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अंतरराष्ट्रीय शांतिरक्षक दिवस पर भारत ने दोहराई संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता

संयुक्त राष्ट्र / सत्ता संदेश

भारत ने अंतरराष्ट्रीय शांतिरक्षक दिवस के अवसर पर United Nations शांति अभियानों के प्रति अपनी ‘‘अटूट प्रतिबद्धता’’ दोहराते हुए उन वीर शांतिरक्षकों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने विश्व के विभिन्न संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में शांति स्थापित करने के प्रयासों के दौरान अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया।

संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित विशेष कार्यक्रम में भारतीय प्रतिनिधियों ने उन सैनिकों, पुलिसकर्मियों और नागरिक कर्मियों के योगदान को याद किया, जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशनों के तहत सेवा देते हुए वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए अपना जीवन समर्पित किया। कार्यक्रम के दौरान शहीद शांतिरक्षकों की स्मृति में श्रद्धांजलि दी गई और उनके बलिदान को मानवता की सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण बताया गया।

भारत ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में उसकी भूमिका केवल एक सहभागी देश की नहीं, बल्कि वैश्विक शांति और सहयोग के प्रति उसकी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने इस बात पर जोर दिया कि भारत दशकों से संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशनों में सबसे बड़े और सबसे विश्वसनीय योगदानकर्ताओं में से एक रहा है।

भारत का संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षा अभियानों में योगदान सात दशकों से अधिक पुराना है। इस दौरान हजारों भारतीय सैनिकों और अधिकारियों ने अफ्रीका, एशिया और अन्य क्षेत्रों में विभिन्न मिशनों में भाग लिया है। कई भारतीय शांतिरक्षकों ने कठिन परिस्थितियों में सेवा देते हुए सर्वोच्च बलिदान भी दिया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन संघर्ष प्रभावित देशों में युद्धविराम बनाए रखने, नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, मानवीय सहायता पहुंचाने और राजनीतिक स्थिरता बहाल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भारत की पेशेवर सैन्य क्षमता और निष्पक्ष दृष्टिकोण के कारण उसके शांतिरक्षकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष सम्मान प्राप्त है।

कार्यक्रम में यह भी रेखांकित किया गया कि आधुनिक शांति अभियानों की चुनौतियां पहले की तुलना में कहीं अधिक जटिल हो गई हैं। आतंकवाद, गृहयुद्ध, मानवीय संकट और राजनीतिक अस्थिरता जैसी परिस्थितियों में शांतिरक्षकों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

भारतीय प्रतिनिधियों ने कहा कि देश भविष्य में भी संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में सक्रिय योगदान देता रहेगा और वैश्विक शांति, सुरक्षा तथा बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।

अंतरराष्ट्रीय शांतिरक्षक दिवस हर वर्ष उन लाखों पुरुषों और महिलाओं के सम्मान में मनाया जाता है जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र के मिशनों के तहत सेवा दी है। यह दिन उन शांतिरक्षकों की स्मृति को भी समर्पित है जिन्होंने कर्तव्य निर्वहन के दौरान अपने प्राण न्योछावर कर दिए।

भारत ने इस अवसर पर एक बार फिर यह संदेश दिया कि विश्व में स्थायी शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग, संवाद और संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है, और इस दिशा में संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षा अभियानों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण बनी हुई है।

क्वाड की वास्तविक चुनौती उसके उद्देश्यों को धरातल पर उतारना: विशेषज्ञ

वाशिंगटन / सत्ता संदेश

Quadrilateral Security Dialogue यानी क्वाड को लेकर अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक विशेषज्ञों ने कहा है कि समूह की वास्तविक परीक्षा अब उसके घोषित उद्देश्यों को प्रभावी ढंग से लागू करने में है। विशेषज्ञों ने यह टिप्पणी भारत की ओर से हाल में आयोजित क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक के संदर्भ में की।

क्वाड में India, United States, Japan और Australia शामिल हैं। यह समूह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग, समुद्री सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला, प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर मिलकर काम करता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में क्वाड ने अपनी उपस्थिति और गतिविधियों को काफी विस्तार दिया है, लेकिन अब सदस्य देशों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे घोषणाओं और बैठकों से आगे बढ़कर वास्तविक परिणाम प्रस्तुत करें।

हाल ही में आयोजित विदेश मंत्रियों की बैठक में समुद्री सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सहयोग और मुक्त एवं समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र जैसे विषयों पर चर्चा हुई थी। भारत ने इस बैठक में क्षेत्रीय स्थिरता और नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के महत्व पर जोर दिया।

रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि क्वाड की विश्वसनीयता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह क्षेत्रीय चुनौतियों से निपटने में कितनी प्रभावी भूमिका निभा पाता है। विशेष रूप से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच इस समूह की भूमिका पर वैश्विक नजर बनी हुई है।

विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि क्वाड को केवल सुरक्षा मंच के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। जलवायु परिवर्तन, वैक्सीन सहयोग, उभरती प्रौद्योगिकी और आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा जैसे गैर-सैन्य क्षेत्रों में भी इसका प्रभाव महत्वपूर्ण हो सकता है।

कूटनीतिक जानकारों के अनुसार, भारत क्वाड में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और वह समूह को संतुलित, समावेशी और व्यावहारिक दिशा देने की कोशिश कर रहा है। भारत लगातार यह रेखांकित करता रहा है कि क्वाड का उद्देश्य किसी एक देश के खिलाफ गठबंधन बनाना नहीं, बल्कि क्षेत्रीय सहयोग और स्थिरता को बढ़ावा देना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में क्वाड की सफलता इस बात से तय होगी कि सदस्य देश अपने साझा हितों को किस हद तक ठोस परियोजनाओं और दीर्घकालिक रणनीतिक सहयोग में बदल पाते हैं।

संयुक्त राष्ट्र में भारत का पाकिस्तान पर तीखा प्रहार, कहा- सीमा पार आतंकवाद की कीमत चुकानी होगी

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

India ने संयुक्त राष्ट्र में Pakistan को सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे पर कड़ा संदेश देते हुए साफ कहा है कि आतंकवाद को प्रायोजित करने के गंभीर “परिणाम” भुगतने पड़ते हैं। भारत ने दो टूक शब्दों में कहा कि उसे पड़ोसी देश की ओर से प्रायोजित आतंकवादी हमलों से अपनी रक्षा करने का पूरा अधिकार है और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में वह किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरतेगा।

संयुक्त राष्ट्र में भारतीय प्रतिनिधियों ने कहा कि पाकिस्तान लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देता रहा है, जिससे क्षेत्रीय शांति और स्थिरता प्रभावित हुई है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद के खिलाफ एकजुट और सख्त रुख अपनाने की अपील करते हुए कहा कि किसी भी देश को आतंकवाद को विदेश नीति के औजार के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

भारत की ओर से यह भी कहा गया कि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई आत्मरक्षा का वैध अधिकार है और अंतरराष्ट्रीय कानून भी इसकी अनुमति देता है। भारतीय प्रतिनिधियों ने जोर देकर कहा कि जब निर्दोष नागरिकों और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा होता है, तब किसी भी संप्रभु राष्ट्र को अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार होता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि संयुक्त राष्ट्र में भारत का यह बयान अंतरराष्ट्रीय मंच पर आतंकवाद के खिलाफ उसकी सख्त नीति को दोहराता है। हाल के वर्षों में भारत लगातार पाकिस्तान पर आतंकवादी संगठनों को समर्थन देने का आरोप लगाता रहा है और वैश्विक मंचों पर इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाता आया है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार भारत का यह कड़ा रुख ऐसे समय सामने आया है जब वैश्विक स्तर पर आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। भारत यह संदेश देना चाहता है कि आतंकवाद के खिलाफ उसकी नीति स्पष्ट और निर्णायक है तथा वह अपनी संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाने को तैयार है।

अमेरिका-ईरान तनाव पर चीन की बड़ी टिप्पणी, पाकिस्तान की ‘सक्रिय मध्यस्थता’ का किया समर्थन

China ने अमेरिका और Iran के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के प्रयासों में Pakistan की भूमिका का समर्थन करते हुए कहा है कि क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए “सक्रिय मध्यस्थता” बेहद जरूरी है। चीन के विदेश मंत्री Wang Yi ने संयुक्त राष्ट्र में यह टिप्पणी करते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में संवाद और कूटनीति ही संकट का समाधान निकाल सकती है।

वांग यी ने कहा कि पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ रहे तनाव का असर वैश्विक शांति, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ रहा है। ऐसे में चीन उन सभी देशों के प्रयासों का समर्थन करता है जो अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत बहाल करने तथा टकराव को कम करने की दिशा में काम कर रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से पाकिस्तान की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि इस तरह की सक्रिय कूटनीतिक पहल क्षेत्रीय स्थिरता के लिए सकारात्मक संकेत है।

