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केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने जापान की मंत्री ओनोडा किमी से की मुलाकात

दिल्ली/सत्ता संदेश

जापान की विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी नीति मंत्री और अंतरिक्ष नीति राज्य मंत्री ओनोडा किमी ने एक उच्च स्तरीय आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल के साथ केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात की। इस बैठक में विभिन्न क्षेत्रों विशेष रूप से स्वास्थ्य और चिकित्सा उपकरणों के क्षेत्र में सहयोग पर चर्चा की गई।

इस बैठक में जापान की चिकित्सा अनुसंधान एवं विकास एजेंसी (एएमईडी), भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के बीच स्वास्थ्य और चिकित्सा उपकरणों के क्षेत्र में एक सहयोग ज्ञापन (एमओसी) का आदान-प्रदान हुआ।

जापान के कैबिनेट कार्यालय और भारत के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के बीच क्वांटम विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में सहयोग के लिए एक आशय पत्र पर हस्ताक्षर किए गए, जो अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों में सहयोग के नए रास्ते खोलेगा।

यह जुड़ाव अगस्त 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जापान यात्रा के परिणामों पर आधारित है, जहां दोनों पक्षों ने उद्योग और स्टार्टअप सहित विभिन्न क्षेत्रों में ‘भारत-जापान विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार साझेदारी’ के विस्तार पर सहमति व्यक्त की गई।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, ‘भारत और जापान के बीच विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक स्वाभाविक तालमेल साझा करते हैं। जहां जापान उन्नत प्रौद्योगिकीय क्षमताएं प्रदान करता है, वहीं भारत प्रतिभाशाली मानव संसाधनों का विशाल भंडार उपलब्ध कराता है। उन्होंने आगे कहा कि क्वांटम टेक्नोलॉजीज, साइबर-फिजिकल सिस्टम्स, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, स्‍वच्‍छ ऊर्जा और उन्‍नत कंप्यूटिंग में भारत के बढ़ते राष्ट्रीय मिशन देश के डीप-टेक सेक्टरों की ओर मजबूत रुझान को दर्शाते हैं, जिससे संयुक्त अनुसंधान, सह-विकास और औद्योगिक साझेदारी के नए अवसर पैदा होते हैं।

वहीं ओनोडा किमी ने भारत की तीव्र आर्थिक वृद्धि और नवाचार के प्रति इसकी मजबूत प्रतिबद्धता, विशेष रूप से विभिन्न क्षेत्रों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता को बड़े पैमाने पर अपनाए जाने की सराहना की। उन्होंने क्वांटम और एआई सहित उन्नत विनिर्माण और कम्प्यूटेशनल प्रौद्योगिकियों में जापान की मज़बूती भारत के बढ़ते प्रौद्योगिकी इकोसिस्‍टम के साथ घनिष्ठ रूप से मेल खाती है।

स्वास्थ्य अनुसंधान और चिकित्सा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में दोनों पक्षों ने संयुक्त अनुसंधान कार्यक्रमों, क्षमता निर्माण और संरचित वित्तपोषण व्यवस्थाओं के माध्यम से सहयोग बढ़ाने पर विचार-विमर्श किया। यह चर्चा हुई कि भारत और जापान में संबंधित वित्तपोषण एजेंसियों द्वारा सहयोगात्‍मक अनुसंधान परियोजनाओं को समर्थन दिया जा सकता है, साथ ही कार्यशालाओं और शोधकर्ता-स्तरीय सहभागिता जैसे संस्थागत तंत्रों के माध्यम से पारस्परिक हित के प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान की जा सकती है।

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