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PGIMER Chandigarh ने पूरे किए 63 साल, स्थापना दिवस पर AI आधारित हेल्थकेयर के भविष्य का विजन पेश

PGIMER Chandigarh के 63वें स्थापना दिवस पर BHU के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि AI डॉक्टरों की जगह नहीं लेगा, बल्कि उनकी क्षमताओं को बढ़ाकर स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा बदलाव लाएगा। PGI में अब 3000 बेड की क्षमता और मरीजों की वेटिंग लिस्ट में लगातार कमी का दावा किया गया।

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

स्वास्थ्य सेवा, चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में देश के प्रमुख संस्थानों में शामिल पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ ने उत्कृष्टता के 63 वर्ष पूरे कर लिए हैं। संस्थान के 63वें स्थापना दिवस समारोह में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई आधारित स्वास्थ्य सेवाओं के भविष्य पर विशेष जोर दिया गया। समारोह में मुख्य अतिथि बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि आने वाले समय में एआई डॉक्टरों की जगह नहीं लेगा, बल्कि उनकी क्षमताओं को कई गुना बढ़ाकर स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा।

पीजीआईएमईआर के NINE ऑडिटोरियम में आयोजित स्थापना दिवस समारोह में डॉ. अलका राव, निदेशक IMTECH चंडीगढ़, पीजीआईएमईआर के पूर्व निदेशक प्रो. योगेश चावला, डीन अकादमिक्स प्रो. संजय जैन, डीन रिसर्च प्रो. संजीव हांडा, चिकित्सा अधीक्षक-सह-प्रमुख अस्पताल प्रशासन विभाग प्रो. अशोक कुमार, वित्तीय सलाहकार रविंदर सिंह सहित संस्थान के पूर्व एवं वर्तमान डीन, विभागाध्यक्ष, वरिष्ठ फैकल्टी सदस्य, रेजिडेंट डॉक्टर, नर्सिंग अधिकारी और अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।

प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने अपने मुख्य संबोधन में पीजीआईएमईआर को एक सच्ची राष्ट्रीय धरोहर बताते हुए कहा कि संस्थान का योगदान केवल चंडीगढ़ या उत्तर भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देशभर में स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

उन्होंने कहा कि आज स्वास्थ्य सेवाओं में एआई को डॉक्टरों के विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि उनकी विशेषज्ञता और निर्णय क्षमता को मजबूत करने वाले एक शक्तिशाली उपकरण के रूप में देखना चाहिए। उनके अनुसार, एआई का सबसे प्रभावी उपयोग उन परिस्थितियों में हो रहा है जहां यह डॉक्टरों को हटाने के बजाय उन्हें बेहतर निर्णय लेने, अधिक जानकारी का विश्लेषण करने और मरीजों तक बेहतर सेवाएं पहुंचाने में मदद कर रहा है।

प्रो. चतुर्वेदी ने कहा कि एआई अब केवल तकनीक का आकर्षण या फैशनेबल विषय नहीं रह गया है। यह स्वास्थ्य सेवा, चिकित्सा अनुसंधान और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में तेजी से अपनी जगह बना रहा है। ऐसे में स्वास्थ्य संस्थानों को इससे दूरी बनाने के बजाय जिम्मेदारी और समझदारी के साथ इसे अपनाना होगा।

उन्होंने बताया कि एआई क्लिनिकल रिकॉर्ड, पैथोलॉजी रिपोर्ट और वैज्ञानिक साहित्य सहित बड़ी मात्रा में चिकित्सा संबंधी जानकारी का विश्लेषण करने में डॉक्टरों की मदद कर सकता है। इससे डॉक्टरों को आवश्यक जानकारी तेजी से उपलब्ध हो सकती है और उनकी कार्यक्षमता में वृद्धि हो सकती है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई विशेषज्ञता का स्थान नहीं लेगा, बल्कि डॉक्टरों के पास उपलब्ध ज्ञान और सूचना की क्षमता को बढ़ाएगा।

चिकित्सा अनुसंधान में एआई की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि इस तकनीक की मदद से शोधकर्ता अब ऐसे प्रश्नों की जांच कर सकते हैं, जिन पर पहले काम करना बहुत महंगा या अत्यधिक समय लेने वाला होता था। उन्होंने कहा कि एआई के कारण स्वास्थ्य और चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में नई संभावनाएं खुल रही हैं।

प्रो. चतुर्वेदी ने भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप हेल्थकेयर एआई विकसित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि केवल पश्चिमी देशों के डेटा पर प्रशिक्षित एआई सिस्टम भारतीय मरीजों की रोग-प्रवृत्तियों, आबादी और स्वास्थ्य संबंधी वास्तविकताओं को पूरी तरह नहीं समझ सकते। इसलिए भारत को केवल एआई तकनीक का उपभोक्ता बने रहने के बजाय भारतीय जरूरतों और परिस्थितियों के अनुरूप अपने समाधान विकसित करने होंगे।

उन्होंने दूरस्थ स्वास्थ्य सेवाओं, रेडियोलॉजी, अस्पताल प्रबंधन और साक्ष्य आधारित निर्णय लेने में एआई की बड़ी संभावनाओं का उल्लेख किया। साथ ही कहा कि सर्जरी जैसे जटिल शारीरिक कार्यों के क्षेत्र में एआई को अभी और विकास की जरूरत है।

चिकित्सा शिक्षा के भविष्य पर बोलते हुए प्रो. चतुर्वेदी ने कहा कि आने वाले समय में केवल तथ्यों को याद करना पर्याप्त नहीं होगा। मेडिकल शिक्षा को क्लिनिकल निर्णय क्षमता, वैज्ञानिक साक्ष्यों के मूल्यांकन, आलोचनात्मक सोच और मरीजों के साथ प्रभावी संवाद पर अधिक ध्यान देना होगा।

अपने संबोधन के दौरान उन्होंने एआई के भविष्य को लेकर कहा कि इसकी पहली पीढ़ी ने इंसानों को जानकारी खोजने में मदद की, अगली पीढ़ी निर्णय लेने में सहायता कर रही है और भविष्य की पीढ़ी इंसानों को कार्रवाई करने में मदद करेगी।

