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सीएक्यूएम ने नोएडा में निरीक्षण अभियान चलाया, गहन रोकथाम और सख्त प्रवर्तन के निर्देश दिए

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने 08 मई को नोएडा, राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में में एक विशेष निरीक्षण अभियान चलाया, जिसमें सड़कों पर दिखाई देने वाली धूल के स्तर का आकलन करने और शहर में सड़क की सफाई और झाड़ू लगाने के कार्यों की समीक्षा करने पर ध्यान दिया गया।  

आयोग द्वारा गठित कुल 19 उड़न दस्‍तों को नोएडा प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में आने वाले 46 सड़कों को कवर करते हुए पूरे नोएडा में तैनात किया गया था। निरीक्षण के दौरान, सेक्टर 20, 21, 59, 62, 80, 82, 83, 84, 87, 88, 138, 140, 141 और 145 सहित कई स्थानों पर अत्यधिक धूल और निर्माण एवं मलबे (सी एंड डी) के संचय के 28 मामले पाए गए। जांच में कुछ भागों में नियमित सफाई अभियान, धूल नियंत्रण उपायों और सी एंड डी कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन और निपटान में कमियों का पता चला।

आयोग ने संबंधित अधिकारियों को मशीनों से नियमित सफाई, लक्षित जल छिड़काव और संचित निर्माण एवं मलबे के समय पर संग्रहण और निपटान के माध्यम से धूल नियंत्रण उपायों को तेज करने का निर्देश दिया है। नोएडा प्राधिकरण को अनाधिकृत डलाव को रोकने और निर्धारित पर्यावरणीय मानदंडों का निरंतर अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए निगरानी और प्रवर्तन तंत्र को मजबूत करने की भी सलाह दी गई है।

आयोग ने इस बात पर जोर दिया कि धूल नियंत्रण उपायों के कार्यान्वयन में किसी भी प्रकार की चूक और संबंधित अधिकारियों की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा। अधिकारियों को जवाबदेही तय करने और ऐसी कमियों के लिए जिम्मेदार पाए गए अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने की सलाह दी गई है।

इस बात पर ज़ोर दिया गया कि शहरी क्षेत्रों में धूल-मिट्टी प्रदूषण का एक प्रमुख कारण बनी हुई है और इसके निवारण के लिए निरंतर और लक्षित प्रयासों की आवश्यकता है। आयोग ने ज़मीनी स्तर पर निरंतर निगरानी, ​​बेहतर रखरखाव प्रक्रियाओं और जवाबदेही-आधारित धूल नियंत्रण उपायों के कार्यान्वयन की आवश्यकता पर बल दिया।

आयोग ने यह दोहराया कि वायु प्रदूषण के प्रमुख क्षेत्रों की पहचान करने और स्थानीय स्तर पर प्रदूषण के स्रोतों को कम करने के लिए जारी प्रयासों के तहत दिल्ली-एनसीआर में ‘ऑपरेशन क्लीन एयर’ अभियान जारी रहेंगे। संबंधित एजेंसियों और अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि निरीक्षण अभियान के दौरान प्राप्त निष्कर्षों के आधार पर आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई की जाएगी।

3 जन सुरक्षा योजनाएं : PMSBY, PMJJEBY, APY ने सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए 11 साल पूरे किए

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

PM नरेन्‍द्र मोदी द्वारा 9 मई 2015 को शुरू की गई जनसुरक्षा योजनाएं – प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना और अटल पेंशन योजना- समाज के सभी वंचित और कमजोर वर्गों को किफायती वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। इन प्रमुख योजनाओं का लक्ष्य नागरिकों को जीवन की अनिश्चितताओं से बचाकर और दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता को बढ़ावा देकर बीमा और पेंशन व्यवस्था को व्यापक बनाना है।

केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने तीन जन सुरक्षा योजनाओं के मार्गदर्शक सिद्धांतों पर विचार करते हुए कहा, “PM मोदी ने कम लागत वाले बीमा और पेंशन लाभ प्रदान करने के लिए पीएम जीवन ज्योति बीमा योजना, पीएम सुरक्षा बीमा योजना और अटल पेंशन योजना सहित जन सुरक्षा योजनाओं का शुभारंभ किया।”

जन सुरक्षा योजनाओं की 11वीं वर्षगांठ के आंकड़ों का उल्‍लेख करते हुए श्रीमती सीतारमण ने कहा कि PMJJBY, PMSBY और अटल पेंशन योजना के तहत 27 करोड़, 58 करोड़ और 9 करोड़ से अधिक नामांकन हुए हैं। वित्त मंत्री ने PMJJBY योजना पर कहा कि इस योजना के तहत 10.7 लाख से अधिक परिवारों के 21,500 करोड़ रुपये से अधिक के दावों का निपटारा किया गया है। सीतारमण ने कहा कि PMSBY योजना के तहत 1.84 लाख से अधिक परिवारों के लगभग 3,660 करोड़ रुपये के दावों का निपटारा किया गया है।

