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पंजाब में भीषण गर्मी के बीच बिजली संकट: 28 अप्रैल तक 8-10 घंटे के लंबे पावर कट, जानें अपने शहर का शेड्यूल

पंजाब डेस्क : पंजाब में पड़ रही भीषण गर्मी और सूरज की तपिश के बीच आम जनता की मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं। एक ओर मौसम विभाग ने राज्य में हीटवेव (Heatwave) का येलो अलर्ट जारी किया है, वहीं दूसरी ओर पावरकॉम (PSPCL) ने राज्य के प्रमुख शहरों में 8 से 10 घंटे तक के लंबे बिजली कट लगाने का फैसला किया है। मेंटेनेंस के नाम पर लगाए जा रहे ये कट 21 अप्रैल से शुरू होकर 28 अप्रैल तक जारी रहेंगे, जिससे लुधियाना, अमृतसर और जालंधर जैसे महानगरों की रफ्तार थम सकती है।

पावरकॉम का पब्लिक नोटिस और प्रभावित शहर : पावरकॉम ने मेंटेनेंस कार्यों के चलते एक सार्वजनिक नोटिस जारी कर लोगों को अपने जरूरी काम पहले ही निपटाने की सलाह दी है।

इस कटौती का सबसे ज्यादा असर निम्नलिखित शहरों में दिखेगा:

लुधियाना: यहाँ कई इलाकों में सुबह 10 से शाम 5 बजे तक बिजली गुल रहेगी।

मोहाली: आईटी सिटी और फेज-3 समेत कई क्षेत्रों में सुबह 10 से दोपहर 3 बजे तक कट लगेंगे।

अमृतसर और जालंधर: इन शहरों के रिहायशी और कमर्शियल इलाकों में 4 से 6 घंटे की कटौती की जाएगी।

पटियाला और बठिंडा: यहाँ भी दोपहर के समय 5 घंटे तक बिजली बंद रहने की सूचना है।

गर्मी का बढ़ता प्रकोप और बिजली की मांग: राज्य में गर्मी तेजी से बढ़ रही है और 21 जिलों में तापमान 35 से 40 डिग्री सेल्सियस के पार जा चुका है। बिजली की मांग वर्तमान में लगभग 6,000 मेगावाट है, लेकिन तापमान 40 डिग्री पार करने पर यह 10,000 मेगावाट तक पहुँचने की उम्मीद है। वर्तमान में पंजाब खुद 3,300 मेगावाट बिजली पैदा कर रहा है और बाकी की कमी केंद्रीय पूल से खरीदकर पूरी की जा रही है।

सेहत विभाग की एडवाइजरी : बढ़ती गर्मी और बिजली कटों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने भी एडवाइजरी जारी की है और अस्पतालों को 24 घंटे स्टाफ के साथ हाई अलर्ट पर रखा गया है। लोगों को सलाह दी गई है कि वे हीटवेव के दौरान सीधे धूप में निकलने से बचें।

PUNJAB TOP-10 NEWS, चुटकियों में पढ़े बड़ी दिन भर की खबरें…21-04-2026

पंजाब डेस्क : पंजाब और चंडीगढ़ के लिए आज का दिन काफी हलचल भरा और चुनौतीपूर्ण रहा। जहाँ एक ओर फगवाड़ा में तैनात एक डीएसपी की अपनी ही रिवॉल्वर से चली गोली के कारण दुखद मौत हो गई, वहीं प्रदेश के बड़े शहरों के निवासियों के लिए आने वाले दिन भीषण बिजली कटौती और गर्मी के संकट वाले साबित होने वाले हैं। इसके साथ ही, खालिस्तान समर्थक सांसद अमृतपाल सिंह की हिरासत खत्म होने से पहले पुलिस की सक्रियता और चंडीगढ़ से लेकर जर्मनी तक की अन्य बड़ी घटनाओं ने सुरक्षा और कानून व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आइए जानते हैं आज की 10 प्रमुख खबरें।

डीएसपी की आकस्मिक मौत: फगवाड़ा में एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स में तैनात डीएसपी योगेश कुमार शर्मा की उनके आवास पर मौत हो गई। बताया जा रहा है कि वे अपनी सरकारी रिवॉल्वर साफ कर रहे थे, तभी अचानक गोली उनके सीने में लग गई।

VR पंजाब मॉल अनिश्चितकाल के लिए बंद: मोहाली स्थित राज्य के सबसे बड़े मॉल को भूकंप के कारण आए स्ट्रक्चरल नुकसान की जांच के लिए बंद कर दिया गया है।

लेखिका मधु किश्वर को पुलिस नोटिस: चंडीगढ़ पुलिस ने एक भ्रामक और अश्लील वीडियो साझा करने के मामले में दिल्ली जाकर मधु किश्वर को नोटिस सौंपा और जांच में शामिल होने को कहा है।

भीषण बिजली कटौती की मार: लुधियाना, जालंधर और अमृतसर समेत कई शहरों में 21 से 28 अप्रैल तक 8 से 10 घंटे के मेंटेनेंस कट लगेंगे, जबकि राज्य में हीटवेव का अलर्ट जारी है।

अमृतपाल सिंह की गिरफ्तारी की सुगबुगाहट: सांसद अमृतपाल सिंह की NSA हिरासत 22 अप्रैल को खत्म हो रही है। पंजाब पुलिस की टीम उन्हें अजनाला मामले में गिरफ्तार करने के लिए डिब्रूगढ़ जेल पहुँच चुकी है।

लुधियाना में धमाका: हंबड़ा के पास एक कबाड़ की दुकान में पेंट के खाली ड्रम में हुए विस्फोट में एक कर्मचारी की जान चली गई और दूसरा गंभीर रूप से घायल है।

