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PM Modi-Putin Meeting: रूस-यूक्रेन और ईरान युद्ध पर चर्चा, भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर भी मंथन

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। इस साल दोनों नेताओं की यह दूसरी मुलाकात है। इससे पहले 31 अगस्त 2026 को बिश्केक में 26वें एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं की मुलाकात हुई थी।

बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन ने भारत-रूस द्विपक्षीय संबंधों और सहयोग की प्रगति की व्यापक समीक्षा की। दोनों नेताओं ने राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, कौशल गतिशीलता और लोगों के बीच संपर्क सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा की।

रूस-यूक्रेन और ईरान युद्ध पर हुई चर्चा

बैठक में रूस-यूक्रेन युद्ध के साथ-साथ ईरान से जुड़े संघर्ष पर भी दोनों नेताओं ने विचार साझा किए। पश्चिम एशिया और काला सागर क्षेत्र में जारी संघर्षों के कारण समुद्री व्यापार और भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर भी चर्चा हुई।

हॉर्मुज और ब्लैक सी क्षेत्र में फंसे भारतीय जहाजों और भारतीय जहाजकर्मियों की स्थिति भी बातचीत का महत्वपूर्ण हिस्सा रही। प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि संघर्षों के समाधान का सही रास्ता बातचीत और कूटनीति है। उन्होंने कहा कि भारत शांति स्थापित करने के प्रयासों में सहयोग देने के लिए तैयार है।

INNOPROM India को लेकर भी चर्चा

दोनों नेताओं ने रूस की अंतरराष्ट्रीय औद्योगिक प्रदर्शनी ‘इनोप्रोम इंडिया’ (INNOPROM India) का स्वागत किया। यह प्रदर्शनी पहली बार भारत में 9 से 11 सितंबर 2026 तक आयोजित की गई। मोदी और पुतिन ने प्रदर्शनी का दौरा भी किया और इसमें भाग लेने वाले लोगों से बातचीत की।

दोनों नेताओं ने माना कि इस तरह के आयोजन भारत और रूस के बीच व्यापार एवं औद्योगिक संबंधों को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

BRICS में भारत-रूस सहयोग पर जोर

बैठक में बहुपक्षीय मंचों पर भारत-रूस सहयोग पर भी चर्चा हुई। खास तौर पर 2026 में भारत की अध्यक्षता में BRICS के तहत दोनों देशों के बीच सहयोग को लेकर विचारों का आदान-प्रदान किया गया।

दोनों नेताओं ने प्रमुख क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी अपने विचार साझा किए और भारत-रूस की ‘विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी’ को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

पीएम मोदी को पुतिन ने रूस आने का दिया निमंत्रण

राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 24वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए रूस आने का निमंत्रण दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने निमंत्रण स्वीकार कर लिया है।

दोनों देशों के बीच शिखर सम्मेलन की तारीख राजनयिक माध्यमों से आपसी सुविधा के अनुसार तय की जाएगी। नेताओं ने कहा कि भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत-रूस की रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूती दिखा रही है।

18वां ब्रिक्स सम्मेलन : भारत दौरे पर आएंगे राष्ट्रपति जिंनपिं, पीएम मोदी के साथ करेंगे द्विपक्षीय बैठक

नई दिल्ली। भारत और चीन के रिश्तों में लंबे समय से चले आ रहे तनाव के बीच एक बड़ी कूटनीतिक हलचल सामने आई है। वर्ष 2020 में गलवान घाटी में हुई खूनी झड़प के बाद पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच औपचारिक द्विपक्षीय बैठक होने की संभावना जताई जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शी जिनपिंग 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आ सकते हैं। ऐसे में संभावित मोदी-जिनपिंग मुलाकात पर भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं।

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

18वें ब्रिक्स सम्मेलन की भारत में मेजबानी

भारत 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। इसी सम्मेलन में शामिल होने के लिए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत पहुंचने की संभावना है। यदि उनका दौरा होता है तो गलवान हिंसा और उसके बाद पैदा हुए सीमा तनाव के बाद यह उनका पहला भारत दौरा होगा।

गलवान घाटी में जून 2020 में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के संबंधों में काफी गिरावट आई थी। सीमा पर तनाव के साथ-साथ राजनीतिक, आर्थिक और कूटनीतिक स्तर पर भी दोनों देशों के बीच दूरी बढ़ गई थी।

हालांकि, पिछले कुछ समय में सैन्य और राजनयिक स्तर पर हुई बातचीत के जरिए सीमा पर तनाव कम करने की कोशिशें लगातार जारी रही हैं। दोनों देशों के बीच कई दौर की वार्ता के बाद कुछ तनाव वाले क्षेत्रों से सैनिकों की वापसी भी हुई है।

सीमा विवाद के बीच बातचीत की कोशिश

गलवान के बाद भारत और चीन के बीच सैन्य कमांडरों तथा राजनयिकों के स्तर पर लगातार बातचीत होती रही है। हाल ही में कजाकिस्तान के बिश्केक में आयोजित एससीओ सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग एक ही मंच पर नजर आए थे और दोनों नेताओं ने हाथ भी मिलाया था। हालांकि, उस समय दोनों के बीच औपचारिक द्विपक्षीय बैठक नहीं हुई थी।

ऐसे में यदि नई दिल्ली में दोनों नेताओं के बीच आमने-सामने बातचीत होती है तो इसे भारत-चीन संबंधों में तनाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा सकता है। हालांकि, सीमा विवाद अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और कई मुद्दों पर दोनों देशों के बीच मतभेद बरकरार हैं।

डोभाल की चीन यात्रा से बनी बातचीत की जमीन

शी जिनपिंग के संभावित भारत दौरे से पहले भारत की ओर से भी उच्चस्तरीय कूटनीतिक प्रयास किए गए हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल चीन का दौरा कर चुके हैं। इसके अलावा भारत-चीन सीमा मामलों पर परामर्श एवं समन्वय के लिए बने वर्किंग मैकेनिज्म तथा दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों के बीच भी बातचीत हुई है।

इन उच्चस्तरीय संपर्कों को दोनों देशों के बीच संवाद आगे बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, लद्दाख में तनाव कम होने के बावजूद अरुणाचल प्रदेश को लेकर चीन और भारत के बीच विवाद बना हुआ है। चीन अरुणाचल प्रदेश को ‘जंगनान’ यानी दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा बताता है, जबकि भारत उसके इस दावे को पूरी तरह खारिज करता है।

