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सीधी में 53 गर्भवती महिलाओं की मौत पर NHRC सख्त, मध्य प्रदेश सरकार से मांगी रिपोर्ट

नई दिल्ली/ सत्ता संदेश

National Human Rights Commission (एनएचआरसी) ने मध्य प्रदेश के सीधी जिले में एक वर्ष के दौरान 53 गर्भवती महिलाओं की मौत के मामले का स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने इस मामले को गंभीर मानते हुए मध्य प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच प्रसव पूर्व और प्रसवोत्तर अवधि में 53 महिलाओं की मृत्यु हुई। इन मौतों के पीछे जागरूकता की कमी, स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव और बुनियादी ढांचे की कमजोर स्थिति को प्रमुख कारण बताया गया है।

एनएचआरसी ने कहा कि यदि मीडिया में प्रकाशित जानकारी सही है, तो यह मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का मामला है और इसकी गहन जांच आवश्यक है।

रिपोर्ट के अनुसार, मृत महिलाओं की औसत आयु 26 वर्ष थी और इनमें से अधिकांश पहली या दूसरी बार मां बनने वाली महिलाएं थीं। स्वास्थ्य विभाग की सामुदायिक मातृ स्वास्थ्य रैंकिंग में भी सीधी जिला लगातार सबसे निचले तीन जिलों में शामिल रहा है।

खबरों में यह भी सामने आया है कि जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पतालों में डॉक्टरों तथा तकनीकी विशेषज्ञों की भारी कमी है। बेहतर इलाज के लिए मरीजों को अक्सर रीवा भेजना पड़ता है, जिससे रास्ते में जोखिम बढ़ जाता है।

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कई गांवों में सड़क संपर्क नहीं होने के कारण गर्भवती महिलाओं को एम्बुलेंस तक पहुंचाने के लिए दो से तीन किलोमीटर तक चारपाई पर ले जाना पड़ता है। मानसून के दौरान यह समस्या और भी बढ़ जाती है।

अब सभी की नजरें मध्य प्रदेश सरकार की रिपोर्ट पर हैं, जिसके आधार पर एनएचआरसी आगे की कार्रवाई तय करेगा।

एम्स बठिंडा के दीक्षांत समारोह में बोले जेपी नड्डा, ‘स्वस्थ भारत से ही बनेगा विकसित भारत’

दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने एम्स बठिंडा के दूसरे दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए छात्रों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि 2047 तक विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब देश की आबादी स्वस्थ और उत्पादक होगी।

अपने संबोधन में नड्डा ने एम्स बठिंडा की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि संस्थान आज प्रतिदिन लगभग 3,000 ओपीडी और 600 आईपीडी मरीजों को सेवाएं दे रहा है। उन्होंने कहा कि एम्स बठिंडा चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि संस्थान आसपास के 59 गांवों में नियमित आयुष्मान स्वास्थ्य शिविर आयोजित कर रहा है, जहां मधुमेह, उच्च रक्तचाप और कैंसर जैसी बीमारियों की जांच की जाती है। टेलीमेडिसिन, मोबाइल मेडिकल यूनिट और जन-जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए भी लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है। अब स्वास्थ्य सेवाएं केवल इलाज तक सीमित नहीं हैं, बल्कि रोकथाम, पुनर्वास और बुजुर्गों की देखभाल पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

नड्डा ने बताया कि देशभर में 18 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर लोगों को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि करोड़ों लोगों की कैंसर, मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों की जांच की जा चुकी है।

चिकित्सा शिक्षा के विस्तार का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि देश में एम्स संस्थानों की संख्या बढ़कर 23 हो गई है, जबकि मेडिकल कॉलेजों की संख्या 387 से बढ़कर 820 से अधिक हो चुकी है। मेडिकल सीटों में भी रिकॉर्ड वृद्धि हुई है और सरकार अगले पांच वर्षों में 75,000 नई मेडिकल सीटें जोड़ने की योजना पर काम कर रही है।

