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1 मई को पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने दी जानकारी

पंजाब डेस्क: पंजाब कैबिनेट ने 1 मई 2026 को मजदूर दिवस के अवसर पर राज्य विधानसभा का एक विशेष सत्र बुलाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोशल मीडिया पर यह जानकारी साझा करते हुए बताया कि यह एक दिवसीय सत्र देश के सामाजिक और आर्थिक विकास में योगदान देने वाले मेहनतकश मजदूरों और श्रमिकों को समर्पित होगा।इस ऐतिहासिक पहल के तहत, विधानसभा सदन में मजदूर यूनियनों के प्रतिनिधियों को विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जाएगा।

सत्र के दौरान मनरेगा (MNREGA) योजना में हुए बदलावों के श्रमिक वर्ग पर पड़ने वाले प्रभावों और राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर की चुनौतियों पर गंभीर चर्चा की जाएगी। इसके अतिरिक्त, कार्य सलाहकार समिति (Business Advisory Committee) द्वारा तय किए गए अन्य आवश्यक विधायी कार्यों को भी इस दौरान निपटाया जाएगा ताकि राज्य के विकास और लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी फैसले लिए जा सकें।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले 13 अप्रैल 2026 को भी एक विशेष सत्र बुलाया गया था, जिसमें पवित्र ग्रंथों की बेअदबी से जुड़े संशोधन बिल को सर्वसम्मति से पारित किया गया था।

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पंजाब डेस्क : पंजाब और चंडीगढ़ की आज की सबसे बड़ी खबर पटियाला रेलवे ट्रैक पर हुए IED धमाके और उसमें शामिल आतंकी मॉड्यूल के खुलासे से जुड़ी है। इसके अलावा, जालंधर में AAP की बैठक का टलना, लुधियाना मेयर के पति पर लगे अश्लील चैटिंग के आरोप, मौसम में आए बदलाव और अमेरिका में हुए दुखद अग्निकांड समेत दिनभर की 10 बड़ी खबरें यहाँ दी गई हैं।

पटियाला रेलवे ट्रैक ब्लास्ट और आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश: 27 अप्रैल की रात राजपुरा में अंबाला-अमृतसर रेल फ्रेट कॉरिडोर पर एक मालगाड़ी के नीचे IED ब्लास्ट हुआ। पटियाला पुलिस ने इस मामले में 4 आतंकियों (प्रदीप सिंह खालसा, कुलविंदर सिंह बंगा, सतनाम सिंह सत्ता और गुरप्रीत सिंह गोपी) को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि यह मॉड्यूल सीधे ISI और मलेशिया में बैठे खालिस्तानी संगठनों के संपर्क में था। जर्मनी स्थित खालिस्तान टाइगर फोर्स (KTF) के जसविंदर सिंह मुल्तानी ने इस धमाके की जिम्मेदारी ली है।

जालंधर में AAP की बैठक पर स्पष्टीकरण: आम आदमी पार्टी के पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया ने विधायकों की ‘आपात बैठक’ की खबरों का खंडन किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह विधायकों की नहीं, बल्कि 1000 ब्लॉक ऑब्जर्वर्स की एक नियमित संगठनात्मक बैठक थी, जिसे फिलहाल टाल दिया गया है। यह स्पष्टीकरण उन अटकलों के बीच आया है जिनमें दावा किया गया था कि पार्टी के कई विधायक राघव चड्ढा के संपर्क में हैं।

मौसम में बदलाव और गर्मी से राहत: पंजाब के कई शहरों जैसे लुधियाना, अमृतसर, मोहाली और जालंधर में बारिश होने से भीषण गर्मी और बिजली कटों से राहत मिली है। मौसम विभाग ने अगले दो दिनों के लिए आंधी और बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया है। 29 अप्रैल से 3 मई के बीच पंजाब और चंडीगढ़ के विभिन्न हिस्सों में हल्की बारिश होने की संभावना जताई गई है।

बटाला में कबड्डी खिलाड़ी समेत दो की हत्या: गुरदासपुर के बटाला में सैर कर रहे तीन दोस्तों पर बाइक सवार हमलावरों ने अंधाधुंध फायरिंग की। इस हमले में कश्मीर सिंह (31) और कबड्डी खिलाड़ी जुगराज सिंह (18) की सिर में गोली लगने से मौके पर ही मौत हो गई। तीसरा दोस्त जुगराज सिंह (30) सीने में गोली लगने से गंभीर रूप से घायल है।

CRPF इंस्पेक्टर पर रेप का आरोप: मोहाली की एक युवती ने भिवानी के एक CRPF इंस्पेक्टर पर शादी का झांसा देकर बलात्कार करने का आरोप लगाया है। युवती का कहना है कि इंस्पेक्टर ने उसकी आपत्तिजनक फोटो और वीडियो वायरल करने की धमकी देकर उसे ब्लैकमेल किया। युवती अब इंस्पेक्टर की दूसरी शादी रुकवाने के लिए भिवानी के तोशाम थाने पहुंची है।

अबोहर में लिव-इन पार्टनर का अपहरण: अबोहर में एक महिला ने अपने साथियों के साथ मिलकर अपने लिव-इन पार्टनर सुरेंद्र की पिटाई की और उसे कार में किडनैप कर लिया। सुरेंद्र का अपनी पत्नी से तलाक का केस चल रहा था और वह डबवाली की एक महिला के साथ रह रहा था। पुलिस ने इस मामले में दो महिलाओं (सोनिका और पायल) को गिरफ्तार कर लिया है।

लुधियाना मेयर के पति पर अश्लील चैटिंग का आरोप: एक लेडी प्रिंसिपल ने लुधियाना की मेयर के पति रवि आनंद लक्की पर गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रिंसिपल का दावा है कि लक्की उन्हें अश्लील मैसेज भेजता था, ‘फिगर फोटो’ मांगता था और बात न मानने पर निगम अधिकारियों के जरिए उन्हें परेशान करवाता था। उन्होंने इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री और महिला आयोग को भी दी है।

ब्लास्ट में मारे गए आरोपी की पहचान: रेलवे ट्रैक पर बम फिट करते समय मारा गया व्यक्ति तरनतारन का जगरूप सिंह उर्फ जूपा था। वह कुछ समय पहले ही दुबई से लौटा था और दो बेटियों का पिता था। पुलिस के अनुसार, वह डिब्रूगढ़ जेल में बंद सांसद अमृतपाल सिंह का चुनाव प्रचार भी कर चुका था। जगरूप जिस गांव पंजवड़ का रहने वाला था, वहां का पुराना आतंकी इतिहास रहा है।

अमेरिका में स्टोर मालिक और वर्कर की मौत: टेक्सास, अमेरिका में एक पंजाबी फूड स्टोर में आग लगने से मोहाली के मालिक विक्रांत और करनाल के वर्कर सुखविंदर सिंह की जिंदा जलकर मौत हो गई। सुखविंदर अपने परिवार का इकलौता बेटा था, जिसे उसके माता-पिता ने 50 लाख रुपये खर्च कर ‘डंकी रूट’ से अमेरिका भेजा था। हादसा तब हुआ जब दोनों स्टोर के अंदर सो रहे थे।

अमृतसर में पुलिस का धक्का: अमृतसर में कैदियों को कोर्ट ले जा रही एक जेल वैन बीच सड़क पर खराब हो गई। भीड़भाड़ वाले इलाके में वैन को आगे बढ़ाने के लिए पुलिस मुलाजिमों को धक्का मारते हुए देखा गया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस घटना ने जेल विभाग की गाड़ियों की खस्ता हालत और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सीयू पंजाब ने सामुदायिक संवाद कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीण युवाओं को कौशल विकास, रोजगार और नशा-मुक्ति के प्रति किया जागरूक

बठिंडा/सत्ता संदेश

ग्रामीण युवाओं को रोजगारोन्मुखी शैक्षिक अवसरों से जोड़ने के उद्देश्य से पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयू पंजाब) ने कुलपति प्रो. राघवेंद्र प्रसाद तिवारी के नेतृत्व में एक विशेष सामुदायिक संवाद कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को कौशल विकास पाठ्यक्रमों के माध्यम से अपने कौशल को उन्नत करने के लिए प्रेरित करना था। कार्यक्रम में 10 गांवों से लगभग 100 लोगों ने भाग लिया, जिनमें सरपंच, स्थानीय युवा और समुदाय के सदस्य शामिल थे।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालय द्वारा प्रारंभ किए गए छह नए एनसीवीईटी अनुमोदित कौशल विकास पाठ्यक्रमों के बारे में जागरूकता फैलाना था। इन पाठ्यक्रमों में असिस्टेंट प्लंबर–जनरल; हेल्पर इलेक्ट्रीशियन; फंडामेंटल्स ऑफ कंप्यूटर्स;टैली ऑपरेशन एवं जीएसटी कैलकुलेशन का परिचय; बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट; तथा रेफ्रिजरेशन एवं एयर कंडीशनिंग की मूलभूत जानकारी जैसे कोर्स शामिल हैं। विश्वविद्यालय अधिकारियों ने बताया कि ये पाठ्यक्रम विशेष रूप से उन युवाओं के लिए तैयार किए गए हैं जिन्होंने 8वीं, 9वीं, 10वीं या 12वीं उत्तीर्ण की है तथा जिनके पास संबंधित अनुभव है और जो अपने कौशल एवं रोजगार क्षमता को और बेहतर बनाना चाहते हैं। पात्रता, पाठ्यक्रम और प्रवेश से जुड़ी विस्तृत जानकारी विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध प्रॉस्पेक्टस में देखी जा सकती है।

सभा को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. राघवेंद्र प्रसाद तिवारी ने राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचा के अंतर्गत प्रारंभ किए गए तथा भारत सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीवीईटी) द्वारा अनुमोदित इन छह रोजगारपरक पाठ्यक्रमों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कौशल आधारित शिक्षा देश को आगे बढ़ा सकती है और विश्वविद्यालयों को सिर्फ डिग्री देने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। जो युवा आगे की पढ़ाई नहीं कर सके, उनके लिए रोजगार से जुड़े कौशल विकास कार्यक्रम शुरू करना जरूरी है, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और देश के विकास में योगदान दे सकें। उन्होंने युवाओं और समुदाय से कौशल विकास एवं सकारात्मक सहभागिता के माध्यम से नशामुक्त समाज के निर्माण हेतु मिलकर कार्य करने का आह्वान किया।

वहीं, समकुलपति प्रो. किरण हजारिका ने कहा कि ये पाठ्यक्रम युवाओं को बिजली, प्लंबिंग, कंप्यूटर, अकाउंटिंग, स्वास्थ्य सेवा और तकनीकी क्षेत्रों में व्यावहारिक कौशल प्रदान करेंगे, जिससे उन्हें रोजगार, उद्यमिता और स्वरोजगार के नए अवसर मिलेंगे।

कुलसचिव डॉ. विजय शर्मा ने बताया कि ये पाठ्यक्रम आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप युवाओं में रोजगार क्षमता, आत्मनिर्भरता और व्यावसायिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए शुरू किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इन पाठ्यक्रमों को आसान पात्रता, किफायती शुल्क और व्यापक प्रायोगिक प्रशिक्षण के साथ तैयार किया गया है, ताकि ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के अधिक से अधिक युवा इसका लाभ उठा सकें।

कार्यक्रम के अंत में वित्त अधिकारी डॉ. राजकुमार शर्मा ने वंचित समुदायों के अधिकतम युवाओं तक इन परिवर्तनकारी अवसरों की जानकारी पहुंचाने के लिए विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता दोहराई और सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। प्रो. संजीव ठाकुर, डॉ. संजीव मंडेर एवं विश्वविद्यालय चिकित्सा अधिकारी डॉ. आकाश प्रकाश ने कार्यक्रम का संचालन किया तथा प्रतिभागियों को नशा मुक्ति और सामाजिक कल्याण को बढ़ावा देने वाली विश्वविद्यालय की व्यापक सामुदायिक पहलों के प्रति जागरूक किया। गांवों के सरपंचों और स्थानीय निवासियों ने ग्रामीण समुदायों में सुलभ करियर उन्मुख अवसरों के प्रति जागरूकता फैलाने तथा नशा मुक्ति के लिए विश्वविद्यालय की सक्रिय सामुदायिक पहल की सराहना की।

नारंगी अर्थव्यवस्था: जनजातीय कला, हस्तशिल्प और आजीविका

रंजना चोपड़ा

वर्शांग खैयर मणिपुर के उखरूल जिले के लॉन्गपी गाँव के निवासी हैं, जो अपने और अपने परिवार की रोजी-रोटी गाँव में उपलब्ध गारे और सर्पेंटीनाइट पत्थर से बर्तन बनाकर कमाते हैं। स्थानीय तांगखुल नागा जनजातियों के अनुसार, यह पारंपरिक शिल्प, देवी पंथोइबी की कृपा है और आज यह उनकी आय का मुख्य स्रोत है और इसने छोटे से गाँव को वैश्विक मानचित्र पर ला दिया है। इसी तरह, नॉर्थी कुट्टन, जो तमिलनाडु के उद्हगमंडलम जिले के पागलकोड मंड गाँव में रहते हैं, पारंपरिक कढ़ाई कला से अपनी आजीविका कमा रहे हैं। इस कढ़ाई कला का उपयोग नीलगिरी के हरे-भरे जंगलों में बसे टोडा जनजाति समूह द्वारा किया जाता है। जीआई टैग से युक्त यह शिल्प प्रकृति और सामुदायिक बंधन का जश्न मनाता है और इसे बहुत ही सुंदरता के साथ टेबल मैट, रनर, जैकेट आदि पर अंकित किया जाता है और समकालीन उपयोग में इसे लोकप्रियता भी मिली है। खैयर और कुट्टन दोनों अपने पारंपरिक जनजातीय कला रूपों के एक उन्नत रूप का अभ्यास करके सालाना लगभग 6-8 लाख रुपये कमाते हैं।

जनजातीय आजीविका लंबे समय से ज्ञान और पारंपरिक प्रथाओं पर आधारित रही है, जहां रचनात्मकता शिल्प, परंपरा, वस्त्र, संगीत, नृत्य, कथा-वाचन और भाषाओं में निहित है। ये केवल उत्पाद या सेवाएं नहीं हैं, बल्कि ज्ञान की जीवित विरासत हैं, जो पीढ़ियों के माध्यम से आगे बढ़ती हैं। जनजातीय समुदायों के पास मौजूद रचनात्मक संपत्तियों का महत्वपूर्ण आर्थिक मूल्य है, जिसे यदि परंपरा के प्रति संवेदनशील रहते हुए सतत तरीके से उपयोग किया जाए, तो यह नारंगी अर्थव्यवस्था (ऑरेंज इकोनॉमी) को गति दे सकता है और इस इकोसिस्टम के तहत आय उत्पन्न करने वाली गतिविधियों का सृजन कर सकता है।

रचनात्मक अर्थव्यवस्था को दर्शाने के लिए व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली नारंगी अर्थव्यवस्था, यूएनसीटीएडी (संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन) के अनुमान के अनुसार 2 ट्रिलियन डॉलर से 2.25 ट्रिलियन डॉलर के बीच है, जो वैश्विक जीडीपी का लगभग 3.1% है। भारत में, जहाँ हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्र के लिए ठोस डेटा मौजूद है, वहीं जनजातीय शिल्प और आजीविका के लिए डेटा की कमी है। हालांकि, रणनीतिक निहितार्थ स्पष्ट है: जनजातीय कला और शिल्प कुछ ऐसी ग्रामीण आजीविकाएं हैं, जो वैश्विक रचनात्मक वस्तुएँ की मांग से सीधे जुड़ सकती हैं यदि प्रामाणिकता, लॉजिस्टिक्स और गुणवत्ता प्रणाली मौजूद हों।

अनुमान है कि भारत की अनुसूचित जनजाति की आबादी 104 मिलियन है और कुल आबादी में इसकी हिस्सेदारी लगभग 8.6% है। लगभग 700 अलग-अलग जनजातीय समुदाय विभिन्न पारिस्थितिक क्षेत्रों में निवास करते हैं: जंगल, पहाड़, मैदान और सीमा क्षेत्र। इस विविधता का प्रत्यक्ष आर्थिक संबंध है। यह पारिस्थितिकी के अनुसार शिल्प विशेषज्ञता को प्रतिबिंबित करता है, जैसे जंगल वाले क्षेत्रों में बांस और छड़ी, खनिज क्षेत्रों में धातु और मिट्टी, और बुनाई गलियारों में वस्त्र परंपराएँ। इसके परिणामस्वरूप, भारत के जनजातीय क्षेत्र; एकल जनजातीय शिल्प क्षेत्र के बजाय “विविध अर्थव्यवस्थाओं” से युक्त हैं। इसलिए, नीति निर्माण क्षेत्रीय रूप से भिन्न होना चाहिए और “सभी के लिए उपयुक्त एक ही शिल्प योजना” नहीं होनी चाहिए। नीतियों को कच्चे माल की सीमाओं, डिज़ाइन और गुणवत्ता संबंधी मुद्दों और बाजार संबंधों को ध्यान में रखना चाहिए।

वर्तमान में, जनजातीय कला/हस्तशिल्प आजीविका इकोसिस्टम, कई मंत्रालयों और संस्थानों के कार्यादेशों से बना है, जो विभिन्न स्तरों पर एक-जैसे हैं। जनजातीय कार्य मंत्रालय इस इकोसिस्टम का मुख्य स्तंभ है और विकास के लिए अत्यंत आवश्यक अवसंरचना में सुधार करता है और ट्राइफेड (भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ लिमिटेड) के माध्यम से बाजार-जुड़ाव की सुविधा देता है। ट्राइफेड एक प्रमुख बाजार संचालक के रूप में कार्य करता है। ट्राइफेड वन धन विकास केंद्रों (वीडीवीके) का समर्थन करता है, जो खरीद और मूल्य संवर्धन के लिए जमीनी स्तर की इकाइयाँ हैं। ट्राइफेड, ट्राइब्स इंडिया आउटलेट और आदि महोत्सव/हाट्स के माध्यम से खुदरा विपणन करता है ताकि उत्पादकों को खरीदारों और संस्थागत भागीदारों से जोड़ा जा सके। वस्त्र मंत्रालय राष्ट्रीय हथकरघा विकास कार्यक्रम (एनएचडीपी) के माध्यम से हस्तशिल्प को बढ़ावा देता है और समग्र हथकरघा/हस्तशिल्प क्लस्टर विकास योजनाओं (सीएचसीडीएस) के माध्यम से क्लस्टर अवसंरचना को प्रोत्साहन देता है और कारीगरों के डेटाबेस को अद्यतन करता है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) पारंपरिक उद्योग पुनरुत्थान निधि योजना (स्फूर्ति) के माध्यम से क्लस्टर पुनरुत्थान और बिक्री-योग्यता का समर्थन करता है, स्पष्ट रूप से आपूर्ति-संचालित मॉडल के बदले बाज़ार-संचालित मॉडल का उपयोग करता है और ई-कॉमर्स को एक माध्यम के रूप में महत्व देता है।

अनुभव से पता चलता है कि ग्रामीण आजीविका मूल्य-श्रृंखला चुनौतीपूर्ण है क्योंकि ये कमजोर हैं, कारीगर सीधे बाजार से जुड़े नहीं होते हैं और मध्यस्थों पर अधिक निर्भर रहते हैं। ये कारक लाभ कम कर देते हैं तथा खराब भंडारण और एकत्रीकरण की वजह से अर्थव्यवस्था के विस्तार को समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यदि हम विश्लेषण को कारीगर परिवारों के स्तर तक और गहराई से देखें, तो जो पैटर्न दिखाई देता है वह मिश्रित अर्थव्यवस्था का है। कारीगर शिल्प कार्य को सहायक या अंशकालिक रोजगार के रूप में देखते हैं, विशेष रूप से ऐसे क्षेत्रों में, जहां कृषि मौसम-आधारित है या परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए अपर्याप्त है। इस परिस्थिति में, खराब ऋण पात्रता और उद्यम विकास, बाजार से जुड़ाव की कमी और व्यापारियों पर निर्भरता से आय प्रवाह अनियमित हो जाता है।

हालांकि, शिल्प कम पूंजी में घर पर उत्पादित किए जा सकते हैं, जिनमें उच्च लाभ की संभावना भी हो सकती है। शिल्प हस्तक्षेप अक्सर महिलाओं के रोजगार, आय और सौदेबाजी की शक्ति से जुड़े कार्यक्रम होते हैं। मोटे अनुमान बताते हैं कि 7 मिलियन से अधिक कारीगरों में महिलाओं की हिस्सेदारी 56% से 70% से अधिक हैं और हथकरघा क्षेत्र के बुनकरों में 72.29% महिलाएं हैं। कौशल हस्तांतरण अनौपचारिक होता है और आमतौर पर एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को दिया जाता है। जनजातीय कला रूपों के लिए, जहां तकनीक और आख्यान में सांस्कृतिक अर्थ निहित होता है, वहाँ हस्तांतरण दोनों तरह का होता है—आर्थिक (कौशल) और सांस्कृतिक (प्रामाणिकता)।

जनजातीय कार्य मंत्रालय के अंतर्गत तीन मौजूदा मॉडल मजबूत जुड़ाव के उपाय प्रदान करते हैं: वीडीवीके जैसी उत्पादनकर्ता समितियाँ, जो साझा अवसंरचना और संग्रहण प्रदान करती हैं; ट्राइब्स इंडिया स्टोर जो खरीदार से जोड़ने में मदद करते हैं और राज्य स्तर पर क्लस्टर विकास और कौशल उन्नयन के लिए सहकारी संस्थाएँ। उदाहरण के लिए, ओडिशा में 150 वीडीवीके कार्यरत हैं जिनकी कुल बिक्री ₹2,459.91 लाख है और जिसमें लगभग 40,000 जनजातीय उत्पादकों को एकीकृत किया गया है। जनजातीय विकास सहकारी निगम एक उच्च स्तरीय सहकारी संस्था है, जो जनजातीय उत्पादकों द्वारा तैयार किये गये वन और गैर-वन आधारित वस्तुओं के विपणन और ब्रांडिंग का कार्य करती है।

यह भारत के लिए एक मुख्य रणनीतिक सिफारिश को रेखांकित करता है: नारंगी अर्थव्यवस्था में जनजातीय कला/हस्तशिल्प को बेहतर क्षेत्रीय लेखांकन, लागू करने योग्य प्रामाणिकता/नैतिक व्यापार संरचना, और उत्पादक-संचालित वितरण की आवश्यकता है, जो मध्यस्थों के प्रभाव को कम करता हो। लघु-अवधि के लिए भारत ट्राइब्स फेस्ट जैसे त्योहारों को खरीद संभावना तथा उत्पाद कैटलॉग के मानकीकरण और डिजिटलीकरण के रूप में देखा जाना चाहिए एवं राष्ट्रीय एसटी वित्त विकास निगम और पीएम विश्वकर्मा जैसी योजनाओं के माध्यम से ऋण समर्थन को खरीदार आदेशों के साथ एकीकृत किया जाना चाहिए। हालांकि, दीर्घ-अवधि के लिए सरकार को एक जनजातीय रचनात्मक अर्थव्यवस्था उपग्रह विवरण बनाने, निर्यात स्तर की अनुपालन और ब्रांड संरचना स्थापित करने और जनजातीय कला के लिए भारत-उपयुक्त नैतिक व्यापार संहिता तैयार करने पर विचार करना होगा। इन उपायों के माध्यम से, जनजातीय नारंगी अर्थव्यवस्था ग्रामीण क्षेत्रों से उभरकर विकसित भारत @2047 की यात्रा में शामिल हो जाएगी।

डॉ. अनुभव शर्मा का न्यूयॉर्क के मेमोरियल स्लोन केटरिंग कैंसर सेंटर में फैलोशिप के लिए चयन

लुधियाना/ सत्ता संदेश

लुधियाना, 27 अप्रैल (जोशी):  पंजाब के मेडिकल समुदाय के लिए एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर, दयानंद मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (डीएमसीएच), लुधियाना के ऑर्थोपेडिक्स विभाग में कंसल्टेंट डॉ. अनुभव शर्मा को न्यूयॉर्क, अमेरिका के विश्व-प्रसिद्ध मेमोरियल स्लोन केटरिंग कैंसर सेंटर (एमएसकेसीसी) में एक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय फैलोशिप के लिए चुना गया है।

एमएसकेसीसी को लगातार दुनिया भर में कैंसर के इलाज और अनुसंधान के शीर्ष संस्थानों में से एक माना जाता है। यह कार्यक्रम बहुत अधिक प्रतिस्पर्धी है; इसमें उम्मीदवारों का चयन उनकी शैक्षणिक योग्यताओं, क्लीनिकल अनुभव, अनुसंधान कार्य, पेशेवर उपलब्धियों और विषय ज्ञान के कठोर मूल्यांकन के बाद ही किया जाता है, जिसके लिए साक्षात्कार और बातचीत का सहारा लिया जाता है।

इस अत्यधिक प्रतिस्पर्धी फैलोशिप के लिए डॉ. शर्मा का चयन उनकी क्लीनिकल उत्कृष्टता और विशेष ऑर्थोपेडिक देखभाल को आगे बढ़ाने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

न्यूयॉर्क में अपने कार्यकाल के दौरान, डॉ. शर्मा वैश्विक विशेषज्ञों के साथ मिलकर काम करेंगे, और ऑर्थोपेडिक्स/ऑर्थोपेडिक ऑन्कोलॉजी के क्षेत्र में नवीनतम इनोवेशन और सर्जिकल तकनीकों पर विशेष ध्यान देंगे।

इस अंतरराष्ट्रीय अनुभव से डीएमसीएच में विश्व-स्तरीय विशेषज्ञता वापस आने की उम्मीद है, जिससे रोगी देखभाल के मानकों में अस्पताल की क्षमताओं में और अधिक वृद्धि होगी। इस कार्यक्रम से प्राप्त ज्ञान और विशेषज्ञता, उपचार के एडवांस तरीकों को शुरू करने और शैक्षणिक उत्कृष्टता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान देगी।

डॉ. शर्मा ने अपनी जड़ों के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त की और कहा, “न्यूयॉर्क, अमेरिका के मेमोरियल स्लोन केटरिंग में इस फेलोशिप के लिए चुने जाने पर मैं खुद को अत्यंत सम्मानित महसूस कर रहा हूँ। मैं डीएमसीएच के नेतृत्व का उनके निरंतर समर्थन के लिए आभार व्यक्त करता हूँ।”

उन्होंने कहा, “हालांकि यह मेरे लिए एक महत्वपूर्ण व्यक्तिगत उपलब्धि है, लेकिन मेरा प्राथमिक ध्यान उन रोगियों पर ही केंद्रित है जिनकी सेवा हम यहाँ अपने संस्थान में करते हैं। मेरा लक्ष्य दुनिया की सबसे एडवांस ऑर्थोपेडिक ऑन्कोलॉजी पद्धतियों और सर्जिकल इनोवेशंस में खुद को पूरी तरह से समर्पित करना है, ताकि मैं भारत में व्यावहारिक और जीवन-रक्षक ज्ञान वापस ला सकूँ।”

डॉ. शर्मा ने आगे कहा, “मैं इस अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञता को अपने स्थानीय रोगियों के लिए ठोस लाभों में बदलने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करने के लिए प्रतिबद्ध हूँ, ताकि उन्हें यहीं अपने शहर में ही विश्व-स्तरीय ऑर्थोपेडिक देखभाल प्रदान की जा सके।”

डीएमसीएच के सचिव बिपिन गुप्ता और प्रिंसिपल डॉ. जी.एस. वांडर ने इस उपलब्धि पर डॉ. शर्मा को बधाई दी, और कहा कि उनके चयन से न केवल संस्थान का, बल्कि पूरे क्षेत्र का गौरव बढ़ा है। यह उपलब्धि चिकित्सा क्षेत्र में उत्कृष्टता को बढ़ावा देने और अपने फैकल्टी सदस्यों को ग्लोबल हेल्थ केयर के सर्वोच्च स्तर पर प्रशिक्षण प्राप्त करने के अवसर प्रदान करने के प्रति डीएमसीएच की निरंतर प्रतिबद्धता को उजागर करती है।

भारतीय महासागर पोत सिंगापुर के चांगी नौसैनिक अड्डे पर पहुंचा

दिल्ली /सत्ता संदेश

हिंद महासागर पोत (आईओएस सागर), आईएनएस सुनायना, 26 अप्रैल2026 को सिंगापुर के चांगी नौसेना अड्डे पर पहुंचाजो महासागर (क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति) की परिकल्पना के अंतर्गत चल रही आईओएस सागर तैनाती के दौरान उसका चौथा पोर्ट कॉल है।

16 मित्र विदेशी देशों (एफएफसी) के बहुराष्ट्रीय दल वाला यह पोत हिंद महासागर क्षेत्र में तैनात है और सिंगापुर पहुंचने से पहले मालेफुकेत और जकार्ता में बंदरगाहों पर रुक चुका है।

सिंगापुर पहुंचने पर पोत का गर्मजोशी से स्वागत किया गया, जिससे भारत-सिंगापुर के मजबूत समुद्री संबंधों की पुष्टि हुई। सिंगापुर में भारत की उच्चायुक्त डॉ. शिल्पक अंबुले ने जहाज पर सवार चालक दल से बातचीत की और सागर विजन के तहत समुद्री साझेदारी को मजबूत करने और अंतर-संचालनीयता को बढ़ावा देने में उनकी भूमिका की सराहना की। आईएनएस सुनायना के कमान अधिकारी कमांडर सिद्धार्थ चौधरी ने क्रांजी युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की और सिंगापुर गणराज्य नौसेना (आरएसएन) के 9वें फ्लोटिला के कमांडर कर्नल चुआह मेंग सून से मुलाकात कर समुद्री सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा की।

इस यात्रा के दौरान, पोत स्कूली बच्चों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स सहित आगंतुकों के लिए खुला रहा, जिससे उन्हें समुद्र में जीवन का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त हुआ। 27 अप्रैल, 2026 को, IOS SAGAR के चालक दल ने भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों के साथ मिलकर एक महासागरएक मिशन विषय पर आधारित एक दौड़ में भाग लिया, जिसका उद्देश्य समुद्री जागरूकता और एकता को बढ़ावा देना था।

यह जहाज पेशेवर और सामुदायिक स्तर पर कई तरह की बातचीत के माध्यम से राष्ट्रीय नौसेना (आरएसएन) के साथ जुड़ा हुआ है। आगामी गतिविधियों में आईओएस सागर के चालक दल द्वारा सिंगापुर में आरएसएन के नेविगेशन और डैमेज कंट्रोल सिमुलेटर, सूचना संलयन केंद्र और नौसेना संग्रहालय का दौरा शामिल है, जिससे सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्रीय समुद्री जागरूकता बढ़ेगी। इसके अलावा, आईओएस सागर पर मौजूद एक थिंक टैंक के कर्मियों के साथ बातचीत, एक संयुक्त योग सत्र और एक औपचारिक डेक रिसेप्शन हितधारकों के साथ जुड़ाव को और मजबूत करेंगे।

आईएनएस सुनायना 29 अप्रैल, 2026 को सिंगापुर से रवाना होने वाल है, जो हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सहयोग को मजबूत करने और सामूहिक सुरक्षा को बढ़ावा देने के अपने मिशन को जारी रखेगी।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने 21 राज्यों और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र-दिल्ली को लू से प्रभावित होने वाले लोगों के जीवन की रक्षा के लिए पहले से ही कार्रवाई करने को कहा है

दिल्ली /सत्ता संदेश


आयोग ने अपर्याप्त आश्रय और संसाधनों के अभाव के कारण लू की चपेट में आने से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों, घर के बाहर काम करने वाले श्रमिकों, बुजुर्गों, बच्चों, नवजात शिशुओं और विशेष रूप से बेघर लोगों को होने वाले खतरे का उल्लेख किया है

राज्यों में वर्तमान मानक संचालन प्रक्रियाओं या एनडीएमए के दिशानिर्देशों के अनुसार लू के प्रभाव को कम करने और जनहानि को रोकने के लिए उठाए गए कदमों के संबंध में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने 21 राज्यों और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र- दिल्ली में देश में भीषण गर्मी के दौरान प्रभावित होने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए पहले से ही कार्रवाई करने और राहत संबंधी उपाय लागू करने को कहा है। ये राज्य हैं: आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, केरलम, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम, तमिलनाडु, तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल।

आयोग ने पाया है कि बार-बाल लू चलने, उसकी अवधि और तीव्रता में वृद्धि के कारण हाशिए पर रहने वाले, आर्थिक रूप से दुर्बल वर्ग, घरों के बाहर काम करने वाले श्रमिक और बेघर लोग गंभीर रूप से प्रभावित होते हैं क्योंकि उनके पास पर्याप्त आश्रय और संसाधन नहीं होते। बुजुर्ग, अल्पवयस्क, बच्चे और नवजात शिशु अत्यधिक गर्मी के कारण स्वास्थ्य पर पड़नेवाले प्रभावों के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील होते हैं। इसके अतिरिक्त लू से आजीविका का नुकसान हो सकता है और आग लगने से होने वाली दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है।

इसलिए आयोग ने इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली के मुख्य सचिवों को लिखे पत्र में तत्काल एकीकृत और समावेशी उपाय किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया है। आयोग ने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों का उल्लेख किया है जिसके अनुसार 2019-23 के बीच भारत में भीषण गर्मी या लू लगने से 3,712 लोगों की मृत्यु हो गई और आग्रह किया है कि वे लू के प्रभाव को कम करने और जनहानि को रोकने के लिए अपनी वर्तमान मानक संचालन प्रक्रियाओं या राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) की ओर से जारी दिशानिर्देशों के अनुरूप राहत उपायों को सुचारू रूप से लागू करने की योजना बनाएं और कार्यान्वयन को सुगम बनाएं।

आयोग ने राज्य/केंद्र शासित प्रदेश स्तर पर जिलों से इस सिलसिले में समेकित कार्रवाई रिपोर्ट देने को कहा है।

नीति आयोग ने समावेशी और उत्पादकता-आधारित विकास को बढ़ावा देने के लिए डीपीआई@2047 प्रारूप प्रस्‍तुत किया

दिल्ली /सत्ता संदेश

प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा के नियम बदल रहे हैं। वर्तमान में लाभ केवल नवाचार से ही नहीं अपितु यह तेजी से विभिन्न क्षेत्रों, संस्थानों और पारिस्थितिकी तंत्रों में नवाचार को जोड़ने और फिर उसे व्यापक जनसमूह तक पहुंचाने की क्षमता पर निर्भर करता है। इस नए परिदृश्य में डिजिटल रेल का महत्व पहले से कहीं अधिक है। यही वह माध्यम है जो विचारों, अनुप्रयोगों और सेवाओं को पायलट प्रोजेक्ट से राष्ट्रव्यापी प्रभाव तक ले जाने में सक्षम बनाता है।

इसी संदर्भ में, नीति आयोग ने 27 अप्रैल 2026 को विकसित भारत के लिए डीपीआई@2047 प्रस्‍तुत किया। यह एक रणनीतिक प्रारूप है और समावेशी, गैर-रैखिक एवं उत्पादकता-आधारित विकास के चालक के रूप में भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना यात्रा के अगले चरण को रेखांकित करता है।

इस प्रारूप का अनावरण नीति आयोग के उपाध्यक्ष श्री सुमन बेरी और सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर अजय कुमार सूद ने नीति आयोग की मुख्‍य कार्यकारी अधिकारी सुश्री निधि छिब्बर और मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन की उपस्थिति में किया। नीति आयोग की विशिष्ट फेलो सुश्री देबजानी घोष, एकस्टेप फाउंडेशन के सह-संस्थापक और मुख्‍य कार्यकारी अधिकारी श्री शंकर मरुवाड़ा और अन्य विशिष्ट अतिथि एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। इस कार्यक्रम में उद्योग जगत के नेताओं, स्टार्टअप्स और विकास भागीदारों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जो भारत के डिजिटल परिवर्तन के अगले चरण के प्रति मजबूत सामूहिक प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।

एकस्टेप फाउंडेशन और डेलॉयट के साथ साझेदारी में विकसित प्रारूप, देश के डिजिटल परिवर्तन के लिए दो चरणों का मार्ग निर्धारित करता है: डीपीआई 2.0 (2025-2035) व्यापक स्तर पर आजीविका-आधारित विकास को गति देने के लिए, और उसके बाद डीपीआई 3.0 (2035-2047) व्यापक समृद्धि को सक्षम बनाने के लिए है। तात्कालिक ध्यान डीपीआई 2.0 पर है।

डीपीआई 2.0 के अंतर्गत प्रारूप में एमएसएमई, कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य सहित विभिन्न क्षेत्रों में संरचनात्मक बाधाओं को दूर करने के लिए आठ क्षेत्रीय परिवर्तनों की पहचान की गई है, साथ ही ऋण, विकेंद्रीकृत ऊर्जा और लाभ वितरण जैसे प्रणालीगत समर्थकों को मजबूत किया गया है। उद्देश्य को परिणामों में बदलने के लिए, इसमें चार कार्यान्वयन संबंधी अनिवार्यताओं की रूपरेखा दी गई है: जिला-आधारित मांग एकत्रीकरण, प्रौद्योगिकी उद्यमिता को बढ़ावा देना, एआई का लाभ उठाना और बेहतर डेटा उपयोग, डिजिटल लेनदेन, मजबूत मानव क्षमता और एआई के लोकतंत्रीकरण के माध्यम से अंतर-क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देना।

मूल रूप से, डीपीआई 2.0 का उद्देश्य देश के डिजिटल नेटवर्क को पहचान, भुगतान और कल्याण से आगे बढ़ाकर आजीविका, उत्पादकता और बाजार पहुंच के मुख्य आधारों तक विस्तारित करना है। यह इस बात को दर्शाता है कि आने वाले वर्षों में विकास किस प्रकार होगा: केवल नई तकनीकों का आविष्कार करके नहीं, बल्कि एक ऐसा संयोजी ढांचा बनाकर जो नवाचार को एक साथ काम करने, तेजी से आगे बढ़ने और अधिक लोगों तक पहुंचने में सक्षम बनाए। खुले डिजिटल बुनियादी ढांचे को विश्वसनीय डेटा प्रवाह और पारिस्थितिकी तंत्र-आधारित नवाचार के साथ जोड़कर, यह प्रारूप एआई जैसी तकनीकों को नागरिकों और छोटे उद्यमों के बीच व्यापक रूप से प्रसारित करने के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार करता है।

केवल डिजिटल समावेशन से आगे बढ़कर व्यापक स्तर पर क्षमता, उत्पादकता और अवसरों को सक्षम बनाते हुए यह भारत की डिजिटल यात्रा में एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतीक है।

अब प्राथमिकता क्रियान्वयन पर है। जिला स्तर पर अपनाए जाने और स्थानीय वास्तविकताओं पर आधारित, तथा विश्वास, अंतरसंचालनीयता और सुरक्षा उपायों पर टिकी हुई, डीपीआई 2.0 प्रौद्योगिकी को अपनाने का एक व्यावहारिक मार्ग प्रदान करती है, जिससे पूरे देश में व्यापक विकास को गति मिलेगी और देश को विकसित भारत 2047 की ओर एक गैर-रेखीय, उत्पादकता-आधारित विकास पथ पर आगे बढ़ने में सहायता मिलेगी।

इस अवसर पर अपने संबोधन में श्री सुमन बेरी ने कहा कि अब ध्यान जीडीपी से उत्पादकता पर केंद्रित हो गया है। उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार, मजबूत आय और बेहतर जीवन स्तर बढ़ती उत्पादकता पर निर्भर करते हैं। डीपीआई 1.0 ने दिखाया है कि नेटवर्क का उपयोग करना ही हमारी वर्तमान स्थिति का रहस्य है। यह प्रारूप इस बदलाव को स्पष्ट करता है। भारत के विकास का अगला चरण इस बात से तय होगा कि एआई और डीपीआई किस प्रकार व्‍यापक स्‍तर पर उत्पादकता बढ़ाते हैं, इसे भारत की विकास यात्रा के केंद्र में रखते हैं और विकसित भारत 2047 की आधारशिला रखने में मदद करते हैं।

प्रोफेसर अजय कुमार सूद ने कहा कि प्रौद्योगिकी नेतृत्व को तेजी से इस बात से परिभाषित किया जाएगा कि हम विज्ञान और नवाचार को बड़े पैमाने पर लागू होने योग्य, विश्वसनीय सार्वजनिक परिणामों में बदलने में कितने सक्षम हैं। भारत के डीपीआई ने जनसंख्या स्तर पर खुले, अंतरसंचालनीय प्रणालियों की शक्ति का प्रदर्शन किया है। अगले चरण को इसी नींव पर आगे बढ़ना होगा, जिसमें अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों को मजबूत वैज्ञानिक सटीकता और सुरक्षा उपायों के साथ एकीकृत किया जाए। यह प्रारूप इसी दिशा को दर्शाता है, जो जिम्मेदार तैनाती और वास्तविक दुनिया पर प्रभाव पर केंद्रित है। भारत के पास उदाहरण पेश करने के लिए वैज्ञानिक गहराई और डिजिटल आधार मौजूद हैं।

सुश्री निधि छिब्बर ने इस बात पर बल दिया कि नीति एफटीएच प्रारूप का एक महत्वपूर्ण हिस्सा राज्यों को उनके परिवर्तन की यात्रा में सहयोग देने पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य उन्हें व्यावहारिक मार्ग प्रदान करना है जिन्हें वे अपनाकर लागू कर सकें। हमारा दृष्टिकोण सरल है: जब राज्य तेजी से विकास करते हैं, तो भारत और भी तेजी से विकास करता है। डीपीआई राज्यों के लिए समावेशी विकास को गति देने में एक महत्वपूर्ण सहायक बन सकता है।

सुश्री देबजानी घोष ने कहा कि यह प्रारूप बताता है कि कैसे डीपीआई 2.0 भारत को डिजिटल समावेशन से उत्पादकता-आधारित, आजीविका-केंद्रित विकास की ओर ले जा सकता है, जिससे 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य प्राप्त हो सके। वैश्विक एआई प्रतिस्पर्धा अब केवल अत्याधुनिक मॉडलों, चिप्स और पूंजी तक सीमित नहीं है; यह तेजी से किसी देश की डिजिटल बुनियादी ढांचे को अर्थव्यवस्था में व्यापक प्रसार और प्रभाव से जोड़ने की क्षमता पर केंद्रित हो रही है। भारत इस अगले चरण में एक शक्तिशाली संरचनात्मक लाभ के साथ प्रवेश कर रहा है: इसकी डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, डीपीआई, एआई और उद्यमिता को मिलाकर, भारत एआई को अपनाने का एक समावेशी, स्थानीय भाषा में और व्यापक जनमानस वाला मॉडल विकसित कर सकता है जो जीवन को बेहतर बनाएगा, आजीविका को मजबूत करेगा और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उत्पादकता को बढ़ावा देगा।

पूरा प्रारूप यहां देखें: https://niti.gov.in/sites/default/files/2026-04/DPI-2047-for-Viksit-Bharat-A-Strategic-Roadmap-to-Enable-Non-linear-Inclusive-Socio-economic-Growth.pdf
नीति फ्रंटियर टेक हब के बारे में:

नीति फ्रंटियर टेक हब की स्थापना विकसित भारत के लिए एक सक्रिय मंच के रूप में की गई है, जिसका उद्देश्य उभरते हुए मेगा-टेक्नोलॉजी परिवर्तनों का पूर्वानुमान लगाना और भारत को तीव्र आर्थिक विकास, समावेशी सामाजिक परिणामों और रणनीतिक उदारता के लिए उनकी क्षमता का उपयोग करने हेतु तैयार करना है—जिससे देश को एक अग्रणी तकनीकी राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ने में सहायता मिलेगी। सरकार, उद्योग और शिक्षा जगत के 100 से अधिक विशेषज्ञों के सहयोग से, यह हब आर्थिक विकास, सामाजिक परिणामों और रणनीतिक लचीलेपन के लिए अग्रणी प्रौद्योगिकियों का लाभ उठाने हेतु 20 से अधिक क्षेत्रों में 10 वर्षीय प्रारूप तैयार कर रहा है।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर के बाद निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए निर्यात प्रोत्साहन परिषदों और उद्योग जगत के साथ बैठक की अध्यक्षता की

दिल्ली /सत्ता संदेश


श्री पीयूष गोयल ने विकसित भारत विजन के अंतर्गत वर्ष 2030 तक 2 ट्रिलियन अमरीकी डॉलर के निर्यात लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) का लाभ उठाने का आह्वान किया

डीजीएफटी ने निर्यात सुधार प्रारूप प्रस्तुत किया; उद्योग ने एमएसएमई की चुनौतियों को स्‍पष्‍ट किया, सरकार ने समर्थन और व्यापार सुगमता उपायों का आश्वासन दिया

निर्यात प्रोत्साहन मिशन की प्रगति की समीक्षा की गई; श्री पीयूष गोयल ने ईपीसी कंपनियों से निर्यातकों का आधार बढ़ाने और नए बाजारों की खोज करने का आग्रह किया

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने 27 अप्रैल, 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में निर्यात संवर्धन परिषदों (ईपीसी) और उद्योग संघों के साथ एक बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में बदलते वैश्विक व्यापार परिदृश्य के संदर्भ में भारत के निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने से जुड़ी रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया गया। भारत मंडपम में भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर हस्ताक्षर समारोह के दौरान आयोजित इस बैठक में 30 ईपीसी और शीर्ष उद्योग मंडलों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ वाणिज्य विभाग और विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

इस अवसर पर अपने संबोधन में श्री गोयल ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल माल और सेवा निर्यात रिकॉर्ड 860.09 अरब अमरीकी डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 4.22 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यवधानों के बावजूद अभियांत्रिकी सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स, रसायन, रत्न एवं आभूषण और कृषि आधारित उत्पादों जैसे क्षेत्रों ने निर्यात की गति को बनाए रखा है।

श्री पीयूष गोयल ने कहा कि यह उपलब्धि विकसित भारत की परिकल्पना के अंतर्गत वर्ष 2030 तक 2 ट्रिलियन अमरीकी डॉलर के निर्यात का लक्ष्य हासिल करने के लिए एक आधार का काम करेगी। उन्होंने निर्यातकों और उद्योग जगत से आग्रह किया कि वे विकसित अर्थव्यवस्थाओं के साथ भारत के मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) का पूरा लाभ उठाकर बाजार पहुंच बढ़ाएं, निर्यात को बढ़ावा दें और रोजगार के अवसरों का सृजन करें। उन्होंने कहा कि इन समझौतों का समय पर उपयोग करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

बैठक के दौरान, विदेश व्यापार महानिदेशक ने निर्यात प्रदर्शन, वर्तमान में जारी सुधारों और मापनीय निर्यात परिणामों को प्राप्त करने के लिए एक संरचित प्रारूप पर विस्तृत प्रस्तुति दी। प्रस्तुति में एक व्यापक निर्यात सुधार ढांचे की रूपरेखा प्रस्तुत की गई, जिसमें क्षेत्रीय निर्यात प्रदर्शन, ईपीसी के लिए केपीआई-आधारित ढांचा, ई-कॉमर्स निर्यात को प्रोत्साहन, जिलों को निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करना, प्रस्तावित डिजिटल व्यापार अकादमी, पश्चिम एशिया संकट पर सरकार की प्रतिक्रिया, निर्यात संवर्धन मिशन के अंतर्गत हुई प्रगति और निर्यात दायित्व मुक्ति प्रमाणपत्र (ईओडीसी) को शीघ्र जारी करने के लिए चल रहे विशेष अभियान शामिल थे। डीजीएफटी ने इस बात पर बल दिया कि ईपीसी को बाजार विविधीकरण को बढ़ावा देने, अधिक से अधिक एमएसएमई को निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र में शामिल करने, प्रौद्योगिकी का अधिक उपयोग करने और यह सुनिश्चित करने में सरकार के साथ समान भागीदार के रूप में कार्य करना चाहिए कि नीतिगत उपाय राष्ट्रीय स्तर पर मापने योग्य परिणामों में परिवर्तित हों।

उद्योग प्रतिनिधियों ने अनुपालन लागत, परीक्षण आवश्यकताओं और निर्यात बाजारों में प्रवेश करने में लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के सामने आने वाली चुनौतियों से संबंधित मुद्दे उठाए। श्री पीयूष गोयल ने वर्तमान में जारी योजनाओं के अंतर्गत सहायता और प्रवेश बाधाओं को कम करने तथा व्यापार करने में सुगमता बढ़ाने के लिए लक्षित हस्तक्षेपों सहित निरंतर सरकारी समर्थन का आश्वासन दिया।

बैठक में भाग लेने वाले प्रमुख निकायों में फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन्स, जेम एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल, परिधान निर्यात संवर्धन परिषद, काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट्स, इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया, बेसिक केमिकल्स, कॉस्मेटिक्स एंड डाइज एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल, कॉटन टेक्सटाइल्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल, मैनमेड एंड टेक्निकल टेक्सटाइल्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल, अन्य प्रमुख टेक्सटाइल ईपीसी; कार्पेट एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल, एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर हैंडीक्राफ्ट्स, कृषि और संबद्ध निकाय जिनमें सीफूड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, एग्रीकल्चरल एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी, शेलैक एंड फॉरेस्ट प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल, इंडियन ऑयलसीड्स एंड प्रोड्यूस एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल, फार्मास्यूटिकल्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया, नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर एंड सर्विस कंपनीज फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री, एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया, पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री और कई अन्य प्रमुख क्षेत्रीय संघ शामिल थे।

चर्चा में निर्यात प्रोत्साहन मिशन (ईपीएम) के अंतर्गत हुई प्रगति की भी जानकारी दी गई। यह निर्यातकों को समर्थन देने के लिए सरकार की प्रमुख योजना है। श्री पीयूष गोयल ने ईपीसी को सक्रिय निर्यातकों की संख्या बढ़ाने के लिए कदम उठाने को प्रोत्साहित किया। उन्होंने निर्यात वृद्धि को गति देने के लिए नए बाजारों में प्रवेश करने और वर्तमान बाजारों में अपनी उपस्थिति बढ़ाने के लिए निर्यातकों को सरकार के समर्थन पर भी बल दिया।

श्री पीयूष गोयल ने सतत सुधारों, लक्षित समर्थन उपायों और उद्योग के साथ घनिष्ठ सहयोग के माध्यम से एक सुगम व्यापार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि की, ताकि निर्यात वृद्धि को गति दी जा सके और भारत को एक विश्वसनीय वैश्विक आपूर्ति भागीदार के रूप में स्थापित किया जा सके।


‘सिक्किम पूर्वी भारत का स्वर्ग’, पीएम मोदी ने 50वें स्थापना दिवस पर सिक्किम को दी 4000 करोड़ की सौगात

गंगटोक, सत्ता संदेश

गंगटोक में पीएम मोदी का जोशीला अंदाज देखने को मिला, जहां विकास परियोजनाओं से पहले उन्होंने युवाओं के साथ फुटबॉल खेलकर माहौल को जोशीला कर दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिक्किम में 4,000 करोड़ से अधिक की विकास परियोजनाओं का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने सिक्किम को पूर्वी भारत का स्वर्ग बताते हुए प्रकृति प्रेमी पर्यटकों से राज्य के ऑर्किडेरियम का भ्रमण करने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी कहा कि पर्यटन राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और सरकार का मुख्य फोकस यहां कनेक्टिविटी और आधारभूत ढांचे को मजबूत करना है।

50 साल पूरे होने पर 4000 करोड़ की विकास परियोजना की मिली सौगात

सिक्किम राज्य को 50 साल पूरे होने पर राज्य में भव्य समारोह का आयोजन किया गया। इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने 4000 करोड़ की सौगात दी। पीएम मोदी ने कई विकास परियोजनाओं का उद्धघाटन किया। इन परियोजनाओं में सड़क, स्वास्थय, शिक्षा, पर्यटन, कृषि जैसे कई क्षेत्र शामिल है। जो विभिन्न क्षेत्रों में बुनियादी ढ़ाचे और सुविधाओं को मजबूत करने में अहम कदम माना जा रहा है। यह दौरा हिमालयी राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है, जो आने वाले समय में विकास की नई दिशा तय कर सकता है। सरकारी अधिकारियों के मुताबिक इन परियोजनाओं का उद्देश्य सिक्किम में समग्र और समावेशी विकास को गति देना है।

ऑर्किडेरियम का दौरा और आधुनिक पार्क की झलक

पीएम मोदी ने स्वर्णजयंती मैत्री मंजरी पार्क स्थित ऑर्किडेरियम का दौरा किया। यह पार्क विश्वस्तरीय ऑर्किड अनुभव केंद्र के रुप में विकसित किया गया है। जिसे सिक्किम की प्राकृतिक खूबसूरती और जैव विविधता का प्रतीक माना जा रहा है। इसके बाद प्रधानमंत्री पलजोर स्टेडियम में आयोजित मुख्य समारोह में शामिल हुए। जहां उन्होंने विकास परियोजनाओं का उद्घाटन कर जनता को संबोधित किया।