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Neet Paper Leak मामले में CBI ने कोर्ट में पेश की 20 हजार पन्नों की चार्जशीट, 13 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज

दिल्ली / सत्ता संदेश

नीट पेपर लीक से जुड़े मामलों के लिए गठित स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है. CBI ने कोर्ट को बताया कि 20 हजार पेज की चार्जशीट है. जिसमें आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, साक्ष्य नष्ट करना, भ्रष्टाचार और लोक परीक्षा अधिनियम के तहत अपराध की धाराएं लगाई गई हैं.

CBI के मुताबिक चार्जशीट में 360 गवाह, 422 दस्तावेज, 43 भौतिक साक्ष्य हैं. 12 मई 2026 को उच्च शिक्षा विभाग की शिकायत पर FIR दर्ज की गई थी. नीट पेपर लीक मामले में गिरफ्तार सभी 13 आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं.

92 ठिकानों पर छापेमारी

CBI ने 8 साइबर विशेषज्ञ समेत 72 अधिकारियों की टीम बनाई थी और महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली समेत कई राज्यों में 92 ठिकानों पर छापेमारी की. इस दौरान डिजिटल उपकरण और दस्तावेज जब्त कर फोरेंसिक जांच की गई. CBI ने बताया कि फोरेंसिक, हैंडराइटिंग और शैक्षणिक रिपोर्ट से लीक की पुष्टि हुई है.

कुल 13 लोगों को किया गिरफ्तार

CBI के मुताबिक पहली गिरफ्तारी 13 मई 2026 को हुई थी. पेपर लीक मामले में कुल 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें NTA के 3 सब्जेक्ट एक्सपर्ट भी शामिल हैं. इसके साथ ही बिचौलियों और कोचिंग से जुड़े 2 लोगों को भी गिरफ्तार किया गया. CBI ने बताया कि मनी ट्रेल की जांच चल रही है. कई बैंक खाते, लॉकर और एक डीमैट खाता फ्रीज किया गया है.

अगली सुनवाई 3 अगस्त को होगी

राउज़ एवेन्यू कोर्ट स्थित स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट ने CBI की चार्जशीट को रिकॉर्ड पर लिया है. कोर्ट ने CBI को चार्जशीट के एनेक्सचर (Annexure) दाखिल करने के लिए तीन दिन का अतिरिक्त समय दिया है. कोर्ट ने नोट किया कि चार्जशीट में दस्तावेजों, बयानों और वस्तुओं की सूची संलग्न की गई है. कोर्ट ने CBI से पूछा कि चार्जशीट में जिन बयानों और अन्य दस्तावेजों का हवाला दिया गया है, वह कहां हैं.

CBI ने चार्जशीट के एनेक्स्चर दस्तावेज़ को दाखिल करने के लिए समय मांगा. CBI ने कोर्ट को बताया कि 20,000 पृष्ठों के एनेक्स्चर दस्तावेज़ को स्कैन किया जा रहा है. राउज़ एवेन्यू कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को होगी.

धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा पद से दिया इस्तीफा,CJP के प्रदर्शन के बाद बड़ा फैसला

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा, NEET विवाद और छात्र आंदोलन के बीच बड़ा फैसला

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्रों के प्रदर्शन के बीच बड़ी खबर सामने आ रही है। जिस शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर नीट छात्र धरना प्रदर्शन दे रहे थे, उन्होंने आखिरकर इस्तीफा दे दिया है।

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि मेरे युवा साथियों, मैं पिछले 4 दशकों से अधिक समय से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहा हूं। मेरा सदैव यह विश्वास रहा है कि एक सशक्त, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही सशक्त राष्ट्र की आधारशिला होती है।

 युवाओं की आकांक्षाओं, भावनाओं का सम्मान

मैं देश के युवाओं की आकांक्षाओं, भावनाओं और उनकी न्यायोचित अपेक्षाओं का गहरा सम्मान करता हूं। भारत की युवा पीढ़ी के सपनों को साकार करना हम सभी के राजनीतिक एवं सामाजिक जीवन का नैतिक संकल्प रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में राष्ट्र की सेवा करने का जो अवसर मुझे प्राप्त हुआ उसके लिए मैं प्रधानमंत्री मोदी का आभार प्रकट करता हूं।

