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PM Modi Congratulates Lula: ब्राजील के राष्ट्रपति लूला को पीएम मोदी ने दी बधाई, भारत-ब्राजील संबंधों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता

पीएम नरेंद्र मोदी ने ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा को चुनावी जीत पर बधाई दी। दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी और ग्लोबल साउथ के सहयोग पर जोर दिया गया।

अंतराष्ट्रीय समाचार / सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा को दोबारा चुनाव जीतने पर बधाई दी है। पीएम मोदी ने भारत और ब्राजील के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने तथा विभिन्न क्षेत्रों में आपसी सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा कि दोनों देश ग्लोबल साउथ की साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने और अधिक समावेशी, समान तथा टिकाऊ दुनिया बनाने के लिए मिलकर काम करेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने संदेश में राष्ट्रपति लूला को अपना मित्र बताते हुए उनकी चुनावी जीत पर शुभकामनाएं दीं। उन्होंने भारत-ब्राजील रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने तथा दोनों देशों के बीच सहयोग के नए अवसर तलाशने की इच्छा व्यक्त की।

भारत-ब्राजील रणनीतिक साझेदारी पर जोर

पीएम मोदी के बधाई संदेश में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और वैश्विक मुद्दों पर दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। भारत और ब्राजील विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर विकासशील देशों की प्राथमिकताओं, आर्थिक सहयोग और टिकाऊ विकास जैसे मुद्दों पर सहयोग करते रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में ग्लोबल साउथ की साझा जरूरतों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई। ग्लोबल साउथ से आशय मुख्य रूप से उन विकासशील देशों से है, जो आर्थिक विकास, अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधित्व और वैश्विक चुनौतियों से जुड़े कई समान मुद्दों पर सहयोग करते हैं।

जीत के बाद राष्ट्रपति लूला ने जताया जनता का आभार

चुनावी जीत के बाद राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा ने ब्राजील की जनता को समर्थन देने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने लोकतंत्र की रक्षा के लिए प्रयास करने वाले युवाओं और मतदान के माध्यम से देश के भविष्य में भागीदारी निभाने वाले नागरिकों के योगदान को सराहा।

लूला ने कहा कि यह जीत उन लोगों की है, जो विश्वास बनाए रखते हैं, संघर्ष करते हैं और अधिक न्यायपूर्ण, स्वतंत्र तथा लोकतांत्रिक ब्राजील के निर्माण के लिए प्रयास करना नहीं छोड़ते।

भारत और ब्राजील के संबंधों के लिए क्या मायने?

भारत और ब्राजील के बीच व्यापार, कृषि, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और बहुपक्षीय सहयोग जैसे क्षेत्रों में साझेदारी की संभावनाएं हैं। दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संवाद और रणनीतिक सहयोग से इन क्षेत्रों में संबंधों को आगे बढ़ाने के अवसर मिल सकते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी के संदेश से स्पष्ट है कि भारत ब्राजील के साथ अपने संबंधों को आगे बढ़ाने और वैश्विक मंचों पर साझा प्राथमिकताओं पर सहयोग जारी रखने का इच्छुक है।

Himachal Pradesh Medical Colleges: हिमाचल में 320 नई PG मेडिकल सीटों को मंजूरी, ₹415 करोड़ देगा केंद्र

हिमाचल प्रदेश के छह सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 320 नई PG मेडिकल सीटों को केंद्र की मंजूरी मिली है। इसके लिए करीब ₹415 करोड़ का अनुदान दिया जाएगा।

हिमाचल प्रदेश / सत्ता संदेश

हिमाचल प्रदेश में मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने राज्य के छह सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 320 नई स्नातकोत्तर (PG) मेडिकल सीटें बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने की घोषणा की है। इस योजना के लिए केंद्र सरकार करीब 415 करोड़ रुपये का अनुदान देगी।

जेपी नड्डा के अनुसार, इस फैसले से हिमाचल प्रदेश के युवाओं को अपने राज्य में ही मेडिकल की उच्च शिक्षा हासिल करने के अधिक अवसर मिलेंगे। इसके साथ ही विभिन्न चिकित्सा विशेषज्ञताओं में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ने से प्रदेश के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलने में मदद मिल सकती है।

हिमाचल के 6 मेडिकल कॉलेजों में सीटों का ब्योरा

केंद्र सरकार की मंजूरी के तहत राज्य के छह सरकारी मेडिकल कॉलेजों में नई पीजी सीटें बढ़ाई जाएंगी। कॉलेजवार विवरण इस प्रकार है:

  • शिमला: 91 नई पीजी सीटें
  • टांडा: 57 नई पीजी सीटें
  • हमीरपुर: 57 नई पीजी सीटें
  • मंडी: 55 नई पीजी सीटें
  • नाहन: 32 नई पीजी सीटें
  • चंबा: 28 नई पीजी सीटें

इन सीटों के शुरू होने से सर्जरी, हड्डी रोग, स्त्री एवं प्रसूति रोग, बाल रोग और कैंसर सहित विभिन्न क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

केंद्र सरकार ने दी ₹415 करोड़ की मंजूरी

जेपी नड्डा ने बताया कि हिमाचल प्रदेश सरकार से इस संबंध में प्रस्ताव 23 जून 2026 को प्राप्त हुआ था। इसके बाद 6 अक्टूबर को एम्स बिलासपुर के दीक्षांत समारोह के दौरान मुख्यमंत्री के साथ इस विषय पर चर्चा हुई। अब केंद्र सरकार ने प्रस्तावित सभी 320 पीजी सीटों को मंजूरी दे दी है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने राज्य सरकार से आग्रह किया कि सीटों को समय पर शुरू करने के लिए आवश्यक प्रक्रियाएं और तैयारियां जल्द पूरी की जाएं, ताकि मेडिकल की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों को इसका लाभ मिल सके।

देशभर में बढ़ाई जाएंगी 10,000 मेडिकल सीटें

जेपी नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों के दौरान देश में चिकित्सा शिक्षा के विस्तार पर जोर दिया गया है। इसी क्रम में केंद्र सरकार ने अगले पांच वर्षों में देशभर में 10,000 नई स्नातक (UG) और स्नातकोत्तर (PG) मेडिकल सीटें बढ़ाने के लिए 15,000 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी है। हिमाचल प्रदेश की 320 नई पीजी सीटों को इसी पहल का हिस्सा बताया गया है।

रेल और स्वास्थ्य परियोजनाओं में तेजी लाने की अपील

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने हिमाचल प्रदेश सरकार से चंडीगढ़-बद्दी और भानुपल्ली-बिलासपुर रेल परियोजनाओं से जुड़े लंबित मामलों को जल्द सुलझाने की अपील भी की। उन्होंने जमीन और राज्य सरकार की हिस्सेदारी से संबंधित मुद्दों के समाधान पर जोर दिया।

इसके अलावा, केंद्र सरकार के सहयोग से बनाए जा रहे क्रिटिकल केयर ब्लॉक और जन स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं की परियोजनाओं को समय पर पूरा करने की आवश्यकता बताई।

जेपी नड्डा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में मेडिकल शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार सहयोग जारी रखेगी। नई पीजी सीटों की मंजूरी से राज्य में चिकित्सा शिक्षा के अवसर बढ़ने और विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता में सुधार की उम्मीद है।

