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भूमि शासन एवं वाटरशेड प्रबंधन में सहयोग को लेकर भूमि संसाधन विभाग और एडीबी के बीच चर्चा


नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भूमि संसाधन विभाग के सचिव ने एडीबी के साथ बैठक में भूमि शासन सुधारों और डिजिटल पहलों पर प्रकाश डाला

नई दिल्ली, 21 मई: ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग (डीओएलआर) के सचिव श्री नरेन्द्र भूषण ने आज एशियाई विकास बैंक (एडीबी) की कंट्री डायरेक्टर सुश्री मियो ओका के नेतृत्व में एडीबी प्रतिनिधिमंडल के साथ एक परिचयात्मक बैठक की। बैठक के दौरान, श्री नरेन्द्र भूषण ने 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के सरकार के विजन के अनुरूप भूमि प्रशासन, भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण और जलसंभर विकास के क्षेत्रों में भूमि संसाधन विभाग द्वारा की जा रही प्रमुख पहलों पर प्रकाश डाला।

सचिव ने कहा कि भूमि संसाधन विभाग को देश में भूमि अभिलेख प्रबंधन और भूमि प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने कहा कि कुशल भूमि प्रशासन और भूमि संसाधनों का अधिकतम उपयोग आर्थिक विकास को गति देने, भूमि संपत्तियों के मूल्य को उजागर करने और समावेशी विकास सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।

भूमि प्रशासन में प्रौद्योगिकी की परिवर्तनकारी भूमिका पर बल देते हुए, श्री भूषण ने प्रतिनिधिमंडल को सूचित किया कि डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (डीआईएलआरएमपी) के तहत महत्वपूर्ण प्रगति हासिल की गई है। उन्होंने कहा कि कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में रिकॉर्ड्स ऑफ राइट्स का डिजिटलीकरण लगभग पूर्ण हो चुका है, जबकि देश भर में लिखित भूमि अभिलेखों को जमाबंदी नक्शों से जोड़ने में महत्वपूर्ण उपलब्धियां प्राप्त की गई हैं।

उन्होंने बताया कि विभाग कार्यक्रम के अगले चरण, डीआईएलआरएमपी 3.0 लागू करने की प्रक्रिया में है, जिसका उद्देश्य प्रौद्योगिकी उपाय, भूमि अभिलेखों के गतिशील अद्यतन और भूमि संबंधी डेटाबेस के बेहतर एकीकरण के माध्यम से भूमि शासन प्रणालियों को और सुदृढ़ करना है। सचिव ने देश भर में भूमि पार्सलों को विशिष्ट भूमि पार्सल पहचान संख्या (यूएलपीआईएन), जिसे “भू-आधार” भी कहा जाता है, के आवंटन में हुई प्रगति को भी रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि भारत में लगभग 66 प्रतिशत कृषि भूमि पार्सलों के लिए यूएलपीआईएन जारी किए जा चुके हैं।

श्री भूषण ने डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) की अगली परत के रूप में एक व्यापक “लैंड स्टैक” विकसित करने के विभाग के विजन को साझा किया, जिसमें भूमि अभिलेख, पंजीकरण, म्यूटेशन, भूमि उपयोग और अन्य संबंधित सेवाओं को अंतरसंचालनीय डिजिटल प्रणालियों के माध्यम से एकीकृत करके बेहतर शासन और सेवा वितरण सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने शहरी क्षेत्रों में आधुनिक भूमि शासन पद्धतियों के विस्तार के लिए विभाग की चल रही पहलों पर भी प्रकाश डाला, जिनमें मानचित्रण और प्रौद्योगिकी-आधारित समाधान शामिल हैं।

जलसंभर विकास के विषय पर, सचिव ने कृषि उत्पादकता बढ़ाने और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने के लिए जलवायु-अनुकूल और टिकाऊ भूमि एवं जल प्रबंधन पद्धतियों के महत्व पर बल दिया। उन्होंने देश भर में जलसंभर विकास पहलों को व्यापक स्तर पर लागू करने के लिए नवीन वित्तपोषण मॉडल, प्रौद्योगिकी उपाय और संयोजन-आधारित दृष्टिकोणों की आवश्यकता पर बल दिया।

बैठक में भूमि प्रशासन, जलसंभर विकास, डिजिटल शासन और सतत प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन में वैश्विक सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों पर भी विचार-विमर्श किया गया। शासन के परिणामों में सुधार के लिए भू-स्थानिक प्रणालियों, डिजिटल प्लेटफार्मों, रिमोट सेंसिंग और डेटा-आधारित योजना सहित उभरती प्रौद्योगिकियों के उपयोग पर चर्चा हुई।