सीबीटी मोड में परीक्षा कराने का लिया निर्णय

किंतु 3 मई 2026 को हुई NEET-UG की परीक्षा में सामने आई अनियमितता पाई गई। भारत सरकार ने इसको तुरंत संज्ञान में लेते हुए जांच सीबीआई को सौंपी और परीक्षा को रद किया एवं पुनः परीक्षा की तिथि घोषित की गई। इसके साथ ही अगले वर्ष से इस परीक्षा को सीबीटी (Computer-based-test) मोड में करने का निर्णय लिया गया।

इस दौरान हमारी प्रमुख प्राथमिकता यह रही कि 20 लाख से अधिक छात्रों की परीक्षा सुचारू रूप से आयोजित की जाए। इसके लिए whole of government approach के तहत काम किया गया। इसमें भारत सरकार के साथ राज्य सरकार, विशेषकर जिला प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। साथ ही, छात्रों, अभिभावक और माता-पिता के सहयोग से 21 जून 2026 को यह परीक्षा पूर्ण हुई।

पहले ही दिन से, इसपर मैंने जिम्मेदारी ली और इस परिस्थिति से कभी मुंह नहीं मोड़ा। मेरा यह संकल्प था कि हम किसी भी मेधावी छात्र की संभावना परीक्षा माफिया के कारण खराब नहीं होने देंगे, किसी भी छात्र के साथ अन्याय नहीं होने देंगे।

मेधावी छात्रों को मिली सफलता

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आगे लिखा कि 16 जुलाई को घोषित नीट-यूजी के परिणाम संतोषजनक रहे जिसमें गरीब पृष्ठभूमि से आए कई मेधावी छात्रों को भी सफलता मिली। परंतु इस दौरान भी कई छात्रों को गुमराह करने के लिए जिम्मेदार पदों पर बैठे व्यक्तियों ने बाधा डालने की कोशिश की, जिससे मन अत्यंत व्यथित हुआ।

मैं सदैव हमारे प्रजातंत्र की शक्ति में अटूट विश्वास रखने वाला रहा हूं तथा युवाओं की आकांक्षाओं, सपनों और अपेक्षाओं का गहरा सम्मान करता आया हूं। वे केवल भारत का भविष्य ही नहीं हैं, बल्कि एक नए और विकसित भारत के वाहक, निर्माता और भविष्य के शिल्पकार भी हैं।

यह मेरे लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं

धर्मेंद्र प्रधान ने आगे लिखा कि पिछले 10 दिनों का घटनाक्रम देखकर मेरा मन दुःखी है। यह मेरे लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है। भारत की युवाशक्ति ही, इस देश की असली ताकत है। देश की युवाशक्ति को भ्रम के कुचक्र में फंसने नहीं देंगे, यही मेरा संकल्प है।

जंतर-मंतर पर और देश में जो स्थिति बनी है, इस स्थिति का राष्ट्र विरोधी ताकतें लाभ ना उठाएं, देश की एकता बनी रहे, भारत के एक भी विद्यार्थी का भविष्य कानूनी पेचीदगियों में ना उलझे, हमारे बच्चे अपना समय पढ़ाई में लगाएं, करियर बनाने पर फोकस करें, इसी बात पर विचार करते हुए मैंने अपना त्यागपत्र (इस्तीफा) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया है।

मैं प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन, विश्वास और निरंतर सहयोग के लिए हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त करता हूं। साथ ही, मंत्रिपरिषद के अपने सभी सम्मानित सहयोगियों, मंत्रालय के अधिकारियों एवं कर्मचारियों तथा उन सभी व्यक्तियों का भी आभार व्यक्त करता हूं, जिनके साथ मुझे कार्य करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। राष्ट्रसेवा मेरे जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मैं इसके लिए सदैव समर्पित रहूंगा।

प्रभु श्रीजगन्नाथ जी के आशीर्वाद से मैं भविष्य में भी भारत माता, ओडिशा की जनता तथा देश के युवाओं की आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए हर संभव रूप में स्वयं को समर्पित रखूंगा।

