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हमारी आंगनवाड़ी, हमारी ज़िम्मेदारी: समुदाय की भागीदारी से मजबूत होगा बच्चों का भविष्य

अन्नपूर्णा देवी, केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री

2047 के भारत का निर्माण वे बच्चे करेंगे जिन्होंने अभी स्कूल में कदम भी नहीं रखा है। एक स्वस्थ, आत्मविश्वासी और सक्षम वयस्क बनने की उनकी यह यात्रा बहुत पहले, विशेष रूप से जीवन के पहले 1,000 दिनों में ही शुरू हो जाती है। लाखों भारतीय बच्चों और उनकी माताओं के लिए इस यात्रा का सबसे बड़ा संबल उनके पड़ोस की एक जानी-पहचानी संस्था है: आंगनवाड़ी।

कक्षा में प्रवेश करने से बहुत पहले ही बच्चों का आंगनवाड़ी में वजन और कद नापा जाता है, उन्हें गर्म पौष्टिक भोजन मिलता है और वे घर के बाहर पहली बार बाल-गीत सुनते हैं। यहीं गर्भवती माता-पिता को परामर्श भी दिया जाता है। आज 14 लाख आंगनवाड़ी केंद्र नागरिक और सरकार के बीच पहले संपर्क बिंदु के रूप में काम कर रहे हैं, जो 8.9 करोड़ से अधिक बच्चों, महिलाओं और किशोरियों तक अपनी पहुंच बनाए हुए हैं। यहां कार्यरत 25.2 लाख आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं उसी समाज से आती हैं जिसकी वे सेवा करती हैं। आंगनवाड़ी हमेशा से स्थानीय समुदाय का ही एक हिस्सा रही है।

मार्च 2018 में जब प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने ‘पोषण अभियान’ की शुरुआत की, तब यह जानी-पहचानी संस्था एक राष्ट्रीय आंदोलन की आधारशिला बन गई। 9 सितंबर 2026 को ‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी ज़िम्मेदारी’ थीम के साथ 9वें ‘राष्ट्रीय पोषण माह’ का शुभारंभ हुआ। गुणवत्तापूर्ण सेवाएं प्रदान करने की ज़िम्मेदारी पूरी तरह सरकार की है और यह प्रतिबद्धता अडिग है, लेकिन कोई भी आंगनवाड़ी केंद्र सही मायने में तभी सशक्त बनता है जब समुदाय उसे अपना माने। एक ‘विकसित भारत’ का निर्माण केवल ‘सबके प्रयास’ से ही संभव है; पोषण को केवल एक सरकारी सेवा के रूप में नहीं देखा जा सकता।

लाभार्थी से भागीदार तक

समुदाय का स्वामित्व अक्सर केवल एक अपील बनकर रह जाता था, लेकिन इस वर्ष इसे एक संस्थागत रूप दिया गया है। आंगनवाड़ी प्रबंधन समितियां माता-पिता, पंचायत प्रतिनिधियों और स्वयं सहायता समूहों को केंद्र से जोड़ती हैं ताकि हर पात्र बच्चे तक लाभ पहुंच सके। सोशल ऑडिट के माध्यम से समुदाय सेवाओं की समीक्षा करता है, अधिकारों की पुष्टि करता है और औपचारिक रूप से अपने निष्कर्ष दर्ज करता है। इस तरह जवाबदेही उन परिवारों की आंतरिक निगरानी में बदल जाती है जो इन सेवाओं का लाभ ले रहे हैं।

इस पूरी प्रक्रिया के केंद्र में माताएं हैं। ‘पूरक पोषण कार्यक्रम’ (SNP) का मेनू बोर्ड गर्म पके भोजन और ‘टेक-होम राशन’ (घर ले जाने वाले राशन) के दैनिक विवरण को प्रदर्शित करता है। जब एक मां को पता होता है कि उसके बच्चे का क्या अधिकार है, तो पारदर्शिता रोज़मर्रा की आदत बन जाती है। इस प्रकार समुदाय गुणवत्ता सुनिश्चित करने में एक जागरूक भागीदार बन जाता है।

पोषण माह 2026 के दौरान इन समितियों, सोशल ऑडिट और मेनू बोर्ड को सक्रिय किया जा रहा है; साथ ही ‘तिथि भोज’, चखने के सत्र और व्यंजन विधियों के प्रदर्शन जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं।

मेनू बोर्ड से परे

पहला पहलू स्वयं भोजन है। ‘सुपोषित भारत’ के लिए संतुलित आहार आवश्यक है: अनाज और श्रीअन्न (मिलेट्स), दालें, मेवे और बीज, दूध और दुग्ध उत्पाद, अंडे, मौसमी फल और हरी सब्ज़ियां। जुलाई में जारी ‘पूरक पोषण कार्यक्रम के लिए व्यापक दिशानिर्देश, 2026’ में गर्म पके भोजन को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत सूक्ष्म पोषक तत्वों के मानकों को सुदृढ़ किया गया है।

दूसरा पहलू प्रारंभिक बाल्यावस्था की शिक्षा है। बच्चा क्या खाता है और क्या सीखता है, ये दोनों आपस में गहरे जुड़े हैं। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता बच्चे के शुरुआती तीन वर्षों में 34 विकासात्मक पड़ावों पर नज़र रखती हैं। ‘नवचेतना’ और ‘आधारशिला’ पाठ्यक्रम पोषण और देखभाल को स्कूल जाने की तैयारी से जोड़ते हैं।

तीसरा पहलू बच्चे के जन्म से पहले ही शुरू हो जाता है। गर्भावस्था के दौरान मां का पोषण ही बच्चे के जीवन की शुरुआत तय करता है। यह पोषण माह ‘प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना’ के दस वर्ष पूरे होने का भी प्रतीक है, जो प्रधानमंत्री के इस विश्वास को दर्शाता है कि किसी भी महिला को अपनी आजीविका और स्वास्थ्य के बीच किसी एक को चुनने के लिए विवश नहीं होना चाहिए। एक दशक में 4.65 करोड़ लाभार्थियों को उनके खातों में सीधे 21,511 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। ‘मिशन शक्ति’ के तहत इसे और मजबूत करते हुए दूसरी संतान कन्या होने पर अतिरिक्त लाभ प्रदान किया जाता है। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 स्पष्ट करता है कि ऐसी वित्तीय सहायता तभी पूरी तरह प्रभावी होती है जब उसके साथ उचित परामर्श भी मिले, जिससे परिवार के भीतर समझदारी से निर्णय लिए जा सकें। राजस्थान के ‘कैश प्लस’ मॉडल की समीक्षा—जिसमें इस वित्तीय सहायता को निरंतर व्यवहार परिवर्तन संचार से जोड़ा गया था—दर्शाती है कि इस लाभ को भोजन पर खर्च करने वाली महिलाओं का अनुपात 30 प्रतिशत से बढ़कर 89 प्रतिशत हो गया। साथ ही, जब पतियों और परिवारों को इस संवाद में शामिल किया गया तो मातृ पोषण से जुड़े भ्रम और भ्रांतियां भी दूर हुईं। यह साझेदारी आंगनवाड़ियों के इर्द-गिर्द इसलिए पनपती है क्योंकि मां का पोषण कभी भी केवल उसकी अकेले की ज़िम्मेदारी नहीं रहा है।

