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सही समय: महिला आरक्षण से बदलेगी भारतीय लोकतंत्र की तस्वीर

सुश्री शोभा करंदलाजे

एक राज्यमंत्री के रूप में पहली बार शपथ लेते समय, मैंने उस खचाखच भरे कमरे में चारों ओर नजरें घुमायीं और गिनती की। वहां मौजूद महिलाओं की संख्या उंगलियों पर गिनी जा सकती थी। इस दृश्य ने केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि के रूप में ही नहीं, बल्कि इस बात के स्पष्ट संकेत के रूप में भी एक छाप छोड़ी कि सार्वजनिक जीवन में महिलाओं को अभी भी काफी लंबा सफर तय करना बाकी है।

मैं कर्नाटक के तटीय इलाके के पुत्तूर के पास स्थित एक छोटे से गांव से आती हूं। पारंपरिक रूप से यह एक समृद्ध इलाका है और यहां की महिलाओं ने हमेशा अपनी दृढ़ता एवं शक्ति का परिचय दिया है। मुझे पता है कि उस शक्ति को सार्वजनिक जीवन में लगाने का क्या मतलब होता है। खासकर, उस स्थिति में जब एक ऐसी राह पर चलना हो जिस पर पहले चंद लोग ही चले हों और हर महिला को वैसे ही जोश के साथ वैसा ही मौका नहीं मिला हो।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम पहले ही पारित हो चुका है। संसद में सितंबर 2023 में इस पर चर्चा हुई थी और संविधान में संशोधन किया गया था। लेकिन अब उस वादे को निभाने का सबसे मुश्किल काम सामने है।

अपने लोगों का प्रतिनिधित्व करने वाला लोकतंत्र

भारत में कुल 670 मिलियन महिलाएं हैं। लेकिन पिछले कई वर्षों में महज 15 प्रतिशत महिलाएं ही संसद में पहुंच पायीं हैं। जो लोकतंत्र अपने आधे नागरिकों को निर्णय लेने की प्रक्रिया से लगातार बाहर रखे, उसे सच्चा लोकतंत्र तो नहीं कहा जा सकता। ऐसे लोकतंत्र को विकास की प्रक्रिया में ही माना जाएगा। नारी शक्ति वंदन अधिनियम इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। लेकिन कागज पर लिखे किसी कानून का तभी कोई महत्व होता है, जब उसे प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। जनगणना कराना बेहद जरूरी है। इसके बाद परिसीमन होना चाहिए और संसद तथा प्रत्येक राज्य की विधानसभा में एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होनी चाहिए।

जब कानून बनाने वाली प्रक्रियाओं में महिलाओं को शामिल किया जाता है, तो कानून बनाने का केन्द्रबिंदु ही बदल जाता है। पंचायती राज संस्थाओं में, जहां दशकों पहले महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया था, प्राथमिकताओं में स्पष्ट बदलाव देखने को मिलता है। पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा और बच्चों के पोषण के लिए अधिक बजट आवंटित किए गए। भ्रष्टाचार के प्रति कम सहनशीलता और समुदायों के प्रति अधिक जवाबदेही देखी गई। यह महज एक संयोग नहीं है। यह प्रतिनिधित्व का जीता-जागता उदाहरण है।

दुष्चक्र को तोड़ना

मैंने अक्सर यह तर्क सुना है कि महिलाओं को “अपनी योग्यता के बल पर” आगे बढ़ना चाहिए। मैं इस भावना का सम्मान करती हूं। लेकिन इस आधार को खारिज करती हूं। योग्यता शून्य में  नहीं पनपती। यह वहीं पनपती है, जहां अवसर मौजूद होते हैं।

पीढ़ियों से, संरचनात्मक बाधाओं – सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक – ने प्रतिभाशाली महिलाओं को राजनीति से बाहर रखा है। उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया में हमेशा उन्हीं लोगों को प्राथमिकता दी गई है जिनके पास सुस्थापित नेटवर्क एवं संपर्क तथा विरासत में मिली राजनीतिक साख रही है और जो घरेलू जिम्मेदारियों से मुक्त हैं। दूसरी ओर, महिलाओं को इनमें से कोई भी सुविधा हासिल नहीं है।