अपने दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री ने एम्स बठिंडा में अत्याधुनिक पीईटी-सीटी सुविधा, दूसरी हाई एनर्जी लीनियर एक्सेलेरेटर इकाई, बर्न आईसीयू, बाल विकास एवं प्रारंभिक हस्तक्षेप केंद्र (सीडीईआईसी) तथा जिम एवं वेलनेस सेंटर का उद्घाटन भी किया। इन सुविधाओं से कैंसर उपचार, गंभीर मरीजों की देखभाल और बच्चों के स्वास्थ्य सेवाओं को नई मजबूती मिलेगी।

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने TOFEI ऐप के पायलट संस्करण का शुभारंभ किया

दिल्ली / सत्ता संदेश

विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर, पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने कर्तव्य भवन में राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित एक राष्ट्रीय कार्यक्रम में तंबाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थान एप्लिकेशन के पायलट संस्करण का शुभारंभ किया। यह तंबाकू और निकोटीन की लत के विनाशकारी स्वास्थ्य, सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय परिणामों से वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों की रक्षा के प्रति भारत की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

उन्होंने देखा है कि तंबाकू और निकोटीन उत्पादों को अक्सर इस तरह से डिजाइन और विपणन किया जाता है जिससे विशेषकर युवाओं को लुभाने के लिए वे आकर्षक लगें। इसके लिए आकर्षक स्वाद, पैकेजिंग, अप्रत्यक्ष विज्ञापन और सोशल मीडिया एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दिखाए जाने वाले चित्रण का उपयोग किया जाता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि ऐसी रणनीतियां तंबाकू और निकोटीन के सेवन के बारे में गलत धारणा पैदा कर सकती हैं और युवाओं में जागरूकता बढ़ाने के महत्व पर बल दिया ताकि वे जागरूक रहें, सतर्क रहें और तंबाकू एवं निकोटीन के सेवन को अस्वीकार करने के लिए प्रतिबद्ध हों।

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने इस अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि विश्व तंबाकू निषेध दिवस का इस वर्ष का विषय, “अनमास्किंग द अपील- काउंटरिंग निकोटीन एंड टुबैको अडिक्शन”, अर्थात निकोटीन और तंबाकू की लत को छुड़ाने की अपील का व्यापक स्तर पर प्रसार रणनीति। यह विषय युवाओं और आने वाली पीढ़ियों को तंबाकू और निकोटीन की लत के हानिकारक प्रभावों से बचाने के संदर्भ में विशेष रूप से प्रासंगिक है।

TOFEI एक डिजिटल पहल है जिसका उद्देश्य देश भर के स्कूलों और कॉलेजों में तंबाकू मुक्त मानदंडों के कार्यान्वयन और निगरानी को मजबूत करना है। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों, शैक्षणिक संस्थानों और कार्यक्रम अधिकारियों को मानकीकृत निगरानी, ​​रिपोर्टिंग और अनुपालन मूल्यांकन तंत्र के माध्यम से सहयोग मिलने की आशा है, जिससे जवाबदेही बढ़ेगी और बच्चों और किशोरों के लिए स्वस्थ, तंबाकू मुक्त वातावरण को बढ़ावा मिलेगा।

WNTD 2026 का आयोजन WHO द्वारा घोषित विषय “अनमास्किंग द अपील- काउंटरिंग निकोटीन एंड टुबैको अडिक्शन” के अनुरूप है। यह अभियान तंबाकू और निकोटीन उद्योगों द्वारा युवाओं को लुभाने के लिए अपनाई जा रही विभिन्न रणनीतियों पर ध्यान आकर्षित करता है, जिनमें आकर्षक स्वाद, पैकेजिंग, डिजिटल मार्केटिंग और भ्रामक उत्पाद प्रचार शामिल हैं।

इस कार्यक्रम के दौरान “तंबाकू निषेध की शपथ” दिलाई गई, जिसमें तंबाकू मुक्त और स्वस्थ भारत के निर्माण की दिशा में सामूहिक प्रतिबद्धता की पुष्टि की गई। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने NTCP वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन “तंबाकू निषेध की शपथ” की सुविधा भी उपलब्ध कराई है और सहयोगी मंत्रालयों, राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और हितधारकों को इस शपथ का व्यापक प्रचार-प्रसार करने और अधिकतम भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए प्रेरित किया है।

