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Delhi Yamuna Cruise Service: रेखा गुप्ता ने किया क्रूज सेवा का निरीक्षण, जानें किराया और सफर की पूरी जानकारी

दिल्ली में यमुना रिवर सफारी का ट्रायल शुरू। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोनिया विहार से जगतपुर तक क्रूज सेवा का निरीक्षण किया। जानें संभावित किराया, सफर की अवधि और शुरुआत की तारीख।

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

दिल्ली में यमुना नदी पर पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में नई पहल की जा रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को सोनिया विहार से जगतपुर तक विकसित की जा रही यमुना क्रूज सेवा का ट्रायल रन और निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने संबंधित अधिकारियों से परियोजना की प्रगति, संचालन व्यवस्था और यात्रियों के लिए तैयार की जा रही सुविधाओं की जानकारी ली। सरकार की योजना छठ महापर्व से पहले इस सेवा को शुरू करने की है, जबकि औपचारिक शुभारंभ नवंबर के पहले सप्ताह में किए जाने की तैयारी है।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्लीवासियों का मां यमुना के साथ गहरा भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव है। यमुना रिवर सफारी इस जुड़ाव को नया आयाम देने के साथ राजधानी में पर्यटन और मनोरंजन की नई संभावनाएं खोलेगी। इससे लोगों को नदी के किनारे प्राकृतिक वातावरण के बीच समय बिताने और परिवार के साथ क्रूज यात्रा का आनंद लेने का अवसर मिलेगा।

6 किलोमीटर के जलमार्ग पर चलेगा क्रूज

सोनिया विहार से जगतपुर तक लगभग 6 किलोमीटर के जलमार्ग पर क्रूज सेवा विकसित की जा रही है। परियोजना का उद्देश्य इस क्षेत्र को दिल्लीवासियों और पर्यटकों के लिए आकर्षक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना है। इसके लिए फूड कियोस्क, रेस्टोरेंट, बच्चों के लिए किड्स जोन और अन्य जनसुविधाएं तैयार की जा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन सुविधाओं के विकास के साथ यमुना की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देना भी जरूरी है। सरकार का प्रयास है कि लोग नदी के प्राकृतिक वातावरण का आनंद ले सकें और इसके संरक्षण के प्रति भी जागरूक हों।

30 यात्रियों की क्षमता, 35 से 45 मिनट का सफर

परियोजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल 30 यात्रियों की क्षमता वाली क्रूज सेवा शुरू करने की तैयारी है। सोनिया विहार से जगतपुर स्थित शनि मंदिर तक आने-जाने में लगभग 35 से 45 मिनट लगने का अनुमान है। यात्रा पूरी होने के बाद यात्री अपने शुरुआती स्थान पर लौट सकेंगे।

क्रूज सेवा का ट्रायल लगभग एक सप्ताह तक चलाने की योजना है। इसके बाद नवंबर के पहले सप्ताह में औपचारिक शुरुआत की तैयारी की जा रही है। हालांकि, सेवा शुरू होने की अंतिम तारीख की आधिकारिक घोषणा अभी की जानी बाकी है।

क्या होगा यमुना क्रूज का किराया?

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, परियोजना परिसर में प्रवेश शुल्क 50 रुपये और क्रूज की एक पूरी यात्रा के लिए प्रस्तावित किराया 500 रुपये रखा गया है। यात्रियों को सलाह दी जाती है कि यात्रा पर जाने से पहले अंतिम टिकट दरों, बुकिंग व्यवस्था और संचालन समय की आधिकारिक जानकारी की पुष्टि कर लें।

केंद्र और दिल्ली सरकार के समन्वय से तैयार हो रही परियोजना

यमुना रिवर सफारी परियोजना में भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण, दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA), दिल्ली पर्यटन एवं परिवहन विकास निगम (DTTDC), सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग और दिल्ली जल बोर्ड सहित कई एजेंसियां शामिल हैं।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने परियोजना को आगे बढ़ाने में केंद्र और दिल्ली सरकार के संबंधित विभागों के सहयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय से राजधानी में पर्यटन के नए अवसर विकसित किए जा रहे हैं।

दिल्ली के पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने भी यमुना रिवर सफारी को महत्वपूर्ण परियोजना बताया। उनके अनुसार, बोट राइड, म्यूजिक फाउंटेन, वाटर स्पोर्ट्स और फूड पार्क जैसी सुविधाओं के माध्यम से दिल्लीवासियों और पर्यटकों को नया अनुभव देने की योजना है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और NGT के मानकों के पालन पर भी जोर दिया।