पेपर लीक विधेयक को मिली मंजूरी…दोषियों को होगी 10 साल की सजा

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

मोदी कैबिनेट ने पेपर लीक संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी है। जंतर मंतर पर छात्रों के आंदोलन के बीच शुक्रवार को हुई बैठक में बिल को मंजूरी मिली। विधेयक में पेपर लीक करने वालों के खिलाफ 10 साल की सजा और 10 करोड़ के जुर्माने का प्रावधान है।

संशोधन बिल में पेपर लीक माफियाओ के खिलाफ कड़े प्रावधान हैं। फास्ट ट्रैक कोर्ट को तीन महीने में फैसला सुनाना होगा। विधेयक में दोषी को 10 साल की सजा और 10 करोड़ के जुर्माने का प्रावधान है। जानकारी के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह इस विधेयक को सोमवार को संसद में पेश करेंगे।

मौजूदा कानून में क्या है?

पेपर लीक और नक़ल के खिलाफ मौजूदा कानून सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम 2024 है। सरकार इसे और सख्त बना रही है। अभी व्यक्तिगत मामलों में तीन से पांच साल की सजा और दस लाख रुपए तक का जुर्माना है। वहीं सर्विस प्रोवाइडर पर एक करोड़ तक का जुर्माना है। संगठित अपराध में पांच से दस साल की सजा और न्यूनतम एक करोड़ का जुर्माना है।

मौजूदा कानून में एक और प्रावधान जोड़ा जाएगा, जिसके तहत ऐसे मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट अनिवार्य होंगे। इसमें विभिन्न स्तरों पर दंड का प्रावधान किया जाएगा। मौजूदा अधिनियम में आवश्यक संशोधन/अपडेट किए जाएंगे. डीओपीटी (कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग) मंत्रालय इस विधेयक का नोडल मंत्रालय होगा।

पीएम मोदी ने दिया था कड़ा संदेश

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को घोषणा की थी कि अगले हफ्ते संसद में एक विधेयक पेश किया जाएगा, जिसमें प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ सख्त प्रावधान होंगे। प्रधानमंत्री ने एक वीडियो संदेश में कहा कि विधेयक के मसौदे पर शुक्रवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की होने वाली बैठक में चर्चा की जाएगी, जिसमें प्रस्तावित कानून को अंतिम रूप दिया जाएगा।

पीएम मोदी ने कहा, सोमवार को जब संसद के मॉनसून सत्र का दूसरा हफ्ता शुरू होगा, तो प्रश्नपत्र लीक के मामलों में सख्त कार्रवाई के प्रावधानों वाला एक विधेयक लाया जाएगा और हम उसे जल्द से जल्द पारित कराने की कोशिश करेंगे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें ज्ञात है कि प्रश्नपत्र लीक कोई छोटी समस्या नहीं है और लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए ऐसी घटनाएं बेहद कष्टदायक होती हैं। उन्होंने कहा कि इसलिए, जब से नीट प्रश्नपत्र लीक के आरोप सामने आए हैं (करीब ढाई महीने पहले)तब से कई कड़े कदम उठाए गए हैं।

विपक्ष ने क्या कहा?

कांग्रेस ने प्रश्नपत्र लीक में शामिल लोगों को दंडित करने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने की प्रधानमंत्री मोदी की घोषणा को बहुत कम और बहुत देर से उठाया गया कदम करार दिया था. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि प्रश्नपत्र लीक रोकने में मोदी सरकार की विफलता, ऐसी घटनाएं होने पर उन्हें स्वीकार नहीं करने और उनकी निष्पक्ष जांच कराने में असमर्थता के लिए विद्यार्थी वास्तविक जवाबदेही चाहते हैं।

रमेश ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा, मांगें स्पष्ट हैं-पहली, शिक्षा मंत्री (धर्मेंद्र) प्रधान को बर्खास्त किया जाए। दूसरी, विद्यार्थियों से माफी मांगी जाए। तीसरी, उन पर हमला करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

दिल्ली में जारी है प्रदर्शन

बता दें कि दिल्ली के जंतर मंतर पर छात्रों का आंदोलन जारी है। सोनम वांगचुक ने भले ही अनशन तोड़ दिया है, लेकिन CJP के नेतृत्व में छात्रों का विरोध प्रदर्शन अब भी हो रहा है. अभिजीत दिपके ने कहा है कि जब तक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं हो जाता, तब तक हमारा धरना जारी रहेगा।