नरेंद्र मोदी अजेय क्यों हैं? पूर्व वित्त सचिव हसमुख आध्या ने बताईं PM मोदी की मैनेजमेंट, मानवीय और आध्यात्मिक खूबियां

हसमुख आध्या भारत के पूर्व वित्त एवं राजस्व सचिव

पूर्व वित्त एवं राजस्व सचिव हसमुख आध्या ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली, नेतृत्व क्षमता और व्यक्तित्व को लेकर विस्तार से अपने विचार साझा किए हैं। उन्होंने बताया कि गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर देश के प्रधानमंत्री तक मोदी के साथ काम करने के दौरान उन्हें उनकी कई प्रशासनिक और व्यक्तिगत खूबियों को करीब से देखने का अवसर मिला।

हसमुख आध्या के मुताबिक, नरेंद्र मोदी की लंबे समय तक राजनीतिक सफलता के पीछे उनकी दूरदर्शिता, मैनेजमेंट क्षमता, टीम के साथ संवाद, लोगों से जुड़ाव और आध्यात्मिक दृष्टिकोण जैसी कई खूबियां हैं। आध्या ने गुजरात के मुख्यमंत्री कार्यालय में एडिशनल प्रिंसिपल सेक्रेटरी और बाद में प्रिंसिपल सेक्रेटरी के तौर पर काम किया था।

उन्होंने कहा कि मोदी किसी भी योजना को केवल तत्काल परिणाम के नजरिए से नहीं देखते, बल्कि भविष्य को ध्यान में रखकर लंबी अवधि की रणनीति तैयार करने पर जोर देते हैं। आध्या के अनुसार, बजट तैयार करने के दौरान मोदी वित्त मंत्रालय के अलग-अलग विभागों की प्रस्तुतियों को घंटों ध्यान से सुनते और इसके बाद अधिकारियों के साथ विस्तार से चर्चा करते थे।

आध्या ने यह भी बताया कि मोदी विभिन्न मंत्रालयों के कामकाज की नियमित समीक्षा करते थे। उनके अनुसार, इन बैठकों में प्रधानमंत्री नए सुझाव देने के साथ अधिकारियों का उत्साह बढ़ाने पर भी ध्यान देते थे।

‘चिंतन शिविर’ से लेकर टीम मैनेजमेंट तक

हसमुख आध्या ने गुजरात में शुरू किए गए ‘चिंतन शिविर’ का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, वरिष्ठ अधिकारियों के लिए आयोजित होने वाला यह वार्षिक कार्यक्रम प्रशासनिक कामकाज की समीक्षा और भविष्य की रणनीति तैयार करने का माध्यम बना। बाद में केंद्र स्तर पर चीफ सेक्रेटरीज कॉन्फ्रेंस जैसी प्रक्रिया भी देखने को मिली।

आध्या ने मोदी की एक अन्य खूबी का जिक्र करते हुए कहा कि वे अधिकारियों और सहयोगियों के लिए आसानी से उपलब्ध रहते हैं। उनके मुताबिक, इससे उन्हें सरकार और संगठन के भीतर चल रही गतिविधियों की जानकारी सीधे मिलती रहती थी।

‘वाइब्रेंट गुजरात’ का उदाहरण देते हुए आध्या ने कहा कि मोदी किसी नई पहल को केवल एक कार्यक्रम तक सीमित रखने के बजाय उसके अनुभव को व्यवस्थित तरीके से दर्ज करने और भविष्य के लिए स्थायी व्यवस्था बनाने पर जोर देते थे।

लोगों से व्यक्तिगत जुड़ाव का भी किया जिक्र

हसमुख आध्या ने प्रधानमंत्री मोदी के मानवीय पक्ष का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, मोदी गरीब और पिछड़े वर्गों की समस्याओं को लेकर संवेदनशील रहे हैं। उन्होंने वर्ष 2003 के गुजरात के पहले चिंतन शिविर की विदाई स्पीच को याद करते हुए कहा कि उस दौरान पिछड़े लोगों की समस्याओं पर मोदी की भावनात्मक चर्चा ने वहां मौजूद कई अधिकारियों और मंत्रियों को प्रभावित किया था।

आध्या के मुताबिक, मोदी अपनी टीम के लोगों से व्यक्तिगत स्तर पर भी जुड़ाव रखते हैं। किसी अधिकारी, राजनीतिक कार्यकर्ता या उनके परिवार के सदस्य के बीमार होने की जानकारी मिलने पर फोन करके हालचाल पूछना और विशेष अवसरों पर शुभकामनाएं देना उनकी कार्यशैली का हिस्सा रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि मोदी लोगों के नाम और उनसे हुई मुलाकातों को लंबे समय तक याद रखते हैं। आध्या के अनुसार, यह क्षमता लोगों के साथ उनके व्यक्तिगत संबंधों को मजबूत करती है।

भगवद्गीता और कर्मयोग का भी किया उल्लेख

हसमुख आध्या ने नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व में आध्यात्मिक पक्ष को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि मोदी के काम करने के तरीके और सफलता-असफलता को स्वीकार करने के दृष्टिकोण में उन्हें भगवद्गीता के ‘कर्मयोग’ की झलक दिखाई देती है।

आध्या के अनुसार, मोदी जिस काम को हाथ में लेते हैं, उसमें पूरी मेहनत और गुणवत्ता पर ध्यान देते हैं। सफलता मिलने के बाद भी उनके मुताबिक मोदी इसे लेकर लापरवाह या अहंकारी नहीं होते, जबकि अपेक्षित परिणाम न मिलने की स्थिति में भी मुश्किलों को नए अवसरों में बदलने की कोशिश करते हैं।

उन्होंने ‘आर्जव’ का उल्लेख करते हुए इसे विचार, वाणी और कर्म में एकरूपता तथा सादगी से जोड़ा। आध्या ने कहा कि मोदी की धार्मिक और आध्यात्मिक आस्था उनके व्यक्तित्व का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

बचपन की घटना का भी किया जिक्र

हसमुख आध्या ने मोदी के साथ हुई एक बातचीत से जुड़ी बचपन की घटना भी साझा की। उनके अनुसार, मोदी ने बताया था कि बचपन में चोट लगने के बाद जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें दर्द हो रहा है, तो उन्होंने जवाब दिया था कि उन्हें दर्द नहीं हो रहा, बल्कि उनके शरीर में दर्द हो रहा है।

आध्या ने इस घटना को वेदांत के अद्वैत विचार से जोड़ते हुए कहा कि इसमें शरीर और आत्मा के बीच अंतर की अवधारणा दिखाई देती है।

अपने लेख के अंत में हसमुख आध्या ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मैनेजमेंट क्षमता, मानवीय जुड़ाव और आध्यात्मिक दृष्टिकोण को उनके नेतृत्व व्यक्तित्व की प्रमुख विशेषताओं के रूप में प्रस्तुत किया है। उनका यह लेख मोदी के साथ काम करने के उनके व्यक्तिगत अनुभवों और अवलोकनों पर आधारित है।

असम में बाढ़ का कहर : PM ने सांसदों के साथ की समीक्षा बैठक विधायकों को 1 महीने का वेतन देने का किया ऐलान

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि उन्होंने असम के विभिन्न हिस्सों में व्याप्त बाढ़ की स्थिति पर राज्य के सांसदों के साथ बैठक की। इसके साथ ही आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार प्रभावित लोगों की सहायता के लिए असम सरकार के साथ मिलकर काम कर रही है।

पीएम मोदी ने क्या बताया? 