आरक्षण से स्तर कम नहीं होता, बल्कि यह अड़चन को दूर करता है

जब बड़ी संख्या में महिलाएं पंचायतों में दाखिल हुईं, तो शुरू में उन्हें नजरअंदाज किया गया। आखिरकार, विभिन्न अध्ययनों में यह पाया गया कि उनके अपने समुदायों ने उन्हें उनके पुरुष समकक्षों की तुलना में अधिक प्रभावी, अधिक सुलभ और अधिक ईमानदार माना। जब महिलाओं को उचित अवसर दिया जाता है, तो वे केवल भाग ही नहीं लेती बल्कि नेतृत्व भी करती हैं।

नीतिगत दृष्टि से इसके मायने

सरकार में रहते हुए अपने व्यापक अनुभवों से मैंने यह जाना है कि निर्णय लेने वाले स्थानों पर आपकी मौजूदगी ही इस बात को निर्धारित करती है कि किस विषय पर चर्चा होगी। महिला जनप्रतिनिधि मातृ स्वास्थ्य निधि में कटौती की आशंका होने पर इसके लिए आवाज उठाती हैं। वे उन नीतियों के लैंगिक प्रभाव को उजागर करती हैं, जिनका व्यवहार में सबसे बुरा असर महिलाओं पर पड़ सकता है। वे अपने निर्वाचन क्षेत्र की उन चिंताओं को सामने लाती हैं, जिनसे  उनके पुरुष सहकर्मियों का सामना नहीं होता।

संसद और राज्यों की विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण का मतलब यह है कि पहली बार ये आवाजें अपवाद नहीं रहेंगी। ये आवाजें ढांचागत व्यवस्था का हिस्सा होंगी। स्थायी होंगी। इन्हें नजरअंदाज करना असंभव होगा।

नारी शक्ति: सोच से कानून तक

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का यह मानना ​​रहा है कि भारत अपनी महिलाओं की पूर्ण और बराबरी की  भागीदारी के बिना अपनी पूरी क्षमताओं का सदुपयोग नहीं कर सकता। यह महज एक बयानबाजी  भर नहीं, बल्कि एक ऐसा दृढ़ विश्वास है जिसने ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ से लेकर ‘जन धन’, ‘उज्ज्वला’ और ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ में महिलाओं की रिकॉर्ड भागीदारी वाली नीतियों को दिशा दी है। उन्होंने नारी शक्ति को केवल एक नारा नहीं, बल्कि विकसित भारत का आधार  बताया है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम इसी सोच की पूर्ण अभिव्यक्ति है। यह सोच महिला सशक्तिकरण को कल्याणकारी योजनाओं से आगे बढ़ाकर शासन की संरचना में समाहित करती  है।

सभी दलों के अपने साथियों से

यह क्षण हम सभी का है। यह मौका किसी एक दल का नहीं, बल्कि एक संस्था के रूप में संसद का है। सरकार के हर स्तर पर इस राष्ट्र की सेवा करने वाली एक महिला के रूप में, मैं सभी से अपील करती हूं और मेरा मानना ​​है कि हम सभी भारत के लोकतंत्र को मजबूत और अधिक पूर्ण देखना चाहते हैं। भारत की महिलाओं के प्रति हमारा अब यह कर्तव्य है कि हम जनगणना कराने, परिसीमन के कार्य को पूरा करने और यह सुनिश्चित करने में तत्परता बरतें कि इस प्रक्रिया में  एक भी दिन अनावश्यक रूप से बर्बाद न हो।

मैं कार्यान्वयन, आरक्षित सीटों के चक्रण (रोटेशन), परोक्ष (प्रॉक्सी) उम्मीदवारों और सनसेट क्लॉज से जुड़ी चिंताओं से अवगत हूं। ये जायज बहसें हैं, लेकिन हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि इन पर तत्काल ध्यान दिया जाए। सिद्धांत सही है। जरूरत तत्परता की है। हमें पूर्णता को परिवर्तनकारी कदमों के आड़े नहीं आने देना चाहिए।

