होंगे। इस दौरान नॉर्थ ईस्ट बाजार का उद्घाटन किया जाएगा और पूर्वोत्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने वाले कार्यक्रम आयोजित होंगे।

22 देशों के 43 अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के शामिल होने की उम्मीद

14वें अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मार्ट में 200 से अधिक घरेलू और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों तथा विक्रेताओं के भाग लेने की संभावना है। इनमें 22 देशों का प्रतिनिधित्व करने वाले 43 अंतरराष्ट्रीय खरीदार शामिल होंगे। ऑस्ट्रेलिया, भूटान, फ्रांस, जर्मनी, इंडोनेशिया, इटली, जापान, मलेशिया, फिलीपींस, पोलैंड, रूस, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका, थाईलैंड, संयुक्त अरब अमीरात, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका सहित कई देशों के प्रतिनिधियों के पहुंचने की उम्मीद है।

इस आयोजन में पूर्वोत्तर के सभी आठ राज्यों—अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा के पर्यटन स्थलों, स्थानीय अनुभवों और पर्यटन उत्पादों को प्रदर्शित किया जाएगा। इसका उद्देश्य क्षेत्र के प्राकृतिक सौंदर्य, सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक स्थलों और एडवेंचर टूरिज्म को घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पहचान दिलाना है।

30 अक्टूबर को होंगे बी2बी सत्र

मार्ट के दूसरे दिन, 30 अक्टूबर को व्यवसाय-से-व्यवसाय (B2B) बैठकें आयोजित की जाएंगी। इन बैठकों में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों तथा पूर्वोत्तर के पर्यटन सेवा प्रदाताओं को एक मंच पर लाया जाएगा। इसके माध्यम से पर्यटन व्यवसायों के बीच सहयोग बढ़ाने, नए पर्यटन उत्पाद विकसित करने और स्थानीय उद्यमियों की बाजार तक पहुंच मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा।

कार्यक्रम के दौरान पर्यटन विकास से जुड़े तकनीकी सत्र भी आयोजित होंगे। इनमें पूर्वोत्तर में लाइव कार्यक्रमों और संगीत समारोहों से जुड़ी अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने तथा संरक्षित और प्रतिबंधित क्षेत्रों में पर्यटकों की पहुंच सुगम बनाने जैसे विषयों पर चर्चा की जाएगी। इसके अलावा रॉयल एनफील्ड की ओर से ‘गंतव्यों से परे: पूर्वोत्तर भारत में अनुभवपरक यात्राओं का सृजन’ विषय पर प्रस्तुति दी जाएगी।

स्थानीय संस्कृति, हस्तशिल्प और खान-पान का होगा प्रदर्शन

आयोजन में नॉर्थ ईस्ट बाजार के माध्यम से पूर्वोत्तर की पारंपरिक कलाओं, हस्तशिल्प, वस्त्रों और सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया जाएगा। सांस्कृतिक कार्यक्रमों और क्षेत्रीय व्यंजनों के जरिए प्रतिनिधियों को आठों राज्यों की विविध परंपराओं और खान-पान से परिचित होने का अवसर मिलेगा।

तवांग के प्रमुख पर्यटन स्थलों का करेंगे भ्रमण

मार्ट के दौरान प्रतिभागियों के लिए तवांग और आसपास के प्रमुख पर्यटन स्थलों के भ्रमण की योजना भी बनाई गई है। इनमें तवांग मठ, जसवंत गढ़ युद्ध स्मारक, जंग जलप्रपात, तवांग युद्ध स्मारक, छठे दलाई लामा की जन्मस्थली उर्ग्येलिंग गोम्पा, बुद्ध पार्क, पंकांग तेंग त्सो झील और शेरनुप गांव शामिल हैं।

इन भ्रमणों के माध्यम से प्रतिनिधियों को क्षेत्र की आध्यात्मिक विरासत, प्राकृतिक दृश्यों, स्थानीय परंपराओं और ग्रामीण पर्यटन की संभावनाओं को करीब से देखने का अवसर मिलेगा। अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के लिए परिचयात्मक भ्रमण भी निर्धारित किए गए हैं, जो 1 नवंबर, 2026 को गुवाहाटी से शुरू होंगे।