जर्मनी के गुरुद्वारे में हिंसा: डुइसबर्ग (मूर्स) के गुरुद्वारे में नई मैनेजमेंट और गोलक के हिसाब को लेकर दो गुटों में खूनी झड़प हुई, जिसमें 11 लोग घायल हो गए।

सोनम बाजवा की फिल्म पर स्टे: कॉपीराइट विवाद के कारण चंडीगढ़ कोर्ट ने एक्ट्रेस सोनम बाजवा की आने वाली फिल्म ‘पिट सियापा’ की रिलीज पर रोक लगा दी है।

लुधियाना में नोरा फतेही का जादू: बॉलीवुड स्टार नोरा फतेही ने लुधियाना में एक निजी कॉकटेल पार्टी में अपनी परफॉरमेंस से चार चाँद लगा दिए।

जालंधर में शर्मनाक घटना: अमृतसर के एक युवक द्वारा दुष्कर्म के बाद जालंधर में एक 15 वर्षीय नाबालिग लड़की ने बच्चे को जन्म दिया है, आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है।

ट्रैक से संसद तक:

क्यों भारत के भविष्य का नेतृत्व महिलाओं को करना चाहिए

डॉ. पी टी ऊषा

मैंने अपना पूरा जीवन भागदौड़ में ही बिताया है, पहले केरल की कच्ची सड़कों पर, फिर वैश्विक मंचों पर और अब सार्वजनिक जीवन के गलियारों में। हर कदम पर मुझे कई मुश्किलो का सामना करना पड़ा है, कुछ प्रत्यक्ष और कुछ अनकही बाधाओं का भी, जिन्होंने महिलाओं को यह बताया कि उनका यहाँ कोई स्थान नहीं है। मैंने यह भी देखा है कि जब ये बाधाएं टूटने लगती हैं तो क्या होता है। अवसर परिणामों को बदल देता है और इससे भी ज़रुरी बात यह है कि यह लोगों की सोच को बदल देता है।

यही कारण है कि संविधान (एक सौ अट्ठाईसवाँ संशोधन) विधेयक, 2023—नारी शक्ति वंदन अधिनियम—केवल एक विधायी उपलब्धि नहीं है। यह एक लंबे समय से प्रतीक्षित संरचनात्मक सुधार है। लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करना न तो कोई रियायत है और न ही दिखावा। यह अधिक प्रतिनिधि और प्रभावी लोकतंत्र की दिशा में एक ज़रुरी कदम है।

खेलों ने हमें क्या सिखाया है

जब मैंने 1984 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक में हिस्सा लिया और कुछ ही सेकंड के अंतर से पदक से चूक गई, तब बहुत कम भारतीय लड़कियां थीं, जो वैश्विक मंच पर खुद को देख पाती थीं। लेकिन पिछले कई दशकों में यह स्थिति बदली है। प्रशिक्षण, बुनियादी ढांचे और पहचान तक पहुंच में सुधार के साथ, भारतीय महिलाएं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमुखता हासिल करने लगीं है।

पी.वी. सिंधु, मीराबाई चानू, विनेश फोगाट और मैरी कॉम जैसी एथलीटें अकेले नहीं उभरीं। वे एक ऐसी व्यवस्था का परिणाम हैं, जिसने धीरे-धीरे ही सही, पहुंच को व्यापक बनाना शुरू किया। प्रतिनिधित्व आकांक्षाएं पैदा करता है और आकांक्षा, जब समर्थित होती है, तो उपलब्धि दिलाती है।

सबक साफ है। जब महिलाओं को स्थान दिया जाता है, तो वे व्यवस्था में केवल भाग नहीं लेतीं, वे शानदार प्रदर्शन भी कर दिखाती हैं।

हर भारतीय के लिए बेहतर शासन

भारत में जमीनी स्तर पर महिलाओं के नेतृत्व का प्रभाव पहले ही देखा जा चुका है। 73वें संवैधानिक संशोधन द्वारा पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू किए जाने के बाद से, विभिन्न राज्यों में किए गए कई अध्ययनों से पता चला है कि महिला प्रतिनिधियों के नेतृत्व वाले क्षेत्रों में पेयजल, स्वच्छता, शिक्षा और प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल तक पहुंच में सुधार हुआ है।

ये महज़ “महिलाओं के मुद्दे” नहीं हैं, बल्कि ये राष्ट्रीय प्राथमिकताएं हैं। महिला नेता अक्सर सुरक्षित सार्वजनिक स्थान, सुचारू रूप से चलने वाले स्कूल, पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं जैसी शासन से जुड़ी उन रोजमर्रा की चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित करती हैं, जो परिवारों और समुदायों को सीधे तौर पर प्रभावित करती हैं।

इस प्रतिनिधित्व को राज्य विधानसभाओं और संसद तक विस्तारित करना केवल निष्पक्षता की बात नहीं है। यह शासन की गुणवत्ता में सुधार से जुड़ा है।

प्रतिनिधित्व का आर्थिक महत्व

भारत में महिला श्रम बल की भागीदारी विश्व में सबसे कम है, जो लगभग 25 प्रतिशत के आसपास है। यह केवल एक सामाजिक चिंता नहीं, बल्कि एक आर्थिक समस्या भी है।

विधानसभाओं में महिलाओं का अधिक प्रतिनिधित्व उन नीतियों को प्राथमिकता देने में मदद कर सकता है, जो इस अप्रयुक्त क्षमता को उजागर करती हैं, जैसे किफायती बाल देखभाल, सुरक्षित कार्यस्थल, ऋण तक पहुंच और महिला उद्यमियों के लिए समर्थन। मैकिन्से ग्लोबल इंस्टीट्यूट का अनुमान है कि लैंगिक समानता को बढ़ावा देने से भारत की जीडीपी में 700 बिलियन डॉलर तक की वृद्धि हो सकती है।

