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इंडिया एनर्जी वीक 2027 का ऐलान, कोलकाता में होगा पांचवां संस्करण

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

29 सितंबर 2026

केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने चंडीगढ़ में आयोजित कर्टन रेज़र कार्यक्रम के दौरान ‘इंडिया एनर्जी वीक (IEW) 2027’ के पांचवें संस्करण की घोषणा की। भारत का यह प्रमुख वैश्विक ऊर्जा कार्यक्रम 28 से 31 जनवरी 2027 तक कोलकाता के न्यू टाउन कन्वेंशन सेंटर में आयोजित किया जाएगा।

इस अवसर पर हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि IEW 2027 में ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े विमर्श में नए दृष्टिकोण और नई आवाज़ों को शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में उद्यमियों, नवप्रवर्तकों और उभरते खिलाड़ियों की भूमिका को प्रमुखता दी जाएगी, जो ऊर्जा के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

उन्होंने कहा कि कोलकाता में आयोजित होने वाला यह संस्करण भारत के ऊर्जा विकास के अगले चरण को प्रदर्शित करेगा। कार्यक्रम के जरिए भारत वैश्विक ऊर्जा संवाद में भाग लेने के साथ-साथ उसे दिशा देने में अपनी भूमिका को और मजबूत करेगा।

हरदीप पुरी ने कहा कि IEW 2027 भारत के बढ़ते स्टार्टअप इकोसिस्टम, इंजीनियरिंग क्षमताओं और नवाचार की क्षमता को भी दुनिया के सामने रखेगा। इसका उद्देश्य भविष्य की ऊर्जा चुनौतियों से निपटने के लिए देश में विकसित हो रही तकनीकी और औद्योगिक क्षमताओं को प्रदर्शित करना है।

कर्टन रेज़र कार्यक्रम में इंडियनऑयल के निदेशक (रिफाइनरीज़) अरविंद कुमार, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और अन्य हितधारक मौजूद रहे। अरविंद कुमार ने कहा कि इंडिया एनर्जी वीक ने अपनी शुरुआत के कुछ ही समय में वैश्विक ऊर्जा मंच पर भारत की भूमिका को मजबूती से सामने रखा है। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ में आयोजित कार्यक्रम इस बात को दर्शाता है कि भारत में ऊर्जा से जुड़ी चर्चा किसी एक शहर या मंच तक सीमित नहीं है।

कार्यक्रम में पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज के निदेशक (अंतरिम) प्रोफेसर राजेश कुमार भाटिया भी उपस्थित रहे। ऊर्जा क्षेत्र के पेशेवरों के साथ पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज के करीब 120 छात्रों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।

75 हजार से अधिक ऊर्जा पेशेवरों के पहुंचने की उम्मीद

2023 में शुरुआत के बाद से इंडिया एनर्जी वीक ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक प्रमुख वैश्विक मंच के रूप में उभरा है। IEW 2027 का आयोजन ‘नवाचार को गति, ऊर्जा सुरक्षा, भविष्य का निर्माण’ (Unlocking Innovation, Securing Energy, Shaping Tomorrow) थीम के तहत किया जाएगा।

आयोजकों के मुताबिक, कार्यक्रम में 75,000 से अधिक ऊर्जा पेशेवरों और 700 से अधिक अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शकों के शामिल होने की उम्मीद है। कार्यक्रम में हाइड्रोजन, बायोफ्यूल, एलएनजी, डिजिटलाइजेशन, नवीकरणीय ऊर्जा और नेट-ज़ीरो से जुड़े विषयों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत पर भी रहेगा फोकस

कोलकाता में IEW के आयोजन को कार्यक्रम के भौगोलिक और रणनीतिक विस्तार के तौर पर देखा जा रहा है। इसके जरिए पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत की आर्थिक एवं औद्योगिक क्षमता के साथ पड़ोसी क्षेत्रों से बढ़ते संपर्कों को भी सामने लाने का अवसर मिलेगा।

IEW 2027 में नवाचार और युवा प्रतिभा को भी विशेष महत्व दिया जाएगा। ‘वसुधा’, अविन्या और हैकाथॉन जैसे मंचों के जरिए प्रतिभागियों को वास्तविक ऊर्जा चुनौतियों के लिए समाधान प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। FIPI के 12 स्टूडेंट चैप्टर्स छात्रों और फैकल्टी सदस्यों को तकनीकी सत्रों और प्रदर्शनियों से जोड़ेंगे, जिससे शिक्षा जगत और ऊर्जा उद्योग के बीच सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।