1. प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना

प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना किसी भी कारण से होने वाली मृत्यु के लिए प्रतिदिन 2 रुपये से कम के प्रीमियम पर जीवन बीमा कवर प्रदान करने के लिए बनाई गई है।

योजना की मुख्य विशेषता: पीएमजेजेबीवाई एक वर्षीय बीमा योजना है, जिसे हर साल नवीनीकृत किया जा सकता है। यह योजना एलआईसी और अन्य जीवन बीमा कंपनियों जो आवश्यक अनुमोदन प्राप्त करने और बैंकों/डाकघरों के साथ साझेदारी करने के बाद समान शर्तों पर यह उत्पाद प्रदान करने के लिए इच्छुक हैं, द्वारा संचालित की जाती है। सहभागी बैंक/डाकघर अपने ग्राहकों के लिए योजना को लागू करने हेतु किसी भी जीवन बीमा कंपनी को नियुक्त करने के लिए स्वतंत्र हैं।

पात्रता शर्तें: योजना में भाग लेने वाले बैंकों/डाकघरों के 18 से 50 वर्ष की आयु वर्ग के सभी व्यक्तिगत खाताधारक, जो ऑटो-डेबिट में शामिल होने/चालू करने के लिए अपनी सहमति देते हैं, इस योजना में शामिल होने के पात्र हैं। यदि किसी व्यक्ति के एक या अलग-अलग बैंकों/डाकघरों में एक से अधिक खाते हैं, तो वह केवल एक बैंक/डाकघर खाते के माध्यम से ही योजना में शामिल होने के पात्र है।

नामांकन अवधि: यह कवर 1 जून से 31 मई तक एक वर्ष की अवधि के लिए होगा, जिसके लिए निर्धारित प्रपत्रों पर निर्धारित व्यक्तिगत बैंक/डाकघर खाते से ऑटो-डेबिट द्वारा शामिल होने/भुगतान करने का विकल्प आवश्यक होगा।

2. प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाई)

प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाई) को दुर्घटना के कारण मृत्यु या विकलांगता होने पर 18 से 70 वर्ष की आयु के व्यक्तियों को 2 लाख रुपये तक का आकस्मिक मृत्यु और विकलांगता कवर प्रदान करने के लिए बनाया गया है। इसका न्यूनतम प्रीमियम 2 रुपये प्रति माह से कम है।

योजना की मुख्य विशेषता: पीएमएसबीवाई एक साल का कवर है, जिसे हर साल नवीनीकृत किया जा सकता है। यह योजना सार्वजनिक क्षेत्र की सामान्य बीमा कंपनियों (पीएसजीआईसी) और अन्य सामान्य बीमा कंपनियों, जो आवश्यक अनुमोदन प्राप्त करने और इस उद्देश्य के लिए बैंकों/डाकघरों के साथ साझेदारी करने के बाद समान शर्तों पर यह उत्पाद प्रदान करने के लिए इच्छुक हों, द्वारा चलाई जाती है। सहभागी बैंक/डाकघर अपने ग्राहकों के लिए योजना को लागू करने के लिए किसी भी बीमा कंपनी को नियुक्त करने के लिए स्वतंत्र होंगे।

पात्रता शर्तें: योजना में भाग लेने वाले बैंकों/डाकघरों के 18 से 70 वर्ष की आयु वर्ग के सभी व्यक्तिगत खाताधारक, जो ऑटो-डेबिट में शामिल होने/चालू करने के लिए अपनी सहमति देते हैं, इस योजना में शामिल होने के पात्र हैं। यदि किसी व्यक्ति के एक या अलग-अलग बैंकों/डाकघरों में एक से अधिक खाते हैं, तो वह केवल एक बैंक/डाकघर खाते के माध्यम से ही योजना में शामिल होने के लिए पात्र है।

नामांकन अवधि: यह कवर 1 जून से 31 मई तक एक वर्ष की अवधि के लिए होगा, जिसके लिए निर्धारित प्रपत्रों पर निर्धारित व्यक्तिगत बैंक/डाकघर खाते से ऑटो-डेबिट द्वारा शामिल होने/भुगतान करने का विकल्प देना आवश्यक होगा।

3. अटल पेंशन योजना (एपीवाई)

अटल पेंशन योजना (एपीवाई) का उद्देश्य सभी भारतीयों, विशेष रूप से गरीबों, वंचितों और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए एक सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है। यह असंगठित क्षेत्र के लोगों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने और भविष्य की आपात स्थितियों से निपटने के लिए सरकार की एक पहल है। एपीवाई का संचालन राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) की समग्र प्रशासनिक और संस्थागत संरचना के अंतर्गत पेंशन निधि विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) द्वारा किया जाता है।

पात्रता: एपीवाई 18 से 40 वर्ष की आयु वर्ग के सभी बैंक खाताधारकों के लिए खुला है जो आयकर दाता नहीं हैं और चुनी गई पेंशन राशि के आधार पर अंशदान भिन्न होते हैं।

लाभ: योजना में शामिल होने के बाद ग्राहक द्वारा किए गए अंशदान के आधार पर, ग्राहकों को 60 वर्ष की आयु के बाद 1000 रुपये, 2000 रुपये, 3000 रुपये, 4000 रुपये या 5000 रुपये की गारंटीकृत न्यूनतम मासिक पेंशन प्राप्त होगी।

