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SIR प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग के बड़े फैसले, नोटिस पाने वालों के घर जाएंगे BLO; दिल्ली-महाराष्ट्र में बढ़ी समयसीमा

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारत निर्वाचन आयोग ने 26 सितंबर 2026 को हुई बैठक में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर कई अहम फैसले लिए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि SIR के दौरान जानकारी उपलब्ध न होने या तार्किक विसंगतियों के कारण नोटिस पाने वाले लोगों को सुनवाई के लिए अनिवार्य रूप से ERO/AERO कार्यालय नहीं बुलाया जाएगा।

आयोग के अनुसार, ऐसे मामलों में बूथ लेवल अधिकारी (BLO) संबंधित मतदाताओं के घर जाकर आवश्यक दस्तावेज एकत्र करेंगे। इसके बाद दस्तावेजों को ECINet पर अपलोड किया जाएगा, ताकि ERO द्वारा मामले में निर्णय लिया जा सके। केवल असाधारण परिस्थितियों में ERO के निर्णय के अनुसार ऑनलाइन सुनवाई की जा सकेगी। जरूरत पड़ने पर मतदाता अपने परिवार के किसी वयस्क सदस्य को अपनी ओर से सुनवाई में शामिल होने के लिए अधिकृत कर सकता है। आयोग ने ऑनलाइन सुनवाई की सुविधाओं को भी मजबूत करने का निर्णय लिया है।

गरीब और बेघर लोगों के लिए विशेष हेल्प डेस्क

आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) को निर्देश दिया है कि जरूरत के अनुसार रैन बसेरों, श्रमिकों, गरीबों और बेघर लोगों के लिए पर्याप्त संख्या में हेल्प डेस्क बनाए जाएं और विशेष शिविर आयोजित किए जाएं, ताकि उन्हें SIR प्रक्रिया में आवश्यक सहायता मिल सके।

आयोग ने यह भी कहा कि SIR के लिए Form-6 के साथ लगाए जाने वाले घोषणा-पत्र को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया है। हालांकि गैर-SIR अवधि में मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के अनुसार संबंधित निर्धारित फॉर्म का इस्तेमाल किया जाएगा।

ECINet की होगी समीक्षा

बैठक में ECINet प्रणाली की समीक्षा का भी फैसला लिया गया है। वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त (DEC) की अध्यक्षता में एक समिति गठित की जाएगी, जिसमें IIT/IIIT का एक स्वतंत्र विशेषज्ञ भी शामिल होगा। समिति यह जांच करेगी कि ECINet प्रणाली संबंधित कानूनों और नियमों के प्रावधानों के अनुरूप है या नहीं और अपनी रिपोर्ट आयोग को सौंपेगी।

आयोग ने बताया कि राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO) से पिछले कुछ महीनों में मिले सुझावों के आधार पर पोर्टल में कई अपग्रेड पहले ही किए जा चुके हैं। क्षेत्रीय अधिकारियों को किसी अतिरिक्त सुविधा की आवश्यकता होने पर उसे भी लागू किया जाएगा। भविष्य में IT मॉड्यूल और पोर्टलों से जुड़ी नई पहलों पर आयोग की मंजूरी से पहले अधिकारियों की समिति (COO) में चर्चा की जाएगी।

दिल्ली और महाराष्ट्र में बढ़ी SIR की समयसीमा

दिल्ली के CEO के अनुरोध पर आयोग ने दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर 2026 तक बढ़ा दी है। नोटिस तथा दावे-आपत्तियों के निपटारे की समयसीमा अब 30 नवंबर 2026 तक होगी।

वहीं महाराष्ट्र के CEO के अनुरोध पर वहां नोटिस और दावे-आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख 12 अक्टूबर 2026 कर दी गई है। महाराष्ट्र में नोटिस तथा दावे-आपत्तियों के निपटारे की अंतिम तारीख 10 नवंबर 2026 तक बढ़ाई गई है।

आयोग की बैठकों के एजेंडे और मिनट्स जारी होंगे

निर्वाचन आयोग ने तय किया है कि आयोग की सभी बैठकों का एजेंडा पहले ही जारी किया जाएगा और बैठक का विवरण यानी मिनट्स भी जारी किया जाएगा। अधिकारियों की APAR (Annual Performance Appraisal Report) हर साल तय समयसीमा के भीतर यानी 31 दिसंबर तक पूरी करने का निर्देश दिया गया है।

