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केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आंध्र प्रदेश में विकसित भारत जी-राम जी योजना का किया शुभारंभ

आंध्र प्रदेश / सत्ता संदेश

आंध्र प्रदेश के तिरुपति ज़िले के मुक्कावरिपल्ली गाँव से “विकसित भारत जी राम जी योजना” का आज राष्ट्रीय शुभारंभ हुआ, जहाँ केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू, उप मुख्यमंत्री पवन कल्याण, केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी और श्री कमलेश पासवान तथा सांसद विधायक और हजारों की संख्या में जनसमुदाय उपस्थित रहे। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर के गरीब मजदूरों, किसानों और गाँवों के लिए रोज़गार की गारंटी, ग्राम विकास के लिए बड़े वित्तीय आवंटन और पारदर्शी व्यवस्था के साथ एक नया मॉडल पेश किया गया।

भगवान वेंकटेश्वर के चरणों में नमन से शुरू वीबी- जी राम जी

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने अपना संबोधन “नमः वेंकटेश्वराय” और “गोविंदा, गोविंदा” के जयकारों के साथ शुरू करते हुए कहा कि इस पावन धरती से विकसित भारत जी राम जी योजना लागू होना गरीबों और मजदूरों के लिए भगवान की कृपा की वर्षा जैसा है। उन्होंने प्रार्थना की कि देश में कोई भी गरीब मजदूर बिना काम के न रहे, हर हाथ को काम और हर पेट को रोटी मिले। इसी संकल्प को ज़मीन पर उतारने के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को हृदय से धन्यवाद दिया।

मनरेगा से आगे वीबी- जी राम जी– 100 से 125 दिन रोजगार की छलांग

श्री शिवराज सिंह चौहान ने याद दिलाया कि यूपीए सरकार के समय शुरू हुई मनरेगा में सिर्फ 100 दिन रोज़गार की गारंटी दी जाती थी। उन्होंने कहा कि आज प्रधानमंत्री श्री मोदी की नई रणनीति के तहत विकसित भारत- जी राम जी योजना में मजदूरों के लिए पूरे 125 दिन तक काम की पक्की गारंटी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ दिनों की बढ़ोतरी नहीं, बल्कि सोच में बदलाव है, अब लक्ष्य यह है कि कोई हाथ खाली न रहे। उन्होंने गर्व के साथ बताया कि नई योजना के लागू होते ही पहले दिन ही देशभर में लाखों मजदूरों को काम मिला है और मनरेगा को बेहतर स्वरूप में बदलकर वीबी- जी राम जी के रूप में लागू किया जा रहा है।

पहले ही साल में 1.51 लाख करोड़ रु. का प्रावधान, 5 साल में 7.5 लाख करोड़ रु. का लक्ष्य

केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने योजना के वित्तीय पक्ष पर विस्तार से बात करते हुए कहा कि विकसित भारत- जी राम जी योजना के पहले ही वर्ष में केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 95,000 करोड़ रु. से अधिक रहेगी और राज्यों की 40% हिस्सेदारी जोड़कर यह वार्षिक व्यय 1.51 लाख करोड़ रु. के आसपास पहुँचता है। श्री शिवराज सिंह ने बताया कि अगले 5 साल में इस योजना के तहत कुल 7.5 लाख करोड़ रु. खर्च करने का लक्ष्य रखा गया है। यह धन देश की 2.86 लाख पंचायतों तक पहुँचकर हर पंचायत को प्रति वर्ष औसतन 2 करोड़ रु. से ज़्यादा की राशि देगा जिससे गाँवों में रोजगार भी बढ़ेगा और स्थायी परिसंपत्तियाँ भी बनेंगी।