एक्स पर एक पोस्ट में प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने लोगों की सुरक्षा और कुशलक्षेम के लिए प्रार्थना की। उन्होंने एक्स पर लिखा,’असम के सांसदों से मुलाकात की और राज्य के विभिन्न हिस्सों में बाढ़ की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की। केंद्र सरकार प्रभावित लोगों की सहायता के लिए असम सरकार के साथ मिलकर काम कर रही है। मैं सभी की सुरक्षा और कुशल मंगल की कामना करता हूं। 

असम में क्या है हालात?

इस बीच, असम के शिवसागर जिले में बाढ़ की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है क्योंकि नौजान गांव में बाढ़ का पानी घरों में घुस गया और सड़कें जलमग्न हो गईं, जिससे सैकड़ों परिवार आश्रय, भोजन और सुरक्षित पेयजल तक पहुंच के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जबकि राहत अभियान तेज कर दिए गए हैं।


वहीं, असम के विधायकों ने एक बड़ा फैसला लिया है। रायजोर दल को छोड़कर सभी विधायकों ने मंगलवार को राज्य के बाढ़ पीड़ितों की राहत और पुनर्वास के लिए अपने एक महीने का वेतन दान करने की घोषणा की।

अध्यक्ष रणजीत कुमार दास ने क्या एलान किया?

अध्यक्ष रणजीत कुमार दास ने कहा कि वह और उपाध्यक्ष हब्बे टेरोन बाढ़ राहत के लिए एक महीने का वेतन दान करेंगे। उन्होंने घोषणा की, ‘हमारे अलावा, विधानसभा सचिवालय के सभी कर्मचारी पीड़ितों की राहत और पुनर्वास के लिए एक दिन का वेतन दान करेंगे।’

संसदीय कार्य मंत्री ने क्या कहा? 

इस पहल का स्वागत करते हुए संसदीय कार्य मंत्री पीयूष हजारिका ने कहा कि भाजपा के सभी विधायक भी एक महीने का वेतन दान करेंगे। राज्य में तृणमूल कांग्रेस के इकलौते विधायक शेरमन अली अहमद ने भी ऐसा ही किया और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए अपने एक महीने का वेतन दान करने की घोषणा की।

वायुसेना की ओर से राहत अभियान जारी

भारतीय वायुसेना की ओर से असम और नागालैंड के बाढ़ प्रभावित इलाकों में मानवीय सहायता एवं आपदा राहत अभियान लगातार जारी है। खराब मौसम और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद वायुसेना राहत एवं बचाव कार्यों में पूरी तत्परता से जुटी हुई है। मंगलवार को भारतीय वायुसेना ने बताया कि पिछले 10 दिनों के दौरान उसके हेलीकॉप्टरों ने बाढ़ में फंसे 458 लोगों को सुरक्षित बचाकर निकाला है।

वायुसेना के मुताबिक अभी तक प्रभावित क्षेत्रों में हवाई मार्ग से 9 टन से अधिक आवश्यक राहत सामग्री भी पहुंचाई गई है। वायुसेना के अधिकारी व जवान रहात अभियान के दौरान लगातार दुर्गम और जलमग्न क्षेत्रों में उड़ान भर रहे है।

बता दे कि कुल 631 गांव अभी भी जलमग्न हैं। वहीं, राहत कार्य 184 शिविरों और वितरण केंद्रों के माध्यम से जारी हैं, जहां लगभग 28,700 लोगों को आश्रय दिया गया है। 

माय भारत स्वयंसेवकों ने विकसित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के प्रतिभागियों के साथ PM मोदी के वर्चुअल संवाद में लिया भाग

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को विकसित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के प्रतिभागियों के साथ वर्चुअल संवाद किया। इस अवसर पर उन्होंने भारत के सीमावर्ती गांवों के समग्र विकास हेतु किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए एक सशक्त, आत्मनिर्भर एवं समावेशी भारत के निर्माण के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।

इस वर्चुअल संवाद में देश के 245 जिलों से 5,000 से अधिक माय भारत स्वयंसेवकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। चंडीगढ़ में लगभग 30 प्रतिभागियों, जिनमें माय भारत स्वयंसेवक भी शामिल थे, ने उपायुक्त कार्यालय, चंडीगढ़ के समिति कक्ष से इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण देखा।

कार्यक्रम में अमनदीप सिंह भट्टी, पीसीएस, अतिरिक्त उपायुक्त, चंडीगढ़; शिवधन शर्मा, यूटी निदेशक, माय भारत; विनय कुमार, जिला युवा अधिकारी, माय भारत, चंडीगढ़; तथा मनदीप, जिला सूचना अधिकारी, चंडीगढ़ उपस्थित रहे। सभी गणमान्य अतिथियों ने युवाओं को राष्ट्र निर्माण एवं सामुदायिक विकास में सक्रिय भागीदारी निभाने के लिए प्रेरित किया।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने विकसित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के अंतर्गत सीमावर्ती गांवों के समग्र विकास के लिए संचालित विभिन्न परिवर्तनकारी पहलों पर प्रकाश डाला। उन्होंने विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल देते हुए उन्हें विकास, नवाचार तथा जनसेवा से जुड़े अभियानों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।

यह संवाद प्रतिभागी स्वयंसेवकों के लिए अत्यंत प्रेरणादायक रहा तथा इससे माय भारत की युवा नेतृत्व, नागरिक सहभागिता एवं राष्ट्र निर्माण में सार्थक योगदान सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता और अधिक सुदृढ़ हुई।

माननीय प्रधानमंत्री के “नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत” के आह्वान के तहत माय भारत पोर्टल पर एक वर्चुअल शपथ (Virtual Pledge) भी प्रारंभ की गई है, जिसका उद्देश्य युवाओं एवं नागरिकों को नशा मुक्त भारत के राष्ट्रीय अभियान से जोड़ना है। सभी नागरिकों से अनुरोध है कि वे इस शपथ को लेकर नशा मुक्त भारत के जन आंदोलन का हिस्सा बनें तथा समाज में जागरूकता फैलाने में अपना योगदान दें। शपथ लेने के उपरांत प्रतिभागी ई-प्रमाण पत्र (e-Certificate) भी डाउनलोड कर सकते हैं।

शपथ लेने के लिए माय भारत पोर्टल पर जाएँ: https://mybharat.gov.in/events/nasha_mukt_yuva

पेपर लीक विधेयक को मिली मंजूरी…दोषियों को होगी 10 साल की सजा

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

मोदी कैबिनेट ने पेपर लीक संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी है। जंतर मंतर पर छात्रों के आंदोलन के बीच शुक्रवार को हुई बैठक में बिल को मंजूरी मिली। विधेयक में पेपर लीक करने वालों के खिलाफ 10 साल की सजा और 10 करोड़ के जुर्माने का प्रावधान है।

संशोधन बिल में पेपर लीक माफियाओ के खिलाफ कड़े प्रावधान हैं। फास्ट ट्रैक कोर्ट को तीन महीने में फैसला सुनाना होगा। विधेयक में दोषी को 10 साल की सजा और 10 करोड़ के जुर्माने का प्रावधान है। जानकारी के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह इस विधेयक को सोमवार को संसद में पेश करेंगे।

मौजूदा कानून में क्या है?

