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IMPCC की बैठक में सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार और विभागीय समन्वय पर जोर

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

चंडीगढ़ स्थित CSIR–इंस्टीट्यूट ऑफ माइक्रोबियल टेक्नोलॉजी (CSIR-IMTECH) में सोमवार को इंटर मीडिया पब्लिसिटी कोऑर्डिनेशन कमेटी (IMPCC) की अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक का आयोजन पत्र सूचना कार्यालय (PIB), क्षेत्रीय कार्यालय चंडीगढ़ के समन्वय से किया गया। इसमें केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों और संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों एवं प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

बैठक में केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी आम जनता तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने, विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा डिजिटल एवं सोशल मीडिया माध्यमों के रणनीतिक इस्तेमाल पर विशेष जोर दिया गया।

बैठक की शुरुआत में CSIR–IMTECH की निदेशक अलका राव ने संस्थान की प्रमुख उपलब्धियों और माइक्रोबियल विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में किए जा रहे अनुसंधान की जानकारी दी। उन्होंने माइक्रोब्स डिपॉजिटरी, बायोइकोनॉमी, बायोसेफ्टी और माइक्रोबियल टेक्नोलॉजी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में संस्थान की भूमिका पर प्रकाश डाला।

उन्होंने बताया कि CSIR–IMTECH राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ सहयोग के माध्यम से अनुसंधान और नवाचार को आगे बढ़ा रहा है। इस दौरान NASA सहित विभिन्न संस्थानों के साथ वैज्ञानिक सहयोग और माइक्रोबियल रिसर्च से जुड़े प्रयासों की भी जानकारी साझा की गई।

श्रीमती अलका राव ने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी उपलब्धियों को समाज से जोड़ना बेहद जरूरी है। आम लोगों को विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में हो रही प्रगति की जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध कराने से इसका व्यापक सामाजिक लाभ सुनिश्चित किया जा सकता है।

सरकारी योजनाओं के प्रचार में समन्वय पर जोर

PIB, क्षेत्रीय कार्यालय चंडीगढ़ के निदेशक प्रीतम सिंह ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि IMPCC विभिन्न सरकारी विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने का महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के अलग-अलग विभाग अपने स्तर पर कई जनहितकारी योजनाएं और कार्यक्रम चला रहे हैं, लेकिन बेहतर अंतर-विभागीय समन्वय के जरिए इनकी पहुंच को और व्यापक बनाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि विभागों को अपने कार्यक्रमों और अभियानों को व्यापक जनहित के नजरिए से एक-दूसरे के साथ जोड़ना चाहिए। उपलब्ध संसाधनों और संचार माध्यमों का सामूहिक रूप से प्रभावी इस्तेमाल करने से सरकारी योजनाओं की जानकारी ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाई जा सकती है।

सोशल मीडिया के रणनीतिक इस्तेमाल पर जोर

केंद्रीय संचार ब्यूरो (CBC), चंडीगढ़ की उप निदेशक सपना ने भी बैठक को संबोधित किया। उन्होंने IMPCC के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सरकारी संचार को प्रभावी बनाने के लिए विभागों के बीच नियमित संवाद और समन्वय जरूरी है।

उन्होंने सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों के प्रचार-प्रसार में सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म की बढ़ती भूमिका पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी तक सरकारी पहलों की जानकारी पहुंचाने के लिए डिजिटल माध्यमों का रणनीतिक उपयोग किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार और युवाओं के बीच सीधा संवाद स्थापित करने के साथ-साथ उन्हें विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं और कार्यक्रमों से जोड़ने की भी व्यापक संभावनाएं हैं।

कई केंद्रीय विभागों के प्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा

बैठक में सीमा सुरक्षा बल (BSF), आकाशवाणी (AIR), दूरसंचार विभाग, उच्च शिक्षा विभाग, दूरदर्शन, राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO), इंडियन ऑयल, पेट्रोलियम क्षेत्र, MY Bharat, राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS), भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI), PRO Defence, जनगणना विभाग, भारतीय मानक ब्यूरो (BIS), IISER, SLBC, आयकर विभाग और PEC सहित विभिन्न केंद्रीय विभागों एवं संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

प्रतिनिधियों ने अपने-अपने विभागों की गतिविधियों, आगामी कार्यक्रमों और जनहितकारी पहलों की जानकारी साझा की। साथ ही सरकारी संचार, प्रचार-प्रसार और जनभागीदारी को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए सुझाव भी दिए गए।

बैठक के अंत में विभिन्न विभागों के बीच निरंतर समन्वय बनाए रखने और सरकारी योजनाओं एवं जनकल्याणकारी कार्यक्रमों की जानकारी को सरल, प्रभावी और व्यापक तरीके से आम जनता तक पहुंचाने पर सहमति बनी।

“CSIR-IMTECH में VCARE-2026 शुरू, 60 से ज्यादा शोधकर्ता सीखेंगे नैतिक पशु अनुसंधान के गुर”

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

बायोमेडिकल और प्रीक्लिनिकल रिसर्च में पशु संसाधनों के नैतिक एवं वैज्ञानिक उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सीएसआईआर-सूक्ष्मजीव प्रौद्योगिकी संस्थान (CSIR-IMTECH) में पांच दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला VCARE-2026 का शुभारंभ किया गया। कार्यशाला का आयोजन IMTECH सेंटर फॉर एनिमल रिसोर्सेज एंड एक्सपेरिमेंटेशन (iCARE) की ओर से CSIR Integrated Skill Initiative के तहत 7 से 11 सितंबर तक किया जा रहा है।

इस राष्ट्रीय कार्यशाला में देशभर के प्रमुख शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों से 60 से अधिक शोधकर्ता हिस्सा ले रहे हैं। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शोधकर्ताओं और संबंधित कर्मचारियों को प्रयोगशाला पशुओं की हैंडलिंग, बायोसेफ्टी, गुड लेबोरेटरी प्रैक्टिस (GLP) और पशु अनुसंधान में नैतिक मानकों से संबंधित व्यावहारिक एवं तकनीकी प्रशिक्षण देना है।

कार्यशाला में बायोमेडिकल रिसर्च में पशु संसाधनों के जिम्मेदार और नैतिक उपयोग के साथ-साथ बायोटेक्नोलॉजी और फार्मास्युटिकल क्षेत्र में उनके महत्व पर विशेष जोर दिया जा रहा है। खासतौर पर वैक्सीन विकास और नई दवाओं की खोज से जुड़े प्रीक्लिनिकल रिसर्च में पशु मॉडलों की भूमिका पर विशेषज्ञ प्रशिक्षण दिया जाएगा।

कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर CSIR-IMTECH के iCARE प्रमुख डॉ. नीरज खत्री ने प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने in vivo प्रयोगों में प्रशिक्षित और दक्ष कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक शोध में पशु संसाधनों के उचित प्रबंधन और प्रयोग के लिए विशेषज्ञ प्रशिक्षण बेहद जरूरी है।

CSIR-IMTECH की निदेशक डॉ. अल्का राव ने मेडिकल और बायोमेडिकल रिसर्च में प्रयोगशाला पशुओं की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने इस विशेष क्षेत्र में क्षमता निर्माण के लिए iCARE टीम की ओर से आयोजित कार्यशाला की सराहना की।

कार्यशाला का औपचारिक उद्घाटन PGIMER चंडीगढ़ के फार्माकोलॉजी विभाग के प्रोफेसर विकास मेधी ने किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल प्रोफेसर मेधी ने नैतिक, गुणवत्ता-आधारित और पुनरुत्पादनीय पशु अनुसंधान को मजबूत करने के लिए क्षमता निर्माण की आवश्यकता पर जोर दिया।

अपने संबोधन में उन्होंने पशु अनुसंधान में Good Laboratory Practice (GLP) के महत्व पर चर्चा की। उन्होंने नियामक नियमों का पालन, गुणवत्ता आश्वासन, मानकीकृत प्रक्रियाओं और डेटा की प्रामाणिकता को विश्वसनीय प्रीक्लिनिकल रिसर्च की बुनियादी जरूरत बताया।

उद्घाटन सत्र के दौरान गणमान्य अतिथियों की मौजूदगी में कार्यशाला मैनुअल भी जारी किया गया। इस अवसर पर CSIR-IMTECH की निदेशक डॉ. अल्का राव ने मुख्य अतिथि प्रोफेसर विकास मेधी का सम्मान किया।

पांच दिवसीय तकनीकी कार्यक्रम में IIT रोपड़, NIPER, IISER, INST, BRIC-NABI मोहाली, पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़, NBRC मानेसर, LUVAS हिसार, GADVASU लुधियाना और CSIR-IMTECH सहित कई प्रमुख संस्थानों के विशेषज्ञ प्रशिक्षण देंगे।

कार्यशाला में प्रतिभागियों को सैद्धांतिक जानकारी के साथ-साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। उनके ज्ञान और कौशल का मूल्यांकन थ्योरी परीक्षा तथा प्रैक्टिकल असेसमेंट के माध्यम से किया जाएगा। इसके अलावा प्रतिभागियों से प्राप्त फीडबैक के आधार पर भविष्य में होने वाले प्रशिक्षण कार्यक्रमों को और बेहतर बनाने का प्रयास किया जाएगा।

CSIR-IMTECH में मौजूद iCARE सुविधा अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे के साथ उच्च गुणवत्ता वाले प्रयोगशाला पशु संसाधन उपलब्ध कराती है। इनमें आनुवंशिक रूप से परिभाषित माउस मॉडल, चूहे, हैम्स्टर और खरगोश शामिल हैं। इन संसाधनों का उपयोग अत्याधुनिक बायोमेडिकल और प्रीक्लिनिकल रिसर्च को आगे बढ़ाने में किया जाता है।

VCARE-2026 के माध्यम से शोधकर्ताओं को नैतिक पशु अनुसंधान से जुड़े उन्नत कौशल, वैज्ञानिक प्रक्रियाओं और सर्वोत्तम प्रथाओं से परिचित कराया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार, इस तरह के क्षमता निर्माण कार्यक्रम भारत में बायोमेडिकल और फार्मास्युटिकल विज्ञान में अनुसंधान, नवाचार और वैज्ञानिक प्रगति को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

CSIR-IMTECH सूक्ष्मजीव विज्ञान के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर का प्रमुख अनुसंधान संस्थान है, जिसकी स्थापना 1984 में हुई थी। संस्थान का उद्देश्य बुनियादी वैज्ञानिक खोजों को अत्याधुनिक तकनीकों और प्लेटफॉर्म के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा तथा औद्योगिक क्षेत्र की जरूरतों से जोड़ते हुए एक मजबूत ट्रांसलेशनल रिसर्च इकोसिस्टम विकसित करना है।

Russia Avalanche: 11 पर्वतारोहियों की मौत, 6 लापता, रेस्क्यू ऑपरेशन में मौसम बना बाधा

वर्ल्ड डेस्क / सत्ता संदेश

रूस के उत्तरी काकेशस क्षेत्र में एक दर्दनाक हिमस्खलन ने बड़ी तबाही मचा दी है। काबारडिनो-बाल्कारिया क्षेत्र के बेजेंगी गॉर्ज में आए भीषण हिमस्खलन की चपेट में आने से 11 पर्वतारोहियों की मौत हो गई, जबकि 6 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। हादसे में छह अन्य पर्वतारोही घायल हुए हैं।

स्थानीय इमरजेंसी सर्विस के अनुसार, खराब मौसम और दुर्गम पहाड़ी इलाका राहत एवं बचाव अभियान में बड़ी चुनौती बन रहा है। लगातार हिमस्खलन के खतरे के बीच बचाव दल लापता पर्वतारोहियों की तलाश में जुटे हुए हैं।

33 पर्वतारोहियों के दल को बनाया निशाना

हादसा रविवार शाम करीब 5 बजे स्थानीय समय के अनुसार बेजेंगी गॉर्ज में हुआ। बताया जा रहा है कि करीब 5,025 मीटर ऊंचे माउंट मिजिरगी से अचानक भारी मात्रा में बर्फ नीचे की ओर खिसकी और 33 पर्वतारोहियों के समूह को अपनी चपेट में ले लिया।

हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय बचाव दल को मौके पर भेजा गया। इसके अलावा एमआई-8 हेलीकॉप्टर की भी मदद ली गई। शुरुआती अभियान में तीन पर्वतारोहियों को सुरक्षित बाहर निकालकर नालचिक पहुंचाया गया।

इमरजेंसी सर्विस के मुताबिक सोमवार सुबह करीब 9 बजे तक 10 पर्वतारोही खुद पहाड़ से नीचे उतरने में सफल रहे थे। हालांकि छह लोगों का अभी तक कोई पता नहीं चल सका है।

50 से ज्यादा बचावकर्मी अभियान में जुटे

लापता पर्वतारोहियों की तलाश के लिए 50 से ज्यादा इमरजेंसी वर्कर्स को अभियान में लगाया गया है। लेकिन क्षेत्र में खराब मौसम, कठिन पहाड़ी परिस्थितियों और दोबारा हिमस्खलन की आशंका के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन बेहद जोखिम भरा बना हुआ है।

बचाव दल बेहद सावधानी के साथ आगे बढ़ रहा है ताकि राहतकर्मियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सके।

इस साल पर्वतारोहियों की मौत की दूसरी बड़ी घटना

रूस में हुआ यह हादसा इस साल पर्वतारोहण से जुड़ी बड़ी त्रासदियों में एक है। इससे पहले 30 जुलाई को पाकिस्तान के गिलगित-बाल्टिस्तान स्थित ब्रॉड पीक पर भी हिमस्खलन ने कई पर्वतारोहियों की जान ले ली थी।

ब्रॉड पीक पर कैंप 2 और कैंप 3 के बीच हुए हादसे में कुल 10 पर्वतारोहियों की मौत हुई थी। मृतकों में विश्व प्रसिद्ध नेपाली पर्वतारोही निर्मल पुर्जा (निम्सदाई) भी शामिल थे।

इस अभियान में पांच नेपाली पर्वतारोही शामिल थे और दल का नेतृत्व निर्मल पुर्जा कर रहे थे। इसके अलावा पाकिस्तान, ओमान, अमेरिका और चीन के एक-एक पर्वतारोही भी दल का हिस्सा थे।

लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने एक बार फिर दुनिया के ऊंचे पर्वतीय इलाकों में बदलते मौसम और हिमस्खलन के गंभीर खतरे को उजागर किया है।

हलवारा-दिल्ली Air India फ्लाइट रद्द, 60 यात्री परेशान; 10 सितंबर से बदलेगा फ्लाइट टाइम

हलवारा से दिल्ली जाने वाली Air India की AI-482 फ्लाइट सोमवार को परिचालन कारणों से रद्द हो गई। करीब 60 यात्री परेशान हुए। 10 सितंबर से शाम की फ्लाइट का समय भी बदलेगा।

लुधियाना/ सत्ता संदेश

दिल्ली और हलवारा के बीच एयर इंडिया की हवाई सेवा एक बार फिर यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बन गई। सोमवार सुबह दिल्ली-हलवारा रूट पर संचालित होने वाली एयर इंडिया की उड़ान संख्या AI-481/AI-482 को परिचालन कारणों के चलते रद्द कर दिया गया। उड़ान पकड़ने के लिए हलवारा एयरपोर्ट पहुंचे करीब 60 यात्रियों को बिना यात्रा किए वापस लौटना पड़ा।

उड़ान रद्द होने की सूचना एयर इंडिया की ओर से सुबह करीब 3:30 बजे जारी की गई थी। इसके बावजूद कई यात्री निर्धारित समय से पहले हलवारा एयरपोर्ट पहुंच गए थे। एयरपोर्ट पहुंचने के बाद फ्लाइट कैंसिल होने की जानकारी मिलने पर यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

कुछ यात्रियों ने बदली यात्रा की योजना

फ्लाइट रद्द होने के बाद कुछ यात्रियों ने दोपहर की अगली उड़ान में अपनी सीट बुक कराई, जबकि कई यात्रियों ने अपनी यात्रा की तारीख ही आगे बढ़ा दी। यात्रियों का कहना है कि अचानक उड़ान रद्द होने की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था और आगे की यात्रा को लेकर स्पष्ट जानकारी समय पर मिलनी चाहिए।

एक ही विमान पर निर्भर है पूरा रोटेशन

हलवारा-दिल्ली उड़ान के रद्द होने की एक बड़ी समस्या यह भी है कि यह सेवा एक ही विमान के रोटेशन पर निर्भर रहती है। दिल्ली से विमान के हलवारा नहीं पहुंचने की स्थिति में हलवारा से दिल्ली जाने वाली उड़ान भी प्रभावित हो जाती है।

इसका सीधा असर यात्रियों पर पड़ता है और एक उड़ान में आई समस्या का प्रभाव दूसरी उड़ान के यात्रियों को भी झेलना पड़ता है।

पहले भी तकनीकी खराबी से परेशान हुए यात्री

हलवारा एयरपोर्ट से संचालित एयर इंडिया की उड़ानों को लेकर यात्रियों की परेशानी नई नहीं है। इससे पहले भी तकनीकी कारणों से उड़ानों में देरी हो चुकी है और यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ा है।

लगातार उड़ानों में देरी या कैंसिलेशन के कारण नियमित यात्रियों में नाराजगी बढ़ रही है। यात्रियों का सवाल है कि यदि किसी विमान में तकनीकी या परिचालन संबंधी समस्या सामने आती है तो यात्रियों को समय रहते इसकी जानकारी और वैकल्पिक यात्रा की सुविधा क्यों नहीं मिलती।

फिलहाल सोमवार की उड़ान रद्द होने को लेकर एयर इंडिया और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया की ओर से विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

दिल्ली की बारिश से भी प्रभावित हुआ हवाई परिचालन

दिल्ली में हाल के दिनों में हुई भारी बारिश का असर इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के हवाई परिचालन पर भी पड़ा है। 4 सितंबर को हुई मूसलाधार बारिश के बाद एयरपोर्ट के टर्मिनल-2 और टर्मिनल-3 के आसपास जलभराव की स्थिति सामने आई थी।

खराब मौसम, कम दृश्यता और तेज हवाओं के कारण कई उड़ानों के परिचालन पर असर पड़ा था। कई उड़ानों को डायवर्ट किया गया और यात्रियों को देरी का सामना करना पड़ा।

हालांकि, सोमवार को हलवारा-दिल्ली उड़ान रद्द होने की वजह एयर इंडिया ने परिचालन कारण बताई है।

अगस्त में हलवारा एयरपोर्ट पर घटे यात्री

उड़ानों में आ रही दिक्कतों के बीच हलवारा एयरपोर्ट के यात्री आंकड़ों में भी कमी दर्ज की गई है। अगस्त महीने में दिल्ली से हलवारा आने वाली उड़ानों में 4,976 यात्रियों ने सफर किया, जबकि हलवारा से दिल्ली जाने वाली उड़ानों में 5,780 यात्रियों ने यात्रा की।

हलवारा एयरपोर्ट के निदेशक जागीर सिंह के मुताबिक जून और जुलाई के दौरान छुट्टियों के कारण यात्रियों की संख्या अधिक थी, लेकिन अगस्त में करीब एक हजार यात्रियों की कमी देखने को मिली।

महंगा टैक्सी किराया भी यात्रियों के लिए चुनौती

हलवारा एयरपोर्ट से हवाई सफर करने वाले यात्रियों के सामने सिर्फ फ्लाइट से जुड़ी समस्या ही नहीं है। एयरपोर्ट तक पहुंचने और वहां से वापस आने के लिए टैक्सी का खर्च भी एक चुनौती बन रहा है।

यात्रियों के अनुसार एयरपोर्ट के आसपास सीमित टैक्सी विकल्प होने के कारण कई बार अधिक किराया चुकाना पड़ता है। लुधियाना के नियमित यात्री और चार्टर्ड अकाउंटेंट अंकुर महाजन का कहना है कि यदि हवाई टिकट के साथ आने-जाने का खर्च भी अधिक हो जाए तो यात्री सड़क या रेल यात्रा को प्राथमिकता दे सकते हैं।

10 सितंबर से बदलेगा शाम की फ्लाइट का समय

हलवारा एयरपोर्ट से शाम की उड़ान के समय में भी बदलाव होने जा रहा है। 10 सितंबर से शाम की फ्लाइट दोपहर 2:40 बजे के बजाय शाम 4:05 बजे हलवारा से रवाना होगी। हालांकि, सुबह की उड़ान के समय में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

हलवारा एयरपोर्ट से नियमित हवाई सेवा शुरू होना लुधियाना और आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों के लिए बड़ी सुविधा के तौर पर देखा गया था। 15 मई से शुरू हुई इस सेवा से दिल्ली कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद थी। लेकिन लगातार उड़ानों के प्रभावित होने और एयरपोर्ट तक पहुंचने की अतिरिक्त लागत के चलते अब यात्री सुविधाओं और सेवा की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

मुरादाबाद की मस्जिद पर बुलडोजर का साया, MDA ने 15 दिन में निर्माण हटाने का दिया नोटिस

मुरादाबाद में सरकारी जमीन पर बनी मस्जिद को लेकर MDA ने नोटिस जारी किया है। मुतवल्ली को 15 दिन में कथित अवैध निर्माण हटाने का निर्देश दिया गया है।

मुरादाबाद / सत्ता संदेश

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलक्ट्रेट परिसर में बनी करीब 100 साल पुरानी मस्जिद के ध्वस्तीकरण को लेकर राजनीतिक विवाद के बीच अब मुरादाबाद में भी एक मस्जिद को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई चर्चा में है। मुरादाबाद विकास प्राधिकरण (MDA) ने दिल्ली रोड स्थित पाकबड़ा थाना क्षेत्र में सरकारी जमीन पर बने एक कथित अवैध निर्माण को हटाने के लिए नोटिस जारी किया है।

एमडीए की ओर से मस्जिद के मुतवल्ली को जारी नोटिस में 15 दिनों के भीतर निर्माण को स्वयं हटाने का निर्देश दिया गया है। नोटिस में निर्धारित अवधि में कार्रवाई नहीं होने पर प्राधिकरण की ओर से नियमानुसार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई किए जाने की बात कही गई है।

करीब 300 वर्ग मीटर सरकारी जमीन का मामला

एमडीए के मुताबिक, दिल्ली रोड क्षेत्र में करीब 300 वर्ग मीटर सरकारी जमीन पर यह निर्माण किया गया है। प्राधिकरण का दावा है कि निर्माण की वजह से यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है। इसी आधार पर इसे अवैध निर्माण मानते हुए कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई है।

हालांकि, मस्जिद प्रबंधन की ओर से इसे काफी पुराना निर्माण बताया जा रहा है। नोटिस जारी होने के बाद मस्जिद कमेटी और स्थानीय लोगों के बीच इस कार्रवाई को लेकर चिंता बढ़ गई है।

सहारनपुर मामले के बीच बढ़ी राजनीतिक हलचल

मुरादाबाद में यह कार्रवाई ऐसे समय सामने आई है, जब सहारनपुर कलक्ट्रेट परिसर की करीब 100 साल पुरानी मस्जिद को हटाए जाने को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में विवाद चल रहा है। समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और आजाद समाज पार्टी समेत विपक्षी दल इस कार्रवाई को लेकर सरकार और प्रशासन पर सवाल उठा रहे हैं।

इसी बीच मुरादाबाद में मस्जिद को नोटिस दिए जाने से यह मामला भी राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा का विषय बन गया है।

पहले भी अवैध धार्मिक निर्माण पर हो चुकी है कार्रवाई

मुरादाबाद में सरकारी जमीन और सार्वजनिक स्थानों पर कथित अवैध धार्मिक निर्माण के खिलाफ प्रशासन पहले भी कार्रवाई कर चुका है। इससे पहले कांठ रोड पर सिद्ध अस्पताल के पास सड़क किनारे बने मस्जिदनुमा निर्माण को जिला प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में हटाया गया था।

इसके अलावा एमडीए की सेक्टर-10 योजना के तहत पार्क के लिए आरक्षित जमीन पर बनाए गए एक मीनारनुमा निर्माण को भी ध्वस्त कर जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया गया था।

MDA ने अवैध कब्जे पर कार्रवाई की बात कही

एमडीए अधिकारियों का कहना है कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे या बिना अनुमति किए गए निर्माण को स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसी नीति के तहत वर्तमान मामले में नोटिस जारी किया गया है।

फिलहाल मस्जिद प्रबंधन के पास नोटिस में दिए गए समय के भीतर निर्माण को लेकर कार्रवाई करने का विकल्प है। निर्धारित अवधि में निर्माण नहीं हटाए जाने की स्थिति में एमडीए की ओर से आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

जैव विविधता बोर्डों की 16वीं राष्ट्रीय बैठक, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से प्रभावी अमल पर जोर

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

राज्य जैव विविधता बोर्डों (SBBs) और केंद्र शासित प्रदेश जैव विविधता परिषदों (UTBCs) की 16वीं राष्ट्रीय बैठक का उद्घाटन सोमवार को चंडीगढ़ में हुआ। राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) की ओर से आयोजित दो दिवसीय बैठक में देशभर के जैव विविधता बोर्डों और परिषदों के अध्यक्षों, सदस्य सचिवों, वरिष्ठ अधिकारियों, वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। बैठक 6 और 7 सितंबर 2026 को आयोजित की जा रही है।

उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया, केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव और हरियाणा के पर्यावरण, वन एवं वन्यजीव मंत्री राव नरबीर सिंह ने की।

बैठक का मुख्य फोकस राज्य और स्थानीय स्तर पर जैव विविधता शासन व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने, संस्थागत तंत्र को मजबूत करने और स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ाने पर रहा।

पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने भारत की समृद्ध जैविक विरासत और पारंपरिक पर्यावरणीय ज्ञान का उल्लेख करते हुए कहा कि जैव विविधता संरक्षण को आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ पारंपरिक ज्ञान और सामुदायिक भागीदारी से जोड़ना जरूरी है। उन्होंने कहा कि पर्यावरणीय सुरक्षा का सीधा संबंध खाद्य और जल सुरक्षा, आजीविका तथा सतत विकास से है।

कटारिया ने आर्द्रभूमियों, नदी पारिस्थितिकी तंत्र और कृषि जैव विविधता के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने जैव विविधता प्रबंधन समितियों (BMCs) और जन जैव विविधता रजिस्टरों (PBRs) को मजबूत करने तथा जैव विविधता संस्थानों और स्थानीय समुदायों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता बताई।

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को संशोधित राष्ट्रीय जैव विविधता शासन ढांचे के अनुरूप अपने नियमों, संस्थागत व्यवस्थाओं और कार्यान्वयन प्रक्रियाओं में जरूरी बदलाव करने होंगे।

उन्होंने जैव विविधता अधिनियम, 2002, जैव विविधता (संशोधन) अधिनियम, 2023 और जैव विविधता नियम, 2024 का उल्लेख करते हुए कहा कि इन बदलावों का उद्देश्य देश में जैव विविधता शासन व्यवस्था को और मजबूत तथा सुव्यवस्थित करना है।

भूपेंद्र यादव ने कहा कि भारत जैव विविधता संरक्षण में वैज्ञानिक क्षमता के साथ-साथ स्थानीय और पारंपरिक सामुदायिक ज्ञान को भी महत्व देता है। उन्होंने मिशन LiFE, एक पेड़ मां के नाम, अमृत सरोवर और ग्रीन क्रेडिट कार्यक्रम जैसी पहलों का भी उल्लेख किया।

मंत्री ने जमीनी स्तर पर जैव विविधता संरक्षण को मजबूत करने पर जोर देते हुए जैव विविधता प्रबंधन समितियों को अधिक प्रभावी बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जन जैव विविधता रजिस्टर केवल दस्तावेज न रहकर स्थानीय निकायों के लिए गतिशील नियोजन उपकरण बनने चाहिए। इनमें स्थानीय जैव विविधता और उससे जुड़े पारंपरिक ज्ञान का दस्तावेजीकरण किया जाना चाहिए, ताकि स्थानीय स्तर पर सतत विकास की योजनाओं में इसका इस्तेमाल हो सके।

लाभ साझाकरण (Access and Benefit Sharing) के मुद्दे पर भूपेंद्र यादव ने बताया कि राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण की ओर से एबीएस निधि के तहत 200 करोड़ रुपये से अधिक की राशि किसानों, स्थानीय समुदायों, जैव विविधता प्रबंधन समितियों, राज्य जैव विविधता बोर्डों, केंद्र शासित प्रदेश जैव विविधता परिषदों और अनुसंधान संस्थानों के साथ साझा की गई है।

उन्होंने कहा कि एबीएस व्यवस्था का उद्देश्य जैव विविधता संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय समुदायों और हितधारकों को ठोस लाभ पहुंचाना भी है।

बैठक में जैव विविधता और जलवायु परिवर्तन के बीच संबंधों पर भी चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री ने भारत की अद्यतन राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति एवं कार्य योजना (NBSAP) 2024-2030 का उल्लेख करते हुए कहा कि यह कुनमिंग-मॉन्ट्रियल ग्लोबल बायोडायवर्सिटी फ्रेमवर्क के अनुरूप है।

उन्होंने पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली, प्रजातियों और उनके पर्यावासों के संरक्षण, कृषि जैव विविधता तथा जलवायु-लचीले परिदृश्यों के विकास में मापने योग्य परिणाम हासिल करने पर जोर दिया। साथ ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से वैश्विक 30-बाय-30 संरक्षण लक्ष्य में योगदान देने की अपील की।

हरियाणा के पर्यावरण, वन एवं वन्यजीव मंत्री राव नरबीर सिंह ने राज्य में जैव विविधता संरक्षण और पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली के प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्थानीय स्तर पर जैव विविधता प्रबंधन को मजबूत करने के साथ जैव विविधता प्रबंधन समितियों और स्थानीय समुदायों के प्रशिक्षण तथा क्षमता निर्माण को बढ़ाने की आवश्यकता बताई।

दो दिवसीय राष्ट्रीय बैठक में विभिन्न राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपने अनुभव, नवाचार और जैव विविधता संरक्षण से जुड़ी चुनौतियां साझा कर रहे हैं। बैठक के दौरान संस्थागत तंत्र को मजबूत करने, जैव विविधता प्रबंधन समितियों की कार्यप्रणाली में सुधार, जन जैव विविधता रजिस्टरों की गुणवत्ता और उपयोगिता बढ़ाने तथा स्थानीय स्तर पर जैव विविधता शासन को अधिक प्रभावी बनाने के उपायों पर चर्चा की जा रही है।

बैठक से निकलने वाले सुझावों का उद्देश्य देश में जैव विविधता संरक्षण को केवल सरकारी स्तर तक सीमित रखने के बजाय स्थानीय समुदायों, संस्थानों और प्रशासन की साझेदारी से अधिक प्रभावी और सतत बनाना है।

शिक्षक सिर्फ पढ़ाते नहीं, भविष्य गढ़ते हैं: शिक्षा में बदलती भूमिका और बढ़ती जिम्मेदारी

शिक्षक: शिक्षा के कलाकार : जयंत चौधरी

किसी को भी पहली बार पढ़ना सीखने का सटीक दिन याद नहीं होता। लेकिन लगभग हर व्यक्ति उन शिक्षकों को जरूर याद रखता है, जिन्होंने उसे पढ़ाया होता है। भूल जाने वाले पल और कभी न भुलाए जाने वाले व्यक्ति के बीच का यही अंतर हमें शिक्षण कार्य के बारे में कुछ बेहद जरूरी बातें बता जाता है। एक शिक्षक अपने पीछे ऐसी चीजें छोड़ जाता है, जिन्हें आसानी से आंक पाना संभव नहीं होता: कोशिश करने का आत्मविश्वास, डटे रहने का अनुशासन, सवाल पूछने की जिज्ञासा, या कभी-कभी मात्र यह भरोसा कि इंसान और भी बहुत कुछ कर सकता है। इसलिए, शिक्षण को एक कला से कम कुछ भी नहीं माना जा सकता।

भारत के महामहिम राष्ट्रपति द्वारा हर वर्ष प्रदान किए जाने वाले ‘राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार’ वास्तव में उन चुनिंदा लोगों के प्रति सम्मान होते हैं, जिनका योगदान दूसरों से कहीं बढ़कर रहा होता है। इन सबके अलावा, देश के हर कोने में – चाहे वह कक्षा हो या कौशल संबंधी प्रयोगशाला या पॉलिटेक्निक या खेल का मैदान या फिर संगीत कक्ष – विद्यार्थीगण धन्यवाद कहने का अपना-अपना तरीका ढूंढ ही लेते हैं। कभी हाथ से लिखी हुई एक टिप्पणी। कभी सुबह की सभा में आभार जताने का एक पल। कभी एक ऐसी खामोश सराहना जो दिन खत्म होने के काफी देर बाद तक शिक्षक के मन में बसी रहती है। ये कोई कमतर उत्सव नहीं हैं, बल्कि कई मायनों में ये सबसे सच्चे उत्सव हैं।

हालांकि, आंकड़े हमें एक और चिंताजनक कहानी बताते हैं। ओईसीडी का 2026 का ‘टीचर नॉलेज सर्वे’ किसी विषय की जानकारी होने और उसे पढ़ा पाने की क्षमता के बीच के अंतर की ओर इशारा करता है। इस सर्वेक्षण के निष्कर्षों से पता चलता है कि विषय का ज्ञान हमेशा कारगर शिक्षण-पद्धति में नहीं बदलता। बात बिल्कुल सरल, लेकिन बेहद जरूरी है: किसी चीज को गहराई से जानना और किसी दूसरे व्यक्ति को उसे सीखने में मदद करना – ये दोनों अलग-अलग कौशल  हैं। शिक्षण एक कला है और इसके लिए मानवीय रिश्तों एवं पढ़ाने के तरीकों की समझ के साथ-साथ कक्षा में थोड़ी नाटकीयता की भी जरूरत होती है।

यूनेस्को की ‘शिक्षकों से संबंधित वैश्विक रिपोर्ट 2024’ में इस पेशे की उपेक्षा  करने की कीमत को आंकड़ों में दर्शाया गया है। दुनिया को 2030 तक 44 मिलियन अतिरिक्त प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षकों की जरूरत होगी। और, इनमें से आधे से अधिक की जरूरत केवल उन शिक्षकों की जगह लेने के लिए होगी जो नौकरी छोड़ रहे हैं। वहीं, मैकिन्से ग्लोबल इंस्टीच्यूट का अनुमान है कि स्वचालन (ऑटोमेशन) के कारण 2030 तक दुनिया भर में 75 मिलियन से 375 मिलियन कामगारों को अपना पेशा बदलना पड़ सकता है। ऐसी परिस्थिति में, योग्य शिक्षकों की अहमियत पहले से कहीं अधिक होगी।

भारत ने इस चुनौती को समय रहते भांप लिया है और इससे पूरी गंभीरता से निपटने की दिशा में कदम उठाए हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत शुरू किए गए चार-वर्षीय ‘एकीकृत शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम’ में विषयगत   निपुणता तथा शिक्षण-पद्धति को एक ही स्नातक कि डिग्री में शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाओं को शिक्षण के पेशे की ओर आकर्षित करना है। सेवा में कार्यरत शिक्षकों के बीच एक जैसे मानक सुनिश्चित करने हेतु, ‘शिक्षकों के लिए राष्ट्रीय पेशेवर मानक (एनपीएसटी)’ के तहत करियर में तरक्की को मात्र वरिष्ठता के बजाय, पढ़ाने की असल गुणवत्ता से जोड़ा गया है। अलग-अलग क्षेत्रों में सीखने-सिखाने की प्रक्रिया का लाभ उठाने हेतु, ‘नेशनल मिशन फॉर मेंटरिंग (एनएमएम)’ शिक्षकों को अलग-अलग क्षेत्रों के मार्गदर्शकों (मेंटर) से सीखने के लिए व्यवस्थित सहायता प्रदान करता है। मैंने भी इस मिशन के लिए एक मेंटर के तौर पर पंजीकरण कराया है। माननीय प्रधानमंत्री हर वर्ष राष्ट्रीय पुरस्कार विजेताओं से न केवल बधाई देने के लिए, बल्कि उनकी बातें सुनने, जमीनी स्तर की उनकी कहानियां जानने और उनसे एक ऐसा दृष्टिकोण साझा करने के लिए भी मिलते हैं जो केवल अनुभवी नेतृत्व से ही प्राप्त हो सकता है। शिक्षण एक रचनात्मक काम है और अलग-अलग क्षेत्रों से सीखने-सिखाने की प्रक्रिया इस रचनात्मकता को नयापन प्रदान करती है।

भारत में ‘शिक्षक’ किसे माना जाए, इसका दायरा भी बढ़ाया जा रहा है और शायद यह सबसे अनूठा विचार है। ‘समाज में सभी के लिए आजीवन सीखने की समझ (उल्लास)’ यानी ‘न्यू इंडिया लिटरेसी प्रोग्राम’ इस सिद्धांत पर आधारित है कि हर साक्षर व्यक्ति एक निरक्षर व्यक्ति को पढ़ा सकता है। इस वर्ष जब हम ‘अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस’ मना रहे हैं, तो इस कार्यक्रम के तहत नौ राज्यों एवं केन्द्र-शासित प्रदेशों को पूरी तरह साक्षर घोषित किया गया है। शिक्षा मंत्रालय के ‘विद्यांजलि’ पोर्टल में भी यही भावना दिखाई देती है। यह पोर्टल 8.75 लाख से अधिक सरकारी स्कूलों को ऐसे वॉलंटियरों से जोड़ता है जो एक उपहार के रूप में अपनी विशेषज्ञताओं – चाहे वह नृत्य से संबंधित हो या गणित से या सार्वजनिक भाषण या फिर शिल्प से – को कक्षाओं में प्रदर्शित करते हैं। हर वॉलंटियर एक शिक्षक की भूमिका निभाता है। ये वॉलंटियर जो भी विषय पढ़ाते हैं, उसे बराबर का महत्व दिया जाता है। क्योंकि वास्तव में, शिक्षण कोई तकनीकी काम नहीं बल्कि एक कला है। हर अध्याय को पढ़ाने की योजना एक रचना जैसी होती है। हर व्याख्या एक प्रदर्शन सरीखी होती है। 

कोई भी कला किसी भी कलाकार में भेद नहीं करती। इसलिए हमारे मन में ऊंच-नीच की जो भी धारणा है, उसे परख कर खत्म करना जरूरी है। कभी-कभी संगीत  शिक्षक या शारीरिक शिक्षा के शिक्षक को पूरक और व्यावसायिक शिक्षा के  प्रशिक्षक को वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर देखा जाता। यह वर्गीकरण न केवल  अनुचित है, बल्कि पूरी तरह गलत भी है। परीक्षा का दबाव बढ़ने पर संगीत या व्यायाम मन को शांत कर सकते हैं, जिससे तैयारी में मदद मिलती है। भारत की बढ़ती रचनात्मक अर्थव्यवस्था (ऑरेंज इकोनॉमी) के साथ, अनेक कला रूप विद्यार्थियों को आधुनिक दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में से एक के लिए तैयार करेंगे। जैसे-जैसे खेल विश्वविद्यालय आकार ले रहे हैं और राष्ट्रीय खेल अवसंरचना को सुदृढ़ कर रहे हैं, खेल प्रशिक्षक तथा शारीरिक शिक्षा के शिक्षक एक विश्वसनीय करियर के द्वार खोलेंगे। सटीक मैन्यूफैक्चरिंग सिखा रहे आईटीआई के प्रशिक्षक, ऐसे कौशल विकसित कर रहे हैं जो पुलों के निर्माण और अस्पतालों को सुदृढ़  बनाने में सहायक हैं। यही राष्ट्र निर्माण का एक दूसरा स्वरूप है।

आज के दौर में जब मशीनें लगभग हर उस काम को करने में सक्षम हो रही हैं जिसका पहले से अनुमान लगाया जा सकता है, तब भी एक काम ऐसा है जिसकी जगह कोई नहीं ले सकता – और वह है शिक्षक का काम: एक ऐसा शिक्षक जो एक विद्यार्थी में ऐसी क्षमता देख लेता है जिसे खुद विद्यार्थी अभी नहीं देख पा रहा होता है। इस काम का कोई एल्गोरिदम नहीं है। यह स्कूल की घंटी बजने पर खत्म नहीं होता। और यह देश भर के हर तरह के संस्थान में, हर विषय के हर शिक्षक से जुड़ा है। 

एक लैटिन कहावत इस तथ्य को सटीक ढंग से रेखांकित करती है: नॉन स्कोलाए सेड विताए डिस्सिमस (Non scholae sed vitae discimus)। हम स्कूल के लिए नहीं, बल्कि जिंदगी के लिए सीखते हैं।

और इंसानी संभावनाओं का सच्चा कलाकार माना जाने वाला एक शिक्षक ही वही व्यक्ति है, जो इसे संभव बनाता है।

(लेखक केन्द्रीय शिक्षा तथा कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्यमंत्री हैं।)

International Vulture Awareness Day 2026: पंचकूला में भूपेंद्र यादव ने गिद्ध संरक्षण पर दिया जोर

पंचकूला में अंतर्राष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस 2026 पर केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने गिद्ध-सुरक्षित क्षेत्रों, सुरक्षित पशु चिकित्सा और तकनीकी क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया।

पंचकूला / पिंजौर / सत्ता संदेश

हरियाणा के पंचकूला में रविवार को अंतर्राष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस 2026 मनाया गया। इस अवसर पर केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने ‘संकट से उबरना—भारत के गिद्धों का संरक्षण’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन किया। कार्यक्रम में हरियाणा के पर्यावरण, वन एवं वन्यजीव मंत्री राव नरबीर सिंह समेत केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

कार्यशाला का उद्देश्य भारत में गिद्ध संरक्षण के लिए चल रहे प्रयासों को मजबूत करना और विभिन्न विभागों, वैज्ञानिकों, पशु चिकित्सकों, वन अधिकारियों तथा संरक्षण कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय बढ़ाना था। कार्यक्रम का आयोजन पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण, हरियाणा वन एवं वन्यजीव विभाग, बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (BNHS) और पिंजौर स्थित जटायु संरक्षण प्रजनन केंद्र (JCBC) के सहयोग से किया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भूपेंद्र यादव ने कहा कि सरकार का संरक्षण मॉडल किसी एक प्रजाति तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को ध्यान में रखकर काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बाघ, सुस्त भालू, ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, डॉल्फिन, घड़ियाल, जंगली जल भैंस और गिद्ध समेत विभिन्न वन्यजीवों के संरक्षण के लिए इसी व्यापक दृष्टिकोण के तहत प्रयास किए जा रहे हैं।

गिद्धों की पारिस्थितिकी तंत्र में अहम भूमिका

केंद्रीय मंत्री ने गिद्धों को प्रकृति की प्राकृतिक सफाई व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। गिद्ध मृत पशुओं के शवों को तेजी से खाकर पोषक तत्वों के पुनर्चक्रण और पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने कहा कि भारत कई निवासी और प्रवासी गिद्ध प्रजातियों का घर है। इनमें सफेद-पूंछ वाले गिद्ध, लंबी चोंच वाले गिद्ध, पतली चोंच वाले गिद्ध, लाल सिर वाले गिद्ध, मिस्र के गिद्ध, हिमालयी ग्रिफॉन, यूरेशियन ग्रिफॉन, सिनेरियस और दाढ़ी वाले गिद्ध शामिल हैं।

भूपेंद्र यादव ने कहा कि 1990 के दशक से भारत में गिद्धों की आबादी में तेज गिरावट देखी गई है। इसके प्रमुख कारणों में खाद्य श्रृंखला में बदलाव और पशुओं के उपचार में इस्तेमाल होने वाली कुछ दर्द निवारक दवाओं का गिद्धों पर पड़ने वाला घातक प्रभाव शामिल है। इसके अलावा जलवायु परिवर्तन और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसी चुनौतियां भी संरक्षण के लिए चिंता का विषय हैं।

गिद्ध-सुरक्षित क्षेत्रों के निर्माण पर जोर

केंद्रीय मंत्री ने गिद्धों के लिए गिद्ध-सुरक्षित क्षेत्र विकसित करने की दिशा में लगातार काम करने की जरूरत बताई। उन्होंने सुरक्षित पशु चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देने, गिद्धों के लिए सुरक्षित भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करने और वन्यजीव संरक्षण के लिए तकनीकी क्षमता विकसित करने पर जोर दिया।

उन्होंने पशु चिकित्सकों, पशुपालकों, स्थानीय प्रशासन और समुदायों से गिद्ध संरक्षण में सक्रिय भागीदारी की अपील की। साथ ही सुरक्षित शव प्रबंधन की प्रथाओं को अपनाने की जरूरत पर भी बल दिया।

पिंजौर के जटायु संरक्षण केंद्र का किया दौरा

राष्ट्रीय कार्यशाला से पहले भूपेंद्र यादव ने पिंजौर स्थित जटायु संरक्षण प्रजनन केंद्र (JCBC) का दौरा किया। उन्होंने केंद्र की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया, संरक्षण कार्यों से संबंधित प्रस्तुति देखी और गिद्ध संरक्षण में जुटे अधिकारियों से बातचीत की।

हरियाणा वन विभाग और बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी की संयुक्त पहल से विकसित यह केंद्र सफेद-पूंछ वाले, लंबी चोंच वाले और पतली चोंच वाले गिद्धों के संरक्षण प्रजनन के लिए महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में कार्य कर रहा है।

केंद्र में वैज्ञानिक पालन-पोषण, कृत्रिम ऊष्मायन, पशु चिकित्सा देखभाल, प्रजनन और आनुवंशिक प्रबंधन जैसी गतिविधियां की जाती हैं। 2025-26 के दौरान JCBC ने 356 गिद्धों को आश्रय दिया और 35 चूजों का सफल प्रजनन कराया। इसके अलावा 87 गिद्धों को प्राकृतिक आवास में छोड़ने या पुनर्वास में योगदान दिया गया, जबकि 90 पक्षियों को अन्य संरक्षण-प्रजनन संस्थानों में स्थानांतरित किया गया।

केंद्र ने गिद्ध संरक्षण से जुड़ी तकनीकी क्षमता को मजबूत करने के लिए 22 संस्थानों के 1,222 प्रतिभागियों को प्रशिक्षण भी दिया।

संरक्षण की सफलता सिर्फ संख्या से नहीं मापी जा सकती: राव नरबीर सिंह

हरियाणा के मंत्री राव नरबीर सिंह ने कहा कि पिंजौर स्थित जटायु संरक्षण प्रजनन केंद्र गिद्ध संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। उन्होंने कहा कि संरक्षण प्रजनन की सफलता का आकलन केवल पैदा हुए पक्षियों की संख्या के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने स्वस्थ और आनुवंशिक रूप से प्रबंधित आबादी तैयार करने, वैज्ञानिक ज्ञान विकसित करने, तकनीकी क्षमता बढ़ाने और गिद्धों को उनके प्राकृतिक आवास में संरक्षण देने में योगदान को भी सफलता का महत्वपूर्ण पैमाना बताया।

‘जटायु की कहानी’ कॉफी टेबल बुक का विमोचन

कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में ‘जटायु की कहानी: भारत के गिद्धों का संरक्षण’ नामक कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी किया गया। पुस्तक में भारत में गिद्धों की घटती आबादी से लेकर पिंजौर में जटायु संरक्षण प्रजनन केंद्र की स्थापना और संरक्षण प्रजनन कार्यक्रम की उपलब्धियों तक की यात्रा को दर्शाया गया है।

इस अवसर पर गिद्ध संरक्षण को लेकर आयोजित ऑनलाइन चित्रकला और डिजिटल फोटोग्राफी प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार भी प्रदान किए गए।

अंतर्राष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस 2026 के तहत आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला का संदेश स्पष्ट रहा कि भारत में गिद्धों के संरक्षण के लिए विज्ञान, नीति, सुरक्षित पशु चिकित्सा, संरक्षण प्रजनन, सुरक्षित प्राकृतिक क्षेत्र और सामुदायिक भागीदारी को एक साथ आगे बढ़ाने की जरूरत है।

लुधियाना के गुजरांवाला गुरु नानक पब्लिक स्कूल में मनाया गया टीचर्स डे, प्रो. गुरभजन सिंह गिल रहे मुख्य अतिथि

लुधियाना के गुजरांवाला गुरु नानक पब्लिक स्कूल में टीचर्स डे धूमधाम से मनाया गया। प्रो. गुरभजन सिंह गिल ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की और शिक्षकों को राष्ट्र निर्माता बताया।

लुधियाना / सत्ता संदेश

रोज़ गार्डन स्थित गुजरांवाला गुरु नानक पब्लिक स्कूल में टीचर्स डे बड़े उत्साह और जोश के साथ मनाया गया। इस अवसर पर स्कूल के विद्यार्थियों ने अपने शिक्षकों के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त करते हुए रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता पंजाबी लोक विरासत अकादमी, लुधियाना के चेयरमैन और गुजरांवाला गुरु नानक खालसा कॉलेज के पूर्व विद्यार्थी प्रो. गुरभजन सिंह गिल ने की। प्रो. गिल ने पंजाब के विभिन्न बड़े कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में 38 वर्षों तक अध्यापन किया है।

अपने संबोधन में प्रो. गुरभजन सिंह गिल ने कहा कि एक शिक्षक केवल विद्यार्थियों को पढ़ाता ही नहीं, बल्कि उन्हें पढ़ना और सीखना भी सिखाता है। उन्होंने अपने मेंटर डॉ. NSP सिंह को याद करते हुए कहा कि भले ही वे उनके औपचारिक शिक्षक नहीं रहे, लेकिन उनसे मिली सीख आज भी उनके जीवन में काम आ रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षक भी अपने विद्यार्थियों से बहुत कुछ सीखता है।

प्रो. गिल ने कहा कि गुजरांवाला इंस्टीट्यूशंस की मैनेजिंग कमेटी ने उन्हें गवर्निंग काउंसिल का सदस्य बनाकर उनकी जिम्मेदारी बढ़ाई है। उन्होंने कहा कि वह इस जिम्मेदारी के योग्य बनने के लिए पूरी ईमानदारी से प्रयास करेंगे।

स्कूल की प्रिंसिपल सरदारनी गुनमीत कौर ने कहा कि टीचर्स डे भारत के पूर्व राष्ट्रपति और महान शिक्षक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन के अवसर पर मनाया जाता है। उन्होंने विद्यार्थियों को ज्ञान के मार्ग पर आगे बढ़ने और शिक्षा को जीवन का आधार बनाने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने गुजरांवाला खालसा एजुकेशनल काउंसिल के प्रेसिडेंट और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी, अमृतसर के पूर्व वाइस-चांसलर डॉ. एस. पी. सिंह, जनरल सेक्रेटरी एस. हरशरण सिंह नरूला, मुख्य अतिथि प्रो. गुरभजन सिंह गिल, काउंसिल के सदस्य एस. हरदीप सिंह और आर्य कॉलेज मैनेजमेंट कमेटी के प्रेसिडेंट एस. एल. शर्मा का स्वागत किया।

मुख्य अतिथि प्रो. गुरभजन सिंह गिल ने कहा कि शिक्षक ही सच्चे राष्ट्र निर्माता होते हैं। शिक्षक वह दीपक हैं जो विद्यार्थियों के जीवन से अज्ञानता का अंधकार दूर कर ज्ञान की रोशनी फैलाते हैं।

इस मौके पर विद्यार्थियों ने अपने शिक्षकों के सम्मान में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किया। विद्यार्थियों ने शिक्षकों के लिए हाथ से बनाए गए सुंदर कार्ड और उपहार भी भेंट किए और उनके प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की।

कार्यक्रम के दौरान गुजरांवाला खालसा एजुकेशन काउंसिल, लुधियाना के एडमिनिस्ट्रेटर्स और स्कूल प्रिंसिपल ने मुख्य अतिथि प्रो. गुरभजन सिंह गिल को सम्मानित किया। इस अवसर पर सभी शिक्षकों की मेहनत, लगन और समर्पण की सराहना की गई तथा उन्हें सम्मान के प्रतीक के रूप में स्मृति चिह्न भेंट किए गए।

कार्यक्रम के अंत में स्कूल प्रिंसिपल सरदारनी गुनमीत कौर ने टीचर्स डे को यादगार बनाने के लिए विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना की और सभी शिक्षकों को टीचर्स डे की शुभकामनाएं दीं।

लुधियाना : धूमधाम से मनाई गई श्री कृष्ण जन्माष्टमी, मनीष सिसोदिया और MLA ग्रेवाल ने की शिरकत

लुधियाना / सत्ता संदेश

श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पवित्र त्योहार लुधियाना के हल्का पूर्वी के अलग-अलग मंदिरों और इलाकों में श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर मंदिरों में धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने हिस्सा लिया।

जन्माष्टमी समारोह में आम आदमी पार्टी के पंजाब इंचार्ज मनीष सिसोदिया और हल्का पूर्वी से विधायक दलजीत सिंह ग्रेवाल भोला विशेष रूप से मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए। दोनों नेताओं ने क्षेत्रवासियों और देशवासियों को श्री कृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दीं।

इस दौरान मनीष सिसोदिया ने कहा कि यह खुशी की बात है कि पंजाब में अलग-अलग धर्मों के लोग सभी त्योहारों को मिल-जुलकर और आपसी भाईचारे के साथ मनाते हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब का आपसी भाईचारा पूरे देश के लिए एक मिसाल है। धार्मिक आयोजनों के माध्यम से समाज में प्रेम, एकता और सद्भावना का संदेश जाता है।

विधायक दलजीत सिंह ग्रेवाल भोला ने पंजाब इंचार्ज मनीष सिसोदिया का जन्माष्टमी समारोह में पहुंचने पर धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि सिसोदिया विशेष तौर पर पंजाब के लोगों को इस पवित्र त्योहार की बधाई देने पहुंचे हैं, जिसके लिए वह इलाके और पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं की ओर से उनका आभार व्यक्त करते हैं।

ग्रेवाल ने कहा कि पंजाबी अपनी मेहनत, भाईचारे और जज्बे के लिए जाने जाते हैं। भगवान की कृपा से पंजाब के लोग हर क्षेत्र में चढ़दी कला में रहें, यही सभी की कामना है। उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों से मिलने वाला भाईचारे और सद्भावना का संदेश पंजाब को और मजबूत बनाता है।

उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और पार्टी की पूरी लीडरशिप का भी धन्यवाद किया और कहा कि पंजाब को विकास के रास्ते पर आगे ले जाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

समारोह के दौरान मंदिर कमेटियों और धार्मिक संस्थाओं की ओर से मनीष सिसोदिया को सम्मानित भी किया गया। जन्माष्टमी के अवसर पर आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों में श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला।

इस मौके पर धार्मिक संस्था के मुख्य सेवक बंटी बाबा, मेयर प्रिंसिपल इंद्रजीत कौर, पार्षद अश्वनी गोभी, पार्षद बारू ग्रेवाल, पार्षद अमरजीत सिंह, पार्षद लवली मनोचा, पार्षद जगदीश लाल दिशा, सुखदेव सिंह सुखा, बाज सिंह सिद्धू, पार्षद लकी चौधरी, पार्षद अनुज चौधरी, बाबू शर्मा, जसविंदर संधू, भूषण शर्मा, पार्षद निधि गुप्ता, गग्गी शर्मा, जसपाल लाली, रविंदर राजू, गिफ्टी, सुरजीत ठेकेदार, भारत भूषण मिंथू, राकेश पिंका, अंकुर गुलाटी, मनवीर संधू, सुच्चा फाबड़ा और गुरदीप लकी सहित बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और इलाके के निवासी मौजूद रहे।