छात्रों के समर्थन में उतरे सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे, महाराष्ट्र में किया मौन आंदोलन

महाराष्ट्र / सत्ता संदेश

सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने गुरुवार को प्रदर्शनकारी छात्रों के समर्थन में महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में दो घंटे का मौन आंदोलन किया। उनका ये आंदोलन सुबह 11 बजे शुरू हुआ था, जो दोपहर 1 बजे खत्म हो गया। अन्ना हजारे ने अहिल्यानगर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास विरोध प्रदर्शन किया और उसके बाद वो इसी जिले में स्थित अपने गांव रालेगण सिद्धि के लिए रवाना हो गए। उन्होंने बीते बुधवार को पीएम मोदी को एक पत्र भी लिखा है, जिसमें कहा है कि हिंसा और पुलिस कार्रवाई की खबरें बेहद पीड़ादायक हैं।

अन्ना हजारे ने पत्र में आगे कहा है कि प्रदर्शनकारियों के असंतोष को कानून-व्यवस्था की समस्या के रूप में नहीं, बल्कि समाज की पीड़ा और अपेक्षाओं के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का नाम लिए बगैर कहा कि अगर किसी मंत्री से इस्तीफा देने को कहा जाता है तो इससे सरकार नहीं गिरेगी, बल्कि उसकी कार्यप्रणाली अधिक जवाबदेह और प्रभावी बनेगी। उन्होंने सरकार से प्रदर्शनकारियों की बात धैर्यपूर्वक सुनने, विश्वास का माहौल बनाने और सकारात्मक संवाद के जरिए समाधान तलाशने का अनुरोध किया है।

22 छात्रों की आत्महत्या की खबरों पर जताई चिंता

रिपोर्ट्स के मुताबिक, नीट (NEET) परीक्षा का जिक्र करते हुए हजारे ने अपने पत्र में लिखा है कि प्रश्न पत्र लीक होने और गंभीर अनियमितताओं के आरोप 2024 में और फिर 2026 में सामने आए। उन्होंने मेडिकल प्रवेश परीक्षा रद्द होने के बाद 22 छात्रों द्वारा आत्महत्या करने की खबरों पर भी चिंता व्यक्त की। अन्ना हजारे ने यह भी लिखा कि जब भी अनियमितताएं या घोटाले सामने आते थे, तो अक्सर जिम्मेदारी पूरी तरह से निचले स्तर के अधिकारियों पर डाल दी जाती थी, जबकि सरकार सकारात्मक परिणामों का श्रेय खुद ले लेती थी। उन्होंने आगे कहा कि सरकार को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन को कानून-व्यवस्था का मुद्दा मानने के बजाय जवाबदेही के साथ जवाब देना चाहिए।

सरकार छात्रों से बात करने को तैयार’

वहीं, इस मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह ने कहा कि सरकार की ओर से हम चर्चा करने को तैयार हैं, सरकार छात्रों से बात करने को तैयार है। उन्होंने कहा कि कल दोपहर से आज दोपहर तक 4 बार बातचीत करने का प्रस्ताव दिया गया है। पीएम इस विषय को लेकर संवेदानशील हैं, मैं विनम्रता से आग्रह करता हूं आइए बैठिए और चर्चा कीजिए. उन्होंने आगे कहा कि हम छात्रों के शर्तों पर बात करने को तैयार हैं।

फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी पेपर लीक की सुनवाई, PM मोदी का फैसला

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी छात्र आंदोलन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़ा फैसला लिया है। पेपर लीक मामले की सुनवाई के लिए उन्होंने फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन के निर्देश दिए हैं। अब इस मामले की सुनवाई इसी कोर्ट में होगी. प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी।

पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि देश के युवाओं का हित और उनका भविष्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। पेपर लीक के सभी मामलों में दोषियों को कड़ी सजा मिलेगी। केस के तुरंत निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित होगी।

उन्होंने कहा कि संबंधित विभाग को निर्देश जारी कर दिया गया है। हमारे लिए युवाओं से बढ़कर कुछ नहीं है। विद्यार्थियों के हित सुरक्षित करने के लिए ये एक बड़ा कदम है। युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