पूर्वोत्तर राज्यों के पर्यटन मंत्रियों की क्षेत्रीय बैठक भी होगी

अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मार्ट के साथ 30 अक्टूबर को पूर्वोत्तर राज्यों के पर्यटन मंत्रियों की क्षेत्रीय बैठक भी आयोजित की जाएगी। इसकी अध्यक्षता केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत करेंगे। बैठक में पूर्वोत्तर क्षेत्र में पर्यटन विकास को गति देने और राज्यों के बीच सहयोग मजबूत करने से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मार्ट का 14वां संस्करण 13 वर्ष बाद तवांग में आयोजित हो रहा है। इससे पहले वर्ष 2013 में इस आयोजन का दूसरा संस्करण तवांग में हुआ था। मार्ट का पिछला संस्करण नवंबर 2025 में सिक्किम की राजधानी गंगटोक में आयोजित किया गया था। इस बार तवांग में होने वाले आयोजन से पूर्वोत्तर भारत के पर्यटन स्थलों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने और क्षेत्र में पर्यटन आधारित व्यावसायिक अवसरों को बढ़ावा देने की उम्मीद है।

श्री अकाल तख्त साहिब से निकला विशाल नगर कीर्तन, संगत ने फूलों की वर्षा कर जताई श्रद्धा

श्री गुरु रामदास जी के प्रकाश गुरुपर्व पर श्री अकाल तख्त साहिब से पांच प्यारों के नेतृत्व में विशाल नगर कीर्तन सजाया गया। संगत ने फूलों की वर्षा कर श्रद्धा व्यक्त की।

अमृतसर / सत्ता संदेश

चौथे पातशाह श्री गुरु रामदास जी के प्रकाश गुरुपर्व के पावन अवसर पर श्री अमृतसर साहिब में श्रद्धा और उत्साह का माहौल देखने को मिला। इस अवसर पर सचखंड श्री हरमंदिर साहिब स्थित श्री अकाल तख्त साहिब से पांच प्यारों के नेतृत्व में और श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की पावन हजूरी में विशाल नगर कीर्तन सजाया गया। नगर कीर्तन में बड़ी संख्या में संगत ने शामिल होकर गुरु साहिब के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।

नगर कीर्तन के आरंभ के समय पूरा वातावरण गुरबाणी, सतनाम वाहेगुरु के जाप और श्रद्धा के रंग में रंगा नजर आया। फूलों से सजी सुंदर पालकी साहिब के दर्शन के लिए संगत में विशेष उत्साह देखने को मिला। इस दौरान पालकी साहिब पर फूलों की वर्षा कर संगत ने अपनी श्रद्धा और सम्मान प्रकट किया।

श्री अकाल तख्त साहिब से आरंभ हुआ यह विशाल नगर कीर्तन श्री अमृतसर साहिब के विभिन्न बाजारों से होकर गुजरेगा और वापस श्री अकाल तख्त साहिब पहुंचकर संपन्न होगा। रास्ते में संगत द्वारा नगर कीर्तन का श्रद्धापूर्वक स्वागत किया गया।

श्री गुरु रामदास जी ने मानवता को सेवा, विनम्रता, प्रेम और भाईचारे का संदेश दिया। उनका जीवन संगत और पंगत की परंपरा तथा मानव कल्याण की प्रेरणा देता है। प्रकाश गुरुपर्व के अवसर पर गुरु साहिब के दिखाए मार्ग पर चलने और मानवता की सेवा करने का संकल्प लिया जा रहा है।

इस पावन अवसर पर संगत द्वारा सरबत के भले, विश्व शांति और चढ़दी कला के लिए अरदास की जा रही है। गुरु साहिब के प्रकाश गुरुपर्व पर श्री अमृतसर साहिब में श्रद्धा और आध्यात्मिकता का माहौल बना हुआ है।

