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डॉ. मनसुख मांडविया ने श्रमिकों के लिए वार्षिक स्वास्थ्य जांच अभियान शुरू किया

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्रीय श्रम एवं रोजगार और युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने आज दिल्ली के बासैदारापुर स्थित ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल से 40 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी श्रमिकों के लिए राष्ट्रव्यापी वार्षिक स्वास्थ्य जांच पहल का शुभारंभ किया। यह देश के श्रमबल के लिए व्यावसायिक स्वास्थ्य देखभाल और सामाजिक सुरक्षा कवरेज को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए, केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा कि चार श्रम संहिताओं का कार्यान्वयन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की देश भर के श्रमिकों के लिए गरिमा, कल्याण और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की गारंटी को दर्शाता है। इस अवसर को “श्रम शक्ति” के सम्मान को समर्पित दिन बताते हुए उन्होंने कहा कि सरकार सभी श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा कवरेज को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।

केंद्रीय मंत्री ने जोर देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सरकार ने पिछले 12 वर्षों में रोजगार सृजन और कल्याणकारी उपायों के माध्यम से “श्रम शक्ति” और “युवा शक्ति” को सशक्त बनाने के लिए काम किया है।

मांडविया ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि देश में सामाजिक सुरक्षा कवरेज में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है, जो एक दशक पहले लगभग 30 करोड़ लोगों से बढ़कर आज लगभग 94 करोड़ लाभार्थियों तक पहुंच गया है, यानी सामाजिक सुरक्षा कवरेज 19 प्रतिशत से बढ़कर 64 प्रतिशत हो गया है।

उन्होंने यह भी बताया कि ईएसआईसी के दायरे में आने वाले लाभार्थियों की संख्या एक दशक पहले लगभग 7 करोड़ थी, जो आज बढ़कर लगभग 15 करोड़ हो गई है।

श्रमिकों के कल्याण के लिए एक बड़ी पहल की घोषणा करते हुए, डॉ. मांडविया ने कहा कि अब देश भर में 40 वर्ष से अधिक आयु के सभी श्रमिकों के लिए प्रतिवर्ष निःशुल्क स्वास्थ्य जांच आयोजित की जाएगी।

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य जांच के माध्यम से शीघ्र निदान से गंभीर बीमारियों को रोकने में मदद मिल सकती है। उन्होंने बताया कि जांच शिविरों के दौरान पहचानी गई बीमारियों का इलाज और दवाएं ईएसआईसी सुविधाओं के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएंगी।

चार श्रम संहिताओं के तहत प्रमुख श्रम सुधारों पर प्रकाश डालते हुए डॉ. मांडविया ने कहा कि पुरुष और महिला श्रमिकों के लिए समान वेतन के प्रावधान सुनिश्चित किए गए हैं, मातृत्व अवकाश 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह कर दिया गया है, और महिलाओं के लिए घर से काम करने के प्रावधान भी शामिल किए गए हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि पहले श्रमिकों की उपेक्षा की जाती थी और उनकी बात अनसुनी कर दी जाती थी, लेकिन वर्तमान सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि उनकी समस्याओं को प्रतिबद्धता और संवेदनशीलता के साथ दूर किया किया जाए। उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रव्यापी स्वास्थ्य जांच पहल देश के कार्यबल के लिए गरिमा, सुरक्षा और बेहतर स्वास्थ्य देखभाल सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया एक और महत्वपूर्ण कदम है।

राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन में ‘जननी’ प्लेटफॉर्म लॉन्च, मातृ-शिशु स्वास्थ्य को मिलेगा बल

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

देश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने हाल ही में संपन्न राष्ट्रीय नवाचार एवं समावेशिता शिखर सम्मेलन – भारत के स्वास्थ्य भविष्य को आकार देने वाली सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों – में जननी (प्रसवपूर्व, प्रसवोत्तर और नवजात शिशु एकीकृत देखभाल की यात्रा) प्‍लेटफॉर्म लॉन्‍च किया।

जननी एक सेवा-केन्द्रित डिजिटल प्लेटफॉर्म है जिसे प्रजनन आयु की महिलाओं के डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड की व्यापक निगरानी और रखरखाव के लिए डिज़ाइन किया गया है। विद्यमान आरसीएच पोर्टल के उन्नत संस्करण के रूप में विकसित यह प्लेटफॉर्म, देखभाल की निरंतरता में प्रमुख सेवा वितरण कार्यकलापों को दर्ज करके एक दीर्घकालिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड बनाता है।

इस प्लेटफॉर्म का उद्देश्य मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की सुचारू निगरानी सुनिश्चित करना है, जिसमें प्रसवपूर्व देखभाल, प्रसव की तैयारी, प्रसव, प्रसवोत्तर देखभाल, नवजात शिशु देखभाल, घर आधारित नवजात शिशु एवं शिशु देखभाल और परिवार नियोजन शामिल हैं। निरंतर निगरानी और समय पर उपाय को सक्षम बनाकर, जननी सेवा वितरण को मजबूत करता है और हर चरण में देखभाल की निरंतरता सुनिश्चित करता है।

जननी की एक प्रमुख विशेषता क्यूआर-कोड वाले डिजिटल मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य (एमसीएच) कार्डों की शुरुआत है, जो स्वास्थ्य अभिलेखों तक आसान पहुंच और सुवाह्यता को सक्षम बनाते हैं। इस प्लेटफॉर्म में उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं के लिए स्वचालित अलर्ट, पर्यवेक्षी समीक्षा के लिए वास्तविक समय के डैशबोर्ड और नियत-सूची निर्माण जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं, जो समय पर ट्रैकिंग, निगरानी और लक्षित उपायों को सक्षम बनाती हैं।

यह प्लेटफॉर्म आभा, आधार और मोबाइल नंबर जैसे विशिष्ट पहचानकर्ताओं का उपयोग करके लाभार्थियों के पंजीकरण को सक्षम बनाता है, साथ ही अखिल भारतीय खोज सुविधा भी प्रदान करता है। आज तक, जननी ने 1.34 करोड़ लाभार्थी पंजीकरण, 30 लाख से अधिक गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण, 30 लाख से अधिक मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य कार्ड जारी किए हैं और एक लाख से अधिक बायोमेट्रिक सत्यापन किए हैं।

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने जापान की मंत्री ओनोडा किमी से की मुलाकात

दिल्ली/सत्ता संदेश

जापान की विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी नीति मंत्री और अंतरिक्ष नीति राज्य मंत्री ओनोडा किमी ने एक उच्च स्तरीय आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल के साथ केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात की। इस बैठक में विभिन्न क्षेत्रों विशेष रूप से स्वास्थ्य और चिकित्सा उपकरणों के क्षेत्र में सहयोग पर चर्चा की गई।

इस बैठक में जापान की चिकित्सा अनुसंधान एवं विकास एजेंसी (एएमईडी), भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के बीच स्वास्थ्य और चिकित्सा उपकरणों के क्षेत्र में एक सहयोग ज्ञापन (एमओसी) का आदान-प्रदान हुआ।

जापान के कैबिनेट कार्यालय और भारत के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के बीच क्वांटम विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में सहयोग के लिए एक आशय पत्र पर हस्ताक्षर किए गए, जो अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों में सहयोग के नए रास्ते खोलेगा।