इससे पहले पीजीआईएमईआर के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने संस्थान की बढ़ती क्षमता, मरीजों के बढ़ते विश्वास, किफायती स्वास्थ्य सेवाओं और लगातार कम होती वेटिंग लिस्ट पर प्रकाश डाला।

उन्होंने बताया कि हाल ही में प्रधानमंत्री द्वारा दो प्रमुख केंद्रों के उद्घाटन के बाद संस्थान की क्षमता में बड़ा विस्तार हुआ है। एडवांस्ड मदर एंड चाइल्ड सेंटर और एडवांस्ड न्यूरोसाइंस सेंटर के शुरू होने से पीजीआईएमईआर में 800 नए बेड जुड़े हैं। पहले संस्थान में करीब 2200 बेड थे, जो अब बढ़कर 3000 हो गए हैं।

प्रो. विवेक लाल ने कहा कि पीजीआईएमईआर का उद्देश्य केवल इलाज की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं को आम मरीज की पहुंच में लाना है। उन्होंने आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से मरीजों को मिलने वाले लाभ और अमृत फार्मेसी आउटलेट्स के जरिए उपलब्ध किफायती जेनेरिक दवाओं का भी उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि गंभीर और लंबे समय तक चलने वाली बीमारियों के इलाज में मरीजों को करोड़ों रुपये की बचत हो रही है। संस्थान में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन इसके बावजूद वेटिंग लिस्ट कम हो रही है, जो सेवा वितरण प्रणाली में सुधार और संस्थान की बढ़ती क्षमता का संकेत है।

पीजीआईएमईआर के निदेशक ने संस्थान की प्रगति का श्रेय डॉक्टरों, नर्सिंग अधिकारियों, तकनीकी कर्मचारियों और प्रशासनिक स्टाफ सहित पूरे पीजीआई परिवार को दिया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में संस्थान बुनियादी ढांचे, डायग्नोस्टिक सेवाओं, मानव संसाधन और अन्य उभरते स्वास्थ्य संस्थानों के साथ सहयोग को और मजबूत करेगा।

उन्होंने विशेष रूप से बनारस हिंदू विश्वविद्यालय सहित अन्य संस्थानों के साथ सहयोग और मार्गदर्शन की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि पीजीआईएमईआर देश में उभरते स्वास्थ्य और चिकित्सा संस्थानों की मदद करने के लिए हमेशा तैयार है।

स्थापना दिवस समारोह के दौरान संस्थान के 35 कर्मचारियों को उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी, पीजीआईएमईआर निदेशक प्रो. विवेक लाल, डीन अकादमिक्स प्रो. संजय जैन और डीन रिसर्च प्रो. संजीव हांडा ने सम्मानित कर्मचारियों को प्रशंसा प्रमाण-पत्र और स्मृति चिह्न प्रदान किए।

सम्मानित होने वालों में हॉस्पिटल अटेंडेंट, सैनिटेशन स्टाफ, माली, सुरक्षा कर्मचारी, प्रशासनिक अधिकारी, लैब टेक्नीशियन, टेक्निकल असिस्टेंट और नर्सिंग अधिकारियों सहित विभिन्न विभागों के कर्मचारी शामिल रहे।

समारोह के अंत में डीन रिसर्च प्रो. संजीव हांडा ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। इसके साथ ही पीजीआईएमईआर के 63वें स्थापना दिवस समारोह का औपचारिक समापन हुआ।

पीजीआईएमईआर ने अपने 63 वर्षों के सफर में स्वास्थ्य सेवा, चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में एक मजबूत पहचान बनाई है। अब संस्थान का फोकस आधुनिक तकनीक, बढ़ती मरीज क्षमता और एआई जैसे उभरते क्षेत्रों को अपनाते हुए स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी, किफायती और सुलभ बनाने पर है।

Punjab Health Card: अब घर बैठे डाउनलोड करें मुख्यमंत्री सेहत योजना का हेल्थ कार्ड

Punjab Health Card: मुख्यमंत्री सेहत योजना के लाभार्थी अब SHA Punjab पोर्टल से घर बैठे हेल्थ कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं। जानें ई-केवाईसी और डाउनलोड का तरीका

  • पंजाब में हेल्थ कार्ड को लेकर बड़ी सुविधा, अब घर बैठे डाउनलोड करें कार्ड; जानें पूरा तरीका

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

Punjab Health Card: मुख्यमंत्री सेहत योजना (MMSY) के लाभार्थियों के लिए पंजाब सरकार ने डिजिटल सुविधा शुरू की है। अब पात्र लाभार्थी किसी केंद्र पर जाए बिना राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (SHA) के आधिकारिक पोर्टल से अपना हेल्थ कार्ड ऑनलाइन देख और डाउनलोड कर सकेंगे।

पंजाब की मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत नागरिकों को स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुंच देने की दिशा में यह अहम कदम माना जा रहा है। हेल्थ कार्ड डाउनलोड करने की सुविधा शुरू होने के बाद लाभार्थियों को केवल कार्ड की कॉपी लेने के लिए स्वास्थ्य केंद्रों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

हालांकि, हेल्थ कार्ड डाउनलोड करने से पहले लाभार्थी का वेरिफिकेशन, ई-केवाईसी और फोटो आधारित प्रमाणीकरण पूरा होना जरूरी है। सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही वेरीफाइड हेल्थ कार्ड को ऑनलाइन देखा और PDF के रूप में डाउनलोड किया जा सकता है।

तीन आसान चरणों में डाउनलोड करें हेल्थ कार्ड

1. अपनी जानकारी दर्ज करें
लाभार्थी फैमिली आईडी, हेल्थ कार्ड नंबर, मोबाइल नंबर या आधार नंबर के जरिए अपना पारिवारिक रिकॉर्ड खोज सकते हैं।

2. OTP से करें सत्यापन
रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर या आधार से जुड़े OTP के जरिए प्रमाणीकरण प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