बता दें कि दो दिन पहले यानी 21 जुलाई को एनडीए संसदीय दल की बैठक ‘मंगल मिलन’ हुई थी। इस बैठक में पीएम मोदी नीट पेपर लीक मामले का जिक्र किया। बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मीडिया को संबोधित कर बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने इस पर क्या कहा। रिजिजू ने बताया कि पीएम मोदी ने कहा कि छात्रों का भविष्य खराब नहीं होने देंगे. पेपर लीक के दोषियों को कड़ी सजा मिलेगी. उन्होंने इसे घोर पाप बताया। पीएम ने कहा कि मामला सामने आते ही त्वरित कार्रवाई की गई. 13 लोगों को अरेस्ट किया गया। परीक्षा रद्द करने के बाद फिर से परीक्षा कराई गई। पीएम मोदी ने ये भी कहा कि आगे से कोई पेपर लीक न हो, इस बात का ध्यान रखा जाए।

पेपल लीक के मुद्दे पर संसद भी विरोध प्रदर्शन

बता दें कि पेपर लीक के मुद्दे पर विपक्ष लगातार पीएम मोदी पर निशाना साध रहे थे कि वो इस पर चुप्पी साधे हुए हैं, कुछ बोल नहीं रहे हैं, कोई बड़ा एक्शन नहीं ले रहे हैं। पीएम मोदी ने इस मामले में अपनी चुप्पी 21 जुलाई को ही तोड़ दी थी। उधर, पेपर लीक के मुद्दे पर दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले करीब एक महीने से कॉकरोच जनता पार्टी का विरोध प्रदर्शन हो रहा है। कांग्रेस सहित कई विपक्ष दल इसका समर्थन कर रहे हैं. विपक्षी दल अलग से भी इसको लेकर प्रोटेस्ट कर रहे हैं। संसद के मानसून सत्र में पिछले तीन दिनों से इस मुद्दे को उठाया जा रहा है। विपक्ष इस पर लगातार चर्चा की मांग कर रहा है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहा है।

NEET पेपर लीक पर दोषियों को होगी सजा, नहीं होगा छात्रों का भविष्य बर्बाद : पीएम मोदी

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

  • PM मोदी ने कहा कि छात्रों का भविष्य खराब नहीं होने देंगे.
  • छात्रों को लेकर सरकार संवेदनशील है, दलगत राजनीति न हो.
  • PM मोदी ने कहा- पेपर लीक के दोषियों को कड़ी सजा मिलेगी.

संसद के मानसूस सत्र के दूसरे दिन यानी मंगलवार को एनडीए संसदीय दल की बैठक हुई। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद थे। इस दौरान उन्होंने नीट पेपर लीक को लेकर बड़ी बात कही। पीएम मोदी ने कहा कि छात्रों का भविष्य खराब नहीं होने देंगे। पेपर लीक के दोषियों को कड़ी सजा मिलेगी। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस बात की जानकारी दी।

रिजिजू ने कहा कि बैठक में कई मुद्दों पर चर्चा हुई। नीट पेपर लीक पर पीएम मोदी ने सख्ती, सजा और फुलप्रुफ सिस्टम की बात की. पीएम मोदी ने कहा कि सरकार छात्रों को लेकर काफी संवेदनशील है. नीट पेपर लीक के मामले में 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. री-एग्जाम कराया गया और रिजल्ट में भी कोई विलंब नहीं हुआ. आगे पेपर लीक ना हो, इसके लिए सख्ती से कदम उठाया जाए.

NEET मामले में दलगत राजनीति नहीं हो

आरोपियों को सख्त से सख्त सजा दी जाए. ये सिर्फ एक राज्य नहीं पूरे देश का मामला है. इस मामले में दलगत राजनीति नहीं होना चाहिए. इसके अलावा फ्री-ट्रेड एग्रीमेंट की चर्चा हुई. पीएम मोदी ने कहा कि किसानों के हित को ध्यान में रखा जाएगा. कोई नुकसान नहीं होने देंगे. रिजिजू ने कहा कि पीएम मोदी ने मार्गदर्शन दिया, देश ने पिछले महीनों में जो सफलता हासिल की उसका जिक्र किया.

