ब्रेकिंग न्यूज़
2029 तक 21 NDA शासित राज्यों में UCC लागू करने का लक्ष्य, लेकिन राह में कई सियासी सवाल

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा और NDA शासित सभी 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता यानी Uniform Civil Code (UCC) लागू करने का लक्ष्य सामने रखा है। शाह के इस ऐलान के बाद UCC एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है। हालांकि, लक्ष्य जितना बड़ा है, उसे हासिल करने की राजनीतिक और संवैधानिक राह उतनी ही चुनौतीपूर्ण नजर आ रही है।

UCC का उद्देश्य विवाह, तलाक, विरासत, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत कानूनों के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था तैयार करना है। भाजपा लंबे समय से इसे अपने प्रमुख वैचारिक एजेंडे का हिस्सा बताती रही है। उत्तराखंड में जनवरी 2025 से UCC लागू है, जबकि गुजरात, असम और मध्य प्रदेश की विधानसभाएं भी UCC से जुड़े कानून पारित कर चुकी हैं। हालांकि अलग-अलग राज्यों के कानून पूरी तरह एक जैसे नहीं हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या 2029 तक 21 राज्यों के लिए UCC का पूरा रोडमैप तैयार है? क्योंकि इस लक्ष्य के बीच कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं और कुछ राज्यों में भाजपा के बजाय उसके सहयोगी दल सत्ता में हैं।

चुनावी राज्यों में UCC की राह कितनी आसान?

UCC को लेकर सबसे ज्यादा राजनीतिक नजरें उन राज्यों पर होंगी जहां आने वाले वर्षों में विधानसभा चुनाव होने हैं। अगर किसी राज्य में सत्ता परिवर्तन होता है और वहां भाजपा या NDA की सरकार नहीं रहती, तो उस राज्य में UCC लागू करने की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ेगी, यह बड़ा सवाल है।

उत्तर प्रदेश भी इस पूरे समीकरण में अहम है। राज्य में अभी UCC को लेकर विधायी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है और आने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए यह मुद्दा राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण हो सकता है। सवाल यही है कि क्या चुनाव से पहले इस दिशा में बड़ा कदम उठाया जाएगा या फिर चुनाव के बाद बनने वाली सरकार पर इसकी जिम्मेदारी होगी।

मणिपुर की स्थिति भी जटिल है। पूर्वोत्तर के राज्यों में स्थानीय और आदिवासी समुदायों की अलग-अलग परंपराएं और प्रथाएं UCC को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। मौजूदा UCC कानूनों में अनुसूचित जनजातियों को कई मामलों में दायरे से बाहर रखा गया है।

2028 के चुनाव भी होंगे निर्णायक

2028 में भी कई महत्वपूर्ण राज्यों में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। इनमें कर्नाटक, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, त्रिपुरा, मेघालय, नगालैंड और मिजोरम जैसे राज्य शामिल हैं। इनमें कुछ राज्यों में भाजपा की सरकार है, जबकि कुछ में विपक्षी दल या सहयोगी सत्ता में हैं।

यही वजह है कि 2029 की समयसीमा सिर्फ भाजपा के लिए ही नहीं, बल्कि उसके NDA सहयोगियों के लिए भी बड़ी परीक्षा बन सकती है।

TDP ने समर्थन दिया, लेकिन अभी चर्चा बाकी

आंध्र प्रदेश में सत्तारूढ़ तेलुगु देशम पार्टी यानी TDP का रुख भी महत्वपूर्ण है। पार्टी के संसदीय दल के नेता लावु श्रीकृष्ण देवरायलु ने कहा है कि फिलहाल पार्टी के भीतर UCC को लेकर चर्चा नहीं हुई है और जरूरत पड़ने पर विभिन्न हितधारकों से विचार-विमर्श किया जाएगा। यानी समर्थन की संभावना दिखाई देती है, लेकिन अंतिम रोडमैप अभी स्पष्ट नहीं है।

JDU का रुख भाजपा के लिए चुनौती

NDA की प्रमुख सहयोगी जनता दल (यूनाइटेड) का रुख इस मुद्दे को और पेचीदा बनाता है। JDU ने UCC को लेकर चर्चा और सहमति की जरूरत पर जोर दिया है। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने अमित शाह से मुलाकात कर इस मुद्दे पर चर्चा की बात कही है। वहीं बिहार में UCC लागू करने को लेकर पार्टी के भीतर स्पष्ट आपत्तियां भी सामने आई हैं।

इससे साफ है कि NDA के भीतर UCC पर एक जैसी राय नहीं है। कुछ सहयोगी दल खुलकर समर्थन कर रहे हैं, जबकि कुछ दल मसौदा सामने आने, व्यापक चर्चा और सभी हितधारकों से राय लेने की मांग कर रहे हैं।

LJP और अन्य सहयोगी भी मांग रहे हैं चर्चा

लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता चिराग पासवान भी UCC पर व्यापक चर्चा और सभी हितधारकों की राय लेने की बात कह चुके हैं। वहीं शिवसेना के श्रीकांत शिंदे और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा जैसे NDA सहयोगियों ने UCC के प्रति समर्थन जताया है। दूसरी ओर, कुछ विपक्षी दल इसका विरोध कर रहे हैं और इसे देश की धार्मिक एवं सामाजिक विविधता से जोड़कर देख रहे हैं।

2029 का लक्ष्य या ठोस रोडमैप?

अमित शाह ने 2029 से पहले 21 NDA शासित राज्यों में UCC लागू करने का लक्ष्य स्पष्ट कर दिया है। लेकिन अब राजनीतिक बहस इस बात पर होगी कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए राज्यों के स्तर पर कितना काम हो चुका है।

UCC चूंकि व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े विषयों को प्रभावित करता है और विवाह, तलाक, उत्तराधिकार तथा अन्य पारिवारिक मामलों तक इसका असर पहुंच सकता है, इसलिए राज्यों में स्थानीय परिस्थितियां, आदिवासी परंपराएं और राजनीतिक सहमति महत्वपूर्ण होंगी। संविधान के तहत इन विषयों पर केंद्र और राज्य दोनों को कानून बनाने की शक्ति प्राप्त है, जिसके कारण भाजपा ने राज्य-दर-राज्य मॉडल को आगे बढ़ाने की रणनीति अपनाई है।

अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि 2029 तक UCC 21 राज्यों में लागू होगा या नहीं। असली सवाल यह है कि क्या भाजपा और उसके सहयोगी दल चुनावी बदलावों, क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरणों और गठबंधन की अलग-अलग राय के बावजूद इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए एक साझा रोडमैप तैयार कर पाएंगे?

