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आम चुनाव और उपचुनाव 2026: पश्चिम बंगाल चुनावों में 2,926 उम्मीदवार मैदान में

पश्चिम बंगाल / सत्ता संदेश

भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने 15 मार्च, 2026 को असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की विधानसभाओं के लिए आम चुनाव और 6 राज्यों में उपचुनाव का कार्यक्रम घोषित किया।

  1. पश्चिम बंगाल राज्य (द्वितीय चरण) के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि, जिसके लिए 29 अप्रैल, 2026 को चुनाव होने हैं, 9 अप्रैल, 2026 थी, जबकि पश्चिम बंगाल (द्वितीय चरण) के लिए नामांकन पत्रों की जांच की तिथि 10 अप्रैल, 2026 थी और नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि 13 अप्रैल, 2026 दोपहर 3:00 बजे तक थी ।
  2. नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि के बाद, पश्चिम बंगाल के लिए उम्मीदवारों की कुल संख्या का विवरण इस प्रकार है:
क्रम सं.राज्य/केंद्र शासित प्रदेश का नामविधानसभा क्षेत्रों (एसी) की संख्याउम्मीदवारों की कुल संख्यानामांकन वापस लेने के बाद
1.पश्चिम बंगाल (चरण-I)1521,478
2.पश्चिम बंगाल (चरण-II)1421,448
  1. निर्वाचन अधिकारी (आरओ) चुनाव संचालन नियमावली, 1961 के अनुसार आधिकारिक राजपत्र में चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की सूची प्रकाशित करेंगे ।
  2. आरओ प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में नामांकनजांच और उम्मीदवारी वापस लेने से संबंधित सभी चुनाव पत्रों और कार्यवाही को एक सीलबंद पैकेट/लिफाफे में सील के साथ अपनी निगरानी में रखेंगे ।
  3. नागरिक ईसीआईएनईटी ऐप पर “अपने उम्मीदवार को जानें” टैब से अपने उम्मीदवारों का विवरण देख सकते हैं, जिसमें उनकी शैक्षणिक योग्यताएं, आपराधिक रिकॉर्ड, संपत्ति और देनदारियां शामिल हैं, और उनके शपथपत्र डाउनलोड कर सकते हैं ।
  4. इसके अतिरिक्‍त, ईसीआई की पहल के अनुरूप, ईवीएम मतपत्रों पर उम्मीदवारों की रंगीन तस्वीरें और उनके विवरण, जिनमें क्रम संख्या, नाम और चुनाव चिह्न शामिल हैं, मतदाताओं की सुविधा के लिए बड़े अक्षरों में अंकित होंगे।
विधायी नेतृत्व: नीति निर्धारण में महिलाओं के प्रतिनिधित्व की परिवर्तनकारी शक्ति

विधायी नेतृत्व: नीति निर्धारण में महिलाओं के प्रतिनिधित्व की परिवर्तनकारी शक्ति

  • श्रीमती अन्नपूर्णा देवी

भारत के समक्ष एक असाधारण अवसर है—अपनी विधायिकाओं को नया आकार देने, महिलाओं के नेतृत्व को आगे बढ़ाने और एक ऐसे लोकतंत्र की रचना करने का- जो सही मायनों में अपने लोगों की शक्ति को प्रतिबिंबित करता हो। जब महिलाएँ शासन में अपना उचित स्थान ग्रहण करती हैं, तब सभी की आवश्यकताओं के अनुरूप बेहतर नीतियाँ बनती हैं, और राष्ट्र अधिक उद्देश्य और शक्ति के साथ आगे बढ़ता है।

सितंबर 2023 में पारित संविधान (एक सौ छठा संशोधन) अधिनियम — नारी शक्ति वंदन अधिनियम — हाल के वर्षों में सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक सुधारों में से एक है। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व में बनाया गया यह कानून हमारे देश के लोकतांत्रिक ढाँचे में महिलाओं की भूमिका को बढ़ाने की दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति को दर्शाता है।

सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास के विजन में निहित यह ऐतिहासिक कानून, लोकसभा और राज्यों की  विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटों के आरक्षण का प्रावधान करते हुए विकसित भारत के निर्माण की दिशा में एक साहसिक कदम है।

यह मात्र संवैधानिक प्रावधान से कहीं बढ़कर है—यह एक परिवर्तनकारी विजन का संस्थागत रूप है, जहाँ महिलाएँ केवल लोकतंत्र में भागीदारी ही नहीं करतीं, बल्कि उसके ताने-बाने को भी आकार देती हैं। माननीय प्रधानमंत्री श्री मोदी द्वारा महिला सशक्तिकरण और समावेशी विकास को दिए गए निरंतर समर्थन ने लंबे समय से चली आ रही उम्‍मीदों को हकीकत में बदलने की मजबूत प्रेरणा प्रदान की है। 

भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं को केवल अधिक महिलाओं की ही नहीं, बल्कि ऐसी महिलाओं की आवश्यकता है जिनके पास नीतिगत परिणामों को आकार देने के लिए अधिकार, क्षमता और पर्याप्त अवसर हों। वर्तमान सरकार ने पिछले एक दशक में महिलाओं की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण निवेश किया है, जिससे इस विधायी परिवर्तन के लिए मजबूत आधार तैयार हुआ है। जन धन खाताधारकों में 56% से अधिक महिलाएँ  हैं, जिससे वित्तीय समावेशन को अभूतपूर्व बढ़ावा मिलता है। मुद्रा योजना के लगभग 67% लाभार्थी महिलाएँ  हैं, जो उद्यमिता में उनकी बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृत 73% से अधिक मकान महिलाओं के नाम पर हैं, जबकि उज्ज्वला योजना के अंतर्गत 10 करोड़ से अधिक एलपीजी कनेक्शनों ने घरेलू जीवन स्तर में सुधार किया है। ये सभी कदम एक स्पष्ट नीतिगत दिशा — भागीदारी के जरिए सशक्तिकरण- की ओर इंगित करते हैं हालांकि, अब ध्यान भागीदारी से आगे बढ़कर निर्णय-लेने तक पहुँचने पर केंद्रित है।

हमारे देश का अपना अनुभव एक मजबूत मानक प्रस्तुत करता है। स्थानीय स्तर पर, अब पंचायती राज संस्थाओं में चुने गए प्रतिनिधियों में से लगभग 50% महिलाएँ हैं, यानी 12 लाख से अधिक नेताओं के रूप में वे स्थानीय शासन को दिशा दे रही हैं। उनका प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। महिला-नेतृत्व वाली स्थानीय संस्थाओं ने विकास से जुड़े  जल, स्वच्छता, शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य देखरेख जैसे प्रमुख मुद्दों पर लगातार ध्यान केंद्रित किया है, जो दर्शाता है कि नेतृत्व में विविधता नीति निर्माण में सकारात्मक बदलाव लाती है।

अब यह प्रश्न नहीं रह गया है कि महिलाएँ प्रभावी नेतृत्व कर सकती हैं या नहीं; इसके प्रमाण पहले से मौजूद हैं। अब समय आ गया है कि भारत की उच्च विधायी संस्थाएँ महिलाओं के नेतृत्व को पूर्ण रूप से अपनाएँ और उसे बढ़ाएँ। नारी शक्ति वंदन अधिनियम ने पहले ही आधार तैयार कर दिया है, जो सार्थक प्रतिनिधित्व के लिए एक मजबूत संरचनात्मक नींव प्रदान करता है। राजनीतिक दलों के पास अब इस गति को आगे बढ़ाने—उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया को नए सिरे से परिभाषित करने, चुनावी अभियान के लिए वित्तीय संसाधनों तक पहुँच का विस्तार करने तथा महिला नेताओं के लिए स्पष्ट और सशक्त मार्ग तैयार करने का जबरदस्‍त अवसर है। उचित सुधारों के साथ, राजनीतिक दल विधायी समावेशन को विजन से जीवंत और जीती-जागती हकीकत में परिवर्तित कर सकते हैं।

सरकार संसद और राज्य विधानसभाओं में संस्थागत तत्परता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। पहली बार निर्वाचित होने वाले विधायकों को सशक्त नीतिगत अनुसंधान, समग्र विधायी प्रशिक्षण और मजबूत सहकर्मी नेटवर्क तक पहुँच प्रदान करके, सरकार उन आधारों में निवेश कर रही है जो बढ़ी हुई भागीदारी को अधिक प्रभावी और सटीक निर्णय-लेने में परिवर्तित करते हैं।  

प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में हमारी सरकार महिलाओं के नेतृत्व में विकास के विजन पर लगातार कार्य करती रही है, और उसने नारी शक्ति को भारत की विकास गाथा के केंद्र में स्थापित किया है। इस अधिनियम  का पारित होना विधायी स्तर पर इस विजन को दर्शाता है।

यदि इस अवसर का पूर्ण लाभ उठाया जाए, तो इसकी संभावनाएँ असाधारण हैं। वास्तविक प्रभाव के साथ प्रतिनिधित्व असर को कई गुणा बढ़ा देता है। वास्‍तविक ताकत के साथ उपस्थिति सुधार को तेज करती है। भारत दोनों को अपनाने के लिए तैयार है—और इससे होने वाले लाभ परिवर्तनकारी होंगे। जैसे-जैसे देश 2047 तक विकसित भारत बनने के अपने लक्ष्य की ओर बढ़ता है, इसकी विधायी संस्थाओं की शक्ति एक महत्वपूर्ण कारक होगी। महिलाओं के विधायी नेतृत्व को बढ़ाना केवल निष्‍पक्षता का मामला नहीं है; यह स्वयं शासन को सुदृढ़ करने के बारे में है।