ब्रिक्स सम्मेलन में गुटेरेस भी होंगे शामिल

18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के भी शामिल होने की संभावना है। 12 और 13 सितंबर को होने वाले सम्मेलन में गुटेरेस 13 सितंबर को मुख्य सत्र को संबोधित करेंगे। इस दौरान उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य वैश्विक नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकों की भी संभावना है।

गुटेरेस अपने संबोधन में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की जरूरत पर जोर दे सकते हैं। उनका कहना है कि मौजूदा वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियां 1945 के दौर जैसी नहीं हैं, इसलिए अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में भी मौजूदा वास्तविकताओं के अनुरूप बदलाव जरूरी है।

भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की मांग करता रहा है। ऐसे में ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान इस मुद्दे के साथ-साथ पश्चिम एशिया में जारी संकट, वैश्विक अर्थव्यवस्था और बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।

पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज, चंडीगढ़ में ‘नशा मुक्ति युवा फॉर विकसित भारत’ शपथ समारोह आयोजित
  • PEC चंडीगढ़ में युवाओं ने ली नशामुक्त भारत की शपथ, पीएम मोदी का संदेश भी सुना
  • ‘विकसित भारत 2047’ के लिए युवाओं का संकल्प, पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज में नशा मुक्ति अभियान
  • नशे के खिलाफ युवाओं का संकल्प, PEC चंडीगढ़ में शपथ समारोह और नुक्कड़ नाटक का आयोजन

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (PEC), चंडीगढ़ में रविवार को ‘नशा मुक्ति युवा फॉर विकसित भारत’ अभियान के तहत शपथ समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम कॉलेज सभागार में आयोजित हुआ, जिसमें निदेशक प्रो. राजेश कुमार भाटिया, छात्र कल्याण अधिष्ठाता डॉ. पुनीत चावला, एसोसिएट डीन (ADSA), संकाय सदस्य और बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम की शुरुआत नशा मुक्ति शपथ से हुई, जिसमें सभी प्रतिभागियों ने नशीले पदार्थों से दूर रहने और समाज में इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।

इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ऑनलाइन संबोधन प्रसारित किया गया, जिसमें उन्होंने नशामुक्त भारत के निर्माण और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में युवाओं की अहम भूमिका पर बल दिया। प्रधानमंत्री ने नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के खिलाफ युवा-नेतृत्व वाले जनआंदोलन की आवश्यकता पर जोर देते हुए काशी घोषणा-पत्र को मार्गदर्शक बताया तथा देशभर में जागरूकता फैलाने में माई भारत (MY Bharat) स्वयंसेवकों के प्रयासों की सराहना की।

कार्यक्रम के दौरान नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) के विद्यार्थियों और स्वयंसेवकों ने एक प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया। नाटक के माध्यम से नशे के सामाजिक दुष्प्रभावों को उजागर किया गया और युवाओं को स्वस्थ एवं नशामुक्त जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

समारोह का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इस अवसर पर सभी प्रतिभागियों ने ‘नशा मुक्ति युवा फॉर विकसित भारत’ अभियान को सफल बनाने और नशामुक्त समाज के निर्माण में सक्रिय योगदान देने का संकल्प दोहराया।

स्काईरूट के विक्रम-1 का हुआ ‘आगमन’, भारत के पहले प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट ने रचा इतिहास

आंध्र प्रदेश / सत्ता संदेश

भारत की पहली प्राइवेट स्पेस कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस ने इतिहास रचते हुए अपना पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 सफलतापूर्वक लॉन्च किया। 

  • स्काईरूट एयरोस्पेस ने भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च किया।
  • विक्रम-1 रॉकेट श्रीहरिकोटा से दोपहर 12.05 बजे सफलतापूर्वक प्रक्षेपित हुआ।
  • यह लॉन्च भारतीय निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

    भारत की पहली प्राइवेट स्पेस कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस ने शनिवार 18 जुलाई को इतिहास रच दिया। कंपनी ने भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से दोपहर 12.05 बजे सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया। पहले राकेट को सुबह 11.30 बजे लॉन्च किया जाना था, लेकिन आखिरी वक्त पर काउंटडाउन रोका दिया गया।

    कुछ देर के लिए रुका काउंटडाउन दोबारा शुरू होने के बाद रॉकेट को तय समय पर लॉन्च किया गया। इस मिशन का नाम “मिशन आगमन” रखा गया था। मौसम खराब और नेविगेशन की दिक्कत के कारण लॉन्च 35 मिनट देर से हुआ।

    ‘मिशन आगमन’ दिया नाम

    हैदराबाद की कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस द्वारा किए गए इस टेस्ट फ़्लाइट लॉन्च का नाम “मिशन आगमन” रखा और यह देश के कमर्शियल स्पेस सेक्टर के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।

    लगभग 16 मिनट की शुरुआती यात्रा के बाद, विक्रम-1 के घरेलू और विदेशी पेलोड को 450 km की ऊंचाई और 60 डिग्री के झुकाव पर लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में स्थापित करने की उम्मीद है।

    विक्रम-1 पूरी तरह से हल्के और मजबूत कार्बन-कंपोजिट स्ट्रक्चर से बना भारत का पहला ऑर्बिटल रॉकेट है। कार्बन फाइबर स्टील की तुलना में 5 गुना हल्का होता है, जिससे रॉकेट का वजन कम हुआ और ईंधन दक्षता बढ़ी।

    रॉकेट को ऊर्जा देने के लिए इसमें 3 सॉलिड-फ्यूल स्टेज और 1 लिक्विड ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल लगा है।

    • 3 सॉलिड स्टेज- रॉकेट को जमीन से उठाकर लो अर्थ ऑर्बिट तक धकेलते हैं।
    • लिक्विड मॉड्यूल- अंतरिक्ष में पहुंचकर सैटेलाइट को सही कक्षा में स्थापित करता है।

    कंपनी ने 2022 में विक्रम-S सबऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च किया था, जो 89.5 km की ऊंचाई तक गया था। अब विक्रम-1 450 km x 450 km की पृथ्वी की सर्कुलर निचली कक्षा तक जाएगा। यही ऑर्बिट है जहां इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन भी 450 किमी की ऊंचाई पर चक्कर लगाता है। ज्यादातर कॉमर्शियल और मौसम वाले सैटेलाइट इसी ऑर्बिट में होते हैं।