अधिक समावेशी संसद न केवल एक लोकतांत्रिक आवश्यकता है, बल्कि एक आर्थिक अनिवार्यता भी है।

सुरक्षा, गरिमा और भागीदारी

भारत भर में लाखों महिलाओं के लिए, सार्वजनिक जीवन में भागीदारी अभी भी सुरक्षा, भेदभाव और असमान पहुंच की चिंताओं से प्रभावित है। चाहे खेल हो, शिक्षा हो या कार्यस्थल, ये समस्याएं हमारे समाज में गहराई से जड़ें जमा चुकी हैं।

संसद में अधिक महिलाओं का मतलब है कि कानून और नीतियां महज़ समझ से नहीं, बल्कि वास्तविक जीवन की हकीकत से आकार लेती हैं। इसका मतलब है प्रवर्तन के लिए मजबूत वकालत, सहायता प्रणालियों के लिए संसाधनों का बेहतर आवंटन और एक न्याय ढांचा, जो उत्तरदायी और सुलभ हो।

शासन तभी अधिक प्रभावी होता है, जब वह उन लोगों के अनुभवों को दर्शाता है, जिनकी वह सेवा करता है।

प्रतिनिधित्व और आकांक्षाओं की शक्ति

भारत में सत्ता की छवि लंबे समय से मुख्य रूप से पुरुष प्रधान रही है। उस छवि को बदलना केवल प्रतीकात्मक नहीं है, बल्कि यह एक बदलावकारी प्रक्रिया है।

जब मणिपुर, झारखंड, राजस्थान या भारत के किसी भी हिस्से की कोई युवती अपने जैसी दिखने वाली, अपने जैसी बोलने वाली और समान पृष्ठभूमि से आने वाली किसी महिला को देश के कानूनों को आकार देते हुए देखती है, तो यह सिर्फ प्रेरणा ही नहीं देता, बल्कि यह संभावनाओं के प्रति उसके विश्वास को भी बदल देती है।

आकांक्षा ही सामाजिक परिवर्तन का आधार है। विधानसभाओं में आरक्षण से स्तर कम नहीं होता, बल्कि अवसरों का दायरा बढ़ता है।

भारत की महिलाओं ने खेल जगत, सशस्त्र बलों, विमानन और व्यावसायिक पदों पर पहले ही कई बाधाओं को पार कर लिया है। विधायी प्रतिनिधित्व इस यात्रा का स्वाभाविक अगला कदम है।

अब है कार्यवाही का वक्त

राज्यसभा में सेवा करने का सौभाग्य प्राप्त करने के बाद, मैंने प्रत्यक्ष रूप से देखा है कि कैसे विविध दृष्टिकोण बहस और निर्णय लेने की प्रक्रिया को मजबूत बनाते हैं। फिर भी, आज लोकसभा में महिलाओं की हिस्सेदारी केवल लगभग 15 प्रतिशत है, जो वैश्विक औसत से काफी कम है।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित हो चुका है। अब बस इसे पूरी तरह, निष्ठापूर्वक और बिना देर किए लागू करने की राजनीतिक इच्छाशक्ति की ज़रुरत है।

भारत अपनी आधी आबादी को सर्वोच्च निर्णय लेने वाले निकायों में कम प्रतिनिधित्व देते हुए, विकसित राष्ट्र बनने की आकांक्षा नहीं रख सकता। आधी प्रतिभा को दरकिनार करके विकसित भारत का निर्माण नहीं किया जा सकता, न ही आधी आवाज़ पर सच्चा लोकतंत्र फल-फूल सकता है।

आगे का रास्ता साफ है। सवाल यह है कि क्या हम उस पर चलने का दृढ़ संकल्प रखते हैं।

(लेखक राज्यसभा सांसद, भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष और राष्ट्रमंडल खेल संघ, भारत की अध्यक्ष हैं।)

तेल विपणन कंपनियों ने पूरे पंजाब में ईंधन और एलपीजी की सामान्य आपूर्ति का भरोसा दिलाया

नई दिल्ली /सत्ता संदेश

मोटर स्पिरिटहाईस्पीड डीजल और घरेलू एलपीजी की बिक्री सामान्य रहेगीश्री आशुतोष गुप्ता

ईंधन की उपलब्धता को लेकर सार्वजनिक चिंताओं के बीच कार्यकारी निदेशक और आईओसीएल पंजाब राज्य कार्यालय के राज्य प्रमुख श्री आशुतोष गुप्ता, जो पंजाब में तेल उद्योग के लिए राज्य स्तरीय समन्वयक के रूप में भी कार्य करते हैं, ने मंगलवार को इंडियन ऑयल भवन, सेक्टर 19, चंडीगढ़ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए नागरिकों को आश्वस्त किया कि पूरे राज्य में पेट्रोलियम उत्पादों और एलपीजी की आपूर्ति स्थिर और पर्याप्त है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आवश्यक ईंधनों की उपलब्धता में कोई बाधा नहीं है और उपभोक्ताओं से शांत रहने तथा घबराहट में आने से बचने की अपील की। राज्य स्तरीय समन्वयक (एसएलसी), चंडीगढ़ श्री सुशांत कुमार तथा पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर एवं लद्दाख के लिए एलपीजी प्रभारी श्री परमेश्वर भी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उपस्थित थे।