एक न्यायप्रिय राष्ट्र के रूप में

सितंबर 2023 में इतिहास रचा गया था। लेकिन इतिहास सार्थक तभी होता है जब उसके बाद की घटनायें भी मायने रखें। एक न्यायप्रिय देश अपने द्वारा बनाए गए कानूनों का पालन करके चुपचाप एक चिरस्थायी बदलाव को संभव बनाता है। अपने देश की सेवा करने की आकांक्षा रखने वाली हर युवती, मंच से हमेशा वंचित रहने वाली हर नेता और अभिव्यक्त होने से वाचित हर  आवाज के हित में, अब काम करने का समय है।

इस कानून को लागू कीजिए। दायरे का विस्तार कीजिए। सारा देश देख रहा है।  

(लेखिका केन्द्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा श्रम और रोजगार राज्यमंत्री हैं)

आम चुनाव और उपचुनाव 2026: पश्चिम बंगाल चुनावों में 2,926 उम्मीदवार मैदान में

पश्चिम बंगाल / सत्ता संदेश

भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने 15 मार्च, 2026 को असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की विधानसभाओं के लिए आम चुनाव और 6 राज्यों में उपचुनाव का कार्यक्रम घोषित किया।

  1. पश्चिम बंगाल राज्य (द्वितीय चरण) के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि, जिसके लिए 29 अप्रैल, 2026 को चुनाव होने हैं, 9 अप्रैल, 2026 थी, जबकि पश्चिम बंगाल (द्वितीय चरण) के लिए नामांकन पत्रों की जांच की तिथि 10 अप्रैल, 2026 थी और नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि 13 अप्रैल, 2026 दोपहर 3:00 बजे तक थी ।
  2. नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि के बाद, पश्चिम बंगाल के लिए उम्मीदवारों की कुल संख्या का विवरण इस प्रकार है:
क्रम सं.राज्य/केंद्र शासित प्रदेश का नामविधानसभा क्षेत्रों (एसी) की संख्याउम्मीदवारों की कुल संख्यानामांकन वापस लेने के बाद
1.पश्चिम बंगाल (चरण-I)1521,478
2.पश्चिम बंगाल (चरण-II)1421,448
  1. निर्वाचन अधिकारी (आरओ) चुनाव संचालन नियमावली, 1961 के अनुसार आधिकारिक राजपत्र में चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की सूची प्रकाशित करेंगे ।
  2. आरओ प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में नामांकनजांच और उम्मीदवारी वापस लेने से संबंधित सभी चुनाव पत्रों और कार्यवाही को एक सीलबंद पैकेट/लिफाफे में सील के साथ अपनी निगरानी में रखेंगे ।
  3. नागरिक ईसीआईएनईटी ऐप पर “अपने उम्मीदवार को जानें” टैब से अपने उम्मीदवारों का विवरण देख सकते हैं, जिसमें उनकी शैक्षणिक योग्यताएं, आपराधिक रिकॉर्ड, संपत्ति और देनदारियां शामिल हैं, और उनके शपथपत्र डाउनलोड कर सकते हैं ।
  4. इसके अतिरिक्‍त, ईसीआई की पहल के अनुरूप, ईवीएम मतपत्रों पर उम्मीदवारों की रंगीन तस्वीरें और उनके विवरण, जिनमें क्रम संख्या, नाम और चुनाव चिह्न शामिल हैं, मतदाताओं की सुविधा के लिए बड़े अक्षरों में अंकित होंगे।
प्रधानमंत्री 31 मार्च को गुजरात का दौरा करेंगे

