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मतदाता सूची संशोधन अभियान के दौरान मतदाताओं की सहायता के लिए ‘SIR हेल्प डेस्क’ स्थापित

लुधियाना / सत्ता संदेश

विशेष गहन संशोधन (SIR)-2026 प्रक्रिया के सुचारू कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए, जिला प्रशासन ने जिला प्रशासनिक परिसर के कमरा नंबर 12 में एक समर्पित SIR हेल्प डेस्क स्थापित किया है, ताकि मतदाता सूची संशोधन और मतदाता सत्यापन से संबंधित प्रश्नों का समाधान किया जा सके।

इस पहल का उद्देश्य मतदाताओं को चल रहे SIR अभियान के दौरान जानकारी और सहायता तक आसान पहुँच प्रदान करना है।

अधिकारियों ने बताया कि यह हेल्प डेस्क मतदाताओं की उन चिंताओं को दूर करने के लिए स्थापित किया गया है जो चुनावी पंजीकरण अधिकारियों (EROs), सहायक चुनावी पंजीकरण अधिकारियों (AEROs), और बूथ स्तरीय अधिकारियों (BLOs) से संबंधित हैं; इसके अलावा, यह नागरिकों को दस्तावेज़ीकरण, मतदाता मैपिंग, सुधार और SIR प्रक्रिया से संबंधित अन्य मुद्दों में भी सहायता प्रदान करेगा।

प्रशासन ने निवासियों से आग्रह किया है कि वे हेल्प डेस्क और BLOs के माध्यम से प्रदान की जा रही सहायता सेवाओं का अधिकतम उपयोग करें, विशेष रूप से तब जब जिला 15 जून से औपचारिक रूप से SIR अभियान शुरू करने की तैयारी कर रहा है।

जिला प्रशासन ने पूरे लुधियाना जिले में आयोजित प्री-SIR अभियान के तहत पहले ही 74.46 प्रतिशत से अधिक मतदाता मैपिंग का लक्ष्य हासिल कर लिया है।

मतदाताओं की भागीदारी को और अधिक सुगम बनाने के लिए, 7 जून को पूरे जिले में मतदान केंद्रों पर विशेष शिविर भी आयोजित किए जाएंगे, जहाँ बूथ स्तरीय अधिकारी मतदाताओं को सत्यापन, सुधार और शिकायत निवारण में सहायता प्रदान करने के लिए उपलब्ध रहेंगे।

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, मतदाता सूचियों का मसौदा प्रकाशन 3 अगस्त, 2026 को होगा। दावे और आपत्तियाँ दर्ज करने की अवधि 3 अगस्त से 2 सितंबर, 2026 तक खुली रहेगी, जबकि दावों और आपत्तियों के निपटान की प्रक्रिया 28 सितंबर, 2026 तक जारी रहेगी।

जिला प्रशासन ने एक पारदर्शी, समावेशी और नागरिक-अनुकूल चुनावी संशोधन प्रक्रिया सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और मतदाताओं से आग्रह किया कि वे त्रुटि-मुक्त मतदाता सूचियाँ सुनिश्चित करने के लिए इस अभियान में सक्रिय रूप से भाग लें।

आषाढ़ी वारी और मानसून का हवाला देते हुए कांग्रेस ने महाराष्ट्र में एसआईआर प्रक्रिया एक महीने टालने की मांग की

मुंबई / / सत्ता संदेश

महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। विपक्षी कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग से इस प्रक्रिया को कम से कम एक महीने के लिए स्थगित करने की मांग की है। पार्टी ने इसके पीछे आषाढ़ी वारी तीर्थयात्रा और मानसून के दौरान भारी बारिश की संभावना का हवाला दिया है।

कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोकलिंगम को पत्र लिखकर कहा है कि वर्तमान परिस्थितियों में एसआईआर प्रक्रिया को आगे बढ़ाना व्यवहारिक रूप से कठिन हो सकता है और इससे कई पात्र मतदाता सूची से वंचित रह सकते हैं।