यह जुड़ाव अगस्त 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जापान यात्रा के परिणामों पर आधारित है, जहां दोनों पक्षों ने उद्योग और स्टार्टअप सहित विभिन्न क्षेत्रों में ‘भारत-जापान विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार साझेदारी’ के विस्तार पर सहमति व्यक्त की गई।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, ‘भारत और जापान के बीच विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक स्वाभाविक तालमेल साझा करते हैं। जहां जापान उन्नत प्रौद्योगिकीय क्षमताएं प्रदान करता है, वहीं भारत प्रतिभाशाली मानव संसाधनों का विशाल भंडार उपलब्ध कराता है। उन्होंने आगे कहा कि क्वांटम टेक्नोलॉजीज, साइबर-फिजिकल सिस्टम्स, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, स्‍वच्‍छ ऊर्जा और उन्‍नत कंप्यूटिंग में भारत के बढ़ते राष्ट्रीय मिशन देश के डीप-टेक सेक्टरों की ओर मजबूत रुझान को दर्शाते हैं, जिससे संयुक्त अनुसंधान, सह-विकास और औद्योगिक साझेदारी के नए अवसर पैदा होते हैं।

वहीं ओनोडा किमी ने भारत की तीव्र आर्थिक वृद्धि और नवाचार के प्रति इसकी मजबूत प्रतिबद्धता, विशेष रूप से विभिन्न क्षेत्रों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता को बड़े पैमाने पर अपनाए जाने की सराहना की। उन्होंने क्वांटम और एआई सहित उन्नत विनिर्माण और कम्प्यूटेशनल प्रौद्योगिकियों में जापान की मज़बूती भारत के बढ़ते प्रौद्योगिकी इकोसिस्‍टम के साथ घनिष्ठ रूप से मेल खाती है।

स्वास्थ्य अनुसंधान और चिकित्सा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में दोनों पक्षों ने संयुक्त अनुसंधान कार्यक्रमों, क्षमता निर्माण और संरचित वित्तपोषण व्यवस्थाओं के माध्यम से सहयोग बढ़ाने पर विचार-विमर्श किया। यह चर्चा हुई कि भारत और जापान में संबंधित वित्तपोषण एजेंसियों द्वारा सहयोगात्‍मक अनुसंधान परियोजनाओं को समर्थन दिया जा सकता है, साथ ही कार्यशालाओं और शोधकर्ता-स्तरीय सहभागिता जैसे संस्थागत तंत्रों के माध्यम से पारस्परिक हित के प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान की जा सकती है।

भारतीय स्वास्थ्य प्राधिकरण-इंडिया एआई मिशन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस : 8–9 मई को AB PM-JAY हैकाथॉन फिनाले

नई दिल्ली/सत्ता संदेश

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण 8-9 मई को बेंगलुरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) के एवी रामाराव सभागार में एबी पीएम-जेएवाई ऑटो-एडजुडिकेशन हैकाथॉन के भव्य फिनाले और शोकेस का आयोजन करेगा। यह कार्यक्रम इंडियाएआई मिशन और आईआईएससी बेंगलुरु के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।

देशव्यापी हैकाथॉन को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है, जिसमें आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से 3,500 से अधिक प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया है। यह उत्साहपूर्ण भागीदारी भारत की स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य बीमा प्रक्रियाओं की दक्षता बढ़ाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का लाभ उठाने में नवप्रवर्तकों, प्रौद्योगिकीविदों और शोधकर्ताओं की बढ़ती रुचि को रेखांकित करती है।

दो दिवसीय इस कार्यक्रम को आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत स्वास्थ्य दावों के प्रबंधन के अगले चरण को आकार देने वाले अत्याधुनिक नवाचारों को प्रदर्शित करने के लिए एक गतिशील मंच के रूप में परिकल्पित किया गया है। फाइनलिस्ट टीमें उन्नत एआई/एमएल-आधारित समाधान प्रस्तुत करेंगी जो नैदानिक ​​दस्तावेज़ वर्गीकरण और एसटीजीएस के अनुपालन, रेडियोलॉजिकल छवि-आधारित सत्यापन और जाली या एआई-जनित चिकित्सा दस्तावेजों का पता लगाने जैसे महत्वपूर्ण समस्या क्षेत्रों को संबोधित करते हैं।

“दावों के निपटारे का भविष्य” शीर्षक से एबी पीएम-जेएवाई कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वचालन, अंतरसंचालनीय डिजिटल प्लेटफार्मों और डेटा-संचालित शासन ढांचे के एकीकरण के माध्यम से एक तेज, अधिक पारदर्शी और जवाबदेह दावा प्रणाली को कैसे सक्षम बनाया जाए इस विषय पर भी एक अन्य पैनल चर्चा की जाएगी।

लगभग 40,000 दावों का प्रतिदिन 1,900 से अधिक उपचार पैकेजों के तहत निपटान करने वाली एबी पीएम-जेएवाई विश्व स्तर पर सबसे बड़ी सार्वजनिक रूप से वित्त पोषित स्वास्थ्य बीमा योजनाओं में से एक है और दावा प्रबंधन के लिए एआई-आधारित दृष्टिकोण अपनाने में अग्रणी है। हैकाथॉन शोकेस, एनएचए द्वारा चिकित्सा पैकेजों और विशिष्टताओं की एक विस्तृत श्रृंखला में स्वतः निर्णय लेने की क्षमताओं का विस्तार करने के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

भारत–जापान स्वास्थ्य सहयोग को नई मजबूती: भारत मंडपम में संयुक्त समिति की तीसरी बैठक

नई दिल्ली/सत्ता संदेश

भारत और जापान के बीच स्वास्थ्य संबंधी संयुक्त समिति की तीसरी बैठक मंगलवार को भारत मंडपम में आयोजित की गई। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा और जापान की स्वास्थ्य नीति प्रभारी मंत्री किमी ओनोदा ने मिलकर बैठक की अध्यक्षता की।

इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए कहा कि भारत और जापान के बीच साझेदारी आपसी सम्मान, विश्वास और भविष्य के लिए साझा दृष्टिकोण पर आधारित है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भारत-जापान के बीच सहयोग ज्ञापन के अंतर्गत आयोजित संयुक्त समिति की बैठक नियमित संवाद और गहन आपसी समझ के माध्यम से इस साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण मंच सिद्ध हुई है और उन्होंने यह विश्वास भी व्यक्त किया कि इस दौरान रचनात्मक और दूरदर्शितापूर्ण विचार-विमर्श होंगे।

नड्डा ने इस दौरान भारत और जापान के बीच एक सदी से अधिक समय से चले आ रहे बहुआयामी संबंधों का उल्लेख किया जो विभिन्न क्षेत्रों में सहभागिता पर आधारित हैं और उन्होंने “सबका साथ, सबका विकास” के मार्गदर्शक सिद्धांत के अंतर्गत समावेशी विकास के प्रति भारत की प्रतिबद्धता भी दोहराई। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि संयुक्त समिति की बैठक स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण मंच है।

ओनोदा ने बैठक को संबोधित करते हुए नवाचार, प्रौद्योगिकी और अनुसंधान के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने में जापान की निरंतर भागीदारी पर बल दिया और इसके साथ ही द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की।

बैठक के दौरान प्राथमिकता वाले प्रमुख क्षेत्रो पर चर्चा की गई, जो इनमें शामिल है।

गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) की रोकथाम, निदान, उपचार और पुनर्वास:

बैठक में भारतीय प्रतिनिधियों ने बीमारियों से बढ़ती कष्टकारी स्थिति के बारे में जानकारी दी जिसमें गैर-संचारी रोगों के बढ़ते प्रसार पर बल दिया गया और सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के अनुरूप उनकी जांच-पड़ताल, निरंतर देखभाल और सतत स्वास्थ्य संवर्धन पर आधारित व्यापक प्रतिक्रिया की रूपरेखा प्रस्तुत की गई। वहीं, जापानी प्रतिनिधियों ने इस मामले में सहयोग के लिए पहले से चल रही पहलों के बारे में बताया जिनमें कैंसर की पहचान के लिए जांच, शीघ्र निदान और तकनीकी सहयोग तथा संस्थागत क्षमता विकास के माध्यम से उपचार प्रणालियों को सुदृढ़ करने पर केंद्रित परियोजनाएं शामिल हैं।

आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाना और उच्च गुणवत्ता वाले चिकित्सा उत्पादों और सेवाओं तक पहुंच:

भारतीय प्रतिनिधियों ने दवा और चिकित्सा उपकरण संबंधी अपने क्षेत्रों की व्यापकता और उनकी क्षमता का उल्लेख किया जिसमें उनके घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने, निर्भरता कम करने और लक्षित नीतिगत उपायों के माध्यम से सस्ती दर पर उपलब्धता सुनिश्चित करने पर बल दिया गया। जापानी प्रतिनिधियों ने चिकित्सा उत्पादों और सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने, मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं के निर्माण और सुव्यवस्थित साझेदारी के माध्यम से प्रौद्योगिकी के उपयोग को सुगम बनाने के उद्देश्य से समन्वित सार्वजनिक-निजी सहयोग के अपने मॉडल के बारे में विस्तार से बताया।

डिजिटल स्वास्थ्य:

भारतीय प्रतिनिधियों ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के अंतर्गत डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के अपने दृष्टिकोण की रूपरेखा प्रस्तुत की जिससे अंतरसंचालनीय, सुरक्षित और नागरिक-केंद्रित डिजिटल स्वास्थ्य के अनुरूप परिवेश विकसित हो जिसको अपनाने और एकीकरण में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। जापानी प्रतिनिधियों ने उभरते डिजिटल प्लेटफार्मों का लाभ उठाते हुए प्रणालियों को आपस में जोड़ने, एआई-सक्षम चिकित्सा प्रौद्योगिकियों और अनुसंधान में सहयोग के माध्यम से डिजिटलीकरण को आगे बढ़ाने के संबंध में अपने अनुभव साझा किए।

मानव संसाधन विकास और आदान-प्रदान:

भारतीय प्रतिनिधियों ने कुशल और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी स्वास्थ्य सेवा कार्यबल में सहायक अपनी नीति और नियामक प्रणाली के साथ-साथ आदान-प्रदान संबंधी कार्यक्रमों, संयुक्त प्रशिक्षण और दक्षताओं की पारस्परिक मान्यता के लिए सुव्यवस्थित मार्गों और तौर-तरीकों का उल्लेख किया। जापानी प्रतिनिधियों ने चिकित्सा क्षेत्र में संयुक्त रूप से अनुसंधान, कर्मियों के आदान-प्रदान और सहयोग के आधार पर वैज्ञानिक गतिविधियों में सहायता के लिए काम कर रहे तंत्र के बारे में विस्तृत विवरण दिया।

श्री नड्डा ने अपने समापन भाषण में कहा कि विचार-विमर्श ने भारत-जापान स्वास्थ्य साझेदारी को नई गति प्रदान की है। उन्होंने प्राथमिकता वाले प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि की। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि चर्चाओं ने सामर्थ्यवान और समावेशी स्वास्थ्य प्रणालियों को सुदृढ़ करने के लिए स्पष्ट दिशा निर्धारित की है।

उन्होंने यह भी कहा कि बैठक के परिणाम दोनों देशों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए मजबूत आधार प्रदान करेंगे। उन्होंने आपसी विचारों को दोनों देशों के नागरिकों के लिए सार्थक परिणामों में बदलने के उद्देश्य से जापान के साथ मिलकर काम करने की भारत की प्रतिबद्धता दोहराई।

सुश्री ओनोदा ने आपसी सहयोग को और आगे बढ़ाने के प्रति जापान की प्रतिबद्धता पर बल देते हुए स्वास्थ्य क्षेत्र में भारत और जापान के बीच विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को मजबूत करने के जापान के संकल्प को दोहराया।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने दुर्लभ रोगों पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का किया उद्घाटन

नई दिल्ली/सत्ता संदेश

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने मंगलावर को नई दिल्ली में 5 और 6 मई को आयोजित होने वाले दो दिवसीय राष्ट्रीय दुर्लभ रोग सम्मेलन का उद्घाटन किया। यह दुर्लभ रोगों से उत्पन्न चुनौतियों से निपटने के तरीके को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस मौके पर मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने कहा कि इस सम्मेलन के आयोजन का मुख्य उद्देश्य हितधारकों के समक्ष आने वाली चुनौतियों को समझना, नवाचारों को प्रोत्साहित करना और देश में दुर्लभ रोगों से निपटने के तरीके को सुदृढ़ करने के लिए नए विचार उत्पन्न करना है। उन्होंने कहा कि दुर्लभ रोगों से निपटने की आवश्यकता को सर्वप्रथम राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, 2017 में प्रमुखता से शामिल किया गया था और बाद में दुर्लभ रोगों के लिए राष्ट्रीय नीति, 2021 के शुभारम्भ के माध्यम से इसे संस्थागत रूप दिया गया, जिसने हमारे भारत को दुर्लभ रोगों के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय ढांचा रखने वाले देशों में स्थान दिलाया है।

उन्होंने बताया कि यह नीति देश भर के प्रमुख तृतीयक अस्पतालों- उत्कृष्टता केंद्रों (सीई) के माध्यम से लागू की जाती है। पूर्वोत्तर भारत में दो उत्कृष्टता केंद्रों सहित इसकी संख्या कुछ वर्षों में 8 से बढ़कर 15 हो गई है, जिससे नैदानिक ​​देखभाल और सहायता के लिए राष्ट्रीय ढांचा मजबूत हुआ है।

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने बीमारियों के शीघ्र निदान और रोकथाम के महत्व पर जोर देते हुए, आनुवंशिक विश्लेषण, प्रारंभिक पहचान और सुविचारित नैदानिक ​​प्रबंधन की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि दुर्लभ बीमारियों के लिए सभी हितधारकों के सामूहिक और निरंतर प्रयासों की आवश्यकता है, और इस क्षेत्र में प्रगति केवल सुदृढ़ सहयोग के माध्यम से ही संभव है।

उन्होंने आनुवंशिक विकारों के प्रबंधन के लिए विशिष्ट पद्धतियों की पहल अपने एनआईडीएएन केंद्रों के माध्यम से  परिचालन में आ रही है, आनुवंशिक परामर्श सेवाओं को मजबूत किया जा रहा है, और दुर्लभ रोग नीति के तहत लगभग 1,800 रोगियों को पहले ही उपचार सहायता मिल चुकी है। उन्होंने प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने और उपचारों तक पहुंच में सुधार लाने के लिए नियामक निकायों और अन्य मंत्रालयों के साथ किए जा रहे सहयोगात्मक प्रयासों की भी सराहना की।