चीन ने यह भी दोहराया कि किसी भी विवाद का समाधान सैन्य कार्रवाई या दबाव की राजनीति से नहीं, बल्कि बातचीत और आपसी विश्वास के जरिए होना चाहिए। वांग यी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को ऐसे प्रयासों को बढ़ावा देना चाहिए जो तनाव कम करने और शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में आगे बढ़ें।

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन का यह बयान पश्चिम एशिया की बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच काफी अहम माना जा रहा है। हाल के महीनों में अमेरिका और ईरान के बीच कई मुद्दों को लेकर तनाव बढ़ा है, जिसमें परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा और प्रतिबंध जैसे विषय शामिल हैं। ऐसे समय में चीन और पाकिस्तान की कूटनीतिक सक्रियता को क्षेत्रीय समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि चीन लगातार खुद को वैश्विक शांति और मध्यस्थता के समर्थक देश के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है। इससे पहले भी बीजिंग कई अंतरराष्ट्रीय विवादों में बातचीत के जरिए समाधान की वकालत कर चुका है। वहीं पाकिस्तान की भूमिका को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो सकती है, क्योंकि इस्लामाबाद लंबे समय से मुस्लिम देशों और पश्चिमी शक्तियों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करता रहा है।

बेटे की शादी में शामिल नहीं होंगे डोनाल्ड ट्रंप; ईरान के साथ बढ़ते तनाव को बताया मुख्य कारण

इंटरनेशनल डेस्क : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह घोषणा की है कि वह अपने बेटे डोनाल्ड ट्रंप जूनियर और बेटिना एंडरसन की शादी में शामिल नहीं हो पाएंगे। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रही हलचल और विशेष रूप से ईरान के साथ जारी तनाव के कारण उनका इस समय व्हाइट हाउस में रहना अनिवार्य है।

व्हाइट हाउस में रहना है जरूरी: ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट के माध्यम से जानकारी दी कि हालांकि वह इस खास मौके पर अपने परिवार और अपनी होने वाली बहू बेटिना के साथ रहना चाहते थे, लेकिन सरकारी कारणों और देश के प्रति अपने कर्तव्यों की वजह से वह ऐसा नहीं कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि इस महत्वपूर्ण समय में उनके लिए वाशिंगटन, डी.सी. में व्हाइट हाउस में मौजूद रहना अधिक आवश्यक है।

ईरान संकट और सुरक्षा की स्थिति: इससे पहले पत्रकारों से बातचीत के दौरान भी ट्रंप ने संकेत दिया था कि ‘ईरान और अन्य मुद्दों’ की वजह से उनके बेटे की शादी का समय अभी ठीक नहीं है। स्रोतों के अनुसार, सीजफायर के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच संबंध बेहद नाजुक बने हुए हैं, जिससे शांति समझौते या फिर से युद्ध छिड़ने की अनिश्चितता बनी हुई है। इसी नाजुक स्थिति को देखते हुए राष्ट्रपति ने अपनी यात्रा रद्द की है।

बहामास में होगी शादी: डोनाल्ड ट्रंप जूनियर और बेटिना एंडरसन की शादी बहामास में एक निजी समारोह में होने वाली है, जिसमें परिवार और कुछ करीबी दोस्तों को ही आमंत्रित किया गया है। राष्ट्रपति ने समारोह में न पहुंच पाने के कारण सोशल मीडिया के जरिए ही जोड़े को अपनी शुभकामनाएं भेजी हैं।

भारत-साइप्रस रिश्तों को मिली नई मजबूती, रणनीतिक साझेदारी के साथ कई अहम समझौते

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री Narendra Modi ने शुक्रवार को Nikos Christodoulides के साथ व्यापक द्विपक्षीय वार्ता की। इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान भारत और Cyprus ने अपने संबंधों को नई ऊंचाई देते हुए उन्हें औपचारिक रूप से “रणनीतिक साझेदारी” में बदलने का ऐलान किया।

दोनों देशों के नेताओं ने व्यापार, निवेश, बुनियादी ढांचे, नौवहन, ऊर्जा और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। इसके साथ ही साझा परियोजनाओं और निवेश को गति देने के उद्देश्य से एक संयुक्त कार्यबल गठित करने का निर्णय भी लिया गया।

बैठक में क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और साइप्रस के बीच संबंध लोकतांत्रिक मूल्यों और आपसी विश्वास पर आधारित हैं तथा नई रणनीतिक साझेदारी दोनों देशों के आर्थिक और सामरिक सहयोग को और मजबूत करेगी।

साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स ने भारत को वैश्विक स्तर पर उभरती महत्वपूर्ण शक्ति बताते हुए विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों नेताओं ने भविष्य में व्यापारिक और समुद्री संपर्क को और मजबूत बनाने पर भी जोर दिया।

भारत एशियाई उत्पादकता संगठन (एपीओ) के शासी निकाय के 68वें सत्र की मेजबानी नई दिल्‍ली में करेगा


नई दिल्‍ली / सत्ता संदेश

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल 21 मई को एपीओ की 68वीं शासी निकाय बैठक के उद्घाटन सत्र में शामिल होंगे

एपीओ की 68वीं शासी निकाय की बैठक के दौरान उत्पादकता के पैरोकारों और तकनीकी विशेषज्ञों को एपीओ राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जाएगा

एशियाई उत्पादकता संगठन (एपीओ) के शासी निकाय का 68वां सत्र नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में 20 से 22 मई 2026 तक आयोजित किया जा रहा है। यह कार्यक्रम भारत की अध्‍यक्षता में हो रहा है। इस सत्र में 20 एपीओ सदस्य देशों के 60 से अधिक वरिष्ठ प्रतिनिधि भाग लेंगे।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल 21 मई 2026 को होने वाले उद्घाटन सत्र में उपस्थित रहेंगे। एपीओ के निदेशक, सलाहकार, एपीओ सदस्य देशों के राजनयिक मिशनों के प्रतिनिधि और आमंत्रित अतिथियों के भी इस कार्यक्रम में शामिल होने की उम्मीद है। कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान और भूटान की सरकारों के पर्यवेक्षकों के साथ-साथ ग्लोबल ग्रीन ग्रोथ इंस्टीट्यूट के प्रतिनिधि भी इसमें भाग लेंगे।

तीन दिवसीय इस कार्यक्रम में एपीओ विजन 2030 फ्रेमवर्क, 2027-28 की द्विवर्षीय अवधि के लिए एपीओ के प्रारंभिक बजट और एपीओ महासचिव चुनाव प्रक्रियाओं की समीक्षा पर उच्च स्तरीय चर्चाएं होंगी।

कार्यक्रम के प्रमुख एजेंडे में 68वीं शासी निकाय बैठक (जीबीएम) का औपचारिक उद्घाटन और शुभारंभ; 2026-27 के लिए एपीओ अध्यक्ष और उपाध्यक्षों का चुनाव; एपीओ वार्षिक और वित्तीय रिपोर्ट पर विचार-विमर्श तथा उसे अपनाना; बजट प्रस्तावों एवं संस्थागत सुधारों पर विचार-विमर्श; एपीओ विजन 2030 के अंतर्गत प्रगति तथा सचिवालय के प्रदर्शन की समीक्षा; प्रमुख नीतिगत और प्रक्रियात्मक सिफारिशों का अनुमोदन शामिल है।

उद्घाटन सत्र के दौरान, एपीओ राष्ट्रीय पुरस्कार कार्यक्रम के अंतर्गत उत्पादकता पैरोकारों और उत्पादकता तकनीकी विशेषज्ञों के लिए एपीओ राष्ट्रीय पुरस्कार की श्रेणियों में पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।

इन पुरस्कारों का उद्देश्य राष्ट्रीय उत्पादकता संगठनों (एनपीओ) की भूमिका को मजबूत करना है ताकि वे प्रभावशाली पहलों को आगे बढ़ाने वाली उत्कृष्ट उत्पादकता वाली कंपनियों को बढ़ावा दे सकें और उन्हें मान्यता दे सकें, साथ ही एपीओ सदस्य अर्थव्यवस्थाओं में ठोस सुधारों की ओर ले जाने वाली उत्पादकता की संस्कृति को प्रोत्साहित कर सकें।

शासी निकाय (जीबी) एपीओ की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था है और यह शासन, रणनीतिक निगरानी तथा संगठनात्मक निर्णय लेने के लिए सर्वोच्च संस्थागत मंच के रूप में कार्य करती है। वार्षिक रूप से आयोजित होने वाली शासी निकाय की इस बैठक में एपीओ के सभी सदस्य देशों के आधिकारिक प्रतिनिधि संगठन की रणनीतिक दिशा, वार्षिक कार्यक्रम प्राथमिकताओं, शासन ढांचे, संस्थागत प्रदर्शन और वित्तीय नियोजन पर विचार-विमर्श करने के लिए एकत्रित होते हैं।

उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) के सचिव श्री अमरदीप सिंह भाटिया, आईएएस ने मई 2025 में आयोजित एपीओ शासी निकाय के 67वें सत्र में एपीओ शासी निकाय की अध्यक्षता ग्रहण की। इसी सत्र के दौरान, भारत ने एपीओ शासी निकाय के 68वें सत्र की मेजबानी करने के अपने निर्णय की घोषणा की।

1961 में स्थापित एशियाई उत्पादकता संगठन (एपीओ) एशिया-प्रशांत क्षेत्र के 21 सदस्य देशों से मिलकर बना एक अंतर-सरकारी संगठन है। एपीओ पारस्परिक सहयोग और ज्ञान साझाकरण के माध्यम से सतत सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए उत्पादकता बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। पिछले छह दशकों में, इस संगठन ने नीतिगत संवाद, तकनीकी सहयोग, संस्थागत क्षमता विकास, ज्ञान के आदान-प्रदान और उत्पादकता वृद्धि में सर्वोत्तम प्रथाओं के प्रसार के माध्यम से सदस्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

यह आयोजन द्विपक्षीय और बहुपक्षीय गतिविधियों के अवसर भी प्रदान करेगा, जिससे ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा और सदस्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग मजबूत होगा।

एपीओ शासी निकाय के 68वें सत्र की मेजबानी करना राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और वैश्विक आर्थिक रुझानों के अनुरूप क्षेत्र में उत्पादकता-आधारित विकास, नवाचार और सतत विकास को बढ़ावा देने के प्रति भारत की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

तेलंगाना विधानसभा ने केंद्र से पश्चिम एशिया युद्ध रोकने की पहल का आग्रह किया, प्रस्ताव पारित

हैदराबाद, 30 मार्च (भाषा) तेलंगाना विधानसभा ने सोमवार को एक प्रस्ताव पारित करके केंद्र सरकार से पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को रोकने के लिए पहल करने का आग्रह किया।

उपमुख्यमंत्री मल्लु भट्टी विक्रमार्क ने प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि जारी युद्ध का प्रतिकूल प्रभाव न केवल पश्चिम एशिया पर बल्कि पूरे विश्व पर पड़ रहा है, जिससे हजारों लोगों की मौत हो रही है।

उन्होंने कहा कि तेलंगाना और अन्य राज्यों के लगभग 90 लाख भारतीय इस क्षेत्र में रहते हैं और युद्ध के प्रभाव से पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की आपूर्ति प्रभावित हुई है।

उन्होंने कहा कि ईंधन आपूर्ति पर नकारात्मक प्रभाव के कारण महंगाई बढ़ रही है और लोगों की आजीविका छिन रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘यदि युद्ध अनियंत्रित रूप से जारी रहा, तो यह तीसरे विश्वयुद्ध का रूप ले सकता है, जिससे मानवता के अस्तित्व को गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। इन अत्यंत खतरनाक परिणामों को देखते हुए, यह सदन भारत सरकार से युद्ध को रोकने और वैश्विक शांति स्थापित करने की दिशा में काम करने के लिए पहल करने का आग्रह करता है।’’

ईरान युद्ध को समाप्त करने के लिए पाकिस्तान सभी हितधारकों के साथ सक्रिय रूप से बातचीत कर रहा

 इस्लामाबाद, 26 मार्च (भाषा) पाकिस्तान ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह ईरान युद्ध को शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त करने के लिए क्षेत्र और उससे बाहर के सभी हितधारकों के साथ सक्रिय और रचनात्मक रूप से बातचीत कर रहा है।

विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी को शांति प्रयासों में पाकिस्तान की भूमिका और आगामी सप्ताहांत में इस्लामाबाद में आमने-सामने की वार्ता की संभावनाओं के बारे में कई सवालों का सामना करना पड़ा।

उन्होंने आगामी दिनों में सीधी वार्ता की पुष्टि करने से साफ इनकार कर दिया, जबकि इस बात पर जोर दिया कि पाकिस्तान वार्ता के माध्यम से शांति लाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है।

प्रवक्ता ने कहा, ‘‘पाकिस्तान क्षेत्रीय हितधारकों और अपने क्षेत्र से बाहर के हितधारकों के साथ सक्रिय और रचनात्मक रूप से जुड़ा हुआ है, और लगातार तत्काल तनाव कम करने, शत्रुता समाप्त करने और शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में एक अपरिवर्तनीय मार्ग अपनाने की वकालत कर रहा है।’’