Delhi Yamuna Cruise Service: रेखा गुप्ता ने किया क्रूज सेवा का निरीक्षण, जानें किराया और सफर की पूरी जानकारी

दिल्ली में यमुना रिवर सफारी का ट्रायल शुरू। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोनिया विहार से जगतपुर तक क्रूज सेवा का निरीक्षण किया। जानें संभावित किराया, सफर की अवधि और शुरुआत की तारीख।

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

दिल्ली में यमुना नदी पर पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में नई पहल की जा रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को सोनिया विहार से जगतपुर तक विकसित की जा रही यमुना क्रूज सेवा का ट्रायल रन और निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने संबंधित अधिकारियों से परियोजना की प्रगति, संचालन व्यवस्था और यात्रियों के लिए तैयार की जा रही सुविधाओं की जानकारी ली। सरकार की योजना छठ महापर्व से पहले इस सेवा को शुरू करने की है, जबकि औपचारिक शुभारंभ नवंबर के पहले सप्ताह में किए जाने की तैयारी है।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्लीवासियों का मां यमुना के साथ गहरा भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव है। यमुना रिवर सफारी इस जुड़ाव को नया आयाम देने के साथ राजधानी में पर्यटन और मनोरंजन की नई संभावनाएं खोलेगी। इससे लोगों को नदी के किनारे प्राकृतिक वातावरण के बीच समय बिताने और परिवार के साथ क्रूज यात्रा का आनंद लेने का अवसर मिलेगा।

6 किलोमीटर के जलमार्ग पर चलेगा क्रूज

सोनिया विहार से जगतपुर तक लगभग 6 किलोमीटर के जलमार्ग पर क्रूज सेवा विकसित की जा रही है। परियोजना का उद्देश्य इस क्षेत्र को दिल्लीवासियों और पर्यटकों के लिए आकर्षक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना है। इसके लिए फूड कियोस्क, रेस्टोरेंट, बच्चों के लिए किड्स जोन और अन्य जनसुविधाएं तैयार की जा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन सुविधाओं के विकास के साथ यमुना की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देना भी जरूरी है। सरकार का प्रयास है कि लोग नदी के प्राकृतिक वातावरण का आनंद ले सकें और इसके संरक्षण के प्रति भी जागरूक हों।

30 यात्रियों की क्षमता, 35 से 45 मिनट का सफर

परियोजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल 30 यात्रियों की क्षमता वाली क्रूज सेवा शुरू करने की तैयारी है। सोनिया विहार से जगतपुर स्थित शनि मंदिर तक आने-जाने में लगभग 35 से 45 मिनट लगने का अनुमान है। यात्रा पूरी होने के बाद यात्री अपने शुरुआती स्थान पर लौट सकेंगे।

क्रूज सेवा का ट्रायल लगभग एक सप्ताह तक चलाने की योजना है। इसके बाद नवंबर के पहले सप्ताह में औपचारिक शुरुआत की तैयारी की जा रही है। हालांकि, सेवा शुरू होने की अंतिम तारीख की आधिकारिक घोषणा अभी की जानी बाकी है।

क्या होगा यमुना क्रूज का किराया?

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, परियोजना परिसर में प्रवेश शुल्क 50 रुपये और क्रूज की एक पूरी यात्रा के लिए प्रस्तावित किराया 500 रुपये रखा गया है। यात्रियों को सलाह दी जाती है कि यात्रा पर जाने से पहले अंतिम टिकट दरों, बुकिंग व्यवस्था और संचालन समय की आधिकारिक जानकारी की पुष्टि कर लें।

केंद्र और दिल्ली सरकार के समन्वय से तैयार हो रही परियोजना

यमुना रिवर सफारी परियोजना में भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण, दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA), दिल्ली पर्यटन एवं परिवहन विकास निगम (DTTDC), सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग और दिल्ली जल बोर्ड सहित कई एजेंसियां शामिल हैं।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने परियोजना को आगे बढ़ाने में केंद्र और दिल्ली सरकार के संबंधित विभागों के सहयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय से राजधानी में पर्यटन के नए अवसर विकसित किए जा रहे हैं।

