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झारखंड छात्र आंदोलन में समर्थन देने जाएंगे CJP फाउंडर अभिजीत दीपके

झारखंड / सत्ता संदेश

छत्रपति संभाजीनगर में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की दो दिवसीय कोर कमेटी की बैठक शुरू है. बैठक के पहले दिन संगठन के प्रमुख अभिजीत दिपके और प्रवक्ता सौरभ दास ने मीडिया से बातचीत करते हुए संगठन की आगे की रणनीति, झारखंड छात्र आंदोलन और देशभर में संगठन के विस्तार को लेकर अपनी बात रखी.

झारखंड आंदोलन को पूरा समर्थन

अभिजीत दिपके ने कहा कि CJP झारखंड के छात्र आंदोलन का पूरा समर्थन करती है और संगठन का प्रतिनिधिमंडल झारखंड जाकर आंदोलनकारियों के साथ खड़ा होगा. उन्होंने कहा कि बैठक में देशभर में संगठन को मजबूत करने और आगे के रोडमैप पर चर्चा की जा रही है.

राजनीति में आने की कोई योजना नहीं

राजनीति में प्रवेश के सवाल पर दिपके ने कहा कि CJP की राजनीति में आने की कोई इच्छा नहीं है. उन्होंने कहा कि देश में राजनीतिक दलों की स्थिति चिंताजनक है, जहां विधायक और सांसद लगातार दल बदल रहे हैं. ईडी और सीबीआई जैसी एजेंसियों के जरिए राजनीतिक दलों को तोड़ने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर सभी को साथ आना होगा. उन्होंने बताया कि बैठक में मीडिया, न्यायपालिका, बेरोजगारी और E20 नीति जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होगी.

सोनम वांगचुक बैठक में शामिल नहीं

दिपके ने बताया कि सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की तबीयत ठीक नहीं होने के कारण वह बैठक में शामिल नहीं हो सके. उन्होंने कहा कि बैठक के दूसरे दिन दोपहर दो बजे मीडिया को संगठन के अंतिम निर्णय और आगे की रणनीति की जानकारी दी जाएगी.

लाठीचार्ज और FIR वापस लेने का मुद्दा

CJP के प्रवक्ता सौरभ दास ने कहा कि आंदोलन के दौरान जिन छात्रों पर लाठीचार्ज और पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया, उनके खिलाफ कार्रवाई करने वाले पुलिसकर्मियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि आंदोलन में घायल हुए छात्रों को पहले दिन से कानूनी और चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है. केवल दिल्ली ही नहीं, बल्कि जिन-जिन राज्यों में आंदोलन हुए, वहां के आंदोलनकारियों की भी CJP मदद कर रही है.

सौरभ दास ने दावा किया कि सरकार के प्रतिनिधियों के साथ लगातार बातचीत जारी है, जिसके चलते कई राज्यों में आंदोलनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस ली जा चुकी हैं, जबकि बाकी मामलों में भी कार्रवाई के लिए प्रयास जारी हैं।

‘डॉक्सिंग अभियान’ पर कार्रवाई की मांग

आंदोलन में शामिल छात्राओं से माफी मंगवाए जाने और उनके खिलाफ कथित ऑनलाइन अभियान पर सौरभ दास ने कहा कि छात्राओं के खिलाफ डॉक्सिंग अभियान चलाया गया, जो पूरी तरह गलत और अवैध है. उन्होंने आरोप लगाया कि इस अभियान में भाजपा और आरएसएस समर्थक लोग शामिल थे और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए.

सोनम वांगचुक हमारे मार्गदर्शक हैं

सौरभ दास ने कहा कि सोनम वांगचुक CJP के मार्गदर्शक (मेंटर) हैं और संगठन आगे भी उनसे सलाह लेता रहेगा.

कॉकरोच जनता पार्टी मामले पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, तत्काल सुनवाई से किया इनकार

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

Supreme Court of India ने सोमवार को फर्जी वकीलों और कथित तौर पर व्यंग्यात्मक डिजिटल मंच कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) से जुड़ी गतिविधियों की जांच की मांग करने वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया। हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बनी सीजेपी को लेकर दायर इस याचिका पर अदालत ने फिलहाल कोई तात्कालिक राहत देने से मना कर दिया।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख अधिवक्ता एन.के. गोस्वामी ने किया। उन्होंने अदालत से इस मामले में जल्द सुनवाई की मांग करते हुए आरोप लगाया कि फर्जी वकीलों और डिजिटल मंच की गतिविधियों से न्याय व्यवस्था और समाज में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है।

हालांकि, पीठ ने तत्काल सुनवाई की मांग को स्वीकार नहीं किया। सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि वह इस मुद्दे को “इतने भावुक तरीके” से न लें। अदालत की इस टिप्पणी को मामले में फिलहाल संयम बरतने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

बताया जा रहा है कि कॉकरोच जनता पार्टी नामक यह डिजिटल मंच व्यंग्यात्मक और राजनीतिक कटाक्ष से जुड़े कंटेंट के कारण सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ है। इसके कई पोस्ट और वीडियो को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ लोगों ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा बताया, जबकि कुछ ने इसकी सामग्री पर आपत्ति जताई है।

याचिका में कथित तौर पर मंच से जुड़े लोगों की गतिविधियों और फर्जी वकीलों के नेटवर्क की जांच कराने की मांग की गई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने मामले की तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए यह स्पष्ट संकेत दिया कि हर वायरल या चर्चित विषय पर आपात सुनवाई जरूरी नहीं होती।

अब माना जा रहा है कि याचिकाकर्ता नियमित प्रक्रिया के तहत मामले को सूचीबद्ध कराने की कोशिश करेगा, जिसके बाद भविष्य में इस पर सुनवाई हो सकती है।