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भारतीय रेलवे ने बोंडामुंडा रेल फ्लाईओवर के लिए 135 करोड़ की दी मंजूरी

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारतीय रेल ने माल ढुलाई क्षमता और परिचालन दक्षता को महत्वपूर्ण बढ़ावा देते हुए, दक्षिण पूर्वी रेल में बोंडामुंडा ‘ए’ केबिन से बोंडामुंडा लिंक ‘बी’ केबिन तक 4.59 किलोमीटर लंबे रेल फ्लाईओवर के निर्माण को 135 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी दे दी है।

इस परियोजना का उद्देश्य राउरकेला-बोंडामुंडा के महत्वपूर्ण खंड पर भीड़भाड़ को कम करना है, जो एक महत्वपूर्ण औद्योगिक गलियारा है तथा खनन और इस्पात उत्पादन की गतिविधियों के विस्तार के कारण माल ढुलाई यातायात में तेजी से वृद्धि करने की सख्त आवश्यकता है।

एक महत्वपूर्ण औद्योगिक गलियारे पर क्षमता वृद्धि

एसएआईएल के बारसुआ-ताल्डीह-काल्टा खनन परिसर के विस्तार, राउरकेला स्टील प्लांट में बढ़े हुए उत्पादन और इस उच्च-घनत्व नेटवर्क (एचडीएन) मार्ग को दोगुना करने की योजना के कारण राउरकेला-बोंडामुंडा खंड में माल ढुलाई में काफी वृद्धि होने की उम्मीद है।

रेल यातायात में अपेक्षित वृद्धि को देखते हुए, भारतीय रेल ने नए रेल फ्लाईओवर के निर्माण को मंजूरी दे दी है, जो यात्रियों और मालगाड़ियों के बीच क्रॉसिंग संबंधी टकराव को कम करते हुए ट्रेनों की निर्बाध आवाजाही को सुविधाजनक बनाएगा।

बोंडामुंडा यार्ड में भीड़ कम करना और माल ढुलाई दक्षता में सुधार करना

प्रस्तावित फ्लाईओवर भारी मालगाड़ियों को यात्री ट्रेनों से अलग करेगा, जिससे बोंडामुंडा यार्ड में भीड़भाड़ काफी कम हो जाएगी। इस अलगाव से देश के महत्वपूर्ण औद्योगिक माल ढुलाई गलियारों में से एक पर लाइन की क्षमता, परिचालन दक्षता, ट्रेनों की विश्वसनीयता और समग्र नेटवर्क प्रदर्शन में सुधार होगा।

परियोजना के चालू होने पर, इससे प्रति वर्ष अतिरिक्त 8 मिलियन टन (एमटीपीए) माल ढुलाई यातायात को संभालने में सुविधा होने की उम्मीद है, जिससे खनिजों और औद्योगिक उत्पादों की निकासी मजबूत होगी और माल परिवहन में भविष्य की वृद्धि को समर्थन मिलेगा।

इस परियोजना को भारतीय रेल के ऊर्जा, खनिज और सीमेंट कॉरिडोर के तहत चिन्हित किया गया है, जो देश भर में औद्योगिक विकास, माल ढुलाई में तेजी लाने और रसद दक्षता बढ़ाने के लिए रेल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की दिशा में राष्ट्रीय उद्देश्य को बल देता है।

भारतीय रेलवे ने उत्तरी रेलवे के अंबाला मंडल के लिए ‘कवच परियोजना’ की दी स्वीकृति

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

रेल सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारतीय रेलवे ने उत्तरी रेलवे के अंबाला मंडल के शेष ब्रॉड गेज रेल खंडों पर ‘कवच’ प्रणाली स्थापित करने की स्‍वीकृति प्रदान की है। यह परियोजना 811 किलोमीटर के मार्ग को कवर करती है और इसके लिए 201 करोड़ रुपये की लागत स्वीकृत की गई है। इस कार्य को भारतीय रेलवे के शेष मार्गों पर ‘एलटीई-आधारित संचार नेटवर्क’ के साथ कवच प्रणाली के प्रावधान वाले व्यापक कार्यक्रम के तहत मंजूरी दी गई है।

इस स्वीकृत कार्य के अंतर्गत अंबाला मंडल के कई महत्वपूर्ण रेल मार्ग शामिल होंगे, जिनमें अंबाला छावनी-लुधियाना, कालका-चंडीगढ़-न्यू मोरिंडा-साहनेवाल, सरहिंद-दौलतपुर चौक, राजपुरा-बठिंडा-श्री गंगानगर और लुधियाना-धुरी-जाखल रेलखंड शामिल हैं।

ये मार्ग हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश राज्यों को जोड़ने वाले प्रमुख रेल गलियारों के रूप में कार्य करते हैं। यहां से भारी मात्रा में यात्री और मालगाडि़यों का आवागमन होता है, जो इस पूरे क्षेत्र में लोगों और सामान की आवाजाही में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

‘कवच’ स्वदेशी रूप से विकसित एक स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है, जिसे परिचालन सुरक्षा बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह प्रणाली रेड सिग्नल पार करने की घटनाओं को रोकने में मदद करती है, असुरक्षित स्थितियों से बचने के लिए आवश्यकता पड़ने पर स्वचालित रूप से ब्रेक लगाती है, गंभीर परिस्थितियों में ट्रेन की गति को नियंत्रित करती है और ट्रेनों की आपस में होने वाली टक्करों के जोखिम को काफी हद तक कम करती है।

भारतीय रेलवे अपने नेटवर्क पर अधिक व्‍यस्‍तता वाले और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मार्गों पर सुरक्षा, विश्वसनीयता और क्षमता बढ़ाने के निरंतर प्रयासों के तहत चरणबद्ध तरीके से ‘कवच’ प्रणाली का विस्तार कर रहा है।