पंजाब स्टेट ऑफिस नेटवर्क की जानकारी

इंडियनऑयल के पंजाब स्टेट ऑफिस (PSO) नेटवर्क के तहत पंजाब, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश, लद्दाख और जम्मू-कश्मीर क्षेत्र शामिल हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस क्षेत्र में कुल 6,183 रिटेल आउटलेट्स में से 3,023 इंडियनऑयल के रिटेल आउटलेट्स हैं।

एलपीजी क्षेत्र में कुल 1,402 वितरकों में से इंडियनऑयल के पंजाब स्टेट ऑफिस नेटवर्क के तहत 784 वितरक हैं। वहीं, बीपीसीएल और एचपीसीएल के पास क्रमशः 328 और 290 एलपीजी वितरक हैं।

स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को प्रोत्साहन: विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की प्रगति का व्यावहारिक रास्ता

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

ब्रिक्स की भारत की अध्यक्षता दृढ़ता, नवाचार, सहयोग और स्थायित्व पर आधारित व्यावहारिक रास्तों को आगे बढ़ाने का अवसर देती है

वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता, ऊर्जा की बढ़ती मांग और जलवायु से जुड़ी गंभीर चुनौतियों के इस दौर में, अंतरराष्ट्रीय समुदाय को ऐसी ऊर्जा प्रणालियों का निर्माण करने की जरूरत है जो स्वच्छ व अपेक्षाकृत अधिक सुरक्षित, सस्ती एवं भरोसेमंद होने के साथ-साथ विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की विकास संबंधी जरूरतों तथा आर्थिक आकांक्षाओं के अनुरूप भी हों।

स्वच्छ ऊर्जा दरअसल ऊर्जा सुरक्षा, औद्योगिक विकास और दीर्घकालिक विकास की दृष्टि से तेजी  से अहम होती जा रही है। यह ईंधन बाजार में आने वाले उतार-चढ़ाव से पैदा होने वाले जोखिमों  को कम कर सकती है, ऊर्जा को अपेक्षाकृत अधिक सुलभ बना सकती है, रोजगार सृजित कर सकती है, घरेलू उद्योगों को मजबूत कर सकती है और देश को अपेक्षाकृत अधिक सुदृढ़ बना सकती है। फिर भी, स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में आगे बढ़ने के रास्ते एक जैसे नहीं हो सकते। इन रास्तों को राष्ट्रीय परिस्थितियों, उपलब्ध संसाधनों और विकास की प्राथमिकताओं के हिसाब से निर्धारित किया जाना चाहिए।

इसी बिंदु पर विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के बीच आपसी सहयोग महत्वपूर्ण हो जाता है। ब्रिक्स के सदस्य देशों के बीच बेहतर सहयोग से स्वच्छ ऊर्जा को अपनाने की प्रक्रिया में तेजी लाने के साथ-साथ ऊर्जा सुरक्षा, स्थिरता और समावेशी विकास के साझा लक्ष्यों को भी आगे बढ़ाया जा सकता है।

भारत का अपना अनुभव यह बताता है कि स्वच्छ ऊर्जा की शुरुआत लोगों से ही होनी चाहिए।

पिछले दशक में, प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना (सौभाग्य) के तहत लगभग 28.6 मिलियन घरों को बिजली के कनेक्शन दिए गए। इससे सभी तक बिजली पहुंचाने का काम आगे बढ़ा और ग्रामीण व कम सुविधा वाले इलाकों में लोगों के जीवन स्तर में सुधार हुआ। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) के तहत महिलाओं को 105 मिलियन से अधिक एलपीजी कनेक्शन दिए गए। इससे खाना पकाने के साफ-सुथरे तरीकों को बढ़ावा मिला, घर में सेहत बेहतर हुई और कठिन श्रम का बोझ कम हुआ।

ये पहल एक महत्वपूर्ण सिद्धांत को रेखांकित करती हैं: स्वच्छ ऊर्जा को अपनाने को केवल स्थापित मेगावाट या जोड़ी गई क्षमता के आधार पर नहीं मापा जा सकता, बल्कि इससे पैदा हुए अवसरों, सुदृढ़ हुई आजीविका और बेहतर हुए जीवन स्तर के आधार पर भी मापा जाना चाहिए।

लोगों को प्राथमिकता देने वाले इस दृष्टिकोण के साथ-साथ बड़े पैमाने पर काम और सहयोगी  बुनियादी ढांचे की भी जरूरत है। भारत की स्वच्छ ऊर्जा की कहानी में नवीकरणीय ऊर्जा अहम हो गई है। लेकिन इसकी सफलता इसे समर्थन प्रदान करने वाली प्रणालियों पर निर्भर करती है। सौर  और पवन ऊर्जा को तेजी से अपनाया जा सकता है, लेकिन इनकी पूरी क्षमता का लाभ तभी मिल पाएगा जब पारेषण (ट्रांसमिशन), वितरण (डिस्ट्रीब्यूशन), भंडारण (स्टोरेज) और ग्रिड प्रबंधन एकसाथ मिलकर काम करें।