पेपर लीक और नक़ल के खिलाफ मौजूदा कानून सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम 2024 है। सरकार इसे और सख्त बना रही है। अभी व्यक्तिगत मामलों में तीन से पांच साल की सजा और दस लाख रुपए तक का जुर्माना है। वहीं सर्विस प्रोवाइडर पर एक करोड़ तक का जुर्माना है। संगठित अपराध में पांच से दस साल की सजा और न्यूनतम एक करोड़ का जुर्माना है।

मौजूदा कानून में एक और प्रावधान जोड़ा जाएगा, जिसके तहत ऐसे मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट अनिवार्य होंगे। इसमें विभिन्न स्तरों पर दंड का प्रावधान किया जाएगा। मौजूदा अधिनियम में आवश्यक संशोधन/अपडेट किए जाएंगे. डीओपीटी (कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग) मंत्रालय इस विधेयक का नोडल मंत्रालय होगा।

पीएम मोदी ने दिया था कड़ा संदेश

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को घोषणा की थी कि अगले हफ्ते संसद में एक विधेयक पेश किया जाएगा, जिसमें प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ सख्त प्रावधान होंगे। प्रधानमंत्री ने एक वीडियो संदेश में कहा कि विधेयक के मसौदे पर शुक्रवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की होने वाली बैठक में चर्चा की जाएगी, जिसमें प्रस्तावित कानून को अंतिम रूप दिया जाएगा।

पीएम मोदी ने कहा, सोमवार को जब संसद के मॉनसून सत्र का दूसरा हफ्ता शुरू होगा, तो प्रश्नपत्र लीक के मामलों में सख्त कार्रवाई के प्रावधानों वाला एक विधेयक लाया जाएगा और हम उसे जल्द से जल्द पारित कराने की कोशिश करेंगे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें ज्ञात है कि प्रश्नपत्र लीक कोई छोटी समस्या नहीं है और लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए ऐसी घटनाएं बेहद कष्टदायक होती हैं। उन्होंने कहा कि इसलिए, जब से नीट प्रश्नपत्र लीक के आरोप सामने आए हैं (करीब ढाई महीने पहले)तब से कई कड़े कदम उठाए गए हैं।

विपक्ष ने क्या कहा?

कांग्रेस ने प्रश्नपत्र लीक में शामिल लोगों को दंडित करने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने की प्रधानमंत्री मोदी की घोषणा को बहुत कम और बहुत देर से उठाया गया कदम करार दिया था. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि प्रश्नपत्र लीक रोकने में मोदी सरकार की विफलता, ऐसी घटनाएं होने पर उन्हें स्वीकार नहीं करने और उनकी निष्पक्ष जांच कराने में असमर्थता के लिए विद्यार्थी वास्तविक जवाबदेही चाहते हैं।

रमेश ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा, मांगें स्पष्ट हैं-पहली, शिक्षा मंत्री (धर्मेंद्र) प्रधान को बर्खास्त किया जाए। दूसरी, विद्यार्थियों से माफी मांगी जाए। तीसरी, उन पर हमला करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

दिल्ली में जारी है प्रदर्शन

बता दें कि दिल्ली के जंतर मंतर पर छात्रों का आंदोलन जारी है। सोनम वांगचुक ने भले ही अनशन तोड़ दिया है, लेकिन CJP के नेतृत्व में छात्रों का विरोध प्रदर्शन अब भी हो रहा है. अभिजीत दिपके ने कहा है कि जब तक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं हो जाता, तब तक हमारा धरना जारी रहेगा।

फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी पेपर लीक की सुनवाई, PM मोदी का फैसला

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी छात्र आंदोलन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़ा फैसला लिया है। पेपर लीक मामले की सुनवाई के लिए उन्होंने फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन के निर्देश दिए हैं। अब इस मामले की सुनवाई इसी कोर्ट में होगी. प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी।

पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि देश के युवाओं का हित और उनका भविष्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। पेपर लीक के सभी मामलों में दोषियों को कड़ी सजा मिलेगी। केस के तुरंत निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित होगी।

उन्होंने कहा कि संबंधित विभाग को निर्देश जारी कर दिया गया है। हमारे लिए युवाओं से बढ़कर कुछ नहीं है। विद्यार्थियों के हित सुरक्षित करने के लिए ये एक बड़ा कदम है। युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

बता दें कि दो दिन पहले यानी 21 जुलाई को एनडीए संसदीय दल की बैठक ‘मंगल मिलन’ हुई थी। इस बैठक में पीएम मोदी नीट पेपर लीक मामले का जिक्र किया। बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मीडिया को संबोधित कर बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने इस पर क्या कहा। रिजिजू ने बताया कि पीएम मोदी ने कहा कि छात्रों का भविष्य खराब नहीं होने देंगे. पेपर लीक के दोषियों को कड़ी सजा मिलेगी. उन्होंने इसे घोर पाप बताया। पीएम ने कहा कि मामला सामने आते ही त्वरित कार्रवाई की गई. 13 लोगों को अरेस्ट किया गया। परीक्षा रद्द करने के बाद फिर से परीक्षा कराई गई। पीएम मोदी ने ये भी कहा कि आगे से कोई पेपर लीक न हो, इस बात का ध्यान रखा जाए।

पेपल लीक के मुद्दे पर संसद भी विरोध प्रदर्शन

बता दें कि पेपर लीक के मुद्दे पर विपक्ष लगातार पीएम मोदी पर निशाना साध रहे थे कि वो इस पर चुप्पी साधे हुए हैं, कुछ बोल नहीं रहे हैं, कोई बड़ा एक्शन नहीं ले रहे हैं। पीएम मोदी ने इस मामले में अपनी चुप्पी 21 जुलाई को ही तोड़ दी थी। उधर, पेपर लीक के मुद्दे पर दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले करीब एक महीने से कॉकरोच जनता पार्टी का विरोध प्रदर्शन हो रहा है। कांग्रेस सहित कई विपक्ष दल इसका समर्थन कर रहे हैं. विपक्षी दल अलग से भी इसको लेकर प्रोटेस्ट कर रहे हैं। संसद के मानसून सत्र में पिछले तीन दिनों से इस मुद्दे को उठाया जा रहा है। विपक्ष इस पर लगातार चर्चा की मांग कर रहा है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहा है।

पीएम मोदी ने हरियाणा के जींद में 14,700 करोड़ की विकास परियोजनाओं का किया उद्घाटन
  • प्रधानमंत्री ने कहा, जींद में आकर प्रसन्नता हो रही है, स्वच्छ परिवहन, कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य सेवा और सांस्कृतिक विरासत सुदृढ़ करने वाली परियोजनाओं के शुभारंभ के अवसर पर कहा, ये सभी परियोजनाएं ‘जीवन की सुगमता’ बढ़ाकर हरियाणा के विकास को गति देंगी
  • श्री मोदी ने कहा आज जींद और हरियाणा ने इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करा लिया है, आज यहीं से देश को अपनी पहली हाइड्रोजन ट्रेन का उपहार मिला है
  • प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की हाइड्रोजन ट्रेन पूर्णतया प्रदूषण मुक्त होने के साथ ही, ‘मेक इन इंडिया’ की एक उल्लेखनीय सफलता का प्रमाण है
  • रेल हो या सड़क मार्ग, संपर्क साधन में ऐसी प्रगति सुविधा बढ़ाने के साथ ही विकास की गति कई गुना बढ़ाती है
  • प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने एक नई राष्ट्रीय खेल नीति, ‘खेलो भारत’ नीति तैयार की है; ‘खेलो इंडिया’ अभियान से लेकर ‘टॉप्स’ योजना तक, आज खिलाड़ियों को अभूतपूर्व सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं

हरियाणा / सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को हरियाणा के जींद में लगभग 14,700 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी और इन्हें राष्ट्र को समर्पित किया। उन्होंने आयोजन स्थल पर पहुंचकर अपार प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इस क्षेत्र की समृद्ध ऐतिहासिक, पराक्रम से भरे और आध्यात्मिक विरासत का उल्लेख किया, जिसे शक्ति पीठ माता जयंती का विशेष आशीर्वाद मिला हुआ है। श्री मोदी ने दशकों पहले संगठन के कार्यों से शहर की अपनी प्रारंभिक यात्राओं का स्मरण करते हुए, मुर्रा भैंस के दूध, देसी बूरा और घेवर जैसे स्थानीय व्यंजनों से जुड़े अविस्मरणीय स्नेहिल घटनाओं को याद किया। श्री मोदी ने कहा, यह साधारण भूमि नहीं, बल्कि इतिहास, वीरता, धर्म और अपार गौरव की समृद्ध भूमि है।

प्रधानमंत्री ने इस क्षेत्र के विकास में उल्लेखनीय बदलाव के साथ ही यहां की चिरस्थायी स्थानीय विशेषताओं का तुलनात्मक वर्णन करते हुए, इस शहर को सुशासन मॉडल का एक उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने इस पर जोर दिया कि पिछले कुछ वर्षों में हरियाणा प्रगति के नए पथ पर दृढ़ता से अग्रसर हुआ है। श्री मोदी ने कहा कि आज के कार्यक्रम सरकार के इस मिशन को नई ऊर्जा प्रदान कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने देश की पहली हाइड्रोजन-चालित ट्रेन के शुभारंभ की घोषणा करते हुए कहा कि इस क्षेत्र का नाम हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में दर्ज हो हो जाएगा। मुंबई और ठाणे के बीच ऐतिहासिक पहली ट्रेन यात्रा से तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि भविष्य की पीढ़ियों की उन्नत हरित परिवहन की चर्चा में भी यह कॉरिडोर अमर हो जाएगा। श्री मोदी ने कहा कि भारतीय रेल के अत्याधुनिकीकरण के महत्वपूर्ण कदम के लिए मैं आप सभी को और पूरे देश को बधाई देता हूं।

प्रधानमंत्री ने अवसंरचनात्मक विकास के व्यापक विकास का उल्लेख करते हुए, रेल, राजमार्गों और सांस्कृतिक धरोहरों से संबंधित 14 हजार करोड़ रुपये से अधिक की नई परियोजनाओं की चर्चा की, जो राज्य के कल्याण के लिए प्रत्यक्ष तौर पर समर्पित हैं। स्वास्थ्य सेवा के व्यापक विस्तार का उल्लेख करते हुए उन्होंने भिवानी में पंडित नेकी राम शर्मा मेडिकल कॉलेज और महर्षि च्यवन मेडिकल कॉलेज के साथ ही नारनौल में राव तुलाराम अस्पताल राष्ट्र को समर्पित किया। इन संस्थानों की स्थापना का उद्देश्य चिकित्सा क्षेत्र में पेशेवर जीवन बनाने के इच्छुक लोगों के लिए नए अवसर पैदा करना है। श्री मोदी ने कहा कि ये नए संस्थान हरियाणा की स्वास्थ्य सेवाओं को और भी सशक्त और सुलभ बनाएंगे।

प्रधानमंत्री ने स्थानीय लोगों के समर्पित नागरिक सेवा भाव की सराहना करते हुए, उनके आगमन से पहले स्वच्छता अभियान प्रदर्शित कार्यों की प्रशंसा की। उन्होंने स्वच्छता अभियान में समुदाय की सक्रिय भागीदारी पर अपार संतोष व्यक्त करते हुए इस जमीनी स्तर पर निरंतर जारी रखने का आह्वान किया। श्री मोदी ने कहा कि हमें स्वच्छता को अपने दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाना होगा 

प्रधानमंत्री ने वैश्विक रेल क्षेत्र के तकनीकी विकास का उल्लेख करते हुए स्मरण दिलाया कि कैसे 19वीं शताब्दी की रेलगाड़ियां मुख्य रूप से भाप इंजनों द्वारा चालित थीं, जबकि 20वीं शताब्दी ये विद्युत शक्ति से चालित बन गईं। भविष्योन्मुखी दृष्टिकोण दर्शाते हुए उन्होंने जोर देकर कहा कि 21वीं शताब्दी की रेलगाड़ियां हाइड्रोजन परिवहन द्वारा चालित होंगी, और इसी की आधिकारिक शुरुआत जींद और सोनीपत के बीच नवनिर्मित 90 किलोमीटर लंबे मार्ग से हो रही है। श्री मोदी ने कहा कि आज भारतीय रेल ने 21वीं सदी की इस तकनीक में एक बड़ी छलांग लगाई है, जिसे भविष्य में विस्तारित किये जाने की अपार संभावनाएं हैं।

प्रधानमंत्री ने वैश्विक परिप्रेक्ष्य में देश की इस उपलब्धि को रखते हुए कहा कि हाइड्रोजन ट्रेन तकनीक विश्व स्तर पर व्यावहारिक रूप से केवल 7-8 वर्ष पहले ही अस्तित्व में आई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अभी केवल कुछ ही गिने-चुने देशों के पास ऐसी रेलगाड़ियां चलाने की क्षमता है और वे भी अभी प्रारंभिक चरण में ही हैं। श्री मोदी ने कहा कि इस नवनिर्मित भारतीय हाइड्रोजन ट्रेन की वास्तविक क्षमताओं के बारे में सुनकर आपको अत्यंत गर्व होगा।

प्रधानमंत्री ने इस नए परिवहन चमत्कार की तकनीकी विशेषताओं के बारे में बताते हुए कहा कि नई लॉन्च की गई ट्रेन विश्व स्तर पर अपनी तरह की सबसे शक्तिशाली ट्रेन है, जिसकी क्षमता 3,200 हॉर्सपावर है और जिसमें दस कोच लगे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसी रेलगाड़ियों में जिनमें आमतौर पर केवल तीन से चार कोच होते हैं, उनसे तुलना करते हुए, श्री मोदी ने कहा कि देश ने अपने पहले ही प्रयास में यह साहसिक परिचालन क्षमता हासिल की है। श्री मोदी ने कहा कि भारत ने दस डिब्बे वाली हाइड्रोजन ट्रेन सफलतापूर्वक चलाकर अपनी क्षमता प्रदर्शित की है।

इस हरित परिवहन उपलब्धि की स्वदेशी प्रकृति पर गर्व वयक्त करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पूर्णतया धुआं रहित यह ट्रेन घरेलू विनिर्माण पहल की ठोस और उल्लेखनीय सफलता है। इस उन्नत प्रणाली का डिजाइन करने वाले प्रतिभाशाली घरेलू इंजीनियरों और इसके त्रुटिहीन निर्माण के लिए स्थानीय विनिर्माण कंपनियों को उन्होंने इसका श्रेय दिया। श्री मोदी ने कहा कि यह मेक इन इंडिया पहल का एक अत्यंत सफल और गौरवपूर्ण उदाहरण है।