दिल्ली के पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने भी यमुना रिवर सफारी को महत्वपूर्ण परियोजना बताया। उनके अनुसार, बोट राइड, म्यूजिक फाउंटेन, वाटर स्पोर्ट्स और फूड पार्क जैसी सुविधाओं के माध्यम से दिल्लीवासियों और पर्यटकों को नया अनुभव देने की योजना है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और NGT के मानकों के पालन पर भी जोर दिया।

छठ महापर्व से पहले शुरुआत की तैयारी

दिल्ली सरकार की योजना यमुना रिवर सफारी को छठ महापर्व से पहले जनता के लिए खोलने की है। इसके साथ ही यमुना तट पर छठ पूजा के आयोजन की तैयारियां भी की जा रही हैं। यदि परियोजना निर्धारित समय पर शुरू होती है, तो दिल्लीवासियों को त्योहारों के मौसम में पर्यटन का एक नया विकल्प मिल सकता है।

यमुना क्रूज सेवा की सफलता इस बात पर भी निर्भर करेगी कि यात्रियों की सुरक्षा, नदी की स्वच्छता और पर्यावरणीय मानकों का कितनी प्रभावी ढंग से पालन किया जाता है। इसके अलावा, किराये और संचालन संबंधी अंतिम जानकारी सामने आने के बाद ही लोग इस नई सुविधा का पूरा लाभ उठा सकेंगे।

Gujarat Drought Relief: गुजरात के चार जिलों में सूखा, किसानों को मुआवजा और पशुपालकों को ₹80 प्रतिदिन की मदद

गुजरात में कम बारिश के कारण देवभूमि द्वारका, पोरबंदर, जामनगर और कच्छ सूखाग्रस्त घोषित। किसानों को ₹8,500 प्रति हेक्टेयर, पशुपालकों को ₹80 प्रतिदिन सहायता और ग्रामीणों को 150 दिनों के रोजगार की घोषणा।

गुजरात / सत्ता संदेश

गुजरात में कम बारिश के कारण पैदा हुई सूखे जैसी स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने चार जिलों को सूखाग्रस्त घोषित करने का ऐलान किया है। इनमें देवभूमि द्वारका, पोरबंदर, जामनगर और कच्छ शामिल हैं। राज्य सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों के किसानों, पशुपालकों और ग्रामीण परिवारों को राहत देने के लिए कई उपायों की घोषणा की है।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने गांधीनगर में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि गुजरात में इस मानसून सीजन में औसत बारिश का लगभग 89 प्रतिशत दर्ज किया गया, लेकिन इन चार जिलों में बारिश काफी कम हुई। इसी के चलते सूखे की स्थिति से निपटने और प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। 26 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों में भी इस घोषणा की पुष्टि की गई है।

किसानों को प्रति हेक्टेयर ₹8,500 की सहायता

कम बारिश के कारण फसलों को हुए नुकसान से प्रभावित किसानों को आर्थिक सहायता दी जाएगी। सरकार की घोषणा के अनुसार, पात्र किसानों को अधिकतम दो हेक्टेयर भूमि की सीमा तक प्रति हेक्टेयर 8,500 रुपये की सहायता मिलेगी। इससे सूखे से प्रभावित किसानों को खेती से जुड़े आर्थिक नुकसान के बीच कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। सहायता के लिए पात्रता और भुगतान की प्रक्रिया संबंधित सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार तय होगी।

पशुपालकों को सस्ती दर पर मिलेगा चारा

सूखे के कारण पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी सरकार के सामने बड़ी चुनौती है। मुख्यमंत्री के अनुसार, राज्य में अब तक 1.21 करोड़ किलोग्राम चारा दो रुपये प्रति किलोग्राम की दर से उपलब्ध कराया जा चुका है। सरकार के पास फिलहाल तीन करोड़ किलोग्राम चारे का भंडार मौजूद है। जरूरत बढ़ने पर अतिरिक्त चारे की व्यवस्था करने की भी बात कही गई है।