इसके अलावा अधिकारियों की विदेश यात्राओं के लिए आयोग की मंजूरी लेना अनिवार्य होगा। आयुक्तों द्वारा दिए गए निर्देशों का आयोग के अधिकारियों द्वारा पूरी तरह पालन सुनिश्चित करने की बात भी कही गई है।

20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR पूरा

आयोग ने बताया कि बिहार और पश्चिम बंगाल समेत 20 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में SIR का काम पूरा हो चुका है। आयोग के मुताबिक जिन लोगों का नाम SIR के दौरान या उसके बाद मतदाता सूची में छूट गया है, वे निरंतर अद्यतन प्रक्रिया के तहत संबंधित ERO के पास आवेदन कर सकते हैं। इसमें युवा और पहली बार मतदान करने वाले लोग भी शामिल हैं।

CEO, DEO और ERO को ऐसे मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल करने के लिए तत्काल विशेष अभियान शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।

गोवा में 81 मतदाताओं ने Form-6 भरा

आयोग ने बताया कि गोवा के CEO ने संबंधित BLO को उन मतदाताओं के घर जाकर फॉर्म एकत्र करने का निर्देश दिया है, जिनके नाम छूट गए हैं। आयोग के अनुसार, 97 ऐसे मतदाताओं में से 81 ने नाम शामिल करवाने के लिए Form-6 पहले ही भर दिया है।

आयोग ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया कि कैबिनेट सचिव को भेजा गया पत्र आयोग या IT प्रभाग की किसी नीतिगत बात से संबंधित नहीं था, बल्कि निर्वाचन आयोग में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत एक अधिकारी के कामकाज से संबंधित था।

आयोग के अनुसार, 24 जून 2025 को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए जारी SIR आदेश आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से जारी किया गया था। आयोग ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 के अपने आदेश में इसे सही ठहराया है। आयोग के मुताबिक SIR के तीसरे चरण में शामिल शेष 12 राज्यों में अंतिम प्रकाशन के बाद ही मतदाताओं की संख्या के अंतिम आंकड़े स्पष्ट होंगे।

यह प्रेस विज्ञप्ति 26 सितंबर 2026 को हुई निर्वाचन आयोग की बैठक में लिए गए फैसलों के आधार पर जारी की गई है और इसे पूरे आयोग की मंजूरी प्राप्त है।

चुनाव आयोग की अहम बैठक में बड़े फैसले, दिल्ली-महाराष्ट्र में SIR की समयसीमा बढ़ी

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

चुनाव आयोग (ECI) ने शनिवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों डॉ. सुखबीर सिंह संधू तथा डॉ. विवेक जोशी की मौजूदगी में अहम बैठक की। बैठक में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई और दावे-आपत्तियां दाखिल करने की समयसीमा बढ़ाने समेत कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए।

दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) की ओर से मिली मांग के आधार पर आयोग ने दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर 2026 तक बढ़ा दी है। वहीं, नोटिस जारी करने और दावे-आपत्तियों के निपटारे की समयसीमा 30 नवंबर 2026 तक कर दी गई है।

महाराष्ट्र के लिए दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समयसीमा 12 अक्टूबर 2026 तक बढ़ाई गई है। महाराष्ट्र में नोटिस तथा दावे-आपत्तियों के निपटारे की अंतिम तारीख 10 नवंबर 2026 तय की गई है।

BLO घर जाकर जुटाएंगे दस्तावेज

आयोग के आधिकारिक बयान के मुताबिक, SIR के तहत जिन लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं, उनके दस्तावेज जुटाने के लिए बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) उनके घर जाएंगे। आयोग ने कहा कि सामान्य तौर पर ऐसे मामलों में व्यक्तिगत सुनवाई की जरूरत नहीं होगी।

इसके अलावा, जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) को जरूरत के अनुसार नाइट शेल्टर, मजदूरों, गरीबों और बेघर लोगों के लिए हेल्प डेस्क स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं।