रोज़गार की कानूनी गारंटी– 15 दिन में काम, वरना बेरोज़गारी भत्ता

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि विकसित भारत- जी राम जी योजना में मजदूरों के अधिकारों को कानूनी ताकत दी गई है। किसी भी मजदूर द्वारा काम माँगने पर 15 दिन के भीतर उसे रोज़गार देना अनिवार्य होगा और यदि निर्धारित समय में काम नहीं दिया गया तो संबंधित मजदूर को बेरोज़गारी भत्ता देना पड़ेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब मजदूर के पसीने से कोई खिलवाड़ नहीं कर सकता। मजदूरी देने में देरी होने की पुरानी समस्या को खत्म करने के लिए योजना में यह प्रावधान किया गया है कि देर से मज़दूरी देने पर मजदूर को ब्याज समेत विलंबित मजदूरी दी जाएगी। यह सब इसलिए कि मजदूरों के पसीने की पूरी कीमत मिले और गरीबों की सेवा को ही भगवान की पूजा मानने वाला “मोदी मंत्र” ज़मीन पर दिखाई दे।

सिस्टम मज़बूत करने के लिए 9% प्रशासनिक व्यय, मैदानी कर्मचारियों को पूरा वेतन

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह ने बताया कि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रशासनिक व्यय को 6% से बढ़ाकर 9% कर दिया गया है। इसके तहत लगभग 13,000 करोड़ रु. से ज़्यादा की राशि ग्राम रोजगार सहायकों, मैट्स और अन्य जमीनी कर्मचारियों के वेतन और सुविधा के लिए रखी गई है। उन्होंने कहा कि जो कर्मचारी गाँवों में मजदूरों और विकास के कामों को संभालेंगे, उन्हें समय पर पूरा वेतन मिलना ज़रूरी है ताकि वे भटकने से बचें और सिस्टम मज़बूत रहे। इस तरह यह योजना मजदूरों के साथ साथ प्रशासनिक ढाँचे को भी सुदृढ़ करने का काम करेगी।

गाँव का फैसला गाँव में– ग्राम सभा तय करेगी काम

श्री शिवराज सिंह चौहान ने साफ शब्दों में कहा कि किस गाँव में कौन सा काम होगा, यह दिल्ली या अमरावती से तय नहीं किया जाएगा। काम तय करने का अधिकार ग्राम पंचायत और ग्राम सभा के पास रहेगा। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि गाँव की जनता खुद तय करेगी कि उन्हें आंगनवाड़ी बनानी है, स्कूल, अस्पताल या सड़क चाहिए, खेत सड़क बनानी है, एफपीओ के लिए संरचना करनी है, तालाब, जैक डैम, बाँध या प्राकृतिक आपदा से बचाने के लिए कोई सुरक्षा दीवार बनानी है– यह सब निर्णय गाँव में बैठकर ग्राम सभा करेगी। गाँव का फैसला गाँव में होगा, यही जी राम जी योजना की आत्मा है।

पिछड़ी पंचायतों को अतिरिक्त मदद, आंध्र प्रदेश के लिए 7,707 करोड़ रु. की विशेष राशि

केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने राज्यों से कहा कि वे अपनी पंचायतों का ग्रेडेशन कर A, B, C श्रेणियों में बाँट सकते हैं और जो पंचायत विकास में पीछे हैं, उन्हें अधिक राशि देकर तेज़ी से काम करवा सकते हैं। इससे इंटीरियर और पिछड़े इलाकों के गाँवों में विकास की रफ्तार बढ़ेगी। आंध्र प्रदेश के संदर्भ में उन्होंने बताया कि केवल 9 महीने की अवधि के लिए विकसित भारत- जी राम जी योजना के तहत केंद्र से 7,707 करोड़ रु. की विशेष राशि दी जा रही है। राज्य सरकार के हिस्से के साथ यह पैकेज आंध्र प्रदेश को देश में शीर्ष राज्यों में लाएगा और गाँवों में रोज़गार एवं विकास के लिए बड़ी ताकत देगा। उन्होंने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री श्री चंद्रबाबू नायडू और उप मुख्यमंत्री श्री पवन कल्याण के नेतृत्व में आंध्र प्रदेश ग्राम विकास का एक मॉडल बनकर उभरेगा।