योजना के लाभों का वितरण : मासिक पेंशन ग्राहक को उपलब्ध होती है, और उसके बाद उसके जीवनसाथी को, और उनकी मृत्यु के बाद, ग्राहक की 60 वर्ष की आयु तक संचित पेंशन राशि ग्राहक के नामांकित व्यक्ति को वापस कर दी जाएगी।

सिविल हॉस्पिटल नाभा ने डेंगू से बचने के लिए निकाली अवेयरनेस रैली

नाभा/सत्ता संदेश

संवाददाता- चेतन मेहता

शुक्रवार को नाभा के सिविल हॉस्पिटल में सिविल सर्जन पटियाला के निर्देशों पर करतारपुरा मोहल्ला में डेंगू अवेयरनेस रैली निकाली गई। जिसमें सिविल हॉस्पिटल की टीम ने डेंगू से बचाव के लिए हाथों में बैनर लिए और इस डेंगू मच्छर से बचने के लिए जागरुकता रैली निकाली।

इस मौके पर सिविल हॉस्पिटल की डॉ. अनुमेहा भल्ला ने जानकारी देते हुए बताया कि सिविल सर्जन पटियाला के निर्देशों के अनुसार नाभा के हॉट स्पॉट एरिया में डेंगू से बचाव के लिए अवेयरनेस रैली निकाली गई। उन्होंने कहा कि इस डेंगू मच्छर से बचने के लिए हमें अपने आस-पास और छतों पर साफ पानी जमा नहीं होने देना चाहिए, क्योंकि यह मच्छर साफ पानी में पनपता है। उन्होंने कहा कि जहां भी खड़े पानी में मच्छर का लार्वा दिखे, हमारी टीम को सूचित किया जाए।

एआई नवाचारों पर केंद्रित एबी पीएम-जेएवाई हैकाथॉन 2026 का आगाज़

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए), इंडियाएआई मिशन और भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएस), बेंगलुरु के सहयोग से आज एबी पीएम-जेएवाई ऑटो-एडजुडिकेशन हैकाथॉन शोकेस 2026 का उद्घाटन किया। यह आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी पीएम-जेएवाई) के तहत स्वास्थ्य दावों के प्रबंधन को सुदृढ़ करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का लाभ उठाने पर केंद्रित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यक्रम की शुरुआत का प्रतीक है।

उद्घाटन दिवस पर नीति निर्माता, प्रौद्योगिकी नवप्रवर्तक, बीमाकर्ता, तृतीय पक्ष प्रशासक (टीपीए), स्वास्थ्य सेवा प्रदाता, शिक्षाविद और एआई स्टार्टअप एक साथ आए और दावों के निपटान में दक्षता, पारदर्शिता और समग्रता बढ़ाने के उद्देश्य से अत्याधुनिक एआई-सक्षम समाधानों पर विचार-विमर्श और प्रदर्शन किया।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. सुनील कुमार बरनवाल ने उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि यह पहल न केवल आयुष्मान भारत पीएम-जेएवाई के तहत स्वास्थ्य सेवा वितरण को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रस्तुत करती है, बल्कि प्रौद्योगिकी के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा तंत्र की समग्र दक्षता और प्रभावशीलता को बढ़ाने का भी अवसर प्रदान करती है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि नवाचार समाज में व्याप्त है, संस्थानों, शिक्षा जगत, स्टार्टअप और उद्योग तक फैला हुआ है और हैकथॉन जैसी पहल जटिल स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों को हल करने के लिए इस सामूहिक क्षमता का उपयोग करने में मदद करती हैं।

डॉ. बरनवाल ने रेखांकित किया कि एनएचए स्वास्थ्य सेवा में एआई को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रहा है। इसमें आईआईटी कानपुर में स्वास्थ्य एआई के लिए एक ओपन बेंचमार्किंग और डेटा प्लेटफॉर्म, बीओडीएच का विकास भी शामिल है, जिसे इंडियाएआई इम्पैक्ट समिट के दौरान लॉन्च किया गया था। उन्होंने बताया कि भारत विकासशील देशों के उन पहले देशों में से एक है जिन्होंने डिजिटल सार्वजनिक हित के रूप में भारत-विशिष्ट डेटासेट के आधार पर एआई समाधानों को मान्य करने के लिए ऐसा प्लेटफॉर्म स्थापित किया है।

उन्होंने कहा कि सूचीबद्ध अस्पतालों के बीच विश्वास कायम करने, समय पर निपटान सुनिश्चित करने और प्रोग्राम इंटीग्रिटी में सुधार लाने के लिए मजबूत और पारदर्शी दावा निपटान प्रक्रिया अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि एबी पीएम-जेएवाई के तहत सृजित विशाल और विविध डेटा में एआई का उपयोग करके दक्षता, पारदर्शिता और परिणामों को और अधिक सुदृढ़ करने की अपार संभावनाएं हैं।