सुश्री मियो ओका ने सचिव को भारत में विभिन्न क्षेत्रों में एशियाई विकास बैंक द्वारा समर्थित विभिन्न पहलों और परियोजनाओं तथा राज्य सरकारों के साथ जारी सहयोग के बारे में जानकारी दी। उन्होंने डिजिटल कृषि, जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता, जलसंभर प्रबंधन और संस्थागत क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में एडीबी के कार्यों पर प्रकाश डाला और आपसी हित के क्षेत्रों में भूमि संसाधन विभाग के साथ सहयोग करने में एडीबी की गहरी रुचि व्यक्त की।


दोनों पक्षों ने देश में सतत भूमि और जलसंभर प्रबंधन प्रणालियों को मजबूत करने के लिए तकनीकी सहायता, नीतिगत समर्थन, क्षमता निर्माण और ज्ञान साझाकरण सहित भविष्य में सहयोग के अवसरों पर चर्चा की।

इस बैठक में अपर सचिव श्री आर आनंद; संयुक्त सचिव श्री पी. नरहरि; संयुक्त सचिव श्री नितिन खाडे; आर्थिक सलाहकार श्री पी.के. अब्दुल करीम; और मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

एडीसी पूनम सिंह ने कटाई के अंतिम दिनों में किसी भी घटना को रोकने के लिए कड़ी निगरानी के आदेश दिए हैं।

लुधियाना / सत्ता संदेश

जैसे-जैसे लुधियाना में गेहूं की कटाई का मौसम अंतिम चरण में पहुंच रहा है, अतिरिक्त उपायुक्त (जनरल) पूनम सिंह ने बुधवार को इन महत्वपूर्ण अंतिम दिनों में पराली जलाने की शून्य घटनाएं सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

विभिन्न विभागों—कृषि एवं किसान कल्याण, पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB), राजस्व, पुलिस, पंचायत, मंडी बोर्ड, सहकारिता तथा अन्य हितधारकों के अधिकारियों के साथ बैठक की अध्यक्षता करते हुए सिंह ने बताया कि इस वर्ष लगभग 2.38 लाख हेक्टेयर में गेहूं की खेती हुई है, जिससे कटाई का अंतिम चरण सख्त निगरानी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है।

सिंह ने उप-मंडल मजिस्ट्रेट (SDMs) और नोडल अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में कड़ी निगरानी बनाए रखें और पराली जलाने के किसी भी मामले पर तुरंत कार्रवाई करें। उन्होंने ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाने पर जोर देते हुए सभी विभागों के बीच समन्वित और तीव्र प्रयासों की आवश्यकता बताई।

उन्होंने अधिकारियों से किसानों के बीच जागरूकता अभियान को और तेज करने की अपील की, जिसमें कैंप, मोबाइल वैन और जानकारी सामग्री के माध्यम से पराली जलाने के दुष्प्रभावों—जैसे वायु प्रदूषण, मिट्टी की गुणवत्ता में गिरावट, पोषक तत्वों की हानि तथा धुएं और सूक्ष्म कणों से होने वाले स्वास्थ्य जोखिम—के बारे में बताया जाए।

प्रशासन की प्रतिबद्धता दोहराते हुए उन्होंने कहा कि किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन की वैज्ञानिक तकनीकों के बारे में मार्गदर्शन और सहायता प्रदान की जाएगी। कृषि, प्रदूषण नियंत्रण, राजस्व, सहकारिता और पंचायत सहित सभी विभागों को मिलकर यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि कटाई के अंत में पर्यावरण को कोई नुकसान न हो।

संसदीय कार्य मंत्रालय ने सक्रिय भागीदारी और ठोस परिणामों के साथ स्वच्छता पखवाड़ा-2026 का समापन किया

दिल्ली /सत्ता संदेश

संसदीय कार्य मंत्रालय ने 16 से 30 अप्रैल, 2026 तक स्वच्छता पखवाड़ा-2026 का सफलतापूर्वक आयोजन किया। इसमें मंत्रालय के सभी विभागों/प्रकोष्ठों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। पखवाड़े भर चलने वाले इस अभियान का मुख्य उद्देश्य स्वच्छ भारत मिशन के लक्ष्यों के अनुरूप स्वच्छता, सफाई, अभिलेख प्रबंधन और कार्यस्थल सुधार पर ध्यान केंद्रित करना था।

यह पखवाड़ा 16 अप्रैल, 2026 को संसदीय कार्य मंत्रालय के सचिव द्वारा सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को स्वच्छता की शपथ दिलाए जाने के साथ शुरू हुआ। स्वच्छता संबंधी संदेशों को मंत्रालय की वेबसाइट पर प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से जागरूकता को और बढ़ाया गया।

