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शिवराज सिंह चौहान ने रायसेन से राष्ट्रव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ की शुरुआत की

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के रमासिया गांव से राष्ट्रव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ की शुरुआत की। यह अभियान 1 जून से 30 जून तक पूरे देश में चलाया जाएगा।

अभियान के शुभारंभ पर शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि “मिट्टी बचेगी तो खेती बचेगी, किसान मजबूत होगा और देश समृद्ध बनेगा।” उन्होंने किसानों से संतुलित उर्वरक उपयोग, मिट्टी परीक्षण, सॉयल हेल्थ कार्ड, प्राकृतिक खेती और जल संरक्षण को अपनाने की अपील की।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अधिक मात्रा में रासायनिक खाद और कीटनाशकों का उपयोग मिट्टी की उर्वरता को नुकसान पहुंचाता है। इसलिए किसानों को मिट्टी की जांच के आधार पर ही खाद और उर्वरकों का उपयोग करना चाहिए।

उन्होंने बताया कि ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत कृषि वैज्ञानिक, कृषि विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञ, कृषि विज्ञान केंद्रों के अधिकारी और कृषि विभाग की टीमें गांव-गांव जाकर किसानों को जागरूक करेंगी। किसानों को मिट्टी परीक्षण, प्राकृतिक खेती, आधुनिक बुवाई तकनीक, जल संरक्षण और उन्नत कृषि पद्धतियों की जानकारी दी जाएगी।

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हर किसान के पास सॉयल हेल्थ कार्ड होना चाहिए, ताकि वह अपनी जमीन की जरूरत के अनुसार खाद का उपयोग कर सके। इससे खेती की लागत कम होगी और उत्पादन बढ़ेगा।

उन्होंने बताया कि सोयाबीन, धान और दलहन जैसी फसलों के लिए विशेष प्रदर्शन कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। किसानों को उन्नत बीज, लेजर लेवलर जैसी आधुनिक तकनीकों और पानी बचाने वाली खेती के तरीकों की जानकारी दी जाएगी।

महिला सशक्तिकरण पर जोर देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। वहीं युवाओं को प्रशिक्षण और मार्गदर्शन देकर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी काम किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि रमासिया गांव से शुरू हुआ यह अभियान आगे चलकर जनभागीदारी का बड़ा आंदोलन बनेगा। सरकार का लक्ष्य खेती को टिकाऊ, लाभकारी और पर्यावरण के अनुकूल बनाना है।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में “रिफॉर्म एक्सप्रेस” पर सवार है कृषि और ग्रामीण विकास मंत्रालय- श्री शिवराज सिंह चौहान


दिल्ली / सत्ता संदेश

किसान-गरीब को भटकना नहीं पड़े, शिकायत निवारण को दें वरीयता- श्री शिवराज सिंह चौहान

हर महीने होगी समीक्षा, केवल डिस्पोजल नहीं, जमीन पर समाधान चाहिए- श्री शिवराज सिंह

नियम-प्रक्रिया को बनाएं सरल; एआई, डेटा और डिजिटल गवर्नेंस से कृषि-ग्रामीण विकास को देंगे नई धार- श्री शिवराज

कोर्ट केस, फाइल कल्चर और ड्राफ्टिंग पर श्री शिवराज सिंह का बड़ा सुधार एजेंडा

पीएम मोदी के ‘रिफॉर्म, परफॉर्म, ट्रांसफॉर्म और इनफॉर्म’ मंत्र से किसानों के जीवन में भरेंगे खुशियां- केंद्रीय कृषि मंत्री

2047 विजन, राज्यों से साझेदारी और 12 साल की उपलब्धियों के प्रस्तुतीकरण पर श्री शिवराज सिंह ने दिया जोर

 प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा गुरुवार शाम मंत्रिपरिषद की बैठक में दिए गए दिशा-निर्देशों के पालन को लेकर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने अगले ही दिन आज अपने दोनों मंत्रालयों के अंतर्गत आने वाले विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की उच्चस्तरीय बैठक लेकर साफ कहा कि सरकार का काम फाइलों में नहीं, जनता के जीवन में दिखना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसान, गरीब, ग्रामीण और आम नागरिक को योजनाओं का लाभ पाने या शिकायतों के समाधान के लिए भटकना न पड़े, इसके लिए योजनाबद्ध, समयबद्ध और परिणाममुखी व्यवस्था तुरंत खड़ी की जाए।