प्रधानमंत्री आवास और ग्रामीण सड़कों पर बड़ी सौगात– स्वीकृति पत्र मंच से सौंपे

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आंध्र प्रदेश के गरीब परिवारों और गाँवों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण तथा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना IV के तहत बड़ी सौगातों की घोषणा की। उन्होंने बताया कि आंध्र प्रदेश को प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 74,212 नए पक्के मकान स्वीकृत किए गए हैं ताकि कोई भी पात्र गरीब परिवार कच्चे मकान में न रहे और सभी को सम्मानजनक आवास मिल सके। इसी के साथ उन्होंने उन गाँवों की चिंता भी दूर की जो अभी तक पक्की सड़कों से नहीं जुड़े हैं। केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने कहा कि ऐसे इलाकों के लिए 146 नई सड़कें और 19 पुलों के निर्माण के लिए कुल 422 करोड़ रु. से अधिक की राशि स्वीकृत की गई है। श्री शिवराज सिंह चौहान ने मंच से ही इन स्वीकृतियों के पत्र मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री को सौंपते हुए आश्वासन दिया कि गाँव बढ़ेगा तो भारत बदलेगा और केंद्र सरकार आंध्र प्रदेश के संपूर्ण ग्रामीण विकास में कोई कमी नहीं छोड़ेगी।

तोता परी आम के किसानों के लिए राहत– मार्केट इंटरवेंशन से उचित दाम की गारंटी

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने आंध्र प्रदेश के तोता परी आम उत्पादक किसानों की समस्याओं का उल्लेख करते हुए कहा कि तोता परी आम के दाम गिरने से किसानों को भारी नुकसान हो रहा है, इसलिए केंद्र सरकार ने मार्केट इंटरवेंशन स्कीम के तहत बड़ी मात्रा में तोता परी आम खरीदने का फैसला किया है ताकि किसानों को उचित कीमत मिल सके और उनका मेहनताना सुरक्षित रहे। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि आईसीआर की वैज्ञानिक टीम राज्य सरकार की टीम के साथ मिलकर ड्राफ्टिंग और वैरायटी बदलने की तकनीक पर काम करेगी ताकि आम बागानों की उत्पादकता बढ़े और बाजार में बेहतर वैरायटी उपलब्ध हो सके।

पर्यावरण संरक्षण का संकल्प

श्री शिवराज सिंह चौहान ने लोगों से पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेने की अपील करते हुए कहा कि वे खुद रोज़ पेड़ लगाते हैं और जनता से आग्रह किया कि कम से कम अपने जन्मदिन पर एक पेड़ ज़रूर लगाएँ। उन्होंने मंच से लोगों विकसित गाँव, विकसित आंध्र प्रदेश और विकसित भारत के लिए सामूहिक संकल्प दिलाया।

विकसित भारत- जी राम जी योजना गाँवों और ग्रामीण जीवन स्तर में परिवर्तनकारी

मुख्यमंत्री श्री चंद्रबाबू नायडू ने अपने संबोधन में विकसित भारत- जी राम जी योजना को गाँवों और ग्रामीण जीवन स्तर में परिवर्तन लाने वाला कार्यक्रम बताया। उन्होंने कहा कि पहले मनरेगा ने रॉयलसीमा से शुरुआत कर देश को एक मॉडल दिया था, अब उसी आधार पर लेकिन अधिक सशक्त स्वरूप में VB G RAM G योजना शुरू होकर स्वर्ण आंध्र प्रदेश और विकसित भारत की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि 125 दिन की रोज़गार गारंटी के साथ खेत सड़क, तालाब, ड्रेनेज आदि सुविधाएँ और भूमिहीन मजदूरों की सामाजिक सुरक्षा जैसे कामों से ग्रामीण जीवन स्तर में सीधा सुधार होगा।