पशु शिविरों में प्रति पशु ₹80 प्रतिदिन की सहायता

पशुओं के पालन-पोषण पर बढ़ते खर्च को देखते हुए पशु शिविरों में प्रति पशु प्रतिदिन 80 रुपये की सहायता देने की घोषणा की गई है। इस कदम का उद्देश्य सूखा प्रभावित इलाकों में पशुपालकों को आर्थिक सहारा देना और पशुधन की देखभाल में मदद करना है। सरकार जरूरत के अनुसार अतिरिक्त सहायता देने पर भी विचार करेगी।

सूखा प्रभावित गांवों में 150 दिनों का रोजगार

राज्य सरकार ने सूखा प्रभावित क्षेत्रों में ग्रामीण परिवारों के लिए 150 दिनों तक रोजगार उपलब्ध कराने की व्यवस्था की घोषणा की है। इससे कृषि कार्य प्रभावित होने की स्थिति में ग्रामीण परिवारों को आय का वैकल्पिक साधन मिल सकेगा। सरकार का कहना है कि सूखे की स्थिति में किसानों और पशुपालकों को राहत देने के साथ-साथ पानी, चारे और रोजगार की जरूरतों पर भी ध्यान दिया जाएगा।

सरकारी राहत के क्रियान्वयन पर रहेगी नजर

गुजरात के इन चार जिलों में कम बारिश के कारण कृषि और पशुपालन से जुड़े परिवारों पर दबाव बढ़ा है। घोषित राहत उपायों से प्रभावित लोगों को सहायता मिलने की उम्मीद है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मुआवजे का भुगतान, चारे की आपूर्ति और रोजगार की व्यवस्था जमीनी स्तर पर कितनी जल्दी लागू होती है।

Rahul Gandhi Acquitted: अमित शाह मानहानि केस में राहुल गांधी बरी, सुल्तानपुर कोर्ट के फैसले पर कांग्रेस का जश्न

सुल्तानपुर की MP-MLA अदालत ने अमित शाह पर टिप्पणी से जुड़े 2018 के मानहानि मामले में राहुल गांधी को बरी कर दिया। फैसले के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जश्न मनाया।

सुल्तानपुर / सत्ता संदेश

कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है। उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर की विशेष MP-MLA अदालत ने 26 अक्टूबर 2026 को फैसला सुनाते हुए राहुल गांधी को बरी कर दिया। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, अदालत ने माना कि उनकी टिप्पणी मानहानिकारक नहीं थी। शिकायतकर्ता के मामले में शिकायत करने के अधिकार से जुड़े पहलू को भी फैसले में महत्वपूर्ण माना गया।

फैसले के समय राहुल गांधी अदालत में मौजूद थे। निर्णय के बाद अदालत परिसर के बाहर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पटाखे फोड़कर और एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी जताई। इसके बाद राहुल गांधी के लखनऊ रवाना होने की जानकारी सामने आई।

2018 के बयान से जुड़ा था मानहानि का मामला

यह मामला मई 2018 का है, जब कर्नाटक विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान राहुल गांधी ने बेंगलुरु में तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को लेकर टिप्पणी की थी। राहुल गांधी ने अपने बयान में कहा था कि लोग यह भूल जाते हैं कि भाजपा अध्यक्ष हत्या के मामले में आरोपी रहे हैं।

यह टिप्पणी सोहराबुद्दीन शेख कथित फर्जी मुठभेड़ मामले के संदर्भ में थी। अमित शाह को 2014 में मुंबई की विशेष सीबीआई अदालत ने इस मामले में आरोपों से मुक्त कर दिया था।

राहुल गांधी की टिप्पणी के बाद स्थानीय भाजपा नेता विजय मिश्रा ने 4 अगस्त 2018 को सुल्तानपुर की अदालत में आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता का आरोप था कि इस बयान से अमित शाह की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।

करीब आठ साल तक चली कानूनी लड़ाई

सुल्तानपुर की अदालत ने नवंबर 2023 में राहुल गांधी को मुकदमे का सामना करने के लिए तलब किया था। फरवरी 2024 में अदालत में पेश होने के बाद उन्हें जमानत मिल गई। जुलाई 2024 में राहुल गांधी ने अपना बयान दर्ज कराया और आरोपों से इनकार करते हुए मामले को राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित बताया।