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने बैठक में कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि आम आदमी को लड़ना न पड़े, उसे दर-दर भटकना न पड़े और उसे योजनाओं का लाभ सहज, सरल और समय पर मिलना चाहिए। इसी को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए उन्होंने कृषि, ग्रामीण विकास, भूमि संसाधन और आईसीएआर समेत संबंधित इकाइयों में शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत, प्रभावी और जवाबदेह बनाने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि अभी विभिन्न योजनाओं और विभागों में शिकायतों के निपटारे की अलग-अलग व्यवस्थाएं हैं, जैसे अलग पोर्टल, अलग तंत्र और अलग प्रणाली, लेकिन अब इस व्यवस्था को ज्यादा प्रभावी और परिणामकारी बनाने की जरूरत है। इसके लिए कृषि और ग्रामीण विकास, दोनों विभागों में कम से कम 10-10 अधिकारियों की टीम गठित करने को कहा गया, जो प्रतिदिन शिकायतों, जनसमस्याओं, पत्रों, जनप्रतिनिधियों के प्रतिवेदनों और विभिन्न पोर्टलों पर आई समस्याओं की समीक्षा करे।

श्री चौहान ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि शिकायतों का समाधान केवल कागज पर “डिस्पोजल” दिखाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि यह देखा जाए कि लाभार्थी को वास्तविक राहत मिली या नहीं, योजना का लाभ वास्तव में पहुंचा या नहीं, और कहीं ऐसा तो नहीं कि रिकॉर्ड में वितरण दिख रहा हो लेकिन जमीन पर लाभार्थी को कुछ मिला ही न हो।

बैठक में केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने अपने उस अनुभव का भी उल्लेख किया, जिसमें लाभार्थियों को फोन कर सत्यापन करने पर कुछ मामलों में कागज और वास्तविकता के बीच अंतर सामने आया था। उन्होंने साफ कहा कि यह समस्या आसान नहीं, बल्कि जटिल है, इसलिए शिकायतों की प्रकृति, क्षेत्रवार प्रवृत्ति और योजनावार अड़चनों की पहचान कर तंत्र में आवश्यक बदलाव करना होगा।

उन्होंने निर्देश दिया कि हर महीने शिकायत निवारण व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी। श्री शिवराज सिंह ने कहा कि महीने के पहले सोमवार को समीक्षा की जाएगी, हालांकि जून में खरीफ कार्यों की व्यस्तता को देखते हुए दूसरे सोमवार को विस्तृत समीक्षा की जाएगी, लेकिन तब तक तंत्र और अधिक व्यवस्थित, उत्तरदायी और प्रभावी हो जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा रिफॉर्म्स पर दिए जा रहे लगातार जोर का उल्लेख करते हुए श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अब हर डिवीजन, हर योजना और हर विभाग अपने स्तर पर यह पहचाने कि आखिर कठिनाई कहां है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना, सड़क योजना, कृषि योजनाएं, बागवानी, बीमा, विपणन या अन्य कार्यक्रमों में जहां कहीं लाभार्थी बेवजह चक्कर काट रहा है, वहां नियम, प्रक्रिया, तंत्र और कार्यप्रणाली को सरल बनाना ही होगा।

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने साफ कहा कि प्रक्रियाओं का सरलीकरण किया जाए और पुराने-अप्रासंगिक रेगुलेशंस को खत्म करना अब जरूरी है। उन्होंने पूछा कि हर चीज के लिए लाइसेंस की जरूरत क्यों हो, कई जगह पंजीकरण या आसान प्रणाली से काम क्यों नहीं हो सकता। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि एक सप्ताह के भीतर विभिन्न योजनाओं में बाधा पैदा करने वाले प्रावधानों, जटिल प्रक्रियाओं और सुधार योग्य बिंदुओं की पहचान कर ली जाए, ताकि आगे त्वरित निर्णय लिया जा सके।