    ‘मिशन आगमन’ सिर्फ टेक्नोलॉजी का मिशन नहीं, कला का भी संगम है। रॉकेट अपने साथ कई पेलोड्स ले गया

    • ग्रह स्पेस का टेक्नोलॉजी पेलोड
    • कॉस्मोसर्व स्पेस का पेलोड
    • डीक्यूब्ड का स्पेस रिसर्च पेलोड
    • स्काईरूट का अपना इन-हाउस स्कोप पेलोड

    इसके साथ 18 कैरेट सोने से बनी कलाकृतियां भी भेजी गईं। कॉस्मोस डायमंड्स की “कॉस्मिक ब्लूम”। एक माइक्रो-आर्ट पीस- 18 कैरेट सोने का छोटा रॉकेट, जिस पर सर सी.वी. रमन, डॉ. विक्रम साराभाई और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की सूक्ष्म मूर्तियां उकेरी गई हैं।

    इससे पहले स्काईरूट ने 2022 में विक्रम-S सबऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च किया था जो 89.5 KM तक गया था।

    भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर फंड में ऑस्ट्रेलिया करेगा 500 मिलियन डॉलर का निवेश, पीएम मोदी की मौजूदगी में करेगा ऐलान

    इंटरनेशनल डेस्क / सत्ता संदेश

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस वक्त ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर हैं। गुरुवार को उन्होंने मेलबर्न में ‘इंडिया-ऑस्ट्रेलिया CEO फोरम’ और ‘इकोनॉमिक रोडमैप बिजनेस रिसेप्शन’ में शिरकत की। इस दौरान पीएम मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के साथ आर्थिक और रणनीतिक रिश्तों को और मजबूत करने की कोशिश की।

    पीएम ने कहा कि आज दुनिया अनिश्चितता, सप्लाई चेन में रुकावट और ऊर्जा संकट के दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में, भारत और ऑस्ट्रेलिया का स्वाभाविक और भरोसेमंद साझेदार के तौर पर आगे बढ़ना स्वाभाविक और जरूरी है।

    ऑस्ट्रेलिया के सबसे बड़े पेंशन फंड ऑस्ट्रेलियनसुपर ने भारत में बडे़ निवेश का एलान भी किया है। पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा, ‘भारत ऑस्ट्रेलियनसुपर के 500 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के निवेश का स्वागत करता है, जिसकी घोषणा आज सुबह मेलबर्न में उनके चीफ एग्जीक्यूटिव मिस्टर पॉल श्रोडर ने की। यह भारत की विकास और सुधार की राह में वैश्विक भरोसे की एक और मिसाल है। यह उन बड़े मौकों को भी दिखाता है जो हमारी तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था ग्लोबल निवेशकों को देती है।’

    बुधवार को पहुंचे पीएम मोदी

    उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों में, हमने दोनों देशों की क्षमताओं को मिलाकर भविष्य में सहयोग के लिए एक मजबूत ढांचा तैयार किया है। बता दें कि पीएम मोदी अपना इंडोनेशिया का दौरा पूरा करने के बाद बुधवार को ऑस्ट्रेलिया पहुंचे।

    पीएम मोदी के पहुंचने पर उनका जोरदार स्वागत किया गया। इस दौरान भारत और ऑस्ट्रेलिया की साझा विरासत का जश्न मनाते हुए सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए। पीएम मोदी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर इसका वीडियो शेयर करते हुए इसे शानदार बताया।

    पीएम ने की तारीफ

    पीएम मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के साथ पारंपरिक वाद्ययंत्र डिजेरिडू और तबला के साथ एक संगीत जुगलबंदी भी देखी। प्रस्तुति देखने के बाद पीएम मोदी ने कहा कि यह दोनों देशों के बीच गहरे सांस्कृतिक जुड़ाव को दर्शाता है। पीएम ने कलाकारों की तारीफ भी की।

    ऑस्ट्रेलिया के बाद पीएम मोदी न्यूजीलैंड के लिए रवाना होंगे। लेकिन उसके पहले भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रक्षा और सुरक्षा, व्यापार और निवेश, शिक्षा, मोबिलिटी, टेक्नोलॉजी, खेल पर अहम चर्चा होगी।

    पीएम मोदी के दौरे से पहले केंद्रीय मंत्री ने जालंधर कैंट रेलवे स्टेशन का किया निरिक्षण

    जालंधर / सत्ता संदेश

    रेल मंत्रालय तथा खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय में राज्य मंत्री रवनीत सिंह ने फिरोजपुर मंडल के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पुनर्विकसित जालंधर कैंट (जेआरसी) रेलवे स्टेशन का दौरा कर पीएम नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित आगमन की तैयारियों का जायजा लिया। प्रधानमंत्री 17 जुलाई 2026 को इस स्टेशन पुनर्विकास परियोजना का उद्घाटन करने वाले हैं।

    इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा रेल सूचना एवं प्रसारण और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव का हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पंजाब के लोगों को यह ऐतिहासिक सौगात प्रदान करने तथा क्षेत्र के एक महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन को विश्वस्तरीय यात्री सुविधा केंद्र में परिवर्तित करने के लिए वे उनके प्रति कृतज्ञ हैं।

    लगभग 110 वर्ष पुराने जालंधर कैंट रेलवे स्टेशन का पुनर्विकास लगभग ₹125 करोड़ की लागत से किया गया है। इस परियोजना में स्टेशन की ऐतिहासिक वास्तुकला को संरक्षित रखते हुए पंजाब की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाने वाले तत्वों को भी समाहित किया गया है।

    पुनर्विकसित स्टेशन में विशाल डबल-हाइट एयर कॉन्कोर्स, मजबूत स्टील प्लेटफॉर्म रूफिंग, स्लिप-प्रतिरोधी फर्श, ऊर्जा-कुशल एलईडी प्रकाश व्यवस्था, शहर के दोनों ओर से सुविधाजनक प्रवेश तथा 6 मीटर और 9 मीटर चौड़ाई वाले दो नए फुट ओवर ब्रिज (एफओबी) जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं।

    अन्य प्रमुख सुविधाओं में 40 मीटर चौड़ी ट्रफ रूफ, जो 200 मीटर लंबे प्लेटफॉर्म (8,720 वर्गमीटर) को कवर करती है, 36 मीटर चौड़ा 1,770 वर्गमीटर का एयर कॉन्कोर्स, 300 वर्गमीटर क्षेत्रफल वाला नया द्वितीय प्रवेश स्टेशन भवन तथा 4,855 वर्गमीटर का पार्किंग क्षेत्र शामिल है।