केंद्र में मौजूद नारी शक्ति का सम्मान

इस पूरे तंत्र के केंद्र में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता खड़ी हैं। सामुदायिक स्वामित्व का अर्थ यह कतई नहीं है कि पोषण और प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल का सारा भार उन्हीं पर डाल दिया जाए। इसका वास्तविक अर्थ उनका सम्मान करना, उनका सहयोग करना और उन्हें सशक्त बनाना है। उनका अनुभव और उन पर बना विश्वास अमूल्य है।

इस सितंबर, मैं प्रत्येक नागरिक से आग्रह करती हूं कि वे अपने क्षेत्र के कम से कम एक आंगनवाड़ी केंद्र का दौरा अवश्य करें। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता से बात करें, मेनू बोर्ड देखें और पूछें कि आप किस प्रकार सहयोग कर सकते हैं। पिताओं, दादा-दादी/नाना-नानी, पंचायतों और स्वयं सहायता समूहों—सभी की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है।

इस सितंबर हमारी आंगनवाड़ियों में जिन बच्चों का वजन नापा जा रहा है, वे उस समय अपने जीवन के तीसरे दशक (20s) में होंगे जब भारत अपनी आज़ादी के सौ वर्ष पूरे करेगा। उस वर्ष वे जिस स्वास्थ्य और आत्मविश्वास के साथ खड़े होंगे, उसे आज गढ़ा जा रहा है। जब प्रत्येक समुदाय अपनी आंगनवाड़ी की ज़िम्मेदारी लेगा, तभी भारत अपने हर बच्चे के भविष्य की ज़िम्मेदारी सुनिश्चित कर सकेगा।

PEC में स्वर्गीय सुधीर गुप्ता की स्मृति में छात्रा की इंजीनियरिंग फीस प्रायोजित करने के लिए MoU

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी), चंडीगढ़ ने PEC के पूर्व छात्र एवं 1990 बैच के सिल्वर मेडलिस्ट स्वर्गीय श्री सुधीर गुप्ता के परिवार के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। इस पहल का उद्देश्य PEC में अध्ययनरत एक छात्रा की इंजीनियरिंग शिक्षा को आर्थिक सहयोग प्रदान करना है।

समझौते के तहत गुप्ता परिवार ने PEC की एक योग्य छात्रा की इंजीनियरिंग शिक्षा की फीस प्रायोजित करने की प्रतिबद्धता जताई है। इस पहल के माध्यम से पेशेवर इंजीनियरिंग शिक्षा हासिल कर रही छात्रा को आर्थिक सहायता मिलेगी। साथ ही, यह स्वर्गीय श्री सुधीर गुप्ता के अपने अल्मा मेटर के साथ जुड़ाव और उनके मूल्यों की स्मृति को एक स्थायी सामाजिक पहल के रूप में आगे बढ़ाने का प्रयास है।

MoU पर PEC के निदेशक (एड-इंटरिम) डॉ. राजेश कुमार भाटिया तथा डीन, एलुमनाई रिलेशंस डॉ. राजेश कंडा की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए। गुप्ता परिवार की ओर से स्वर्गीय सुधीर गुप्ता के पिता दया किशन गुप्ता, पत्नी रश्मि गुप्ता, बहन सुनीता गुप्ता और पुत्र आरुष गुप्ता उपस्थित रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए PEC के निदेशक (एड-इंटरिम) डॉ. राजेश कुमार भाटिया ने स्वर्गीय श्री सुधीर गुप्ता के जीवन, मूल्यों और उनके योगदान को याद किया। उन्होंने युवा पीढ़ी से ऐसे अनुकरणीय व्यक्तित्वों से प्रेरणा लेने का आह्वान किया, जिन्होंने ईमानदारी और नैतिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखी।

डॉ. भाटिया ने कहा कि स्वर्गीय सुधीर गुप्ता के योगदान और बलिदान को उचित सम्मान और पहचान मिलनी चाहिए। उन्होंने उनके जीवन मूल्यों को आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बताया।

MoU हस्ताक्षर समारोह के साथ स्वर्गीय सुधीर गुप्ता की स्मृति में “Energy Security and Strengthening India’s Green Pathways” विषय पर एक स्मृति व्याख्यान भी आयोजित किया गया। यह व्याख्यान भारत सरकार के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (PNGRB) में इंजीनियरिंग कंसल्टेंट एस. के. सिन्हा ने दिया। व्याख्यान में ऊर्जा सुरक्षा, स्थिरता और भारत के हरित ऊर्जा की ओर बढ़ते संक्रमण से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की गई।

कार्यक्रम का समन्वय PEC के पूर्व छात्र, स्वर्गीय श्री सुधीर गुप्ता के सहपाठी एवं करीबी मित्र और Orange Business में सीनियर सॉल्यूशन आर्किटेक्ट श्री दीपक जैन ने किया। उन्होंने कार्यक्रम के आयोजन और इसके सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

PEC ने गुप्ता परिवार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि स्वर्गीय श्री सुधीर गुप्ता की स्मृति को एक ऐसी स्थायी पहल में बदलना, जो एक योग्य छात्रा को इंजीनियरिंग शिक्षा के लिए आर्थिक सहयोग और सशक्तिकरण प्रदान करे, उनके जीवन मूल्यों को सम्मान देने का सार्थक प्रयास है।

PGIMER चंडीगढ़ के ‘प्रोजेक्ट सारथी’ को राष्ट्रीय सम्मान, मरीजों की मदद और सुरक्षा में उत्कृष्ट पहल के लिए मिला अवॉर्ड

PGIMER चंडीगढ़ के प्रोजेक्ट सारथी को राष्ट्रीय रोगी सुरक्षा सम्मेलन 2026 में Outstanding Best Practice और Special Recognition Award से सम्मानित किया गया। जानिए कैसे 2,700 से अधिक छात्र मरीजों की मदद कर चुके हैं।