17 अप्रैल, 2026 को एक समर्पित अभिलेख प्रबंधन और डिजिटलीकरण अभियान चलाया गया। इस दौरान 92 फाइलों का डिजिटलीकरण किया गया, 60 फाइलों की समीक्षा की गई, अभिलेख प्रतिधारण अनुसूची के अनुसार 40 भौतिक फाइलों को हटा दिया गया और 38 ई-फाइलों को बंद कर दिया गया।

पूरे पखवाड़े में व्यापक स्वच्छता एवं रखरखाव कार्य किए गए। इनमें सीपीडब्ल्यूडी द्वारा सभी कमरों में बिजली के उपकरणों की सफाई और फ्यूज्ड बल्ब/ट्यूबलाइटों की मरम्मत के साथ-साथ कार्यालयों, गलियारों और सार्वजनिक क्षेत्रों में विशेष स्वच्छता अभियान शामिल था। आवश्यकतानुसार कमरों की सफेदी भी कराई गई।

ग्रीन ऑफिस इनिशिएटिव के तहत, कार्यस्थल के वातावरण को बेहतर बनाने के लिए सीपीडब्ल्यूडी के बागवानी विभाग ने इनडोर पौधे लगाए।

29 अप्रैल, 2026 को संसदीय कार्य मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव के नेतृत्व में वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा मंत्रालय के विभिन्न विभागों/कार्यालयों में स्वच्छता और सफाई मानकों का आकलन करने के लिए निरीक्षण किया गया। इस निरीक्षण के आधार पर ही स्वच्छता मानकों के अनुसार विभागों का वर्गीकरण भी किया गया।

यह स्वच्छता पखवाड़ा 30 अप्रैल, 2026 को एक समारोह के साथ संपन्न हुआ। इसमें संसदीय कार्य सचिव ने शीर्ष तीन प्रदर्शन करने वाले अनुभागों को स्मृति चिन्ह वितरित किए। इस अवसर पर अपर सचिव भी उपस्थित थे। समारोह के दौरान, सचिव ने अन्य अनुभागों को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले अनुभागों का अनुकरण करने और स्वच्छता मानकों तथा अपने कार्यस्थलों के समग्र वातावरण को बेहतर बनाकर और अधिक सुधार के लिए प्रयास करने के लिए प्रोत्साहित किया।

संसदीय कार्य मंत्रालय ने स्वच्छता, कुशल अभिलेख प्रबंधन और एक स्थायी कार्य वातावरण को शासन के अभिन्न घटकों के रूप में संस्थागत रूप देने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।

पंजाब का अस्तित्व और पहचान नदियों से जुड़ी हुई है : संत सीचेवाल

लुधियाना/सत्ता संदेश

बुद्धा नदी के जल की गुणवत्ता में सुधार के बावजूद, गोबर संग्रहण की चुनौती बनी हुई है।

नदी में कचरे से भरे बोरे फेंकने का चलन बढ़ रहा है।

तलवारा गांव में सीचेवाल मॉडल का निर्माण किया जा रहा है।

टीडीएस 3500 से घटकर 675 हो गया है।

राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल द्वारा बुद्धा नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए शुरू किया गया अभियान अब अपने अंतिम चरण में प्रवेश कर रहा है। जल की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, लेकिन नदी में गोबर के प्रवेश की चुनौती अभी भी बनी हुई है।

हैबोवाल ईटीपी संयंत्र की छह मोटरें बंद होने के कारण डेयरी परिसर की सड़कों पर गोबर मिला पानी फैल रहा था, जिससे लोगों को काफी परेशानी हो रही थी। संत सीचेवाल की टीम द्वारा इसकी सूचना दिए जाने पर प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की और मोटरें तुरंत चालू कर दी गईं।

संत सीचेवाल ने अधिकारियों को स्पष्ट कर दिया कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के ‘रंगला पंजाब’ के सपने को साकार करने के लिए बुद्धा नदी की स्वच्छता बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि पंजाब की सच्ची पहचान और अस्तित्व उसकी नदी से जुड़ा हुआ है।

हैबोवाल डेयरी कॉम्प्लेक्स के पास स्थापित अस्थायी सीचेवाल मॉडल के तहत, टैंकों से 105 टन गोबर निकाला गया, जबकि घर-घर जाकर केवल 15 टन गोबर ही एकत्र किया जा सका। ताजपुर डेयरी कॉम्प्लेक्स में, टैंकों से 88 टन गोबर निकाला गया, जबकि निर्धारित स्थानों से केवल 28 टन ही एकत्र किया जा सका।