प्रधानमंत्री ने इस उन्नत तकनीक की विशिष्ट परिचालन आवश्यकताओं को समझाते हुए बताया कि हाइड्रोजन ट्रेनों के लिए पूरी तरह अलग बुनियादी ढांचे और विशेष, सहायक प्रणालियों की आवश्यकता होती है। निकट भविष्य में इन विशिष्ट नेटवर्क की आवश्यकताएं पूरी करने के लिए नए कारखाने और संबंधित सुविधाएं तेजी से स्थापित किए जाने की संभावना देखते हुए उन्होंने व्यापक स्थानीय आर्थिक लाभ की भविष्यवाणी की। श्री मोदी ने कहा कि यह उन्नत ट्रेन नेटवर्क हरियाणा के युवाओं के लिए रोजगार के अनेक नए अवसर उत्पन्न करने की गारंटी है।

प्रधानमंत्री ने प्रमुख भू-राजनीतिक चुनौतियों की चर्चा करते हुए, पिछले बारह वर्षों में भारतीय रेल में हुए व्यापक बदलाव से हासिल किए गए प्रचालन लाभों का उल्लेख किया। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि पेट्रोलियम, डीजल, एलपीजी और उर्वरकों की आपूर्ति के लिए आवश्यक समुद्री मार्ग महीनों से गंभीर रूप से लगातार बाधित हैं। श्री मोदी ने कहा कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से भारत बड़ी मात्रा में आवश्यक ईंधन और कृषि सामग्री आयात करता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि 2014 से पहले अगर ऐसा वैश्विक ईंधन संकट आया होता तो इसके विनाशकारी प्रभाव से डीजल पर अत्यधिक निर्भरता के कारण राष्ट्रीय रेल नेटवर्क पूरी तरह ठप्प हो जाता। उन्होंने कहा कि जहां 1925 से 2014 के बीच केवल 30 प्रतिशत रेल मार्गों का विद्युतीकरण हुआ था, वहीं सरकार के प्रयासों से अब राष्ट्रीय रेल ग्रिड का लगभग 99 प्रतिशत और राज्य के सभी ट्रैक का 100 प्रतिशत विद्युतीकरण हो गया है। श्री मोदी ने कहा कि पूर्ण विद्युतीकरण से गंभीर वैश्विक तेल संकट के बाद भी हमारी रेलगाड़ियां निर्बाध रूप से चलती रहीं।

प्रधानमंत्री ने बेहतर संपर्क साधनों के दोहरे सामाजिक-आर्थिक लाभों पर जोर देते हुए कहा कि विस्तृत सड़क और रेल नेटवर्क लोगों की सुविधा बढ़ाते हुए क्षेत्रीय विकास को तेजी से गति देते हैं। दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे के स्थानीय खंड, जींद-गोहाना राष्ट्रीय राजमार्ग और अंबाला-काला अंब चार-लेन परियोजना का आधिकारिक शुभारंभ करते हुए, उन्होंने इन अंतरराज्यीय प्रचालनों से कई लाभों की चर्चा की। श्री मोदी ने कहा कि इस तरह के व्यापक संपर्क मार्गों से अपार सुविधा के साथ ही समग्र विकास की गति में भी काफी वृद्धि होती है।

प्रधानमंत्री ने जींद जिले के संभार-तंत्र संबंधी बदलावों का विस्तार से वर्णन करते हुए बताया कि शहर अब महत्वपूर्ण रूप से पांच अलग-अलग राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़ गया है। इसके अपार आर्थिक लाभों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि किसान और पशुपालक अब कम किराए में प्रमुख वाणिज्यिक बाजारों तक आसानी से पहुंच पाएंगे। श्री मोदी ने कहा कि ये सुदृढ़ संपर्क साधन उद्योगों को सक्रिय रूप से सशक्त बनाएंगे, पर्यटन को बढ़ावा देंगे और व्यापक तौर पर नए रोजगार उत्पन्न करेंगे।

प्रधानमंत्री ने इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की अपनी हाल की सफल यात्रा की चर्चा करते हुए, भारत द्वारा किए गए कई अंतरराष्ट्रीय द्विपक्षीय समझौतों का उल्लेख किया। उन्होंने एक महत्वपूर्ण, लेकिन कम चर्चित रणनीतिक विषय पर विशेष ध्यान दिलाया, जिससे क्षेत्र की युवा आबादी प्रत्यक्ष और गहराई से जुड़ी है। श्री मोदी ने कहा कि हरियाणा के युवाओं से संबंधित एक विशिष्ट विषय है खेल, जिस पर ज्यादा चर्चा नहीं हुई है।

प्रधानमंत्री ने विदेश की सरकारों के साथ महत्वपूर्ण वार्ताओं का विस्तार से वर्णन करते हुए खेल और प्रतिस्पर्धी क्षेत्र में व्यापक बदलाव के उद्देश्य से आगामी व्यापक अंतरराष्ट्रीय सहयोगों की जानकारी दी। खेल क्षेत्र और विशिष्ट एथलीटों के प्रशिक्षण पद्धतियों पर केंद्रित संयुक्त पहल की संभावना व्यक्त करते हुए उन्होंने इससे स्थानीय खेल कौशल के लाभान्वित होने की आशा व्यक्त की। श्री मोदी ने कहा कि इन देशों के साथ मिलकर हम आने वाले समय में खेल क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल करेंगे।

प्रधानमंत्री ने घरेलू स्तर पर खेल बुनियादी ढांचे में किए गए सुधारों का विस्तृत विवरण देते हुए बताया कि खेलों को सक्रिय और व्यवस्थित रूप से फिटनेस और रोजगार दोनों के प्रमुख और कारगर माध्यम में बदला जा रहा है। नई राष्ट्रीय खेल नीति और खेलो भारत नीति के सफल कार्यान्वयन का उल्लेख करते हुए उन्होंने खेलो इंडिया और ओलंपिक पदक जीतने की टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम जैसी अत्यंत प्रभावी योजनाओं द्वारा खिलाड़ियों को प्रदान की गई वित्तीय और संस्थागत सहायता की सराहना की। श्री मोदी ने कहा कि हरियाणा सरकार भी खेलों और समर्पित खिलाड़ियों को निरंतर और काफी प्रोत्साहन प्रदान कर रही है।

बुनियादी ढांचे से जुड़ी उपलब्धियों से हटकर प्रधानमंत्री ने युवा खिलाड़ियों को सीधे संबोधित करते हुए आगामी विशाल वैश्विक प्रतिस्पर्धी मंचों की ओर रुख किया। उन्होंने 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी के लिए भारत की तैयारियों और 2036 ओलंपिक खेलों के लिए महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय बोली की घोषणा और अहमदाबाद में विश्व पुलिस और अग्निशमन खेलों के आयोजन की चर्चा की। श्री मोदी ने स्थानीय खिलाड़ियों से पूरी लगन से प्रशिक्षण प्राप्त करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वे विश्वास दिलाते हैं कि सरकार खिलाड़ियों की कड़ी तैयारी के लिए हर आवश्यक सुविधा उपलब्ध कराएगी।

प्रधानमंत्री ने स्थानीय शासन प्रणाली की सराहना की। उन्होंने मुख्यमंत्री के नेतृत्व में समावेशी विकास के मंत्र का कड़ाई से पालन करने के लिए राज्य प्रशासन की भी प्रशंसा की। रिश्वतखोरी या भाई-भतीजावाद से मुक्त, पारदर्शी और योग्यता-आधारित रोजगार प्रक्रियाओं के कड़ाई से कार्यान्वयन को ज़रूरी बताते हुए उन्होंने इस तरह के प्रणालीगत सुधार लागू करने में आने वाली अपार राजनीतिक बाधाओं की भी चर्चा की।