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER), चंडीगढ़ को मरीजों के मार्गदर्शन, नेविगेशन और बेहतर अस्पताल अनुभव के लिए संचालित ‘प्रोजेक्ट सारथी’ के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। इस पहल को राष्ट्रीय रोगी सुरक्षा सम्मेलन (NPSC) 2026 में “Outstanding Best Practice” के रूप में मान्यता मिली है।

नागपुर में 11 और 12 सितंबर 2026 को आयोजित राष्ट्रीय रोगी सुरक्षा सम्मेलन का आयोजन AIIMS नागपुर ने राष्ट्रीय रोगी सुरक्षा सचिवालय, स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से किया। सम्मेलन में PGIMER को “Best Practices in Patient Safety 2026” के लिए विशेष सम्मान पुरस्कार (Special Recognition Award) भी प्रदान किया गया।

PGIMER के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रोजेक्ट सारथी को मिला राष्ट्रीय सम्मान संस्थान के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि सारथी यह दिखाता है कि सहानुभूति, स्वयंसेवा और जिम्मेदार नागरिकता के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ और मानवीय बनाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीजों की सेवा करने वाले संस्थान में किसी मरीज का मार्गदर्शन करना, उसकी बात सुनना और उसकी सहायता करना उसके अस्पताल अनुभव में बड़ा सकारात्मक बदलाव ला सकता है। PGIMER इस मॉडल को और मजबूत करने तथा व्यापक स्तर पर लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है।

PGIMER के उप निदेशक (प्रशासन) श्री पंकज राय ने कहा कि सारथी ने यह साबित किया है कि एक सुव्यवस्थित स्वयंसेवी कार्यक्रम मरीजों के अनुभव के साथ-साथ अस्पताल की कार्यक्षमता पर भी सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। स्वयंसेवक मरीजों को अस्पताल की व्यवस्था समझने, सही स्थान तक पहुंचने और गैर-चिकित्सकीय समस्याओं के समाधान में सहायता प्रदान करते हैं।

उन्होंने कहा कि सारथी स्वयंसेवक मरीजों की सुचारू आवाजाही और अस्पताल की सेवाओं के बेहतर उपयोग में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और राष्ट्रीय सम्मान PGIMER के छात्रों तथा पूरी टीम की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

राष्ट्रीय मंच पर सुश्री सरयू डी. मद्रा, कंसल्टेंट (IEC/मीडिया), ROTTO North एवं सह-जनसंपर्क अधिकारी (PRO), PGIMER चंडीगढ़ ने संस्थान का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने सम्मेलन में प्रोजेक्ट सारथी की कार्यप्रणाली, इसके नवाचारपूर्ण दृष्टिकोण, कार्यान्वयन ढांचे, प्रभाव और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में इसे लागू किए जाने की संभावनाओं पर प्रस्तुति दी। उन्होंने PGIMER की ओर से सम्मान एवं पुरस्कार भी प्राप्त किया।

मई 2024 में शुरू हुआ था प्रोजेक्ट सारथी

प्रोजेक्ट सारथी का पूरा नाम Students’ Alliance for Responsible Action to Transform Healthcare Institutes है। इसके तहत प्रशिक्षित छात्र स्वयंसेवकों को मरीजों और उनके परिजनों की सहायता के लिए जोड़ा जाता है। खासतौर पर ऐसे मरीजों की मदद की जाती है जो अस्पताल की जटिल व्यवस्था से परिचित नहीं होते।

सारथी स्वयंसेवक मरीजों को OPD में मार्गदर्शन, पंजीकरण, विभिन्न सेवाओं के स्थान, कतारों, जांच, रिपोर्ट तथा अन्य गैर-चिकित्सकीय जरूरतों से संबंधित सहायता उपलब्ध कराते हैं। इसका उद्देश्य मरीज को सही समय पर सही स्थान और सही सेवा तक पहुंचने में मदद करना है।

2,700 से अधिक छात्रों ने दी 1.6 लाख घंटे से ज्यादा सेवा

PGIMER में हर साल 30 लाख से अधिक OPD विजिट होती हैं। ऐसे में प्रोजेक्ट सारथी बड़े पैमाने पर मरीज सहायता मॉडल के रूप में विकसित हुआ है। अब तक 2,700 से अधिक छात्र सारथी स्वयंसेवक के रूप में इस पहल से जुड़ चुके हैं और उन्होंने 1.6 लाख घंटे से अधिक सेवा प्रदान की है।

इस पहल के माध्यम से बड़ी संख्या में मरीजों और उनके परिजनों को अस्पताल की सेवाओं को समझने और उनका सही तरीके से उपयोग करने में मदद मिली है। साथ ही OPD क्षेत्रों में अनावश्यक भ्रम और प्रतीक्षा को कम करने में भी यह मॉडल उपयोगी साबित हुआ है।

NEP 2020 की भावना से भी जुड़ा है सारथी मॉडल

प्रोजेक्ट सारथी को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की भावना के अनुरूप भी माना जा रहा है, जिसमें छात्रों के बीच अनुभवात्मक शिक्षा, सामुदायिक सहभागिता और सामाजिक जिम्मेदारी को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। PGIMER में यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि स्वयंसेवी गतिविधियों के कारण छात्रों की शैक्षणिक जिम्मेदारियां प्रभावित न हों।

प्रोजेक्ट सारथी ने यह संदेश भी मजबूत किया है कि रोगी सुरक्षा केवल चिकित्सकीय उपचार तक सीमित नहीं है। स्पष्ट संवाद, अस्पताल में आसान पहुंच, उचित मार्गदर्शन और संवेदनशील एवं मानवीय मरीज अनुभव भी सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

वरिष्ठ पत्रकार गुरदेव मुल्लांपुरी की पत्नी कमलेश कौर का निधन, प्रो. मोहन सिंह मेमोरियल फाउंडेशन ने जताया गहरा दुख

लुधियाना / सत्ता संदेश

प्रो. मोहन सिंह मेमोरियल फाउंडेशन ने वरिष्ठ पत्रकार गुरदेव मुल्लांपुरी की पत्नी सरदारनी कमलेश कौर के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। सरदारनी कमलेश कौर पिछले काफी समय से बीमारी से जूझ रही थीं और बीमारी के बाद उनका निधन हो गया।

उनके निधन की खबर से पत्रकारिता और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों में शोक की लहर है। प्रो. मोहन सिंह मेमोरियल फाउंडेशन के अध्यक्ष राजीव लवली, चेयरमैन गुरनाम सिंह धालीवाल, संरक्षक प्रगट सिंह ग्रेवाल, डॉ. गुरभजन सिंह गिल, निर्मल जौड़ा, मेला कमेटी के चेयरमैन पृथ्वीपाल सिंह बटाला, अमरिंदर सिंह जस्सोवाल, कृष्ण कुमार बावा तथा मलकीयत सिंह दाखा ने शोक व्यक्त करते हुए परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट कीं।

