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भारत के रक्षा सचिव औऱ जापान के उप ऱक्षामंत्री ने टोक्यों में 8वें रक्षा नीति संवाद का किया आयोजन

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारत और जापान ने सोमवार को जापान के टोक्यो में 8वें रक्षा नीति संवाद का आयोजन किया। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने किया और जापानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व अंतर्राष्ट्रीय मामलों के रक्षा उप मंत्री कानो कोजी ने किया। दोनों पक्षों ने पिछले रक्षा नीति वार्ता सम्मेलन के बाद से द्विपक्षीय रक्षा सहयोग में हुई महत्वपूर्ण प्रगति की समीक्षा की और दोनों देशों के बीच विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

दोनों देशों ने क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा परिवेश पर व्यापक चर्चा की और पारस्परिक हित के मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। इस संवाद में द्विपक्षीय रक्षा गतिविधियों के संपूर्ण दायरे की समीक्षा की गई, जिसमें सैन्य आदान-प्रदान, संयुक्त मुख्यालयों के बीच सहयोग, समुद्री सहयोग, रक्षा अभ्यास, क्षमता विकास, समुद्री प्रौद्योगिकी सहित रक्षा उपकरण और प्रौद्योगिकी सहयोग को बढ़ावा देना शामिल है।

दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने रक्षा औद्योगिक सहयोग, तकनीकी नवाचार, साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष और साझा रणनीतिक हित के अन्य क्षेत्रों सहित उभरते क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने के तरीकों पर भी चर्चा की। दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा मुद्दों पर भारत और जापान के बीच बढ़ते तालमेल पर संतोष व्यक्त किया और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में मिलकर काम करना जारी रखने पर सहमति जताई।

रक्षा सचिव ने रक्षा क्षेत्र में भारत के साथ जापान की निरंतर भागीदारी की सराहना की और भारत-जापान विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी के ढांचे के तहत व्यावहारिक सहयोग को मजबूत करने के महत्व पर जोर दिया। कानो कोजी ने प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में भारत के साथ रक्षा संबंधों को बढ़ावा देने की जापान की प्रतिबद्धता को दोहराया।

रक्षा सचिव ने टोक्यो में आत्मरक्षा बलों के स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित करके अपनी यात्रा की शुरुआत की और राष्ट्र की सेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले जापान के आत्मरक्षा बलों के सदस्यों को श्रद्धांजलि दी।

इस यात्रा ने भारत और जापान के बीच बढ़ते रक्षा संबंधों, आपसी सम्मान और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता के प्रति साझा प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।

प्रधानमंत्री मोदी के भारत के 5एफविज़न को बुनता टेक्स 2026 : पबित्रा मार्गेरिटाो

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

कश्मीरी पश्मीना की नरम गर्माहट से लेकर असम के मूंगा सिल्क की शानदार चमक तक, राजस्थानी बांधनी के जीवंत ज्यामितीय पैटर्न से लेकर कांजीवरम सिल्क की सदाबहार और बेहतरीन बनावट तक, भारत की भौगोलिक और सांस्कृतिक विविधता धागों से बुना एक जीता-जागता नक्शा है। आज, सभ्यता की यह बेमिसाल तस्वीर एक ही छत के नीचे एक साथ नज़र आ रही है। नई दिल्ली के प्रसिद्ध भारत मंडपम में 14 से 17 जुलाई तक भारत टेक्स 2026 का आयोजन, हमारे देश की खूबसूरत विविधता को एक ही मंच पर ला रहा है।

वस्त्र उद्योग सिर्फ हमारी विरासत की झलक नहीं है, यह भारत के मैक्रो-इकोनॉमिक ढांचे की एक मज़बूत नींव भी है। यह क्षेत्र लगातार विकास और समानता का एक बहुत बड़ा इंजन बना हुआ है, जो जीडीपी में 2.3%, औद्योगिक उत्पादन में 13% और निर्यात में 8.6% का योगदान देता है। कृषि के बाद भारत में सबसे ज़्यादा रोज़गार देने वाला यह क्षेत्र 100 मिलियन से ज़्यादा लोगों की आजीविका का साधन है, जो ग्रामीण समुदायों को मज़बूत बनाता है और देश भर में लाखों महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाता है।

