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लुधियाना : मेले के कॉन्ट्रैक्ट को लेकर हंगामा, ठेकेदारों ने लगाए मिलीभगत के आरोप

लुधियाना / सत्ता संदेश

दशहरे के मौके पर सरकारी कॉलेज में लगने वाले बड़े मेले के कॉन्ट्रैक्ट को लेकर शुक्रवार को लुधियाना में जमकर हंगामा हुआ। अलग-अलग शहरों और जिलों से पहुंचे करीब 15 कॉन्ट्रैक्टरों ने आरोप लगाया कि मेले के कॉन्ट्रैक्ट की प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही और पिछले तीन वर्षों से एक ही व्यक्ति को बार-बार मेला दिया जा रहा है।

कॉन्ट्रैक्टरों का आरोप है कि वे मेला लेने के लिए बोली में हिस्सा लेना चाहते हैं और इसके लिए करीब 30 लाख रुपये के डिमांड ड्राफ्ट भी तैयार कर चुके हैं। उनका कहना है कि इसके बावजूद SDM कार्यालय की ओर से उनके दस्तावेज स्वीकार नहीं किए जा रहे। विरोध में कॉन्ट्रैक्टरों ने SDM कार्यालय के बाहर नारेबाजी भी की।

प्रदर्शन कर रहे कॉन्ट्रैक्टरों ने आरोप लगाया कि मेले के कॉन्ट्रैक्ट को लेकर एक पार्टी को कथित तौर पर सपोर्ट किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि सभी इच्छुक कॉन्ट्रैक्टरों को बोली में हिस्सा लेने का मौका दिया जाए तो सरकारी खजाने को अधिक राजस्व मिल सकता है। कॉन्ट्रैक्टरों का दावा है कि वे मेले का कॉन्ट्रैक्ट 1.5 करोड़ रुपये तक देने को तैयार हैं।

मामला सामने आने के बाद मीडिया ने SDM कार्यालय पहुंचकर अधिकारियों से पक्ष जाना। SDM कुलदीप बावा ने कॉन्ट्रैक्टरों के आरोपों पर सफाई देते हुए कहा कि दस्तावेज जमा करवाने की अंतिम तारीख 9 सितंबर दोपहर 3 बजे निर्धारित की गई थी। उन्होंने बताया कि इस संबंध में दो अखबारों में विज्ञापन भी प्रकाशित करवाया गया था और संबंधित लोगों को प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी गई थी।

SDM ने कहा कि अब मेले के आयोजक कार्यालय पहुंचे हैं और उनसे भी पत्र लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मामले में आगे की कार्रवाई के लिए उनकी ओर से जरूरी सिफारिश की जाएगी।

कुलदीप बावा के मुताबिक, इस बार मेले के कॉन्ट्रैक्ट की कीमत 90 लाख रुपये रखी गई है और इसके लिए 30 लाख रुपये का डिमांड ड्राफ्ट लिया गया है। उन्होंने कहा कि उन्हें सिर्फ एक पत्र जारी किए जाने की जानकारी है और दो पत्र जारी होने की बात उनके संज्ञान में नहीं है।

SDM ने यह भी स्पष्ट किया कि मेले की वास्तविक कीमत बोली शुरू होने के बाद ही सामने आएगी। फिलहाल बोली की शुरुआत 90 लाख रुपये से करने का फैसला किया गया है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों की तुलना में इस बार रेट पहले ही बढ़ाया गया है।

मीडिया के हस्तक्षेप के बाद कॉन्ट्रैक्टरों ने राहत जताई। उन्होंने कहा कि अब उनसे पत्र लिया जा रहा है और उनकी मुख्य मांग यही है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से हो। कॉन्ट्रैक्टरों ने मांग की कि सभी इच्छुक लोगों के दस्तावेज स्वीकार किए जाएं और उसके बाद खुली बोली कराई जाए। उनका कहना है कि जो कॉन्ट्रैक्टर सबसे अधिक बोली लगाए, उसी को नियमों के तहत मेले का कॉन्ट्रैक्ट दिया जाना चाहिए।

फिलहाल मेले के कॉन्ट्रैक्ट को लेकर लगाए गए आरोपों और प्रशासन की सफाई के बीच मामला चर्चा में है। आगे की प्रक्रिया में यह स्पष्ट होगा कि बोली में कितने कॉन्ट्रैक्टर हिस्सा लेते हैं और मेले का कॉन्ट्रैक्ट कितनी राशि में तय होता है।