फाउंडेशन के अध्यक्ष राजीव लवली ने कहा कि गुरदेव सिंह मुल्लांपुरी शुरू से ही प्रो. मोहन सिंह मेमोरियल फाउंडेशन के साथ जुड़े रहे हैं। स्वर्गीय जसदेव सिंह जस्सोवाल के साथ उनके घनिष्ठ संबंध रहे हैं और इसी जुड़ाव के चलते वह फाउंडेशन के आयोजनों तथा मेले के कार्यक्रमों में हमेशा प्रमुख सहयोगी के रूप में सक्रिय रहे।

डॉ. गुरभजन सिंह गिल, गुरनाम सिंह धालीवाल, प्रगट सिंह ग्रेवाल, पृथ्वीपाल सिंह बटाला और निर्मल जौड़ा ने कहा कि गुरदेव मुल्लांपुरी का प्रो. मोहन सिंह मेमोरियल फाउंडेशन के साथ लंबे समय से गहरा संबंध रहा है। उन्होंने कहा कि परिवार के लिए यह अपूरणीय क्षति है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है। उन्होंने परमात्मा से दिवंगत आत्मा को अपने चरणों में स्थान देने और शोक संतप्त परिवार को यह दुख सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।

अमरिंदर सिंह जस्सोवाल, कृष्ण कुमार बावा और मलकीयत सिंह दाखा ने कहा कि गुरदेव मुल्लांपुरी को पंजाबी पत्रकारिता में एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में जाना जाता है। उन्होंने कहा कि फाउंडेशन इस दुख की घड़ी में मुल्लांपुरी परिवार के साथ पूरी मजबूती से खड़ा है और परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता है।

Ludhiana : यारों की याद में रक्तदान शिविर, 725 यूनिट रक्त एकत्र

लुधियाना / सत्ता संदेश

यारों की याद को जनसेवा से जोड़ते हुए स्थानीय मैरीलैंड पैलेस, दुगरी रोड में विशेष रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में विभिन्न ब्लड बैंकों और अस्पतालों की टीमों ने पहुंचकर रक्तदाताओं से रक्त एकत्र किया। इस दौरान सैकड़ों लोगों ने रक्तदान कर जरूरतमंद मरीजों की जान बचाने में अपना योगदान दिया।

युवा नेता पप्पल कपूर ने बताया कि यह रक्तदान शिविर हर वर्ष उनके दिवंगत मित्रों रवि ख्वाजके, कमल सरपंच, करण गोगना और जसप्रीत सिंह की मधुर स्मृति को समर्पित किया जाता है। उन्होंने कहा कि अपने प्रिय मित्रों की याद में आयोजित यह पहल समाजसेवा का माध्यम बन चुकी है और हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग इसमें शामिल होकर रक्तदान करते हैं।

उन्होंने कहा कि रक्तदान किसी जरूरतमंद व्यक्ति के लिए जीवनदान साबित हो सकता है। शिविर में लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए रक्तदान किया।

आयोजकों के अनुसार, इस रक्तदान शिविर के दौरान विभिन्न अस्पतालों और ब्लड बैंकों की टीमों द्वारा कुल 725 यूनिट रक्त एकत्र किया गया। इसमें दीप अस्पताल की टीम ने 89 यूनिट, दीपक एवं रणविजय अस्पताल ने 222 यूनिट, इंडस अस्पताल ने 163 यूनिट, गुरु नानक अस्पताल ने 138 यूनिट, कृष्णा अस्पताल ने 61 यूनिट और डीएमसी अस्पताल ने 52 यूनिट रक्त एकत्र किया।

पप्पल कपूर ने रक्तदान शिविर को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी अस्पतालों, ब्लड बैंकों, समाजसेवी संस्थाओं, रक्तदाताओं और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर मनी ग्रेवाल, रजत गोगना, दिलजीत सरपंच, पंकज गोगना, गोपी साहिबाना, मिट्ठू मंगट, सुखदीप सीड़ा, प्रीति मल्कपुर, बब्बू नारंग, मोहनी गुरम, कालू मंगट, हरदीप मुंडियां, जोड़ा मुंडियां, अशोक पप्पी, उपकार घुम्मण, कमलजीत कड़वल, प्रभजोत धालीवाल, विक्रम बाजवा, मनप्रीत इयाली, हरप्रीत सिमिक और बलजिंदर बंटी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

Sports Homeland Punjab 2026: MLA छीना ने खिलाड़ियों का बढ़ाया हौसला, ब्लॉक गेम्स में कड़ा मुकाबला

स्पोर्ट्स होमलैंड पंजाब-2026 के तहत लुधियाना के 4 ब्लॉकों में खेल मुकाबले हुए। MLA राजिंदरपाल कौर छीना ने गुरु नानक स्टेडियम पहुंचकर खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाया।

लुधियाना / सत्ता संदेश

डायरेक्टर स्पोर्ट्स पंजाब के आदेश और जिला प्रशासन की देखरेख में ‘स्पोर्ट्स होमलैंड पंजाब-2026’ के तहत लुधियाना जिले के विभिन्न ब्लॉकों में ब्लॉक स्तरीय खेल मुकाबले करवाए जा रहे हैं। तीसरे चरण के तहत ब्लॉक म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन, खन्ना, लुधियाना-2 और रायकोट में खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया।

ब्लॉक म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के तहत गुरु नानक स्टेडियम, लुधियाना में आयोजित खेल मुकाबलों में लुधियाना साउथ की विधायक राजिंदरपाल कौर छीना ने विशेष रूप से हिस्सा लिया। उन्होंने प्रतियोगिताओं में भाग ले रहे खिलाड़ियों से मुलाकात कर उनका हौसला बढ़ाया और उन्हें पूरे जोश व उत्साह के साथ खेलों में हिस्सा लेने के लिए प्रेरित किया।

गुरु नानक स्टेडियम में एथलेटिक्स के लड़कों के अंडर-17 लॉन्ग जंप मुकाबले में यशमित शर्मा ने पहला, इशांत ने दूसरा और अंजोर सिंह ने तीसरा स्थान हासिल किया। अंडर-21 वर्ग की 100 मीटर दौड़ में नवीन कुमार पहले, सुखजोत सिंह दूसरे और सरवन तीसरे स्थान पर रहे। 200 मीटर में सिमरतवीर सिंह ने पहला, भवनप्रीत सिंह ने दूसरा और ऋषभ ने तीसरा स्थान हासिल किया।