फॉर्म-6 और घोषणा पत्र पर आयोग की सफाई

बैठक में फॉर्म-6 से जुड़े विवाद पर भी चर्चा हुई। आयोग ने कहा कि फॉर्म-6 के साथ घोषणा पत्र जमा करने की व्यवस्था जारी रहेगी। आयोग के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट भी फॉर्म-6 में दिए जाने वाले घोषणा पत्र की वैधता को सही ठहरा चुका है।

ECINET की होगी समीक्षा

आयोग ने ECINET की समीक्षा के लिए एक समिति गठित करने का फैसला किया है। इसमें एक वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त (DEC) के साथ IIT और IIM के स्वतंत्र विशेषज्ञ शामिल होंगे।

आयोग ने यह भी तय किया कि उसकी सभी बैठकों का एजेंडा पहले से जारी किया जाएगा और बैठकों की कार्यवाही की जानकारी भी सार्वजनिक की जाएगी।

अधिकारियों की विदेश यात्रा के लिए पूर्व मंजूरी जरूरी

बैठक में अधिकारियों की विदेश यात्राओं को लेकर भी फैसला लिया गया। अब अधिकारियों को विदेश यात्रा से पहले चुनाव आयोग से अनुमति लेना जरूरी होगा। चुनाव आयुक्तों की ओर से अधिकारियों को जारी निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

आयोग ने अधिकारियों की APAR यानी वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट को हर साल 31 दिसंबर तक पूरा करने की समयसीमा पर भी जोर दिया।

कैबिनेट सचिव को भेजे पत्र पर आयोग की सफाई

कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र को लेकर आयोग ने स्पष्ट किया कि इसका आयोग या उसके IT विभाग की किसी नीतिगत व्यवस्था से संबंध नहीं था। आयोग के अनुसार, पत्र ECI में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत एक अधिकारी के कामकाज से संबंधित था।

आयोग ने कहा कि संबंधित अधिकारी द्वारा जारी कार्य-वितरण संबंधी आदेश दो चुनाव आयुक्तों के निर्देश के बाद लागू नहीं किए गए थे। साथ ही IT विभाग की निगरानी में उप निर्वाचन आयुक्त (DEC) की भूमिका कभी वापस नहीं ली गई।

20 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में SIR पूरा

आयोग के मुताबिक, बिहार और पश्चिम बंगाल समेत 20 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। SIR के दौरान या उसके बाद जिन लोगों के नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाए हैं, वे निरंतर अद्यतन प्रक्रिया के तहत संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) के समक्ष नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं।

इसमें युवा और पहली बार मतदान करने वाले मतदाता भी शामिल हैं। आयोग ने मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO), जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) और निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ERO) को ऐसे मतदाताओं के नामांकन के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।

आयोग ने कहा कि देशभर में SIR से जुड़े फैसलों समेत हाल के महीनों में कई निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं। आयोग के अनुसार, 24 जून 2025 को सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में SIR कराने का आदेश सर्वसम्मति से मंजूर किया गया था। इसकी शुरुआत बिहार से हुई और इसके बाद पश्चिम बंगाल तथा अन्य राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में प्रक्रिया आगे बढ़ी।

चुनाव आयोग में 14 बार उठे सवाल, ज्ञानेश कुमार और SIR को लेकर विवाद गहराया

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारत के चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। द इंडियन एक्सप्रेस की हालिया जांच रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल के दौरान चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार आयोग के फैसलों और प्रक्रियाओं पर लिखित आपत्ति दर्ज कराई। इन आपत्तियों का संबंध मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने, फॉर्म-6 में बदलाव, चुनावी डेटा के केंद्रीकरण और SIR प्रक्रिया से जुड़े फैसलों से बताया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ फैसलों को अपने संज्ञान में लिए बिना किए जाने पर सवाल उठाए और कुछ कदमों को “अनधिकृत” तथा “अवैध” बताया। एक प्रमुख विवाद नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में SIR से संबंधित अतिरिक्त जानकारी जोड़े जाने को लेकर सामने आया। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों आयुक्तों ने इस बदलाव की वैधानिक प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे हटाने की मांग की थी।