    वर्तमान में जालंधर कैंट रेलवे स्टेशन पर प्रतिदिन औसतन 7,500 यात्रियों का आवागमन होता है। स्टेशन पर 66 अप तथा 66 डाउन ट्रेनों का ठहराव है, जिनमें दो जोड़ी वंदे भारत एक्सप्रेस, एक हमसफर एक्सप्रेस, एक गरीब रथ एक्सप्रेस तथा अनेक मेल/एक्सप्रेस और यात्री ट्रेनें शामिल हैं। यह स्टेशन पूर्णतः यात्री सेवाओं के लिए समर्पित है तथा यहां किसी प्रकार का माल परिवहन नहीं किया जाता।

    निरीक्षण के दौरान श्री रवनीत सिंह ने यात्री सुविधाओं एवं चल रही तैयारियों का विस्तृत अवलोकन किया तथा पुनर्विकास कार्यों की गुणवत्ता पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उन्नत सुविधाओं से युक्त यह स्टेशन यात्रियों की सुविधा में उल्लेखनीय वृद्धि करेगा तथा भारतीय रेलवे की आधुनिक, सुरक्षित, सुगम एवं विश्वस्तरीय अवसंरचना विकसित करने की प्रतिबद्धता का प्रतीक बनेगा। साथ ही, यह पंजाब की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को भी प्रभावी रूप से प्रदर्शित करेगा।

    रक्षा से कृषि और मेडिकल से ब्रह्मोस मिसाइल तक, भारत-इंडोनेशिया में इन समझौतों पर लगी मुहर

    नई दिल्ली / सत्ता संदेश

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशिया दौरे पर राष्ट्रपति सुबियांतो के साथ द्विपक्षीय वार्ता की. इस दौरान रक्षा, कृषि और खनिज सहित 14 अहम समझौतों पर हस्ताक्षर हुए. इसमें इंडोनेशिया को ब्रह्मोस मिसाइल की आपूर्ति भी शामिल है. पीएम मोदी ने कहा कि यह भारत और इंडोनेशिया के बीच साझेदारी का सुनहरा अध्याय है. दोनों देश हर क्षेत्र में कदम बढ़ा रहे है

    पीएम मोदी, प्रबोवो सुबियांतो के बीच द्विपक्षीय वार्ता

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इंडोनेशिया दौरे का आज दूसरा दिन है. मंगलवार को उन्होंने राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ द्विपक्षीय वार्ता की. इस दौरान दोनों देशों के बीच कई 14 अहम समझौतों पर हस्ताक्षर हुए. इंडोनेशिया के राष्ट्रपति भवन इस्ताना मर्देका में पीएम मोदी का भव्य स्वागत किया गया. गार्ड ऑफ ऑनर के साथ उन्हें (पीएम मोदी) इंडोनेशिया का सर्वोच्च सम्मान से भी नवाजा गया.

    प्रधानमंत्री मोदी ने इसके लिए इंडोनेशिया और राष्ट्रपति सुबियांतो का आभार जताया. पीएम मोदी ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया के बीच साझेदारी का सुनहरा अध्याय है. दोनों देश हर क्षेत्र में कदम बढ़ा रहे हैं. ये सम्मान कोरोड़ों भारतीयों का सम्मान है. दोनों देशों के बीच रक्षा, सुरक्षा, कृषि, इंडस्ट्री जैसे कई समझौतों पर मुहर लगी. इंडोनेशिया की सेना को ब्रह्मोस मिसाइलों की आपूर्ति करने संबंधी समझौते पर दोनों ने हस्ताक्षर किए. कृषि क्षेत्र में भी दोनों देशों में डील हुई. खनिज-इस्पात आपूर्ति में समझौते हुए, चिकित्सा उत्पाद में डील हुई.

    हम हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम बढ़ा रहे हैं- PM मोदी

    पीएम मोदी ने कहा कि 2018 में बनी हमारी व्यापक रणनीतिक साझेदारी आज एक नई उड़ान ले रही है. हम विकास, सुरक्षा, तकनीक, संस्कृति और शिक्षा…हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम बढ़ा रहे हैं. हमारे देशों के बीच बढ़ता विश्वास हमारी रक्षा, सुरक्षा और समुद्री सहयोग को मजबूत कर रहा है. आज हमने रक्षा आदान-प्रदान, आपदा प्रबंधन और औद्योगिक सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनाई.

    प्रधानमंत्री ने कहा कि आज हुए समझौते से भारत की किफायती दवाइयां इंडोनेशिया को और सहजता से उपलब्ध होंगी. हम इंडोनेशिया के डॉक्टरों और स्वास्थ्य सेवा कर्मी की क्षमता निर्माण में भी योगदान देंगे. भारत में विकसित किए गए गेहूं के बीज की आपूर्ति से, इंडोनेशिया की खाद्य सुरक्षा और मजबूत होगी. हम एक दूसरे के साथ सतत खेती और कृषि प्रौद्योगिकी में सर्वोत्तम प्रथाएं भी साझा करेंगे.

    ‘इंडोनेशिया में खुलेगा IIM बेंगलुरु का कैंपस’

    पीएम मोदी ने कहा कि 21वीं सदी टेक्नोलॉजी पर आधारित है. हमारे युवाओं में तकनीक के प्रति स्वाभाविक रुझान है. हमें अपने युवाओं के बीच एआई, टेलिकॉम, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में तकनीकी सहयोग बढ़ाने के लिए आज एक अहम समझौता किया है. हम दोनों देशों के बीच स्टार्टअप सहयोग को और गहरा करने पर भी सहमत हुए हैं. हम इंडोनेशिया में IIM बेंगलुरु का कैंपस खोलने जा रहे हैं.

    भारत-इंडोनेशिया के बीच 14 अहम समझौते

    1. अंतरिक्ष सहयोग का विस्तार
    2. मेडिकल प्रोडक्ट्स रेगुलेशन में सहयोग
    3. खनिज एवं स्टील सप्लाई चेन
    4. कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में सहयोग
    5. समुद्री सुरक्षा सहयोग का विस्तार
    6. आपदा प्रबंधन सहयोग
    7. दूरसंचार तकनीक और सेवाएं
    8. अनुसंधान, प्रौद्योगिकी और नवाचार
    9. स्वास्थ्य कार्यबल सहयोग
    10. चुनाव आयोगों के बीच सहयोग
    11. ब्रह्मोस मिसाइल सहयोग
    12. एयर-टू-एयर मिसाइल सहयोग
    13. SAIL और Krakatau Steel का संयुक्त उद्यम
    14. रेयर अर्थ मैग्नेट्स का विकास

    PM मोदी के इंडोनेशिया दौरे का आज दूसरा दिन

    इसके अलावा भारत और इंडोनेशिया ने समुद्री संरक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग के लिए एक रूपरेखा को अंतिम रूप दिया. दोनों देशों ने स्टील सप्लाई चेन के लिए मिनरल्स और टेक्नोलॉजी पर समझौते पर हस्ताक्षर किए. बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी तीन देशों की अपनी यात्रा के पहले चरण में कल यानी सोमवार को इंडोनेशिया पहुंचे थे. एयरपोर्ट पर उनका जोरदार स्वागत किया गया.