3. हेल्थ कार्ड डाउनलोड करें
सफल सत्यापन के बाद वेरीफाइड हेल्थ कार्ड स्क्रीन पर दिखाई देगा। इसे PDF फॉर्मेट में डाउनलोड कर मोबाइल में सुरक्षित रखा जा सकता है या जरूरत पड़ने पर इसकी प्रिंटेड कॉपी निकाली जा सकती है।

हेल्थ कार्ड डाउनलोड करने से पहले ई-केवाईसी जरूरी

लाभार्थियों को ध्यान रखना होगा कि केवल हेल्थ कार्ड डाउनलोड कर लेना प्रमाणीकरण प्रक्रिया पूरी होने के बराबर नहीं है। कार्ड डाउनलोड करने से पहले परिवार के सदस्यों का फोटो आधारित वेरिफिकेशन और ई-केवाईसी पूरा होना आवश्यक है।

डिजिटल प्रक्रिया के माध्यम से लाभार्थी परिवार के सदस्यों की अपडेटेड फोटो को वेरीफाई कर सकते हैं और कार्ड जनरेट करने से पहले जरूरी प्रमाणीकरण पूरा कर सकते हैं।

मुख्यमंत्री सेहत योजना में ₹10 लाख तक का कवरेज

मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत पात्र परिवारों को प्रति परिवार प्रति वर्ष ₹10 लाख तक का कैशलेस इलाज कवरेज उपलब्ध कराया जा रहा है। योजना का उद्देश्य गंभीर बीमारियों और महंगे इलाज के खर्च से परिवारों को आर्थिक सुरक्षा देना है।

डिजिटल हेल्थ कार्ड की सुविधा से योजना का लाभ लेने की प्रक्रिया भी आसान होने की उम्मीद है। मोबाइल फोन में कार्ड उपलब्ध रहने से लाभार्थी जरूरत के समय इसे आसानी से प्रस्तुत कर सकेंगे।

मोबाइल में रखें डिजिटल हेल्थ कार्ड

हेल्थ कार्ड डाउनलोड होने के बाद लाभार्थी इसे अपने मोबाइल फोन में सुरक्षित रख सकते हैं। इसके अलावा कार्ड की प्रिंटेड कॉपी भी रखी जा सकती है, ताकि जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेते समय दस्तावेज उपलब्ध रहे।

लाभार्थियों को सलाह दी गई है कि वे हेल्थ कार्ड से जुड़ी प्रक्रिया के दौरान अपना OTP किसी अन्य व्यक्ति के साथ साझा न करें और कार्ड डाउनलोड करने के लिए केवल राज्य स्वास्थ्य एजेंसी, पंजाब के आधिकारिक पोर्टल का इस्तेमाल करें।

आधिकारिक पोर्टल: SHA Punjab पर लॉगिन कर हेल्थ कार्ड डाउनलोड किया जा सकता है।



Ludhiana : हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी की होगी सख्त मॉनिटरिंग, DC हिमांशु जैन ने SMOs को दिए निर्देश

Ludhiana : DC हिमांशु जैन ने मिशन जीवनी के तहत हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी मामलों की मॉनिटरिंग, फॉलो-अप और काउंसलिंग मजबूत करने के निर्देश दिए।

लुधियाना / सत्ता संदेश

लुधियाना जिले में हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी (HRP) के मामलों की पहचान, ट्रैकिंग और फॉलो-अप को और प्रभावी बनाने के लिए प्रशासन ने निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। डिप्टी कमिश्नर हिमांशु जैन, IAS की अध्यक्षता में सर्किट हाउस में मिशन जीवनी के स्पेशल इंटेंसिव कैंपेन के तहत दूसरी रिव्यू मीटिंग आयोजित की गई।

मीटिंग के दौरान 25 अगस्त 2026 को जारी निर्देशों के पालन की समीक्षा की गई। डिप्टी कमिश्नर ने हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं की समय पर पहचान, नियमित फॉलो-अप, ट्रैकिंग और काउंसलिंग सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए।

हाई-रिस्क प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए बनेगा मंथली ड्यूटी रोस्टर

डिप्टी कमिश्नर हिमांशु जैन ने जिले के सभी सीनियर मेडिकल ऑफिसर्स (SMOs) को हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी मामलों की निगरानी के लिए मंथली ड्यूटी रोस्टर तैयार करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही ब्लॉक स्टैटिस्टिकल असिस्टेंट (BSA) की मदद से रोटेशनल टेलीफोन फॉलो-अप सुनिश्चित करने को कहा गया।

पिछले सप्ताह किए गए फॉलो-अप की संख्या को हर मंगलवार एक्शन टेकन रिपोर्ट के माध्यम से रिकॉर्ड किया जाएगा, ताकि HRP मामलों की निगरानी में किसी तरह की कमी न रहे।

लो-रिस्क से हाई-रिस्क होने पर तुरंत अपडेट होगा रिकॉर्ड

DC ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि यदि किसी गर्भवती महिला की पहली ANC जांच के दौरान स्थिति लो-रिस्क पाई जाती है, लेकिन बाद में वह हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी की श्रेणी में आती है, तो उसके स्टेटस में हुए बदलाव को तुरंत फ्लैग किया जाए और HRP डेटा में शामिल किया जाए।

उन्होंने कहा कि ऐसी जानकारी ASHA वर्कर से ANM, फिर LHV और BSA तक समय पर पहुंचनी चाहिए, ताकि महिला को जरूरत के अनुसार आगे की स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

HRP मामलों में काउंसलिंग पर भी जोर

हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी के मामलों में काउंसलिंग को प्रभावी बनाने के लिए ANM को प्रत्येक मामले की रिपोर्ट संबंधित SMO को देने के निर्देश दिए गए। SMOs अपने-अपने क्षेत्रों में हर सप्ताह ASHA वर्कर्स और ANMs को संवेदनशील बनाएंगे तथा इसकी एक्शन रिपोर्ट भी जमा करेंगे।

प्रत्येक ब्लॉक से बेहतर प्रदर्शन करने वाली ASHA वर्कर का नाम भी भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

अस्पतालों और नर्सिंग होम का निरीक्षण होगा

डिप्टी कमिश्नर ने कहा कि प्रत्येक HRP मरीज को इलाज करने वाले डॉक्टर की ओर से यह स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए कि आगे के बेहतर प्रबंधन और इलाज के लिए उसे किस स्वास्थ्य संस्थान में जाना है।