नीट पेपर लीक के मुद्दों पर छात्रों का प्रदर्शन

नीट पेपर लीक के मुद्दों पर पिछले करीब एक महीने से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन हो रहा है. इसका नेतृत्व कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके कर रहे हैं. छात्रों की एक बड़ी तादाद कुछ विपक्षी दल इसका पुरजोर समर्थन कर रहे हैं. सोमवार को CJP के समर्थक जंतर-मंतर से संसद की ओर मार्च निकाल रहे थे. पुलिस ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया. इस दौरान पुलिस और प्रदर्शकारियों के बीच हिंसक झड़प हो गई. इसमें कई लोग घायल हुए, जिसमें छात्र और पुलिस के जवान भी शामिल हैं.

हिंसक प्रदर्शन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी के डेलिगेशन ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की. इस दौरान सीजेपी ने सरकार ने मुख्य तीन मांगें रखीं. इनमें शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, सोनम वांगचुक की अस्पताल से रिहाई और नीट के जिन छात्रों ने आत्महत्या की है, उसे 1 करोड़ का मुआवजा. हालांकि, इन मांगों को लेकर सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. मगर सीजेपी का कहना है कि नड्डा ने उनसे कहा कि वो अपने शीर्ष नेतृत्व से इस मसले पर बात करेंगे.

Parliament Monsoon Session : 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलेगा मानसून सत्र, राष्ट्रपति ने दी मंजूरी

संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होगा। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने एक्स हैंडल पर एक पोस्ट में लिखा कि भारत सरकार की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 20 जुलाई से 13 अगस्त तक संसद के दोनों सदनों की बैठक बुलाने को मंजूरी दे दी है। संसदीय परिपाटी के मुताबिक मानसून सत्र दोनों सदनों के संयुक्त सत्र में राष्ट्रपति के अभिभाषण के साथ शुरू होगा। दोनों सदनों में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा भी कराई जाएगी। करीब तीन सप्ताह के इस मानसून सत्र में सरकार कई अहम विधेयकों को पारित कराने का प्रयास करेगी।

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के बयान में क्या?

केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने एक्स हैंडल पर लिखा, भारत सरकार की अनुशंसा पर, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मानसून सत्र 2026 में संसद के दोनों सदनों की बैठक बुलाने की स्वीकृति दे दी है। यह सत्र 20 जुलाई, 2026 से शुरू होकर 13 अगस्त, 2026 तक चलेगा। रिजिजू ने कहा कि मानसून सत्र के दौरान राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर सार्थक बहस, चर्चा और निर्णय लिए जाएंगे।

किन मुद्दों पर हंगामा कर सकता है विपक्ष?

बीते दिनों मेडिकल की पढ़ाई से जुड़ी प्रतियोगी परीक्षा- NEET के पेपर लीक, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग, उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर का चढ़ावा चोरी विवाद जैसे कई मामले लगातार सुर्खियों में है। ऐसे में संसद सत्र के दौरान हंगामा होने की आशंका है। इन मामलों के अलावा तृणमूल के दो फाड़ होने का मुद्दा भी चर्चा में है। नजरें स्पीकर ओम बिरला के फैसले पर टिकी हैं। कांग्रेस अंडमान की ग्रेट निकोबार परियोजना पर भी लगातार हमलावर है। ऐसे में हंगामे और नारेबाजी से सत्र की कार्यवाही बाधित हो सकती है।

बजट सत्र में कितना कामकाज हुआ?

इससे पहले संसद का बजट सत्र विगत 18 अप्रैल को समाप्त हुआ था। 28 जनवरी, 2026 को शुरू हुए संसद के बजट सत्र में कई अहम विधेयक पारित कराए गए थे। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के मुताबिक सत्र के दौरान 31 बैठकें हुईं। लगभग 151 घंटे 42 मिनट तक चली कार्यवाही के दौरान कई अहम विधेयकों पर चर्चा कराई गई थी। 

बजट सत्र के दौरान कौन से विधेयक पारित हुए थे?