    Pm Modi Indonesia President Prabowo Subianto..

    2018 के बाद पहली PM मोदी की पहली द्विपक्षीय यात्रा

    साल 2018 में भारत और इंडोनेशिया ने अपने संबंधों को कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप का दर्जा दिया था. इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी की यह पहली द्विपक्षीय यात्रा है. ​इस यात्रा से भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ को और मजबूती मिलेगी. दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी बढ़ेगी. बता दें कि दोनों देश समंदर में सुरक्षा, साझा सैन्य अभ्यास और डिफेंस इंडस्ट्री को आगे बढ़ाने पर लगातार काम कर रहे हैं.

    ‘मुखर्जी का बलिदान राष्ट्र की एकता के लिए अमर प्रेरणा’ : पीएम मोदी

    नई दिल्ली / सत्ता संदेश

    6 जुलाई का दिन राष्ट्रवाद और निस्वार्थ सेवा के आदर्शों में विश्वास रखने वाले करोड़ों देशवासियों के लिए बहुत ही विशेष है। आज हम डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जन्म-जयंती मना रहे हैं। उनका जीवन साहस और मां भारती के प्रति अटूट समर्पण का प्रेरणादायक उदाहरण है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के व्यक्तित्व में विद्वता, जनसेवा और उच्च नैतिक मूल्यों का अद्भुत संगम था। आधुनिक भारत के कुछ ही नेताओं में इतने सारे गुण एक साथ देखने को मिलते हैं। 

    श्यामा प्रसाद जी का जन्म ऐसे परिवार में हुआ था, जहां उन्हें सुख-सुविधाओं से भरपूर जीवन आसानी से मिल सकता था। उनके पिता सर आशुतोष मुखर्जी की गिनती अपने समय के महान शिक्षाविदों में होती थी। लेकिन तमाम सुविधाओं के बावजूद श्यामा प्रसाद जी ने त्याग और राष्ट्रसेवा का मार्ग चुना। उनका दृढ़ विश्वास था कि चाहे अंग्रेजी शासन का विरोध हो, सांप्रदायिकता से लड़ाई हो या मानवीय संकटों का सामना, वे अपने समय की इन चुनौतियों के सामने मूकदर्शक बनकर नहीं रह सकते। इस सफर में उन्हें कई गहरे व्यक्तिगत दुख भी झेलने पड़े। पहले उन्होंने अपने छोटे बच्चे को खोया और बाद में पत्नी का भी निधन हो गया। लेकिन इन दुखद परिस्थितियों में भी उन्होंने अपने हौसले को कमजोर नहीं पड़ने दिया। उनका संकल्प और सशक्त हुआ, राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण और गहरा होता गया। 

    डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य भारत की एकता और अखंडता की रक्षा करना था। देश के विभाजन के समय उन्होंने पश्चिम बंगाल को भारत का अभिन्न अंग बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कुछ वर्षों बाद इसी उद्देश्य से उन्होंने जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर भी संघर्ष किया। जेल और नजरबंदी भी उन्हें रास्ते से डिगा नहीं सकी। जब नजरबंदी के दौरान उनका निधन हुआ, तब वे उन अनगिनत लोगों से बहुत दूर थे, जिनके लिए वे जीवनभर संघर्ष करते रहे। इतिहास में कुछ ऐसे पल आते हैं, जब किसी व्यक्ति का सर्वोच्च बलिदान राजनीति से ऊपर उठकर देश की स्मृति का हिस्सा बन जाता है। डॉ. मुखर्जी का बलिदान भी ऐसा ही था। आचार्य विनोबा भावे ने कहा था कि डॉ. मुखर्जी ने उस उद्देश्य के लिए अपना बलिदान दिया, जिस पर उन्हें पूरा विश्वास था। दशकों बाद, साल 2019 में आर्टिकल 370 और 35(A) को हटाया जाना उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि थी। 

    डॉ. मुखर्जी ने हमेशा राष्ट्रहित और भारतीय मूल्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। इसके लिए उन्होंने मजबूत संस्थानों का निर्माण किया और ऐसी व्यवस्थाएं बनाईं, जो उस समय की सोच से काफी आगे थीं। वे कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति बने। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में ऐसे बदलाव किए, जो राष्ट्रहित और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप थे। शिक्षाविदों के एक सम्मेलन में डॉ. मुखर्जी ने कहा था, ‘’शिक्षण संस्थानों को केवल बाबू या कम वेतन वाले कर्मचारी तैयार करने की फैक्ट्री समझना गलत है। हमें विद्यार्थियों को ऐसे तैयार करना होगा ताकि वे नेतृत्व की भूमिका निभा सकें। हमारी स्वशासी संस्थाओं जैसे म्युनिसिपल कॉरपोरेशन्स, प्रांतीय और केंद्रीय विधायिकाओं में बड़ी जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार हो सकें। इसके साथ ही वे वित्त, व्यापार और उद्योग जैसे क्षेत्रों में भी अपनी प्रतिभा दिखा सकें।’’

    कलकत्ता विश्वविद्यालय में अपने नेतृत्व में उन्होंने कई महत्वपूर्ण कार्य किए। इनमें लाइब्रेरी की सुविधाओं में सुधार, विज्ञान में रिसर्च को बढ़ावा देना, ऐतिहासिक वस्तुओं के अध्ययन को प्रोत्साहित करना और कृषि से जुड़े पाठ्यक्रम शुरू करना शामिल था। उन्होंने खेलकूद, टीचर्स ट्रेनिंग और स्टूडेंट वेलफेयर जैसे क्षेत्रों पर भी विशेष ध्यान दिया। विद्यार्थियों में अपनी यूनिवर्सिटी के प्रति गर्व की भावना विकसित हो, इसके लिए उन्होंने 24 जनवरी को विश्वविद्यालय का स्थापना दिवस मनाने की परंपरा शुरू की। उन्होंने गुरुदेव टैगोर से विश्वविद्यालय के लिए एक गीत लिखने का अनुरोध भी किया था।