डिजिटल मॉनिटरिंग से फर्जीवाड़े पर लगाम, ग्राम सभाओं से विकास की योजना

श्री चंद्रबाबू नायडू ने बताया कि इस नई योजना में डिजिटल मास्टर रोल, आधार आधारित भुगतान, रियल टाइम मॉनिटरिंग और जियो टैगिंग जैसी तकनीकों से कामों की निगरानी होगी। इससे काम न करके भी कागज़ पर हिसाब जैसी पुरानी प्रवृत्तियों पर रोक लगेगी और पैसा सही जगह खर्च होगा। उन्होंने राज्य में हाल के वर्षों में श्री पवन कल्याण के नेतृत्व में हुई ग्राम सभाओं, CC रोडों, गोशालाओं, पानी के टैंकों, पम्प पोंड्स और आदिवासी क्षेत्रों में बने सड़कों का ज़िक्र करते हुए कहा कि इन्हीं अनुभवों के आधार पर अब वीबी- जी राम जी योजना को सबसे बेहतर तरीके से लागू करके आंध्र प्रदेश को देश का मॉडल राज्य बनाया जाएगा।

हॉर्टिकल्चर हब के लिए बड़ा निवेश

मुख्यमंत्री ने रायलसीमा क्षेत्र को हॉर्टिकल्चर हब बनाने के अपने विज़न को भी साझा किया। उन्होंने कहा कि Purvodaya कार्यक्रम के तहत लगभग 40,000 करोड़ रु. के सार्वजनिक/सरकारी निवेश और लगभग 60,000 करोड़ रु. के निजी निवेश का लक्ष्य रखा गया है ताकि सिंचाई परियोजनाओं, सड़क कनेक्टिविटी, वेयरहाउस और इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से रायलसीमा को फलों और बागवानी के लिए देश का बड़ा केंद्र बनाया जा सके। उन्होंने इस विज़न को स्वर्ण आंध्र प्रदेश की दिशा में एक निर्णायक कदम बताते हुए कहा कि ग्रामीण रोजगार, हॉर्टिकल्चर, इंडस्ट्री निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर– सब मिलकर आंध्र प्रदेश को अग्रणी राज्य बनाने में योगदान देंगे।

अमरावती, पोलावरम और इंडस्ट्री निवेश से स्वर्ण आंध्र प्रदेश

श्री चंद्रबाबू नायडू ने अमरावती को “देवताओं की राजधानी” बताते हुए कहा कि केंद्र सरकार की मदद से राजधानी परियोजना, पोलावरम, विशाखापत्तनम स्टील प्लांट, डेटा सेंटर और फाइटर जेट प्रोजेक्ट जैसे कामों के ज़रिये आंध्र प्रदेश की ब्रांड इमेज को फिर से ऊँचा किया गया है। उन्होंने कहा कि राइट लीडर, राइट प्लेस, राइट टाइम– यही नरेंद्र मोदी हैं और 2047 तक भारत को नंबर वन देश बनाने के विज़न के साथ स्वर्ण आंध्र प्रदेश की दिशा में भी तेज़ी से काम हो रहा है।

कार्यक्रम में मौजूद केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ चंद्रशेखर पेम्मासानी ने कहा कि वीबी जी राम जी में काम के दिन 100 से बढ़ाकर 125 दिन तो किये ही गए हैं, साथ ही काम न मिलने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ते का भी प्रावधान है। इससे हर कामगार को काम मिलना सुनिश्चित होगा। वहीं केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान ने कहा कि वीबी जी राम जी योजना विकसित भारत की नींव बनेगी। इस योजना में 300 से ज्यादा तरह के काम होंगे जो ग्रामीण भारत को सशक्त- समृद्ध बनाने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। कार्यक्रम में ग्रामीण विकास विभाग के सचिव रोहित कंसल, संयुक्त सचिव रोहिणी आर. भाजीभाकरे भी मौजूद रहीं।