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने TOFEI ऐप के पायलट संस्करण का शुभारंभ किया

दिल्ली / सत्ता संदेश

विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर, पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने कर्तव्य भवन में राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित एक राष्ट्रीय कार्यक्रम में तंबाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थान एप्लिकेशन के पायलट संस्करण का शुभारंभ किया। यह तंबाकू और निकोटीन की लत के विनाशकारी स्वास्थ्य, सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय परिणामों से वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों की रक्षा के प्रति भारत की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

उन्होंने देखा है कि तंबाकू और निकोटीन उत्पादों को अक्सर इस तरह से डिजाइन और विपणन किया जाता है जिससे विशेषकर युवाओं को लुभाने के लिए वे आकर्षक लगें। इसके लिए आकर्षक स्वाद, पैकेजिंग, अप्रत्यक्ष विज्ञापन और सोशल मीडिया एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दिखाए जाने वाले चित्रण का उपयोग किया जाता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि ऐसी रणनीतियां तंबाकू और निकोटीन के सेवन के बारे में गलत धारणा पैदा कर सकती हैं और युवाओं में जागरूकता बढ़ाने के महत्व पर बल दिया ताकि वे जागरूक रहें, सतर्क रहें और तंबाकू एवं निकोटीन के सेवन को अस्वीकार करने के लिए प्रतिबद्ध हों।

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने इस अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि विश्व तंबाकू निषेध दिवस का इस वर्ष का विषय, “अनमास्किंग द अपील- काउंटरिंग निकोटीन एंड टुबैको अडिक्शन”, अर्थात निकोटीन और तंबाकू की लत को छुड़ाने की अपील का व्यापक स्तर पर प्रसार रणनीति। यह विषय युवाओं और आने वाली पीढ़ियों को तंबाकू और निकोटीन की लत के हानिकारक प्रभावों से बचाने के संदर्भ में विशेष रूप से प्रासंगिक है।

TOFEI एक डिजिटल पहल है जिसका उद्देश्य देश भर के स्कूलों और कॉलेजों में तंबाकू मुक्त मानदंडों के कार्यान्वयन और निगरानी को मजबूत करना है। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों, शैक्षणिक संस्थानों और कार्यक्रम अधिकारियों को मानकीकृत निगरानी, ​​रिपोर्टिंग और अनुपालन मूल्यांकन तंत्र के माध्यम से सहयोग मिलने की आशा है, जिससे जवाबदेही बढ़ेगी और बच्चों और किशोरों के लिए स्वस्थ, तंबाकू मुक्त वातावरण को बढ़ावा मिलेगा।

WNTD 2026 का आयोजन WHO द्वारा घोषित विषय “अनमास्किंग द अपील- काउंटरिंग निकोटीन एंड टुबैको अडिक्शन” के अनुरूप है। यह अभियान तंबाकू और निकोटीन उद्योगों द्वारा युवाओं को लुभाने के लिए अपनाई जा रही विभिन्न रणनीतियों पर ध्यान आकर्षित करता है, जिनमें आकर्षक स्वाद, पैकेजिंग, डिजिटल मार्केटिंग और भ्रामक उत्पाद प्रचार शामिल हैं।

इस कार्यक्रम के दौरान “तंबाकू निषेध की शपथ” दिलाई गई, जिसमें तंबाकू मुक्त और स्वस्थ भारत के निर्माण की दिशा में सामूहिक प्रतिबद्धता की पुष्टि की गई। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने NTCP वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन “तंबाकू निषेध की शपथ” की सुविधा भी उपलब्ध कराई है और सहयोगी मंत्रालयों, राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और हितधारकों को इस शपथ का व्यापक प्रचार-प्रसार करने और अधिकतम भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए प्रेरित किया है।

WHO-ICHI फ्रेमवर्क और पारंपरिक चिकित्सा स्वास्थ्य संहिता पर दो दिवसीय परामर्श बैठक संपन्न