    उनके जीवन के बाद के वर्षों में इस भावना का एक और उदाहरण तब देखने को मिला, जब उन्होंने भारतीय जनसंघ बनाने का निर्णय लिया। उस समय देश में हर तरफ कांग्रेस पार्टी का ही बोलबाला था। ऐसे में उन्होंने महसूस किया कि देश को एक ऐसे नए विकल्प की बहुत जरूरत है, जो भारत की प्रगति की बात भी करे और हमारी सांस्कृतिक जड़ों से भी जुड़ा रहे। शायद इसी को ध्यान में रखते हुए पार्टी का चुनाव चिह्न ‘दीपक’ यानि मिट्टी का दीया रखा गया। एक अकेला दीया देखने में भले ही छोटा लगे, लेकिन उसमें अपने आस-पास के गहरे से गहरे अंधकार को मिटाने की अद्भुत शक्ति होती है। जनसंघ ने अपने सक्रिय काल में और उसके बाद भी बिल्कुल यही किया। 

    डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का भारत के पहले उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री के रूप में कार्यकाल बेहद अहम रहा। उन्हें एक ऐसे राजनेता के रूप में याद किया जाता है, जिनका विजन बहुत विराट था। वे उद्योग को नए-नए आजाद हुए भारत के लोगों में सम्मान, अवसर और आत्मविश्वास का संचार करने का सशक्त माध्यम मानते थे। वे वेल्थ और वैल्यू क्रिएशन के महत्व को भली-भांति समझते थे। उन्होंने दामोदर वैली कॉरपोरेशन, सिंदरी उर्वरक संयंत्र और मजबूत औद्योगिक नीति जैसी ऐतिहासिक पहल की। इसके माध्यम से आधुनिक औद्योगिक भारत की नींव रखी। इसके साथ ही उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि भारत के पारंपरिक सामर्थ्य की कभी उपेक्षा न हो। वे हथकरघा, कुटीर उद्योग, कारीगरों और कपड़ा उद्योग से जुड़े श्रमिकों के हितों के भी प्रबल समर्थक थे।  

    यहां मैं अपना एक निजी अनुभव भी साझा करना चाहता हूं। आत्मनिर्भर भारत के स्पष्ट विजन के साथ जिस सिंदरी संयंत्र की स्थापना के लिए डॉ. मुखर्जी ने अथक प्रयास किए थे, उसकी कई दशकों तक सत्ता में रहने वाले लोगों ने घोर उपेक्षा की। मुझे इस बात का संतोष है कि हमारी सरकार को उसके पुनरुद्धार का सौभाग्य मिला। उस कार्यक्रम में उपस्थित होना मेरे सार्वजनिक जीवन के सबसे विशेष और अविस्मरणीय क्षणों में से एक बन गया।

    भारत की प्राचीन परंपरा सदियों से संवाद और विचार-विमर्श का सम्मान करती आई है। डॉ. मुखर्जी इस लोकतांत्रिक भावना के सशक्त प्रतीक थे। उन्होंने पंडित नेहरू के मंत्रिमंडल में शामिल होना इसलिए स्वीकार किया, क्योंकि वे मानते थे कि देश की आजादी के शुरुआती वर्षों में राष्ट्र निर्माण का दायित्व राजनीतिक मतभेदों से कहीं ऊपर है। उन्होंने पूरी निष्ठा और रचनात्मक दृष्टिकोण के साथ अपनी जिम्मेदारियों को  निभाया। लेकिन जब उन्हें लगा कि राष्ट्रीय महत्व के कुछ प्रश्नों पर देशहित में अलग मार्ग अपनाना आवश्यक है, तो उन्होंने पूरी गरिमा के साथ अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद उन्होंने अपना पूरा जीवन उस राजनीतिक लक्ष्य को हासिल करने के लिए समर्पित कर दिया, जिसे वे राष्ट्र के लिए आवश्यक मानते थे।  

    75 वर्ष पहले पंडित नेहरू पहला संविधान संशोधन लेकर आए। इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर सीधा प्रहार माना गया। तब डॉ. मुखर्जी इसके सबसे मुखर आलोचक रहे थे। वे भली-भांति समझ चुके थे कि कांग्रेस किस हद तक जा सकती है। समय के साथ उनकी यह आशंका सही साबित हुई। जो पार्टी 75 वर्ष पहले पहला संविधान संशोधन लेकर आई थी, उसी ने 1975 में देश पर आपातकाल थोपा। इतना ही नहीं, 50 वर्ष पहले 42वां संविधान संशोधन अधिनियम लाकर एक बार फिर लोकतांत्रिक मूल्यों की बुनियाद पर कुठाराघात किया।

    डॉ. मुखर्जी अपनी मानवीय संवेदनाओं और सेवाभाव के लिए भी विशेष रूप से जाने जाते हैं। वर्ष 1943 में जब बंगाल भीषण अकाल की त्रासदी से जूझ रहा था, तब उन्होंने पीड़ितों की सेवा में स्वयं को पूरी तरह समर्पित कर दिया था। उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि लोगों को भोजन मिल सके, जिसके लिए कई कैंटीन और रिलीफ सेंटर शुरू किए गए। एक ओर वे लोगों की पीड़ा से बहुत व्यथित थे, वहीं दूसरी ओर ब्रिटिश हुकूमत की असंवेदनशीलता से अत्यंत आक्रोशित भी थे। उन्होंने अपनी पीड़ा को व्यक्त करने के लिए पंचाशेर मन्वंतर नाम की एक किताब भी लिखी। 1942 में जब मेदिनीपुर में भीषण चक्रवात आया, तब उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों का नेतृत्व किया। 

    कोलकाता के एक कॉलेज में युवाओं को संबोधित करते हुए डॉ. मुखर्जी ने उनसे आग्रह किया था, ‘’आप जो भी कार्य करें, उसे पूरी गंभीरता, लगन और ईमानदारी से करें। किसी भी काम को कभी अधूरा न छोड़ें। तब तक स्वयं को संतुष्ट न मानें, जब तक आपने उसमें अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान न दे दिया हो।’’ आज हमारा देश विकसित भारत के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम प्रतिदिन उस भारत के निर्माण की दिशा में निरंतर प्रयास करें, जिसकी उन्होंने परिकल्पना की थी। एक ऐसा भारत जो सशक्त हो, एकजुट हो, आत्मविश्वास से भरपूर और संवेदनशील हो। देश के युवाओं पर मुझे पूरा विश्वास है कि वे इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए बढ़-चढ़कर भागीदारी करेंगे और इस संकल्प को साकार करने के लिए पूरी ऊर्जा के साथ जुट जाएंगे। 