तेल विपणन कंपनियों (ओएमसीज़) ने जनता को आश्वस्त किया कि पंजाब भर में पेट्रोलियम उत्पादों और एलपीजी की आपूर्ति स्थिर है और वर्तमान मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। श्री आशुतोष गुप्ता ने कहा कि पूरे राज्य में मोटर स्पिरिट (एमएस) और हाई-स्पीड डीजल (एचएसडी) की भंडार स्थिति सामान्य है। ओएमसी डिपो उत्पादों के पर्याप्त स्तर को बनाए रख रहे हैं और खुदरा आउटलेट्स पर निर्बाध बिक्री सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। ऑटोमोटिव ईंधन की उपलब्धता को लेकर चिंता का कोई कारण नहीं है। वैश्विक ऊर्जा बाजारों को प्रभावित कर रही भू-राजनीतिक गतिविधियों के बावजूद भारत की एलपीजी आपूर्ति स्थिर बनी हुई है और घरेलू उपभोक्ताओं को निर्बाध डिलीवरी सुनिश्चित करने के लिए इसकी निकट से निगरानी की जा रही है। घरेलू एलपीजी को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। ओएमसीज़ ने पंजाब में घरों के लिए निर्बाध एलपीजी आपूर्ति बनाए रखी है, सिलेंडर डिलीवरी लगभग संकट से पहले के स्तरों के अनुरूप जारी है। ग्राहकों को रिफिल बुक करने के लिए एसएमएस और आईवीआरएस जैसे डिजिटल तरीकों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में पंजाब में लगभग 94% बुकिंग डिजिटल माध्यमों से प्राप्त होती है, जबकि डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (डीएसी) का अनुपालन लगभग 91% है। उन्होंने कहा कि डिजिटल बुकिंग और डीएसी अनुपालन के लिए अखिल भारतीय औसत क्रमशः 95% और 90% है। जहां सोशल मीडिया पर कुछ चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं, ओएमसीज़ वास्तविक मुद्दों का तुरंत समाधान कर रही हैं और आधिकारिक संचार माध्यमों के जरिए समय पर अपडेट साझा कर रही हैं। कुछ एलपीजी वितरकों द्वारा की जा रही अनियमितताओं से संबंधित शिकायतों को भी गंभीरता से लिया जा रहा है। काला बाजारी और जमाखोरी को रोकने के लिए पूरे राज्य में एलपीजी वितरकों की अचानक जांच करने हेतु कई क्रॉस-फंक्शनल टीमें गठित की गई हैं। उल्लंघन करने वाले वितरकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। इसके अतिरिक्त, ओएमसीज़ वितरकों के प्रदर्शन की निगरानी करने और हस्तक्षेप की आवश्यकता वाले क्षेत्रों की पहचान करने के लिए डेटा विश्लेषण का उपयोग कर रही हैं। इस जानकारी का उपयोग निरीक्षण गतिविधियों के मार्गदर्शन के लिए भी किया जाता है। अनियमितताओं और जमाखोरी को रोकने के लिए पंजाब राज्य सरकार के साथ निकट समन्वय जारी है, जिसके तहत पहले ही कई छापेमारी की जा चुकी हैं। ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे एलपीजी सिलेंडरों की घबराहट में बुकिंग या जमाखोरी से बचें और अफवाहों पर विश्वास न करें। उन्हें सटीक जानकारी के लिए केवल आधिकारिक स्रोतों का पालन करने की अपील की जाती है। एलपीजी की आपूर्ति और डिलीवरी सामान्य है और इसकी कोई कमी नहीं है। उपभोक्ताओं से यह भी अनुरोध किया जाता है कि वे एलपीजी वितरकों के पास अनावश्यक कतारों में न लगें। मांग को और समर्थन देने के लिए वाणिज्यिक एलपीजी आवंटन को संकट से पहले के स्तर के लगभग 70% तक बढ़ा दिया गया है। अतिरिक्त उपायों के तहत प्रवासी मजदूरों और अन्य कमजोर वर्गों की सहायता के लिए 5 किलोग्राम फ्री ट्रेड एलपीजी (एफटीएल) सिलेंडरों के आवंटन को दोगुना किया गया है। तेल विपणन कंपनियों ने निर्बाध एलपीजी उपलब्धता सुनिश्चित करने, वितरण में पारदर्शिता बनाए रखने और अनियमित गतिविधियों के विरुद्ध सख्त कदम उठाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।

सौ  संगठन आधार के ऑफलाइन सत्यापन में शामिल

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

ये संगठन सरकारी विभागों, वित्तीय फिनटेक और आतिथ्य क्षेत्र से संबंधित

नई दिल्ली, 21 अप्रैल 2026: भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण में तीन महीनों के भीतर कम से कम सौ संगठन ओवीएसई के रूप में पंजीकृत हुए हैं। यह उपलब्धि आधार ऑफलाइन तंत्र के माध्यम से सुरक्षित, सहमति-आधारित और कागज रहित सत्यापन को सक्षम बनाने में एक महत्वपूर्ण कदम है – जिसके माध्यम से सेवा प्रदाताओं और आम जनता दोनों को समान रूप से सशक्त बनाया जा रहा है।

इन संगठनों में केंद्र और राज्य दोनों के सरकारी विभाग, फिनटेक कंपनियां, इवेंट मैनेजमेंट और आतिथ्य-सत्कार संगठन, शिक्षा तथा परीक्षा संबंधी संस्थाएं, पहचान सत्यापन, पृष्ठभूमि सत्यापन संगठन एवं कार्यबल सत्यापन कंपनियां शामिल है।

आधार के ऑफलाइन सत्यापन में इन संगठनों के शामिल होने से सेवा वितरण की समयबद्धता में सुधार होने, परिचालन संबंधी बाधाओं में कमी आने और भौतिक दस्तावेज़ प्रबंधन और मैन्युअल सत्यापन प्रक्रियाओं से जुड़ी लागतों में कमी आने की उम्मीद है। इन ओवीएसई भागीदारों का जुड़ना आधार-आधारित, गोपनीयता-प्रथम डिजिटल सत्यापन ढांचों में बढ़ते विश्वास को दर्शाता है जो उपयोगकर्ता नियंत्रण को प्राथमिकता देते हुए पहुंच में आसानी सुनिश्चित करते हैं।