छठ महापर्व से पहले शुरुआत की तैयारी

दिल्ली सरकार की योजना यमुना रिवर सफारी को छठ महापर्व से पहले जनता के लिए खोलने की है। इसके साथ ही यमुना तट पर छठ पूजा के आयोजन की तैयारियां भी की जा रही हैं। यदि परियोजना निर्धारित समय पर शुरू होती है, तो दिल्लीवासियों को त्योहारों के मौसम में पर्यटन का एक नया विकल्प मिल सकता है।

यमुना क्रूज सेवा की सफलता इस बात पर भी निर्भर करेगी कि यात्रियों की सुरक्षा, नदी की स्वच्छता और पर्यावरणीय मानकों का कितनी प्रभावी ढंग से पालन किया जाता है। इसके अलावा, किराये और संचालन संबंधी अंतिम जानकारी सामने आने के बाद ही लोग इस नई सुविधा का पूरा लाभ उठा सकेंगे।

दिल्ली सरकार ने लॉन्च किया लक्ष्मी योजना पोर्टल, 500 महिलाओं ने भरा फॉर्म

दिल्ली / सत्ता संदेश

दिल्ली की भाजपा सरकार ने अपना एक और चुनावी वादा पूरा कर दिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आज शनिवार को दिल्ली लक्ष्मी योजना का पोर्टल लॉन्च किया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। लॉन्च कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने चार महिलाओं को उनके आवेदन के बाद प्रमाणपत्र भी सौंपे।

महिलाएं कर सकेंगे दिल्ली लक्ष्मी योजना के लिए रजिस्ट्रेशन

मुख्यमंत्री ने बताया कि यह योजना डेढ़ साल के संकल्प के बाद शुरू की गई है। उन्होंने इस पहल पर खुशी व्यक्त की। दिल्ली लक्ष्मी योजना की शुरुआत लक्ष्मी नगर और गीता कॉलोनी से हुई है। पोर्टल आज से ही आम जनता के लिए उपलब्ध हो गया है।

500 महिलाओं ने भरा फॉर्म

अब तक करीब 500 महिलाओं ने सफलतापूर्वक अपने फॉर्म भर दिए हैं। यह योजना महिलाओं के स्वावलंबन के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके लिए 5100 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। अब तक दिल्ली लक्ष्मी योजना में कुल 10830 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं।

योजना में दो विकल्प

योजना के तहत महिलाओं को दो विकल्प दिए गए हैं। पहले विकल्प में 1500 रुपये आरडी या एफडी में जमा होंगे और 1000 रुपये सीबीडीसी (डिजिटल वॉलेट) में दिए जाएंगे, जिनका उपयोग सरकार द्वारा निर्धारित आवश्यक मदों पर किया जा सकेगा। दूसरे विकल्प में पूरी 2500 रुपये की राशि आरडी या एफडी में जमा कराई जा सकेगी। सरकार का उद्देश्य महिलाओं में बचत की आदत को बढ़ावा देना भी है।

योजना के लिए पात्रता

योजना का लाभ 21 से 60 वर्ष की उन महिलाओं को मिलेगा, जिनके परिवार की वार्षिक आय 2.50 लाख रुपये तक है। फिलहाल योजना की अवधि तीन वर्ष तय की गई है। हालांकि आयकरदाता, जीएसटी रिटर्न दाखिल करने वाली महिलाएं, सरकारी कर्मचारी, तीन से अधिक जीवित बच्चों वाली महिलाएं, 2400 यूनिट से अधिक वार्षिक बिजली खपत वाले परिवार, सरकारी नौकरी वाले सदस्य या चारपहिया वाहन रखने वाले परिवार तथा आपराधिक रिकॉर्ड वाली महिलाएं योजना के दायरे से बाहर रहेंगी।


 

शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से भी जोड़ेगी योजना

सरकार का कहना है कि यह योजना केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं होगी। लाभार्थियों को बच्चों के स्कूल नामांकन, अपार और आभा आईडी, टीकाकरण, पोषण ट्रैकर, स्वयं सहायता समूह, कौशल प्रशिक्षण, स्वच्छता और पर्यावरण अभियानों से भी जोड़ा जाएगा, ताकि महिलाओं का सामाजिक और आर्थिक सशक्तीकरण सुनिश्चित हो सके।

दिल्ली में प्रदूषण से जंग के लिए ₹8,300 करोड़ का मेगा प्लान, 65% फंड देगा वर्ल्ड बैंक