इसके अलावा SMOs को अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले अस्पतालों और नर्सिंग होम का निरीक्षण करने के निर्देश भी दिए गए। इस दौरान कुम कलां और साहनेवाल ब्लॉक पर विशेष ध्यान देने को कहा गया।

बैठक में स्पेशल ड्यूटी (अर्बन अफेयर्स) ऑफिसर डॉ. प्रगति वर्मा, IAS, सिविल सर्जन डॉ. रमनदीप कौर, डिस्ट्रिक्ट फैमिली प्लानिंग ऑफिसर डॉ. अमनप्रीत कौर, नोडल ऑफिसर जीवनदीप सिंह, CGO अंबर बंद्योपाध्याय सहित जिले के सभी SMOs मौजूद रहे।

सभी संबंधित अधिकारियों को दिए गए निर्देशों के अनुपालन की रिपोर्ट 8 सितंबर 2026 तक जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का उद्देश्य हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी के मामलों की समय पर पहचान कर गर्भवती महिलाओं को उचित निगरानी, काउंसलिंग और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराना है।

‘AI नई न्यूक्लियर पावर है, इसके गुलाम न बनें’: PGIMER डायरेक्टर प्रो. विवेक लाल

PGIMER डायरेक्टर प्रो. विवेक लाल ने AI को ‘नई न्यूक्लियर पावर’ बताते हुए हेल्थकेयर में नैतिकता, जवाबदेही और मानवीय संवेदनाओं पर जोर दिया।

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI तेजी से हेल्थकेयर का हिस्सा बन रहा है, लेकिन इसके इस्तेमाल के साथ नैतिकता, जवाबदेही और मानवीय संवेदनाओं को बनाए रखना बेहद जरूरी है। यह बात PGIMER चंडीगढ़ के डायरेक्टर प्रो. विवेक लाल ने GI सर्जरी, HPB और लिवर ट्रांसप्लांट विभाग के छठे फाउंडेशन डे समारोह के दौरान कही।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर कीनोट संबोधन देते हुए प्रो. विवेक लाल ने AI की बढ़ती भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने AI को “नई न्यूक्लियर पावर” बताते हुए कहा कि इसकी क्षमता बहुत बड़ी है, लेकिन इसका इस्तेमाल जिम्मेदारी और सही उद्देश्य के साथ किया जाना चाहिए।

माल खतरनाक हो सकता है’

प्रो. विवेक लाल ने कहा कि जिस तरह न्यूक्लियर पावर का गलत इस्तेमाल विनाशकारी हो सकता है, उसी तरह AI का इस्तेमाल भी बिना नैतिक सोच और जिम्मेदारी के नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, “AI नई न्यूक्लियर पावर है… अगर हमें AI का इस्तेमाल किसी अच्छे काम के लिए, किसी अच्छे मकसद के लिए करना है, तो एथिक्स बिल्कुल जरूरी है।”

उन्होंने हेल्थकेयर में AI के इस्तेमाल के दौरान नैतिकता और जवाबदेही को महत्वपूर्ण बताया।

AI डॉक्टरों के अनुभव का विकल्प नहीं

PGIMER डायरेक्टर ने कहा कि AI को डॉक्टरों के अनुभव और क्लिनिकल जजमेंट का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। उनके मुताबिक AI डॉक्टरों को क्लिनिकल निर्णय लेने में एक शक्तिशाली मदद दे सकता है, लेकिन अंतिम निर्णय में चिकित्सकीय अनुभव और मानवीय समझ की महत्वपूर्ण भूमिका बनी रहेगी।

अपने लंबे क्लिनिकल अनुभव का जिक्र करते हुए प्रो. लाल ने खुद को मजाकिया अंदाज में “डायनासोर” बताते हुए कहा कि वह “NI यानी Natural Intelligence” में विश्वास करते हैं।

उन्होंने PGIMER में मिलने वाली कठिन ट्रेनिंग और लंबे क्लिनिकल अनुभव को संस्थान के डॉक्टरों की बड़ी ताकत बताया।

‘AI के गुलाम मत बनो’

प्रो. विवेक लाल ने डॉक्टरों और हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स को AI का इस्तेमाल समझदारी से करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि AI का इस्तेमाल करने के साथ यह समझना जरूरी है कि इसके आउटपुट को किस तरह जांचा और परखा जाए।

उन्होंने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा, “AI के गुलाम मत बनो।”

उनका कहना था कि टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल इंसानी क्षमता को मजबूत करने के लिए होना चाहिए, न कि इंसानी निर्णय क्षमता को पूरी तरह उसके हवाले करने के लिए।

AI के सामने जवाबदेही का सवाल

प्रो. लाल ने हेल्थकेयर में AI से जुड़े एक महत्वपूर्ण नैतिक और कानूनी सवाल की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि AI की मदद से लिया गया कोई क्लिनिकल फैसला गलत साबित होता है, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?

उन्होंने कहा कि AI के तेजी से मेडिकल सिस्टम में शामिल होने के साथ स्पष्ट एथिकल और लीगल फ्रेमवर्क की जरूरत भी बढ़ रही है।

‘AI में इमोशन की कमी, इंसान में यही ताकत’

प्रो. विवेक लाल ने कहा कि आधुनिक तकनीक डॉक्टरों को बड़ी तकनीकी क्षमता दे सकती है, लेकिन इंसानी भावनाओं और संवेदनाओं की जगह नहीं ले सकती।

उन्होंने कहा, “AI में यही कमी है—इमोशन। और यही एक कुदरती इंसान में बहुत ज्यादा होता है।”

उन्होंने मरीजों के इलाज में दया, संवेदना और मानवीय व्यवहार को चिकित्सा का अहम हिस्सा बताया।

PGIMER में हर साल करीब 35 लाख मरीज

PGIMER में भारी क्लिनिकल बोझ के बावजूद GI सर्जरी और संबंधित विभागों के प्रदर्शन की सराहना करते हुए प्रो. लाल ने कहा कि संस्थान में हर साल करीब 35 लाख मरीज आते हैं।