केंद्र के सहयोग से आंध्र प्रदेश को मिली मजबूती

उपमुख्यमंत्री श्री पवन कल्याण ने कहा कि शिवराज जी, आपका 49 वर्षों का सार्वजनिक जीवन जनसेवा, किसानों और ग्रामीण भारत के प्रति समर्पण का प्रतीक है। आपने 6 बार सांसद और 4 बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में देश की सेवा कर एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया है। इमरजेंसी के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए आपका संघर्ष और जेल यात्रा हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। आपके मार्गदर्शन और प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में आंध्र प्रदेश को ग्रामीण विकास के लिए 12,845 करोड़ रु. की स्वीकृति मिली है। आपके सहयोग से राज्य में पंचायत राज व्यवस्था को मजबूती मिली है तथा जनजातीय क्षेत्रों में प्लांटेशन सहित कई महत्वपूर्ण विकास कार्य आगे बढ़े हैं और आंध्र प्रदेश आरजीएसए की राष्ट्रीय रैंकिंग में 24वें स्थान से प्रथम स्थान तक पहुँचा है। उन्होंने कहा कि VB- G RAM G के राष्ट्रीय शुभारंभ के लिए आंध्र प्रदेश को चुनकर आपने हमारे राज्य के प्रत्येक नागरिक का सम्मान बढ़ाया है।

कार्यक्रम की शुरुआत में मुख्यमंत्री श्री नायडू और केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने फार्म पॉन्ड गतिविधि स्थल पर पहुँचकर पूजा और ग्राउंड ब्रेकिंग की, पौधरोपण किया, “मैजिक ड्रेन” डेमोंस्ट्रेशन देखा और आंध्र प्रदेश की उपलब्धियों व पहलों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया।

मनरेगा बना इतिहास, आज से VB-G-RAM-G कानून हुआ लागू

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

देश में आज से ग्रामीण रोजगार योजना, विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 (वीबी जी राम जी कानून) लागू हो गया है। वहीं पुराना मनरेगा कानून इतिहास की बात हो गया है। वीबी जी राम जी कानून के जरिए केंद्र सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़े बदलाव करना चाहती है। 

क्या है वीबी-जी राम जी कानून
इस कानून के तहत केंद्र सरकार साल 2047 तक एक ग्रामीण विकास ढांचा स्थापित करना चाहती है। इसमें ऐसे ग्रामीण परिवारों के सदस्य, जो अकुशल श्रम कर सकते हैं, उन्हें एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के रोजगार की गारंटी मिलेगी। इस कानून के तहत ग्रामीण रोजगार के माध्यम से आधारभूत ढांचे को बेहतर किया जाएगा। इस कानून में सरकार ग्रामीणों को सिर्फ रोजगार तक सीमित नहीं रखने की कोशिश कर रही है, बल्कि ऐसा मॉडल बनाने की कोशिश की जा रही है, जिससे गांव के स्तर पर विकास कार्यों की दिशा तय हो। 

नए कानून में किन कामों पर होगा फोकस
वीबी जी राम जी कानून के तहत गांवों में विकास कार्यों के लिए चार प्राथमिकताएं तय की गई हैं।-

जल सुरक्षा– इसके तहत गांवों में अब जल संरक्षण संरचनाएं, सिंचाई सहायता, भूजल पुनर्भरण, जल निकायों को पुनर्जीवित करने का काम और वनीकरण जैसे कामों को आगे बढ़ाया जाएगा।

ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास-वीबी जी राम जी कानून के तहत ग्रामीण सड़कों, सार्वजनिक भवनों, स्कूलों के विकास, स्वच्छता प्रणालियों और सौलर नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़े काम और आवास योजनाओं पर जोर रहेगा।

आजीविका से जुड़े काम– सरकार ने वीबी जी राम जी कानून को कृषि, मत्स्य पालन, भंडारण, बाजार, कौशल विकास से भी जोड़ रही है। 

मौसमी घटनाओं से जुड़े काम– नए कानून में ग्रामीण क्षेत्रों को आपदा के समय तैयार रखने पर भी जोर दिया गया है। इसके लिए कानून में आश्रय स्थल, तटबंध निर्माण, बाढ़ प्रबंधन संरचनाएं, पुनर्वास के काम और जंगलों की आग बुझाने जैसे काम भी शामिल किए गए हैं। 