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

आयुष मंत्रालय ने आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी (एएसयू) चिकित्सा पद्धतियों के लिए स्वास्थ्य हस्तक्षेपों के अंतर्राष्ट्रीय वर्गीकरण (आईसीएचआई) और राष्ट्रीय स्वास्थ्य हस्तक्षेप कोड (एनएचआईसी) के विकास पर एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक और परामर्शदात्री चर्चा का आयोजन किया। यह आयोजन 25-26 मई को ऑनलाइन माध्यम से किया गया।

आयुष मंत्रालय और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के बीच हुए ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) और दाता समझौते के बाद इस पहल का उद्देश्य पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को डब्ल्यूएचओ के आईसीएचआई ढांचे से जोड़ना है। इसका लक्ष्य एएसयू नैदानिक ​​हस्तक्षेपों के लिए विश्व स्तर पर मानकीकृत और वैज्ञानिक रूप से मजबूत कोडिंग शब्दावली विकसित करना है, ताकि सीमा पार डेटा आदान-प्रदान को सक्षम बनाया जा सके, नैदानिक ​​अनुसंधान को मजबूत किया जा सके और बीमा एकीकरण सहित वैश्विक स्वास्थ्य प्रणाली की अंतरसंचालनीयता को बढ़ावा दिया जा सके।

आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने बैठक की अध्यक्षता करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनुरूप हस्तक्षेप वर्गीकरणों के रणनीतिक महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि यह पहल पारंपरिक चिकित्सा को वैश्विक स्वास्थ्य प्रणालियों से जोड़ने, दस्तावेज़ीकरण नियमों को मजबूत करने और डिजिटल स्वास्थ्य परितंत्र में अंतरसंचालनीयता बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान देगी।

उद्घाटन एवं तकनीकी सत्र

केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएस) के उप महानिदेशक डॉ. एन. श्रीकांत के स्वागत भाषण के साथ उद्घाटन सत्र का शुभारंभ हुआ। अपने संबोधन में आयुष मंत्रालय की संयुक्त सचिव डॉ. कविता जैन ने साक्ष्य-आधारित पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को सुदृढ़ करने में मानकीकृत हस्तक्षेप शब्दावली के महत्व पर चर्चा की।

डब्ल्यूएचओ के तकनीकी अधिकारी डॉ. नेनाद कोस्टांजेक समेत डब्ल्यूएचओ डेटा मानक और सूचना विज्ञान टीम के अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने एएसयू हस्तक्षेप वर्गीकरण को वैश्विक स्वास्थ्य सूचना विज्ञान मानकों के साथ संरेखित करने के लिए भविष्य के रोडमैप और तकनीकी आवश्यकताओं पर विचार-विमर्श किया।

इस दो दिवसीय बैठक में आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी प्रणालियों के लिए अलग-अलग सत्र भी आयोजित किए गए, जिनमें मसौदा दस्तावेजों की विस्तृत तकनीकी समीक्षा, जांच-पड़ताल के अलावा विशेषज्ञ परामर्श भी शामिल रहा। तीनों अनुसंधान परिषदों के लगभग 30 वैज्ञानिकों के साथ-साथ आईटीआरए, एआईआईए, नियम और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों के संकाय सदस्यों ने भी विचार-विमर्श में भाग लिया।

तैयार अंतिम प्रारूप जुलाई 2026 में होने वाली आगामी डब्ल्यूएचओ-आईसीएचआई एएसयू अल्फा ड्राफ्ट संपादकीय कार्यशाला का आधार बनेगा।

कांगो-युगांडा में इबोला का कहर, 900 से ज्यादा मामले, 200 मौतें, इबोल से लड़ने के लिए WHO सहित भारत ने उठाए बड़े कदम,

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

अफ्रीका में इबोला वायरस का संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के मुताबिक, अब तक 900 से ज्यादा संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं। जबकि 223 लोगों की मौत की आशंका जताई जा रही है। कांगों में इबोला से 112 संक्रमित और 11 मरीजों की मौत हुई है जबकि युगांडा में एक की मौत और 8 मरीजों को संक्रमित पाया गया है। डब्ल्यूएचओ चीफ टेड रोस ने कहा है कि हेल्थ एजेंसियां तेजी से काम कर रही हैं, लेकिन तेज संक्रमण की वजह से हालात चुनौतीपूर्ण हैं।

कहां से शुरू हुआ संक्रमण?