उन्होंने कहा कि इतने बड़े मरीज भार और चुनौतीपूर्ण माहौल के बीच विभाग द्वारा बेहतर क्लिनिकल और अकादमिक प्रदर्शन करना सराहनीय है। उन्होंने फैकल्टी, रेजिडेंट्स और छात्रों के योगदान की भी प्रशंसा की।

प्रो. लाल ने PGIMER के युवा डॉक्टरों, विशेषकर Gen Z डॉक्टरों की क्षमता और उत्साह को संस्थान के अकादमिक एवं क्लिनिकल वातावरण की ताकत बताया।

छह साल का सफर और विभाग की उपलब्धियां

कार्यक्रम में GI सर्जरी, HPB और लिवर ट्रांसप्लांट विभाग के प्रमुख प्रो. राजेश गुप्ता ने विभाग की छह साल की यात्रा और उपलब्धियों पर प्रकाश डाला।

उन्होंने बताया कि विभाग को 4 अगस्त 2020 को स्वतंत्र विभाग के रूप में स्थापित किया गया था। हालांकि, इसकी नींव वर्ष 2004 में सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी डिवीजन की स्थापना के साथ रखी गई थी। इसके बाद 2005 में MCh प्रोग्राम शुरू किया गया।

पिछले छह वर्षों के दौरान विभाग ने पेशेंट केयर, टीचिंग, रिसर्च और एडवांस्ड सर्जिकल सर्विसेज के क्षेत्र में लगातार प्रगति की है।

रोबोटिक सर्जरी की दिशा में आगे बढ़ता विभाग

प्रो. राजेश गुप्ता ने विभाग की वार्षिक क्लिनिकल गतिविधियों की जानकारी देते हुए पिछले वर्ष किए गए विभिन्न प्रकार के सर्जिकल प्रोसीजर और उनकी जटिलता पर प्रकाश डाला।

उन्होंने बताया कि शुरुआती चरण में जहां अधिकांश प्रोसीजर अपेक्षाकृत सरल सर्जरी से जुड़े थे, वहीं यह कार्यक्रम PGIMER में रोबोटिक गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सर्जरी को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण शुरुआत साबित हो रहा है।

विभाग की ओर से अकादमिक और रिसर्च गतिविधियों पर भी लगातार काम किया जा रहा है।

फाउंडेशन डे कार्यक्रम के दौरान AI, आधुनिक सर्जिकल तकनीक, क्लिनिकल अनुभव और मानवीय संवेदनाओं के बीच संतुलन को चिकित्सा के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।

पंजाब में NHM कर्मचारियों की हड़ताल जारी, 27 अगस्त को चंडीगढ़ में बड़े प्रदर्शन की चेतावनी

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

रिपोर्ट : बिट्टू बुढलाड

समान काम के लिए समान वेतन समेत कई मांगों को लेकर कर्मचारी सरकार के खिलाफ मोर्चे पर

पंजाब में नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) कर्मचारियों की हड़ताल 25 अगस्त को भी जारी रही। कर्मचारी समान काम के लिए समान वेतन, वेतन में बढ़ोतरी, 62 वर्ष की सेवानिवृत्ति आयु, लॉयल्टी बोनस और ग्रेच्युटी समेत कई मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ रोष जता रहे हैं।

NHM कर्मचारियों की यूनियन की ओर से अपनी मांगों को लेकर अलग-अलग विधायकों को मांग पत्र भी सौंपे गए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को सरकार के समक्ष उठाते आ रहे हैं, लेकिन अभी तक उनकी समस्याओं का कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।

मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी

कर्मचारियों ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों के संबंध में जल्द लिखित नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। यूनियन का कहना है कि कर्मचारी अपने अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं और सरकार को उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

27 अगस्त को चंडीगढ़ में बड़ा प्रदर्शन

NHM कर्मचारी यूनियन के मुताबिक, 27 अगस्त को चंडीगढ़ स्थित NHM स्टेट हेडक्वार्टर में बड़ा रोष प्रदर्शन किया जाएगा। प्रदर्शन के जरिए सरकार पर कर्मचारियों की मांगों को जल्द पूरा करने का दबाव बनाया जाएगा।

कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक सरकार की ओर से उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

फिलहाल सभी की नजरें सरकार के अगले कदम और NHM कर्मचारियों की मांगों को लेकर होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।

NHM कर्मचारियों की प्रमुख मांगें

  • समान काम के लिए समान वेतन
  • वेतन में बढ़ोतरी
  • 62 वर्ष की सेवानिवृत्ति आयु
  • लॉयल्टी बोनस
  • ग्रेच्युटी
  • मांगों के संबंध में लिखित नोटिफिकेशन जारी करना
DC और VSSL ने शुरु की ‘सिहत सेविका’ प्रोजेक्ट, हेल्थ वर्करों की मिलेगी ट्रेनिंग

लुधियाना / सत्ता संदेश

‘सिहत सेविका’ से हेल्थ मदद के साथ-साथ रोज़गार के मौके भी बढ़ेंगे: डिप्टी कमिश्नर हिमांशु जैन

वर्धमान स्पेशल स्टील्स लिमिटेड (VSSL) ने डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन लुधियाना और बहार फाउंडेशन के साथ मिलकर अपने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) प्रोग्राम ‘स्वस्थ समाज’ के तहत ‘सिहत सेविका’ प्रोजेक्ट शुरू किया। इस पहल का मकसद ज़रूरतमंद लोगों तक बेसिक हेल्थ सर्विसेज़ की पहुँच पक्का करना और हेल्थ अवेयरनेस को मज़बूत करना है।

इस प्रोजेक्ट के तहत 50 हेल्थ वर्कर्स को स्पेशल ट्रेनिंग दी जाएगी। ट्रेंड हेल्थ वर्कर्स को मरीज़ों की बेसिक जाँच और ज़रूरी हेल्थ मदद देने के लिए मेडिकल इक्विपमेंट से लैस फ्री मेडिकल किट भी दी जाएंगी। वर्धमान स्टील्स लुधियाना ने इस प्रोजेक्ट को 9 लाख रुपये की फाइनेंशियल मदद दी है।