मनरेगा से कितना अलग है वीबी-जी राम जी?
केंद्र सरकार का कहना है कि नए नियमों से मनरेगा की ढाचांगत कमियों को दूर किया गया है। सबसे पहले तो योजना के तहत रोजगार के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 दिन किया गया है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में किए जाने वाले सभी कार्यों को विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर स्टैक में शामिल किया जाएगा। इस कानून में ग्रामीण स्तर पर सार्वजनिक कार्यों के लिए एक मजबूत और एकीकृत राष्ट्रीय फ्रेमवर्क तैयार होगा। इसी के आधार पर गांवों में आगे के कामों को लेकर तैयारियां होंगी।

इस तरह गांवों के लिए एकीकृत ढांचा तैयार करने से देशभर में उत्पादक, टिकाऊ, सुदृढ़ और बदलाव में सक्षम ग्रामीण परिसंपत्तियों (एसेट्स) का निर्माण सुनिश्चित होगा। केंद्र और राज्य 2047 में विकसित भारत के लक्ष्य के तहत इन परिसंपत्तियों को आगे बढ़ाने की योजनाएं भी साझा तौर पर तैयार करेंगी। यानी एक राष्ट्रीय नीति के तहत काम के बिखराव को समेटा जाएगा और तय दिशा में इसे आगे बढ़ाया जाएगा।

दोनों कानूनों में मुख्य अंतर-

विशेषतामनरेगा (MGNREGA)VB-G RAM G
गारंटीकृत रोजगार दिनप्रत्येक ग्रामीण परिवार को प्रति वित्तीय वर्ष कम-से-कम 100 दिनों के अकुशल मजदूरी रोजगार की गारंटी थी।
 
 रोजगार की अवधि बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है।
वित्तपोषण मांग-आधारित योजना; अकुशल श्रमिकों की मजदूरी का 100% केंद्र सरकार वहन करती थी।
 
 केंद्र-राज्य व्यय अनुपात 60:40 है। वहीं हिमालयी एवं पूर्वोत्तर राज्यों के लिए ये अनुपात 90:10 है। केंद्र शासित राज्यों में पूरा खर्च केंद्र सरकार वहन करेगी। अगर जरूरत पड़ती है तो अतिरिक्त खर्च राज्य सरकारें वहन करेंगी
 
कृषि विरामयोजना पूरे वर्ष संचालित रहती थी।
 
राज्य बुवाई एवं कटाई के मौसम में 60 दिनों तक काम पर अस्थायी रोक घोषित कर सकते हैं।
 
परिसंपत्ति निर्माणसामान्य ग्रामीण श्रम एवं बुनियादी विकास कार्यों पर केंद्रित था।
 
चार प्रमुख विकास क्षेत्रों—जल, कृषि, आपदा प्रबंधन और संपर्क (कनेक्टिविटी)—पर आधारित है।
 
बजट व्यवस्थामांग के अनुसार अतिरिक्त धनराशि उपलब्ध कराई जाती थी।
 
आपूर्ति-आधारित व्यवस्था है, जिसमें राज्यों के लिए निश्चित एवं सीमित बजट निर्धारित होता है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था, राष्ट्रीय विकास योजना से कैसे जुड़ेगी?