इस प्रदर्शनी का एक प्रमुख आकर्षण हैकथॉन के तहत विकसित उन्नत एआई/एमएल-आधारित समाधानों की प्रस्तुति थी, जो तीन महत्वपूर्ण समस्याओं पर आधारित थे। इनमें से प्रत्येक दावों के निपटान और एबी पीएम-जेएवाई के तहत प्रोग्राम इंटीग्रिटी में आने वाली मुख्य चुनौतियों का समाधान करता है।

इस कार्यक्रम में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी सचिव श्री एस. कृष्णन की अध्यक्षता में “भारतीय स्वास्थ्य सेवा के लिए एआई का निर्माण” विषय पर एक उच्च स्तरीय पैनल चर्चा भी आयोजित की गई। इस पैनल में सरकार, स्वास्थ्य सेवा प्रौद्योगिकी उद्यमों, शिक्षा जगत और व्यापक एआई इकोसिस्‍टम के प्रतिष्ठित प्रतिनिधियों ने भारत की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में एआई समाधानों को अपनाने और उनका विस्तार करने के लिए व्यावहारिक तरीकों, नीतिगत विचारों और प्रचालनगत कार्यनीतियों पर विचार-विमर्श किया।

एबी पीएमजेएवाई ऑटो-एडजुडिकेशन हैकाथॉन का उद्देश्य ऐसे नवोन्‍मेषी डिजिटल समाधानों को बढ़ावा देना है जो विद्यमान एबी-पीएमजेएवाई बुनियादी ढांचे के साथ सहजता से एकीकृत हों, मैन्‍युअल प्रयासों को कम करें, प्रोसेसिंग में तेजी लाएं और संपूर्ण इकोसिस्‍टम के लिए एक परिमाणयोग्‍य, भविष्य के लिए तैयार न्‍यायनिर्णय ढांचा तैयार करें।

इस पहल के माध्यम से, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण एबी पीएम-जेएवाई के तहत स्वास्थ्य प्रणालियों को सुदृढ़ करने, दावा प्रबंधन में दक्षता में सुधार करने और पारदर्शी और प्रौद्योगिकी-संचालित स्वास्थ्य सेवा वितरण में सहायता करने के लिए उत्तरदायी कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है।

डॉ. मनसुख मांडविया ने श्रमिकों के लिए वार्षिक स्वास्थ्य जांच अभियान शुरू किया

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्रीय श्रम एवं रोजगार और युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने आज दिल्ली के बासैदारापुर स्थित ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल से 40 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी श्रमिकों के लिए राष्ट्रव्यापी वार्षिक स्वास्थ्य जांच पहल का शुभारंभ किया। यह देश के श्रमबल के लिए व्यावसायिक स्वास्थ्य देखभाल और सामाजिक सुरक्षा कवरेज को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए, केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा कि चार श्रम संहिताओं का कार्यान्वयन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की देश भर के श्रमिकों के लिए गरिमा, कल्याण और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की गारंटी को दर्शाता है। इस अवसर को “श्रम शक्ति” के सम्मान को समर्पित दिन बताते हुए उन्होंने कहा कि सरकार सभी श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा कवरेज को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।

केंद्रीय मंत्री ने जोर देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सरकार ने पिछले 12 वर्षों में रोजगार सृजन और कल्याणकारी उपायों के माध्यम से “श्रम शक्ति” और “युवा शक्ति” को सशक्त बनाने के लिए काम किया है।

मांडविया ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि देश में सामाजिक सुरक्षा कवरेज में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है, जो एक दशक पहले लगभग 30 करोड़ लोगों से बढ़कर आज लगभग 94 करोड़ लाभार्थियों तक पहुंच गया है, यानी सामाजिक सुरक्षा कवरेज 19 प्रतिशत से बढ़कर 64 प्रतिशत हो गया है।

उन्होंने यह भी बताया कि ईएसआईसी के दायरे में आने वाले लाभार्थियों की संख्या एक दशक पहले लगभग 7 करोड़ थी, जो आज बढ़कर लगभग 15 करोड़ हो गई है।

श्रमिकों के कल्याण के लिए एक बड़ी पहल की घोषणा करते हुए, डॉ. मांडविया ने कहा कि अब देश भर में 40 वर्ष से अधिक आयु के सभी श्रमिकों के लिए प्रतिवर्ष निःशुल्क स्वास्थ्य जांच आयोजित की जाएगी।

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य जांच के माध्यम से शीघ्र निदान से गंभीर बीमारियों को रोकने में मदद मिल सकती है। उन्होंने बताया कि जांच शिविरों के दौरान पहचानी गई बीमारियों का इलाज और दवाएं ईएसआईसी सुविधाओं के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएंगी।