इस मौके पर लुधियाना के डिप्टी कमिश्नर हिमांशु जैन, IAS ने वर्धमान स्पेशल स्टील्स लिमिटेड के चेयरमैन सचित जैन और सौम्या जैन की लीडरशिप में ज़रूरतमंद लोगों की भलाई के लिए किए जा रहे कामों की तारीफ़ की। उन्होंने कहा कि ‘सिहत सेविका’ जैसी पहल लोगों को समय पर प्राइमरी हेल्थ केयर देने के साथ-साथ ट्रेंड हेल्थ वर्कर्स के लिए रोज़गार और रोजी-रोटी के मौके बनाने में मददगार साबित होगी।

वर्धमान स्पेशल स्टील्स लिमिटेड के CSR हेड अमित धवन ने कहा कि कंपनी समाज के ज़रूरतमंद लोगों की हेल्थ केयर के लिए लगातार अलग-अलग प्रोजेक्ट चला रही है। इनमें फ्री मोतियाबिंद सर्जरी, महिलाओं के लिए फ्री मेंस्ट्रुअल हेल्थ केयर, आर्टिफिशियल अंग देना और दूसरे हेल्थ केयर प्रोग्राम शामिल हैं।

डिप्टी कमिश्नर जैन ने CSR हेड अमित धवन से हर CSR को लागू करने के लिए डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन के साथ मिलकर काम करने को भी कहा। पहल को असरदार तरीके से लागू करने के लिए की जा रही कोशिशों की तारीफ़ करते हुए उन्होंने कहा कि सरकारी और प्राइवेट ऑर्गनाइज़ेशन की मिली-जुली कोशिशों से समाज के कमज़ोर तबकों तक हेल्थ सर्विस ज़्यादा असरदार तरीके से पहुंचाई जा सकती हैं।

HBCH & RC पंजाब ने  3 दिवसीय ‘कैंसर कॉन्क्लेव 2026’ का शुभारंभ किया

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

इस अकादमिक कॉन्क्लेव में विशेषज्ञ पैनल चर्चा, केस-आधारित कार्यशालाएं (वर्कशॉप) और वैज्ञानिक प्रस्तुतियां शामिल होंगी, HBCH & RC के निदेशक डॉ. आशीष गुलिया का कथन

होमी भाभा कैंसर अस्पताल एंड रिसर्च सेंटर (HBCH & RC), पंजाब ने  शुक्रवार को तीसरे होमी भाभा कैंसर कॉन्क्लेव (HBCC) 2026 की शुरुआत की । यह तीन दिवसीय अकादमिक कॉन्क्लेव “ऑन्कोलॉजी में दूरियों को पाटना” (Bridging Gaps in Oncology) थीम के तहत “आम कैंसर का बहु-विषयक प्रबंधन” (Multidisciplinary Management of Common Cancers) पर केंद्रित है।

यह कॉन्क्लेव 21 से 23 अगस्त तक HBCH & RC, नया चंडीगढ़ और नरसी मोंजी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (NMIMS), चंडीगढ़ में आयोजित किया जा रहा है। इस अकादमिक कॉन्क्लेव में भाग लेने के लिए देश भर से सैकड़ों डॉक्टरों ने पंजीकरण कराया है।

कॉन्क्लेव के पहले दिन HBCH & RC, नया चंडीगढ़ में तीन विशेष प्री-कॉन्फ्रेंस वर्कशॉप आयोजित की गई। ये वर्कशॉप ‘वर्चुअल सर्जिकल प्लानिंग, नेविगेशन एंड 3डी प्रिंटिंग इन सर्जिकल ऑन्कोलॉजी’; ‘MRI इन प्रोस्टेट कैंसर’; और ‘HER2 टेस्टिंग इन द एरा ऑफ प्रिसिजन मेडिसिन’ विषयों को कवर करेंगी, जो प्रतिभागियों को व्यावहारिक और इंटरैक्टिव सीखने के अवसर प्रदान करेंगी।

मुख्य कॉन्फ्रेंस, जो कि 22 और 23 अगस्त को NMIMS, चंडीगढ़ में आयोजित होगी, का उद्घाटन नीति आयोग के पूर्व सदस्य और एम्स (AIIMS) नई दिल्ली के बाल रोग विभाग के पूर्व प्रमुख डॉ. विनोद कुमार पॉल द्वारा मुख्य अतिथि के रूप में और आईआईटी रोपड़ के निदेशक डॉ. राजीव आहूजा द्वारा गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में किया जाएगा।

22 अगस्त को, कॉन्क्लेव में जीआई ऑन्कोलॉजी (GI Oncology) और हेमेटोलॉजी (Hematology) पर समर्पित वैज्ञानिक सत्र होंगे, जबकि रविवार को कॉन्फ्रेंस का मुख्य फोकस हेड एंड नेक कैंसर, थोरेसिक ऑन्कोलॉजी (Thoracic Oncology) और डेंटल रिहैबिलिटेशन (Dental Rehabilitation) पर होगा।

कॉन्क्लेव में 23 अगस्त को सुखना झील पर एक कैंसर जागरूकता वॉकथॉन (Walkathon) भी शामिल होगी, जिसका उद्देश्य कैंसर की रोकथाम और शुरुआती पहचान के बारे में जागरूकता फैलाना है। चंडीगढ़ के डिप्टी कमिश्नर निशांत कुमार यादव इस अवसर पर मुख्य अतिथि होंगे। यह वॉकथॉन कैंसर की रोकथाम और स्वस्थ जीवन शैली के बारे में अधिक जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए स्वास्थ्य देखभाल पेशेवरों, मरीजों, बचे हुए लोगों (survivors) और समुदाय के सदस्यों को एक सामूहिक प्रयास में एक साथ लाएगी।