  • औद्योगिक संबंध संहिता (संशोधन) विधेयक, 2026
  • उभयलिंगी व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2026
  • वित्त विधेयक, 2026
  • दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) विधेयक, 2026
  • आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2026
  • जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक, 2026
  • केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026

93 प्रतिशत उत्पादकता, चर्चा में कितने सदस्यों ने भाग लिया?

सदन की कार्यवाही स्थगित किए जाने से पहले स्पीकर ओम बिरला ने बताया था कि सत्र के दौरान 12 सरकारी विधेयक पुरःस्थापित किए गए और 09 विधेयक पारित किए गए। 131वें संविधान संशोधन विधेयक, 2026; संघ राज्यक्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक, 2026; और परिसीमन विधेयक, 2026 पर 21 घंटे 27 मिनट तक चर्चा हुई। इस चर्चा में 131 सदस्यों ने भाग लिया था। कुल कार्य-उत्पादकता लगभग 93 प्रतिशत रही थी।

CJP Protest : कॉकरोच जनता पार्टी की किन 5 मांगों पर खड़ा है आंदोलन?

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नई दिल्ली / सत्ता संदेश

दिल्ली के जंतर-मंतर पर शनिवार को कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी का बड़ा प्रदर्शन देखने को मिला। इस प्रदर्शन का नेतृत्व पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने किया। वो अमेरिका से भारत लौटने के बाद सीधे आंदोलन में शामिल हुए। भारी पुलिस सुरक्षा के बीच हजारों युवा, छात्र, अभिभावक और नौकरी की तैयारी कर रहे उम्मीदवार प्रदर्शन में पहुंचे। आंदोलन का केंद्र बिंदु शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा में गड़बड़ी और छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव को बनाया गया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी भी की।

आंदोलन की सबसे बड़ी मांग

सीजेपी आंदोलन की सबसे बड़ी मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि नीट पेपर लीक, सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली में कथित गड़बड़ी और भर्ती परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही समस्याओं ने छात्रों का भरोसा तोड़ दिया है। जंतर-मंतर पर मौजूद युवाओं ने कहा कि सरकार परीक्षा व्यवस्था को संभालने में विफल रही है। प्रदर्शन के दौरान धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो और मेक इन इंडिया नहीं, लीक इन इंडिया जैसे नारे लगाए गए। अभिजीत दीपके ने कहा कि यह लड़ाई लंबी है और छात्र अब पीछे हटने वाले नहीं हैं।

मांगक्या चाहते हैं प्रदर्शनकारी
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफापरीक्षा में गड़बड़ियों की जिम्मेदारी तय हो
निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्थानीट, सीबीएसई, सीयूईटी और एसएससी में पारदर्शिता हो  
डिजिटल शिक्षा में सुधारप्रशिक्षण और सुरक्षा के बाद ही लागू हो सिस्टम
मणिपुर में सामान्य शिक्षास्कूल-कॉलेज नियमित रूप से चलें
छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान     तनाव और आत्महत्या रोकने के लिए व्यवस्था

 

डिजिटल शिक्षा पर भी उठे सवाल

प्रदर्शन में शामिल कई अभिभावकों और छात्रों ने शिक्षा के तेजी से हो रहे डिजिटलीकरण पर भी सवाल उठाए। दिल्ली में पढ़ रहे छात्रों के पिता राधेश्याम कैथल ने कहा कि बिना तैयारी और प्रशिक्षण के डिजिटल सिस्टम लागू करने से गड़बड़ियां बढ़ रही हैं। उनका कहना था कि बैंकिंग से लेकर शिक्षा तक हर जगह डिजिटल व्यवस्था लागू हो रही है, लेकिन सुरक्षा और पारदर्शिता अभी भी कमजोर है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि शिक्षकों को पर्याप्त प्रशिक्षण देने और सिस्टम की जांच के बाद ही पूरी तरह डिजिटल शिक्षा लागू की जाए।