मुकदमे की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से गवाह और साक्ष्य पेश किए गए। शिकायतकर्ता ने राहुल गांधी की आवाज के नमूने का भाषण की रिकॉर्डिंग से मिलान कराने की मांग भी की थी। ट्रायल कोर्ट ने यह मांग खारिज कर दी थी। इस आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाएं भी आगे सफल नहीं हुईं।

अक्टूबर 2026 में दोनों पक्षों की अंतिम दलीलें पूरी होने के बाद अदालत ने 26 अक्टूबर को फैसला सुनाया।

पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर काफिले की गाड़ियों की टक्कर

सुल्तानपुर जाते समय राहुल गांधी के काफिले की कुछ गाड़ियां पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर आपस में टकरा गईं। शुरुआती रिपोर्टों में इस घटना की पुष्टि हुई, हालांकि टक्कर में शामिल वाहनों की संख्या और नुकसान से जुड़ी विस्तृत जानकारी अलग-अलग रिपोर्टों में स्पष्ट नहीं थी।

इस मामले में अदालत के फैसले से राहुल गांधी के खिलाफ इस आपराधिक मानहानि मुकदमे की ट्रायल कोर्ट में कार्यवाही समाप्त हो गई है। फैसले को चुनौती देने के लिए शिकायतकर्ता के पास उच्च अदालत का रुख करने का विकल्प हो सकता है।

CM Yogi News: बिठूर-बिल्हौर को ₹411 करोड़ की सौगात, GCC Innovation Summit से युवाओं के रोजगार पर जोर

महर्षि वाल्मीकि जयंती पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने बिठूर-बिल्हौर क्षेत्र की 411 करोड़ रुपये से अधिक की 48 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। GCC Innovation Summit 2026 में तकनीक, निवेश और रोजगार पर जोर दिया गया।

कानपुर / लखनऊ / सत्ता संदेश

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर कानपुर नगर के बिठूर में बिठूर और बिल्हौर विधानसभा क्षेत्रों के लिए 411 करोड़ रुपये से अधिक लागत की 48 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इस दौरान विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों को प्रमाण-पत्र वितरित करने का कार्यक्रम भी रखा गया। मुख्यमंत्री ने विकास परियोजनाओं के साथ निवेश, तकनीक और नवाचार के जरिए युवाओं के लिए नए अवसर पैदा करने पर जोर दिया।

मुख्यमंत्री ने महर्षि वाल्मीकि की तपोभूमि बिठूर से लोकमंगल और जनकल्याण के संकल्प को आगे बढ़ाने की बात कही। उन्होंने कहा कि जनसुविधाओं का विस्तार और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर तैयार करना प्रदेश की विकास यात्रा के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।

GCC Innovation Summit 2026 से तकनीक और रोजगार को बढ़ावा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में आयोजित GCC Innovation Summit 2026 को उत्तर प्रदेश में तकनीकी अनुसंधान, नवाचार और उच्च कौशल आधारित रोजगार की संभावनाओं से जोड़कर देखा। उन्होंने कहा कि वैश्विक कंपनियों और विश्वविद्यालयों के साथ होने वाले समझौता ज्ञापन (MoUs) युवाओं के लिए नए अवसर खोल सकते हैं।

मुख्यमंत्री के अनुसार, सरकार का लक्ष्य है कि उत्तर प्रदेश के युवाओं को अपनी ही धरती पर बेहतर अवसर मिलें और वे वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सकें। इसके लिए निवेश, तकनीकी शिक्षा और उद्योगों के साथ सहयोग को महत्वपूर्ण बताया गया।

महर्षि वाल्मीकि की विरासत और आधुनिक विकास पर जोर

मुख्यमंत्री ने महर्षि वाल्मीकि की रामायण को भारतीय सांस्कृतिक विरासत के साथ ज्ञान, मर्यादा और लोककल्याण की परंपरा का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की गौरवशाली विरासत से प्रेरणा लेते हुए विज्ञान और तकनीक के माध्यम से नई पीढ़ी के लिए अवसर तैयार किए जा सकते हैं।