2029 की डेडलाइन सामने है, लेकिन मंजिल तक पहुंचने का रास्ता अभी भी राजनीतिक सहमति, चुनावी परिणामों और NDA के अंदरूनी समीकरणों पर काफी हद तक निर्भर करता दिखाई दे रहा है।

भारत-अमेरिका के बीच ‘युद्ध अभ्यास-2026’ शुरू, पहाड़ी युद्ध क्षमता और ड्रोन तकनीक पर रहेगा फोकस

नई दिल्ली / देहरादून / सत्ता संदेश

भारत और अमेरिका की सेनाओं के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘युद्ध अभ्यास-2026’ का 22वां संस्करण मंगलवार से शुरू हो गया। अभ्यास का उद्घाटन उत्तराखंड के औली स्थित फॉरेन ट्रेनिंग नोड में किया गया। इस संयुक्त सैन्य अभ्यास में भारत और अमेरिका की ओर से करीब 600-600 सैन्यकर्मी हिस्सा ले रहे हैं।

अभ्यास के उद्घाटन अवसर पर भारतीय सेना की ओर से मेजर जनरल अमरेश गुंजन, जीओसी 14 इन्फैंट्री डिवीजन, जबकि अमेरिकी सेना की ओर से कर्नल बेंजामिन जैकमैन, कमांडर, 1st इन्फैंट्री ब्रिगेड कॉम्बैट टीम, 11th एयरबोर्न डिवीजन ने सैनिकों को संबोधित किया।

यह सैन्य अभ्यास उत्तराखंड के औली और राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में एक साथ आयोजित किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं के बीच संयुक्त सैन्य क्षमता, समन्वय और इंटरऑपरेबिलिटी को मजबूत करना है।

पहाड़ी इलाकों में युद्ध क्षमता बढ़ाने पर जोर

‘युद्ध अभ्यास-2026’ के दौरान खासतौर पर पहाड़ी और अर्ध-पहाड़ी इलाकों में सैन्य अभियानों की तैयारी पर जोर दिया जाएगा। सैनिकों को इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स (IBG) के इस्तेमाल और इन्फैंट्री आधारित ऑपरेशंस से जुड़ी परिस्थितियों में प्रशिक्षण दिया जाएगा।

अभ्यास के दौरान भारतीय और अमेरिकी सैनिक एक-दूसरे की रणनीति, तकनीक और ऑपरेशनल प्रक्रियाओं को समझेंगे। इसके साथ ही संयुक्त योजना तैयार करने और मिलकर सैन्य अभियानों को अंजाम देने की क्षमता को भी मजबूत किया जाएगा।

ड्रोन और ऑटोनॉमस सिस्टम पर खास फोकस

इस बार संयुक्त सैन्य अभ्यास में आधुनिक तकनीक की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहेगी। सैनिकों को ड्रोन और ऑटोनॉमस सिस्टम के जरिए निगरानी और टोही अभियानों को संचालित करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

वहीं, राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में आधुनिक हथियार प्रणालियों का प्रदर्शन किया जाएगा। दोनों देशों के सैन्य विशेषज्ञ नई सैन्य तकनीक और मल्टी-डोमेन वॉरफेयर से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने अनुभव साझा करेंगे।

संयुक्त सैन्य कार्रवाई की क्षमता होगी मजबूत

‘युद्ध अभ्यास-2026’ के जरिए दोनों सेनाएं अलग-अलग भौगोलिक और ऑपरेशनल परिस्थितियों में एक-दूसरे के साथ समन्वय स्थापित करते हुए सैन्य कार्रवाई करने की क्षमता को और मजबूत करेंगी। यह अभ्यास भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।

भारत और अमेरिका के बीच ‘युद्ध अभ्यास’ एक वार्षिक द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास है, जिसका उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी, संयुक्त संचालन क्षमता और सैन्य सहयोग को बढ़ाना है। इस अभ्यास के दौरान दोनों देशों के सैनिक एक-दूसरे की रणनीति, हथियार प्रणालियों और ऑपरेशनल प्रक्रियाओं से परिचित होते हैं।

दिशा 2.0 के तहत नूंह में टेली-लॉ सेवाओं पर अधिकारी-स्तरीय जागरूकता कार्यशाला

नूंह / सत्ता संदेश

भारत सरकार के विधि एवं न्याय मंत्रालय के न्याय विभाग की ओर से दिशा 2.0 (Designing Innovative Solutions for Holistic Access to Justice) योजना के तहत मंगलवार को हरियाणा के नूंह जिले में टेली-लॉ सेवाओं को लेकर अधिकारी-स्तरीय जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला लघु सचिवालय में आयोजित हुई, जिसमें करीब 150 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

कार्यशाला की अध्यक्षता न्याय विभाग, विधि एवं न्याय मंत्रालय के संयुक्त सचिव (एक्सेस टू जस्टिस) सुरेश कुमार और नूंह के एसडीएम कुंवर आदित्य विक्रम सहित सीएससी के प्रतिनिधियों, ग्राम स्तरीय उद्यमियों (VLE), पैनल वकीलों, न्याय सहायकों और अन्य हितधारकों ने की।

कार्यशाला का उद्देश्य टेली-लॉ सेवाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना, तकनीक आधारित कानूनी सेवाओं के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करना और ग्रामीण एवं वंचित क्षेत्रों के नागरिकों तक कानूनी सहायता की पहुंच मजबूत करना रहा।