किसानों के कल्याण के प्रति सरकार की अटूट संरचनात्मक प्रतिबद्धता दोहराते हुए, प्रधानमंत्री ने स्थानीय बाजार को राज्य के सबसे बड़े बाजारों में से एक बताया और किसानों को सीधे मिलने वाले व्यापक लाभों की चर्चा की। उन्होंने बताया कि राज्य के किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के माध्यम से लगभग 8 हजार करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं, जिसमें स्थानीय किसानों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा शामिल है। श्री मोदी ने कहा कि केवल जींद में ही हमारे मेहनती किसानों को 600 करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्रत्यक्ष हस्तांतरित की गई है।

प्रधानमंत्री ने देश की गहरी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक भावना का उल्लेख करते हुए, इस क्षेत्र को इस समृद्ध ऐतिहासिक विरासत का विशाल और जीवंत केंद्र बताया। महाराजा रणजीत सिंह की गौरवशाली विरासत और पांडवों की पवित्र आस्था का उल्लेख करते हुए, उन्होंने उन पूजनीय स्थानीय तीर्थ स्थलों की चर्चा की, जहां आज भी लाखों श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं। श्री मोदी ने कहा कि यही वह गौरवशाली आस्था और आध्यात्मिकता की विरासत है जिसे आधुनिक भारत आज सक्रिय से संरक्षित कर रहा है।

प्रधानमंत्री ने अतीत के इस गहन श्रद्धा को भविष्य के शैक्षिक और सांस्कृतिक प्रयासों से जोड़ते हुए कहा कि राष्ट्र अपने इतिहास को पूर्ण सम्मान के साथ अगली पीढ़ी तक पहुंचाने को पूर्णतया प्रतिबद्ध है। श्री मोदी ने इस लक्ष्य को साकार करने हेतु कुरुक्षेत्र में एक नए सिख संग्रहालय की आधारशिला रखने की आधिकारिक घोषणा की। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह नया संग्रहालय भारत की महान गुरु परंपरा को आगामी पीढ़ियों तक सफलतापूर्वक और गर्व से पहुंचाएगा।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अपने संबोधन को विराम देते हुए राज्य को कृषि और उद्योग के दोहरे आर्थिक पहियों पर समान रूप से सवार, तीव्र विकास पथ पर अग्रसर बताया। नव-उद्घाटित परियोजनाओं के प्रति मंगल कामना व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि ये इस विकास गति में और तेज़ी लाएंगी। उन्होंने राष्ट्र की विकास यात्रा में इस क्षेत्र के महत्वपूर्ण योगदान के प्रति पूर्ण विश्वास व्यक्त किया। श्री मोदी ने कहा कि हरियाणा का यह तीव्र विकास निस्संदेह औऱ सशक्त रूप से पूर्ण विकसित भारत की यात्रा को नई ऊर्जा प्रदान करेगा।

PM मोदी PGIMER में 1200 करोड़ की स्वास्थ्य परियोजनाओं का करेंगे उद्घाटन

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

  • एडवांस्ड न्यूरोसाइंसेज़ सेंटर, एडवांस्ड मदर एंड चाइल्ड सेंटर एवं क्रिटिकल केयर ब्लॉक उत्तर भारत में स्वास्थ्य सेवाओं को देंगे नई दिशा
  • “जनता का बढ़ता विश्वास हमारी जिम्मेदारी को बढ़ाता है; इसका समाधान मरीजों की संख्या कम करना नहीं, बल्कि अवसंरचना का विस्तार करना है।” – प्रो. विवेक लाल, निदेशक, PGIMER

पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER ), चंडीगढ़ अपनी स्वास्थ्य सेवाओं की यात्रा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि का साक्षी बनने जा रहा है। भारत के माननीय प्रधानमंत्री 17 जुलाई 2026 को दो अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं—एडवांस्ड न्यूरोसाइंसेज़ सेंटर (एएनसी) और एडवांस्ड मदर एंड चाइल्ड सेंटर (AMCC)—का उद्घाटन करेंगे तथा क्रिटिकल केयर ब्लॉक (सीसीबी) की आधारशिला रखेंगे। लगभग ₹1,200 करोड़ की लागत वाली ये परियोजनाएँ संस्थान के इतिहास में स्वास्थ्य अवसंरचना के सबसे बड़े विस्तारों में से एक हैं।

इन नई सुविधाओं से न केवल चंडीगढ़ बल्कि पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, उत्तराखंड तथा अन्य पड़ोसी राज्यों के उन लाखों मरीजों को लाभ मिलेगा, जो उन्नत चिकित्सा सेवाओं के लिए पीजीआईएमईआर पर निर्भर हैं।

उद्घाटन से पूर्व अपने विचार व्यक्त करते हुए पीजीआईएमईआर के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने कहा,
“ये परियोजनाएँ भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना को सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ी छलांग हैं। पीजीआईएमईआर सदैव प्रत्येक मरीज को उसकी आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध रहा है। इन सुविधाओं के शुरू होने से विश्वस्तरीय उपचार प्रदान करने की हमारी क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, साथ ही आयुष्मान भारत योजना के तहत किफायती स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराना भी जारी रहेगा।”

एडवांस्ड न्यूरोसाइंसेज़ सेंटर

एडवांस्ड न्यूरोसाइंसेज़ सेंटर को देश की सबसे उन्नत न्यूरोलॉजिकल देखभाल सुविधाओं में से एक के रूप में विकसित किया गया है। इसमें अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक तकनीक, मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर, उन्नत गहन चिकित्सा इकाइयाँ तथा आपातकालीन सेवाएँ उपलब्ध होंगी, जिससे तंत्रिका संबंधी रोगों के उपचार की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

इसकी महत्ता पर प्रकाश डालते हुए प्रो. विवेक लाल

“पीजीआई में न्यूरोलॉजी और न्यूरोसर्जरी की शुरुआत वर्ष 1967 में मात्र 50 बिस्तरों के साथ हुई थी। एडवांस्ड न्यूरोसाइंसेज़ सेंटर के साथ यह संख्या बढ़कर 400 से अधिक बिस्तरों तक पहुँच रही है, जिनमें समर्पित आईसीयू और आपातकालीन सुविधाएँ शामिल हैं। यह एक परिवर्तनकारी कदम है, जिससे स्ट्रोक, मस्तिष्क ट्यूमर, रीढ़ की बीमारियों, मिर्गी, ट्रॉमा और अन्य जटिल न्यूरोलॉजिकल रोगों से पीड़ित मरीजों को सीधा लाभ मिलेगा।”

एडवांस्ड मदर एंड चाइल्ड सेंटर

एडवांस्ड मदर एंड चाइल्ड सेंटर में माताओं, नवजात शिशुओं और बच्चों के लिए समग्र स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराई जाएँगी। इसमें समर्पित आईसीयू, आधुनिक लेबर सुइट, विशेष नवजात सेवाएँ और उन्नत डायग्नोस्टिक सुविधाएँ होंगी।