800 मीटर में सक्षम सिंह पहले, उत्कर्ष दूसरे और मोनू तीसरे स्थान पर रहे, जबकि 1500 मीटर में इशान लिल ने पहला, मोहन ने दूसरा और सत्यम ने तीसरा स्थान हासिल किया। 5000 मीटर में इशान पहले, सत्यम कुमार दूसरे और मोहन तीसरे स्थान पर रहे। लॉन्ग जंप में गुरदित सिंह ने पहला, केतन ने दूसरा और गुरकरण सिंह ने तीसरा स्थान हासिल किया। शॉट पुट में कुणाल चौधरी पहले, गुरइकबाल सिंह दूसरे और कृष्ण अरोड़ा तीसरे स्थान पर रहे।

21-30 आयु वर्ग की 400 मीटर दौड़ में निपुण नायर ने पहला, भगवान सिंह ने दूसरा और जतिन ने तीसरा स्थान हासिल किया। लड़कियों के अंडर-17 लॉन्ग जंप में सुखलीन कौर बेदी पहले, अनन्या वर्मा दूसरे और छवि तीसरे स्थान पर रहीं। अंडर-21 के 200 मीटर में पहल ने पहला, मंदीप कौर ने दूसरा और रौनकप्रीत कौर ने तीसरा स्थान हासिल किया। 400 मीटर में अमानत सिद्धू पहले, पहल दूसरे और धरती जैन तीसरे स्थान पर रहीं।

फुटबॉल अंडर-14 लड़कों के मुकाबलों में मोती नगर स्पोर्ट्स क्लब ने पहला, GMT काकोवाल ने दूसरा और BVM स्कूल किचलू नगर की टीम ने तीसरा स्थान हासिल किया। वॉलीबॉल स्मैशिंग अंडर-21 लड़कियों में गुरु नानक स्टेडियम की टीम पहले और मल्टीपर्पस हॉल की टीम दूसरे स्थान पर रही। अंडर-17 लड़कों के वॉलीबॉल मुकाबले में SC गवर्नमेंट कॉलेज बॉयज़ ने पहला, गुरु नानक स्टेडियम ने दूसरा और BVM स्कूल ने तीसरा स्थान हासिल किया।

खन्ना ब्लॉक में नरेश चंद्र स्टेडियम में हुए मुकाबलों में लड़कियों के अंडर-21 100 मीटर में जैस्मीन कौर ने पहला, वृति ने दूसरा और प्रभदीप कौर ने तीसरा स्थान हासिल किया। 400 मीटर में कोमलप्रीत कौर पहले, मुस्कानप्रीत कौर दूसरे और खुशी तीसरे स्थान पर रहीं।

लड़कों के अंडर-21 400 मीटर में बरिंदर सिंह ने पहला, सनी कुमार ने दूसरा और अरमान खान ने तीसरा स्थान हासिल किया। 800 मीटर में राजन पहले, गुरजोत सिंह दूसरे और अरमान खान तीसरे स्थान पर रहे। 1500 मीटर में राजन ने पहला, गुरजोत सिंह ने दूसरा और विवेक कुमार ने तीसरा स्थान हासिल किया। लॉन्ग जंप में स्लैश पहले, मनजोत सिंह दूसरे और हरमनजोत सिंह तीसरे स्थान पर रहे। 21-30 आयु वर्ग के 200 मीटर में दिलप्रीत सिंह पहले, जशनदीप सिंह दूसरे और शिवराज सिंह तीसरे स्थान पर रहे।

फुटबॉल अंडर-14 लड़कों में फुटबॉल सेंटर खन्ना ने पहला, गवर्नमेंट हाई स्कूल घुंगराली राजपूता ने दूसरा और दिल्ली पब्लिक स्कूल खन्ना ने तीसरा स्थान हासिल किया। लड़कियों के अंडर-14 फुटबॉल में गवर्नमेंट गर्ल्स स्कूल दहिरू पहले, किशनगढ़ क्लब दूसरे और प्राइमरी स्कूल गोह खन्ना तीसरे स्थान पर रहा। अंडर-21 लड़कों के वॉलीबॉल स्मैशिंग मुकाबले में यूनिक वॉलीबॉल एकेडमी ने पहला, निरोत्तम विद्या मंदिर खन्ना ने दूसरा और ASC साई स्कूल खन्ना ने तीसरा स्थान हासिल किया।

लुधियाना-2 ब्लॉक में मुख्यमंत्री स्पोर्ट्स स्टेडियम, गौंसगढ़ में ग्राम पंचायत गौंसगढ़ के सरपंच जसप्रीत सिंह ने खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाया। इस अवसर पर बलराज सिंह गिल, हरमनप्रीत सिंह, गगनप्रीत सिंह, ब्लॉक कन्वीनर सतविंदर सिंह, ब्लॉक को-कनवीनर सुखपाल कौर और साहिल भी मौजूद रहे।

इस ब्लॉक के अंडर-21 लड़कों की 100 मीटर एथलेटिक्स स्पर्धा में मक्खन सिंह पहले, गुलशन मोरिया दूसरे और सेवक सिंह तीसरे स्थान पर रहे। 400 मीटर में बलजिंदर सिंह ने पहला, गुलशन मोरिया ने दूसरा और जसमीत सिंह ने तीसरा स्थान हासिल किया। लॉन्ग जंप में सुमित कुमार पहले, बलविंदर सिंह चौहान दूसरे और परमिंदर सिंह तीसरे स्थान पर रहे।

फुटबॉल अंडर-14 लड़कों में गौंसगढ़ टीम ने पहला, गांव सीरा ने दूसरा और सतलुज पब्लिक स्कूल ने तीसरा स्थान हासिल किया। लड़कियों के अंडर-14 फुटबॉल मुकाबले में गांव सीरा ने पहला स्थान हासिल किया, जबकि सतलुज पब्लिक स्कूल तीसरे स्थान पर रहा।

रायकोट ब्लॉक के स्पोर्ट्स स्टेडियम में आयोजित दूसरे दिन के मुकाबलों में अंडर-17 लड़कों की 200 मीटर दौड़ में हरमन सिंह ने पहला, करणवीर सिंह ग्रेवाल ने दूसरा और हरसिमर सिंह ने तीसरा स्थान हासिल किया। 800 मीटर में साहिबदीप सिंह पहले, मनकरण सिंह दूसरे और आकाशदीप सिंह तीसरे स्थान पर रहे। 3000 मीटर मुकाबले में खुशदीप सिंह ने पहला और इंद्रजीत सिंह ने दूसरा स्थान हासिल किया।

‘स्पोर्ट्स होमलैंड पंजाब-2026’ के तहत आयोजित इन ब्लॉक स्तरीय मुकाबलों का उद्देश्य खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए मंच उपलब्ध करवाना और युवाओं को खेलों के प्रति प्रोत्साहित करना है।