स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (डीएचआर) के सचिव और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने पिछले तीन दशकों में दुर्लभ रोगों के क्षेत्र में हुई महत्वपूर्ण प्रगति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि 1990 के दशक में, किसी संदिग्ध दुर्लभ रोग से पीड़ित रोगी की पहचान होने पर उसकी सहायता मुश्किल होती थी क्योंकि बीमारी का निदान अत्यंत कठिन था और उपचार के विकल्प लगभग अनुपलब्ध थे। आज, हालांकि उपचारों की उच्च लागत को देखते हुए प्रति रोगी 50 लाख रुपये की वित्तीय सहायता भी अपर्याप्त लग सकती है, फिर भी यह उल्लेखनीय प्रगति है कि देश अब दुर्लभ रोगों से पीड़ित बच्चों को सार्थक सहायता प्रदान करने में सक्षम है।

अंतराष्ट्रीय योग महोत्सव 2026: 50 दिन पहले 6 हजार लोगों ने भुजंगासन कर बनाया एशिया रिकॉर्ड

हैदराबाद/सत्ता संदेश

मोतियों की नगरी हैदराबाद में योग महोत्सव के उपलक्ष्य में एक भव्य आयोजन हुआ जिसमें हजारों उत्साही लोग एकत्रित हुए। यह आयोजन अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 के मुख्य आयोजन से 50 दिन पहले के कार्यक्रम से जुड़ा था। आयुष मंत्रालय के अधीन मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम शांत आध्यात्मिक केंद्र, कान्हा शांति वनम में हुआ।

कान्हा शांति वनम में 6000 से अधिक प्रतिभागियों ने एक साथ भुजंगासन का अभ्यास किया जिससे एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड बना और यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हुई क्योंकि इस आयोजन को एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में एक साथ आसन करने वाले सबसे बड़े समूह के रूप में दर्ज किया गया।

इस कार्यक्रम में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी.किशन रेड्डी उपस्थित थे। मंत्री ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि “भारत को 2047 तक विकसित भारत बनने के लिए एक स्वस्थ, शांतिपूर्ण और अनुशासित समाज का निर्माण करना होगा। योग तनाव, अस्वस्थ जीवनशैली और प्रदूषण जैसी आधुनिक चुनौतियों का व्यावहारिक और किफायती समाधान प्रदान करता है।

आयुष मंत्रालय के राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने सभा को संबोधित करते हुए कहा, “पीएम मोदी के नेतृत्व में योग समग्र कल्याण के लिए एक वैश्विक आंदोलन के रूप में विकसित हुआ है जो शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक स्पष्टता और भावनात्मक संतुलन को बढ़ावा देता है।”

योग महोत्सव का एक प्रमुख आकर्षण सामान्य योग प्रणाली का सामूहिक प्रदर्शन था। सत्र का नेतृत्व एमडीएनआईवाई के निदेशक डॉ. काशीनाथ समागंडी ने एमडीएनआईवाई के योग प्रशिक्षकों के साथ मिलकर किया। सीवाईपी अभ्यास के बाद दाजी द्वारा हार्टफुलनेस मेडिटेशन सत्र का संचालन किया गया।

कजाकिस्तान, लेसोथो, बुल्गारिया, क्यूबा, ​​नामीबिया, यूनाइटेड किंगडम, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया सहित 20 से अधिक देशों के दूतावासों, वाणिज्य दूतावासों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के गणमान्य व्यक्तियों और प्रतिनिधियों ने इस योग कार्यक्रम में भाग लिया, जो योग के बढ़ते वैश्विक प्रभाव को दर्शाता है।

कान्हा शांति वनम में आयोजित योग महोत्सव, अतंर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है, जो योग के माध्यम से समग्र स्वास्थ्य, कल्याण और सतत जीवन को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है।

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने 10वें राष्ट्रीय स्वास्थ्य शिखर सम्मेलन का किया उद्घाटन

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने नवाचार और समावेशिता पर 10वें राष्ट्रीय स्वास्थ्य शिखर सम्मेलन का उद्घाटन किया: कहा, सर्वोत्तम प्रथाएं भारत के स्वास्थ्य भविष्य को आकार दे रहीं हैं

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व में समग्र स्वास्थ्य सेवा की दिशा में हुए परिवर्तनकारी बदलावों का उल्‍लेख किया, अग्रिम पंक्ति सेवा वितरण और स्वास्थ्य परिणाम सुदृढ़ करने की पहल का शुभारंभ

आयुष्मान आरोग्य मंदिर निवारक देखभाल को सुदृढ़ बनाते हैं; केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने गुणवत्तापूर्ण स्‍वास्‍थ्‍य सेवा पर जोर देते हुए मृत्यु दर और रोग भार में कमी का उल्लेख किया

मजबूत और समावेशी स्वास्थ्य प्रणाली स्‍थापित करने के लिए गैर-संचारी रोगों की उपचरात्‍मक प्रक्रिया मजबूत बनाना, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन का कार्यान्वयन बढ़ाना और अंतिम छोर तक प्रभावी स्वास्थ्य सेवा वितरण सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने केयर अभियान, डिजिटल स्वास्थ्य विस्तार और निवेश वृद्धि के माध्यम से हरियाणा के स्वास्थ्य सेवा बदलाव का उल्‍लेख किया

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने कहा राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के 80वें दौर के निष्कर्षों में कहा गया है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में बाह्य रोगी देखभाल पर जेब से होने वाला औसत व्यय शून्य हो गया है, जिससे नि:शुल्‍क स्वास्थ्य सेवा पहुंच मजबूत हुई है:

10वें राष्ट्रीय स्वास्थ्य शिखर सम्मेलन में प्रमुख राष्ट्रीय स्वास्थ्य पहल आरंभ किए गए, जिनमें सर्वश्रेष्ठ अभ्यास संकलन, 17वीं कॉमन रिव्यू मिशन रिपोर्ट, स्वस्थ भारत और जननी पोर्टल और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम दूसरा चरण शामिल हैं

चंडीगढ़, 30 अप्रैल 2026: केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी और हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री श्रीमती आरती सिंह राव की उपस्थिति में नवाचार एवं समावेशिता: भारत के स्वास्थ्य भविष्य को आकार देने वाली सर्वोत्तम प्रथाएं विषय पर 10वें राष्ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य शिखर सम्मेलन का उद्घाटन किया।

यह सम्मेलन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र में विशिष्ट नवाचारों और सर्वोत्तम प्रथा प्रदर्शित करने का प्रमुख मंच है, जिसका उद्देश्य देश भर में समावेशी, सुलभ और सस्ते दर पर स्वास्थ्य सेवा विस्तारित करना है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने अपने संबोधन में सम्मेलन की मेजबानी के लिए हरियाणा सरकार का आभार व्यक्त करते हुए और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में नवाचारों को बढ़ावा देने में राज्य की सराहना की। श्री नड्डा ने कहा कि यह शिखर सम्मेलन दर्शाता है कि व्यावहारिक, जमीनी स्तर पर संचालित रणनीतियां सामूहिक रूप से प्रभावी और दायित्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को आकार दे सकती है।