आर्थिक शक्ति के इस केंद्र को सही मायने में समझने के लिए भारत टेक्स का अनुभव करना बेहद ज़रूरी है। यह वैश्विक स्तर पर प्रमुख भारतीय वस्त्रों का व्यापार मेला है, जिसे पूरी दुनिया के सामने हमारे निर्माण और रचनात्मकता की क्षमता का दबदबा दिखाने के लिए तैयार किया गया है। यह एक ऐसा व्यापक बाज़ार है, जहाँ घरेलू निर्माणकर्ता, राज्यों के पवेलियन, अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शक और वैश्विक खरीदार एक ही छत के नीचे होते हैं। इससे बड़े पैमाने पर सोर्सिंग, कॉर्पोरेट जुड़ाव और ब्रांड को प्रदर्शित करने के अवसर भी मिलते हैं।

इस शानदार पहल के सफ़र पर नज़र डालें तो मुझे भारत टेक्स के पिछले दो आयोजनों से बेहद गर्व की अनुभूति का स्मरण होता है। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत टेक्स के पिछले संस्करण के दौरान संपूर्ण वस्त्र समुदाय को संबोधित किया था, तो उन्होंने बेहद खूबसूरती से कहा था कि हमने जो बीज बोया था, वह अब तेज़ी से बरगद के पेड़ का रूप ले रहा है। उन्होंने कहा कि यह भव्य आयोजन न केवल हमारी समृद्ध परंपराओं का जश्न मनाता है, बल्कि एक विकसित भारत की अपार संभावनाओं को भी उजागर करता है। पहले दो आयोजनों की ज़बरदस्त सफलता ने एक मज़बूत नींव रखी, बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय खरीदारों को आकर्षित किया और सहयोग की दिशा में भी तेज़ी देखने को मिली। भारत टेक्स 2025 के दौरान मेरे व्यक्तिगत अनुभव ने भविष्य के लिए एक बहुत ही सकारात्मक नज़रिया हासिल किया, जहाँ मैंने सरकार से सरकार और व्यापार से सरकार के बीच गहन बातचीत को ठोस नतीजों में बदलते देखा और इसी के चलते भारत की कार्य क्षमता में बढ़ते वैश्विक भरोसे की झलक भी दिखी। यह तीसरा आयोजन उस रफ्तार को और आगे ले जाता है और शुरुआती संभावनाओं को पूरी तरह से औद्योगिक प्रभाव में बदलता है।

इस साल के कार्यक्रम का बहुत बड़ा पैमाना एक सोची-समझी औद्योगिक रणनीति को दर्शाता है। भारत मंडपम में खास प्रदर्शनी हॉलों में फैली यह प्रदर्शनी भारत की पूरी वस्त्र मूल्य श्रृंखला को दिखाती है, जिसमें फाइबर, यार्न, फैब्रिक, कपड़े और फैशन, होम टेक्सटाइल, तकनीकी वस्त्र और सहायक उद्योग शामिल हैं। इसमें 1,600 से ज़्यादा प्रदर्शक हिस्सा ले रहे हैं, जो स्थानीय उत्पादन की ताकत को सीधे वैश्विक मंच पर पेश करेंगे। यह प्रधानमंत्री मोदी के क्रांतिकारी 5एफ विज़न- फार्म (खेत) से फाइबर से फैक्ट्री से फैशन से फॉरेन (विदेश) तक के सफर को दर्शाता है। पूरी मूल्य श्रृंखला को एक ही औद्योगिक श्रृंखला में जोड़कर, यह कार्यक्रम विनिर्माण के हर चरण को देश में ही संभालने की भारत की आत्मनिर्भर क्षमता को दिखाता है।

इस पहल को दुनिया भर से ज़बरदस्त प्रतिक्रिया मिली है। इस संस्करण में अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, जापान, पुर्तगाल, स्पेन, न्यूज़ीलैंड, दक्षिण कोरिया, दक्षिण अफ्रीका और नेपाल समेत 14 देशों के अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शक शामिल हैं, साथ ही, संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ का भी मज़बूत संस्थागत प्रतिनिधित्व है। कई देशों के मंत्री-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल और बड़े व्यापारिक प्रतिनिधि दीर्घकालीन साझेदारी की संभावना तलाशने के लिए इसमें हिस्सा ले रहे हैं। उम्मीद है कि चार दिनों में 110 से ज़्यादा पंजीकृत देशों से 7,000 से ज़्यादा खरीददार और 1.3 लाख व्यापारिक आगंतुक आएंगे, जो वहां दिखाए जा रहे 20,000 से ज़्यादा वस्त्र उत्पादों को देखेंगे। इस व्यावसायिक गतिविधि में 3,500 से ज़्यादा खास तौर पर आयोजित बिज़नेस टू बिज़नेस बैठकें होंगी। इसके अलावा, राज्य निवेशक संपर्क सत्र भी होंगे, जो अलग-अलग भारतीय राज्यों को अपने खास औद्योगिक ढ़ांचे को पेश करने का मंच प्रदान करेंगे।