Ludhiana Teachers Day: MLA ग्रेवाल ने 5 हजार से ज्यादा शिक्षकों को किया सम्मानित

लुधियाना ईस्ट में MLA दलजीत सिंह भोला ग्रेवाल के नेतृत्व में टीचर्स डे समारोह आयोजित हुआ। 200 स्कूलों के 5 हजार से अधिक शिक्षकों ने हिस्सा लिया।

लुधियाना / सत्ता संदेश

लुधियाना ईस्ट विधानसभा क्षेत्र से विधायक दलजीत सिंह भोला ग्रेवाल के नेतृत्व में मल्होत्रा रिजॉर्ट में टीचर्स डे को समर्पित विशेष सम्मान समारोह आयोजित किया गया। समारोह में हल्का पूर्वी के करीब 200 स्कूलों के 5 हजार से अधिक शिक्षकों ने हिस्सा लिया।

समारोह में नगर निगम लुधियाना की मेयर प्रिंसिपल इंदरजीत कौर, विधायक कुलवंत सिंह सिद्धू समेत आम आदमी पार्टी के कई नेता और क्षेत्र के स्कूलों के प्रिंसिपल, अध्यापक व स्टाफ सदस्य मौजूद रहे।

इस दौरान MLA दलजीत सिंह भोला ग्रेवाल ने शिक्षकों को सम्मानित करते हुए कहा कि शिक्षक समाज और देश के निर्माण में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने शिक्षकों को शिक्षा के लिए लगातार सेवा करने वाले दानी बताते हुए कहा कि शिक्षकों द्वारा दिए गए ज्ञान और संस्कारों के कारण ही विद्यार्थी आगे चलकर डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, अधिकारी और विभिन्न क्षेत्रों में बड़े पदों पर पहुंचकर देश और समाज की सेवा करते हैं।

MLA ग्रेवाल ने कहा कि शिक्षकों को सम्मान देने की यह पहल वर्ष 2011 में शुरू की गई थी और भगवान की कृपा से यह सिलसिला आज तक लगातार जारी है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भी शिक्षकों के सम्मान में ऐसे समारोह आयोजित किए जाते रहेंगे।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार शिक्षकों के कौशल और प्रशिक्षण को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी के तहत शिक्षकों को प्रशिक्षण के लिए सिंगापुर जैसे देशों में भेजा जा रहा है, ताकि पंजाब के सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर और बेहतर किया जा सके।

समारोह में मेयर प्रिंसिपल इंदरजीत कौर और विधायक कुलवंत सिंह सिद्धू ने भी MLA दलजीत सिंह भोला ग्रेवाल तथा सभी शिक्षकों को टीचर्स डे की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों से शिक्षकों को सम्मानित करने की यह पहल शिक्षकों का मनोबल बढ़ाने के साथ-साथ समाज में उनके योगदान को पहचान देने वाला सराहनीय कदम है।

इस अवसर पर आप नेता कुलविंदर सिंह ग्रेवाल, राज ग्रेवाल, पार्षद सुखमेल ग्रेवाल, सतनाम ग्रेवाल, धरमिंदर बस्सी, राजू ग्रेवाल, जसविंदर संधू, बाबू राम शर्मा, सुरिंदर मैदान, पार्षद लखविंदर चौधरी, पार्षद जगदीश लाल दिशा, भूषण शर्मा, जगपाल सिंह लाली, गग्गी शर्मा, पार्षद अनुज चौधरी, पार्षद जसप्रीत कौर, सुखवंत सिंह सुखा, बाज सिद्धू, जतिंदर सिंह सोड़ी, पार्षद अश्वनी शर्मा गोभी, पार्षद निधि गुप्ता, पार्षद लवली मनोचा, पार्षद अमरजीत, रमेश पिंका, रविंदर राजू, रोमी वर्मा, अमर सिंह मकोड़ी, राजीव झमत, भूपिंदर सिंह, जगमेल सिंह, अमरीक सिंह, राजवीर ग्रेवाल, तेज वीर ग्रेवाल, मोहित शर्मा, राधा मल्होत्रा, दर्शन चावला, बिल्ला अली, कुलविंदर किन्नू, अब्बास, गुरनाम रंधावा, भारत भूषण मिट्ठू, बख्शीश हीर, इंद्रप्रीत मिंकू, रवि शर्मा और संजू शर्मा समेत बड़ी संख्या में गणमान्य लोग मौजूद रहे।

समारोह में हल्का पूर्वी के विभिन्न स्कूलों के प्रिंसिपल, शिक्षक और अन्य स्कूल स्टाफ सदस्यों ने भी भाग लिया।

राजवंत कौर संधू का ट्रैवलॉग ‘माई फादर्स चेयर’ विश्व पंजाबी भवन ब्रैम्पटन में लॉन्च

लुधियाना / सत्ता संदेश

मशहूर पंजाबी लेखक डॉ. वरयाम सिंह संधू की जीवनसाथी और लेखिका राजवंत कौर संधू द्वारा लिखित ट्रैवलॉग ‘माई फादर्स चेयर’ का कनाडा के ब्रैम्पटन स्थित विश्व पंजाबी भवन में साहित्यिक हस्तियों की मौजूदगी में विमोचन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन समायरा ‘दिशा’ की ओर से किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लेखक, कवि, साहित्य प्रेमी और पंजाबी समुदाय से जुड़े लोग शामिल हुए।

कार्यक्रम के दौरान प्रो. कंवलजीत कौर ढिल्लों ने ट्रैवलॉग पर चर्चा करते हुए पुस्तक में दर्ज विभिन्न रोचक तथ्यों और यात्रा अनुभवों के बारे में जानकारी साझा की। इस अवसर पर लेखिका राजवंत कौर संधू के अलावा उनके पति डॉ. वरयाम सिंह संधू, प्रिंसिपल सरवन सिंह ढुडीके, प्रो. जगीर सिंह काहलों, विश्व पंजाबी सभा के संरक्षक इंदरजीत सिंह बल, पूरन सिंह पांधी, प्यारा सिंह कुडोवाल, परमजीत कौर देओल, बलराज छोकर, उजमा लाहौर, हरजीत सिंह गिल, विश्व पंजाबी सभा के संस्थापक चेयरमैन डॉ. दलबीर सिंह कथूरिया, डॉ. जगदीप कौर आहूजा सहित कई साहित्यिक हस्तियां मौजूद रहीं।