कार्यक्रम की शुरुआत उद्घाटन सत्र से हुई। इसके बाद दिशा 2.0 योजना पर प्रस्तुति दी गई, जिसमें टेली-लॉ, न्याय बंधु, कानूनी साक्षरता एवं कानूनी जागरूकता कार्यक्रम (LLLAP) और विधि-संजीवनी जैसी पहलों के एकीकृत क्रियान्वयन के जरिए न्याय तक पहुंच बढ़ाने के प्रयासों की जानकारी दी गई।

सीएससी और वीएलई की भूमिका पर जोर

तकनीकी सत्र के दौरान प्रतिभागियों को टेली-लॉ सेवाओं की कार्यप्रणाली और प्रभाव के बारे में जानकारी दी गई। इसमें कॉमन सर्विस सेंटर्स (CSC) को जमीनी स्तर पर कानूनी सहायता तक पहुंच के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में रेखांकित किया गया।

साथ ही ग्राम स्तरीय उद्यमियों (VLE) की भूमिका पर भी चर्चा हुई। बताया गया कि VLE डिजिटल माध्यमों के जरिए नागरिकों को कानूनी परामर्श और संबंधित सेवाओं तक पहुंच दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

कार्यशाला में कानूनी सेवा प्रदाताओं और नागरिकों के बीच की दूरी कम करने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म के प्रभावी इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया।

टेली-लॉ पोर्टल और ‘न्याय सेतु’ का लाइव प्रदर्शन

कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को योजना के तहत उपलब्ध डिजिटल सुविधाओं से परिचित कराया गया। इस दौरान टेली-लॉ पोर्टल और न्याय सेतु एआई-सक्षम चैटबॉट का लाइव प्रदर्शन किया गया।

प्रदर्शन के जरिए बताया गया कि नागरिक तकनीक आधारित प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर कानूनी जानकारी और सलाह तक कैसे पहुंच सकते हैं। इसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर लोगों के लिए कानूनी सहायता को अधिक सुलभ और प्रभावी बनाना है।

हितधारकों ने साझा किए सुझाव

कार्यशाला के अंतिम सत्र में टेली-लॉ सेवाओं के क्रियान्वयन से जुड़ी चुनौतियों, सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों और कानूनी सेवाओं की पहुंच को व्यापक बनाने के अवसरों पर चर्चा की गई।

विभिन्न हितधारकों ने अपने-अपने क्षेत्रों में टेली-लॉ सेवाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने को लेकर सुझाव साझा किए। चर्चा में तकनीक के बेहतर इस्तेमाल और नागरिकों तक कानूनी सहायता पहुंचाने के लिए समन्वय मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।

कार्यशाला का समापन न्याय विभाग के अवर सचिव गौरव कुमार त्रिपाठी के धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ। उन्होंने न्याय तक पहुंच को मजबूत करने और देशभर में कानूनी सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए सभी हितधारकों की सामूहिक भूमिका और प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।

नूह में दिशा 2.0 के तहत टेली-लॉ कार्यशाला, 150 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा

हरियाणा के नूह में दिशा 2.0 योजना के तहत टेली-लॉ सेवाओं पर अधिकारी-स्तरीय जागरूकता कार्यशाला आयोजित हुई। 150 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

नूह / हरियाणा / सत्ता संदेश

भारत सरकार के विधि एवं न्याय मंत्रालय के न्याय विभाग की ओर से मंगलवार को हरियाणा के नूह जिले के लघु सचिवालय में दिशा 2.0 योजना के तहत टेली-लॉ सेवाओं को लेकर अधिकारी-स्तरीय जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में करीब 150 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

कार्यशाला की अध्यक्षता न्याय विभाग, विधि एवं न्याय मंत्रालय के संयुक्त सचिव (एक्सेस टू जस्टिस) सुरेश कुमार और नूह के एसडीएम कुंवर आदित्य विक्रम ने की। कार्यक्रम में कॉमन सर्विसेज सेंटर्स (CSC) के प्रतिनिधियों, ग्राम स्तरीय उद्यमियों (VLE), पैनल वकीलों, न्याय सहायकों और न्याय तक पहुंच को मजबूत करने से जुड़े अन्य हितधारकों ने भाग लिया।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य टेली-लॉ कार्यक्रम के प्रति जागरूकता बढ़ाना, तकनीक आधारित कानूनी सेवाओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देना और ग्रामीण एवं वंचित क्षेत्रों के नागरिकों तक कानूनी सहायता की पहुंच मजबूत करना रहा।

कार्यक्रम की शुरुआत उद्घाटन सत्र से हुई, जिसमें संयुक्त सचिव सुरेश कुमार ने प्रारंभिक संबोधन दिया। इसके बाद दिशा 2.0 योजना पर प्रस्तुति दी गई। इसमें टेली-लॉ, न्याय बंधु, कानूनी साक्षरता एवं कानूनी जागरूकता कार्यक्रम (LLLAP) और विधि-संजीवनी के एकीकृत क्रियान्वयन के जरिए न्याय तक पहुंच बढ़ाने की दिशा पर जानकारी दी गई।

तकनीकी सत्र में प्रतिभागियों को टेली-लॉ सेवाओं के कामकाज और उनके प्रभाव के बारे में जानकारी दी गई। इस दौरान कॉमन सर्विसेज सेंटर्स को जमीनी स्तर पर कानूनी सहायता उपलब्ध कराने वाले प्रमुख पहुंच बिंदु के रूप में बताया गया। ग्राम स्तरीय उद्यमियों (VLE) की भूमिका पर भी चर्चा हुई, जो नागरिकों को कानूनी परामर्श तक पहुंच बनाने में मदद करते हैं।

कार्यशाला में डिजिटल तकनीक के माध्यम से कानूनी सेवा प्रदाताओं और जरूरतमंद नागरिकों के बीच की दूरी कम करने पर भी जोर दिया गया। प्रतिभागियों को योजना के तहत उपलब्ध डिजिटल माध्यमों की जानकारी देने के लिए टेली-लॉ पोर्टल और न्याय सेतु AI-सक्षम चैटबॉट का लाइव प्रदर्शन भी किया गया।