प्रो. विवेक लाल ने कहा,
“पीजीआईएमईआर ने भारत में कई नवजात सेवाओं की शुरुआत की है। एडवांस्ड मदर एंड चाइल्ड सेंटर विशेष आईसीयू, उन्नत तकनीक और समर्पित स्वास्थ्य टीमों के माध्यम से माताओं और नवजात शिशुओं को सर्वोत्तम स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने की हमारी प्रतिबद्धता को और मजबूत करेगा।”

क्रिटिकल केयर ब्लॉक
नए क्रिटिकल केयर ब्लॉक की आधारशिला कोविड-19 महामारी से मिली सीख के बाद देश की आपातकालीन स्वास्थ्य तैयारियों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

प्रो. लाल ने कहा,
“महामारी ने हमें यह सिखाया कि क्रिटिकल केयर अवसंरचना कोई विलासिता नहीं, बल्कि आवश्यकता है। यह नया क्रिटिकल केयर ब्लॉक सुनिश्चित करेगा कि गहन चिकित्सा और वेंटिलेटर सहायता की आवश्यकता वाले मरीजों को बिना अनावश्यक विलंब के समय पर उपचार मिल सके। यह भविष्य की स्वास्थ्य आपदाओं से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निवेश है।”

वर्तमान में पीजीआईएमईआर में प्रतिवर्ष लगभग 30 लाख मरीजों का पंजीकरण होता है तथा प्रतिदिन 10,000 से 15,000 ओपीडी परामर्श प्रदान किए जाते हैं। संस्थान बढ़ती मरीज संख्या को बोझ नहीं, बल्कि जनता के बढ़ते विश्वास का प्रतीक मानता है।

इस संदर्भ में निदेशक ने कहा, “अक्सर कहा जाता है कि पीजीआई पर मरीजों का दबाव बढ़ रहा है। मेरा मानना है कि हमारी जिम्मेदारी बढ़ रही है। पीजीआई लाखों लोगों के लिए आशा और विश्वास का केंद्र है। समाधान मरीजों की संख्या कम करना नहीं, बल्कि बढ़ती मांग के अनुरूप अपनी अवसंरचना और सेवाओं का लगातार विस्तार करना है।”

निदेशक ने बताया कि पीजीआईएमईआर आयुष्मान भारत–प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) के तहत अत्यधिक विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएँ न्यूनतम या बिना किसी लागत के उपलब्ध कराता है।

संस्थान में अब तक 5,500 से अधिक किडनी प्रत्यारोपण किए जा चुके हैं। इसके अलावा लिवर, हृदय, फेफड़े और कॉर्निया प्रत्यारोपण सेवाएँ भी उपलब्ध हैं, जिनमें से कई अब आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत निःशुल्क प्रदान की जा रही हैं। सेवाओं के विस्तार के कारण पात्र किडनी प्रत्यारोपण मरीजों की प्रतीक्षा अवधि में भी उल्लेखनीय कमी आई है।

पीजीआईएमईआर डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं में भी राष्ट्रीय अग्रणी संस्थान बनकर उभरा है। संस्थान अब तक 40 लाख से अधिक टेलीमेडिसिन परामर्श प्रदान कर चुका है तथा देशभर के 250 से अधिक चिकित्सा संस्थानों, जिनमें सशस्त्र बल चिकित्सा महाविद्यालय (एएफएमसी) और अन्य तृतीयक स्वास्थ्य संस्थान शामिल हैं, को शैक्षणिक कार्यक्रमों का प्रसारण करता है।

निदेशक ने संस्थान की अभिनव ‘सारथी’ पहल का भी उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों को मरीज सेवा में स्वयंसेवा के लिए प्रेरित करना है। यह कार्यक्रम एक छोटे स्वयंसेवी प्रयास से विकसित होकर हजारों युवाओं का जनआंदोलन बन चुका है, जो संस्थान में मरीजों की सहायता कर रहे हैं।

प्रो. लाल ने कहा, “स्वास्थ्य सेवा केवल उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि करुणा और संवेदनशीलता का भी नाम है। ‘सारथी’ के माध्यम से युवा स्वयंसेवक सहानुभूति और सामुदायिक सेवा की भावना सीखते हैं तथा देश के सबसे व्यस्त अस्पतालों में से एक में मरीजों की सहायता करते हैं। संवेदनशील नागरिकों का निर्माण करना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना आधुनिक अस्पतालों का निर्माण करना।”

इन ऐतिहासिक परियोजनाओं के शुरू होने के साथ पीजीआईएमईआर उन्नत, किफायती और मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को और अधिक व्यापक बनाने की दिशा में अग्रसर होगा तथा चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में देश के अग्रणी संस्थानों में अपनी स्थिति को और मजबूत करेगा। यह उद्घाटन भारत सरकार के सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना को सुदृढ़ करने और उत्तर भारत के लाखों लोगों को उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने के सतत प्रयासों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।

मंत्रिमंडल ने ओडिशा और झारखंड के लिए दो मल्टी ट्रैकिंग परियोजना को दी मंजूरी

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति बुधवार को रेल मंत्रालय की लगभग 3,907 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली 2 परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं में निम्नलिखित शामिल हैं। जो पारादीप – हरिदासपुर – दोहरीकरण और राजखरसावा – डांगोअपोसी — चौथी लाइन है।

इस बढ़ी लाइन क्षमता से भारतीय रेलवे की परिचालन दक्षता और सेवा विश्वसनीयता में वृद्धि होगी। इस बहु-ट्रैकिंग प्रस्ताव से परिचालन को सुव्यवस्थित करने और भीड़भाड़ को कम करने में मदद मिलेगी। ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के नए भारत के विजन के अनुरूप हैं, जिसका उद्देश्य क्षेत्र के व्यापक विकास के माध्यम से इस क्षेत्र के लोगों को आत्मनिर्भर बनाना है, जिससे उनके रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अंतर्गत बनाई गई हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य एकीकृत योजना और हितधारकों के परामर्श के माध्यम से बहु-मार्गीय संपर्क और लॉजिस्टिक दक्षता को बढ़ाना है। इन परियोजनाओं से लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित होगी।

ओडिशा और झारखंड राज्य के 4 जिलों को शामिल करने वाली इन 2 (दो) परियोजनाओं से भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 145 किलोमीटर की वृद्धि होगी।

प्रस्तावित मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना से लगभग 1,526 गांवों की कनेक्टिविटी में सुधार होगा, जिनकी आबादी लगभग 14 लाख है।

प्रस्तावित क्षमता वृद्धि से देश भर के कई प्रमुख पर्यटन स्थलों- ललितगिरि बौद्ध परिसर, श्री बलदेवजेव मंदिर, मेघाहातुबुरु पहाड़ियां आदि के लिए रेल संपर्क में सुधार होगा।

ये प्रस्तावित परियोजनाएं कोयला, लौह अयस्क, डोलोमाइट, चूना पत्थर, जिप्सम आदि जैसी वस्तुओं के परिवहन के लिए आवश्यक मार्ग हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने पर प्रति वर्ष 44 मिलियन टन माल ढुलाई की अतिरिक्त क्षमता प्राप्त होगी। रेल पर्यावरण के अनुकूल और ऊर्जा कुशल परिवहन होने के कारण जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने और देश की लॉजिस्टिक लागत कम करने में सहायक होगी, साथ ही तेल आयात (6 करोड़ लीटर) को कम करेगी और कार्बनडाई ऑक्‍साइड उत्सर्जन (29 करोड़ किलोग्राम) को घटाएगी, जो 1 करोड़ पौधारोपण के बराबर है।