विवाद केवल फॉर्म-6 तक सीमित नहीं रहा। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, चुनावी रोल के डिजिटल डेटाबेस और ECINet से जुड़े कामकाज को दिल्ली में केंद्रीकृत किए जाने तथा जमीनी स्तर के निर्वाचन अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी आपत्तियां दर्ज की गईं। दोनों चुनाव आयुक्तों ने इस मामले में कैबिनेट सचिव तक अपनी चिंताएं पहुंचाईं। ( सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक बिहार से शुरू हुई SIR प्रक्रिया के बाद 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए हैं। हालांकि, नामों का ड्राफ्ट सूची से हटना अपने आप में अंतिम रूप से मताधिकार समाप्त होना नहीं है, क्योंकि संबंधित प्रक्रिया में दावे और आपत्तियां दर्ज करने तथा पात्र मतदाताओं के नाम बहाल करने की व्यवस्था मौजूद है।

पश्चिम बंगाल समेत कुछ राज्यों में SIR को लेकर बड़ी संख्या में दावे और अपीलें भी सामने आई हैं। इसी बीच, चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची की पारदर्शिता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिकाएं दाखिल हुई हैं। हालिया एक याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कथित एकतरफा फैसलों की जांच के लिए SIT गठित करने की मांग की गई है। इसमें फॉर्म-6 में बदलाव, मतदाता सूची के केंद्रीकरण और अन्य प्रक्रियाओं को लेकर आरोप लगाए गए हैं।

मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया भी इस विवाद के केंद्र में है। 2023 के कानून के तहत चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए गठित चयन समिति में प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता शामिल होते हैं। इससे पहले 2023 में Anoop Baranwal v. Union of India मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक अलग चयन व्यवस्था का सुझाव दिया था, जिसमें प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश वाली समिति की बात कही गई थी। बाद में संसद द्वारा कानून बनाकर नियुक्ति की नई व्यवस्था लागू की गई।

इस पूरे घटनाक्रम ने चुनाव आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया, बहु-सदस्यीय आयोग में आपसी सहमति और मतदाता सूची के प्रबंधन को लेकर गंभीर सार्वजनिक बहस खड़ी कर दी है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियां मुख्य चुनाव आयुक्त को भी भेजी गई थीं, जबकि आयोग की ओर से रिपोर्ट में उठाए गए सवालों पर कोई जवाब नहीं दिया गया था।

अब इस विवाद का केंद्र यह है कि SIR और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों में संस्थागत पारदर्शिता और वैधानिक प्रक्रिया का कितना पालन हुआ और आयोग के भीतर दर्ज असहमतियों का किस तरह समाधान किया गया। आने वाले समय में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लंबित याचिकाओं और चुनाव आयोग की ओर से दिए जाने वाले जवाबों से इन सवालों पर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

डिजिटलाइजेशन टारगेट पूरा करने पर DC ने BLOs को किया सम्मानित

लुधियाना / सत्ता संदेश

पंजाब में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन-2026 को ध्यान में रखते हुए की जा रही अलग-अलग एक्टिविटी के तहत, 25.06.2026 से 24.07.2026 तक BLOs द्वारा किए जा रहे डोर टू डोर सर्वे के दौरान, वोटरों को काउंटिंग फॉर्म बांटे जा रहे हैं और वोटरों द्वारा भरे गए फॉर्म को इकट्ठा करके BLO ऐप में डिजिटाइज किया जा रहा है।

चीफ इलेक्शन ऑफिसर, पंजाब, चंडीगढ़ से मिले निर्देशों के अनुसार, काउंटिंग फॉर्म के 100 प्रतिशत डिजिटलाइजेशन का टारगेट सबसे पहले पूरा करने वाले BLOs को डिप्टी कमिश्नर-कम-डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर, लुधियाना हिमांशु जैन ने प्रशंसा पत्र देकर जिला स्तर पर सम्मानित किया।