नगरपालिका अधिकारियों के अनुसार, हैबोवाल और ताजपुर क्षेत्रों से कुल 426 टन गोबर एकत्र किया गया, लेकिन इसके बावजूद, 224 टन गोबर अभी भी बुद्धा नदी और सीवेज उपचार संयंत्रों तक पहुंच रहा है।

संत सीचेवाल ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ मिलकर जैनपुर, तलवारा गांव और लाडोवाल बाईपास के पास स्थित बरनहारे क्षेत्र की सीवेज लाइन का निरीक्षण किया। बल्लोकी पुल के पास बरेवाल नाले से होकर बुधा नदी में बह रहे डेयरी के गंदे पानी के मुद्दे को भी गंभीरता से लिया गया।

इसके साथ ही, शिवपुरी पुल पर मशीनों से नदी से निकाली जा रही गाद और ताजपुर डेयरी परिसर के पास बने अस्थायी सीचेवाल मॉडल की भी समीक्षा की गई।

न्याय विभाग ने स्वच्छता पखवाड़ा 2026 के दौरान विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया

न्याय विभाग ने 1 अप्रैल से 15 अप्रैल, 2026 तक स्वच्छता पखवाड़ा 2026 का आयोजन किया, जिसमें सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन में स्वास्थ्य, व्यक्तिगत स्वच्छता और मानसिक कल्याण के बारे में जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कई गतिविधियों का आयोजन किया गया।

विभाग द्वारा 2 अप्रैल, 2026 को सभी कर्मचारियों के लिए आधे घंटे का योग सत्र आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य कर्मचारियों को योग को अपने जीवनशैली का अभिन्न अंग बनाने के लिए प्रोत्साहित करना था। यह सत्र पखवाड़ा अवधि के दौरान आयोजित किया गया था ताकि कर्मचारियों को व्यक्तिगत और व्यावसायिक दोनों क्षेत्रों में स्वच्छता, स्वास्थ्य और कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पुन:सुदृढ़ करने के लिए प्रेरित किया जा सके।

स्वच्छता और साफ-सफाई पर अपने विचार व्यक्त करने के लिए विभाग में 09 अप्रैल, 2026 को अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए हिंदी में एक निबंध लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था।

10 अप्रैल, 2026 को जैसलमेर हाउस परिसर में श्रमदान कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसके बाद सचिव (न्याय) श्री नीरज वर्मा के मार्गदर्शन में वृक्षारोपण अभियान चलाया गया। इस अभियान का उद्देश्य अधिकारियों को अपने निवास स्थान के आस-पास या किसी उपयुक्त स्थान पर वृक्षारोपण में भाग लेने के लिए प्रेरित करना है ताकि पर्यावरण को हरा-भरा बनाया जा सके। सचिव (न्याय) ने स्वच्छ, हरित और सतत पर्यावरण को प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया।

स्वच्छता दिवस के अवसर पर न्याय विभाग के अधिकारियों/कर्मचारियों के बच्चों के लिए 10 अप्रैल, 2026 को एक चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और यह उनके लिए एक मजबूत प्रेरणा का स्रोत बना।

पखवाड़े के दौरान, विभाग ने 13 अप्रैल, 2026 को आईजीओटी मिशन एलआईएफई (पर्यावरण के लिए जीवनशैली) पर एक सत्र/मॉड्यूल का आयोजन किया, ताकि सभी लोग पर्यावरण संरक्षण के लिए सतत दैनिक कार्यों को सीख सकें और अपना सकें, साथ ही जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए ‘पर्यावरण समर्थक लोगों’ का एक नेटवर्क विकसित कर सकें। सत्र का उद्देश्य ‘उपयोग करो और फेंक दो’ अर्थव्यवस्था को ‘चक्रीय अर्थव्यवस्था’ से बदलने के लिए जागरूकता पैदा करना था, जिसमें पर्यावरण स्थिरता के लिए व्यक्तिगत जिम्मेदारी पर जोर दिया गया था।

स्वच्छता पखवाड़ा समारोह के दौरान, न्याय विभाग ने भारत रत्न डॉ. बी.आर. अंबेडकर की जयंती पर, मंगलवार 14 अप्रैल 2026 को डॉ. बी.आर. अंबेडकर की प्रतिमा का ‘माल्यर्पण’ समारोह भी आयोजित किया। यह कार्यक्रम भारतीय संविधान के निर्माता को श्रद्धांजलि अर्पित करने और समानता, न्याय, सामाजिक सशक्तिकरण और महिलाओं, श्रमिकों और हाशिए पर पड़े समुदायों के सामाजिक सुधारों के उनके आदर्शों के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराने के लिए आयोजित किया गया था। विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अर्जुन राम मेघवाल ने जैसलमेर हाउस परिसर के सामने स्थित डॉ. बी.आर. अंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की।