महावीर जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री गांधीनगर के कोबा तीर्थ में सम्राट सम्प्रति संग्रहालय का उद्घाटन करेंगे
संग्रहालय जैन धर्म की समृद्ध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को प्रदर्शित करता है, यह आगंतुकों को जैन धर्म के विकास और इसके गहन सांस्कृतिक प्रभाव की कालानुक्रमिक समझ प्राप्त करने में सहायता करेगा
भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में प्रधानमंत्री सानंद में केयन्स सेमीकॉन प्लांट का उद्घाटन करेंगे
भारत में वाणिज्यिक उत्पादन का शुभारंभ करने वाला यह दूसरा सेमीकंडक्टर संयंत्र होगा
संयंत्र स्वदेशी सेमीकंडक्टर पैकेजिंग क्षमता के निर्माण में योगदान देगा, भारत के चिप इकोसिस्‍टम में महत्वपूर्ण अंतर को समाप्‍त करते हुए आत्मनिर्भरता के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाएगा
प्रधानमंत्री वाव-थराद में 20,000 करोड़ रुपये से अधिक की कई विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे साथ ही उद्घाटन तथा राष्ट्र को समर्पित करेंगे
परियोजनाओं में बिजली, रेलवे, सड़क परिवहन और राजमार्ग, स्वास्थ्य, शहरी विकास, जनजातीय विकास तथा ग्रामीण विकास सहित प्रमुख क्षेत्र शामिल

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी 31 मार्च 2026 को गुजरात का दौरा करेंगे। प्रधानमंत्री गांधीनगर में सुबह लगभग 10 बजे सम्राट संप्रति संग्रहालय का उद्घाटन करेंगे और इस अवसर पर जनसभा को संबोधित भी करेंगे। प्रधानमंत्री अहमदाबाद के सानंद में स्थित केयन्स सेमीकॉन प्लांट का दोपहर लगभग 12:45 बजे उद्घाटन करेंगे और जनसभा को संबोधित करेंगे। इसके बाद, प्रधानमंत्री वाव-थराद जाएंगे, जहां शाम लगभग 4 बजे, वे 20,000 करोड़ रुपये से अधिक की अनेक विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे और उनका उद्घाटन करके राष्ट्र को समर्पित करेंगे। इस अवसर पर वे जनसभा को भी संबोधित करेंगे।

प्रधानमंत्री का गांधीनगर दौरा

महावीर जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री गांधीनगर के कोबा तीर्थ में सम्राट सम्प्रति संग्रहालय का उद्घाटन करेंगे। अशोक के पौत्र और जैन परंपरा में अहिंसा के प्रति समर्पण तथा जैन धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए प्रसिद्ध सम्राट सम्प्रति के नाम पर स्थापित यह संग्रहालय जैन धर्म की समृद्ध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को प्रदर्शित करता है।

महावीर जैन आराधना केंद्र परिसर में स्थित इस संग्रहालय में सात अलग-अलग खण्‍ड हैं, जिनमें से प्रत्येक भारत की सभ्यतागत परंपराओं के अनूठे पहलुओं को समर्पित है। यह आगंतुकों को सदियों पुराने ज्ञान और विरासत की एक व्यापक यात्रा के दर्शन कराता है। संग्रहालय पारंपरिक प्रदर्शनों को आधुनिक डिजिटल और ऑडियो-विजुअल उपकरणों के साथ एकीकृत करता है, जिससे आगंतुकों, शोधकर्ताओं और विद्वानों के लिए एक गहन और आकर्षक अनुभव का निर्माण होता है।

यह संग्रहालय सदियों पुराने दुर्लभ अवशेषों, जैन कलाकृतियों और पारंपरिक विरासत संग्रहों का संरक्षण और प्रदर्शन करता है। इनमें जटिल रूप से गढ़ी गई पत्थर और धातु की मूर्तियां, विशाल तीर्थ पट्टा और यंत्र पट्टा, लघु चित्रकारी, चांदी के रथ, सिक्के और प्राचीन पांडुलिपियां शामिल हैं, जिन्हें सात भव्य दीर्घाओं में प्रदर्शित किया गया है। विशाल कक्षों में व्यवस्थित दो हजार से अधिक दुर्लभ खजानों से युक्त यह संग्रहालय आगंतुकों को जैन धर्म के विकास और इसके गहन सांस्कृतिक प्रभाव की कालानुक्रमिक समझ प्राप्त करने में सक्षम बनाता है।

प्रधानमंत्री का सानंद दौरा

प्रधानमंत्री अहमदाबाद के सानंद जीआईडीसी में स्थित केयन्स सेमीकॉन प्लांट का उद्घाटन करेंगे। इसके साथ ही इस संयंत्र में वाणिज्यिक उत्पादन की शुरुआत होगी, जो भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