इस दौरान विधानसभा हलका 57-खन्ना के बूथ नंबर 43 पर तैनात बीएलओ श्री हरचरण सिंह, बूथ नंबर 191 पर तैनात बीएलओ श्री मोहन सिंह, हलका 58-समराला के बूथ नंबर 107 पर तैनात बीएलओ श्री बेअंत सिंह, बूथ नंबर 109 पर तैनात बीएलओ श्री वीरवरिंदर सिंह, बूथ नंबर 124 पर तैनात बीएलओ श्री अमनप्रीत सिंह, बूथ नंबर 125 पर तैनात बीएलओ श्रीमती कुलवीर कौर, बूथ नंबर 129 पर तैनात बीएलओ श्रीमती मनप्रीत कौर, बूथ नंबर 183 पर तैनात बीएलओ श्री बलजीत सिंह, हलका 59-साहनेवाल के बूथ नंबर 171 पर तैनात बीएलओ श्री जंटा सिंह, हलका 60-लुधियाना ईस्ट के बूथ नंबर 216 पर तैनात बीएलओ बूथ नंबर 68 पर तैनात BLO श्री जसवंत सिंह। बूथ नंबर 94 पर तैनात BLO श्री कुलदीप सिंह। निर्वाचन क्षेत्र 68-दाखा के बूथ नंबर 119 पर तैनात BLO श्री लखवीर सिंह खटरा। हलका 70-जगराऊ के बूथ नंबर 92 पर तैनात BLO श्री गुरदीप सिंह और BLO श्री हरप्रीत सिंह और बूथ नंबर 169 पर तैनात BLO श्री कुलदीप सिंह को डिप्टी कमिश्नर-कम-डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर, लुधियाना ने सर्टिफिकेट दिए और इन जीतने वाले BLO को स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन-2026 के भविष्य के टारगेट में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए शुभकामनाएं दीं।

इस सर्टिफिकेट वितरण समारोह के दौरान, इलेक्शन तहसीलदार लुधियाना श्री राजन ढल्ल, सभी जीतने वाले BLO और डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिस के इलेक्शन स्टाफ मौजूद थे।

लुधियाना जिले के सभी पोलिंग स्टेशनों पर SIR-2026 के तहत स्पेशल कैंप लगाए गए

लुधियाना / सत्ता संदेश

12 जुलाई को भी स्पेशल कैंप लगाए जाएंगे, DC हिमांशु जैन ने योग्य वोटरों से हिस्सा लेने की अपील की

SIR-2026: लुधियाना जिले में वोटर लिस्ट में बदलाव का अभियान तेज़ हुआ

इलेक्शन कमीशन ऑफ़ इंडिया और चीफ़ इलेक्टोरल ऑफ़िसर पंजाब की गाइडलाइंस के मुताबिक, वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR)-2026 के तहत शनिवार को लुधियाना जिले के सभी पोलिंग स्टेशनों पर स्पेशल कैंप सफलतापूर्वक लगाए गए। इन कैंपों के दौरान, बूथ लेवल ऑफ़िसरों (BLOs) ने वोटर गिनती फ़ॉर्म लेने, उनकी जाँच करने और डिजिटाइज़ेशन का काम आसानी से किया, जिससे वोटर लिस्ट को और ज़्यादा सही, ट्रांसपेरेंट और अपडेटेड बनाने का काम तेज़ हो गया।

ज़िला इलेक्शन ऑफ़िसर-कम-डिप्टी कमिश्नर श्री हिमांशु जैन ने कहा कि स्पेशल कैंपों का मुख्य मकसद हर योग्य वोटर का गिनती फ़ॉर्म समय पर दिलवाकर वोटर लिस्ट को सही और बिना गलती के बनाना है। उन्होंने कहा कि जिन पोलिंग बूथों पर गिनती के फॉर्म का डिजिटाइजेशन पूरा हो गया है, वहां रिकॉर्ड में गलतियों को दूर करने का काम किया जा रहा है, जबकि दूसरे बूथों पर फॉर्म मिलने और डिजिटाइजेशन का प्रोसेस साथ-साथ चल रहा है।

उन्होंने कहा कि स्पेशल कैंप के सफल ऑपरेशन के लिए अलग-अलग डिपार्टमेंट के अधिकारियों और कर्मचारियों को भी लगाया गया है, ताकि पूरा प्रोसेस तय समय में अच्छे से योग्य वोटर को इस प्रोसेस से वंचित नहीं रहने देना है।