ये संगठन आधार ऑफलाइन सत्यापन विधियों जैसे कि क्यूआर कोड-आधारित सत्यापन और सुरक्षित डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित दस्तावेजों का लाभ उठाकर, अब यूआईडीएआई के केंद्रीय डेटाबेस से कनेक्टिविटी की आवश्यकता के बिना पहचान संबंधी जानकारी “दिखाने, साझा करने और सत्यापित करने” में सक्षम होंगे।

यह वितरित मॉडल लचीलापन, विस्तारशीलता और सुरक्षा सुनिश्चित करता है, जो समावेशी और भविष्य के लिए तैयार डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के निर्माण और लोगों को अपनी जानकारी पर नियंत्रण रखने और स्वेच्छा से अपनी इच्छा अनुसार जानकारी साझा करने की व्यापक दृष्टिकोण के अनुरूप है।

यह पहल सेवा प्रदाताओं के साथ लोगों की बातचीत को सरल बनाकर “जीवन की सुगमता” को बढ़ाने के लिए भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के चल रहे प्रयासों की पूरक है, जिससे  आधार धारकों को शीघ्र पंजीकरण, कम कागजी कार्रवाई और अपनी व्यक्तिगत जानकारी पर अधिक नियंत्रण का लाभ मिलेगा।

तेल विपणन कंपनियों ने हिमाचल प्रदेश भर में ईंधन व LPG की सामान्य आपूर्ति का आश्वासन दिया

चंडीगढ़/ सत्ता संदेश

तेल विपणन कंपनियों ने हिमाचल प्रदेश भर में ईंधन व LPG की सामान्य आपूर्ति का आश्वासन दिया

मोटर स्पिरिट, हाई-स्पीड डीजल व घरेलू LPG की बिक्री सामान्य बनी हुई: श्री अशुतोष गुप्ता

चंडीगढ़, 21 अप्रैल 2026: ईंधन उपलब्धता को लेकर चिंताओं के बीच, आईओसीएल पंजाब राज्य कार्यालय के कार्यकारी निदेशक व राज्य प्रमुख श्री अशुतोष गुप्ता, जो पंजाब में तेल उद्योग के राज्य स्तरीय समन्वयक भी हैं, ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए नागरिकों को आश्वस्त किया कि हिमाचल प्रदेश में पेट्रोलियम उत्पादों व LPG की आपूर्ति स्थिर व पर्याप्त बनी हुई है। उन्होंने आपूर्ति में किसी तरह की बाधा न होने पर जोर दिया और उपभोक्ताओं से न घबराने का आग्रह किया।

श्री सुषांत कुमार, राज्य स्तरीय समन्वयक (SLC), चंडीगढ़, तथा श्री परमेश्वर, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर व लद्दाख के लिए LPG प्रभारी, कॉन्फ्रेंस के दौरान उपस्थित रहे।

तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने जनता को आश्वस्त किया कि हिमाचल प्रदेश भर में पेट्रोलियम उत्पादों व LPG की आपूर्ति स्थिर व वर्तमान मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त है। श्री अशुतोष गुप्ता ने कहा कि मोटर स्पिरिट (MS) व हाई-स्पीड डीजल (HSD) का स्टॉक राज्य भर में सामान्य है। OMC डिपो स्वस्थ इन्वेंटरी स्तर बनाए हुए हैं, जबकि रिटेल आउटलेट्स के पास निर्बाध बिक्री सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त स्टॉक है। ऑटोमोटिव ईंधनों की उपलब्धता को लेकर कोई चिंता का विषय नहीं है।

भारत की LPG आपूर्ति स्थिर बनी हुई है और वैश्विक ऊर्जा बाजारों को प्रभावित करने वाले चल रहे भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के बावजूद घरेलू उपभोक्ताओं तक निर्बाध वितरण सुनिश्चित करने के लिए करीबी निगरानी की जा रही है। और इतना ही नहीं घरेलू LPG को सर्वोच्च प्राथमिकता मिल रही है।

तेल विपणन कंपनियों ने हिमाचल प्रदेश के घरों में LPG की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखी है, सिलेंडर वितरण संकट पूर्व स्तरों के लगभग अनुसार जारी है।

ग्राहकों से रिफिल बुकिंग के लिए SMS व IVRS जैसे डिजिटल तरीकों का उपयोग करने का आग्रह किया गया है। वर्तमान में हिमाचल प्रदेश में लगभग 91% बुकिंग्स डिजिटल मोड से प्राप्त हो रही हैं। श्री अशुतोष गुप्ता ने जानकारी दी कि डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (DAC) अनुपालन लगभग 85% है ताकि सिलेंडर वास्तविक ग्राहकों तक पहुँचें और फिलहाल डिजिटल बुकिंग व DAC अनुपालन का अखिल भारतीय औसत क्रमशः 95% व 90% है।

OMCs सोशल मीडिया पर उठी चिंताओं पर सक्रिय रूप से निगरानी कर रही हैं व प्रतिक्रिया दे रही हैं, वास्तविक मुद्दों का त्वरित समाधान सुनिश्चित कर रही हैं। प्रासंगिक अपडेट व जानकारी आधिकारिक संचार चैनलों के माध्यम से नियमित रूप से साझा की जा रही है।

कुछ LPG वितरकों की शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है। काला बाजारी व भंडारण रोकने के लिए हिमाचल प्रदेश भर में LPG वितरकताओं का आकस्मिक निरीक्षण करने हेतु बहु-कार्यात्मक टीमें तैनात की गई हैं। दोषपूर्ण वितरकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है।

इसके अतिरिक्त, वितरक प्रदर्शन मापदंडों का डेटा विश्लेषण किया जा रहा है ताकि अनियमितताएँ पहचानी जा सकें व निरीक्षण प्रयासों का मार्गदर्शन हो। OMCs हिमाचल प्रदेश सरकार के साथ निकट समन्वय में कुप्रथाओं को नियंत्रित करने व जमाखोरी रोकने के लिए कार्यरत हैं, राज्य भर में कई प्रवर्तन छापेमारी पहले से ही कर ली गई हैं।