चार श्रम संहिताओं के तहत प्रमुख श्रम सुधारों पर प्रकाश डालते हुए डॉ. मांडविया ने कहा कि पुरुष और महिला श्रमिकों के लिए समान वेतन के प्रावधान सुनिश्चित किए गए हैं, मातृत्व अवकाश 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह कर दिया गया है, और महिलाओं के लिए घर से काम करने के प्रावधान भी शामिल किए गए हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि पहले श्रमिकों की उपेक्षा की जाती थी और उनकी बात अनसुनी कर दी जाती थी, लेकिन वर्तमान सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि उनकी समस्याओं को प्रतिबद्धता और संवेदनशीलता के साथ दूर किया किया जाए। उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रव्यापी स्वास्थ्य जांच पहल देश के कार्यबल के लिए गरिमा, सुरक्षा और बेहतर स्वास्थ्य देखभाल सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया एक और महत्वपूर्ण कदम है।

राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन में ‘जननी’ प्लेटफॉर्म लॉन्च, मातृ-शिशु स्वास्थ्य को मिलेगा बल

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

देश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने हाल ही में संपन्न राष्ट्रीय नवाचार एवं समावेशिता शिखर सम्मेलन – भारत के स्वास्थ्य भविष्य को आकार देने वाली सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों – में जननी (प्रसवपूर्व, प्रसवोत्तर और नवजात शिशु एकीकृत देखभाल की यात्रा) प्‍लेटफॉर्म लॉन्‍च किया।

जननी एक सेवा-केन्द्रित डिजिटल प्लेटफॉर्म है जिसे प्रजनन आयु की महिलाओं के डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड की व्यापक निगरानी और रखरखाव के लिए डिज़ाइन किया गया है। विद्यमान आरसीएच पोर्टल के उन्नत संस्करण के रूप में विकसित यह प्लेटफॉर्म, देखभाल की निरंतरता में प्रमुख सेवा वितरण कार्यकलापों को दर्ज करके एक दीर्घकालिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड बनाता है।

इस प्लेटफॉर्म का उद्देश्य मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की सुचारू निगरानी सुनिश्चित करना है, जिसमें प्रसवपूर्व देखभाल, प्रसव की तैयारी, प्रसव, प्रसवोत्तर देखभाल, नवजात शिशु देखभाल, घर आधारित नवजात शिशु एवं शिशु देखभाल और परिवार नियोजन शामिल हैं। निरंतर निगरानी और समय पर उपाय को सक्षम बनाकर, जननी सेवा वितरण को मजबूत करता है और हर चरण में देखभाल की निरंतरता सुनिश्चित करता है।

जननी की एक प्रमुख विशेषता क्यूआर-कोड वाले डिजिटल मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य (एमसीएच) कार्डों की शुरुआत है, जो स्वास्थ्य अभिलेखों तक आसान पहुंच और सुवाह्यता को सक्षम बनाते हैं। इस प्लेटफॉर्म में उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं के लिए स्वचालित अलर्ट, पर्यवेक्षी समीक्षा के लिए वास्तविक समय के डैशबोर्ड और नियत-सूची निर्माण जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं, जो समय पर ट्रैकिंग, निगरानी और लक्षित उपायों को सक्षम बनाती हैं।

यह प्लेटफॉर्म आभा, आधार और मोबाइल नंबर जैसे विशिष्ट पहचानकर्ताओं का उपयोग करके लाभार्थियों के पंजीकरण को सक्षम बनाता है, साथ ही अखिल भारतीय खोज सुविधा भी प्रदान करता है। आज तक, जननी ने 1.34 करोड़ लाभार्थी पंजीकरण, 30 लाख से अधिक गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण, 30 लाख से अधिक मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य कार्ड जारी किए हैं और एक लाख से अधिक बायोमेट्रिक सत्यापन किए हैं।

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने जापान की मंत्री ओनोडा किमी से की मुलाकात

दिल्ली/सत्ता संदेश

जापान की विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी नीति मंत्री और अंतरिक्ष नीति राज्य मंत्री ओनोडा किमी ने एक उच्च स्तरीय आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल के साथ केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात की। इस बैठक में विभिन्न क्षेत्रों विशेष रूप से स्वास्थ्य और चिकित्सा उपकरणों के क्षेत्र में सहयोग पर चर्चा की गई।

इस बैठक में जापान की चिकित्सा अनुसंधान एवं विकास एजेंसी (एएमईडी), भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के बीच स्वास्थ्य और चिकित्सा उपकरणों के क्षेत्र में एक सहयोग ज्ञापन (एमओसी) का आदान-प्रदान हुआ।

जापान के कैबिनेट कार्यालय और भारत के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के बीच क्वांटम विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में सहयोग के लिए एक आशय पत्र पर हस्ताक्षर किए गए, जो अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों में सहयोग के नए रास्ते खोलेगा।

यह जुड़ाव अगस्त 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जापान यात्रा के परिणामों पर आधारित है, जहां दोनों पक्षों ने उद्योग और स्टार्टअप सहित विभिन्न क्षेत्रों में ‘भारत-जापान विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार साझेदारी’ के विस्तार पर सहमति व्यक्त की गई।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, ‘भारत और जापान के बीच विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक स्वाभाविक तालमेल साझा करते हैं। जहां जापान उन्नत प्रौद्योगिकीय क्षमताएं प्रदान करता है, वहीं भारत प्रतिभाशाली मानव संसाधनों का विशाल भंडार उपलब्ध कराता है। उन्होंने आगे कहा कि क्वांटम टेक्नोलॉजीज, साइबर-फिजिकल सिस्टम्स, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, स्‍वच्‍छ ऊर्जा और उन्‍नत कंप्यूटिंग में भारत के बढ़ते राष्ट्रीय मिशन देश के डीप-टेक सेक्टरों की ओर मजबूत रुझान को दर्शाते हैं, जिससे संयुक्त अनुसंधान, सह-विकास और औद्योगिक साझेदारी के नए अवसर पैदा होते हैं।