श्री हिमांशु जैन ने जिले के सभी योग्य वोटरों से अपील की है, जिन्होंने अभी तक अपने गिनती के फॉर्म जमा नहीं किए हैं, वे 12 जुलाई (रविवार) को अपने नजदीकी पोलिंग स्टेशन पर लगने वाले स्पेशल कैंप में पहुंचकर अपने फॉर्म जमा करें। उन्होंने सभी पॉलिटिकल पार्टियों, सोशल ऑर्गनाइजेशन, पंचायत प्रतिनिधियों और आम जनता से भी अपील की कि वे इस कैंपेन में बढ़-चढ़कर सहयोग करें और ज़्यादा से ज़्यादा अवेयरनेस फैलाएं, ताकि वोटर लिस्ट में बदलाव का प्रोसेस सफल हो सके।

SIR-2026 के तहत बूथ लेवल एजेंट्स की हुई ट्रेनिंग

चुनाव प्रक्रिया को ट्रांसपेरेंट और फेयर बनाने के लिए पॉलिटिकल पार्टियों के सहयोग की ज़रूरत:- एडिशनल डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर शिखा भगत

लुधियाना / सत्ता संदेश

एडिशनल डिप्टी कमिश्नर-कम-एडिशनल डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर लुधियाना शिखा भगत ने बताया कि इलेक्शन कमीशन ऑफ़ इंडिया की गाइडलाइंस के मुताबिक, स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR)-2026 के तहत ज़िला लुधियाना के अलग-अलग असेंबली इलाकों के अलग-अलग पॉलिटिकल पार्टियों द्वारा नॉमिनेटेड बूथ लेवल एजेंट्स (BLAs) की ट्रेनिंग 20 और 21 जून को हुई।

यह ट्रेनिंग सेशन ज़िला लुधियाना के अलग-अलग असेंबली इलाकों के इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स ने लीड किया।

ट्रेनिंग के दौरान, बूथ लेवल एजेंट्स (BLAs) को स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन 2026 के पूरे प्रोग्राम, इलेक्शन कमीशन की तरफ से जारी इंस्ट्रक्शन्स और वोटर लिस्ट की एक्यूरेसी पक्का करने के बारे में डिटेल में जानकारी दी गई।

एडिशनल डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर शिखा भगत ने कहा कि इलेक्शन कमीशन ऑफ़ इंडिया वोटर लिस्ट को ज़्यादा सही, ट्रांसपेरेंट और अपडेटेड बनाने के लिए SIR कैंपेन चला रहा है। इस कैंपेन को सफल बनाने के लिए बूथ लेवल एजेंट्स की भूमिका बहुत ज़रूरी है, क्योंकि वे पॉलिटिकल पार्टियों और इलेक्शन एडमिनिस्ट्रेशन के बीच एक अहम कड़ी का काम करते हैं।

उन्होंने कहा कि 25 जून 2026 से बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) घर-घर जाकर वोटर्स को काउंटिंग फॉर्म बांटेंगे। इस दौरान, BLA, BLOs के साथ मिलकर यह पक्का करेंगे कि फॉर्म हर एलिजिबल वोटर तक पहुंचे और वोटर लिस्ट में कोई भी गलती या गलती समय पर ठीक हो जाए।

ट्रेनिंग के दौरान, BLOs को एन्यूमरेशन फॉर्म भरने के प्रोसेस के बारे में डिटेल में जानकारी दी गई और वोटर रजिस्ट्रेशन, नाम जोड़ने, करेक्शन और दूसरे इलेक्शन प्रोसेस के बारे में प्रैक्टिकल जानकारी भी दी गई। ऑफिसर्स ने पार्टिसिपेंट्स के सवालों के जवाब दिए और उनके डाउट्स दूर किए।

इस मौके पर BLOs को SIR-2026 से जुड़ी किट भी बांटी गई हैं और 25 जून से गिनती के फॉर्म बांटने का काम शुरू किया जाएगा।

एडिशनल डिप्टी कमिश्नर शिखा भगत ने सभी पॉलिटिकल पार्टियों, बूथ लेवल एजेंट्स (BLAs) और आम जनता से अपील की कि वे चुनाव आयोग के इस ज़रूरी कैंपेन में बढ़-चढ़कर सहयोग करें, ताकि हर योग्य नागरिक का नाम वोटर लिस्ट में रजिस्टर हो सके और डेमोक्रेटिक प्रोसेस को और मज़बूत किया जा सके।