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने इस अवसर पर आरंभ किए गए पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि इनका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के लिए कामकाज सुगम बनाना, सेवा वितरण बेहतर बनाना और स्वास्थ्य सेवा में सुधार लाना है। उन्होंने कहा कि इनका लक्ष्य कुशल, एकीकृत और सेवा प्रदाताओं एवं लाभार्थियों दोनों की आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील प्रणालियों को सक्षम बनाना है।

केन्‍द्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ने पिछले एक दशक में भारत के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में हुए बदलावों की चर्चा करते हुए कहा कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के मार्गदर्शन में देश ने विकसित भारत के दृष्टिकोण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है। उन्‍होंने कहा कि इस यात्रा में एक अहम पड़ाव उपचारात्मक दृष्टिकोण से आगे बढ़कर व्यापक और समग्र स्वास्थ्य सेवा ढांचे की ओर बदलाव है। उन्होंने बताया कि 2002 की राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति मुख्य रूप से उपचारात्मक देखभाल पर केंद्रित थी, पर 2017 की राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति से स्वास्थ्य सेवा के निवारक, संवर्धक, उपचारात्मक और उपशामक पहलुओं को शामिल कर उल्‍लेखनीय बदलाव आया है, जिससे अधिक समावेशी और जन-केंद्रित प्रणाली सुनिश्चित हुई है।

श्री नड्डा ने 1 लाख 85 हजार से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया, जो अब करोड़ों के लिए प्राथमिक संपर्क केन्‍द्र के रूप में कार्य करते हैं। इन केंद्रों ने निवारक स्वास्थ्य देखभाल को काफी मजबूत बनाया है, जिसमें 30 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए उच्च रक्तचाप, मधुमेह और कैंसर (मुंह, स्तन और गर्भाशय ग्रीवा) जैसी गैर-संक्रामक बीमारियों की बड़े पैमाने पर जांच शामिल है।

स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ने समेकन और गुणवत्ता संवर्धन की दिशा में आगे बढ़ने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि 50 हजार से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानकों के तहत प्रमाणित किया गया है, फिर भी गुणवत्ता प्रमाणन को और अधिक बढ़ाने और लगातार बेहतर प्रदर्शन और सकारात्‍मक परिणाम सुनिश्चित करने के लिए नियमित आकलन मजबूत बनाने की आवश्यकता है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने प्रमुख स्वास्थ्य उपलब्धियों की चर्चा करते हुए कहा कि संस्थागत प्रसवों (मान्यता प्राप्त चिकित्सा केंद्र-अस्पताल, स्वास्थ्य केंद्र में प्रशिक्षित चिकित्सा कर्मियों की देखरेख में सुरक्षित प्रसव) में 79 प्रतिशत से 89 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो मातृ स्वास्थ्य सेवाओं तक बेहतर पहुंच को दर्शाती है। उन्‍होंने कहा मातृ मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आई है और पिछले कई वर्षों से इसमें निरंतर प्रगति रही है। स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ने हाल के वैश्विक अनुमानों का हवाला देते हुए बताया कि भारत ने पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में 79 प्रतिशत और शिशु मृत्यु दर में 73 प्रतिशत की कमी की है। उन्होंने रोग नियंत्रण में भी भारत की प्रगति का लेख किया। उन्‍होंने कहा कि विश्व की लगभग एक-छठीं जनसंख्या होने के बावजूद, भारत में वैश्विक मलेरिया के बोझ का केवल छोटा हिस्सा है। इसी प्रकार, भारत में तपेदिक के मामलों में वैश्विक औसत से अधिक तेजी से गिरावट आई है और उपचार दायरा 92 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

श्री नड्डा ने जन स्वास्थ्य के क्षेत्र में हासिल प्रमुख उपलब्धियों का भी उल्लेख किया, जिनमें 2014 में भारत को पोलियो मुक्त घोषित किया जाना, 2015 में नवजात शिशुओं में होने वाले टिटनेस का उन्मूलन और ट्रेकोमा (बैक्टीरिया से होने वाला आंखों के अत्यंत संक्रामक संक्रमण है, का जन स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय न होना शामिल है। विश्व स्वास्थ्य संगठन अनुसार, भारत अब ट्रेकोमा मुक्त देश घोषित है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत निकट भविष्य में काला-अजार के उन्मूलन की दिशा में अग्रसर है।

उभरती चुनौतियों का उल्‍लेख करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने गैर-संक्रामक रोगों के बढ़ते बोझ बोझ की चर्चा की और प्रभावी जांच, समय पर निदान और निरंतर देखभाल के लिए आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को और बेहतर बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि हालांकि देश भर में बड़े पैमाने पर स्क्रीनिंग (निवारक स्वास्थ्य प्रक्रिया जिसके द्वारा रोग के कोई लक्षण न होने पर भी, किसी आबादी में बीमारी की संभावना या शुरुआती संकेतों का पता लगाया जाता है) की गई है, लेकिन अब समय पर अनुवर्ती कार्रवाई, उपचार और रेफरल तंत्र (रोगी को कम सुविधाओं वाले केंद्र से बेहतर विशेषज्ञों, संसाधनों या सेवाओं वाले उच्च केंद्र में भेजा जाना) सुनिश्चित करने पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।

श्री नड्डा ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत बेहतर योजना और कार्यान्वयन की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि संसाधनों के अधिकतम उपयोग के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारियों और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों सहित जमीनी स्तर के अधिकारियों में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के प्रावधानों के बारे में अधिक जागरूकता आवश्यक है। उन्होंने उत्‍तरदायित्‍व और बेहतर परिणाम सुनिश्चित करने के लिए समय पर निधियों के उपयोग, हितधारकों के बीच बेहतर तालमेल और जन प्रतिनिधियों के साथ सक्रिय भागीदारी के महत्व पर भी बल दिया।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने अपने संबोधन के समापन में कहा कि वित्तीय संसाधन उपलब्ध हैं, लेकिन सफलता का राज उनके प्रभावी और समयबद्ध उपयोग में निहित है। सुदृढ़ शासन, बेहतर संचार और अंतिम छोर तक कार्यान्वयन सुनिश्चित करना भारत के लिए सशक्त, समावेशी और भविष्योन्‍मुखी स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण होगा।

हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने अपने संबोधन में सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों को सुदृढ़़ बनाने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने और आपसी ज्ञान को बढ़ावा देने के महत्वपूर्ण मंच के रूप में शिखर सम्मेलन के महत्व का उल्‍लेख किया

हरियाणा की पहल की चर्चा करते हुए, उन्होंने केयर अभियान की जानकारी दी, जिसके तहत 188 केंद्रों में मरीजों के परिवारों को घर पर देखभाल में सहायता के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। उन्होंने ई-संजीवनी माध्यम से डिजिटल स्वास्थ्य में राज्य की प्रगति का उल्‍लेख किया, जिसके तहत आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में मरीजों को विशेषज्ञों से जोड़ने वाले प्रतिदिन लगभग 2 हजार टेलीकंसल्टेशन आयोजित किए जा रहे हैं।

श्री सैनी ने बताया कि हरियाणा ने अपने स्वास्थ्य बजट में 32.89 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि की है, जो लगभग 14 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। उन्होंने चिकित्सा शिक्षा बुनयादी ढांचे के विस्तारित किए जाने का भी उल्‍लेख किया, जिसके तहत मेडिकल कॉलेजों की संख्या 2014 के 6 से बढ़कर अब 17 हो गई है और एमबीबीएस की सीटें 700 से बढ़कर 2,710 पहुंच गई हैं।

गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा पर जोर देते हुए उन्होंने कि राज्य के 1,479 स्वास्थ्य संस्थानों को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक प्रमाणन प्राप्त हुआ है। उन्होंने सेवा वितरण में हासिल प्रमुख उपलब्धियों की भी चर्चा की, जिनमें सभी जिला अस्पतालों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य विभाग की स्थापना, आपातकालीन देखभाल के लिए 500 एम्बुलेंस के नेटवर्क और 22 जिला अस्पतालों में नि:शुल्‍क डायलिसिस सेवाएं (रक्त से हानिकारक विषाक्त पदार्थों, अतिरिक्त तरल पदार्थ और अपशिष्ट को साफ करती है) उपलब्ध कराना शामिल है।

मुख्यमंत्री ने सबके लिए सुलभ, कम खर्च वाले और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा मजबूत बनाने की लिए राज्य की प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री श्रीमती आरती सिंह राव ने मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में राज्य में स्‍वास्‍थ्‍य सेवा के क्षेत्र में हुई प्रगति का उल्‍लेख किया, जिसमें प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा सुदृढ़ बनाना, चिकित्सा शिक्षा का विस्तार और नि:शुल्‍क दवाओं तक पहुंच में सुधार शामिल है।

उन्होंने कहा कि अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में काफी सुधार हुआ है। उन्होंने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, राष्ट्रीय कैंसर संस्थान और राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों के सहयोग के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को धन्यवाद दिया। उन्होंने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार की दिशा में कदम के रूप में ह्यूमन पेपिलोमावायरस टीकाकरण के कार्यान्वयन की भी चर्चा की। श्रीमती आरती सिंह राव ने राज्‍य का स्वास्थ्य बजट में 2014 के 2,640 करोड़ रुपये से बढ़कर 14 हजार करोड़ रुपये होने का उल्लेख किया और बड़े पैमाने पर गैर-संचारी रोगों की जांच पर राज्य के केन्द्रित ध्‍यान की चर्चा की। उन्होंने 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में अग्रणी भूमिका निभाने की हरियाणा की प्रतिबद्धता दोहराई।

इस अवसर केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव श्रीमती पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने कहा कि सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों का संकलन राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप साक्ष्य-आधारित, संदर्भ-विशिष्ट समाधानों को प्रदर्शित करने वाला महत्वपूर्ण संदर्भ दस्तावेज है। उन्होंने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत प्रौद्योगिकी की परिवर्तनकारी भूमिका का उल्‍लेख किया जो स्‍वास्‍थ्‍य प्रबंधन सूचना प्रणाली, जननी और ई-संजीवनी जैसे प्लेटफार्मों पर आभा आईडी के एकीकरण को सक्षम बनाती है, जिससे दक्षता में सुधार होता है और डेटा-आधारित निर्णय लेने में सहायता मिलती है।

केन्द्रीय स्‍वास्‍थ्‍य सचिव ने कहा कि स्वस्थ भारत पोर्टल कई स्वास्थ्य कार्यक्रमों को एक ही अंतरसंचालनीय मंच में शामिल कर अभिसरण की दिशा में बड़ा कदम है, जबकि जननी प्लेटफॉर्म वास्तविक समय निगरानी और डिजिटल एकीकरण द्वारा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य देखभाल मजबूत बनाने में सहायक है।

17वें संयुक्त समीक्षा मिशन की रिपोर्ट की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि यह राज्यों को जन भागीदारी और कार्यान्वयन मजबूत करने के लिए उपयोगी जानकारी प्रदान करती है। उन्होंने गैर-संक्रामक रोगों में हो रही वृद्धि से निपटने के महत्व पर भी बल दिया और कहा कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम का दूसरा चरण और बच्चों के लिए मधुमेह संबंधी दिशानिर्देश शीघ्र निदान और निरंतर देखभाल में सहायक होंगे।

स्‍वास्‍थ्‍य सचिव ने गुणवत्तापूर्ण स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल में हुए सुधारों की भी चर्चा की। जिनमें 48 हजार से अधिक भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य मानक-अनुरूप और 50 हजार से अधिक राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक-प्रमाणित सुविधाएं शामिल हैं। साथ ही उन्‍होंने तपेदिक मुक्त भारत अभियान के तहत हुई प्रगति का भी उल्लेख किया। उन्होंने अग्नि सुरक्षा ऑडिट (इमारत या कार्यस्थल में आग के खतरों से संबंधित व्यवस्थित और तकनीकी मूल्यांकन जिसमें अग्निशमन प्रणालियों की जांच करना, शॉर्ट सर्किट, ज्वलनशील सामग्री जैसे संभावित खतरों की पहचान और नेशनल बिल्डिंग कोड के अनुसार सुरक्षा उपायों को सुनिश्चित करना), लू से निपटने के उपाय और रोगाणुरोधी प्रतिरोध से निपटने के प्रयासों सहित मजबूत तैयारियों के उपायों को भी रेखांकित किया।

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के स्वास्थ्य पर घरेलू उपभोग के 80वें दौर के सर्वेक्षण के निष्कर्षों का हवाला देते हुए, उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में बाह्य रोगी देखभाल के लिए जेब से होने वाला औसत व्यय अब शून्य है, जो आबादी के एक बड़े हिस्से के लिए नि:शुल्‍क और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने की सरकार की प्रतिबद्धता दर्शाती है।

10वें राष्ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य शिखर सम्मेलन में कई प्रमुख पहल का शुभारंभ किया गया, जिनमें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत प्रतिरूपणीय नवाचारों पर सर्वोत्तम अभ्यास संकलन, 17वीं सामान्य समीक्षा मिशन रिपोर्ट, स्वस्थ भारत पोर्टल, जननी पोर्टल, प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल टीमों के लिए एकीकृत प्रशिक्षण मॉड्यूल और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम द्वितीय चरण के साथ ही बच्चों और किशोरों में मधुमेह पर एक मार्गदर्शन दस्तावेज शामिल हैं

17वीं कॉमन रिव्यू मिशन रिपोर्ट

(भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की प्रमुख वार्षिक मूल्यांकन रिपोर्ट

सीआरएम स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की एक वार्षिक निगरानी गतिविधि है, जो राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और संबंधित प्रासंगिक कार्यक्रमों के कार्यान्वयन की समीक्षा और मूल्यांकन के लिए प्रतिवर्ष आयोजित की जाती है।

इस वर्ष, सीआरएम का 17वां चरण सत्रह राज्यों – आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मेघालय, नागालैंड, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में आयोजित किया गया। यह व्यापक अभ्यास कॉमन रिव्यू मिशन प्रक्रिया की समावेशिता को दर्शाता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि विभिन्न संदर्भों का प्रतिनिधित्व हो और देश भर में निगरानी में नवाचार शामिल किए जाएं। एक साथ कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल कर मिशन उत्‍तरदायित्‍व बढ़ाता है, अंतर-शिक्षण को बढ़ावा देता है और साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य प्रणाली सुदृढ़ बनाने के लिए सामूहिक प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है।

स्वस्थ भारत पोर्टल

यह एक एकीकृत मंच है जिसे कई राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों को एक ही डिजिटल इंटरफ़ेस पर प्राप्‍त करने के लिए तैयार किया गया है। इसमें बार-बार लॉगिन करने और डेटा दर्ज करने की आवश्यकता समाप्त की गई है जिससे यह पोर्टल स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं पर प्रशासनिक बोझ में कमी लाकर सभी स्तरों पर सेवा वितरण में दक्षता बढ़ाता है।