कार्यक्रम के अंतिम चरण में हितधारकों के साथ संवादात्मक चर्चा आयोजित की गई। इसमें टेली-लॉ सेवाओं के क्रियान्वयन से जुड़ी चुनौतियों, बेहतर कार्यप्रणाली और कानूनी सेवाओं की पहुंच को और व्यापक बनाने के अवसरों पर विचार-विमर्श किया गया। प्रतिभागियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में टेली-लॉ सेवाओं के प्रभावी संचालन को लेकर सुझाव भी साझा किए।

कार्यशाला का समापन न्याय विभाग के अवर सचिव गौरव कुमार त्रिपाठी के धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ। उन्होंने न्याय तक पहुंच मजबूत करने और नागरिकों के कानूनी सशक्तिकरण के लिए सभी हितधारकों की सामूहिक भूमिका और प्रतिबद्धता को महत्वपूर्ण बताया।

पंजाब पुलिस की स्पेशल यूनिट्स की CM मान ने की समीक्षा, गैंगस्टर-ड्रग नेटवर्क पर बड़े ऑपरेशन के निर्देश

पंजाब CM भगवंत मान ने पुलिस की CI, AGTF और ANTF इकाइयों की समीक्षा की। 8 महीनों में 10 विदेशी भगोड़ों को भारत लाने और गैंगस्टर-ड्रग नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई पर जोर।

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मंगलवार को पंजाब पुलिस की प्रमुख विशेष इकाइयों के कामकाज और उनकी परिचालन तैयारियों की समीक्षा के लिए उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में काउंटर इंटेलिजेंस (CI), एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) और एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) द्वारा चलाए जा रहे जमीनी अभियानों की विस्तृत समीक्षा की गई।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पुलिस अधिकारियों को पुख्ता खुफिया जानकारी के आधार पर लगातार बड़े ऑपरेशन चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गैंगस्टरवाद, संगठित अपराध और मादक पदार्थों की तस्करी के नेटवर्क को पंजाब से जड़ से खत्म करने के लिए पुलिस को पूरी मजबूती के साथ कार्रवाई जारी रखनी होगी।

बैठक के दौरान प्रवासी भगोड़े ट्रैकिंग और प्रत्यर्पण प्रकोष्ठ (OFTEC) के प्रदर्शन की भी विशेष रूप से समीक्षा की गई। पुलिस के अनुसार, जनवरी 2026 में स्थापित इस विशेष प्रकोष्ठ ने महज आठ महीनों में विदेशों में छिपे 10 भगोड़ों को भारत वापस लाने में सफलता हासिल की है।

इनमें से 9 आरोपियों को प्रत्यर्पण प्रक्रिया के माध्यम से भारत लाया गया, जबकि एक आरोपी को कानूनी प्रक्रिया के तहत वापस लाया गया। OFTEC का नेतृत्व IG आशीष चौधरी कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने इस व्यवस्था को मजबूत करने में AIG डी. सुदरवी और SP दीपिका सिंह के प्रयासों की सराहना की।

मोल्दोवा से अमृत दलम को लाने में सफलता

बैठक के दौरान SP बिक्रम बराड़ ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को एक विशेष स्मृति चिन्ह भेंट किया। पुलिस के अनुसार, यह स्मृति चिन्ह मोल्दोवा गणराज्य के अधिकारियों द्वारा पंजाब पुलिस को दिया गया था।

पंजाब पुलिस ने मोल्दोवा प्रशासन के साथ समन्वय करते हुए कुख्यात जग्गू भगवानपुरिया गिरोह के प्रमुख सक्रिय सदस्य अमृतपाल सिंह उर्फ अमृत दलम को यूरोप के मोल्दोवा से कानूनी प्रत्यर्पण प्रक्रिया के जरिए भारत वापस लाया था।

AGTF के ऑपरेशन की मुख्यमंत्री ने की सराहना

मुख्यमंत्री ने एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) की कार्यशैली और राज्य में गैंगस्टरों के नेटवर्क को कमजोर करने के लिए किए जा रहे अभियानों पर संतोष जताया। उन्होंने DSP राजन परमिंदर सिंह और उनकी ऑपरेशनल टीम के प्रयासों और साहस की सराहना की।

इस दौरान उत्कृष्ट सेवाओं के लिए समय से पहले पदोन्नति पाने वाले सुखजीत सिंह को मुख्यमंत्री भगवंत मान ने DSP का पदभार ग्रहण कराया और उनके कंधों पर DSP का बैज लगाया। मुख्यमंत्री ने इंस्पेक्टर से DSP पद पर पदोन्नत हुए सुखजीत सिंह को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

विदेशी नेटवर्क और सीमा पार गतिविधियों पर नजर

बैठक के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि पंजाब में संगठित अपराध और मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। पंजाब पुलिस अब स्थानीय स्तर पर कार्रवाई के साथ-साथ केंद्रीय और अंतरराष्ट्रीय जांच एजेंसियों के साथ भी खुफिया जानकारी साझा कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विदेशों में बैठकर पंजाब का माहौल खराब करने की साजिश रचने वाले भगोड़ों, उनके स्थानीय सहयोगियों और उन्हें आर्थिक मदद पहुंचाने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने पुलिस को ऐसे नेटवर्क की पहचान कर आरोपियों को गिरफ्तार करने और उन्हें कानून के तहत सजा दिलाने के लिए प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

लुधियाना में ‘रावी मेरे आर पार’ किताब का विमोचन, लेखक धर्म सिंह गोराया ने रावी की विरासत को दी आवाज

लुधियाना में अमेरिकी लेखक एस. धर्म सिंह गोराया की किताब ‘रावी मेरे आर पार’ का विमोचन हुआ। पुस्तक में रावी नदी, लोककथाओं, इतिहास और इससे जुड़े लोक नायकों का वर्णन है।