उन्होंने विकास की इस सोच को संस्कृति और आधुनिक तकनीक के समन्वय से जोड़ते हुए कहा कि शिक्षा युवाओं को सामर्थ्य प्रदान करती है, जबकि तकनीक और नवाचार उनके लिए समृद्धि के नए रास्ते खोल सकते हैं।

इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और कनेक्टिविटी पर फोकस

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेशोन्मुख नीतियों के जरिए उत्तर प्रदेश में नए आर्थिक अवसर विकसित हो रहे हैं। उन्होंने प्रदेश को भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम और ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला राज्य बनाने की दिशा में प्रयासों का उल्लेख किया।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। उनके मुताबिक, विरासत से संस्कार, शिक्षा से सामर्थ्य और तकनीक से समृद्धि के रास्ते तैयार कर उत्तर प्रदेश के विकास को नई दिशा दी जा सकती है।

Cyclone Arnab Alert: ओडिशा में चक्रवात का खतरा, मछली पकड़ने पर रोक; कई जिलों में पर्यटन गतिविधियां बंद

चक्रवात ‘अर्नब’ के खतरे को देखते हुए ओडिशा में समुद्र में मछली पकड़ने पर रोक लगाई गई है। संवेदनशील जिलों में पर्यटन गतिविधियों पर प्रतिबंध और राहत-बचाव की तैयारियां तेज की गई हैं।

ओडिशा / सत्ता संदेश

बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के तेज होने की आशंका के बीच ओडिशा सरकार ने एहतियाती कदम उठाए हैं। समुद्र में मछली पकड़ने की गतिविधियों पर रोक लगा दी गई है। वहीं, संवेदनशील जिलों में पहाड़ियों, झरनों, बांधों और अन्य पर्यटन स्थलों पर लोगों की आवाजाही प्रतिबंधित की गई है। राज्य सरकार ने आपदा प्रबंधन एजेंसियों को अलर्ट पर रखते हुए राहत और बचाव की तैयारियां तेज कर दी हैं।

अधिकारियों के अनुसार, गंजाम, गजपति, रायगढ़ा, मलकानगिरी, कोरापुट और नवरंगपुर जिलों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने चक्रवात से पहले की तैयारियों की निगरानी के लिए आठ मंत्रियों को अलग-अलग क्षेत्रों में जिम्मेदारी सौंपी है।

संवेदनशील इलाकों में बचाव दल तैनात

चक्रवात के संभावित प्रभाव को देखते हुए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल (ODRAF), अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा तथा पुलिस के जवानों को संवेदनशील इलाकों में तैनात किया गया है। राहत और बचाव कार्यों के समन्वय के लिए कंट्रोल रूम भी स्थापित किए गए हैं।

राज्य सरकार ने संबंधित विभागों के कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं, ताकि आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।

28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश तट से टकराने की संभावना

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना गहरा दबाव 26 अक्टूबर की सुबह चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ में बदल गया। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, यह तूफान आगे बढ़ते हुए 26 अक्टूबर की आधी रात तक गंभीर चक्रवाती तूफान और 27 अक्टूबर को अति गंभीर चक्रवाती तूफान का रूप ले सकता है।

IMD के अनुसार, तूफान के 28 अक्टूबर की सुबह आंध्र प्रदेश और यानम के तट से बापटला तथा विशाखापत्तनम के बीच टकराने की संभावना है। इस दौरान हवा की रफ्तार 115 से 125 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है, जबकि झोंकों की गति 140 किलोमीटर प्रति घंटा तक रहने का अनुमान है। तटीय आंध्र प्रदेश और दक्षिणी ओडिशा में भारी से अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी भी जारी की गई है।