वहीं ओनोडा किमी ने भारत की तीव्र आर्थिक वृद्धि और नवाचार के प्रति इसकी मजबूत प्रतिबद्धता, विशेष रूप से विभिन्न क्षेत्रों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता को बड़े पैमाने पर अपनाए जाने की सराहना की। उन्होंने क्वांटम और एआई सहित उन्नत विनिर्माण और कम्प्यूटेशनल प्रौद्योगिकियों में जापान की मज़बूती भारत के बढ़ते प्रौद्योगिकी इकोसिस्‍टम के साथ घनिष्ठ रूप से मेल खाती है।

स्वास्थ्य अनुसंधान और चिकित्सा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में दोनों पक्षों ने संयुक्त अनुसंधान कार्यक्रमों, क्षमता निर्माण और संरचित वित्तपोषण व्यवस्थाओं के माध्यम से सहयोग बढ़ाने पर विचार-विमर्श किया। यह चर्चा हुई कि भारत और जापान में संबंधित वित्तपोषण एजेंसियों द्वारा सहयोगात्‍मक अनुसंधान परियोजनाओं को समर्थन दिया जा सकता है, साथ ही कार्यशालाओं और शोधकर्ता-स्तरीय सहभागिता जैसे संस्थागत तंत्रों के माध्यम से पारस्परिक हित के प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान की जा सकती है।

भारतीय स्वास्थ्य प्राधिकरण-इंडिया एआई मिशन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस : 8–9 मई को AB PM-JAY हैकाथॉन फिनाले

नई दिल्ली/सत्ता संदेश

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण 8-9 मई को बेंगलुरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) के एवी रामाराव सभागार में एबी पीएम-जेएवाई ऑटो-एडजुडिकेशन हैकाथॉन के भव्य फिनाले और शोकेस का आयोजन करेगा। यह कार्यक्रम इंडियाएआई मिशन और आईआईएससी बेंगलुरु के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।

देशव्यापी हैकाथॉन को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है, जिसमें आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से 3,500 से अधिक प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया है। यह उत्साहपूर्ण भागीदारी भारत की स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य बीमा प्रक्रियाओं की दक्षता बढ़ाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का लाभ उठाने में नवप्रवर्तकों, प्रौद्योगिकीविदों और शोधकर्ताओं की बढ़ती रुचि को रेखांकित करती है।

दो दिवसीय इस कार्यक्रम को आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत स्वास्थ्य दावों के प्रबंधन के अगले चरण को आकार देने वाले अत्याधुनिक नवाचारों को प्रदर्शित करने के लिए एक गतिशील मंच के रूप में परिकल्पित किया गया है। फाइनलिस्ट टीमें उन्नत एआई/एमएल-आधारित समाधान प्रस्तुत करेंगी जो नैदानिक ​​दस्तावेज़ वर्गीकरण और एसटीजीएस के अनुपालन, रेडियोलॉजिकल छवि-आधारित सत्यापन और जाली या एआई-जनित चिकित्सा दस्तावेजों का पता लगाने जैसे महत्वपूर्ण समस्या क्षेत्रों को संबोधित करते हैं।

“दावों के निपटारे का भविष्य” शीर्षक से एबी पीएम-जेएवाई कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वचालन, अंतरसंचालनीय डिजिटल प्लेटफार्मों और डेटा-संचालित शासन ढांचे के एकीकरण के माध्यम से एक तेज, अधिक पारदर्शी और जवाबदेह दावा प्रणाली को कैसे सक्षम बनाया जाए इस विषय पर भी एक अन्य पैनल चर्चा की जाएगी।

लगभग 40,000 दावों का प्रतिदिन 1,900 से अधिक उपचार पैकेजों के तहत निपटान करने वाली एबी पीएम-जेएवाई विश्व स्तर पर सबसे बड़ी सार्वजनिक रूप से वित्त पोषित स्वास्थ्य बीमा योजनाओं में से एक है और दावा प्रबंधन के लिए एआई-आधारित दृष्टिकोण अपनाने में अग्रणी है। हैकाथॉन शोकेस, एनएचए द्वारा चिकित्सा पैकेजों और विशिष्टताओं की एक विस्तृत श्रृंखला में स्वतः निर्णय लेने की क्षमताओं का विस्तार करने के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

भारत–जापान स्वास्थ्य सहयोग को नई मजबूती: भारत मंडपम में संयुक्त समिति की तीसरी बैठक