वाणिज्यिक उत्पादन की शुरुआत उन्नत इंटेलिजेंट पावर मॉड्यूल (आईपीएम) के निर्माण से होगी, जो ऑटोमोटिव और औद्योगिक अनुप्रयोगों के लिए महत्वपूर्ण घटक हैं और जिन्हें कॉम्पैक्ट, कुशल और विश्वसनीय पावर स्विचिंग सिस्टम की आवश्यकता होती है। प्रत्येक मॉड्यूल में 17 चिप्स होते हैं और इनकी आपूर्ति कैलिफोर्निया स्थित अल्फा एंड ओमेगा सेमीकंडक्टर (एओएस) को की जाएगी। संयंत्र के सभी चरण पूरे होने पर, इसकी उत्पादन क्षमता प्रतिदिन 6.33 मिलियन यूनिट होगी।

केयन्स सेमीकॉन प्लांट का उद्घाटन इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण कदम है। यह कार्यक्रम के तहत स्वीकृत परियोजनाओं में से माइक्रोन टेक्नोलॉजी के बाद वाणिज्यिक उत्पादन शुरू करने वाली दूसरी सेमीकंडक्टर सुविधा होगी।

यह परियोजना विशेष महत्व रखती है क्योंकि इसके अंतर्गत भारत की दूसरी ओएसएटी/एटीएमपी (आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट/असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकिंग) इकाई उत्पादन चरण में प्रवेश कर रही है। यह परियोजना सेमीकंडक्टर विनिर्माण क्षेत्र में भारतीय मूल की इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (ईएमएस) कंपनी के प्रवेश का भी प्रतीक है, जिससे घरेलू क्षमताओं को मजबूती मिलती है।

यह सुविधा स्वदेशी सेमीकंडक्टर पैकेजिंग क्षमता के निर्माण में योगदान देगी, भारत के चिप इकोसिस्टम में एक महत्वपूर्ण कमी को दूर करेगी और उच्च-प्रौद्योगिकी विनिर्माण में आत्मनिर्भरता की परिकल्पना को आगे बढ़ाएगी।

प्रधानमंत्री का वाव-थारद दौरा

प्रधानमंत्री 20,000 करोड़ रुपये से अधिक की अनेक विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे, उनका उद्घाटन करेंगे और राष्ट्र को समर्पित करेंगे। ये परियोजनाएं बिजली, रेलवे, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग, स्वास्थ्य, शहरी विकास, जनजातीय विकास और ग्रामीण विकास सहित प्रमुख क्षेत्रों को कवर करती हैं।

प्रधानमंत्री 5,100 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निर्मित अहमदाबाद-धोलेरा एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन करेंगे। यह एक्सप्रेसवे क्षेत्रीय संपर्क को बेहतर बनाएगा, धोलेरा विशेष निवेश क्षेत्र (डीएसआईआर) में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देगा और आर्थिक विकास को गति प्रदान करेगा।

प्रधानमंत्री पक्की शोल्डर वाली चार लेन की इदर-बडोली बाईपास सड़क के निर्माण की आधारशिला रखेंगे। वे एनएच-754के के धोलावीरा-मौवाना-वाउवा-संतालपुर खंड (पैकेज-II) को दो लेन की पक्की शोल्डर वाली सड़क में अपग्रेड करने की भी आधारशिला रखेंगे। इन परियोजनाओं से राजमार्ग बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी, धोलावीरा जैसे पर्यटन स्थलों सहित प्रमुख क्षेत्रों से कनेक्टिविटी बेहतर होगी, लॉजिस्टिक्स दक्षता बढ़ेगी और सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।

प्रधानमंत्री गांधीनगर-कोबा-एयरपोर्ट रोड पर भाईजीपुरा जंक्शन पर बनने वाले फ्लाईओवर सहित कई महत्वपूर्ण सड़क अवसंरचना परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे। इस फ्लाईओवर से यातायात की भीड़ कम होगी और इसके नीचे व्यवस्थित पार्किंग की सुविधा उपलब्ध होगी। गांधीनगर-कोबा-आरोदराम रोड पर स्थित पीडीपीयू जंक्शन पर भी फ्लाईओवर का उद्घाटन किया जाएगा। गांधीनगर को एयरपोर्ट से जोड़ने वाली इस सड़क पर प्रतिदिन 140,000 से अधिक वाहन गुजरते हैं। यह फ्लाईओवर अहमदाबाद और गांधीनगर के बीच सीएच-0 जंक्शन से एयरपोर्ट तक सुचारू और निर्बाध यातायात सुनिश्चित करेगा।