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ व्यक्तिगत रूप से सभी संबंधित पक्षों के बीच संवाद और समझ को बढ़ावा देने के लिए ‘हमारे राजनयिक प्रयासों’ का नेतृत्व कर रहे हैं।

उन्होंने प्रधानमंत्री के उस ट्वीट का जिक्र किया जिसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साझा किया था।

उन्होंने कहा, ‘‘आपने देखा होगा, उनके हालिया सार्वजनिक संदेशों को व्यापक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली, जिसमें अमेरिका के नेतृत्व द्वारा भी मान्यता शामिल है।’’ उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ईमानदारी और स्पष्ट उद्देश्य से प्रेरित होकर सेतु बनाने में सैद्धांतिक और सक्रिय भूमिका निभाता रहेगा।

अंद्राबी ने कहा कि उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इसहाक डार ने भी इन प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए क्षेत्र और उससे बाहर के अपने समकक्षों के साथ घनिष्ठ और निरंतर संपर्क बनाए रखा है।

विश्व व्यवस्था के पुनर्निर्माण में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका रही है: दक्षिण अफ्रीकी मंत्री

जोहानिसबर्ग, 10 मार्च (भाषा) दक्षिण अफ्रीका के व्यापार एवं उद्योग मंत्रालय के उप मंत्री जुको गोडलिम्पी ने सोमवार को प्रिटोरिया में उद्योग जगत के दिग्गजों, शिक्षाविदों और नीति-निर्माताओं की एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की विश्व व्यवस्था के पुनर्निर्माण में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका रही है जो अब पतन के कगार पर है।

गोडलिम्पी ने भारतीय उच्चायोग और ‘सीआईआई-इंडिया बिजनेस फोरम’ द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित दूसरे वार्षिक भारत-दक्षिण अफ्रीका व्यापार सम्मेलन को संबोधित किया।

मंत्री ने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त होने के दो वर्ष बाद स्वतंत्र भारत का जन्म उस वैश्विक व्यापार प्रणाली के ढांचे के बीच हुआ, जिसे पश्चिमी देशों ने तैयार किया था।

उन्होंने कहा, “प्रमुख शक्तियों द्वारा आकार दी जा रही दुनिया में भारत उभरता हुआ लोकतंत्र है।”

भारत की स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 तक एक प्रमुख वैश्विक शक्ति बनने की उसकी योजनाओं पर मंत्री ने कहा कि भारत अब एक अलग और खास स्थिति में है।

उन्होंने कहा, “भारत खुद को ऐसी स्थिति में पाएगा, जहां वह सिर्फ मौजूदा वैश्विक व्यवस्था पर चलने के बजाय एक नयी वैश्विक व्यवस्था के सह-निर्माता की भूमिका निभाने का दायित्व भी संभालेगा।”

उन्होंने कहा, “द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की उस व्यवस्था में भारत एक सहायक भागीदार के रूप में उभरा था, लेकिन अब उसे इस वास्तविकता का सामना करना होगा कि वह ऐसी स्थिति में है जहां उसे उस व्यवस्था के पुनर्निर्माण में एक मुख्य भागीदार की भूमिका निभानी पड़ेगी, क्योंकि यह व्यवस्था अब पतन के कगार पर है।”

गोडलिम्पी ने कहा कि भारत और दक्षिण अफ्रीका केवल व्यापारिक साझेदार नहीं हैं।

मंत्री ने कहा, “हम विकास, औद्योगीकरण और वैश्विक आर्थिक सुधार में रणनीतिक साझेदार हैं।”

उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में इन दोनों देशों को “टेरिबल ट्विन्स” (खतरनाक जोड़ी) कहा जाता है क्योंकि इनके प्रतिनिधि ‘ग्लोबल साउथ’ के हितों में बदलाव लाने के लिए हमेशा मुखर रहते हैं।

उन्होंने कहा, “वैश्विक विकास से संबंधित सभी चर्चाओं में दक्षिण अफ्रीका और भारत निष्पक्ष और न्यायसंगत अंतरराष्ट्रीय व्यापार के सिद्धांतों पर आधारित ग्लोबल साउथ के रणनीतिक दृष्टिकोण का समर्थन करते हैं और इस बात पर भी बल देते हैं विकासशील देशों के विचारों को भी उतनी ही गंभीरता से लिया जाना चाहिए जितना कि अधिक आर्थिक शक्ति वाले देशों के विचारों को।”