डॉ. अंबेडकर के समाज में किए गए अभूतपूर्व योगदान को याद करते हुए, न्याय विभाग के सचिव श्री नीरज वर्मा, विभाग के पूर्व सचिवों और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इस अवसर पर डॉ. अंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित की।

इन गतिविधियों में अधिकारियों और कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिससे कार्यस्थलों और अन्य स्थानों पर स्वच्छता और साफ-सफाई बनाए रखने के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी की भावना मजबूत हुई। पखवाड़े के दौरान आयोजित स्वच्छता गतिविधियों/प्रतियोगिताओं की विभिन्न श्रेणियों में अधिकारियों को कई पुरस्कार दिए गए। विभाग स्वच्छ भारत मिशन के आदर्शों के प्रति प्रतिबद्ध है और नियमित पहलों, अभियानों और गतिविधियों के माध्यम से स्वच्छता और स्थिरता को बढ़ावा देना जारी रखेगा।

संत सीचेवाल ने बुड्ढा दरिया को अपनाने का दिया आह्वान

बुड्ढा दरिया के पास के गांवों में भूजल स्तर 10 फीट तक बढ़ा

नदियां और दरिया को साफ रखना पंजाबियों की सामूहिक जिम्मेदारी – संत सीचेवाल

भूखड़ी खुर्द के तट पर लगातार दूसरे साल भी मनाई गई बैसाखी

“पानी भी साफ हुआ और हवा भी शुद्ध हुई है”

लुधियाना/ सत्ता संदेश

भूखड़ी खुर्द क्षेत्र में पिछले दो वर्षों से बुड्ढा दरिया में साफ पानी बहने से उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिला है। इस इलाके में भूमिगत जल स्तर 10–10 फीट तक ऊपर उठ गया है। साफ पानी बहने के कारण प्रवासी पक्षियों की आमद बढ़ी है और इसे बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। गांव भामियां से गुजरने वाले दरिया के पानी के टीडीएस स्तर में भी काफी सुधार आया है।

राज्यसभा सदस्य और पर्यावरण प्रेमी संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने लोगों से अपील की कि वे बुड्ढा दरिया को अपना समझकर इसकी देखभाल करें। भूखड़ी खुर्द के गुरुद्वारा साहिब में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम के दौरान बैसाख माह की कथा करते हुए उन्होंने कहा कि नदियां और दरिया हमारी विरासत हैं और इन्हें संभालना हम सभी की जिम्मेदारी है।

उन्होंने संगत को बैसाखी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि 1699 में इसी दिन खालसा पंथ की स्थापना हुई थी और सतलुज नदी के जल से अमृत तैयार किया गया था। गुरु नानक देव जी से लेकर गुरु गोबिंद सिंह जी तक सभी गुरुओं ने जल से गहरा संबंध बनाए रखा।

संत सीचेवाल ने कहा कि हमारा नदियों से सदियों पुराना रिश्ता है। जब हम इन्हें अपना मान लेंगे तो कोई भी इन्हें गंदा करने की हिम्मत नहीं करेगा। उन्होंने बताया कि पिछले साल की तुलना में इस बार दरिया का पानी और अधिक साफ है और इसका टीडीएस लगभग 185 के आसपास दर्ज किया गया।

लुधियाना शहर की मेयर प्रिंसिपल इंदरजीत कौर गिल ने संत सीचेवाल की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने बुड्ढा नाले को फिर से दरिया का रूप दे दिया, जो एक असंभव कार्य को संभव बनाने जैसा है।

गांव के सरपंच सतपाल सिंह ने कहा कि जो लोग दरिया को प्रदूषित करते हैं, वे अपराध कर रहे हैं। उन्होंने डेयरी संचालकों से अपील की कि वे अब साफ हो चुके दरिया को दोबारा गंदा न करें। उन्होंने यह भी दावा किया कि इलाके में भूजल स्तर 10 फीट तक बढ़ गया है और दरिया की साफ-सफाई बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी की जाएगी।

बुड्ढा दरिया की सफाई के लिए चल रही कार सेवा के तहत भूखड़ी खुर्द के तट पर इस वर्ष भी बैसाखी मनाई गई। दरिया के किनारों को हरा-भरा बनाने के लिए फलदार और छायादार पौधे लगाए गए। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने दरिया में स्नान किया और बच्चों ने पानी में खेलते हुए आनंद लिया। संत अवतार सिंह यादगारी स्कूल के विद्यार्थियों ने कीर्तन प्रस्तुत कर संगत को आनंदित किया।