स्कूल-कॉलेज बंद रखने की तैयारी

खराब मौसम की आशंका के मद्देनजर प्रभावित जिलों में शैक्षणिक संस्थानों को बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, स्कूल, कॉलेज और आंगनवाड़ी केंद्र 28 और 29 अक्टूबर को बंद रहेंगे। इस संबंध में संबंधित जिलों के नवीनतम सरकारी आदेशों की पुष्टि आवश्यक है।

किसानों को फसल सुरक्षित रखने की सलाह

कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि जो फसल 80 से 85 प्रतिशत तक पक चुकी है, उसकी कटाई कर उसे सुरक्षित स्थान पर रखा जाए। किसानों की सहायता के लिए विशेष कृषि हेल्पलाइन शुरू किए जाने की भी जानकारी दी गई है।

ओडिशा के आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने कहा है कि राज्य सरकार किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। प्रशासन ने लोगों से मौसम विभाग और जिला प्रशासन की सलाह का पालन करने तथा समुद्र, झरनों, बांधों और पहाड़ी क्षेत्रों में जाने से बचने की अपील की है।

PM Modi Congratulates Lula: ब्राजील के राष्ट्रपति लूला को पीएम मोदी ने दी बधाई, भारत-ब्राजील संबंधों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता

पीएम नरेंद्र मोदी ने ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा को चुनावी जीत पर बधाई दी। दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी और ग्लोबल साउथ के सहयोग पर जोर दिया गया।

अंतराष्ट्रीय समाचार / सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा को दोबारा चुनाव जीतने पर बधाई दी है। पीएम मोदी ने भारत और ब्राजील के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने तथा विभिन्न क्षेत्रों में आपसी सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा कि दोनों देश ग्लोबल साउथ की साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने और अधिक समावेशी, समान तथा टिकाऊ दुनिया बनाने के लिए मिलकर काम करेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने संदेश में राष्ट्रपति लूला को अपना मित्र बताते हुए उनकी चुनावी जीत पर शुभकामनाएं दीं। उन्होंने भारत-ब्राजील रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने तथा दोनों देशों के बीच सहयोग के नए अवसर तलाशने की इच्छा व्यक्त की।

भारत-ब्राजील रणनीतिक साझेदारी पर जोर

पीएम मोदी के बधाई संदेश में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और वैश्विक मुद्दों पर दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। भारत और ब्राजील विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर विकासशील देशों की प्राथमिकताओं, आर्थिक सहयोग और टिकाऊ विकास जैसे मुद्दों पर सहयोग करते रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में ग्लोबल साउथ की साझा जरूरतों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई। ग्लोबल साउथ से आशय मुख्य रूप से उन विकासशील देशों से है, जो आर्थिक विकास, अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधित्व और वैश्विक चुनौतियों से जुड़े कई समान मुद्दों पर सहयोग करते हैं।

जीत के बाद राष्ट्रपति लूला ने जताया जनता का आभार

चुनावी जीत के बाद राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा ने ब्राजील की जनता को समर्थन देने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने लोकतंत्र की रक्षा के लिए प्रयास करने वाले युवाओं और मतदान के माध्यम से देश के भविष्य में भागीदारी निभाने वाले नागरिकों के योगदान को सराहा।

लूला ने कहा कि यह जीत उन लोगों की है, जो विश्वास बनाए रखते हैं, संघर्ष करते हैं और अधिक न्यायपूर्ण, स्वतंत्र तथा लोकतांत्रिक ब्राजील के निर्माण के लिए प्रयास करना नहीं छोड़ते।

भारत और ब्राजील के संबंधों के लिए क्या मायने?

भारत और ब्राजील के बीच व्यापार, कृषि, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और बहुपक्षीय सहयोग जैसे क्षेत्रों में साझेदारी की संभावनाएं हैं। दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संवाद और रणनीतिक सहयोग से इन क्षेत्रों में संबंधों को आगे बढ़ाने के अवसर मिल सकते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी के संदेश से स्पष्ट है कि भारत ब्राजील के साथ अपने संबंधों को आगे बढ़ाने और वैश्विक मंचों पर साझा प्राथमिकताओं पर सहयोग जारी रखने का इच्छुक है।