पुस्तक के बारे में अपने अनुभव साझा करते हुए राजवंत कौर संधू ने बताया कि पाकिस्तान की अपनी पहली यात्रा के दौरान उनके साथ डॉ. वरयाम सिंह संधू भी थे। इस यात्रा में वह सबसे पहले डॉ. संधू के पैतृक गांव भड़ाना पहुंचीं। वहां एक परिवार के घर को उन्होंने गलती से डॉ. संधू के नाना का घर समझ लिया। परिवार ने भी उन्हें इस भ्रम के बारे में नहीं बताया और उनका आत्मीयता से स्वागत करते हुए सेवा की। बाद में पता चला कि वास्तविक घर दूसरी गली में था। इस अनुभव ने यात्रा को एक अलग भावनात्मक रंग दिया।

राजवंत कौर संधू ने लाहौर स्थित किला गुज्जर सिंह पुलिस स्टेशन की यात्रा का भी उल्लेख किया। उनके पिता सरदार बंता सिंह ढिल्लों 1947 से पहले लाहौर में पुलिस चीफ के पद पर रहे थे। इसी वजह से इस स्थान से उनका व्यक्तिगत और भावनात्मक जुड़ाव था। यात्रा के दौरान मौजूदा पुलिस चीफ ने उन्हें उनके पिता की कुर्सी पर बैठाकर सम्मानित किया। इस घटना ने ट्रैवलॉग को और अधिक भावनात्मक आयाम दिया है।

प्रिंसिपल सरवन सिंह ने कहा कि बलराज साहनी के ‘मेरा पाकिस्तानी ट्रैवलॉग’ और डॉ. वरयाम सिंह संधू के 2001 के पाकिस्तान दौरे के बाद लिखे गए ट्रैवलॉग ‘वागड़ी ए रावी’ के बाद राजवंत कौर संधू की यह पुस्तक पंजाबी साहित्य में महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने कहा कि इस पुस्तक को पंजाब के स्कूलों और कॉलेजों में भी पढ़ाया जाना चाहिए, ताकि नई पीढ़ी विभाजन के इतिहास, पंजाब की सांझी विरासत और दोनों तरफ के पंजाब से जुड़े भावनात्मक रिश्तों को समझ सके।

उन्होंने कहा कि पंजाब की सामूहिक स्मृतियों और विरासत से जुड़े लोगों की आत्माएं आज भी उस ‘महा पंजाब’ में विचरण करती हैं। उनके अनुसार, जो लोग अपनी जड़ों और विरासत से जुड़ने का अवसर पा सकते हैं, उन्हें पश्चिमी पंजाब की यात्रा जरूर करनी चाहिए।

डॉ. वरयाम सिंह संधू ने कहा कि राजवंत कौर संधू ने इस ट्रैवलॉग को लिखते समय उन्हें इसमें हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं दी। उन्होंने कहा कि राजवंत ने उनसे केवल पुस्तक को प्रकाशित करवाने की व्यवस्था करने और मूल लेखन में किसी तरह की कटौती न करने के लिए कहा था।

उन्होंने बताया कि राजवंत कौर संधू की पाकिस्तान जाने की इच्छा लंबे समय से थी। इसके पीछे दो प्रमुख कारण थे। पहला, उनके पिता सरदार बंता सिंह ढिल्लों का लाहौर के किला गुज्जर सिंह पुलिस स्टेशन से जुड़ा इतिहास और दूसरा, उनका अपने ससुर के गांव भड़ाना को देखना। डॉ. वरयाम सिंह संधू ने बताया कि वह स्वयं दो बार पाकिस्तान जा चुके थे, लेकिन इसके बावजूद अपने पैतृक गांव को नहीं देख पाए थे, जो वाघा और लाहौर के बीच स्थित है।

हरजीत सिंह गिल ने पुस्तक की भाषा और शैली की सराहना करते हुए कहा कि ट्रैवलॉग में गुरु धामों से संबंधित ऐतिहासिक जानकारी के साथ-साथ पाकिस्तान से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं को भी प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया है।

पंजाबी कवयित्री सुरजीत कौर टोरंटो और परमजीत कौर देओल ने भी पुस्तक को रोचक और पाठकों को बांधे रखने वाला बताया। पंजाबी कवि ओंकारप्रीत सिंह, सुखदेव सिंह झंड और अन्य साहित्यकारों ने भी पुस्तक पर अपने विचार साझा किए।

कार्यक्रम में रूपिंदर संधू, रछपाल कौर, रमिंदर रम्मी वालिया, सुरिंदरजीत कौर, परमजीत सिंह विरदी, हरदयाल सिंह झीता, डॉ. दर्शनदीप और सतबीर सिंह सिद्धू सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम की स्टेज सेक्रेटरी की भूमिका निभाते हुए प्रो. कंवलजीत कौर ढिल्लों ने सभी मेहमानों, लेखकों, पाठकों और साहित्य प्रेमियों का धन्यवाद किया।

इस अवसर पर विश्व पंजाबी सभा के चेयरमैन डॉ. दलबीर सिंह कथूरिया ने आगामी 7वें वर्ल्ड पंजाबी कॉन्फ्रेंस के लिए साहित्य प्रेमियों को आमंत्रित किया। उन्होंने बताया कि यह कॉन्फ्रेंस 2, 3 और 4 अक्टूबर को विश्व पंजाबी भवन में आयोजित की जाएगी, जिसमें भारत सहित विभिन्न देशों से पंजाबी भाषा और साहित्य से जुड़ी प्रमुख हस्तियां हिस्सा लेंगी। अमेरिका के प्रसिद्ध नाटककार डॉ. आत्मजीत सिंह ने सम्मेलन का खाका तैयार किया है और वह तीनों दिन कॉन्फ्रेंस की देखरेख भी करेंगे।

मलौद की 32 आंगनवाड़ी वर्करों-हेल्परों को नियुक्ति पत्र, MLA ग्यासपुरा ने दी बधाई

लुधियाना / सत्ता संदेश

पंजाब सरकार की ओर से युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने की दिशा में एक और कदम उठाते हुए पायल विधानसभा क्षेत्र के विधायक मनविंदर सिंह ग्यासपुरा ने ब्लॉक मलौद की 32 नवनियुक्त आंगनवाड़ी वर्करों और हेल्परों को नियुक्ति पत्र वितरित किए। इस दौरान विधायक ने सभी नवनियुक्त कर्मचारियों को बधाई देते हुए उन्हें पूरी ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ अपनी सेवाएं निभाने की अपील की।

MLA मनविंदर सिंह ग्यासपुरा ने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्र बच्चों, गर्भवती महिलाओं और दूध पिलाने वाली माताओं की सेहत, पोषण और बुनियादी विकास से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आंगनवाड़ी वर्कर और हेल्पर सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में एक अहम कड़ी के रूप में काम करते हैं।