लुधियाना / सत्ता संदेश

अमेरिका के मैरीलैंड में रहने वाले लेखक एस. धर्म सिंह गोराया की नई गद्य पुस्तक ‘रावी मेरे आर पार’ का लुधियाना में पंजाबी लोक विरासत अकादमी में विमोचन किया गया। अकादमी के चेयरमैन प्रो. गुरभजन सिंह गिल और साहित्य एवं कला क्षेत्र से जुड़े अन्य प्रमुख व्यक्तियों ने संयुक्त रूप से पुस्तक का लोकार्पण किया।

इस अवसर पर प्रो. गुरभजन सिंह गिल ने कहा कि रावी नदी के किनारे स्थित रणसिंह के मीरा गांव में जन्मे एस. धर्म सिंह गोराया ने गुरदासपुर से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की। अपने बड़े भाई और जनहित के मुद्दों पर काम करने वाले अर्थशास्त्री डॉ. निर्मल सिंह आज़ाद से प्रेरणा लेकर उन्होंने पंजाबी यूनिवर्सिटी से पोस्ट-ग्रेजुएशन किया और शोधपरक गद्य लेखन को अपना रास्ता बनाया।

प्रो. गिल ने कहा कि यह शुभ संकेत है कि रावी नदी, पंजाबी लोककथाएं और इससे जुड़े लोक नायक लेखक के अध्ययन और विश्लेषण के प्रमुख विषय बने हैं। ‘रावी मेरे आर पार’ पहली नजर में रावी नदी और उसके आसपास बसे इलाकों की कहानी लगती है, लेकिन पुस्तक का दायरा इससे कहीं व्यापक है।

किताब में रावी नदी के उद्गम से लेकर झन नदी और आगे सिंधु नदी के रास्ते समुद्र तक पहुंचने की यात्रा को ऐतिहासिक और सामाजिक संदर्भों के साथ प्रस्तुत किया गया है। रावी नदी के दोनों किनारों से जुड़े वीरों, लेखकों, खिलाड़ियों और देशभक्तों के जीवन एवं योगदान को भी पुस्तक में स्थान दिया गया है।

प्रो. गिल ने कहा कि रावी के किनारे स्थित करतारपुर साहिब की धरती को समझते हुए इस पुस्तक के माध्यम से मेहनत, नाम जपने और मिल-बैठकर बांटकर खाने जैसी मानवीय एवं आध्यात्मिक परंपराओं को महसूस किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि रावी वह नदी है जिसने गुरु नानक पातशाह की वाणी और संदेश की गूंज को अपने किनारों से महसूस किया है।

पंजाबी साहित्य अकादमी के उपाध्यक्ष त्रिलोचन लोची ने पुस्तक पर चर्चा करते हुए कहा कि एस. धर्म सिंह गोराया इससे पहले ‘बुलंद हवेली’, ‘गुरिल्ला युद्ध कला दे मोधी चे ग्वेरा’, ‘अंखिला धरती पुत्र दुल्ला भट्टी’, ‘रावी दा रथ राय अहमद खान खरल’, ‘जग्गा सूरमा’, ‘लोह पुरख मर्जीवाड़ा तेजा सिंह स्वतंत्र’ और आत्मकथात्मक पुस्तक ‘कर्मा’ जैसी रचनाएं लिख चुके हैं।

पंजाबी साहित्य अकादमी लुधियाना के उपाध्यक्ष सहजप्रीत सिंह मांगट ने कहा कि धर्म सिंह गोराया ने ऐतिहासिक संदर्भों के साथ रचनात्मक गद्य लिखने में अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी जीवन में पंजाब स्टूडेंट्स यूनियन से जुड़े रहने के कारण लेखक के पास समाज को समझने की एक सजग दृष्टि है, जो उन्हें घटनाओं और तथ्यों को परखने में मदद करती है।

पंजाबी साहित्य अकादमी लुधियाना के पूर्व अध्यक्ष प्रो. रविंदर भट्ठल ने कहा कि धर्म सिंह गोराया ने पांच नदियों की धरती के लोगों की कहानियां लिखते हुए अब रावी नदी को केंद्र में रखकर एक महत्वपूर्ण रचना प्रस्तुत की है। उन्होंने कहा कि ‘रावी मेरे आर पार’ दर्द का दस्तावेज भी है और प्यार का करार भी।

अमेरिका से आए पुस्तक के लेखक एस. धर्म सिंह गोराया ने इस अवसर पर सभी का आभार जताया। उन्होंने कहा कि ‘रावी मेरे आर पार’ लिखकर उन्होंने रावी नदी और इसके आसपास के इलाकों से अपने जुड़ाव का ऋण चुकाने की कोशिश की है। अमेरिका में रहते हुए भी वह पंजाब के रावी क्षेत्र के चप्पे-चप्पे से जुड़े रहे हैं।

लेखक ने कहा कि देश के विभाजन ने रावी नदी को एक सीमा में बदल दिया, लेकिन उनके लिए रावी केवल एक सरहद नहीं है। उनके शब्दों में, “रावी मेरे आर पार बसता है।”

एक स्वास्थ्य, एक भविष्य: स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद : प्रतापराव जाधव

प्रतापराव जाधव, केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री

दुनिया अब सेहतमंद होने के मायने पर नए सिरे से सोच रही है। आज स्वास्थ्य-देखभाल का मतलब सिर्फ़ बीमारी का इलाज करना नहीं है; बल्कि इसका मकसद बीमारियों को रोकना, तंदुरुस्ती को बढ़ावा देना और ऐसी स्वास्थ्य प्रणाली का निर्माण करना है, जो बदलती जीवनशैली, पर्यावरण के दबाव और नई स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना कर सके। इस बदलते परिदृश्य में, आयुर्वेद भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण दृष्टि की पेशकश करता है।  

11वें आयुर्वेद दिवस की थीम, “स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद” और “एक स्वास्थ्य, एक भविष्य” का विज़न इस विचार को बहुत खूबसूरती से पेश करता है। यह हमें याद दिलाता है कि मानव स्वास्थ्य का कोई अलग-थलग अस्तित्व नहीं होता। लोगों, समुदायों, पशुओं और पर्यावरण का स्वास्थ्य आपस में गहराई से जुड़े होते हैं।