यह संक्रमण मई 2026 में कांगो के इटुरी प्रांत में पहली बार सामने आया था। यह इलाका लंबे समय से हिंसा और संघर्ष से प्रभावित है। यहां बड़ी संख्या में विस्थापित लोग और सोने की खदानों में काम करने वाले मजदूर रहते हैं। WHO का कहना है कि लोगों की लगातार आवाजाही की वजह से वायरस तेजी से फैल रहा है। अब यह संक्रमण नॉर्थ किवु और साउथ किवु प्रांत तक पहुंच चुका है। साउथ किवु के कुछ हिस्सों पर M23 विद्रोही संगठन का कब्जा है।

कांगो में अस्पतालों से भागे मरीज

इबोला से लड़ाई के बीच कांगो में अस्पतालों और हेल्थ सेंटर्स पर हमले भी हो रहे हैं। पिछले हफ्ते इटुरी प्रांत के मोंगबवालु जनरल रेफरल अस्पताल पर लगातार दो दिन हमला हुआ। हमलावरों ने इलाज के लिए लगाए गए टेंट में आग लगा दी, जिसके बाद 18 इबोला मरीज अस्पताल से भाग गए। जांच में पता चला कि इन मरीजों में एक व्यक्ति इबोला पॉजिटिव था और वह अब भी लोगों के बीच घूम रहा है। पूर्वी कांगो में सशस्त्र संघर्ष की वजह से हेल्थ टीमें नहीं पहुंच पा रहीं हैं।

अगले दिन फिर हमला हुआ और 7 और मरीज भी भाग निकले। एक गंभीर मरीज भागने की कोशिश के दौरान मर गया। बताया गया कि कुछ लोग अपने रिश्तेदारों के शव दफनाने के लिए अस्पताल से ले जाना चाहते थे। हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि इबोला से मरने वाले लोगों के शव बेहद संक्रामक होते हैं, बिना सुरक्षा के अंतिम संस्कार करने से संक्रमण तेजी से फैल सकता है।

भारत में क्या कदम उठाए गए?

भारत ने कांगो और युगांडा से आने वाली उड़ानों पर कोविड जैसे प्रोटोकॉल लागू किए हैं, जिनमें एयरपोर्ट पर थर्मल स्क्रीनिंग और विमान में संदिग्ध यात्रियों को अलग बैठाने जैसे नियम शामिल हैं। यात्रियों को हेल्थ को लेकर सेल्फ-डिक्लेरेशन देना होगा। भारत सरकार ने 24 मई को एक एडवाइजरी जारी की, जिसमें नागरिकों को अगली सूचना तक डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान की यात्रा से बचने की सलाह दी गई है। वहीं केरल सरकार ने प्रभावित देशों से आने वाले यात्रियों के लिए 21 दिन क्वारंटाइन में रहना अनिवार्य कर दिया है।

युगांडा से 23 मई को बेंगलुरु लौटी एक महिला को हल्का शरीर दर्द होने पर एहतियातन सरकारी एपिडेमिक डिजीज हॉस्पिटल में आइसोलेशन में रखा गया। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, महिला में शरीर दर्द के अलावा कोई गंभीर लक्षण नहीं थे। उसका सैंपल जांच के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी भेजा गया था, जांच रिपोर्ट में महिला इबोला निगेटिव पाई गई, जिसके बाद राहत मिली।

दुनिया भर में क्या कदम उठाए गए?

WHO ने 17 मई को कांगो में फैले बुंडीबुग्यो स्ट्रेन वाले इबोला को इंटरनेशनल हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया। WHO के मुताबिक, यह संक्रमण सीमाओं के पार फैलने का खतरा पैदा कर रहा है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिलकर कार्रवाई जरूरी है। अफ्रीका की सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल ने 9 देशों को हाई रिस्क कैटेगरी में रखा है। इनमें अंगोला, बुरुंडी, मध्य अफ्रीकी गणराज्य, इथियोपिया, केन्या, रवांडा, दक्षिण सूडान, तंजानिया और जाम्बिया शामिल हैं। EU ने इबोला और ऐसे वायरस को ट्रैकर करने के लिए अफ्रीका CDC को करीब 22 करोड़ की फंडिंग दी है।