ग्राहकों से घबराहटपूर्ण बुकिंग या LPG सिलेंडरों का भंडारण न करने, अफवाहों पर भरोसा न करने की सलाह दी गई है। सटीक जानकारी हेतु केवल आधिकारिक स्रोतों का अनुसरण करें। LPG आपूर्ति व वितरण सामान्य व स्थिर बना हुआ है, कोई कमी नहीं है। उपभोक्ताओं से अनावश्यक रूप से LPG वितरकताओं पर कतार न लगाने का भी अनुरोध किया गया है।

मांग का समर्थन करने हेतु, वाणिज्यिक LPG आवंटन को संकट पूर्व स्तरों के 70% तक बढ़ाया गया है। अतिरिक्त उपायों में प्रवासी मजदूरों व अन्य कमजोर वर्गों का समर्थन करने हेतु 5 किग्रा फ्री ट्रेड LPG (FTL) सिलेंडरों का आवंटन दोगुना करना शामिल है।

तेल विपणन कंपनियाँ LPG की सहज उपलब्धता सुनिश्चित करने, वितरण में पारदर्शिता बनाए रखने, और कुप्रथाओं के विरुद्ध कड़े उपाय लागू करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहरा रही हैं।

OMCs ने चंडीगढ़ में ईंधन व LPG की निर्बाध आपूर्ति का आश्वासन दिया

चंडीगढ़/सत्ता संदेश

ईंधन उपलब्धता को लेकर चिंताओं के बीच, आईओसीएल पंजाब राज्य कार्यालय के कार्यकारी निदेशक व राज्य प्रमुख श्री अशुतोष गुप्ता, जो पंजाब में तेल उद्योग के राज्य स्तरीय समन्वयक भी हैं, ने चंडीगढ़ में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए निवासियों को आश्वस्त किया कि केंद्र शासित प्रदेश भर में पेट्रोलियम उत्पादों व LPG की आपूर्ति स्थिर व पर्याप्त बनी हुई है। उन्होंने आपूर्ति में किसी तरह की बाधा न होने पर जोर दिया और उपभोक्ताओं से ना घबराने का आग्रह किया।श्री सुषांत कुमार, राज्य स्तरीय समन्वयक (SLC), चंडीगढ़, तथा श्री परमेश्वर, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर व लद्दाख के लिए LPG प्रभारी, कॉन्फ्रेंस के दौरान उपस्थित रहे।

तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने दोहराया कि चंडीगढ़ में पेट्रोलियम उत्पादों व LPG की आपूर्ति स्थिर व वर्तमान मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त है। मोटर स्पिरिट (MS) व हाई-स्पीड डीजल (HSD) का स्टॉक यू.टी. में सामान्य है, श्री अशुतोष गुप्ता ने कहा कि OMC डिपो स्वस्थ इन्वेंटरी स्तर बनाए हुए हैं, जबकि रिटेल आउटलेट्स के पास निर्बाध बिक्री सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त स्टॉक है। ऑटोमोटिव ईंधनों की उपलब्धता को लेकर कोई चिंता का विषय नहीं है।

भारत की LPG आपूर्ति स्थिर बनी हुई है और वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर प्रभाव डालने वाले चल रहे भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के बावजूद घरेलू उपभोक्ताओं तक निर्बाध वितरण सुनिश्चित करने के लिए करीबी निगरानी की जा रही है। घरेलू LPG को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।

तेल विपणन कंपनियों ने चंडीगढ़ यू.टी. भर के घरों में LPG की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखी है, सिलेंडर वितरण संकट पूर्व स्तरों के व्यापक रूप से अनुसार जारी है। ग्राहकों से रिफिल बुकिंग के लिए SMS व IVRS जैसे डिजिटल मोड का उपयोग करने का आग्रह किया गया है। श्री सुषांत कुमार ने सूचित किया कि वर्तमान में लगभग 89.4% बुकिंग्स डिजिटल मोड से प्राप्त हो रही हैं, और साथ ही डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (DAC-OTP) के उपयोग से वास्तविक ग्राहकों तक वितरण सुनिश्चित किया जा रहा है। फिलहाल चंडीगढ़ में DAC अनुपालन स्तर वर्तमान में 87.34% है। वर्तमान स्थिति में सोशल मीडिया पर कुछ चिंताएँ उठी हैं, और वास्तविक मुद्दों का तत्काल समाधान प्रदान किया जा रहा है। ग्राहकों के लाभ हेतु प्रासंगिक जानकारी व अपडेट आधिकारिक संचार चैनलों के माध्यम से नियमित रूप से साझा किए जा रहे हैं।कुछ LPG वितरकों की शिकायतें सोशल मीडिया व प्रत्यक्ष ग्राहक फीडबैक के माध्यम से प्राप्त हुई हैं। काला बाजारी व जमाखोरी रोकने के लिए चंडीगढ़ यू.टी. भर में LPG वितरकताओं का आकस्मिक निरीक्षण करने हेतु बहु-कार्यात्मक टीमें गठित की गई हैं। दोषपूर्ण वितरकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है। इसके अतिरिक्त, LPG वितरकताओं के विभिन्न प्रदर्शन मापदंडों का डेटा विश्लेषण किया जा रहा है, जो लक्षित निरीक्षणों का आधार भी बनेगा। OMCs चंडीगढ़ यू.टी. प्रशासन के साथ निकट समन्वय में कुप्रथाओं को रोकने व भंडारण नियंत्रित करने के लिए कार्यरत हैं, कई प्रवर्तन छापेमारी पहले से ही कर ली गई हैं।