 नारी शक्ति वंदन अधिनियम ने वास्तविक संभावनाओं का क्षण उत्पन्न किया है। अब इस क्षण को स्थायी परिवर्तन में बदलने का अवसर और शक्ति दोनों ही राजनीतिक संस्थाओं, दलों और नीति निर्माताओं के पास मौजूद हैं।

 प्रगति का असली पैमाना उन महिलाओं में दिखाई देगा, जो केवल सीटों पर बैठतीं ही नहीं, बल्कि उन्हें अधिकारपूर्वक संचालित भी करती हैं—जो साहसिक कानून तैयार करती हैं, परिवर्तनकारी एजेंडे तय करती हैं, और आने वाली पीढ़ियों के लिए शासन के स्वरूप को नया आकार देती हैं। इस बिल के लागू होने के साथ, भारत की विधायिकाओं की केवल संरचना ही नहीं बदलेंगी—बल्कि उनके उद्देश्य, शक्ति और वादे भी बदलेंगे।

(श्रीमती अन्नपूर्णा देवी, भारत सरकार की केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री हैं)

आम चुनाव और उपचुनाव 2026: ईसीआईएनईटी प्लेटफॉर्म का उपयोग करके अपने उम्मीदवार की शैक्षणिक योग्यता और आपराधिक पृष्ठभूमि के बारे में जानें

भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने 15 मार्च, 2026 को असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की विधानसभाओं के लिए आम चुनाव और गोवा, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, नागालैंड और त्रिपुरा के 8 (आठ) विधानसभा क्षेत्रों के लिए उपचुनाव का कार्यक्रम घोषित किया है।

  1. असम और केरल राज्यों की विधानसभाओं और पुडुचेरी केंद्र शासित प्रदेश की विधानसभाओं के चुनावों के साथ-साथ चार राज्यों में होने वाले उपचुनावों के लिए कुल 1,955 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनके लिए 9 अप्रैल, 2026 को मतदान होगा।
  2. पश्चिम बंगाल (चरण-I और II) और तमिलनाडु की विधानसभाओं के चुनावों के लिए नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है और उम्मीदवारी वापस लेने की अंतिम तिथि तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल (चरण-I) के लिए अप्रैल और पश्चिम बंगाल (चरण-II) के लिए 13 अप्रैल है।
  3. नागरिक ईसीआईएनईटी के अपने उम्मीदवारों को जानें (केवाईसी)” मॉड्यूल का उपयोग करके उम्मीदवारों के आपराधिक मामलों, संपत्ति और देनदारियों, शैक्षणिक योग्यताओं और उनके प्रामाणिक सोशल मीडिया खातों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
  4. उपयोगकर्ता ईसीआईएनईटी के “चुनाव संचालन” टैब के अंतर्गत KYC मॉड्यूल तक पहुँच सकते हैं । वे ईसीआईएनईटी का उपयोग करके उम्मीदवारों द्वारा प्रस्तुत किए गए संपूर्ण शपथ पत्र (फॉर्म 26) को भी डाउनलोड कर सकते हैं।
  5. ईसीआईएनईटी दुनिया का सबसे बड़ा चुनावी सेवा मंच है, जो भारत के निर्वाचन आयोग के 40 से अधिक ऐप और पोर्टल को एकीकृत करके दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की सभी चुनावी सेवाओं को एक सहज अनुभव में एक साथ लाता है।
  6. ईसीआईएनईटी मतदाताओं को मतदाता पंजीकरण, मतदाता सूची खोज, अपने आवेदनों को ट्रैक करना, चुनाव अधिकारियों से संपर्क करना, बीएलओ के साथ कॉल बुक करना, ई-ईपीआईसी डाउनलोड, मतदान रुझान और शिकायत निवारण जैसी सेवाएं एक सुरक्षित मंच पर प्रदान करता है।
  7. यह वास्तविक समय में सूचना तक पहुंच और शिकायत समाधान के लिए एक एकल-खिड़की मंच भी प्रदान करता है, जिसमें उल्लंघन की रिपोर्टिंग के लिए सी विजिल जैसे उपकरण और विकलांग व्यक्तियों के लिए सुलभ चुनावी सेवाओं को सुनिश्चित करने के लिए सक्षम जैसे उपकरण शामिल हैं।