    पीएम मोदी ने पचपदरा में देश की पहली ग्रीनफील्ड रिफाइनरी का उद्घाटन किया

    राजस्थान / सत्ता संदेश

    राजस्थान के औद्योगिक इतिहास में आज का दिन एक नए युग की शुरुआत के रूप में हुई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज बालोतरा जिले के पचपदरा में एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड को राष्ट्र को समर्पित किया. करीब 79,459 करोड़ रुपए की लागत से तैयार यह परियोजना केवल राजस्थान की पहली रिफाइनरी नहीं है, बल्कि देश की पहली ग्रीनफील्ड रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स भी है. प्रधानमंत्री ने रिफाइनरी की महिला कर्मचारियों से की बात उनके साथ फोटो भी खिंचवाया. प्रधानमंत्री ने रिफाइनरी कंट्रोल रूम में जाकर पूरी तकनीक की जानकारी भी कर्मचारियों से ली।

    राजस्थान रिफाइनरी का लोकार्पण करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि राजस्थान की इस धरती से भारत ने आत्मनिर्भर होने की दिशा में बहुत बड़ा कदम उठाया है. ये रिफाइनरी यहां हजारों लोगों के रोजगार का माध्यम बनेगी. आज का दिन साक्षी है कि बीजेपी सरकारें परियोजनाओं को सिर्फ केवल शिलान्यास करके नहीं छोड़ती है. हम उन परियोजनाओं को पूरा करने के लिए दिन-रात एक कर देते हैं. दो महीने पहले यहां जो हादसा हुआ, उसके बाद इतनी तेजी से काम पूरा कर लेना परिश्रम की परिकाष्ठा का उदाहरण है. नया भारत अपने संकल्प से न पीछे हटता है और न ही अपनी रफ्तार कम करता है।

    तेल संकट पर भारत के प्रयास पड़े भारीः उन्होंने तेल का संकट का जिक्र करते हुए कहा कि पश्चिमी एशिया में युद्ध की वजह से पूरी दुनिया हाहाकार मचा है. हर देश त्रस्त है, इस युद्ध ने 21वीं सदी के सबसे बड़े ऊर्जा संकट को जन्म दिया. बड़े-बड़े देश आज ईंधन की किल्लत से जूझ रहे हैं, 21वीं सदी के सबसे ऊर्जा संकट पर भारत के प्रयास भारी पड़े हैं. भारत ने हर स्तर पर सही फैसले लिए. संकट का समय रहते सटीक आकलन किया, प्रभावी रणनीति बनाई. भारत के संसाधनों का सही प्रयोग किया, तब जाकर भारत संकट से ऊबर पाया है. जब सार्वजनिक तौर पर कुछ ताकतें अफवाह और आशंका फैलाने में व्यस्त थी तब देश में दिन-रात काम हो रहा था, किस तरह स्थिति को संभाला जा रहा था, वो प्रयास, धैर्य, नीतिगत, कूटनीतिक स्तर पर उठाए गए एक-एक संवेदनशील कदम अभूतपूर्व है।

    जनता पर भार नहीं पड़ने दियाः पीएम ने कहा कि एलपीजी के घरेलू उपभोक्ताओं पर ज्यादा बोझ नहीं पड़ने दिया, जो हालात थे उसमें घरेलू गैस की कीमत दो हजार तक जा सकती थी. रसोई गैस के विषय में हम सभी जानते हैं कि हमारी जरूरतों की 60 फीसदी एलपीजी दूसरे देशों से आयात होती है. इसमें से 90 प्रतिशत एलपीजी गल्फ देशों से आ रही थी, होर्मुज होते हुए. अचानत उत्पन्न हुई संकट ने उस सप्लाई को बंद कर दिया, लेकिन राजस्थान की इस धरती ने हमें चुनौतियों को भी चैलेंज देना सिखाया है. हमने संकट शुरू होते ही रिफाइनरी के सामर्थ्य पर काम किया. तीन महीनों के भीतर एलपीजी के उत्पादन की बढ़ोतरी हुई, पहले 35 हजार मेट्रिक टन उत्पादन होता था, वो बढ़कर 54 हजार मेट्रिक टन हो गया. रसोई गैस का पूरा लोड एलपीजी पर न पड़े, इसका भी ध्यान रखा, पीएनजी गैस कनेक्शन का अभियान चलाया गया. बहुत कम समय में 11 लाख कनेक्शन पीएनजी से जोड़ दिया गया. घरेलू उपभोक्ताओं पर बहुत बोझ भी नहीं पड़ने दिया. हमारे यहां अभी भी घरेलू सिलेंडर 950 रुपए से कम में दिया जा रहा है।

    तेल संकट पर भारत के प्रयास पड़े भारीः उन्होंने तेल का संकट का जिक्र करते हुए कहा कि पश्चिमी एशिया में युद्ध की वजह से पूरी दुनिया हाहाकार मचा है. हर देश त्रस्त है, इस युद्ध ने 21वीं सदी के सबसे बड़े ऊर्जा संकट को जन्म दिया. बड़े-बड़े देश आज ईंधन की किल्लत से जूझ रहे हैं, 21वीं सदी के सबसे ऊर्जा संकट पर भारत के प्रयास भारी पड़े हैं. भारत ने हर स्तर पर सही फैसले लिए. संकट का समय रहते सटीक आकलन किया, प्रभावी रणनीति बनाई. भारत के संसाधनों का सही प्रयोग किया, तब जाकर भारत संकट से ऊबर पाया है. जब सार्वजनिक तौर पर कुछ ताकतें अफवाह और आशंका फैलाने में व्यस्त थी तब देश में दिन-रात काम हो रहा था, किस तरह स्थिति को संभाला जा रहा था, वो प्रयास, धैर्य, नीतिगत, कूटनीतिक स्तर पर उठाए गए एक-एक संवेदनशील कदम अभूतपूर्व है।