मतदाता सूची संशोधन अभियान के दौरान मतदाताओं की सहायता के लिए ‘SIR हेल्प डेस्क’ स्थापित

लुधियाना / सत्ता संदेश

विशेष गहन संशोधन (SIR)-2026 प्रक्रिया के सुचारू कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए, जिला प्रशासन ने जिला प्रशासनिक परिसर के कमरा नंबर 12 में एक समर्पित SIR हेल्प डेस्क स्थापित किया है, ताकि मतदाता सूची संशोधन और मतदाता सत्यापन से संबंधित प्रश्नों का समाधान किया जा सके।

इस पहल का उद्देश्य मतदाताओं को चल रहे SIR अभियान के दौरान जानकारी और सहायता तक आसान पहुँच प्रदान करना है।

अधिकारियों ने बताया कि यह हेल्प डेस्क मतदाताओं की उन चिंताओं को दूर करने के लिए स्थापित किया गया है जो चुनावी पंजीकरण अधिकारियों (EROs), सहायक चुनावी पंजीकरण अधिकारियों (AEROs), और बूथ स्तरीय अधिकारियों (BLOs) से संबंधित हैं; इसके अलावा, यह नागरिकों को दस्तावेज़ीकरण, मतदाता मैपिंग, सुधार और SIR प्रक्रिया से संबंधित अन्य मुद्दों में भी सहायता प्रदान करेगा।

प्रशासन ने निवासियों से आग्रह किया है कि वे हेल्प डेस्क और BLOs के माध्यम से प्रदान की जा रही सहायता सेवाओं का अधिकतम उपयोग करें, विशेष रूप से तब जब जिला 15 जून से औपचारिक रूप से SIR अभियान शुरू करने की तैयारी कर रहा है।

जिला प्रशासन ने पूरे लुधियाना जिले में आयोजित प्री-SIR अभियान के तहत पहले ही 74.46 प्रतिशत से अधिक मतदाता मैपिंग का लक्ष्य हासिल कर लिया है।

मतदाताओं की भागीदारी को और अधिक सुगम बनाने के लिए, 7 जून को पूरे जिले में मतदान केंद्रों पर विशेष शिविर भी आयोजित किए जाएंगे, जहाँ बूथ स्तरीय अधिकारी मतदाताओं को सत्यापन, सुधार और शिकायत निवारण में सहायता प्रदान करने के लिए उपलब्ध रहेंगे।

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, मतदाता सूचियों का मसौदा प्रकाशन 3 अगस्त, 2026 को होगा। दावे और आपत्तियाँ दर्ज करने की अवधि 3 अगस्त से 2 सितंबर, 2026 तक खुली रहेगी, जबकि दावों और आपत्तियों के निपटान की प्रक्रिया 28 सितंबर, 2026 तक जारी रहेगी।

जिला प्रशासन ने एक पारदर्शी, समावेशी और नागरिक-अनुकूल चुनावी संशोधन प्रक्रिया सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और मतदाताओं से आग्रह किया कि वे त्रुटि-मुक्त मतदाता सूचियाँ सुनिश्चित करने के लिए इस अभियान में सक्रिय रूप से भाग लें।

आषाढ़ी वारी और मानसून का हवाला देते हुए कांग्रेस ने महाराष्ट्र में एसआईआर प्रक्रिया एक महीने टालने की मांग की

मुंबई / / सत्ता संदेश

महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। विपक्षी कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग से इस प्रक्रिया को कम से कम एक महीने के लिए स्थगित करने की मांग की है। पार्टी ने इसके पीछे आषाढ़ी वारी तीर्थयात्रा और मानसून के दौरान भारी बारिश की संभावना का हवाला दिया है।

कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोकलिंगम को पत्र लिखकर कहा है कि वर्तमान परिस्थितियों में एसआईआर प्रक्रिया को आगे बढ़ाना व्यवहारिक रूप से कठिन हो सकता है और इससे कई पात्र मतदाता सूची से वंचित रह सकते हैं।