आशा कार्यकर्ता, एएनएम, सीएचओ और चिकित्सा अधिकारी सहित भारत के अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्यकर्मी कार्यक्रम रिपोर्टिंग में कई अनुप्रयोगों के उपयोग में प्राय: काफी समय लगाते हैं। स्वस्थ भारत पोर्टल एकीकृत मंच प्रदान करके इस चुनौती का समाधान करता है, जिससे डेटा तक आसान पहुंच, उसका विश्लेषण और स्थानीय स्तर पर निगरानी और साक्ष्य-आधारित योजना के लिए उनका उपयोग संभव हो पाता है। यह पोर्टल आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के अनुरूप है और आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता के साथ एकीकरण का समर्थन करता है, जिससे रोगी स्वास्थ्य अभिलेखों का निर्बाध और सुरक्षित आदान-प्रदान संभव होता है। इसे व्यापक और अंतःसंचालनीय डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में विकसित करने के लिए तैयार किया गया है, जो आगे स्वास्थ्य सेवा पेशेवर रजिस्ट्री (हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स रजिस्ट्री और स्वास्थ्य सुविधा रजिस्ट्री जैसी राष्ट्रीय रजिस्ट्रियों के साथ एकीकृत होगा।

जननी पोर्टल

जननी – प्रसवपूर्व, प्रसव और नवजात शिशु की एकीकृत देखभाल की यात्रा – सेहत के साथ, देखभाल का हर कदम, हेतु एक सशक्त डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन ढांचे के अनुरूप है और इसे देश भर में प्रजनन, मातृ, नवजात, बाल और किशोर स्वास्थ्य डेटा के विश्वसनीय स्रोत के रूप में कार्य करने के लिए तैयार किया गया है। जननी गर्भावस्था से पूर्व, गर्भावस्था, प्रसव और बचपन तक निरंतर देखभाल सुनिश्चित करने के लिए जीवनचक्र दृष्टिकोण अपनाता है। यह एप्लिकेशन महत्वपूर्ण स्वास्थ्य मापदंडों पर वास्तविक समय का उच्च-गुणवत्ता पूर्ण डेटा संग्रह करता है, जिससे उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं और विशिष्ट स्वास्थ्य स्थितियों वाले बच्चों सहित कमजोर समूहों की शीघ्र पहचान करने और समय पर सहायता करायी जाती है। सेवा वितरण को डिजिटल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ एकीकृत कर जननी अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कर्मियों और नीति निर्माताओं दोनों को साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने को मजबूत करने, स्वास्थ्य परिणामों में सुधार लाने और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से संबंधित सतत विकास लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में प्रगति सशक्त बनाता है।

प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल कार्यकर्ता टीम के लिए एकीकृत प्रशिक्षण मॉड्यूल

प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल टीमों के लिए एकीकृत प्रशिक्षण इस आधार को सुदृढ़ की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। विभिन्न कार्यक्रम-आधारित प्रशिक्षणों को एक ही, संरचित और योग्यता-उन्मुख ढांचे में संयोजित कर यह पहल सीखने की प्रक्रिया को सरल बनाती है और साथ ही अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं की क्षमता बढ़ाती है। यह उन्हें रोकथाम और प्रारंभिक पहचान से लेकर उपचार और अनुवर्ती देखभाल तक व्यापक देखभाल प्रदान करने में सक्षम बनाती है, जिससे लोगों को सही समय पर, उनके घरों के करीब, सही देखभाल सुनिश्‍चित होता है। भारत की तकनीकी प्रगति के अनुरूप, आई गॉट कर्मयोगी जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म निरंतर सीखने को सक्षम बनाएंगे, जिससे कार्यबल अधिक अनुकूलनीय और भविष्य अनुरूप तैयार हो सकेगा।

यह पहल दो महत्वपूर्ण मायनों में विश‍िष्‍ठ है। यह सामुदायिक कार्यबल की क्षमता मजबूत करती है ताकि वे सहानुभूतिपूर्ण, संवेदनशील और उच्च गुणवत्ता पूर्ण देखभाल प्रदान कर सकें। दूसरा, यह उन महिलाओं को सशक्त बनाती है जो प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा की रीढ़ हैं। इस कार्यबल का 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सा महिलाएं हैं, जिनमें आशा कार्यकर्ता, सहायक नर्स और दाई और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी शामिल हैं। माननीय प्रधानमंत्री ने नारी शक्ति के महत्व पर लगातार जोर दिया है , और यह पहल उस दृष्टिकोण का एक सशक्त उदाहरण है। अग्रिम पंक्ति में महिलाओं को शामिल कर भारत समुदायों में परिवर्तनकारी बदलाव ला रहा है।

एकीकृत प्रशिक्षण मॉड्यूल प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल टीमों को समग्र, जन-केंद्रित देखभाल प्रदान करने में सक्षम बनाएंगे, साथ ही समुदायों और स्वास्थ्य प्रणाली के बीच विश्वास मजबूत करेंगे। यह केवल प्रशिक्षण सुधार नहीं बल्कि भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य के भविष्य की दृष्टि से महत्‍वपूर्ण कदम है।

बच्चों और किशोरों में मधुमेह पर राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम द्वितीय चरण और मार्गदर्शन दस्तावेज़

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम द्वितीय चरण दिशानिर्देश 2013 के ढांचे से एक महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाते हैं, जो जन्मजात दोष, रोग, कमियां और विकासात्मक विलंब – इन चार विषमताओं के दृष्टिकोण को सुदृढ़ और विस्तारित करते हैं। नए दिशानिर्देश बच्चों में उभरती हुई स्थितियों और गैर-संक्रामक रोगों सहित, बच्चों के स्वास्थ्य संबंधी बदलती जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार किए गए हैं।

मुख्य विशेषताएं

– अतिरिक्त जन्मजात स्थितियों, विकासात्मक और व्यवहार संबंधी चिंताओं और बचपन के गैर-संचारी रोगों को शामिल करते हुए विस्तारित दायरा
– बाल विकास संबंधी निगरानी, ​​बेहतर रेफरल प्रणाली और कार्यक्रम निगरानी के लिए सशक्त डिजिटल प्लेटफॉर्म
– शीघ्र पहचान, समय पर हस्तक्षेप और निरंतर अनुवर्ती कार्रवाई सुनिश्चित करने संबंधी सेवा वितरण तंत्रों को सुदृढ़ बनाना
– सामुदायिक जांच, सुविधाओं और दीर्घकालिक प्रबंधन के बीच मजबूत संबंधों के माध्यम से देखभाल की निरंतरता को बढ़ाना

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम विश्व स्तर पर सबसे बड़े बाल स्वास्थ्य जांच कार्यक्रमों में से एक है, जिसमें जन्म से लेकर 18 वर्ष तक के बच्चे शामिल हैं।

राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य शिखर सम्मेलन में तकनीकी सत्र, पैनल परिचर्चा और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा डिजिटल स्वास्थ्य नवाचार, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा सुदृढ़ीकरण वित्तीय सुरक्षा और सामुदायिक भागीदारी सहित विभिन्न विषयों पर प्रस्तुतियां शामिल रहीं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा नवाचार पोर्टल के द्वारा चयनित सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा ज्ञानवर्धन और संभावित कार्यान्वयन हेतु प्रदर्शित किया जा रहा है।