    जनता पर भार नहीं पड़ने दियाः पीएम ने कहा कि एलपीजी के घरेलू उपभोक्ताओं पर ज्यादा बोझ नहीं पड़ने दिया, जो हालात थे उसमें घरेलू गैस की कीमत दो हजार तक जा सकती थी. रसोई गैस के विषय में हम सभी जानते हैं कि हमारी जरूरतों की 60 फीसदी एलपीजी दूसरे देशों से आयात होती है. इसमें से 90 प्रतिशत एलपीजी गल्फ देशों से आ रही थी, होर्मुज होते हुए. अचानत उत्पन्न हुई संकट ने उस सप्लाई को बंद कर दिया, लेकिन राजस्थान की इस धरती ने हमें चुनौतियों को भी चैलेंज देना सिखाया है. हमने संकट शुरू होते ही रिफाइनरी के सामर्थ्य पर काम किया. तीन महीनों के भीतर एलपीजी के उत्पादन की बढ़ोतरी हुई, पहले 35 हजार मेट्रिक टन उत्पादन होता था, वो बढ़कर 54 हजार मेट्रिक टन हो गया. रसोई गैस का पूरा लोड एलपीजी पर न पड़े, इसका भी ध्यान रखा, पीएनजी गैस कनेक्शन का अभियान चलाया गया. बहुत कम समय में 11 लाख कनेक्शन पीएनजी से जोड़ दिया गया. घरेलू उपभोक्ताओं पर बहुत बोझ भी नहीं पड़ने दिया. हमारे यहां अभी भी घरेलू सिलेंडर 950 रुपए से कम में दिया जा रहा है।

    कांग्रेस पर साधा निशानाः पीएम ने कहा कि कांग्रेस की सरकारों ने कभी राजस्थान के जल संकट को दूर करने के लिए काम नहीं किया, बीजेपी हमेशा राष्ट्र प्रथम की भावना पर चलती है. हमने जब गुजरात में पानी संकट पर काम किया तो उस समय बिना किसी वाद-विवाद गुजरात से नर्मदा का पानी राजस्थान के साथ साझा किया. आज राजस्थान और हरियाणा में बीजेपी सरकार है तो आपसी सहमति से समाधान निकाले गए. दोनों राज्य मिलकर शेखावटी को पानी पिलाएंगे. इसका लाभ सीकर, झुंझुनू, चूरू समेत आसपास के क्षेत्र को लाभ मिलने वाला है. इस पर 34 हजार करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।

    जिसका शिलान्यास करते हैं उसका लोकार्पण भी करते हैं। पीएम मोदी ने कहा कि 2015 में हमने रिफाइनरी के लिए एमओयू साइन किया था, लेकिन 2018 से 2023 तक कांग्रेस सरकार होने से असहयोग होने से काम ठप हो गया। राजस्थान में डबल इंजन की सरकार आई तो काम तेजी से बढ़ा, आज इसका लोकार्पण कर रहे हैं। ‘मेरी कार्यशैली है कि जिसका शिलान्यास करते हैं, उसका लोकार्पण भी करते हैं। इस दौरान यूरिया का जिक्र करते हुए कहा कि यूक्रेन युद्ध से यूरिया की कीमत बढ़ने के बावजूद किसानों को 300 रुपए में खाद देते रहे।

    6 जुलाई से 3 देशों के दौरे पर जाएंगे PM मोदी, राष्ट्रपति प्रबोवो ने दिया इंडोनेशिया आने का न्यौता

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6 से 11 जुलाई तक इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की छह दिवसीय यात्रा पर रहेंगे। दौरे के दौरान रणनीतिक साझेदारी, व्यापार, रक्षा, साइबर सुरक्षा, नई तकनीक, सांस्कृतिक सहयोग और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की एक्ट ईस्ट नीति को नई मजबूती देने पर फोकस रहेगा।

    नई दिल्ली / सत्ता संदेश

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6 से 11 जुलाई तक इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की छह दिवसीय यात्रा पर रहेंगे। इस दौरे का उद्देश्य हिंद महासागर के पूर्वी क्षेत्र में भारत के रणनीतिक और कूटनीतिक संबंधों को और मजबूत करना है।

    साथ ही सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, व्यापार, साइबर सुरक्षा, नई तकनीकों और रक्षा सहयोग जैसे क्षेत्रों में भारत की एक्ट ईस्ट नीति को नई धार देना भी है। विदेश मंत्रालय के सचिव (पूर्व) रुद्रेंद्र टंडन ने शुक्रवार को बताया कि प्रधानमंत्री मोदी  6 से 8 जुलाई तक इंडोनेशिया के दौरे पर रहेंगे।

    वह राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के निमंत्रण पर वहां जा रहे हैं। वर्ष 2018 में दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी होने के बाद यह उनकी पहली द्विपक्षीय यात्रा होगी। जकार्ता में प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति प्रबोवो के साथ द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा करेंगे और भारतीय समुदाय को संबोधित भी करेंगे। इसके अलावा वह योग्याकार्ता स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर प्रम्बानन मंदिर परिसर का दौरा करेंगे। भारत और इंडोनेशिया इस ऐतिहासिक मंदिर के संरक्षण के लिए संयुक्त योजना पर भी काम कर रहे हैं। 

    ऑस्ट्रेलिया शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे

    8 जुलाई को प्रधानमंत्री मोदी ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न पहुंचेंगे। यहां वह प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज और गवर्नर जनरल सैम मोस्टिन से मुलाकात करेंगे। प्रधानमंत्री तीसरे भारत-ऑस्ट्रेलिया वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। बैठक में साइबर सुरक्षा, आपूर्ति शृंखला को मजबूत बनाने और उभरती तकनीकों पर चर्चा होगी। प्रधानमंत्री भारत-ऑस्ट्रेलिया सीईओ फोरम को भी संबोधित करेंगे और भारतीय समुदाय के कार्यक्रम में शामिल होंगे।

    40 वर्षों में भारतीय पीएम की पहली न्यूजीलैंड यात्रा होगी

    10 जुलाई को प्रधानमंत्री मोदी ऑकलैंड पहुंचेंगे। पिछले करीब 40 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली न्यूजीलैंड यात्रा होगी। ऑकलैंड में प्रधानमंत्री मोदी अपने समकक्ष क्रिस्टोफर लक्सन के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। बैठक में व्यापार, वाणिज्य और रक्षा सहयोग की प्रगति की समीक्षा की जाएगी। इसके अलावा वह प्रमुख उद्योगपतियों, खेल जगत की हस्तियों और भारतीय समुदाय से भी मुलाकात करेंगे।