इस आयोजन के बारे में जानकारी देते हुए, HBCH&RC के निदेशक डॉ. आशीष गुलिया ने कहा, “HBCC विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों को एक साथ लाने और कैंसर देखभाल की जटिलताओं के बारे में सार्थक संवाद पैदा करने के लिए एक महत्वपूर्ण अकादमिक मंच के रूप में विकसित हुआ है। इस वर्ष, हम विशेष रूप से साक्ष्य-आधारित चर्चाओं, व्यावहारिक सीखने और बहु-विषयक सहयोग के माध्यम से ज्ञान और नैदानिक अभ्यास (clinical practice) के बीच के अंतर को पाटने पर केंद्रित हैं। तीन दिनों के दौरान, कॉन्क्लेव में विशेषज्ञ पैनल चर्चा, केस-आधारित वर्कशॉप और वैज्ञानिक प्रस्तुतियां शामिल होंगी, जो सभी वास्तविक दुनिया की चुनौतियों और व्यावहारिक समाधानों को संबोधित करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं। हम उत्तर भारत में ऑन्कोलॉजी शिक्षा के मानकों को ऊंचा उठाने और युवा पेशेवरों को इस क्षेत्र के अग्रणी विशेषज्ञों से सीखने और उनके साथ जुड़ने के अवसर प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

PGIMER की कार्डियक ट्रायेज सेवा से इमरजेंसी केयर हुआ बेहतर

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER), चंडीगढ़ के एडवांस्ड कार्डियक सेंटर (ACC) में शुरू की गई समर्पित कार्डियोलॉजी ट्रायेज यूनिट ने आपातकालीन हृदय देखभाल को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 9 मार्च से 29 जुलाई 2026 तक करीब पांच महीनों की अवधि में यूनिट ने 3,049 हृदय रोगियों का प्रबंधन किया।

PGIMER के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने कहा कि समर्पित कार्डियोलॉजी ट्रायेज यूनिट विशेषज्ञतापूर्ण आपातकालीन सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि इस पहल की सफलता केवल मरीजों की संख्या में नहीं, बल्कि ऐसी सुव्यवस्थित प्रणाली विकसित करने में है, जिसमें मरीजों का तेजी से आकलन कर उनकी वास्तविक चिकित्सीय जरूरत के अनुसार उचित स्तर की देखभाल तक पहुंचाया जा सके।

उन्होंने बताया कि नेहरू अस्पताल की मुख्य इमरजेंसी से स्वतंत्र रूप से विकसित इस कार्डियक इमरजेंसी सेवा ने मरीजों के केंद्रित मूल्यांकन, शीघ्र चिकित्सीय निर्णय और उचित सेवा तक समय पर पहुंच सुनिश्चित करने में मदद की है। इससे मुख्य इमरजेंसी पर मरीजों का दबाव कम करने और उपलब्ध संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल में भी सहायता मिली है।

करीब आधे मरीजों को मूल्यांकन के बाद किया गया डिस्चार्ज

कार्डियोलॉजी विभाग, एडवांस्ड कार्डियक सेंटर के प्रोफेसर डॉ. राजेश विजयवर्गीय ने बताया कि मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी ने समर्पित कार्डियक ट्रायेज प्रणाली की आवश्यकता को साबित किया है।

रिपोर्ट के अनुसार, कुल 3,049 मरीजों में से:

  • 1,108 मरीज (36.3%) को आगे के उपचार के लिए Coronary Care Unit (CCU) में स्थानांतरित किया गया।
  • 1,513 मरीज (49.6%) का उचित मूल्यांकन और उपचार करने के बाद OPD आधार पर डिस्चार्ज किया गया।
  • 298 मरीज (9.8%) को गैर-हृदय संबंधी आपात स्थितियों के उपचार के लिए नेहरू अस्पताल की इमरजेंसी में रेफर किया गया।
  • 85 मरीज (2.8%) को संबंधित कार्डियोलॉजी/CTVS OPD भेजा गया।
  • 30 मरीज (1%) को मूल्यांकन और स्थिरीकरण के लिए Heart Command भेजा गया।

डॉ. विजयवर्गीय के अनुसार, इस मॉडल ने मरीजों की प्रभावी चिकित्सीय श्रेणी तय करने, समय पर उपचार उपलब्ध कराने और बढ़ते आपातकालीन कार्यभार को सुरक्षित तरीके से संभालने में मदद की। इसमें आवश्यक मरीजों के लिए Primary PCI जैसी तत्काल कार्डियक इंटरवेंशन भी शामिल रही।

26 Primary PCI प्रक्रियाएं, मृत्यु दर 0.5 प्रतिशत

रिपोर्टिंग अवधि के दौरान कार्डियोलॉजी ट्रायेज यूनिट के माध्यम से 26 Primary PCI प्रक्रियाएं कराई गईं। इससे तत्काल कार्डियक इंटरवेंशन की जरूरत वाले मरीजों में समय पर रक्त प्रवाह बहाल करने में सहायता मिली।

मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी के बावजूद कुल मृत्यु दर 0.5 प्रतिशत रही। 9 मार्च से 29 जुलाई के बीच कुल 16 मौतें दर्ज की गईं।

जुलाई में 200 से अधिक मरीज प्रति सप्ताह

यूनिट में मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की गई। मार्च में जहां करीब 100 मरीज प्रति सप्ताह आ रहे थे, वहीं जुलाई तक यह संख्या बढ़कर 200 से अधिक मरीज प्रति सप्ताह हो गई।

9 से 15 जुलाई के सप्ताह में मरीजों की संख्या 233 तक पहुंच गई। यह आंकड़ा समर्पित कार्डियक ट्रायेज सेवा के बढ़ते उपयोग और इसकी आवश्यकता को दर्शाता है।

अनावश्यक भर्ती कम करने में मददगार मॉडल

PGIMER के अनुसार, इस अनुभव से सामने आया है कि केंद्रित कार्डियक ट्रायेज व्यवस्था से मरीजों के प्रवाह को बेहतर बनाने, अनावश्यक भर्ती को कम करने और गंभीर हृदय संबंधी मामलों में तेजी से चिकित्सीय निर्णय लेने में मदद मिल सकती है।

समर्पित कार्डियोलॉजी ट्रायेज यूनिट उच्च-भार वाले तृतीयक हृदय उपचार केंद्र के लिए एक प्रभावी और विस्तार योग्य मॉडल के रूप में उभर रही है। PGIMER का यह अनुभव देश के अन्य तृतीयक स्वास्थ्य संस्थानों में भी इसी तरह की समर्पित कार्डियक इमरजेंसी और ट्रायेज सेवाएं विकसित करने की दिशा में उपयोगी साबित हो सकता है।