बैठक में एआई और टेक्नोलॉजी के उपयोग पर महत्वपूर्ण रूप से बात करते हुए श्री चौहान ने कहा कि कृषि, ग्रामीण विकास, भूमि संसाधन और आईसीएआर सहित सभी क्षेत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल प्लेटफॉर्म, डेटा शेयरिंग, डेटा आधारित निर्णय, मॉनिटरिंग और इंटर-डिपार्टमेंटल समन्वय को और मजबूत किया जाना चाहिए। उन्होंने इसके लिए अलग टीम बनाकर अध्ययन करने और उपयोगी प्रस्ताव उनके सामने प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि डिजिटल गवर्नेंस के माध्यम से पारदर्शिता और दक्षता दोनों बढ़ाई जा सकती हैं, लेकिन इसके लिए विभागों के बीच साझा कामकाज और डेटा इंटीग्रेशन जरूरी है। बैठक में यह भी सामने आया कि विभिन्न शिकायत डेटाबेस को जोड़ने की दिशा में काम चल रहा है, ताकि केवल एक पोर्टल की नहीं बल्कि समेकित शिकायत-प्रणाली के आधार पर विभागीय मूल्यांकन हो सके।

श्री चौहान ने प्रशासनिक कार्यसंस्कृति में बदलाव पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि फाइल नीचे से बनकर ऊपर आती है और कई बार नीचे का पुराना माइंडसेट ही पूरी प्रक्रिया को उलझा देता है। इसलिए केवल ऊपर के स्तर पर नहीं, बल्कि नीचे से फाइल निर्माण, नोटिंग, निर्णय-तैयारी और ड्राफ्टिंग की गुणवत्ता सुधारने की जरूरत है। उन्होंने ड्राफ्टिंग को अत्यंत महत्वपूर्ण विषय बताते हुए कहा कि विभागों में ऐसे अधिकारी विकसित किए जाएं जो फाइलें और नोट्स मजबूत, स्पष्ट और नीति-संगत तरीके से तैयार कर सकें। इसके लिए प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और दक्षता वृद्धि की व्यवस्था की जाए, ताकि फाइलें अनावश्यक रूप से न अटकें और निर्णय की गुणवत्ता भी बेहतर हो।

न्यायालयों में लंबित मामलों को लेकर भी केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कई मामलों में सरकार इसलिए कमजोर पड़ जाती है क्योंकि सरकारी पक्ष समय पर और प्रभावी ढंग से अदालत में रखा ही नहीं जाता। उन्होंने सभी विभागों से कहा कि वे लंबित कोर्ट केसों की सूची निकालें, उनकी समीक्षा करें, नोडल अधिकारी तय करें, विधिक तैयारी मजबूत करें और जरूरत पड़े तो बेहतर वकीलों की व्यवस्था करें, क्योंकि सरकार की हार का सीधा नुकसान सार्वजनिक हित को होता है।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा विकास कार्यों में बाधाओं की पहचान और समाधान पर दिए गए संदेश को आगे बढ़ाते हुए केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि हर डिवीजन यह बताए कि काम किस वजह से अटकता है, कौन सी बाधाएं फैसलों, क्रियान्वयन और लाभ वितरण में देरी करती हैं, और उन्हें दूर करने के लिए क्या सुधार किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह कवायद एक साथ चलनी चाहिए- रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म के साथ-साथ इन्फॉर्म भी।

उन्होंने कहा कि कई बार योजनाएं अच्छी होती हैं, सुधार भी किए जाते हैं, लेकिन जनता को जानकारी ही नहीं होती। इसलिए हितधारकों से संवाद, किसान संगठनों के साथ बैठक, मजदूरों और सरपंचों से बातचीत, जनप्रतिनिधियों के माध्यम से सूचना, सोशल मीडिया, ग्राफिक्स, वीडियो, रील्स और रचनात्मक संचार माध्यमों से योजनाओं और सुधारों को जनता तक पहुंचाया जाए।

बैठक में यह भी कहा गया कि जो सुधार पहले ही किए जा चुके हैं, उनका “रिफॉर्म उत्सव” की तरह प्रचार-प्रसार होना चाहिए। श्री चौहान ने कहा कि केवल सुधार कर देना काफी नहीं है, बल्कि जिनके लिए सुधार किए गए हैं, उन्हें बुलाकर संवाद किया जाना चाहिए, बताया जाना चाहिए कि क्या बदला है, उससे क्या लाभ होगा और आगे क्या और किया जा सकता है।