इस मौके पर संत बाबा बग्गा सिंह जी, विधायक दलजीत सिंह ग्रेवाल, सुरजीत सिंह शंटी, सरपंच करमजीत सिंह खासीकलां, सरपंच मलकीत कौर तलवंडी माधोपुर, सरपंच जोगा सिंह चक चेला, सरपंच बूटा सिंह सीचेवाल, सरपंच गुरु रामदास नगर, बलविंदर सिंह विर्क, जसवीर सिंह ग्रेवाल, पूर्व सरपंच बलकार सिंह, चेयरमैन तरसेम सिंह चक चेला, गुरमेल सिंह, हरदेव सिंह दौधर, कुलविंदर कौर मिन्हास, मदनपुरी के कविशरी जत्था और जेई मौजूद थे।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2024 में यहां दरिया में 5 से 6 फीट तक गाद जमा थी, जिसे हटाने के लिए लगातार 40 दिनों तक एक्स्कावेटर, जेसीबी मशीनों और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की मदद से सफाई अभियान चलाया गया था।

बॉक्स आइटम:
गांव के शुद्ध किए गए पानी को खेतों तक पहुंचाने के लिए भूमि रक्षा विभाग द्वारा सोलर मोटर स्थापित की गई है, जिससे “सीचेवाल मॉडल” के तहत जल प्रबंधन को मजबूती मिली है।

नवी मुंबई, वस्त्र अपशिष्ट, टेक्सटाइल वेस्ट मैनेजमेंट, पर्यावरण संरक्षण, रीसाइक्लिंग, सस्टेनेबिलिटी, कचरा प्रबंधन, सर्कुलर इकॉनमी, हरित पहल, शहरी विकास, पुनर्चक्रण, पर्यावरण अनुकूल पहल

नवी मुंबई की टेक्सटाइल रिकवरी फैसिलिटी, चक्रीय प्रणालियों और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से वस्त्र अपशिष्ट को अवसरों में बदलने का काम कर रही है। स्वच्छ भारत मिशन-अर्बन 2.0 के अंतर्गत यह पहल न केवल लैंडफिल कचरे को कम कर रही है, बल्कि रोजगार के नए रास्ते भी खोल रही है और शहरी भारत के लिए एक प्रभावी व विस्तार योग्य मॉडल पेश कर रही है।

भारत में हर साल लगभग 78 लाख मीट्रिक टन वस्त्र अपशिष्ट उत्पन्न होता है, जो घरों, संस्थानों और उद्योगों द्वारा उपयोग किए जाने वाले वस्त्रों की व्यापकता और विविधता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। साड़ियों और वर्दी से लेकर डेनिम और घरेलू लिनेन तक, कपड़े शहरी कचरे के प्रवाह का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जिसे अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है। शहरों में वस्त्रों की रिकवरी, पुन: उपयोग और पुनर्चक्रण के लिए सुनियोजित प्रणालियां विकसित करने की आवश्यकता को तेजी से महसूस की जा रही है। चक्रीय अर्थव्यवस्था के दृष्टिकोण और संसाधन दक्षता पर बढ़ते ध्यान के साथ, नगरपालिकाएं ऐसे नवीन समाधानों की खोज कर रही हैं जो वस्त्रों को लैंडफिल में जाने से रोकते हैं।

स्वच्छ भारत मिशन-अर्बन 2.0 के तहत, नवी मुंबई नगर निगम (एनएमएमसी) इस मामले में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी बनकर उभरा है। व्यवस्थित उपायों के माध्यम से वस्त्र अपशिष्ट की समस्या से निपटने के अवसर को पहचानते हुए, एनएमएमसी ने नवी मुंबई के बेलापुर में भारत की पहली नगर निगम टेक्सटाइल रिकवरी फैसिलिटी (टीआरएफ) स्थापित की। विकेंद्रीकृत संग्रहण, वैज्ञानिक छंटाई, पता लगाने की क्षमता और महिलाओं के नेतृत्व में आजीविका सृजन को एकीकृत करके, टीआरएफ वस्त्र अपशिष्ट को एक उपेक्षित धारा से शहरी चक्रीय अर्थव्यवस्था के एक मूल्यवान घटक के रूप में पुनर्स्थापित करता है।

नवी मुंबई की टेक्सटाइल रिकवरी फैसिलिटी (टीआरएफ) की परिकल्पना, एक स्वतंत्र संग्रह केंद्र के रूप में नहीं, बल्कि एक व्यापक चक्रीय इकोसिस्टम के रूप में की गई है जो संग्रह, छंटाई, प्रौद्योगिकी और आजीविका सृजन को जोड़ता है।