आयुर्वेद ने हमेशा बीमारी से बचाव, संतुलित जीवन, सही खान-पान, दैनिक दिनचर्या और प्रकृति के साथ तालमेल बिठाने पर बहुत ज़ोर दिया है। ऐसे समय में जब जीवनशैली से जुड़ी बीमारियाँ, उपापचय विकार, तनाव और दूसरी गैर-संक्रामक बीमारियाँ समाज पर बोझ बढ़ा रही हैं, ये सिद्धांत और भी ज़्यादा प्रासंगिक हो गए हैं।

लेकिन आयुर्वेद को आगे ले जाने का मतलब सिर्फ़ पीछे मुड़कर देखना नहीं हो सकता। इसके भविष्य को शोध, साक्ष्यों, नवाचार और गुणवता के जरिए आकार दिया जाना चाहिए। यह सुनिश्चित करना हमारी ज़िम्मेदारी है कि आयुर्वेद से जुड़े ज्ञान का अध्ययन आधुनिक वैज्ञानिक तरीकों से हो और उसे ऐसे समाधानों में बदला जाए, जो आज की स्वास्थ्य ज़रूरतों को पूरा करते हों।

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में, भारत ने इस यात्रा को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। 2014 में आयुष मंत्रालय की स्थापना; आयुर्वेद और अन्य आयुष प्रणालियों को एक मज़बूत संस्थागत आधार देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। तब से, इसका दायरा संरक्षण और प्रचार-प्रसार से बढ़कर शोध, शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल सुविधा, गुणवत्ता आश्वासन, नवाचार और वैश्विक सहयोग तक विस्तृत हो गया है।

स्वास्थ्य देखभाल को असल में मरीज़ की ज़रूरतों पर केंद्रित होना चाहिए। जहां उपचार उपयुक्त और साक्ष्य समर्थित हो, वहाँ विभिन्न स्वास्थ्य प्रणालियाँ एक-दूसरे की पूरक बन सकती हैं और स्वास्थ्य के प्रति व्यापक दृष्टिकोण में योगदान दे सकती हैं। जन स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में आयुष सेवाओं का एकीकरण और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का विस्तार, रोकथाम और समग्र स्वास्थ्य सेवा को ज़्यादा सुलभ बनाने के हमारे संकल्प को प्रतिबिंबित करते हैं।

भारत आयुर्वेद को दुनिया तक भी पहुँचा रहा है। आयुर्वेद दिवस के पिछले आयोजनों ने दिखाया है कि स्वास्थ्य और कल्याण के प्रति भारत के नज़रिए को दुनिया भर में कैसा समर्थन मिल सकता है। आयुर्वेद दिवस ने भारत की स्वास्थ्य परंपराओं के लिए एक वैश्विक अवसर का निर्माण किया है और आयुर्वेद तेज़ी से कल्याण, रोकथाम और सतत स्वास्थ्य सेवा पर होने वाली अंतरराष्ट्रीय बातचीत का हिस्सा बन रहा है।

इस बढ़ती वैश्विक रुचि के साथ एक उतनी ही महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी भी आती है। आयुर्वेद को विश्वसनीय शोध, नैदानिक सबूतों, मजबूत गुणवत्ता मानकों और ज़िम्मेदार संचार का समर्थन मिलना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय सहयोग, आयुष शैक्षिक विभाग, नैदानिक शोध और विनियामक तालमेल की दिशा में किए जा रहे प्रयास भारत से बाहर आयुर्वेद के लिए एक मज़बूत इकोसिस्टम बनाने में मदद कर रहे हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ़ इसकी वैश्विक पहुँच का विस्तार करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि इस विकास के साथ भरोसा और वैज्ञानिक विश्वसनीयता भी जुड़ी हो।

“एक स्वास्थ्य, एक भविष्य” का विज़न हमें अस्पतालों और दवाओं से आगे ले जाता है। एक स्वस्थ भविष्य हमारे पर्यावरण, हमारे खान-पान और उन प्राकृतिक संसाधनों के स्वास्थ्य पर निर्भर करता है, जिन पर स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियां निर्भर करती हैं। उदाहरण के लिए, औषधीय पौधे स्वास्थ्य सेवा को कृषि, आजीविका और जैव विविधता से जोड़ते हैं। उनकी स्थायी खेती से किसानों के लिए आर्थिक अवसर पैदा हो सकते हैं और साथ ही कीमती प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में भी योगदान मिल सकता है।

प्रौद्योगिकी भी एक परिवर्तनकारी भूमिका निभा सकती है। आज भारत के पास अपने व्यापक आयुर्वेदिक ज्ञान को आधुनिक शोध क्षमताओं, डिजिटल तकनीक, डेटा विज्ञान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे उभरते उपायों के साथ जोड़ने का मौका है। यह संयोजन शोधकर्ताओं को पारंपरिक तरीकों का ज़्यादा सटीकता से अध्ययन करने और नवाचार  के नए अवसरों को सामने लाने में मदद कर सकता है।

फिर भी, सबसे महत्वपूर्ण बदलाव लोगों के जीवन में आना चाहिए।    

आयुर्वेद दिवस को केवल साल में एक बार मनाया जाने वाला आयोजन बनकर नहीं रहना चाहिए। इसे हमारे घरों, स्कूलों, कार्यस्थलों और समुदायों में स्वस्थ जीवन शैली आधारित एक व्यापक अभियान को बढ़ावा देना चाहिए। हम क्या खाते हैं, हम कितने सक्रिय रहते हैं, हम तनाव का प्रबंधन कैसे करते हैं और हम अपने पर्यावरण के साथ कितनी ज़िम्मेदारी से व्यवहार करते हैं, ये सभी हमारे समाज के स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं।

इस यात्रा में युवा पीढ़ी की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। आयुर्वेद को सिर्फ़ भारत की विरासत के तौर पर ही नहीं, बल्कि शोध, नवाचार, उद्यमिता और स्वास्थ्य सेवा के ऐसे क्षेत्र के तौर पर पेश किया जाना चाहिए, जो भविष्य की चुनौतियों को हल करने में योगदान दे सकता हो।