नई दिल्ली/सत्ता संदेश

भारत और जापान के बीच स्वास्थ्य संबंधी संयुक्त समिति की तीसरी बैठक मंगलवार को भारत मंडपम में आयोजित की गई। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा और जापान की स्वास्थ्य नीति प्रभारी मंत्री किमी ओनोदा ने मिलकर बैठक की अध्यक्षता की।

इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए कहा कि भारत और जापान के बीच साझेदारी आपसी सम्मान, विश्वास और भविष्य के लिए साझा दृष्टिकोण पर आधारित है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भारत-जापान के बीच सहयोग ज्ञापन के अंतर्गत आयोजित संयुक्त समिति की बैठक नियमित संवाद और गहन आपसी समझ के माध्यम से इस साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण मंच सिद्ध हुई है और उन्होंने यह विश्वास भी व्यक्त किया कि इस दौरान रचनात्मक और दूरदर्शितापूर्ण विचार-विमर्श होंगे।

नड्डा ने इस दौरान भारत और जापान के बीच एक सदी से अधिक समय से चले आ रहे बहुआयामी संबंधों का उल्लेख किया जो विभिन्न क्षेत्रों में सहभागिता पर आधारित हैं और उन्होंने “सबका साथ, सबका विकास” के मार्गदर्शक सिद्धांत के अंतर्गत समावेशी विकास के प्रति भारत की प्रतिबद्धता भी दोहराई। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि संयुक्त समिति की बैठक स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण मंच है।

ओनोदा ने बैठक को संबोधित करते हुए नवाचार, प्रौद्योगिकी और अनुसंधान के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने में जापान की निरंतर भागीदारी पर बल दिया और इसके साथ ही द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की।

बैठक के दौरान प्राथमिकता वाले प्रमुख क्षेत्रो पर चर्चा की गई, जो इनमें शामिल है।

गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) की रोकथाम, निदान, उपचार और पुनर्वास:

बैठक में भारतीय प्रतिनिधियों ने बीमारियों से बढ़ती कष्टकारी स्थिति के बारे में जानकारी दी जिसमें गैर-संचारी रोगों के बढ़ते प्रसार पर बल दिया गया और सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के अनुरूप उनकी जांच-पड़ताल, निरंतर देखभाल और सतत स्वास्थ्य संवर्धन पर आधारित व्यापक प्रतिक्रिया की रूपरेखा प्रस्तुत की गई। वहीं, जापानी प्रतिनिधियों ने इस मामले में सहयोग के लिए पहले से चल रही पहलों के बारे में बताया जिनमें कैंसर की पहचान के लिए जांच, शीघ्र निदान और तकनीकी सहयोग तथा संस्थागत क्षमता विकास के माध्यम से उपचार प्रणालियों को सुदृढ़ करने पर केंद्रित परियोजनाएं शामिल हैं।

आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाना और उच्च गुणवत्ता वाले चिकित्सा उत्पादों और सेवाओं तक पहुंच:

भारतीय प्रतिनिधियों ने दवा और चिकित्सा उपकरण संबंधी अपने क्षेत्रों की व्यापकता और उनकी क्षमता का उल्लेख किया जिसमें उनके घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने, निर्भरता कम करने और लक्षित नीतिगत उपायों के माध्यम से सस्ती दर पर उपलब्धता सुनिश्चित करने पर बल दिया गया। जापानी प्रतिनिधियों ने चिकित्सा उत्पादों और सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने, मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं के निर्माण और सुव्यवस्थित साझेदारी के माध्यम से प्रौद्योगिकी के उपयोग को सुगम बनाने के उद्देश्य से समन्वित सार्वजनिक-निजी सहयोग के अपने मॉडल के बारे में विस्तार से बताया।

डिजिटल स्वास्थ्य:

भारतीय प्रतिनिधियों ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के अंतर्गत डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के अपने दृष्टिकोण की रूपरेखा प्रस्तुत की जिससे अंतरसंचालनीय, सुरक्षित और नागरिक-केंद्रित डिजिटल स्वास्थ्य के अनुरूप परिवेश विकसित हो जिसको अपनाने और एकीकरण में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। जापानी प्रतिनिधियों ने उभरते डिजिटल प्लेटफार्मों का लाभ उठाते हुए प्रणालियों को आपस में जोड़ने, एआई-सक्षम चिकित्सा प्रौद्योगिकियों और अनुसंधान में सहयोग के माध्यम से डिजिटलीकरण को आगे बढ़ाने के संबंध में अपने अनुभव साझा किए।

मानव संसाधन विकास और आदान-प्रदान:

भारतीय प्रतिनिधियों ने कुशल और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी स्वास्थ्य सेवा कार्यबल में सहायक अपनी नीति और नियामक प्रणाली के साथ-साथ आदान-प्रदान संबंधी कार्यक्रमों, संयुक्त प्रशिक्षण और दक्षताओं की पारस्परिक मान्यता के लिए सुव्यवस्थित मार्गों और तौर-तरीकों का उल्लेख किया। जापानी प्रतिनिधियों ने चिकित्सा क्षेत्र में संयुक्त रूप से अनुसंधान, कर्मियों के आदान-प्रदान और सहयोग के आधार पर वैज्ञानिक गतिविधियों में सहायता के लिए काम कर रहे तंत्र के बारे में विस्तृत विवरण दिया।