उद्योगों को आगे बढ़ाने हेतु वास्तविक नेतृत्व के लिए ज्ञान और भविष्य की योजना के प्रति गहरी प्रतिबद्धता की ज़रूरत होती है। भारत टेक्स 2026 इस ज़िम्मेदारी को वैश्विक वस्त्र वार्ता के ज़रिए निभाता है, जिसमें पैनल चर्चा, राउंडटेबल, मास्टरक्लास, राज्य सत्र, अवॉर्ड्स पिच फेस्ट और कार्यशाला जैसे 100 से ज़्यादा खास सत्र शामिल हैं। 370 से ज़्यादा अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय सीएक्सओ, पॉलिसी निर्माता और अन्वेषकों की अगुवाई में होने वाले ये खास सत्र व्यापार और निवेश को बढ़ाने, तकनीक और नवाचारों को आगे बढ़ाने और फैशन तथा क्राफ्ट को बेहतर बनाने पर फोकस करेंगे। इस कार्यक्रम में व्यापार, निवेशक, तकनीक और संस्थागत सहयोग से जुड़े कई रणनीतिक समझौतों और क्षेत्रों से जुड़ी रिपोर्ट पर हस्ताक्षर और उन्हें लॉन्च भी किया जाएगा।

इन चर्चाओं में वहनीयता और सर्कुलैरिटी जैसे अहम पहलुओं पर भी खास ध्यान दिया जाएगा। पिछले कार्यक्रम के दौरान, प्रधानमंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया था कि वैश्विक फैशन समुदाय तेज़ी से पर्यावरण के लिए फैशन के दृष्टिकोण को अपना रहा है और वहनीयता हमेशा से भारत की टेक्सटाइल विरासत का अहम हिस्सा रही है। भारत टेक्स का यह संस्करण वैश्विक पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियों को एक बड़े अवसर में बदलता है और यह दिखाता है कि कैसे नवाचारों की मदद से हमारी पारंपरिक तकनीकें और बेहतर हुई हैं और इस दौरान ये भी ख्याल रखा गया है कि इस प्रक्रिया में संसाधनों का ज़्यादा से ज़्यादा इस्तेमाल हो सके और बर्बादी कम हो, जिससे हमारे बुनकरों और कारीगरों को सीधा फायदा हो। हमारे वस्त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह जी के नेतृत्व में, मंत्रालय ने ज़मीनी स्तर पर इन आधुनिकीकरण और वहनीय वृद्धि की पहलों को तेज़ी से आगे बढ़ाया है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि हमारी पूरी वस्त्र मूल्य श्रृंखला को मज़बूत आधुनिक तकनीक, बड़े पैमाने पर लागू होने वाले नीतिगत फ्रेमवर्क और मज़बूत मार्केट लिंकेज का सहारा मिले।

आज भारत टेक्स में लगातार बढ़ता पैमाना और आत्मविश्वास जो दिख रहा है, वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले एक दशक से लगातार किए जा रहे नीतिगत सुधारों का नतीजा है। पिछले 12 सालों में, मोदी सरकार ने बड़े बदलाव लाने वाले कदमों के ज़रिए वस्त्र मूल्य श्रृंखलाओं की हर कड़ी को मज़बूत किया है। वस्त्रों के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना ने ₹31,687 करोड़ से ज़्यादा के निवेश का वादा हासिल किया है। इससे मैन-मेड फाइबर वाले कपड़ों, फैब्रिक और टेक्निकल टेक्सटाइल के बड़े पैमाने पर निर्माण को बढ़ावा मिला है और साथ ही बड़े पैमाने पर रोज़गार के अवसर भी पैदा हुए हैं। इसके साथ ही, प्रधानमंत्री के दूरदर्शी 5एफ दृष्टिकोण को अपनाते हुए सात पीएम पार्क को एकीकृत विनिर्माण व्यवस्था के तौर पर विकसित किया जा रहा है। ज़मीनी स्तर पर लोगों को सशक्त बनाने का काम भी तेज़ी से चल रहा है, राष्ट्रीय हथकरघा विकास कार्यक्रम के तहत 794 हैंडलूम क्लस्टर में लगभग ₹2,000 करोड़ का निवेश किया गया है। इससे 1.17 लाख बुनकरों को बेहतर करघे मिले हैं और लगभग 90,000 कामगारों को कौशल प्रशिक्षण दिया गया है। वहीं, राष्ट्रीय हस्तशिल्प विकास कार्यक्रम के तहत हस्तशिल्प क्षेत्र में ₹1,335 करोड़ से ज़्यादा का निवेश किया गया है। इसके अलावा, 1.5 लाख से ज़्यादा बुनकरों को गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जेम) से जोड़ा गया है और बुनकर मुद्रा योजना के तहत लगभग 3 लाख लोगों को बिना गारंटी के ऋण दिए गए हैं। अपने घरेलू निर्माताओं, कारीगरों और अन्वेषकों को सीधे वैश्विक बाज़ार से जोड़कर, इन व्यापक सुधारों ने हमें उस बड़े वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ने के लिए तैयार किया है, जिसकी झलक इस हफ्ते देखने को मिल रही है।