यूरोपीय देशों ने अफ्रीका से आने वाले रूटों पर स्पेशल पैसेंजर ट्रैकिंग सिस्टम एक्टिवेट किया है। 25 मई को इटली में इबोला के दो संदिग्ध मिले, हालांकि इनकी रिपोर्ट निगेटिव आई है। अमेरिका ने कांगो, युगांडा और साउथ सूडान की यात्रा से बचने की सलाह दी है। इन देशों से आने वाले यात्रियों की विशेष जांच की जा रही है। कनाडा ने भी इन देशों के नागरिकों की यात्रा और इमिग्रेशन प्रक्रिया 90 दिनों के लिए रोक दी है। युगांडा ने कांगो से आने-जाने पर रोक लगा दी है और उड़ानें भी अस्थायी रूप से बंद कर दी हैं। वहीं कई अफ्रीकी देशों ने जांच, आइसोलेशन वॉर्ड और हेल्थ मॉनिटरिंग बढ़ा दी है।

इबोला कैसे फैलता है?

यह वायरस पहली बार 1976 में अफ्रीका में सामने आया था। इबोला संक्रमित व्यक्ति के खून, शरीर के तरल पदार्थ, कपड़े, बिस्तर और मेडिकल उपकरणों के संपर्क से फैलता है. शुरुआत में बुखार, कमजोरी और शरीर दर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. बाद में उल्टी, दस्त और खून बहने जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। डॉक्टरों का कहना है कि शुरुआती लक्षण मलेरिया जैसी दूसरी बीमारियों से मिलते-जुलते हैं। इसी वजह से शुरुआती पहचान मुश्किल हो जाती है और संक्रमण तेजी से फैलने का खतरा बढ़ जाता है।

“खजुराहो में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 का 25 दिवसीय काउंटडाउन शुरू”

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

आयुष मंत्रालय का मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान (एमडीएनआईवाई) कल मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के खजुराहो स्थित पश्चिमी मंदिर समूह में योग महोत्सव आयोजित करेगा, जिसके साथ ही अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 की 25 दिनों की उलटी गिनती आरंभ हो जाएगी।

कार्यक्रम से पहले, केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्री प्रतापराव जाधव ने आज खजुराहो में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया। इसमें खजुराहो लोकसभा क्षेत्र से सांसद श्री विष्णु दत्त शर्मा और राजनगर विधानसभा क्षेत्र से विधायक श्री अरविंद पटेरिया भी उपस्थित रहे।

श्री प्रतापराव जाधव ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि योग महोत्सव-2026 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (आईडीवाई) 2026 की राष्ट्रव्यापी तैयारियों का महत्वपूर्ण आयोजन है और यह देश भर में योग की व्यापकता बढ़ाने की सरकार की प्रतिबद्धता दर्शाता है। उन्होंने कहा कि आयुष मंत्रालय, अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 से पहले जागरूकता बढ़ाने और व्यापक जनभागीदारी प्रोत्साहित करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर के इस महत्वपूर्ण आयोजन हेतु 100 स्थानों पर 100 संस्थानों के सहयोग से 100 दिनों का राष्ट्रव्यापी काउंट डाउन (उलटी गिनती) अभियान चला रहा है।

श्री जाधव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के अभिन्न अंग योग को संयुक्त राष्ट्र द्वारा 2014 में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में अपनाने के बाद से यह समग्र स्वास्थ्य और कल्याण के वैश्विक आंदोलन बन गया है। उन्होंने कहा कि योग 365 दिन पहल के तहत, मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान, आयुष मंत्रालय के सहयोग से, 21 जून तक 100 दिनों का निःशुल्क योग प्रशिक्षण अभियान चला रहा है, जिसमें दो लाख से अधिक प्रतिभागी पहले ही योग मित्र के रूप में पंजीकृत हुए हैं।

केंद्रीय आयुष मंत्री ने इस आयोजन के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि योग भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा का अनमोल उपहार है, जिसने पूरी दुनिया को संतुलित, समग्र और स्वस्थ जीवनशैली का मार्ग दिखाया है। उन्होंने कहा कि जीवनशैली से जुड़ी बढ़ती चुनौतियों के वर्तमान समय में योग एक प्रभावी और वैज्ञानिक तौर पर प्रमाणित स्वास्थ्य समाधान के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि खजुराहो भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है, और ऐसे ऐतिहासिक स्थल पर 25 दिवसीय योग महोत्सव आयोजित किया जाना भारतीय परंपरा और आधुनिक स्वास्थ्य के बीच के सामंजस्य को सुंदरता से दर्शाता है। केंद्रीय आयुष मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह महोत्सव योग की वैश्विक स्वीकृति को और बढ़ाने तथा लोगों के बीच इसके व्यापक प्रसार को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

“योग भारत के प्राचीन ज्ञान से वैश्विक साझा शक्ति बना: मनसुख मांडविया”

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

गुजरात के अहमदाबाद में 4 से 8 जून तक पहली विश्व योगासन चैंपियनशिप का आयोजन किया जाएगा। यह इस बात का प्रतीक है कि वैश्विक स्तर का आयोजन पहली बार किया जा रहा है।

चैम्पियनशिप के दौरान 12 स्पर्धाओं में 75 देशों के 500 से अधिक प्रतिभागियों के भाग लेने की उम्मीद है। केंद्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्री डॉ. मांडविया ने चैम्पियनशिप से पहले उपस्थित जन-समूह को संबोधित करते हुए कहा, “योग भारत द्वारा विश्व को दिया गया है। यह एक अमूल्य खजाना है, जिसकी खोज हमारे देश में 5000 साल पहले हुई थी।”

डॉ. मांडविया ने योग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, “योग हमें शरीर और मन दोनों की शक्ति प्रदान करता है।” उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि योग अब अच्छे स्वास्थ्य से आगे बढ़कर विश्व स्तर पर स्वीकृत खेल बन गया है।

डॉ. मांडविया ने योग की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय स्वीकृति की चर्चा करते हुए कहा, “विश्व के सभी देशों ने योग को अपनाना और इसे अपने जीवन का हिस्सा बनाना आरंभ कर दिया है।” उन्होंने कहा कि भारत का योग ज्ञान और परंपरा देश के हर घर और गली में विद्यमान है।

डॉ. मांडविया ने योग के बढ़ते प्रभाव को रेखांकित करते हुए कहा, “आज योगासन न केवल शारीरिक और मानसिक कल्याण का मार्ग है, बल्कि आजीविका का एक बढ़ता हुआ स्रोत और विश्व भर में भारत की सॉफ्ट पावर का एक शक्तिशाली प्रतीक भी है।”

उन्होंने कहा कि यह चैंपियनशिप भारत को वैश्विक स्तर पर अपनी सॉफ्ट पावर प्रदर्शित करने का एक बड़ा अवसर प्रदान करती है।

डॉ. मांडविया ने कहा कि महासंघ को अब योगासन को एक अंतरराष्ट्रीय खेल के रूप में मान्यता दिलाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक परिषद के ढांचे के तहत पंजीकरण हासिल करने की दिशा में काम करना चाहिए।

भारत की 2036 ओलंपिक खेलों की मेजबानी की बोली का उल्लेख करते हुए डॉ. मांडविया ने कहा, “जिस देश में योग का उद्गम हुआ, वह 2036 में ओलंपिक खेलों की मेजबानी करने की तैयारी कर रहा है। उसी के अनुरूप हम भी विश्व मंच पर पहली बार योगासन को ओलंपिक खेल के रूप में स्थापित करने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।”

आर्मी अस्पताल में कैंसर उपचार के लिए आधुनिक रेडियोथेरेपी तकनीक की शुरूआत

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल), दिल्ली के विकिरण ऑन्कोलॉजी विभाग में 25 मई को रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की उपस्थिति में रिंग गैन्ट्री आधारित लीनियर एक्सीलरेटर का शुभारंभ किया गया। यह उन्नत तकनीक आर्मी हॉस्पिटल (आर एंड आर) में कैंसर देखभाल सेवाओं को मजबूत करेगी और सेवारत कर्मियों, पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के लिए उन्नत रेडियोथेरेपी तक पहुंच में सुधार करेगी। इससे अस्पताल में मरीजों की भारी संख्या के लिए आंतरिक उपचार क्षमता में वृद्धि होने की उम्मीद है।