इस मॉडल की शुरुआत विकेंद्रीकृत संग्रहण प्रणाली से होती है, जिसके तहत सभी 8 नगर निगम वार्डों में स्थित हाउसिंग सोसाइटियों में ब्रांडेड कपड़े के कूड़ेदान लगाए गए हैं। अब तक 140 कूड़ेदान स्थापित किए जा चुके हैं और 250 कूड़ेदान लगाने का लक्ष्य है जिससे जमीनी स्तर पर सुलभता और नागरिक भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

बेलापुर के एक पुराने शहरी स्वास्थ्य केंद्र में स्थापित अंतरिम टीआरएफ में, वैज्ञानिक छंटाई और अनुरेखण क्षमता पर ध्यान केंद्रित किया गया है। एकत्रित वस्त्रों का वजन किया जाता है, उन पर टैग लगाए जाते हैं और उन्हें व्यवस्थित रूप से पुन: प्रयोज्य, पुनर्चक्रण योग्य, अपसाइक्लिंग योग्य, डाउनसाइक्लिंग योग्य और अस्वीकृत श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है। कोशा हैंडहेल्ड स्कैनर के एकीकरण से कपास, पॉलीकॉटन, पॉलिएस्टर, ऊन और रेशम सहित रेशों की तत्काल पहचान संभव हो पाती है, जिससे वैज्ञानिक वर्गीकरण को मजबूती मिलती है और सामग्री की पुनर्प्राप्ति को अनुकूलित किया जाता है।

दाता से अंतिम उत्पाद तक वस्तु की यात्रा को ट्रैक करने के लिए एक विशेष एमआईएस प्लेटफॉर्म विकसित करता है, जो डिजिटल निगरानी, पारदर्शिता, जवाबदेही और डेटा-आधारित निर्णय प्रक्रिया को बढ़ावा देता है। पहचान के बाद, आगे की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए वस्त्रों को कपड़े के प्रकार, रंग और स्थिति के आधार पर अलग किया जाता है। छांटे गए पदार्थों को पुनः उपयोग में लाने से पहले स्वच्छता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अच्छी तरह से कीटाणुरहित किया जाता है।

उपयुक्त कपड़ों को स्वयं-सहायता समूहों की कुशल महिलाओं द्वारा हस्तनिर्मित बैग, चटाई, सहायक उपकरण, परिधान और घरेलू सजावट की वस्तुओं में परिवर्तित किया जाता है। इन पुनर्निर्मित उत्पादों को बाद में प्रदर्शनियों में प्रदर्शित और बेचा जाता है। इससे उन सामग्रियों को नया जीवन और अर्थ मिलता है, जिन्हें कभी बेकार समझा जाता था।

300 से अधिक महिलाओं ने फाइबर की पहचान, पृथक्करण प्रोटोकॉल, मरम्मत तकनीक और अपसाइक्लिंग कौशल को कवर करने वाले 8 दिवसीय प्रशिक्षक प्रशिक्षण (टीओटी) मॉड्यूल में भाग लिया है। 150 से अधिक महिलाएं अब कपड़ा छंटाई, सिलाई और उत्पाद रूपांतरण के माध्यम से प्रति माह 9,000 रुपए से 15,000 रुपए के बीच से कमा रही हैं।

इस पहल ने एक क्रांतिकारी बदलाव लाया है। इसने गृहिणियों को कुशल चक्रीय अर्थव्यवस्था के प्रणेता के रूप में उभरने में सक्षम बनाया है। यह संयंत्र एक समर्पित अपसाइक्लिंग केंद्र के रूप में कार्य करता है जहां स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) के सदस्य पुराने वस्त्रों से बैग, कपड़े, पाउच और घरेलू सजावट के उत्पाद बनाते हैं। वस्त्र पुनर्चक्रण एक सुनियोजित आजीविका का साधन बनकर उभरा है जो हरित रोजगार सृजित करता है, स्थानीय उद्यम को मजबूत करता है और शहरी स्थिरता के ढांचे के भीतर श्रम की गरिमा को सुदृढ़ करता है।

टीआरएफ मॉडल ने उपभोक्ता द्वारा इस्तेमाल किए गए 30 मीट्रिक टन वस्त्र अपशिष्ट को इकट्ठा करने में मदद की है जिसमें से 25.5 मीट्रिक टन को वैज्ञानिक तरीके से छांटा गया है। प्रतिदिन औसतन लगभग 500 वस्तुओं की दर से 41,000 से अधिक वस्तुओं का प्रसंस्करण किया गया है। इस पहल ने 1,14,575 से ज्यादा परिवारों तक पहुंच बनाई है, 75 से अधिक आईईसी कार्यशालाएं आयोजित की हैं और 350 से अधिक समाज प्रतिनिधियों को जोड़ा है, जिससे नागरिक भागीदारी और संस्थागत सहयोग को बल मिला है। 400 से अधिक अपसाइकल्ड उत्पादों के नमूने विकसित किए गए हैं, जिसमें अस्वीकृत वस्त्र अपशिष्ट से तैयार किया गया कागज का एक सफल प्रायोगिक बैच भी शामिल है। यह पहल संसाधन पुनर्प्राप्ति में नए और रचनात्मक समाधानों को दर्शाती है।