पत्र में कहा गया है कि आषाढ़ी एकादशी के अवसर पर पंढरपुर की वार्षिक वारी यात्रा में पश्चिमी महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और विदर्भ के 20 से अधिक जिलों से लाखों ‘वारकरी’ श्रद्धालु शामिल होते हैं। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग अपने घरों से दूर रहते हैं, जिससे बूथ स्तर के अधिकारियों (बीएलओ) द्वारा चलाए जा रहे घर-घर सर्वेक्षण में वे शामिल नहीं हो पाएंगे।

कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि इस अवधि में मतदाता सूची पुनरीक्षण जारी रहा, तो तीर्थयात्रा पर गए श्रद्धालुओं के नाम सूची से हटने का खतरा पैदा हो सकता है। पार्टी का कहना है कि यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए गंभीर चिंता का विषय है, क्योंकि इससे योग्य मतदाता मतदान अधिकार से वंचित हो सकते हैं।

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि निर्वाचन आयोग ने 14 मई को एसआईआर कार्यक्रम की घोषणा की थी। इसके तहत लगभग 72 प्रतिशत मैपिंग कार्य पूरा हो चुका है। प्रक्रिया का पहला चरण 19 जून तक जारी है, जबकि दूसरा चरण 30 जून से 29 जुलाई तक प्रस्तावित है, जिसमें बीएलओ घर-घर जाकर मतदाता गणना प्रपत्र वितरित और एकत्र करेंगे।

कांग्रेस नेता ने कहा कि इसी अवधि में महाराष्ट्र में मानसून अपने चरम पर होता है, खासकर मुंबई महानगर क्षेत्र, कोंकण, पुणे और सतारा जैसे इलाकों में भारी वर्षा की संभावना रहती है। उन्होंने तर्क दिया कि खराब मौसम के कारण न केवल लोगों की आवाजाही प्रभावित होगी, बल्कि प्रशासनिक कार्यों में भी बाधा आ सकती है।

सपकाल ने कहा कि चुनावी सूची जैसी संवेदनशील प्रक्रिया को ऐसी परिस्थितियों में लागू करना व्यावहारिक कठिनाइयां पैदा कर सकता है। उन्होंने निर्वाचन आयोग से आग्रह किया कि जनहित को ध्यान में रखते हुए एसआईआर कार्यक्रम को कम से कम एक महीने के लिए स्थगित किया जाए, ताकि कोई भी पात्र मतदाता सूची से बाहर न रह जाए।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले समय में महाराष्ट्र की राजनीति में और तूल पकड़ सकता है, खासकर जब राज्य में बड़े धार्मिक आयोजन और मौसमी चुनौतियां एक साथ सामने आ रही हैं।

चुनाव आयोग का बड़ा फैसला: 22 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में होगा मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण (SIR), अप्रैल से शुरू होगी प्रक्रिया

नेशनल डेस्क: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने देश के 22 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) की तैयारी शुरू कर दी है। आयोग ने इन राज्यों को इस प्रक्रिया के लिए तैयार रहने और संबंधित तैयारियों को जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं।

अप्रैल 2026 से शुरू होगा काम: निर्वाचन आयोग के अनुसार, शेष बचे हुए राज्यों में यह विशेष गहन संशोधन अप्रैल 2026 से शुरू होगा। इस प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची का पुनरीक्षण किया जाएगा और नए मतदाताओं को पंजीकृत किया जाएगा। आयोग ने इसके लिए एक विस्तृत कार्यक्रम तैयार किया है, जिसमें मतदाता सूची का ड्राफ्ट प्रकाशन, दावे और आपत्तियां प्राप्त करना और अंत में मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन शामिल है।

इन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में होगा SIR : आगामी अप्रैल महीने में जिन प्रमुख क्षेत्रों में यह प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है, उनमें दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, लद्दाख, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, ओडिशा, और उत्तराखंड शामिल हैं। इसके अलावा पूर्वोत्तर के राज्यों जैसे अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा में भी यह पुनरीक्षण किया जाएगा।

क्या है SIR का उद्देश्य? SIR का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश के सभी पात्र नागरिकों के नाम मतदाता सूची में शामिल हों ताकि वे अपने वोट के अधिकार का उपयोग कर सकें। इस चरण के पूरा होने के बाद भारत के सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश SIR के दायरे में आ जाएंगे। गौरतलब है कि बिहार में यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि 9 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में यह वर्तमान में जारी है।