पत्र में कहा गया है कि आषाढ़ी एकादशी के अवसर पर पंढरपुर की वार्षिक वारी यात्रा में पश्चिमी महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और विदर्भ के 20 से अधिक जिलों से लाखों ‘वारकरी’ श्रद्धालु शामिल होते हैं। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग अपने घरों से दूर रहते हैं, जिससे बूथ स्तर के अधिकारियों (बीएलओ) द्वारा चलाए जा रहे घर-घर सर्वेक्षण में वे शामिल नहीं हो पाएंगे।

कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि इस अवधि में मतदाता सूची पुनरीक्षण जारी रहा, तो तीर्थयात्रा पर गए श्रद्धालुओं के नाम सूची से हटने का खतरा पैदा हो सकता है। पार्टी का कहना है कि यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए गंभीर चिंता का विषय है, क्योंकि इससे योग्य मतदाता मतदान अधिकार से वंचित हो सकते हैं।

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि निर्वाचन आयोग ने 14 मई को एसआईआर कार्यक्रम की घोषणा की थी। इसके तहत लगभग 72 प्रतिशत मैपिंग कार्य पूरा हो चुका है। प्रक्रिया का पहला चरण 19 जून तक जारी है, जबकि दूसरा चरण 30 जून से 29 जुलाई तक प्रस्तावित है, जिसमें बीएलओ घर-घर जाकर मतदाता गणना प्रपत्र वितरित और एकत्र करेंगे।

कांग्रेस नेता ने कहा कि इसी अवधि में महाराष्ट्र में मानसून अपने चरम पर होता है, खासकर मुंबई महानगर क्षेत्र, कोंकण, पुणे और सतारा जैसे इलाकों में भारी वर्षा की संभावना रहती है। उन्होंने तर्क दिया कि खराब मौसम के कारण न केवल लोगों की आवाजाही प्रभावित होगी, बल्कि प्रशासनिक कार्यों में भी बाधा आ सकती है।

सपकाल ने कहा कि चुनावी सूची जैसी संवेदनशील प्रक्रिया को ऐसी परिस्थितियों में लागू करना व्यावहारिक कठिनाइयां पैदा कर सकता है। उन्होंने निर्वाचन आयोग से आग्रह किया कि जनहित को ध्यान में रखते हुए एसआईआर कार्यक्रम को कम से कम एक महीने के लिए स्थगित किया जाए, ताकि कोई भी पात्र मतदाता सूची से बाहर न रह जाए।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले समय में महाराष्ट्र की राजनीति में और तूल पकड़ सकता है, खासकर जब राज्य में बड़े धार्मिक आयोजन और मौसमी चुनौतियां एक साथ सामने आ रही हैं।

चुनाव आयोग का बड़ा फैसला: 22 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में होगा मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण (SIR), अप्रैल से शुरू होगी प्रक्रिया

नेशनल डेस्क: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने देश के 22 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) की तैयारी शुरू कर दी है। आयोग ने इन राज्यों को इस प्रक्रिया के लिए तैयार रहने और संबंधित तैयारियों को जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं।

अप्रैल 2026 से शुरू होगा काम: निर्वाचन आयोग के अनुसार, शेष बचे हुए राज्यों में यह विशेष गहन संशोधन अप्रैल 2026 से शुरू होगा। इस प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची का पुनरीक्षण किया जाएगा और नए मतदाताओं को पंजीकृत किया जाएगा। आयोग ने इसके लिए एक विस्तृत कार्यक्रम तैयार किया है, जिसमें मतदाता सूची का ड्राफ्ट प्रकाशन, दावे और आपत्तियां प्राप्त करना और अंत में मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन शामिल है।

इन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में होगा SIR : आगामी अप्रैल महीने में जिन प्रमुख क्षेत्रों में यह प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है, उनमें दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, लद्दाख, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, ओडिशा, और उत्तराखंड शामिल हैं। इसके अलावा पूर्वोत्तर के राज्यों जैसे अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा में भी यह पुनरीक्षण किया जाएगा।

क्या है SIR का उद्देश्य? SIR का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश के सभी पात्र नागरिकों के नाम मतदाता सूची में शामिल हों ताकि वे अपने वोट के अधिकार का उपयोग कर सकें। इस चरण के पूरा होने के बाद भारत के सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश SIR के दायरे में आ जाएंगे। गौरतलब है कि बिहार में यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि 9 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में यह वर्तमान में जारी है।