प्रधानमंत्री खावड़ा पूलिंग स्टेशन-2 और उससे जुड़े 4.5 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा के परिवहन हेतु संबद्ध पारेषण प्रणालियों सहित प्रमुख विद्युत पारेषण परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे, जिनकी कुल लागत लगभग 3,650 करोड़ रुपये है। ये परियोजनाएं नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण और पारेषण क्षमता को मजबूत करेंगी।

रेल क्षेत्र में, प्रधानमंत्री कनलस-जामनगर दोहरीकरण परियोजना (28 किमी), राजकोट-कनलस दोहरीकरण परियोजना का एक भाग (111.20 किमी), और गांधीधाम-आदिपुर खंड (10.69 किमी) के चौगुने विस्तार को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। इन परियोजनाओं से रेल क्षमता में वृद्धि होगी, भीड़ कम होगी, परिचालन दक्षता में सुधार होगा और यात्रियों और माल की आवाजाही तेज होगी।

प्रधानमंत्री हिम्मतनगर-खेड़ब्रह्मा गेज रूपांतरण परियोजना (54.83 किमी) का भी उद्घाटन करेंगे, जिससे क्षेत्र में रेल संपर्क और यात्री आवागमन में सुधार होगा। वे खेदब्रह्मा-हिम्मतनगर-असरवा ट्रेन सेवा को भी हरी झंडी दिखाएंगे।

प्रधानमंत्री गुजरात में शहरी बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने और जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने के उद्देश्य से शुरू की गई लगभग 5,300 करोड़ रुपये की 44 शहरी विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और आधारशिला रखेंगे। प्रधानमंत्री स्वास्थ्य और परिवार कल्याण से जुड़ी विभिन्न पहलों का भी उद्घाटन करेंगे, जिनमें अहमदाबाद के असरवा स्थित सिविल अस्पताल में 858 बिस्तरों वाले रेन बसेरा और गांधीनगर के सिविल अस्पताल और जीएमईआरएस मेडिकल कॉलेज में इसी तरह की सुविधाओं का उद्घाटन शामिल है।

प्रधानमंत्री मोदी पाटन स्थित रानी की वाव में लाइट एंड साउंड शो, शर्मिष्ठा झील, वडनगर में वाटर स्क्रीन प्रोजेक्शन शो सहित पर्यटन परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे और बनासकांठा में बलराम महादेव और विश्वेश्वर महादेव में पर्यटन अवसंरचना कार्यों की आधारशिला रखेंगे, जिनका उद्देश्य पर्यटन अनुभव को बढ़ाना और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देना है।

प्रधानमंत्री लगभग 1,780 करोड़ रुपये की लागत वाली दो प्रमुख जल पाइपलाइन परियोजनाओं को राष्ट्र को समर्पित करेंगे, जिनमें बनासकांठा में कसारा-दंतीवाड़ा पाइपलाइन और पाटन और बनासकांठा के बीच से गुजरने वाली दिंद्रोल-मुक्तेश्वर पाइपलाइन शामिल हैं। प्रधानमंत्री अंबाजी और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए जल आपूर्ति योजना की आधारशिला रखेंगे। इससे बनासकांठा जिले के दंता और अमीरगढ़ तालुकों के 34 गांवों और अंबाजी शहर को पेयजल उपलब्ध होगा, जिससे लगभग 1.5 लाख लोगों को लाभ होगा। प्रधानमंत्री गांधीनगर जिले में लगभग 1000 करोड़ रुपये के संयुक्त निवेश से निर्मित तीन साबरमती नदी तट विस्तार परियोजनाओं की आधारशिला भी रखेंगे।