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

दिल्ली सरकार ने शुक्रवार को राष्ट्रीय राजधानी में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए 8,300 करोड़ रुपये के सात साल के प्रोग्राम का ऐलान किया है। इस प्रोग्राम के लिए 65 फीसदी धनराशि वर्ल्ड बैंक दे रही है और 35 फीसदी फंड दिल्ली सरकार से मिलेगा।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि ‘स्वच्छ वायु, स्वस्थ दिल्ली’ टाइटल वाला प्रोजेक्ट सितंबर 2026 से अगस्त 2033 तक चलेगा। उन्होंने कहा कि इसका मकसद एयर क्वालिटी मैनेजमेंट को मजबूत करना और पूरे शहर में प्रमुख प्रदूषण स्रोतों से उत्सर्जन में कटौती करना है। तैयारियों को अंतिम रूप देने और सभी स्टेकहोल्डर के बीच कोऑर्डिनेशन में सुधार के लिए 10 जुलाई को एक स्पेशल वर्कशॉप आयोजित किया जाएगा।
सीएम रेखा गुप्ता ने कहा, “वर्कशॉप में कई विभागों और एजेंसियों की भूमिकाओं को परिभाषित करेगी और परियोजना के प्रभावी और समय पर इम्प्लीमेंटेशन के लिए रोडमैप पर चर्चा होगी। यह कार्यक्रम दिल्ली के एयर पॉल्यूशन मिटिगेशन प्लान को गति देगा, राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के टारगेट्स में मदद करेगा और विकसित भारत 2047 उद्देश्य की मदद करेगा।

रेखा गुप्ता ने कहा कि यह पहल ‘सिर्फ प्रदूषण कंट्रोल प्रोग्राम नहीं, बल्कि एक लंबे वक्त का इन्वेस्टमेंट’ है, जिसका मकसद दिल्ली के लोगों को साफ हवा, बेहतर पब्लिक हेल्थ और ज्यादा टिकाऊ शहरी माहौल देना है। उन्होंने कहा कि यह पहल दो मुख्य स्तंभों पर टिकी है: हवा की क्वालिटी मैनेजमेंट को मजबूत करना और प्रदूषण के मुख्य स्रोतों से होने वाले उत्सर्जन को कम करना।

पहले हिस्से के तहत, सरकार एक खास प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट बनाएगी, एडवांस्ड एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करेगी, डेटा एनालिटिक्स क्षमताएं तैयार करेगी और इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर पर आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम बनाएगी। इस प्रोजेक्ट में इंडो-गैंगेटिक प्लेन के राज्यों के साथ बेहतर तालमेल, वैज्ञानिक प्लानिंग, जन-जागरूकता अभियान और नई टेक्नोलॉजी को अपनाने की योजना भी शामिल है।

दूसरा हिस्सा पुराने प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को धीरे-धीरे हटाने, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने, पब्लिक ट्रांसपोर्ट को मजबूत करने और वाहनों से होने वाले उत्सर्जन के लिए एडवांस्ड ‘पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल’ मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करेगा।
सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि इस प्रोग्राम को पर्यावरण विभाग, दिल्ली प्रदूषण कंट्रोल कमेटी, ट्रांसपोर्ट विभाग, पब्लिक वर्क्स विभाग, दिल्ली नगर निगम, दिल्ली जल बोर्ड, दिल्ली विकास प्राधिकरण, नई दिल्ली नगर परिषद और दिल्ली ट्रैफिक पुलिस मिलकर लागू करेंगे. आर्थिक मामलों का विभाग और वर्ल्ड बैंक भी इसमें मुख्य पार्टनर होंगे।

साफ हवा को हर नागरिक का अधिकार बताते हुए रेखा गुप्ता ने कहा कि यह प्रोजेक्ट राजधानी में हवा की क्वालिटी और पब्लिक हेल्थ को बेहतर बनाने के लिए वैज्ञानिक, समन्वित और टिकाऊ समाधानों के प्रति दिल्ली सरकार की प्रतिबद्धता को दिखाता है।

कुल मिलाकर, दिल्ली सरकार का नया प्रोग्राम हवा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने, प्रदूषण के मुख्य स्रोतों से निपटने और शहर में पब्लिक हेल्थ के उपायों को मजबूत करने के लंबे वक्त के प्रयास के लिए अलग-अलग विभागों के बीच फंडिंग, टेक्नोलॉजी और तालमेल को एक साथ लाएगा।

दिल्ली सरकार ने नई ईवी पॉलिसी को दी मंजूरी, 1 जुलाई से लागू होगी पॉलिसी

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

दिल्ली सरकार ने सोमवार को नई इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) पॉलिसी को मंजूरी दे दी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सचिवालय में आयोजित प्रेसवार्ता में कहा कि यह नीति दिल्ली की वर्षों पुरानी प्रदूषण और परिवहन संबंधी चुनौतियों के समाधान की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने बताया कि उपराज्यपाल की संस्तुति के बाद यह नीति एक जुलाई से लागू होगी और 31 अगस्त 2031 तक प्रभावी रहेगी।