जागरूकता बढ़ाने और बाजार अवसरों का विस्तार करने के लिए, टीआरएफ ने 30 से अधिक प्रदर्शनियों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भाग लिया है। इन मंचों ने उपभोक्ता द्वारा उपयोग किए गए वस्त्रों के पुनर्चक्रण और पुन: उपयोग के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके साथ ही महिला कारीगरों को अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने और बेचने के अवसर भी प्रदान किए हैं।

नवी मुंबई में टीआरएफ के कार्यान्वयन में शुरुआती दौर में कई चुनौतियां सामने आईं, जिनमें कूड़ेदान लगाने में प्रतिरोध, वस्त्र पृथक्करण के बारे में सीमित जागरूकता और मिश्रित रेशों की छटाई में जटिलताए शामिल थीं। इन चुनौतियों को चरणबद्ध कार्यान्वयन, निरंतर नागरिक सहभागिता, अंतर-एजेंसी समन्वय और फाइबर-स्कैनिंग तकनीक को अपनाकर दूर किया गया।

बेलापुर में अंतरिम टीआरएफ की सफलता के आधार पर, अगले चरण में निसर्ग उद्यान के पास कोपरखैरान में एक स्थायी, उच्च क्षमता वाली टेक्सटाइल रिकवरी फैसिलिटी की परिकल्पना की गई है।

नवी मुंबई स्थित टेक्सटाइल रिकवरी फैसिलिटी साबित करती है कि आमतौर पर बेकार माने जाने वाले अपशिष्ट पदार्थों को आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ के स्रोत के रूप में पुनर्जीवित किया जा सकता है। यह स्वच्छ भारत 2.0, स्मार्ट सिटी मिशन और सतत विकास लक्ष्य 12- जिम्मेदार उपभोग और उत्पादन के सिद्धांतों के अनुरूप है।

बग्गा ने विधानसभा में उठाया डैयरी कम्लैक्स, मलकपुर, उज्जैनपुर में बड्ढे दरिया की सफाई का मुद्दा

* कहा, सफाई न हुई तो शहरी क्षेत्र की हुई सफाई का नहीं होगा कोई लाभ

लुधियाना । विधानसभा उतरी से विधायक चौ. मदन लाल बग्गा ने विधानसभा सैशन के दौरान बुड्ढे दरिया की सफाई का मुद्दा उठाकर आगामी बारिश के मौसम के दौरान शहरी से बाहरी क्षेत्र से बहते दरिया की सफाई की मांग की। विधानसभा स्पीकर कुलतार सिंह संधवा की तरफ से सोमवार को प्रश्न आवर के दौरान दिए समय का सदुपयोग करते हुए बग्गा ने विधानसभा में बताया कि पिछले चार वर्षो से उन्होने विधानसभा उतरी से गुजरते बुड्ढे दरिया की सफाई में कोई कसर नहीं छोड़ी। उनके विधायक कार्यकाल में वर्षो से दूषित हुए दरिया की शहरी क्षेत्र में सफाई का तभी फायदा है कि जब आगामी बरसाती मौसम से पूर्व शहर के बाहरी यानि कि अगले पड़ाव डैयरी कम्लैक्स, मलकपुर, उज्जैनपुर सहित बुड्ढे दरिया अन्य हिस्सो की सफाई भी करवाई जाए। अगर इन क्षेत्रों में सफाई के प्रबंध न हुए तो पानी के बैक मारने से बरसाती मौसम में शहर के भीतरी क्षेत्रों की सफाई का भी कोई लाभ नहीं होगा। इसलिए जल्दी से जस्दी उक्त क्षेत्रों की सफाई करवाई जाए। ताकि शहरी क्षेत्रो को पानी के ओवरफ्लो से बचाया जा सके। उन्होने विधानसभा में मौजूद स्थानीय निकाय मंत्री ड्रेनेज विभाग के मंत्री का ध्यान भी आर्कषित करते हुए कहा कि बरसात से पूर्व इन क्षेत्रो से गुजरते बुड्ढे दरिया की सफाई की तरफ ध्यान दिया जाए।