मणिपुर के छात्रों की परेशानी भी बनी मुद्दा
सीजेपी के प्रदर्शन में मणिपुर का मुद्दा भी जोरदार तरीके से उठा। मणिपुर से आए सामाजिक कार्यकर्ता विंसन ने कहा कि राज्य में पिछले तीन वर्षों से हालात सामान्य नहीं हैं। स्कूल और कॉलेज लगातार प्रभावित हो रहे हैं और छात्रों का भविष्य खतरे में है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि केंद्र सरकार मणिपुर में शिक्षा व्यवस्था को सामान्य बनाने के लिए तुरंत ठोस कदम उठाए। युवाओं का कहना था कि अशांत इलाकों में रहने वाले छात्रों के लिए अलग और सुरक्षित शिक्षा व्यवस्था बनाई जानी चाहिए।

मानसिक दबाव और आत्महत्या पर भी चिंता जताई

जंतर-मंतर पर जुटे युवाओं ने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को भी बड़ा मुद्दा बताया। प्रदर्शन में शामिल मनोवैज्ञानिक सुगंधा ने कहा कि लगातार परीक्षा गड़बड़ी और अनिश्चितता के कारण लाखों छात्र मानसिक तनाव में हैं। कई छात्रों ने आत्महत्या तक कर ली, लेकिन जवाबदेही तय नहीं हुई। राजस्थान की गायत्री सिंह ने कहा कि उनका रिश्तेदार तीन साल से नीट की तैयारी कर रहा था, लेकिन पेपर लीक के बाद उसका मनोबल टूट गया। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सहायता तंत्र बनाया जाए।

सोशल मीडिया से सड़क तक पहुंचा सीजेपी का आंदोलन

यह प्रदर्शन केवल ऑनलाइन अभियान तक सीमित नहीं रहा। बड़ी संख्या में स्कूल और कॉलेज के छात्र, युवा पेशेवर और अभिभावक जंतर-मंतर पहुंचे। कई प्रदर्शनकारी कॉकरोच मास्क पहनकर आए और हाथों में फूल लिए दिखे। अभिजीत दीपके ने प्रदर्शन को शांतिपूर्ण रखने की अपील की और पुलिसकर्मियों को फूल देने की बात कही। उन्होंने कहा कि आंदोलन संविधान और लोकतंत्र के दायरे में रहेगा। इस प्रदर्शन ने साफ संकेत दिया कि शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था को लेकर युवाओं के बीच गुस्सा तेजी से बढ़ रहा है।

नीट पेपर लीक मामला: सीबीआई की ताबड़तोड़ कार्रवाई, कई राज्यों में छापेमारी और गिरफ्तारियां शुरू

नई दिल्ली/जयपुर: नीट-यूजी 2026 (NEET-UG 2026) पेपर लीक मामले में केंद्र सरकार की सख्ती के बाद सीबीआई (CBI) ने कमान संभालते ही अपनी जांच तेज कर दी है। शिक्षा मंत्रालय की लिखित शिकायत पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने के बाद जांच एजेंसी ने कई स्थानों पर छापेमारी की और महत्वपूर्ण गिरफ्तारियां की हैं।

जमवारामगढ़ से पहली हिरासत: सीबीआई ने अपनी पहली बड़ी कार्रवाई राजस्थान के जमवारामगढ़ में की है, जहां एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है। बताया जा रहा है कि इस शख्स के दोनों बेटे पेशे से डॉक्टर हैं।नासिक में मेडिकल छात्र गिरफ्तार: जांच एजेंसियों ने महाराष्ट्र के नासिक से डॉ. शुभम खैरनार नाम के एक आरोपी को पकड़ा है। शुभम खुद भोपाल के एक कॉलेज में BAMS (आयुर्वेदिक चिकित्सा) के अंतिम वर्ष का छात्र है, जिससे इस नेटवर्क के गहरे और प्रोफेशनल संबंधों का पता चलता है।

गंभीर धाराओं में केस दर्ज: सीबीआई ने यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं जैसे आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, विश्वासघात, चोरी और सबूत मिटाने के तहत दर्ज किया है। इसके अलावा, ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट 2024’ और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं भी लगाई गई हैं।

परीक्षा की पवित्रता पर सवाल: शिकायत के अनुसार, 3 मई 2026 को आयोजित हुई परीक्षा से पहले ही कुछ दस्तावेजों का अनधिकृत प्रसार किया गया था। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को इस संबंध में इनपुट मिले थे, जिसके बाद सीबीआई अब दोषियों की पहचान के लिए विशेष टीमें गठित कर जांच कर रही है।