उन्होंने कहा कि नवनियुक्त कर्मचारियों के लिए यह नियुक्ति केवल रोजगार का अवसर नहीं है, बल्कि समाज की नई पीढ़ी के स्वास्थ्य, पोषण और विकास में योगदान देने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी है। उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों को बुनियादी शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने के साथ-साथ महिलाओं और बच्चों से संबंधित विभिन्न सरकारी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है।

MLA ग्यासपुरा ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार युवाओं को मेरिट और पारदर्शी प्रक्रिया के आधार पर रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाकर योग्य उम्मीदवारों को उनकी काबिलियत के आधार पर आगे बढ़ने के अवसर दिए जा रहे हैं।

उन्होंने नवनियुक्त आंगनवाड़ी वर्करों और हेल्परों से अपील की कि वे अपनी ड्यूटी पूरी लगन, ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ निभाएं तथा जरूरतमंद लोगों तक सरकारी सेवाओं और कल्याणकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ पहुंचाएं।

ग्यासपुरा ने कहा कि पंजाब सरकार का मुख्य उद्देश्य राज्य के हर वर्ग की भलाई सुनिश्चित करना है। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में लगातार कार्य किया जा रहा है और महिलाओं तथा बच्चों से जुड़ी सेवाओं को और मजबूत करने के लिए भी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाली आंगनवाड़ी वर्करों और हेल्परों ने पंजाब सरकार तथा MLA मनविंदर सिंह ग्यासपुरा का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह नियुक्ति उनके लिए रोजगार के साथ-साथ समाज की सेवा करने का महत्वपूर्ण अवसर है।

इस अवसर पर संबंधित विभाग के अधिकारी, स्थानीय नेता, पार्टी कार्यकर्ता, नवनियुक्त आंगनवाड़ी वर्कर एवं हेल्पर तथा उनके परिवार के सदस्य मौजूद रहे।

खन्ना : ‘खेलां वतन पंजाब दियां-2026’ सीजन-4 का आगाज, 10 लाख खिलाड़ियों का लक्ष्य

खन्ना / सत्ता संदेश

पंजाब को खेलों के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाने के उद्देश्य से पंजाब सरकार द्वारा आयोजित ‘खेलां वतन पंजाब दियां-2026’ सीजन-4 का खन्ना में आगाज किया गया। पंजाब के ग्रामीण विकास एवं पंचायत, श्रम, पर्यटन एवं सांस्कृतिक मामलों और बिजली मंत्री तरुनप्रीत सिंह सौंद ने नरेश चंद्र स्टेडियम, खन्ना में ब्लॉक स्तरीय खेल मुकाबलों की शुरुआत करवाई।

खन्ना में ब्लॉक स्तरीय मुकाबले 12 से 14 सितंबर 2026 तक आयोजित किए जा रहे हैं। इस दौरान एथलेटिक्स, फुटबॉल, कबड्डी नेशनल, कबड्डी सर्कल, खो-खो, पुरुष टेनिस बॉल क्रिकेट, वॉलीबॉल स्मैशिंग और वॉलीबॉल शूटिंग सहित आठ खेलों के मुकाबले करवाए जा रहे हैं।

कैबिनेट मंत्री तरुनप्रीत सिंह सौंद ने खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार राज्य में खेल संस्कृति को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि ‘खेलां वतन पंजाब दियां’ जैसे खेल आयोजन युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने और उसे निखारने के लिए बड़ा मंच प्रदान कर रहे हैं।

मंत्री सौंद ने कहा कि खेल युवाओं को नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सरकार का उद्देश्य गांव स्तर से खेल प्रतिभाओं की पहचान करके उन्हें जिला, राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने के लिए अधिक से अधिक अवसर उपलब्ध करवाना है।

उन्होंने बताया कि खन्ना में आयोजित हो रहे मुकाबलों में अंडर-14, अंडर-17, अंडर-21, 21-30, 31-40, 41-50, 51-60, 61-70 और 70 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। उन्होंने खिलाड़ियों से खेल भावना के साथ प्रतियोगिताओं में भाग लेने और अपनी मेहनत एवं लगन से पंजाब का नाम रोशन करने की अपील की।

कैबिनेट मंत्री ने कहा कि ‘खेलां वतन पंजाब दियां’ का पहला सीजन वर्ष 2022 में शुरू किया गया था। पिछले सीजनों में खिलाड़ियों और आम लोगों की ओर से इस पहल को भारी समर्थन मिला और करीब 5 लाख खिलाड़ियों ने इसमें भाग लिया। इस वर्ष सरकार ने खेलों में 10 लाख तक खिलाड़ियों की भागीदारी का लक्ष्य निर्धारित किया है।

उन्होंने कहा कि इन खेल मुकाबलों के विजेता खिलाड़ियों को 12 करोड़ रुपये से अधिक की पुरस्कार राशि के साथ ग्रेडेशन सर्टिफिकेट भी दिए जाएंगे। इससे खिलाड़ियों को खेलों के प्रति प्रोत्साहन मिलने के साथ-साथ उनके भविष्य को बेहतर बनाने में भी मदद मिलेगी।

तरुनप्रीत सिंह सौंद ने कहा कि पंजाब को ‘रंगला पंजाब’ बनाने में खेलों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि गांवों में 3,100 मॉडल प्ले ग्राउंड तैयार किए जा रहे हैं, जिनमें से करीब 1,000 मॉडल प्ले ग्राउंड बनकर लोगों को समर्पित किए जा चुके हैं।

उन्होंने कहा कि इन खेल मैदानों में खेलने वाले बच्चे और युवा ब्लॉक स्तर से जिला स्तर, जिला स्तर से राज्य स्तर, राज्य स्तर से राष्ट्रीय और फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच सकते हैं। उन्होंने कहा कि इन्हीं खेल मैदानों से पंजाब के भविष्य के खिलाड़ी और ओलंपियन निकलेंगे, जो पंजाब और देश का नाम रोशन करेंगे।

इस अवसर पर मार्केट कमेटी खन्ना के चेयरमैन जगतार सिंह गिल, ब्लॉक समिति खन्ना के चेयरमैन लखवीर सिंह गिल, नगर काउंसिल खन्ना के प्रधान जतिंदर पाठक, वाइस प्रधान करमजीत सिंह सिफती, जिला परिषद चेयरमैन मास्टर अवतार सिंह दैहड़ू, एसडीएम खन्ना स्वाति टिवाणा, नायब तहसीलदार खन्ना गुरचरण सिंह, कार्यकारी अधिकारी खन्ना चरणजीत सिंह, खेल कोऑर्डिनेटर शैलजा सहित शहर के पार्षद, बड़ी संख्या में खिलाड़ी और क्षेत्रवासी मौजूद रहे।