आज भारत ज्ञान, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के एक अनोखे संगम पर खड़ा है। हमारे पास इन ताकतों को एक साथ लाने का अवसर है, ताकि स्वास्थ्य सेवा का ऐसा तरीका विकसित किया जा सके, जो इलाज के साथ-साथ बीमारी से बचाव, बीमारी के प्रबंधन के साथ-साथ आरोग्यता और विकास के साथ-साथ स्थायित्व को भी महत्व देता हो।

आयुर्वेद का भविष्य अंततः इस बात से निर्धारित होगा कि हम इस पर कितना अच्छा शोध करते हैं, सबूतों के आधार पर इसे कितना मजबूत बनाते हैं, इसकी गुणवता को कैसे सुनिश्चित करते हैं और इसके फायदों को लोगों तक कैसे पहुँचाते हैं।

इसलिए, “स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद” सिर्फ़ एक थीम नहीं है। यह सेहत की संस्कृति बनाने का एक आह्वान है — ऐसी संस्कृति, जो लोगों को सशक्त बनाती हो, समुदायों को मजबूत करती हो और उस पर्यावरण का सम्मान करती हो, जिसे हम सभी साझा करते हैं।

जब हम 11वाँ आयुर्वेद दिवस मना रहे हैं, तो आइए एक स्वास्थ्य, एक भविष्य के विज़न को आगे बढ़ाएँ और एक स्वस्थ भारत और स्वस्थ दुनिया की दिशा में मिलकर काम करें।

एक स्वास्थ्य, एक भविष्य। सभी के लिए सेहतमंद भविष्य।

…………………….. 

HBCHRC Punjab में पहला सफल स्टेम सेल ट्रांसप्लांट, 17 साल की बहन ने भाई को दिया जीवनदान

न्यू चंडीगढ़ के HBCH&RC में पहला सफल एलोजेनिक स्टेम सेल ट्रांसप्लांट हुआ। 17 वर्षीय बहन ने ल्यूकेमिया से जूझ रहे 10 वर्षीय भाई को स्टेम सेल दान कर नया जीवन दिया।

न्यू चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र (HBCH&RC), न्यू चंडीगढ़ ने एलोजेनिक बोन मैरो ट्रांसप्लांट के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अस्पताल में पहली बार सफलतापूर्वक एलोजेनिक स्टेम सेल ट्रांसप्लांट किया गया। इस उपचार के जरिए 17 वर्षीय बहन ने ब्लड कैंसर से जूझ रहे अपने 10 वर्षीय भाई को अपने स्टेम सेल दान कर नया जीवन दिया।

पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर निवासी 10 वर्षीय बच्चे को इस वर्ष अप्रैल में एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया (ALL) के दूसरे रिलैप्स का पता चला था। बीमारी दोबारा लौटने के बाद परिवार बेहतर उपचार के लिए पंजाब पहुंचा और बच्चे को परमाणु ऊर्जा विभाग, भारत सरकार के तहत टाटा मेमोरियल सेंटर की इकाई HBCH&RC में भर्ती कराया गया।

अस्पताल में बच्चे को गहन कीमोथेरेपी दी गई, जिसके बाद उसकी स्थिति में सुधार हुआ। हालांकि, बीमारी के दोबारा लौटने के अधिक जोखिम को देखते हुए डॉक्टरों ने एलोजेनिक स्टेम सेल ट्रांसप्लांट को आगे के उपचार के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प माना।

एलोजेनिक बोन मैरो ट्रांसप्लांट में मरीज की बीमार रक्त-निर्माण प्रणाली को किसी अन्य व्यक्ति से प्राप्त स्वस्थ रक्त-निर्माण स्टेम सेल से बदला जाता है। इस मामले में विस्तृत डोनर मूल्यांकन के बाद बच्चे की 17 वर्षीय बड़ी बहन को सबसे उपयुक्त डोनर पाया गया। उसके स्टेम सेल एकत्र कर बच्चे को दिए गए।

बाल हेमेटोलॉिस्ट-ऑन्कोलॉजिस्ट और BMT चिकित्सक डॉ. जसमीत सिद्धू ने बताया कि प्रत्यारोपित स्टेम सेल सफलतापूर्वक मरीज के शरीर में स्थापित हो गए। ट्रांसप्लांट के बाद बच्चे की लगातार निगरानी और आवश्यक देखभाल की गई। अब बच्चा स्वस्थ है और मंगलवार को अच्छी सेहत में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। डॉक्टरों के मुताबिक, ट्रांसप्लांट के बाद भी उसकी नियमित निगरानी जारी रहेगी।

मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. सीमा गुलिया ने बताया कि बोन मैरो ट्रांसप्लांट एक जटिल प्रक्रिया है, जिसमें सावधानीपूर्वक योजना, सही डोनर चयन, संक्रमण से बचाव और गहन सहायक देखभाल की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि अस्पताल में समर्पित बाल चिकित्सा ऑन्कोलॉजी इकाई के साथ आधुनिक कैंसर उपचार की सुविधाएं उपलब्ध हैं।

अस्पताल में वयस्क और बाल चिकित्सा मरीजों के लिए मोनोक्लोनल एंटीबॉडी, CAR-T सेल थेरेपी, इम्यूनोथेरेपी और लक्षित उपचार जैसी आधुनिक उपचार सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। अस्पताल के मुताबिक, यहां उपचार अत्यधिक सब्सिडी वाली दरों पर उपलब्ध कराया जाता है।

HBCH&RC पंजाब के निदेशक डॉ. आशीष गुलिया ने इस उपलब्धि को चिकित्सीय सफलता के साथ-साथ एक भावनात्मक मानवीय क्षण बताया। उन्होंने कहा कि भाई-बहन की यह कहानी यह दर्शाती है कि आधुनिक कैंसर उपचार गंभीर बीमारी से जूझ रहे परिवारों के लिए नई उम्मीद पैदा कर सकता है।