ग्राहकों से घबराहटपूर्ण बुकिंग या LPG सिलेंडरों का भंडारण न करने, अफवाहों पर विश्वास न करने, और सटीक जानकारी हेतु केवल आधिकारिक स्रोतों पर निर्भर रहने की सलाह दी गई है। वर्तमान में LPG आपूर्ति सामान्य व स्थिर बनी हुई है, कोई कमी नहीं है। उपभोक्ताओं से LPG वितरकताओं पर अनावश्यक कतार न लगाने का अनुरोध किया गया है, क्योंकि घबरा के बुकिंग करने या जमाखोरी की कोई आवश्यकता नहीं है।

मांग का समर्थन करने हेतु, वाणिज्यिक LPG आवंटन को संकट पूर्व स्तरों के लगभग 70% तक बढ़ाया गया है। अतिरिक्त उपायों में प्रवासी मजदूरों व अन्य कमजोर वर्गों का समर्थन करने हेतु 5 किग्रा फ्री ट्रेड LPG (FTL) सिलेंडरों का आवंटन दोगुना करना शामिल है।

श्री अशुतोष गुप्ता ने दोहराया कि तेल विपणन कंपनियाँ LPG की सहज उपलब्धता सुनिश्चित करने, वितरण में पारदर्शिता बनाए रखने, और कालाबाजारी के विरुद्ध कड़े उपाय लागू करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहरा रही हैं।

18वें सिविल सेवा दिवस समारोह में प्रशासनिक अधिकारियों को उपराष्ट्रपति का संदेश

दिल्ली/सत्ता संदेश

अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने देश भर में कार्यरत सभी प्रशासनिक अधिकारियों और उनके सेवानिवृत्त साथियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने याद दिलाया कि स्वतंत्र भारत के प्रथम गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने दिल्ली में प्रशासनिक सेवाओं के प्रशिक्षुओं को संबोधित किया था, जिसमें उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को “भारत का स्तंभ” बताया था। इस बात को 79 वर्ष हो चुके हैं। उपराष्ट्रपति ने कहा कि अधिकारियों के विभिन्न बैचों ने इस विरासत को निरंतर कायम रखा है और प्रगति एवं समृद्धि की राह पर राष्ट्र की ठोस संरचना के रूप में कार्य किया है। उन्होंने विभिन्न राज्यों में कार्यरत प्रशासनिक अधिकारियों को राष्ट्रीय एकता और एकजुटता का सबसे बड़ा दूत बताया।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले दशक में हासिल की गई अभूतपूर्व प्रगति का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” के मार्गदर्शक विजन पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रमुख उपलब्धियों के बारे में बताया, जिनमें लगभग 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालना, गरीबों के लिए 4 करोड़ से अधिक घरों का निर्माण और सीमावर्ती गांवों को जीवंत समुदायों के रूप में विकसित करना शामिल है। उन्होंने कहा कि लखपति दीदियों और नमो ड्रोन दीदियों जैसी पहलों के समर्थन से महिलाएं विकास में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने आकांक्षी जिला कार्यक्रम और ‘एक जिला एक उत्पाद’ जैसे प्रमुख कार्यक्रमों का भी जिक्र किया और इस बात पर जोर दिया कि कोई भी राज्य या जिला पीछे नहीं छूटना चाहिए।

सरकारी नीतियों के सच्चे क्रियान्वयनकर्ता के रूप में प्रशासनिक अधिकारियों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि इन उपलब्धियों में उनकी निष्ठा का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के सिद्धांत का अनुभव प्रत्येक नागरिक को करना चाहिए। उपराष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि 2047 तक विकसित भारत की राह में भारत को अभी लंबा सफर तय करना है। उन्होंने समावेशी विकास और प्रभावी शासन सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रतिबद्धता, ईमानदारी और अंतिम छोर तक सेवाएं पहुंचाने पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री के विजन को दोहराते हुए उन्होंने इस बात पर बल दिया कि प्रशासनिक अधिकारियों का यह दायित्व है कि कोई भी नागरिक पीछे न छूटे।

तेजी से विकसित हो रहे तकनीकी परिदृश्य के संदर्भ में, उपराष्ट्रपति ने सरकारी कर्मचारियों से अपने कौशल को निरंतर उन्नत करने और भविष्य के लिए तैयार रहने का आग्रह किया। उन्होंने क्षमता निर्माण के लिए iGOT कर्मयोगी जैसे प्लेटफार्मों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए दक्षता, पारदर्शिता और लाभार्थियों तक सही ढंग से पहुंचने में प्रौद्योगिकी की भूमिका पर बल दिया। उन्होंने कहा कि तकनीकी प्रगति ने भ्रष्टाचार को कम करने और सेवा वितरण में सुधार करने में मदद की है, साथ ही उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि कल्याणकारी योजनाओं को सावधानीपूर्वक तैयार किया जाना चाहिए ताकि वे पात्र लाभार्थियों तक पहुंच सकें।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रशासनिक सेवाओं में केवल सामान्य ज्ञान रखने वालों पर निर्भर रहने का युग समाप्त हो गया है और उन्होंने अधिक विशेषज्ञता की मांग की। उन्होंने राज्यों से शासन को मजबूत करने के लिए दूरदर्शी भर्ती नीतियों को अपनाने का भी आग्रह किया। उन्होंने सिविल सेवकों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग, नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग और ब्लॉकचेन जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।

उपराष्ट्रपति ने तमिल संत-कवि तिरुवल्लुवर के शब्दों को उद्धृत करते हुए कहा कि धर्म (अरम) सर्वोच्च धन है, जो भौतिक समृद्धि और नैतिक शक्ति दोनों प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि विशेषकर चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में सच्चा नेतृत्व नैतिक आचरण में निहित है। उन्होंने वैध मार्गदर्शन का पालन करने और अनुचित दबाव के आगे झुकने के बीच अंतर स्पष्ट किया और अधिकारियों से हर समय ईमानदारी और निष्पक्षता बनाए रखने का आह्वान किया।