प्रधानमंत्री अहमदाबाद के वेजलपुर में सरकारी लड़कों के छात्रावास का उद्घाटन करेंगे। यह सुविधा उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे जनजातीय छात्रों को सहायता प्रदान करेगी।

विधानसभा सदस्यता से सोमवार को इस्तीफा देने से पहले नितिन नवीन की भावुक अपील

पटना, 30 मार्च (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोमवार को बिहार विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने से पहले विधानसभा क्षेत्र की जनता से भावुक अपील की।

दो सप्ताह पहले राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए नवीन ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा, ‘‘आज मैं बिहार विधानसभा के बांकीपुर निर्वाचन क्षेत्र से निर्वाचित सदस्य पद से इस्तीफा दे रहा हूं।’’

अपने राजनीतिक को याद करते हुए उन्होंने लिखा, ‘‘जनवरी 2006 में पिताजी के आकस्मिक निधन के बाद पार्टी ने मुझे पटना पश्चिम से उपचुनाव लड़ने का अवसर दिया और 27 अप्रैल 2006 को पहली बार पटना पश्चिम क्षेत्र से निर्वाचित होकर मैंने सामाजिक एवं राजनीतिक जीवन की शुरुआत की।’’

उन्होंने कहा, ‘‘पिछले 20 वर्षों में पिताजी दिवंगत नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा द्वारा बनाए गए इस क्षेत्र को पारिवारिक भाव से सींचने, संवारने और विकास के पटल पर आगे ले जाने का निरंतर प्रयास किया है।’’

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा, ‘‘मैंने सदैव अपने क्षेत्र और बिहार के विकास के लिए समर्पित भाव से कार्य किया। इसी का प्रतिफल है कि यहां की देवतुल्य जनता ने मुझे लगातार पांच बार सदन में अपना प्रतिनिधि चुनकर सेवा का सौभाग्य प्रदान किया। सदन के अंदर हो या सदन के बाहर, दोनों ही स्थानों का उपयोग मैंने अपने क्षेत्र और बिहार की जनता की आवाज उठाने और उनकी समस्याओं के समाधान का मार्ग निकालने के लिए किया।’’

उन्होंने कहा, ‘‘बिहार विधानसभा के सदस्य के रूप में मुझे सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई वरिष्ठ विधायकों से बहुत कुछ सीखने का अवसर मिला। मैंने अपने क्षेत्र के कई महत्वपूर्ण विषयों का समाधान जनता और कार्यकर्ताओं के सुझावों से ही निकाला है।’’

नवीन ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में पार्टी ने जब मुझे बिहार सरकार के मंत्री के रूप में काम करने का अवसर दिया, तब मुझे कई अहम फैसलों, नीतियों और योजनाओं का क्रियान्वयन करने में सफलता मिली। इसके लिए मैं माननीय मुख्यमंत्री जी का धन्यवाद व्यक्त करता हूं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने यह हमेशा कहा है कि जनता ने मुझे समस्याएं भी बताई, और उन समस्याओं के समाधान का रास्ता भी मुझे जनता ने हीं दिखाया। कार्यकर्ताओं ने मुझे भाई के रूप में, परिवार के सदस्य के रूप में और अभिभावक के रूप में उंगली पकड़कर आज इस मुकाम तक पहुंचाया है। मैं पटना और बिहार की जनता को आश्वस्त करता हूं कि जो परिवार का भाव उन्होंने मुझे दिया है, उसका मैं सदैव सम्मान करता रहूंगा।’’

नवीन ने कहा, ‘‘पार्टी ने मुझे जो नयी भूमिका दी है, उसके माध्यम से भी मैं अपने क्षेत्र और बिहार के विकास के लिए सदैव तत्पर एवं संकल्पित रहूंगा। मेरे कार्यकर्ताओं और बिहार की जनता के साथ मेरा जो अटूट संबंध है, वह सदैव बना रहेगा और मुझे हमेशा नई ऊर्जा, प्रेरणा और मार्गदर्शन देता रहेगा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 2047 के ‘विकसित भारत एवं विकसित बिहार’ बनाने के सपने को साकार करने की दिशा में मैं निरंतर प्रयासरत रहूंगा। ’’