श्री चौहान ने राज्यों के साथ साझेदारी को कृषि और ग्रामीण विकास की सफलता की कुंजी बताया। उन्होंने कहा कि असली काम राज्यों में होता है, इसलिए राज्यों के साथ रोडमैप आधारित साझेदारी, ज़ोनल कॉन्फ्रेंस, योजनावार समन्वय और समस्या-आधारित संवाद को और मजबूत किया जाए। उन्होंने संकेत दिया कि जो राज्य संकोच करते हैं, उनके साथ भी संवाद बढ़ाया जाएगा, क्योंकि केंद्र का दायित्व पूरे देश की जनता के प्रति है।

उन्होंने कृषि, पशुपालन, मत्स्य, फूड प्रोसेसिंग और अन्य संबद्ध क्षेत्रों के बीच बेहतर समन्वय की भी जरूरत बताई। उनका कहना था कि इंटीग्रेटेड फार्मिंग, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और क्षेत्रीय कृषि रोडमैप जैसे मुद्दों पर अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों को साथ बैठकर काम करना होगा।

बैठक में विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के अनुरूप विभागीय विजन दस्तावेज तैयार करने पर भी बल दिया गया। केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने कहा कि प्रत्येक विभाग अपना 2047 विजन, इस वर्ष के लक्ष्य, वार्षिक, छह-माही, तिमाही, साप्ताहिक और दैनिक कार्ययोजना तैयार करे, ताकि मॉनिटरिंग मजबूत हो और काम का आकलन स्पष्ट रूप से हो सके।

उन्होंने सरकारी भवनों और संस्थानों में पीएम सूर्य घर जैसी पहलों के अनुरूप सोलराइजेशन को भी आगे बढ़ाने की बात कही और कहा कि जहां काम हो चुका है और जहां बाकी है, उसका स्पष्ट आकलन तैयार कर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मौजूदा कार्यकाल के दो वर्ष और समग्र 12 वर्षों की उपलब्धियों के प्रभावी प्रस्तुतीकरण पर भी बैठक में चर्चा हुई। श्री चौहान ने कहा कि विभाग अपनी उपलब्धियों को अभी से व्यवस्थित करें और प्रेस कॉन्फ्रेंस के साथ ही गांव स्तर तक जाने वाले कार्यक्रम, प्रेजेंटेशन, रचनात्मक कंटेंट, वीडियो और सोशल मीडिया अभियानों के माध्यम से जनता के बीच ले जाएं। उन्होंने सोशल मीडिया के प्रभाव को देखते हुए छोटे वीडियो, ग्राफिक्स, लाभार्थी कहानियों और योजनाओं से जीवन में आए बदलावों को केंद्र में रखने का सुझाव दिया। उनका मानना था कि अखबार और टीवी के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दमदार प्रस्तुतीकरण आज ज्यादा असरकारी हो सकता है।

बैठक में विदेश यात्राओं को लेकर भी प्रधानमंत्री श्री मोदी के निर्देशों का उल्लेख करते हुए श्री चौहान ने अधिकारियों से कहा कि अनावश्यक विदेश यात्राओं से बचा जाए और केवल अत्यंत जरूरी मामलों में ही ऐसे प्रस्ताव आगे आएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस समय प्राथमिकता देश के भीतर काम की गति, गुणवत्ता और परिणाम को बेहतर बनाना है।

फाइलों के निस्तारण को लेकर श्री चौहान ने कहा कि उनकी प्राथमिकता केवल तेजी नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण और परिणाममूलक निर्णय है। उन्होंने कहा कि कोई भी नियम या फाइल कई लोगों की जिंदगी पर असर डाल सकती है, इसलिए उसे समझकर, परखकर और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ निर्णय लेना जरूरी है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे अनावश्यक देरी न हो और महत्वपूर्ण मामलों पर समय रहते चर्चा हो सके।