उपराष्ट्रपति ने प्रशासनिक सेवाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि 2016 में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 21 प्रतिशत थी जो 2025 की परीक्षा में बढ़कर लगभग 31 प्रतिशत हो गई है और आज कई महिलाएं वरिष्ठ पदों पर कार्यरत हैं। उन्होंने इसे नारी शक्ति का सशक्त प्रमाण बताया, जो न केवल संख्यात्मक परिवर्तन है बल्कि सोच में भी बदलाव है। उन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम के माध्यम से विधायी निकायों में भी इसी तरह की प्रगति की आशा व्यक्त की।

विश्व पृथ्वी दिवस 2026: ‘हमारी शक्ति, हमारा ग्रह’ के जश्न की तैयारी

दिल्ली/ सत्ता संदेश

राष्ट्रीय विज्ञान केंद्र विद्यार्थियों के लिए ओपन हाउस क्विज का आयोजन करेगा

इसरो के अंतरिक्ष विभाग के प्रतिष्ठित प्रोफेसर अंटार्कटिक अन्वेषण

दिल्ली स्थित राष्ट्रीय विज्ञान केंद्र, विद्यार्थियों और विज्ञान प्रेमियों को 22 अप्रैल, 2026, बुधवार को विश्व पृथ्वी दिवस 2026 मनाने के लिए सादर आमंत्रित करता है। इस वर्ष का यह कार्यक्रम “हमारी शक्ति, हमारा ग्रह” की वैश्विक थीम पर आधारित है, जो पर्यावरण संरक्षण और सुरक्षा के प्रति हमारी सामूहिक जिम्मेदारी को दर्शाता है।

कार्यक्रम में “अंटार्कटिका अन्वेषण: श्वेत महाद्वीप की यात्रा” शीर्षक से एक लोकप्रिय विज्ञान व्याख्यान प्रस्तुत किया जाएगा, जिसका संचालन इसरो के अंतरिक्ष विभाग के प्रतिष्ठित प्रोफेसर डॉ. अमिताभ सेन गुप्ता करेंगे। यह व्याख्यान सुबह 10 बजे आरंभ होगा जो प्रतिभागियों को बर्फीले महाद्वीप के वैज्ञानिक रहस्यों का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करेगा।

व्याख्यान के उपरांत, सुबह 11 बजे केंद्र में एक ओपन हाउस क्विज प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। यह संवादात्मक सत्र का उद्देश्य युवा प्रतिभागियों के पर्यावरण विज्ञान और पृथ्वी की जैव विविधता से जुड़े ज्ञान को परखना है। साथ ही, यह स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और वैज्ञानिक जिज्ञासा की भावना को प्रोत्साहित करने के लिए आयोजित किया गया है।

व्याख्यान के उपरांत, सुबह 11 बजे एक ओपन हाउस क्विज प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। इस संवादात्मक सत्र का उद्देश्य युवा प्रतिभागियों के पर्यावरण विज्ञान और पृथ्वी की जैव विविधता से जुड़े ज्ञान का परीक्षण करना है। यह प्रतियोगिता स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और वैज्ञानिक जिज्ञासा को बढ़ावा देने के लिए  आयोजित की गई है।

राष्ट्रीय विज्ञान केंद्र छात्रों को अग्रणी विशेषज्ञों से जोड़ने, उन्हें प्रेरित करने और हमारे ग्रह की सुरक्षा में विज्ञान की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाने के अपने मिशन को निरंतर आगे बढ़ा रहा है।

कार्यक्रम का विवरण:

मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने की स्व-गणना, नागरिकों से जनगणना 2027 में भागीदारी की अपील

चंडीगढ़/सत्ता संदेश

हरियाणा में आगामी जनगणना 2027 की तैयारियां तेज़ हो गई हैं और इसके प्रथम चरण “मकान सूचीकरण एवं आवास गणना” के तहत स्व-गणना (Self Enumeration) प्रक्रिया को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी क्रम में हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने स्वयं स्व-गणना पोर्टल पर अपनी जानकारी दर्ज कर एक प्रेरणादायक पहल की है।

मुख्य सचिव द्वारा उठाया गया यह कदम न केवल प्रशासनिक स्तर पर सक्रियता को दर्शाता है, बल्कि आम नागरिकों के लिए भी एक सकारात्मक संदेश देता है कि वे इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अभियान में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें। जनगणना किसी भी देश के विकास की आधारशिला होती है, जिससे सरकार को योजनाएं बनाने और संसाधनों का सही वितरण करने में मदद मिलती है।

इस अवसर पर जनगणना निदेशालय हरियाणा के निदेशक डॉ. ललित जैन और विशेष सचिव राजस्व हरियाणा हेमा शर्मा भी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने बताया कि स्व-गणना प्रक्रिया को सरल और सुगम बनाया गया है ताकि अधिक से अधिक लोग इसमें भाग ले सकें।

मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि वे निर्धारित समयावधि के भीतर स्व-गणना पोर्टल पर जाकर अपनी और अपने परिवार की जानकारी स्वयं दर्ज करें। इससे न केवल प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि डेटा की शुद्धता भी सुनिश्चित होगी। उन्होंने यह भी कहा कि यह पहल डिजिटल इंडिया के दृष्टिकोण को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है।

सरकार का उद्देश्य है कि जनगणना 2027 को तकनीकी रूप से सशक्त और अधिक सहभागिता वाला बनाया जाए, ताकि हर नागरिक की सही और पूरी जानकारी दर्ज हो सके। नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से यह अभियान सफल होगा और देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगा।