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DPIIT ने 12 वर्षों की उपलब्धियां गिनाईं, भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम बना विकास का बड़ा इंजन

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

सरकार के देशव्यापी अभियान के तहत 12 वर्ष के शासन की वर्षगांठ मनाने के हिस्से के रूप में, उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT), वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने चंडीगढ़ में एक क्षेत्रीय प्रेस ब्रीफिंग आयोजित की, जिसमें विभाग की प्रमुख पहलें, संरचनात्मक सुधार और पिछले दशक में हुई उपलब्धियों को उजागर किया गया।

पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए DPIIT के संयुक्त सचिव श्री सुमीत कुमार जारंगल ने भारत के औद्योगिक और स्टार्टअप इकोसिस्टम की परिवर्तनकारी यात्रा का खाका पेश करते हुए कहा कि नीति सुधार, नवाचार और उद्यमिता ने देश की आर्थिक मजबूती और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता के प्रमुख स्तंभ के रूप में उभर कर सामने आए हैं।

12 वर्षों के परिवर्तनकारी शासन

उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए श्री जारंगल ने कहा कि भारत ने कई वैश्विक व्यवधानों का सफलतापूर्वक सामना करते हुए गहरे संरचनात्मक सुधार लागू किए, जिनसे निवेशकों का भरोसा बढ़ा और औद्योगिक वृद्धि को गति मिली।

पिछले दशक में, भारत ने वित्त वर्ष 2014‑15 से वित्त वर्ष 2025‑26 के बीच कुल विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) प्रवाह USD 843 बिलियन आकर्षित किए, जो पिछले बारह वर्ष की अवधि की तुलना में 169 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद, देश ने वित्त वर्ष 2025‑26 में ऐतिहासिक USD 94.53 बिलियन दर्ज किए, जिनमें से 90 प्रतिशत से अधिक इक्विटी प्रवाह स्वत: मार्ग के माध्यम से आए।

संयुक्त सचिव ने यह भी कहा कि मेक इन इंडिया और प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) जैसी प्रमुख पहलों ने निवेशों को विनिर्माण शक्ति में बदला है। 14 रणनीतिक क्षेत्रों में PLI योजनाओं ने रु 2.40 लाख करोड़ के निवेश आकर्षित किए, रु 22.66 लाख करोड़ के उत्पादन का सृजन किया, रु 15.20 लाख करोड़ से अधिक के निर्यात को बढ़ावा दिया और 14 लाख से अधिक नौकरियां पैदा कीं।

उन्होंने कहा कि भारत आज घरेलू स्तर पर उपयोग होने वाले मोबाइल फोन का 99.2 प्रतिशत निर्माण करता है, जबकि फार्मा सेक्टर ने 191 बल्क ड्रग्स के घरेलू उत्पादन के माध्यम से आयात निर्भरता में उल्लेखनीय कमी की है, और PLI द्वारा समर्थित उत्पादन का निर्यात में भी महत्वपूर्ण योगदान है।

भरोसा-आधारित शासन और व्यापार करने की सुगमता

ब्रीफिंग में सरकार के नियमों को सरल बनाने और व्यापार करने में आसानी लाने के सतत प्रयासों को भी रेखांकित किया गया। जन‑विश्वास अधिनियम, 2026 के माध्यम से 47,000 से अधिक अनुपालनों को समाप्त किया गया है और कई कानूनी प्रावधानों का तर्कसंगतकरण किया गया, जो प्रवर्तन‑आधारित विनियमन से भरोसा‑आधारित शासन की दिशा में बदलाव को दर्शाता है।

नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम, जो 32 केंद्रीय मंत्रालयों और 34 राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों से जुड़ा है, ने 13.7 लाख से अधिक आवेदन संसाधित किए और 8.5 लाख से अधिक अनुमोदन सुगम किए, जिससे निवेश के लिए एक सहज पारिस्थितिकी तंत्र बना है। सुधारों को और मजबूत करने के लिए बिजनेस रिफॉर्म्स एक्शन प्लान (BRAP), उद्योग समागम और जिला‑स्तरीय BRAP जैसी पहलों को भी आगे बढ़ाया जा रहा है।

स्टार्टअप इंडिया समावेशी वृद्धि चला रहा है

स्टार्टअप क्रांति पर ध्यान केंद्रित करते हुए श्री जारंगल ने कहा कि 16 जनवरी 2016 को शुरू की गई स्टार्टअप इंडिया पहल उद्यमिता का समर्थन करने वाला एक व्यापक मंच बन चुकी है, जो स्टार्टअप मान्यता, सीड फंडिंग, वेंचर कैपिटल समर्थन, क्रेडिट गारंटी, कर‑प्रोत्साहन, खरीद नीतियों में सुधार और अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों तक पहुंच जैसी सुविधाएँ प्रदान करती है।

आज भारत में 2.35 लाख से अधिक DPIIT‑मानी गई स्टार्टअप हैं, जो लगभग 24 लाख प्रत्यक्ष नौकरियाँ दे रही हैं, जिनमें से आधे से अधिक नौकरियाँ टियर‑II और टियर‑III शहरों से उत्पन्न हुईं। इन स्टार्टअप में से लगभग आधे में कम से कम एक महिला निदेशक या भागीदार है, जो इस पारिस्थितिकी तंत्र की समावेशी प्रकृति को दर्शाता है।

उन्होंने यह भी बताया कि स्टार्टअप इंडिया सीड फंड स्कीम (SISFS), स्टार्टअप्स के लिए क्रेडिट गारंटी स्कीम (CGSS), स्टार्टअप्स के लिए फंड ऑफ फंड्स (FFS 1.0) और हाल ही में लॉन्च किया गया स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 जैसी प्रमुख पहलों से स्टार्टअप जीवन‑चक्र के विभिन्न चरणों में पूँजी तक पहुंच मजबूत हो रही है।

FFS 1.0 के तहत लगभग रु 27,600 करोड़ के निवेश 1,450+ स्टार्टअप्स में सुगम किए गए, जबकि SISFS के तहत 215+ इनक्यूबेटरों के माध्यम से रु 945 करोड़ से अधिक मंजूर किए गए। CGSS ने स्टार्टअप उधारकर्ताओं को रु 1,350 करोड़ से अधिक की गारंटी प्रदान करके समर्थन दिया है।

हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ नवाचार हब के रूप में उभर रहे हैं

संयुक्त सचिव ने कहा कि हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ मिलकर लगभग 15,500 DPIIT‑मानी गई स्टार्टअप का हिस्सा हैं, जो 1.7 लाख से अधिक प्रत्यक्ष नौकरियाँ पैदा कर रहे हैं।

क्षेत्र में वैकल्पिक निवेश कोष (AIF) के माध्यम से FFS के अंतर्गत 115+ स्टार्टअप्स में रु 2,270 करोड़ से अधिक का निवेश हुआ है, जबकि लगभग 260 स्टार्टअप्स ने स्टार्टअप इंडिया सीड फंड स्कीम का लाभ उठाया है। CGSS के जरिए क्रेडिट सहायता ने लगभग रु 180 करोड़ के गारंटीकृत ऋण सक्षम किए हैं, और तीनों क्षेत्रों में 320+ स्टार्टअप्स को आयकर छूट के लिए सर्टिफिकेट ऑफ एलिजिबिलिटी प्रदान किए गए हैं।

इन सफलताओं ने दिखाई कि क्षेत्र का नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र मजबूत हो रहा है और यह रोजगार सृजन तथा आर्थिक विकास में योगदान दे रहा है।

लॉजिस्टिक्स और नवाचार ने प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूती दी

जारंगल ने लॉजिस्टिक्स और नवाचार में हुई प्रगति पर भी प्रकाश डाला। पीएम गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान और नेशनल लॉजिस्टिक्स पॉलिसी जैसी पहलों के समर्थन से भारत की लॉजिस्टिक्स लागत GDP के लगभग 7.9 प्रतिशत तक घट गई है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला की दक्षता और लचीलापन बढ़ा है।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि 2014 से वैश्विक नवाचार सूचकांक (Global Innovation Index) में भारत का 38 पायदान उन्नयन और पेटेंट फाइलिंग में 236 प्रतिशत की वृद्धि देश को एक वैश्विक नवाचार और प्रौद्योगिकी हब के रूप में उभरने का संकेत देती है।

आगे का रास्ता

भविष्य के रोडमैप का उल्लेख करते हुए संयुक्त सचिव ने कहा कि स्टार्टअप इंडिया मान्यता का विस्तार, वित्तपोषण मैकेनिज्म को मजबूत करना, डीप‑टेक नवाचार को बढ़ावा देना और उभरते उद्यमी क्षेत्रों में पहुंच बढ़ाने पर आगे भी ध्यान केंद्रित करेगा। स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0, FFS 1.0, SISFS, CGSS और TEJAS जैसी पहलों से जिले‑स्तर पर पूँजी और नवाचार समर्थन और गहरा होगा।

उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार का प्राथमिक उद्देश्य इन परिवर्तनकारी नीतियों और उद्यमशीलता के अवसरों को जमीनी स्तर तक ले जाना है, ताकि नवाचार‑प्रेरित वृद्धि देश के हर कोने तक पहुंचे।

अपने दौरे के हिस्से के रूप में, श्री जारंगल क्षेत्रीय स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र के हितधारकों से भी बातचीत करेंगे, और DPIIT द्वारा भारत भर में नवाचार और उद्यमिता को मजबूत करने के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराएंगे।

नीतिगत गतिरोध से विकसित भारत तक: मोदी युग ने भारत को नए सिरे से परिभाषित किया

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

वर्ष 2014 के बाद से, भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है। इसकी अर्थव्यवस्था कहीं अधिक मजबूत हुई है। बुनियादी ढांचा निश्चित रूप से बेहतर हुआ है। महिलाएं बेहद सशक्त हुईं हैं। किसानों को बेहतर दाम मिल रहे हैं और गरीब अपेक्षाकृत अधिक सुरक्षित हुए हैं। इन तमाम बदलावों में एक ही बात साझा है: प्रधानमंत्री मोदी की दूरदृष्टि और उनका नेतृत्व।

भारत के लोगों ने उनके दूरदर्शी एवं संवेदनशील नेतृत्व का भरपूर समर्थन किया है और उन्हें देश का सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाला निर्वाचित प्रधानमंत्री बनाया है। बीते 10 जून को उन्होंने राष्ट्र की सेवा में 4,399 दिन पूरे किए और अपनी पहली चुनावी जीत के बाद जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए आगे निकल गए।

यह ऐतिहासिक उपलब्धि भारत की लोकतांत्रिक यात्रा में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। देश के लोगों ने ऐसे समय में 2014 में मोदी सरकार को भारी बहुमत से सत्ता सौंपी, जब अर्थव्यवस्था लड़खड़ा रही थी और यूपीए सरकार के बदनाम कार्यकाल के दौरान नीतिगत गतिरोध, भ्रष्टाचार, घोटालों एवं विवादों को लेकर जनता में निराशा लगातार बढ़ रही थी।

संवेदनशील नेतृत्व – 2014 से देश निरंतर बदलाव की यात्रा पर है। मोदी सरकार ने 81 करोड़ से अधिक लोगों के लिए मुफ्त अनाज की व्यवस्था की, 58 करोड़ जन धन बैंक खातों के जरिए वित्तीय समावेशन को संभव बनाया और 16 करोड़ घरों तक नल के पानी का कनेक्शन पहुंचाया। दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना, ‘आयुष्मान भारत’ के जरिए 12 करोड़ परिवारों को 5 लाख रुपए तक के मुफ्त इलाज की गारंटी मिल रही है। 

कई युवा भारतीयों के लिए यह कल्पना करना मुश्किल हो सकता है कि मोदीजी द्वारा – पहले गुजरात के मुख्यमंत्री और बाद में प्रधानमंत्री के रूप में – लाए गए बड़े बदलावों से पहले जीवन कितना चुनौतीपूर्ण था। उनके निर्णायक नेतृत्व और नेक एवं संवेदनशील दृष्टिकोण ने देश को ‘विकसित भारत 2047’ मिशन की दिशा में आगे बढ़ाया है। इस मिशन में भारत की विरासत पर गर्व और विकास का एक महत्वाकांक्षी एजेंडा शामिल है।

नारी शक्ति

प्रधानमंत्री के लिए महिलाएं केवल सहायता की लाभार्थी नहीं, बल्कि राष्ट्र-निर्माता हैं। सबसे पहले उनकी बुनियादी जरूरतों पर ध्यान दिया गया: स्वच्छ भारत मिशन के तहत 12 करोड़ से अधिक शौचालय बनाए गए। इससे उनकी सुरक्षा और सम्मान में वृद्धि हुई। वहीं, उज्ज्वला योजना के तहत 10 करोड़ से अधिक मुफ्त एलपीजी कनेक्शन दिए गए। इससे महिलाओं को धुएं से भरी रसोई के खतरों से मुक्ति मिली।

‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ की पहल ने बेटियों की शिक्षा एवं उनके कल्याण के महत्व को और ठोस बनाया है। ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के जरिए, प्रधानमंत्री ने महिलाओं के नेतृत्व में विकास को आगे बढ़ाने के लिए देश की विधायिकाओं में महिलाओं की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित की है।

किसानों का कल्याण

किसानों का कल्याण प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों का एक मुख्य आधार रहा है। किसानों के योगदान को मान्यता देते हुए, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) के जरिए उन्हें सीधे आय संबंधी सहायता प्रदान की जाती है। इस योजना के तहत बांटे गए कुल 4.28 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि से लगभग 10 करोड़ किसान परिवारों को लाभ हुआ है।

सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में भी काफी बढ़ोतरी की है, जो अब उत्पादन लागत का कम से कम 1.5 गुना है। साथ ही, किफायती दरों पर फसलों के लिए पोषक तत्व उपलब्ध कराकर किसानों को वैश्विक स्तर पर उर्वरकों की कीमतों में हुई भारी बढ़ोतरी से बचाया गया है।

युवाओं के लिए अवसर

युवा भारतीयों के लिए अवसर सृजित करने के उद्देश्य से, ‘मेक इन इंडिया’ और ‘स्टार्टअप इंडिया’ जैसी प्रमुख पहलें शुरू की गई हैं। ‘कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय’ के रूप में एक समर्पित मंत्रालय के गठन से जहां युवाओं को आधुनिक अर्थव्यवस्था के अनुकूल कौशल से लैस करने में मदद मिली है, वहीं भारत को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के क्षेत्र में उभरती हुई क्रांति का लाभ उठाने के लिए तैयार भी किया गया है।

‘स्टार्टअप इंडिया’ और नवाचार को दिए गए व्यापक समर्थन ने कई युवाओं को नौकरी खोजने वाला से हटकर नौकरी देने वाला बनने में मदद की है। इन पहलों ने उद्यमिता (एंटरप्रेन्योरशिप) की एक ऐसी नई लहर की नींव रखी है, जिसमें आर्थिक विकास और रोजगार सृजन के मामले  में अहम योगदान देने की क्षमता है।

अर्थव्यवस्था और जीवनयापन में सुगमता

वर्ष 2014 से पहले, भारत की गिनती दुनिया की “फ्रैजाइल फाइव” (कमजोर पांच) अर्थव्यवस्थाओं में से एक के रूप में होती थी। निवेशकों का भरोसा भी लगातार कम हो रहा था। साहसिक सुधारों, निवेशकों के लिए अनुकूल नीतियों, वित्तीय अनुशासन और अपेक्षाकृत कम महंगाई के सहारे, भारत अब दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था है और यह कारोबार व निवेश का एक आकर्षक स्थल बनता जा रहा है।

भारत ने विभिन्न विकसित देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते किए हैं। इससे हमारे युवाओं, किसानों, छोटे व्यवसायों, कारीगरों और श्रमिकों के लिए वैश्विक स्तर पर नए अवसर खुले हैं। और ऐसा भारत के हितों से समझौता किए बिना किया गया है। यह यूपीए सरकार द्वारा किए गए कुछ लापरवाही भरे समझौतों से बिल्कुल अलग है।

सरकार ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) और करों की कम दरों जैसे बड़े सुधारों के जरिए  कारोबार जगत और मध्यम वर्ग का भरोसा भी बढ़ाया है। इंटरनेट की पैठ और डिजिटल भुगतान प्रणाली के तेज विस्तार के साथ मिलकर, ‘डिजिटल इंडिया’ पहल ने अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव डालने के साथ-साथ नागरिकों के रोजमर्रा के जीवन को भी आसान बनाया है।

कई पुराने एवं मामूली अपराधों को अपराध की श्रेणी से हटाने तथा अनुपालन के अनावश्यक बोझ को कम करने से कारोबार जगत को और भी अधिक लाभ हुआ है। मध्यम वर्ग को भी काफ़ी राहत मिली है और 12.75 लाख रुपये तक की सालाना आय को आयकर से छूट दे दी गई है।

आधुनिक बुनियादी ढांचा

मोदी सरकार देश के बुनियादी ढांचे में तेजी से बदलाव ला रही है। सक्रिय हवाई अड्डों की संख्या दोगुनी से अधिक हो गई है। वर्ष 2014 में सक्रिय हवाई अड्डों की संख्या 74 थी और अब यह 160 से अधिक हो गई है।

बड़े पैमाने पर रेलवे के विद्युतीकरण, महत्वाकांक्षी बुलेट ट्रेन परियोजना और राष्ट्रीय राजमार्गों  व एक्सप्रेसवे के तेज विस्तार ने देश के कई हिस्सों के बुनियादी ढांचे को दुनिया के बेहतरीन बुनियादी ढांचों की बराबरी में ला खड़ा किया है।

प्रधानमंत्री की इस ऐतिहासिक उपलब्धि का वास्तविक महत्व कार्यकाल के दिनों की गिनती में नहीं, बल्कि किए गए व्यापक बदलावों में निहित है। उनके दूरदर्शी नेतृत्व ने गरीबों एवं  किसानों के कल्याण, मध्यम वर्ग की आकांक्षाओं और उभरते भारत की महत्वाकांक्षाओं को शासन के केन्द्र में रखा है।

अब जबकि देश प्रगति के पथ पर अग्रसर है, 2047 तक ‘विकसित भारत’ के निर्माण के नए संकल्प के साथ बदलाव की यह यात्रा निरंतर जारी रहेगी।