15 हजार करोड़ रुपये का लाभ मिलने का अनुमान

मुख्यमंत्री ने कहा कि नई ईवी पॉलिसी से आम लोगों को करीब 15 हजार करोड़ रुपये का लाभ मिलने का अनुमान है। सरकार ने विभिन्न श्रेणियों के इलेक्ट्रिक वाहनों पर मिलने वाली सब्सिडी और प्रोत्साहन राशि में वृद्धि की है, ताकि अधिक से अधिक लोग इलेक्ट्रिक वाहन अपनाएं। उन्होंने कहा कि दोपहिया, चारपहिया, तिपहिया, ट्रक और ग्रामीण परिवहन वाहनों को भी इस नीति के दायरे में शामिल किया गया है।

पॉलिसी का मसौदा उपराज्यपाल को भेजा गया

प्रेसवार्ता की शुरुआत करते हुए शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने बताया कि ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स ने सोमवार को नई ईवी पॉलिसी का मसौदा मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किया, जिसे बाद में मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी। उन्होंने कहा कि इस नीति को अंतिम रूप देने से पहले विभिन्न हितधारकों के साथ कई दौर की बैठकें की गईं। परिवहन विभाग की सचिव निहारिका ने बताया कि कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद पॉलिसी का मसौदा उपराज्यपाल को भेज दिया गया है। 

इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों के दिया जाएगा प्रोत्साहन

उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि मंगलवार तक उनकी मंजूरी भी मिल जाएगी। नई नीति के तहत इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों के लिए 30 हजार से 50 हजार रुपये तक का प्रोत्साहन दिया जाएगा। इलेक्ट्रिक ट्रक खरीदने पर एक लाख रुपये तथा ग्रामीण सेवा वाहनों के लिए 20 हजार रुपये का स्क्रैपिंग इंसेंटिव मिलेगा। सरकार ने चरणबद्ध तरीके से पारंपरिक ईंधन वाले वाहनों के पंजीकरण पर रोक लगाने का भी निर्णय लिया है। इसके तहत वर्ष एक जनवरी 2027 से नए तीनपहिया और वर्ष अप्रैल 2028 से नए दोपहिया वाहनों का पंजीकरण केवल इलेक्ट्रिक वाहनों के रूप में किया जाएगा।

विकसित किया जाएगा चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर 

मुख्यमंत्री ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर बड़े पैमाने पर चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा। साथ ही डिस्कॉम के साथ मिलकर घरों में ईवी चार्जिंग के लिए अलग मीटर उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस नीति के तहत खरीदे गए इलेक्ट्रिक वाहन तीन वर्ष तक दिल्ली के बाहर बेचे नहीं जा सकेंगे। पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि नई ईवी पॉलिसी से राजधानी में वायु प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी। वहीं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने लोगों से इस नीति को अपनाने की अपील करते हुए कहा कि परिवहन विभाग ने इसे तैयार करने में व्यापक मेहनत की है और इसके बेहतर परिणाम सामने आएंगे। परिवहन विभाग को इस नीति के क्रियान्वयन का नोडल विभाग बनाया गया है।

चरणबद्ध तरीके से दी जाएगी सब्सिडी

नई ईवी पॉलिसी में इलेक्ट्रिक दोपहिया, ऑटो और मालवाहक वाहनों के लिए चरणबद्ध खरीद सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। दोपहिया वाहन पर पहले वर्ष अधिकतम 30 हजार रुपये, इलेक्ट्रिक ऑटो पर 50 हजार रुपये और एन1 श्रेणी के इलेक्ट्रिक ट्रक पर पहले वर्ष एक लाख रुपये तक की खरीद सब्सिडी मिलेगी। निजी इलेक्ट्रिक कारों पर खरीद सब्सिडी नहीं होगी, लेकिन पुराने बीएस-4 या उससे नीचे के वाहन को स्क्रैप करने पर एक लाख रुपये तक का स्क्रैपिंग इंसेंटिव दिया जाएगा। 

इसके अलावा सभी इलेक्ट्रिक दोपहिया, तिपहिया, व्यावसायिक वाहन और 30 लाख रुपये तक की इलेक्ट्रिक कारों को रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क में 100 प्रतिशत छूट मिलेगी। वहीं स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड कारों को 50 प्रतिशत छूट दी जाएगी, जबकि 30 लाख रुपये से अधिक कीमत वाली इलेक्ट्रिक कारों को कोई टैक्स या रजिस्ट्रेशन शुल्क छूट नहीं मिलेगी।