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सोने के बाद अब चांदी की बारी: सरकार ने चांदी के आयात पर कसी नकेल, इंपोर्ट के लिए लेनी होगी मंजूरी

नेशनल डेस्क : केंद्र सरकार ने देश के व्यापार घाटे (Trade Deficit) को नियंत्रित करने के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए चांदी के आयात पर नई पाबंदियां लागू कर दी हैं। सरकार ने चांदी की कई श्रेणियों को ‘फ्री’ लिस्ट से हटाकर ‘रिस्ट्रिक्टेड’ (प्रतिबंधित) कैटेगरी में डाल दिया है, जिसका अर्थ है कि अब इनके आयात के लिए अतिरिक्त सरकारी मंजूरी की आवश्यकता होगी।

क्यों लिया गया यह फैसला? सरकार का मुख्य उद्देश्य बढ़ते आयात को कम करना और विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) पर पड़ने वाले दबाव को नियंत्रित करना है। अधिकारियों को यह चिंता सता रही है कि सोने पर आयात शुल्क बढ़ने के बाद निवेशक और ज्वेलरी खरीदार चांदी की ओर रुख कर सकते हैं। इसी संभावना को देखते हुए चांदी के आयात पर सख्ती बढ़ाई गई है ताकि चालू खाते के घाटे (CAD) को बढ़ने से रोका जा सके।

आयात शुल्क में पहले ही हुई है बढ़ोतरी: हाल ही में सरकार ने सोना और चांदी दोनों पर इम्पोर्ट ड्यूटी को 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया था। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच रुपये पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए विदेशी मुद्रा बचाना सरकार की प्राथमिकता है।

30 साल के निचले स्तर पर पहुंचा आयात : सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, ऊंची ड्यूटी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों की वजह से अप्रैल महीने में सोने और चांदी का आयात पहले ही 30 साल के निचले स्तर पर पहुंच चुका है। अब नई पाबंदियों के लागू होने के बाद आने वाले महीनों में चांदी के आयात में और अधिक गिरावट देखने को मिल सकती है।

आर्थिक संकट से जूझते पाकिस्तान को मिली IMF की ‘संजीवनी’: 1.32 बिलियन डॉलर का नया कर्ज मंजूर

इंटरनेशनल डेस्क: कंगाल होने की कगार पर खड़े पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से एक बार फिर बड़ा वित्तीय सहारा मिला है। आईएमएफ के कार्यकारी बोर्ड ने पाकिस्तान के लिए दो अलग-अलग वित्तपोषण व्यवस्थाओं के तहत लगभग 1.32 बिलियन अमेरिकी डॉलर की राशि मंजूर की है।

कर्ज का विवरण: इस वित्तीय सहायता पैकेज में एक्सटेंडेड फंड फैसिलिटी (EFF) के तहत लगभग 1 बिलियन अमेरिकी डॉलर और रेजिलियंस एंड सस्टेनेबिलिटी फैसिलिटी (RSF) के तहत लगभग 210 मिलियन अमेरिकी डॉलर शामिल हैं। गौरतलब है कि पाकिस्तान को अब तक आईएमएफ से 8.4 बिलियन डॉलर के कुल दो लोन पैकेजों के मुकाबले 4.5 बिलियन डॉलर का कर्ज मिल चुका है।

विदेशी मुद्रा भंडार में सुधार: रिपोर्ट के अनुसार, यह रकम अगले हफ्ते की शुरुआत में जारी कर दी जाएगी, जिससे पाकिस्तान के सेंट्रल बैंक का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 17 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक हो जाने की उम्मीद है।

आर्थिक चुनौतियां और शर्तें: हालांकि यह फंड एक बड़ी राहत है, लेकिन इसके लिए पाकिस्तान को कड़ी शर्तों का पालन करना पड़ रहा है। इन सख्त राजकोषीय नीतियों के कारण देश में बेरोजगारी, गरीबी और आय में असमानता बढ़ी है। सरकार को पुराने राजकोषीय और मौद्रिक लक्ष्यों पर कायम रहने का वादा करना पड़ा है।

टैक्स और रेवेन्यू की स्थिति: आईएमएफ की समीक्षा में पाया गया कि पाकिस्तान ने दिसंबर 2025 तक के अधिकांश मानदंडों को पूरा किया है, लेकिन फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू (FBR) सबसे कमजोर कड़ी साबित हुआ। टैक्स कलेक्शन के लक्ष्य को हासिल न कर पाने की वजह से सरकार ने राजस्व की कमी को पूरा करने के लिए पेट्रोलियम लेवी की दरें बढ़ा दी हैं।

भविष्य की योजना और सुधार: पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने आश्वासन दिया है कि देश लंबी अवधि के विकास के लिए ढांचागत और संस्थागत सुधार जारी रखेगा। एक महत्वपूर्ण प्रतिबद्धता के तहत, पाकिस्तान का नया बजट आईएमएफ के परामर्श से तैयार किया जाएगा ताकि राजकोषीय अनुशासन बना रहे। इसके अलावा, जलवायु जोखिमों से निपटने के लिए सरकार ने ‘ग्रीन टैक्सोनॉमी’ भी अपनाई है।