बैठक में केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि कोई भी विभाग पीछे नहीं रहना चाहिए। शिकायत निवारण से लेकर रिफॉर्म, टेक्नोलॉजी, कोर्ट केस, राज्यों से समन्वय, जनसंवाद, 2047 रोडमैप और उपलब्धियों के प्रस्तुतीकरण तक हर मोर्चे पर सक्रिय, समयबद्ध और जवाबदेह कार्यशैली अपनानी होगी, ताकि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के सुशासन विजन के अनुरूप सरकार का लाभ अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी ढंग से पहुंच सके।

दो जोनल कृषि कॉन्फ्रेंस अब वर्चुअल मोड में, 20% रोटेशनल वर्क फ्रॉम होम होगा लागू- श्री शिवराज सिंह


दिल्ली /सत्ता संदेश

केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्रालयों में सप्ताह में एक दिन कार-पूलिंग का फैसला; बिजली, ईंधन और सरकारी दौरों पर सख्त संयम- श्री शिवराज सिंह

शादी जैसे अतिआवश्यक अवसरों को छोड़कर 1 साल तक सोना नहीं खरीदेंगे कृषि और ग्रामीण विकास मंत्रालय के अधिकारी

खाद्य तेल की खपत घटाने को चलेगा अभियान, खेत बचाओ अभियान और प्राकृतिक खेती पर विशेष फोकस- श्री शिवराज सिंह चौहान

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की मितव्ययिता, संसाधन-संरक्षण और आत्मनिर्भरता की अपील पर श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में बड़े निर्णय

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की मितव्ययिता, संसाधन-संरक्षण और आत्मनिर्भरता की अपील को प्रशासनिक अमल का रूप देते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज बड़े फैसले किए। अधिकारियों के साथ हुई समीक्षा बैठक में एक तरफ जहां बचत, ईंधन-संरक्षण, बिजली नियंत्रण, वर्चुअल कार्यप्रणाली और सरकारी खर्च घटाने के उपाय तय किए गए, वहीं दूसरी ओर अधिकारियों ने एक वर्ष तक विशेष पारिवारिक परिस्थितियों को छोड़कर सोना नहीं खरीदने का भी सामूहिक संकल्प लिया।वैश्विक चुनौतियों और बदलते आर्थिक माहौल के बीच केंद्र सरकार प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह संदेश दे रही है कि राष्ट्रहित में संयम और बचत की शुरुआत सरकार खुद से करेगी। इसी दिशा में केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, कृषि शिक्षा और भूमि संसाधन विभाग के अधिकारियों के साथ विस्तृत बैठक कर कई ऐसे फैसले किए, जो शासन, समाज और कृषि – तीनों स्तरों पर सकारात्मक असर डालने वाले हैं।

कृषि भवन, नई दिल्ली में आज आयोजित इस बैठक में सबसे महत्वपूर्ण संदेश उस समय उभरा, जब अधिकारियों ने केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह के आह्वान पर सामूहिक रूप से यह फैसला किया कि अगले एक वर्ष तक, केवल बेटी की शादी या किसी विशेष अपरिहार्य पारिवारिक अवसर जैसी परिस्थितियों को छोड़कर, वे सोना नहीं खरीदेंगे। यह निर्णय औपचारिक सरकारी आदेश से अधिक एक स्वैच्छिक नैतिक-सामाजिक संकल्प के रूप में है, जिसे श्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अपील के प्रति गंभीर प्रतिक्रिया और राष्ट्रहित में व्यक्तिगत संयम का उदाहरण बताया।

प्रशासनिक स्तर पर बैठक में तय किया गया कि गुवाहाटी और विशाखापट्टनम में आगामी दिनों में होने वाली दो जोनल कॉन्फ्रेंस अब फिजिकल मोड में नहीं होंगी बल्कि वर्चुअल मोड में आयोजित की जाएंगी। इससे यात्रा, आवास, स्थल, लॉजिस्टिक्स और अन्य संबंधित खर्चों में कमी आएगी जबकि राज्यों और हितधारकों के साथ संवाद और समीक्षा की प्रक्रिया प्रभावित नहीं होगी।