यह लीनियर एक्सेलेरेटर वॉल्यूमेट्रिक मॉड्युलेटेड आर्क थेरेपी, इंटेंसिटी-मॉड्यूलेटेड रेडिएशन थेरेपी, इमेज-गाइडेड रेडिएशन थेरेपी, स्टीरियोटैक्टिक बॉडी रेडिएशन थेरेपी और स्टीरियोटैक्टिक रेडियोसर्जरी सहित आधुनिक रेडियोथेरेपी तकनीकों को प्रदान करने में सक्षम है। यह आसपास के सामान्य ऊतकों पर विकिरण के प्रभाव को कम करते हुए ट्यूमर कोशिकाओं तक सटीक विकिरण पहुंचाने में मदद करता है, जिससे उपचार के बेहतर परिणाम और रोगी की बेहतर देखभाल सुनिश्चित होती है।

सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा (एएफएमएस) के अंतर्गत लीनियर एक्सेलेरेटर की खरीद, पहले के उपकरणों की तुलना में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन पुरानी तकनीक आधारित उपकरणों का अब इस्‍तेमाल नहीं किया जाता है। यह उपकरण एएफएमएस के अंतर्गत ऑन्कोलॉजी सेवाओं के आधुनिकीकरण की दिशा में एक कदम है। एएफएमएस के अधीन अन्य ऑन्कोलॉजी केंद्रों का भी चरणबद्ध तरीके से उन्नयन किया जा रहा है।

इस अवसर पर डीजी एएफएमएस सर्जन वाइस एडमिरल आरती सरीन; आर्मी हॉस्पिटल (आर एंड आर) के कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल अविनाश दास और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

जीवन और शतायु जेरियाट्रिक केयरगिवर डैशबोर्ड का शुभारंभ

दिल्ली / सत्ता संदेश

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए “जीवन” यानी ज्‍वाइंट इम्‍पावरमेंट एंड वर्चुअल असिस्‍टेंस नेटवर्क मोबाइल एप्लिकेशन और “शतायु” वरिष्ठ नागरिकों के लिए समग्र देखभाल सहायता एवं प्रशिक्षण जेरियाट्रिक केयरगिवर डैशबोर्ड लॉन्च किया है।

यह वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा, देखभाल, गरिमा और सशक्तिकरण की दिशा में एक कदम है, ताकि प्रौद्योगिकी आधारित देखभाल सहायता के माध्यम से वृद्धावस्था देखभाल का इकोसिस्‍टम तैयार हो सके।

देशभर में वरिष्ठ नागरिकों के लिए सहायता प्रणालियों को मजबूत करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल के तहत, केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने शुक्रवार को संयुक्त बुजुर्ग सशक्तिकरण और वर्चुअल सहायता नेटवर्क मोबाइल एप्लिकेशन लॉन्च किया, जो भारत में वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा, कल्याण, स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच और सामाजिक समावेश को बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया एक समर्पित डिजिटल प्लेटफॉर्म है।

वहीं देशभर में वरिष्ठ नागरिकों के लिए देखभाल संबंधी सेवाओं को समर्थन देकर मजबूत करने के लिए विकसित एक अन्य एप्लिकेशन, “शतायु” सीनियर होलिस्टिक केयर असिस्टेंस एंड ट्रेनिंग फॉर योर यूटिलिटी नामक डैशबोर्ड को भी “एक सुचारू रूप से कार्य करने वाली देखभाल अर्थव्यवस्था का निर्माण” विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला के दौरान लॉन्च किया गया था।

यह वरिष्ठ नागरिकों के लिए किसी विशेष जिले और राज्य में वृद्धावस्था देखभालकर्ताओं की उपलब्धता जैसी जानकारी प्रदान करता है।

इस प्लेटफॉर्म को सरलीकृत कार्यक्षमताओं और उपयोगकर्ता के अनुकूल इंटरफेस के साथ डिजाइन किया गया है ताकि इस्‍तेमाल में आसानी और प्रभावी सेवा वितरण सुनिश्चित किया जा सके।