13 साल की उम्र में आरव गुप्ता ने ‘स्विच वर्ड’ नाम की लिखी दूसरी किताब
गुरदासपुर / सत्ता संदेश
गुरदासपुर के आठवीं कक्षा के छात्र 13 वर्षीय आरव साई गुप्ता ने कम उम्र में लेखन के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनानी शुरू कर दी है। आरव ने अपनी दूसरी किताब लिखी है, जिसका नाम ‘स्विच वर्ड’ है। यह किताब अब बाजार में प्रकाशित होकर पाठकों के लिए उपलब्ध हो गई है।
आरव की पहली किताब जनवरी 2026 में प्रकाशित हुई थी। इस किताब में उन्होंने भगवान कृष्ण के जीवन से जुड़ी ऐसी कहानियों को सामने रखा था, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। पहली किताब को पाठकों की ओर से अच्छा रिस्पॉन्स मिला, जिसके बाद आरव ने अपनी दूसरी किताब लिखने का फैसला किया।
‘स्विच वर्ड’ में आरव ने खास तौर पर टीनएज उम्र में बच्चों और युवाओं के सामने आने वाली विभिन्न समस्याओं को उठाया है। किताब में ओवरथिंकिंग, असफल होने का डर और टीनएजर्स की अन्य मानसिक एवं व्यवहारिक चुनौतियों को समझाने के साथ-साथ उनसे निपटने के संभावित समाधान भी बताए गए हैं।
आरव का कहना है कि टीनएजर होने के कारण उन्होंने अपने आसपास के दोस्तों की समस्याओं को करीब से देखा है। उन्होंने इन समस्याओं को समझने के लिए उनके बारे में सोचा, जानकारी जुटाई और इसी अनुभव एवं जानकारी को किताब के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश की है।
आरव के मुताबिक, किताब का हर अध्याय पाठक को एक नई समस्या से अवगत कराता है और उसके समाधान की दिशा भी दिखाता है। उनका उद्देश्य है कि किताब पढ़ने वाले टीनएजर्स अपनी परेशानियों को बेहतर तरीके से समझें और उन्हें खुद दूर करने के लिए प्रेरित हों।
आरव की मां मीनू गुप्ता ने बताया कि इस किताब को लिखने के दौरान उनके बेटे ने काफी मेहनत की। वह देर रात तक जागकर नोट्स तैयार करता था और टीनएजर्स से जुड़ी अलग-अलग समस्याओं के बारे में जानकारी जुटाता था। अब किताब के बाजार में आने के बाद आरव बेहद खुश हैं।
13 साल की उम्र में दूसरी किताब प्रकाशित करना आरव साई गुप्ता की रचनात्मक सोच और लेखन के प्रति उनके समर्पण को दर्शाता है। ‘स्विच वर्ड’ के जरिए उन्होंने अपनी उम्र के युवाओं की समस्याओं को समझने और उन्हें सकारात्मक दिशा देने की एक सराहनीय कोशिश की है।