भारत ने स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार में सहायता प्रदान करने वाली प्रणालियों को मजबूत करने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है। पारेषण संबंधी बुनियादी ढांचे (ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर) का निरंतर विस्तार हुआ है। इसके साथ-साथ ऊर्जा के भंडारण (एनर्जी स्टोरेज) और ग्रिड की सुदृढ़ता (ग्रिड फ्लेक्सिबिलिटी) के क्षेत्र में भी निवेश बढ़ा है। वितरण (डिस्ट्रीब्यूशन) संबंधी सुधारों और उन्नत ग्रिड तकनीक को अपनाने से एक ऐसी बेहतर एवं भरोसेमंद ऊर्जा प्रणाली बनाने में मदद मिली है, जो नवीकरणीय ऊर्जा की बढ़ती हिस्सेदारी को समन्वित करने में सक्षम है।

भारत की गैर-जीवाश्म ईंधन पर आधारित क्षमता अब 288 गीगावॉट से अधिक हो गई है। बड़े पैमाने की परियोजनाओं के अलावा, वितरित नवीकरणीय ऊर्जा (डीआरई) प्रणालियां – जैसे कि रूफटॉप सोलर, सोलर पंप, मिनी-ग्रिड और माइक्रो-ग्रिड – ग्रामीण और कम सुविधा वाले इलाकों में स्वच्छ ऊर्जा को और अधिक सुलभ बना रही हैं। ये प्रणालियां सिंचाई, कोल्ड स्टोरेज, स्कूलों, हेल्थकेयर सेंटरों तथा स्थानीय व्यवसायों को मदद पहुंचाने के साथ-साथ ग्रामीण आजीविका और स्थानीय आर्थिक सुदृढ़ता को भी बढ़ावा दे रही हैं।

भारत की ‘पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना’ बड़े पैमाने पर इस दृष्टिकोण को दर्शाती है। इस योजना से अब तक लगभग 4 मिलियन परिवारों को लाभ हुआ है, जिससे उपभोक्ता अपेक्षाकृत अधिक विकेन्द्रीकृत एवं भागीदारी वाली ऊर्जा प्रणाली में योगदान देने वाले बन पाए हैं।

हालांकि, स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार में वित्त पोषण सबसे अहम तत्वों में से एक बना रहेगा। कई विकासशील देशों में नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं, लेकिन इन संभावनाओं को बड़े पैमाने पर लागू करने तथा बैंक से ऋण पाने योग्य परियोजनाओं में बदलने हेतु सस्ती और दीर्घकालिक पूंजी की जरूरत होती है।

आने वाले वर्षों में नवीकरणीय ऊर्जा, वितरण संबंधी बुनियादी ढांचा, ग्रिड के आधुनिकीकरण, भंडारण प्रणाली और कम ऊर्जा खर्च करने वाली तकनीकों में निवेश बेहद जरूरी होगा। न्यू डेवलपमेंट बैंक जैसे संस्थान वित्त पोषण, तकनीक संबंधी साझेदारी और क्षमता विकास के जरिए विकासशील देशों की मदद करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

स्वच्छ ऊर्जा से जुड़ी तकनीकों के लिए सुदृढ़ एवं विविधतापूर्ण आपूर्ति श्रृंखला बनाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए सुरक्षित, सस्ती और भरोसेमंद ऊर्जा प्रणालियां  सुनिश्चित करने हेतु मैन्यूफैक्चरिंग, तकनीक, नवाचार और आपूर्ति श्रृंखला के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना जरूरी होगा।

अब जबकि ब्रिक्स की भारत की अध्यक्षता आगे बढ़ रही है, सहयोग की एक ऐसी भविष्योन्मुखी रूपरेखा को मजबूत करने का अवसर है जो सामर्थ्य, बड़े पैमाने पर काम करने की क्षमता, विश्वसनीयता, तकनीक की सुलभता, सुदृढ़ आपूर्ति श्रृंखला और सतत विकास का समर्थन करे।

चुनौती सिर्फ स्वच्छ ऊर्जा की क्षमता को बढ़ाने की ही नहीं, बल्कि ऐसे ऊर्जा प्रणाली के निर्माण की भी है जो सबके लिए सुलभ, किफायती एवं भरोसेमंद होने के साथ-साथ दीर्घकालिक आर्थिक विकास और मानव विकास को कायम रखने में सक्षम हों।

 (लेखक विद्युत राज्यमंत्री हैं)