Ludhiana News: ताजपुर एन्क्लेव में घर के अंदर चल रही थी नमकीन फैक्ट्री, गंदगी और बाल श्रम के आरोप

लुधियाना के ताजपुर एन्क्लेव में घर के अंदर नमकीन बनाने का काम होता मिला। गंदगी, स्वच्छता नियमों की अनदेखी, बच्चों से पैकिंग और बिजली व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं।

लुधियाना / सत्ता संदेश

Report : गुरमीत सिंह

लुधियाना शहर के ताजपुर एन्क्लेव से हैरान करने वाली तस्वीरें सामने आई हैं। यहां एक घर के अंदर नमकीन बनाने का काम होता हुआ दिखाई दिया, जहां खाद्य पदार्थ तैयार करने के दौरान साफ-सफाई और स्वच्छता के मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

सामने आई तस्वीरों में नमकीन तैयार करने वाली जगह पर गंदगी नजर आ रही है। खाद्य पदार्थ तैयार करने के स्थान पर साफ-सफाई की उचित व्यवस्था नहीं दिखाई दी। वहीं, काम करने वाले लोगों द्वारा खाद्य पदार्थ तैयार करते समय जरूरी स्वच्छता संबंधी सावधानियां नहीं बरतने की बात सामने आई है।

बिना दस्ताने और सिर ढके तैयार हो रही थी नमकीन

बताया जा रहा है कि नमकीन तैयार करने के काम में लगे लोगों ने कथित तौर पर हाथों में दस्ताने नहीं पहने थे और सिर भी नहीं ढका हुआ था। खाद्य पदार्थों को तैयार करने के दौरान स्वच्छता के नियमों का पालन नहीं होने से तैयार उत्पाद की गुणवत्ता और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।

छोटे बच्चों से पैकिंग करवाने के आरोप

मामले में एक और गंभीर आरोप सामने आया है। आरोप है कि नमकीन की पैकिंग के लिए छोटे बच्चों से काम करवाया जा रहा था। यदि जांच में यह आरोप सही पाया जाता है तो बाल श्रम से जुड़े कानूनों के तहत कार्रवाई का मामला बन सकता है।

हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

बिजली व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल

नमकीन फैक्ट्री में बिजली व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि बिजली से चलने वाली भट्टियों को कथित तौर पर सीधी कुंडी डालकर चलाया जा रहा था। यदि यह आरोप सही पाया जाता है तो बिजली चोरी के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर मामला सामने आ सकता है।

इस तरह की व्यवस्था से शॉर्ट सर्किट या आग लगने जैसी दुर्घटना का खतरा भी पैदा हो सकता है।

रिहायशी इलाके में फैक्ट्री संचालन पर सवाल

सबसे बड़ा सवाल यह है कि रिहायशी इलाके में घर के अंदर इस तरह खाद्य पदार्थ तैयार करने का काम कैसे चल रहा था और संबंधित विभागों की नजर इस पर क्यों नहीं पड़ी?

मामले में खाद्य सुरक्षा, स्वच्छता, बाल श्रम, बिजली व्यवस्था और रिहायशी क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधि से जुड़े कई पहलुओं की जांच की जरूरत है।

अब देखना होगा कि प्रशासन और संबंधित विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं। यदि जांच के दौरान नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

डॉ. AVM पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल में सेमिनार का आयोजन

लुधियाना / सत्ता संदेश

डॉ. ए.वी.एम. पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल, निकट ईसा नगरी पुली में मौसम में बदलाव के दौरान होने वाली वायरल बीमारियों के प्रति छात्रों को जागरूक करने के उद्देश्य से सी.एम.सी. अस्पताल के नर्सिंग विभाग के विद्यार्थियों और स्टाफ द्वारा एक सेमिनार का आयोजन किया गया।

इस सेमिनार का मुख्य उद्देश्य छात्रों को डेंगू, मलेरिया, हैजा जैसी खतरनाक बीमारियों के कारणों, लक्षणों और बचाव के तरीकों के बारे में जानकारी देना था। इस दौरान जागरूकता के लिए मॉडल, चार्ट और पोस्टर भी तैयार किए गए।

इस अवसर पर स्कूल के डायरेक्टर राजीव कुमार लवली और प्रिंसिपल मनीषा गाबा ने सी.एम.सी. से आई टीम का स्वागत करते हुए कहा कि बदलते मौसम के साथ-साथ वायरल बीमारियों के फैलने का खतरा भी बना रहता है। उन्होंने कहा कि डॉ. ए.वी.एम. पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल में बच्चों को शैक्षणिक शिक्षा देने के अलावा अपने आसपास की स्वच्छता और नैतिक गुणों के प्रति भी जागरूक किया जाता है, ताकि ये विद्यार्थी अपने समाज और परिवार के प्रति अपने कर्तव्य को बेहतर ढंग से निभा सकें।

सेमिनार के दौरान अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ और विद्यार्थियों ने स्कूली बच्चों को जमा पानी में पैदा होने वाले मच्छरों के प्रति सावधान करते हुए बताया कि बीमारी को फैलने से पहले ही किस तरह रोका जा सकता है। उन्होंने बताया कि आमतौर पर घरों की छतों और खुले स्थानों पर रखे गमलों, पुराने टायरों और कूलरों में जमा पानी डेंगू के मच्छरों के पनपने का कारण बनता है। इन बीमारियों से बचने के लिए हमें अपने घर और आसपास के क्षेत्र को साफ-सुथरा रखने की आवश्यकता है।

इस सेमिनार में स्कूल स्टाफ ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस अवसर पर अमिता राजन, हर्ष बाला, सोनिया, कामिनी, इशिता कत्याल, नवनीत कौर, जसवंत कौर, रूबी वर्मा, रीमा, गुरप्रीत बजाज, कुलदीप कौर, वंदना सूद, निशु, मंजू, हरजीत कौर, मुस्कान, हर्ष बाला और गुरलीन कौर सहित अन्य उपस्थित रहे।