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पंजाब सरकार और कर्मचारियों के बीच बातचीत शुरू, DA समेत कई मांगों पर चर्चा

पंजाब मिनिस्ट्रियल यूनियन और मुख्यमंत्री के बीच कर्मचारियों की मांगों को लेकर बैठक हुई। DA, पे-स्केल, पुरानी पेंशन, 200 रुपये टैक्स और कंप्यूटर अध्यापकों समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई।

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

पंजाब में कर्मचारियों की विभिन्न मांगों को लेकर सरकार और मिनिस्ट्रियल यूनियन के बीच बातचीत का दौर शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री के साथ बैठक के बाद पंजाब मिनिस्ट्रियल यूनियन के अध्यक्ष गुरनाम सिंह विक्र ने बताया कि कर्मचारियों की मांगों को सरकार के सामने रखा गया है और कई मुद्दों पर चर्चा हुई है।

DA को लेकर सरकार के फैसले का इंतजार

DA के मुद्दे पर गुरनाम सिंह विक्र ने कहा कि सरकार की ओर से जो फैसला लिया जाएगा, उसे लागू किया जाएगा। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने 8 प्रतिशत DA से संबंधित दो पत्र जारी करने की बात कही है। इस मुद्दे पर अक्टूबर के पहले सप्ताह में अगली बैठक होने की बात भी सामने आई है।

2020 के कर्मचारियों के पे-स्केल की होगी जांच

बैठक में 17 जुलाई 2020 के बाद भर्ती हुए कर्मचारियों के पे-स्केल का मुद्दा भी उठाया गया। यूनियन के अनुसार मुख्यमंत्री ने इस पे-स्केल की जांच करवाने की बात कही है। इसके अलावा प्रोबेशन अवधि के दौरान तीन साल तक मिलने वाले 17 हजार और 19 हजार रुपये के वेतन से जुड़े मुद्दे पर भी विचार करने की बात कही गई।

पुरानी पेंशन योजना पर भी चर्चा

पुरानी पेंशन योजना को लेकर भी कर्मचारियों ने अपनी मांग सरकार के सामने रखी। यूनियन के मुताबिक सरकार ने इस मुद्दे पर विचार करने की बात कही है। इसके साथ ही कर्मचारियों पर लगाए गए 200 रुपये टैक्स को हटाने की मांग भी बैठक में रखी गई।

कच्चे कर्मचारियों के भत्तों का मुद्दा उठा

कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने की मांग के साथ-साथ कर्मचारियों को मिलने वाले भत्तों को पूरी तनख्वाह के साथ देने का मुद्दा भी सरकार के सामने रखा गया।

कंप्यूटर अध्यापकों को विभाग में लेने की मांग

कंप्यूटर अध्यापकों से संबंधित मुद्दे पर यूनियन ने कहा कि उन्हें सोसायटी के तहत काम करने से हटाकर नियमित करने की दिशा में कदम उठाया गया है, लेकिन उन्हें संबंधित विभाग में शामिल करने की मांग अभी बाकी है। इस मुद्दे को भी बैठक में उठाया गया।

अमन अरोड़ा बोले- अच्छे माहौल में हुई बातचीत

पंजाब के मंत्री अमन अरोड़ा ने कहा कि सरकार और कर्मचारियों के बीच आज अच्छे माहौल में बातचीत हुई। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की मांगों पर चर्चा की गई है और विभिन्न मुद्दों को हल करने के लिए उनके तकनीकी पहलुओं को भी समझा जाएगा।

DA को लेकर अमन अरोड़ा ने कहा कि 8 प्रतिशत DA अक्टूबर से लागू करने को लेकर फैसला हुआ है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत के जरिए मुद्दों को सुलझाने पर जोर दिया जा रहा है।

अमन अरोड़ा के अनुसार सरकार ने कर्मचारियों की सभी मांगों को खुले दिल से सुना है। उन्होंने कहा कि जिन मुद्दों पर तकनीकी पहलुओं की जरूरत है, उन पर आगे चर्चा की जाएगी।