उन्होंने बताया कि अस्पताल की मेडिकल सोशल वर्क टीम ने सरकारी योजनाओं और CSR सहायता के माध्यम से परिवार को 14 लाख रुपये से अधिक की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई। इसके अलावा उपचार के दौरान परिवार के लिए धर्मशाला में रहने की व्यवस्था भी की गई।

डॉ. आशीष गुलिया के अनुसार, 2024 में BMT कार्यक्रम शुरू होने के बाद से HBCH&RC में अब तक 15 स्टेम सेल ट्रांसप्लांट और तीन CAR-T सेल थेरेपी इंफ्यूजन किए जा चुके हैं। अस्पताल का कहना है कि उसका उद्देश्य उत्तर भारत में कठिन रक्त कैंसर से जूझ रहे मरीजों को किफायती लागत पर आधुनिक और विश्वस्तरीय कैंसर उपचार उपलब्ध कराना है।

विकसित भारत युवा नेतृत्व संवाद 2027: 100+ शाखाओं में हजारों युवाओं ने लिया क्विज में हिस्सा

विकसित भारत युवा नेतृत्व संवाद 2027 के तहत आईसीएस कोचिंग सेंटर की 100 से अधिक शाखाओं में हजारों युवाओं ने क्विज में उत्साहपूर्वक भाग लिया।

सोनीपत / सत्ता संदेश

विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आयोजित विकसित भारत युवा नेतृत्व संवाद (VBYLD) 2027 के तहत आईसीएस कोचिंग सेंटर की 100 से अधिक शाखाओं में क्विज का आयोजन किया गया। इस दौरान हजारों युवा विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपनी जागरूकता, ज्ञान और राष्ट्र निर्माण के प्रति रुचि का परिचय दिया।

कार्यक्रम के दौरान मायभारत, युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से कार्यक्रम सहायक मोहित राठी तथा आईसीएस कोचिंग सेंटर के निदेशक परिमल कुमार ने विद्यार्थियों को विकसित भारत युवा नेतृत्व संवाद 2027 के उद्देश्य, महत्व और इसके विभिन्न चरणों की जानकारी दी।

विद्यार्थियों को क्विज में पंजीकरण और सहभागिता की प्रक्रिया के बारे में चरणबद्ध तरीके से मार्गदर्शन दिया गया। साथ ही उन्हें इस राष्ट्रीय युवा पहल से अधिक से अधिक संख्या में जुड़ने और अपनी प्रतिभा एवं विचारों को सामने रखने के लिए प्रेरित किया गया।

विकसित भारत युवा नेतृत्व संवाद का उद्देश्य देश के युवाओं को विकसित भारत की परिकल्पना से जोड़ना और उन्हें राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित करना है। इस पहल के माध्यम से युवाओं को अपने विचार, ज्ञान, रचनात्मक सोच और नेतृत्व क्षमता को प्रदर्शित करने का अवसर मिल रहा है।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों को बताया गया कि क्विज इस संवाद की यात्रा का एक महत्वपूर्ण प्रारंभिक चरण है। इसके माध्यम से युवा राष्ट्रीय और विकासात्मक विषयों को लेकर अपनी समझ को मजबूत कर सकते हैं तथा आगे की गतिविधियों में भागीदारी के लिए स्वयं को तैयार कर सकते हैं।

आईसीएस कोचिंग सेंटर की 100 से अधिक शाखाओं में एक साथ हजारों युवाओं की भागीदारी को युवाओं के बीच विकसित भारत के संकल्प को लेकर बढ़ती जागरूकता और उत्साह के रूप में देखा गया। इस तरह की पहल युवाओं में नेतृत्व क्षमता, रचनात्मक सोच, जागरूकता और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

इस अवसर पर कपिल कुमार, सोनीपत भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

टांडा में दिनदहाड़े युवक की धारदार हथियारों से हत्या, इलाके में दहशत

टांडा उड़मुड़ की मेन मार्केट में सीमेंट दुकान चलाने वाले गुलजार सिंह की अज्ञात हमलावरों ने धारदार हथियारों से हत्या कर दी। पुलिस ने जांच शुरू कर आरोपियों की तलाश तेज कर दी है

टांडा/होशियारपुर | सत्ता संदेश

रिपोर्ट : जसप्रीत सिंह सैनी

होशियारपुर जिले के टांडा उड़मुड़ में दिनदहाड़े एक युवक की धारदार हथियारों से हत्या किए जाने का मामला सामने आया है। घटना टांडा पुलिस स्टेशन के अंतर्गत लाहौरिया मोहल्ले में हुई, जहां मेन मार्केट में सीमेंट की दुकान चलाने वाले युवक पर कुछ अज्ञात हमलावरों ने हमला कर दिया। वारदात के बाद इलाके में दहशत का माहौल है।

जानकारी के अनुसार, टांडा उड़मुड़ की मेन मार्केट में दिन के समय कुछ अज्ञात लोग उक्त दुकान पर पहुंचे और वहां मौजूद युवक पर धारदार हथियारों से हमला कर दिया। हमले में युवक गंभीर रूप से घायल हो गया और उसकी मौत हो गई।

मृतक की पहचान गुलजार सिंह पुत्र प्रलाद सिंह, निवासी बस्सी लाहौरियन मोहल्ला, उड़मुड़ के रूप में हुई है।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस द्वारा आसपास के क्षेत्र में हमलावरों की तलाश की जा रही है।

टांडा के डीएसपी दविंदर सिंह बाजवा ने बताया कि कुछ अज्ञात व्यक्ति दुकान पर आए थे और युवक की धारदार हथियारों से हत्या कर दी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लिया गया। उन्होंने कहा कि आरोपियों की तलाश की जा रही है और उन्हें जल्द गिरफ्तार कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में भय और रोष का माहौल है। लोगों का कहना है कि टांडा उड़मुड़ और आसपास के इलाकों में पिछले कुछ समय से चोरी, लूट और अन्य आपराधिक घटनाओं को लेकर चिंता बनी हुई है। दिनदहाड़े बाजार में हुई इस हत्या ने लोगों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है और हत्या के पीछे के कारणों तथा वारदात में शामिल आरोपियों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।