श्री नड्डा ने अपने समापन भाषण में कहा कि विचार-विमर्श ने भारत-जापान स्वास्थ्य साझेदारी को नई गति प्रदान की है। उन्होंने प्राथमिकता वाले प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि की। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि चर्चाओं ने सामर्थ्यवान और समावेशी स्वास्थ्य प्रणालियों को सुदृढ़ करने के लिए स्पष्ट दिशा निर्धारित की है।

उन्होंने यह भी कहा कि बैठक के परिणाम दोनों देशों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए मजबूत आधार प्रदान करेंगे। उन्होंने आपसी विचारों को दोनों देशों के नागरिकों के लिए सार्थक परिणामों में बदलने के उद्देश्य से जापान के साथ मिलकर काम करने की भारत की प्रतिबद्धता दोहराई।

सुश्री ओनोदा ने आपसी सहयोग को और आगे बढ़ाने के प्रति जापान की प्रतिबद्धता पर बल देते हुए स्वास्थ्य क्षेत्र में भारत और जापान के बीच विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को मजबूत करने के जापान के संकल्प को दोहराया।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने दुर्लभ रोगों पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का किया उद्घाटन

नई दिल्ली/सत्ता संदेश

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने मंगलावर को नई दिल्ली में 5 और 6 मई को आयोजित होने वाले दो दिवसीय राष्ट्रीय दुर्लभ रोग सम्मेलन का उद्घाटन किया। यह दुर्लभ रोगों से उत्पन्न चुनौतियों से निपटने के तरीके को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस मौके पर मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने कहा कि इस सम्मेलन के आयोजन का मुख्य उद्देश्य हितधारकों के समक्ष आने वाली चुनौतियों को समझना, नवाचारों को प्रोत्साहित करना और देश में दुर्लभ रोगों से निपटने के तरीके को सुदृढ़ करने के लिए नए विचार उत्पन्न करना है। उन्होंने कहा कि दुर्लभ रोगों से निपटने की आवश्यकता को सर्वप्रथम राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, 2017 में प्रमुखता से शामिल किया गया था और बाद में दुर्लभ रोगों के लिए राष्ट्रीय नीति, 2021 के शुभारम्भ के माध्यम से इसे संस्थागत रूप दिया गया, जिसने हमारे भारत को दुर्लभ रोगों के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय ढांचा रखने वाले देशों में स्थान दिलाया है।

उन्होंने बताया कि यह नीति देश भर के प्रमुख तृतीयक अस्पतालों- उत्कृष्टता केंद्रों (सीई) के माध्यम से लागू की जाती है। पूर्वोत्तर भारत में दो उत्कृष्टता केंद्रों सहित इसकी संख्या कुछ वर्षों में 8 से बढ़कर 15 हो गई है, जिससे नैदानिक ​​देखभाल और सहायता के लिए राष्ट्रीय ढांचा मजबूत हुआ है।

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने बीमारियों के शीघ्र निदान और रोकथाम के महत्व पर जोर देते हुए, आनुवंशिक विश्लेषण, प्रारंभिक पहचान और सुविचारित नैदानिक ​​प्रबंधन की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि दुर्लभ बीमारियों के लिए सभी हितधारकों के सामूहिक और निरंतर प्रयासों की आवश्यकता है, और इस क्षेत्र में प्रगति केवल सुदृढ़ सहयोग के माध्यम से ही संभव है।

उन्होंने आनुवंशिक विकारों के प्रबंधन के लिए विशिष्ट पद्धतियों की पहल अपने एनआईडीएएन केंद्रों के माध्यम से  परिचालन में आ रही है, आनुवंशिक परामर्श सेवाओं को मजबूत किया जा रहा है, और दुर्लभ रोग नीति के तहत लगभग 1,800 रोगियों को पहले ही उपचार सहायता मिल चुकी है। उन्होंने प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने और उपचारों तक पहुंच में सुधार लाने के लिए नियामक निकायों और अन्य मंत्रालयों के साथ किए जा रहे सहयोगात्मक प्रयासों की भी सराहना की।

स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (डीएचआर) के सचिव और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने पिछले तीन दशकों में दुर्लभ रोगों के क्षेत्र में हुई महत्वपूर्ण प्रगति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि 1990 के दशक में, किसी संदिग्ध दुर्लभ रोग से पीड़ित रोगी की पहचान होने पर उसकी सहायता मुश्किल होती थी क्योंकि बीमारी का निदान अत्यंत कठिन था और उपचार के विकल्प लगभग अनुपलब्ध थे। आज, हालांकि उपचारों की उच्च लागत को देखते हुए प्रति रोगी 50 लाख रुपये की वित्तीय सहायता भी अपर्याप्त लग सकती है, फिर भी यह उल्लेखनीय प्रगति है कि देश अब दुर्लभ रोगों से पीड़ित बच्चों को सार्थक सहायता प्रदान करने में सक्षम है।