  • मनरेगा कानून के तहत ग्राम पंचायतें ही अपने क्षेत्र में होने वाले विकास कार्यों के लिए जिम्मेदार होतीं थी और वही इससे जुड़ा हर फैसला लेती थीं। वीबी जी राम जी कानून में विकसित ग्राम पंचायत योजना के तहत काम होगा, जिसे ग्राम पंचायतें तैयार करेंगी। इसके बाद इन विकास कार्यों के लिए केंद्र सरकार निचले स्तर से लेकर उच्च स्तर तक जानकारी जुटाएगी, इसके बाद ही कार्यों का आवंटन होगा। 
  • खास बात यह है कि इन ग्राम पंचायत योजनाओं को जीपीएस जैसी तकनीक का इस्तेमाल करके तैयार किया जाएगा और पीएम गति-शक्ति के साथ इस योजना को जोड़ा जाएगा। इससे काम में पारदर्शिता लाने की कोशिश की जाएगी।
  • वीबी जी राम जी कानून में गवर्नेंस इकोसिस्टम अनिवार्य किया गया है, जिसके तहत मजदूरों के बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन, जीपीएस आधारित प्लानिंग और निगरानी, मोबाइल-आधारित रिपोर्टिंग के साथ रियल-टाइम डैशबोर्ड, एआई-सक्षम विश्लेषण और सोशल ऑडिट तंत्र शामिल हैं। इसके अलावा काम की साप्ताहिक जानकारी स्वचालित रूप से तैयार की जाएगी और भौतिक-डिजिटल दोनों पर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किए जाएंगे।

राज्य निर्धारित करेंगे क्षेत्रीय विकास के लिए किसे-क्या मिलेगा
वीबी जी राम जी कानून के मुताबिक, वित्तीय संसाधनों का न्यायसंगत वितरण सुनिश्चित करने के लिए राज्यों को नॉर्मेटिव आवंटन (Normative Allocation) का प्रावधान किया गया है। सीधे शब्दों में समझें तो पहले मनरेगा के तहत केंद्र जो फंड्स देता था, उसकी मांग औसतन और संभावित खर्चों के आधार पर होती थी। लेकिन अब केंद्र सरकार ने यह जिम्मेदारी राज्य सरकारों को सौंप दी है। यानी अब राज्य ही वर्ग और स्थानीय विकास जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जिलों और ग्राम पंचायतों के बीच फंड का पारदर्शी और आवश्यकतानुसार बंटवारा सुनिश्चित करेंगे। 

सरकार, मनरेगा की जगह वीबी जी राम जी कानून क्यों लाई?
दरअसल देश के अधिकतर राज्यों में मनरेगा कानून के दुरुपयोग का पता चला। जिनमें कई जगहों पर काम सिर्फ कागजों पर हुए थे और नियमों का उल्लंघन कर सरकारी पैसे का दुरुपयोग किया गया। कई जगहों पर मजदूरों की बजाय मशीनों से काम कराए गए और पैसे की धांधली की गई। ऐसे में सरकार ने ग्रामीण रोजगार में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और इसकी बेहतर निगरानी के लिए वीबी जी राम जी कानून लाने का फैसला किया। यही वजह है कि नए कानून में जीपीएस से निगरानी और रियल टाइम जानकारी और सोशल ऑडिट जैसे प्रावधान किए गए हैं।  



दक्षिण एशिया में रोजगार और विकास की नई राह बनेगा खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र: विश्व बैंक

कृषि से आगे बढ़कर खाद्य प्रणालियों में निवेश से खुलेंगे आर्थिक विकास के नए अवसर

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

विश्व बैंक समूह ने कहा है कि दक्षिण एशिया अपने विकास के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है, जहां हर वर्ष लाखों युवा कार्यबल में शामिल हो रहे हैं। ऐसे में स्थायी और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन इस क्षेत्र की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक बन गया है। विश्व बैंक के अनुसार कृषि से आगे बढ़कर खाद्य प्रसंस्करण, भंडारण, लॉजिस्टिक्स और मूल्यवर्धन आधारित खाद्य प्रणालियों का विस्तार रोजगार, निवेश, आर्थिक विकास और गरीबी उन्मूलन के व्यापक अवसर प्रदान कर सकता है।