Day-NRLM और Help Age India के बीच MoU, वरिष्ठ नागरिक देखभाल को मिलेगा बढ़ावा

दिल्ली/सत्ता संदेश


समावेशी ग्रामीण विकास को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, ग्रामीण विकास मंत्रालय ने हेल्पएज इंडिया के साथ दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के खाद्य, पोषण, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता फ्रेमवर्क के अंतर्गत वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल एवं कल्याण को सुदृढ़ करने हेतु एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया।
यह एमओयू मंत्रालय के अपर सचिव टीके अनिल कुमार तथा हेल्पएज इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रोहित प्रसाद द्वारा, वरिष्ठ अधिकारियों एवं बिहार, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, झारखंड और तमिलनाडु के राज्य प्रतिनिधियों की उपस्थिति में हस्ताक्षरित किया गया।


अपर सचिव ने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों से संबंधित चुनौतियों के समाधान हेतु समग्र, समुदाय-आधारित एवं अभिसरित दृष्टिकोण आवश्यक है। उन्होंने नीति आयोग द्वारा सुझाए गए सुलभ, सतत एवं गरिमापूर्ण सामुदायिक देखभाल मॉडल के विकास पर बल देते हुए राज्यों के अनुभवों से सीखकर आगे बढ़ने का आह्वान किया।


संयुक्त सचिव स्वाती शर्मा ने कहा कि यह पहल “लखपति दीदी” अभियान को भी सशक्त बनाएगी, क्योंकि स्वस्थ एवं सक्षम महिलाएँ ही आर्थिक प्रगति में अग्रणी भूमिका निभा सकती हैं।


हेल्पएज इंडिया के सीईओ रोहित प्रसाद ने कहा कि भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में, वरिष्ठ नागरिकों की संख्या निरंतर बढ़ रही है और उन्हें स्वास्थ्य, पोषण, गतिशीलता तथा सामाजिक अलगाव जैसी अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि हेल्पएज इंडिया का अनुभव तथा डे-एनआरएलएम का व्यापक एसएचजी नेटवर्क मिलकर इन चुनौतियों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।


उप सचिव डॉ. मोनिका ने बताया कि FNHW के अंतर्गत किए जा रहे प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से खाद्य, पोषण, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के प्रति जागरूकता एवं व्यवहार परिवर्तन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई हैऔर इसी क्रम में अब वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल को भी प्राथमिकता दी जा रही है।
यह पहल एफएनएचडब्ल्यू फ्रेमवर्क के अंतर्गत वरिष्ठ नागरिक देखभाल के लिए राष्ट्रीय रणनीति के सह-विकास पर केंद्रित होगी। इसके तहत रणनीति निर्माण, क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण मॉड्यूल और क्रियान्वयन हेतु आवश्यक संसाधन विकसित किए जाएंगे।


प्रारंभिक चरण में बिहार, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, झारखंड और तमिलनाडु में पायलट परियोजना लागू की जाएगी, जिसके आधार पर एक स्केलेबल मॉडल विकसित किया जाएगा।


यह प्रयास “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसमें प्रत्येक वरिष्ठ नागरिक को गरिमा, सुरक्षा और समावेशन के साथ जीवन जीने का अवसर सुनिश्चित किया जाएगा।

जेपी नड्डा चंडीगढ़ में 10वें राष्ट्रीय स्वास्थ्य शिखर सम्मेलन का करेंगे उद्घाटन

चंडीगढ़/सत्ता संदेश
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों में बेहतर और अनुकरणीय प्रथाओं तथा नवाचारों पर 10वें राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन का आयोजन 30 अप्रैल से 1 मई तक चंडीगढ़ में आयोजित किया जाएगा।


इस शिखर सम्मेलन का उद्घाटन केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और राज्य की स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री आरती सिंह राव की मौजूदगी में किया जाएगा।


इस कार्यक्रम में अतिरिक्त मुख्य सचिव और प्रधान सचिव, मिशन निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रबंधन के अंतर्गत राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के वरिष्ठ नोडल अधिकारी और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी भाग लेंगे।


राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन, स्वास्थ्य मंत्रालय की एक प्रमुख पहल है जिसका उद्देश्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा विभिन्न सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए अपनाई गई नवोन्मेषी और प्रभावशाली पद्धतियों को प्रदर्शित करना, मान्यता देना और उनका दस्तावेजीकरण करना है। यह आपसी ज्ञानवर्धन के लिए एक मंच के रूप में भी कार्य करता है और देश भर में सफल और व्यापक रूप से लागू किए जा सकते है। और आने वाले मॉडलों के अनुकरण को सुगम बनाता है। वार्षिक शिखर सम्मेलन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा वितरण और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में नवोन्मेषी, साक्ष्य-आधारित और परिणाम-उन्मुख कार्यक्रमों को प्रस्तुत करने का एक मूल्यवान अवसर प्रदान करता है, जिनसे स्वास्थ्य परिणामों में उल्लेखनीय सुधार हुए हैं।


2013 में अपनी स्थापना के बाद से, इस पहल ने सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा वितरण में अनुभवों और नवाचारों को साझा करने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एक साथ लाया है। शिखर सम्मेलन का 9वां संस्करण मार्च 2025 में पुरी में आयोजित किया गया था।


मौजूदा वर्ष के लिए, 10वें राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन की प्रक्रिया अप्रैल 2025 में शुरू हुई। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा नवाचार के माध्यम से अपनी सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों और नवाचारों को प्रस्तुत किया। सभी प्रस्तुतियां मंत्रालय के संबंधित कार्यक्रम प्रभागों द्वारा सावधानीपूर्वक मूल्यांकन और अंक प्रदान किए गए। इन मूल्यांकनों के आधार पर, कार्यक्रम प्रभागों से प्राप्त सुझावों और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के सहायक एवं निदेशक मंडल की अध्यक्षता में विस्तृत समीक्षा के बाद शिखर सम्मेलन के लिए कुल 13 मौखिक प्रस्तुतियां और 32 पोस्टर प्रस्तुतियां चयनित की गई हैं।


प्रस्तुतियों के अलावा, शिखर सम्मेलन में नवंबर 2025 में 17 राज्यों में आयोजित 17वें संयुक्त समीक्षा मिशन की रिपोर्ट का प्रसार भी किया जाएगा। इस कार्य के लिए, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधिकारियों, अन्य मंत्रालयों के प्रतिनिधियों, सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों, नागरिक समाज संगठनों, विकास भागीदारों और मंत्रालय के सलाहकारों से युक्त 17 बहु-विषयक टीमों का गठन किया गया था। सीआरएम के निष्कर्ष सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों के कामकाज में महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि प्रदान करते हैं और भविष्य की नीति एवं कार्यक्रम संबंधी हस्तक्षेपों को दिशा देने में सहायक होंगे।


इस शिखर सम्मेलन में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा को मजबूत करने, डिजिटल स्वास्थ्य नवाचारों और सेवा वितरण प्रणालियों में सुधार जैसे प्रमुख प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर केंद्रित पूर्ण सत्र, विषयगत चर्चाएं और प्रदर्शनियां होंगी। ये प्रयास आयुष्मान भारत और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन जैसी प्रमुख पहलों के अनुरूप हैं।