कार्यालयों में बिजली संरक्षण को भी प्राथमिकता दी गई है। लाइट, पंखे, एसी, कंप्यूटर और अन्य उपकरण आवश्यकता न होने पर बंद रखने के निर्देश केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह द्वारा दिए गए हैं जबकि एयर-कंडीशनर और अन्य विद्युत उपकरणों के उपयोग को नियंत्रित और व्यवस्थित करने का निर्णय लिया गया है ताकि अनावश्यक बिजली खपत रोकी जा सके।

बैठक में यह भी तय किया गया कि लगभग 20 प्रतिशत कर्मचारियों के लिए रोटेशन के आधार पर वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था लागू की जाएगी। हालांकि इसके साथ यह भी कहा गया है कि फाइल निस्तारण, बैठकों, समन्वय, राज्य-संबंधी कार्य और नियमित कार्यालयीन कामकाज पर कोई असर नहीं पड़ना चाहिए। घर से काम करने वाले कर्मचारी फोन, ईमेल, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और ई-ऑफिस के माध्यम से उपलब्ध रहेंगे।

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने बताया कि ईंधन बचत और सार्वजनिक संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए सप्ताह में एक दिन कार-पूलिंग व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया गया है। यह व्यवस्था निदेशक स्तर तक बढ़ाई जाएगी जबकि मंत्रालय में लगभग एक-तिहाई वाहनों के उपयोग को कम करने का लक्ष्य भी रखा गया है, जिससे ईंधन, वाहन रखरखाव, चालक व्यवस्था और अन्य संबंधित खर्चों में कमी लाई जा सके।

उन्होंने कहा कि सरकारी दौरों और बैठकों को भी अब अधिक नियंत्रित और जरूरत-आधारित बनाया जाएगा। केवल अत्यावश्यक दौरे ही किए जाएंगे और जहां संभव होगा, समीक्षा, परामर्श और बैठकें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए की जाएंगी ताकि बड़े दलों की अनावश्यक यात्रा रोकी जा सके और खर्च में कमी लाई जा सके।

बैठक का एक महत्वपूर्ण हिस्सा खाद्य तेल की खपत को लेकर भी रहा। केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह के निर्देश पर मंत्रालय ने फैसला किया है कि खाद्य तेल के संतुलित और स्वस्थ उपयोग के लिए विशेष जन-जागरूकता अभियान चलाया जाएगा, ताकि अत्यधिक खपत कम हो, स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर पड़े और देश की खाद्य तेल आयात निर्भरता घटाने के लक्ष्य को बल मिले। खाद्य तेल और तिलहन के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने के लिए चल रहे मिशन को और प्रभावी बनाया जाएगा।

कृषि क्षेत्र को लेकर श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्राकृतिक खेती और उर्वरकों के संतुलित उपयोग को साथ लेकर चलना होगा। उन्होंने बताया कि कृषि विभाग और आईसीएआर ने “खेत बचाओ अभियान” चलाने का फैसला किया है, जिसके तहत वैज्ञानिक गांवों में जाकर मिट्टी की जांच और उसमें मौजूद तत्वों के आधार पर किसानों को यह सलाह देंगे कि कौन-सा खाद, कितनी मात्रा में और किस जरूरत के अनुसार डाला जाना चाहिए। इसका उद्देश्य अनावश्यक उर्वरक उपयोग रोकना और आयातित खादों पर निर्भरता कम करना है। श्री चौहान ने कहा कि खेत बचाओ अभियान को 1 जून से 15 दिनों तक पूरे देश में अधिक संगठित और प्रभावी रूप से चलाया जाएगा। राज्य सरकारों के साथ मिलकर किसानों को जागरूक किया जाएगा कि आवश्यक खाद का उपयोग जरूर करें लेकिन अनावश्यक उपयोग से बचें ताकि लागत भी घटे और जमीन की सेहत भी सुरक्षित रहे।

खरीफ सीजन की तैयारी को भी इस पूरी रणनीति से जोड़ा गया है। श्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि 28 और 29 मई को होने वाली खरीफ कॉन्फ्रेंस में संतुलित खाद उपयोग पर विशेष जोर दिया जाएगा जबकि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए अलग से एक विशेष सत्र रखा जाएगा। इस सत्र में गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत को आमंत्रित करने का भी निर्णय लिया गया है ताकि प्राकृतिक खेती के व्यावहारिक और प्रेरक अनुभव राज्यों के साथ साझा किए जा सकें। श्री शिवराज सिंह ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में छोटे-छोटे कदम भी बड़े राष्ट्रीय परिणाम दे सकते हैं। उनका कहना है कि बचत, संयम और संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग केवल आर्थिक आवश्यकता नहीं बल्कि राष्ट्रीय जिम्मेदारी है और यह सब करते हुए खेती, खाद्य सुरक्षा, पोषण सुरक्षा और किसानों की आजीविका किसी भी कीमत पर प्रभावित नहीं होने दी जाएगी।

केंद्रीय कृषि मंत्री की अध्यक्षता में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की एक्सपेंडिचर फाइनेंस कमेटी पर हुई उच्च-स्तरीय बैठक


भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के कार्यों की केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने की विस्तृत समीक्षा

इंटीग्रेटेड और सस्टेनेबल फार्मिंग को बढ़ावा देकर किसानों की आय भी बढ़ाएंगे और धरती माँ को भी बचाएंगे- केंद्रीय मंत्री

भारतीय कृषि को अधिक उत्पादक, कम लागत वाली तथा लाभकारी पेशा बनाने के लिए करेंगे हरसंभव प्रयास- श्री शिवराज सिंह चौहान

कृषि देश की बड़ी आबादी की जीविका का प्रमुख साधन और भारतीय अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार स्तंभ- केंद्रीय कृषि मंत्

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की एक्सपेंडिचर फाइनेंस कमेटी (EFC) से संबंधित एक उच्च स्तरीय बैठक केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आज 12, सफदरजंग रोड स्थित उनके कैंप कार्यालय में आयोजित की गई।

बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। इस अवसर पर आईसीएआर के महानिदेशक तथा डेयर सचिव डॉ एम एल जाट ने केंद्रीय कृषि मंत्री को देशभर में आईसीएआर के अंतर्गत संचालित विभिन्न कार्यक्रमों एवं गतिविधियों की जानकारी विस्तार से दी। उन्होंने भविष्य की कार्ययोजना से भी केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया तथा बताया कि भारतीय कृषि एवं किसान बहनों-भाइयों को अधिकतम लाभ पहुंचाने के लिए परिषद किस प्रकार कार्य कर रही है।

बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि कृषि देश की बड़ी आबादी की जीविका का प्रमुख साधन है और भारतीय अर्थव्यवस्था को एक मजबूत आधार प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि हमारी सम्पूर्ण कोशिश और ऊर्जा इस दिशा में केंद्रित होनी चाहिए कि भारतीय कृषि को अधिक उत्पादक, कम लागत वाली तथा लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सके।

केंद्रीय मंत्री ने इंटीग्रेटेड फार्मिंग के व्यापक प्रचार-प्रसार पर विशेष बल देते हुए कहा कि किसान बहन-भाइयों को इसे व्यावहारिक रूप से अपनाने के लिए प्रेरित किया जाए। उन्होंने कहा कि इससे किसानों की आय में वृद्धि होगी तथा सतत कृषि (सस्टेनेबल फार्मिंग) को मजबूती मिलेगी।

श्री चौहान ने कहा कि वैज्ञानिक कृषि आज समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भारत सहित विश्वभर में जलवायु परिवर्तन की समस्या अब प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देने लगी है। इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्यों की कृषि-जलवायु (एग्रो-क्लाइमेटिक) परिस्थितियों के अनुरूप राज्यवार कृषि रोडमैप तैयार करने की दिशा में राज्यों की सहमति से तेजी से कार्य किया जाए।

अधिकारियों ने केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया कि आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, असम एवं राजस्थान जैसे राज्यों के अनुरोध पर इस दिशा में कार्य प्रगति पर है तथा शीघ्र ही इन राज्यों का स्वतंत्र कृषि रोडमैप तैयार किया जाएगा।

आईसीएआर की कार्ययोजना पर संतोष प्रकट करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री ने और अधिक ऊर्जा और उत्साह से अधिकारियों को कार्य करने के निर्देश दिए जिससे समयपूर्व लक्ष्यों को हासिल किया जा सके। बैठक में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।