विश्व बैंक समूह ने बताया कि दक्षिण एशिया का कृषि क्षेत्र सालाना 700 अरब डॉलर से अधिक मूल्य का है और क्षेत्र के लगभग 43 प्रतिशत कार्यबल को रोजगार प्रदान करता है। इसके बावजूद कृषि का क्षेत्रीय सकल घरेलू उत्पाद में योगदान केवल 16 प्रतिशत है। चिंता की बात यह है कि क्षेत्र में उत्पादित कुल खाद्य पदार्थों का 30 प्रतिशत से अधिक हिस्सा हर वर्ष बर्बाद हो जाता है, जो लगभग 30 करोड़ लोगों का पेट भरने के लिए पर्याप्त है।

विशेषज्ञों ने कहा कि कृषि परिवर्तन का अगला चरण केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। खाद्य प्रसंस्करण, कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउसिंग, सप्लाई चेन, विपणन और मूल्यवर्धन गतिविधियों के विस्तार से लाखों नए रोजगार सृजित किए जा सकते हैं। इससे खाद्य हानि कम होगी और किसानों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

भारत की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया गया कि देश का खाद्यान्न उत्पादन वर्ष 1950-51 के 51 मिलियन टन से बढ़कर आज 330 मिलियन टन से अधिक हो चुका है। वहीं पिछले दशक में प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का निर्यात लगभग 4.9 बिलियन डॉलर से बढ़कर 10 बिलियन डॉलर से अधिक हो गया है। वर्तमान में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र देश के विनिर्माण मूल्यवर्धन में लगभग 9 प्रतिशत और कुल निर्यात में करीब 13 प्रतिशत योगदान दे रहा है।

विशेषज्ञों ने कहा कि भारत का अनुभव दर्शाता है कि प्रभावी नीतियां और लक्षित निवेश कृषि मूल्य श्रृंखलाओं को बदल सकते हैं। प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना, प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों के औपचारिकरण योजना और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना जैसी पहलों ने खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, निवेश आकर्षित करने और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

विश्व बैंक समूह ने कहा कि तीव्र शहरीकरण, बढ़ता मध्यम वर्ग, समृद्ध कृषि जैव-विविधता और सुरक्षित व उच्च गुणवत्ता वाले प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की बढ़ती मांग दक्षिण एशिया को खाद्य प्रणालियों के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ा सकती है।

इस लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए विश्व बैंक समूह एग्रीकनेक्ट और सैपलिंग जैसी पहलों पर काम कर रहा है। एग्रीकनेक्ट का उद्देश्य वर्ष 2030 तक 3 करोड़ किसानों को बाजारों से जोड़ना है, जबकि सैपलिंग सरकारों, निवेशकों, उद्योग जगत और विकास साझेदारों को एक मंच पर लाकर नीति सुधारों और निवेश को बढ़ावा देने का कार्य कर रहा है।

नीति संवाद में भाग लेने वाले विशेषज्ञों ने कोल्ड चेन, वेयरहाउसिंग, लॉजिस्टिक्स हब, प्रोसेसिंग क्लस्टर और कृषि-औद्योगिक पार्कों में निवेश बढ़ाने पर जोर दिया। साथ ही डिजिटल तकनीकों के उपयोग, गुणवत्ता मानकों को मजबूत करने और कौशल विकास कार्यक्रमों के विस्तार की आवश्यकता भी बताई गई।

यह विचार दो दिवसीय क्षेत्रीय उच्च स्तरीय नीति संवाद मूल्य को उजागर करना: दक्षिण एशिया में रोजगार सृजन और सतत विकास के लिए खाद्य प्रसंस्करण को आगे बढ़ाना” के उद्घाटन अवसर पर सामने आए। इस कार्यक्रम का आयोजन 9 जून 2026 को अहमदाबाद, गुजरात में भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय और विश्व बैंक समूह की सैपलिंग पहल के सहयोग से किया गया।

कार्यक्रम में नीति निर्माताओं, उद्योगपतियों, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स, निवेशकों और दक्षिण एशियाई देशों के प्रतिनिधियों सहित लगभग 200 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं, जो क्षेत्र में मजबूत, समावेशी और दीर्घकालिक खाद्य प्रणालियों के निर्माण पर चर्चा कर रहे हैं।