बैठक में दोनों पक्षों के बीच इस बात पर भी सहमति बनी कि संबंधित मामले को लेकर सरकार और कर्मचारी पक्ष अदालत का रुख नहीं करेंगे और बातचीत के जरिए समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।

Tanda: सरकार के खिलाफ कर्मचारियों और पेशनर्स का प्रदर्शन, AAP दफ्तर तक निकाला मार्च

होशियारपुर / सत्ता संदेश

पंजाब सरकार के खिलाफ अलग-अलग विभागों के कर्मचारियों और पेंशनर्स ने टांडा उर्मुर में बड़ा विरोध प्रदर्शन किया। पंजाब कर्मचारी और पेंशनर्स के ज्वाइंट फोरम के आह्वान पर टीचर, PSPCL कर्मचारी, मिनिस्टीरियल स्टाफ, हेल्थ डिपार्टमेंट, आशा वर्कर्स, डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ समेत बड़ी संख्या में कर्मचारी सामूहिक छुट्टी लेकर प्रदर्शन में शामिल हुए।

कर्मचारियों के साथ पेंशनर्स ने भी प्रदर्शन में हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारी स्थानीय शिमला पहाड़ी पर एकत्र हुए और वहां से आम आदमी पार्टी के कार्यालय तक विरोध मार्च निकाला। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने पंजाब सरकार और मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

18 प्रतिशत महंगाई भत्ता रोकने का आरोप

प्रदर्शन में कर्मचारी नेताओं ने पंजाब सरकार पर कर्मचारियों और पेंशनर्स की मांगों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। नेताओं ने दावा किया कि कर्मचारियों का 18 प्रतिशत महंगाई भत्ता (DA) रोका गया है, जिससे महंगाई के इस दौर में लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

कर्मचारी नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी सरकार ने पुरानी पेंशन योजना को लेकर किए गए वादों और जारी किए गए नोटिफिकेशन के बावजूद कर्मचारियों की मांग पूरी नहीं की।

खाली पदों पर भर्ती की मांग

प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने पंजाब के अलग-अलग विभागों में खाली पड़े पदों को नियमित भर्ती के जरिए भरने की मांग उठाई। नेताओं ने कहा कि राजनीतिक फायदे के लिए डमी या लाभ वाली योजनाओं के बजाय सरकार को राज्य में बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने चाहिए।

प्रदर्शन के दौरान एक प्रस्ताव भी पारित किया गया, जिसमें कहा गया कि विभिन्न विभागों में खाली पड़े लाखों पदों पर नियमित भर्ती की जाए।

शिक्षकों और हेल्थ वर्कर्स की भी मांगें

प्रदर्शन में शिक्षकों ने कंप्यूटर टीचर्स को रेगुलर करने और विभिन्न विभागों में काम कर रहे कर्मचारियों को स्थायी करने की मांग उठाई। मिड-डे मील वर्कर्स, आशा वर्कर्स और आंगनवाड़ी वर्कर्स के मानदेय एवं भत्ते बढ़ाने की भी मांग की गई।

शिक्षक नेताओं ने नई शिक्षा नीति को वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि शिक्षकों को चुनाव, जनगणना, BLO और अन्य सर्वे जैसे गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाने के बजाय स्कूलों में पढ़ाने का काम करने दिया जाना चाहिए।

वहीं, मोहल्ला क्लीनिकों में काम कर रहे डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों को पूरे ग्रेड के साथ नियमित करने की मांग भी प्रदर्शन के दौरान उठाई गई।

इन नेताओं ने किया प्रदर्शन का नेतृत्व

प्रदर्शन का नेतृत्व शिक्षक नेता रमेश होशियारपुरी, लेफ्टिनेंट अमर सिंह, गुरदीप सिंह खुनखुन, पेंशनर नेता हरदीप खुदा और सुखदेव जाजा सहित अन्य कर्मचारी नेताओं ने किया।

नेताओं ने कहा कि यदि सरकार ने कर्मचारियों और पेंशनर्स की मांगों पर जल्द ठोस फैसला नहीं लिया तो संघर्ष को आगे और तेज किया जाएगा।