आज जब हम भारत मंडपम के जीवंत प्रदर्शनी हॉलों पर नज़र डालते हैं, तो हमारा नज़रिया इस व्यापार प्रदर्शनी के तात्कालिक दायरे से कहीं आगे तक विस्तृत होता नज़र आता है। यह आयोजन भारत के वस्त्र उद्योग को 350 बिलियन डॉलर के वैश्विक शक्ति केंद्र में बदलने के हमारे विज़न 2030 रोडमैप में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जो विकसित भारत @ 2047 के राष्ट्रीय लक्ष्य के साथ पूरी तरह से मेल खाता है। मैं आप सभी को भारत टेक्स 2026 में अगले चार दिनों तक हमारे साथ जुड़ने के लिए आमंत्रित करता हूं, ताकि आप हमारे श्रमिकों की अविश्वसनीय शक्ति, हमारे रचनाकारों के शानदार नवाचारों और वैश्विक वस्त्रों के भविष्य को देख सकें, जिन्हें गर्व से भारत में डिज़ाइन किया गया है, टिकाऊ तरीके से निर्मित किया गया है और बड़े पैमाने पर एकीकृत किया गया है।

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(लेखक केंद्रीय वस्त्र राज्य मंत्री हैं। व्यक्त किए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत हैं।)

गांधी ब्रदर्स को समर बंपर लॉटरी बिक्री में दूसरा स्थान, रक्षाबंधन और दिवाली बंपर टिकट लॉन्च
  • ग्राहकों के भरोसे का पहला नाम गांधी ब्रदर्स सम्मानित
  • अमृतसर, पटियाला और मोगा में खोली जाएंगी नई लॉटरी दुकानें: मनमीत गांधी

लुधियाना / सत्ता संदेश

लॉटरी जगत में ग्राहकों के भरोसे का पहला नाम बन चुके गांधी ब्रदर्स को समर बंपर लॉटरी टिकटों की शानदार बिक्री में दूसरा स्थान हासिल करने पर मार्टिन ग्रुप ऑफ लॉटरी की निदेशक मैडम डेज़ी द्वारा सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर गांधी ब्रदर्स के मनमीत गांधी और तरनप्रीत गांधी ने बताया कि गांधी ब्रदर्स ग्राहकों के भरोसे का पहला नाम है। पंजाब सहित देश के विभिन्न हिस्सों से लोग उनकी दुकानों से लॉटरी टिकट खरीदते हैं। वे पिछले कई वर्षों से पंजाब सरकार की साप्ताहिक, मासिक और बंपर लॉटरी टिकटों की बिक्री कर रहे हैं। इस मौके पर कंपनी की ओर से 7 करोड़ रुपये के रक्षाबंधन बंपर और 12 करोड़ रुपये के दिवाली बंपर की टिकटें भी लॉन्च की गईं।

तरनप्रीत गांधी ने बताया कि अगले एक-दो सप्ताह के भीतर अमृतसर में भी उनकी नई दुकान खोली जाएगी। इसके अलावा ग्राहकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पटियाला और मोगा में भी आने वाले दिनों में नई दुकानें खोली जाएंगी।

इस दौरान उन्होंने लोगों को ऑनलाइन लॉटरी के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी से सावधान रहने की अपील की और केवल मान्यता प्राप्त दुकानों से ही प्रिंटेड लॉटरी टिकट खरीदने का आग्रह किया।

भारत-नेपाल के बीच काठमांडू में होगी बैठक, ऊर्जा सहयोग पर करेंगे चर्चा

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारत और नेपाल के बीच ऊर्जा सहयोग को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से इस हफ्ते काठमांडू में संयुक्त कार्य समूह और संयुक्त संचालन समिति की बैठकें आयोजित की जाएंगी. एक अधिकारी ने रविवार को जानकारी दी कि ये बैठकें 14 और 15 जुलाई को होंगी. नेपाल के ऊर्जा, जल संसाधन एवं सिंचाई मंत्रालय के संयुक्त प्रवक्ता संदीप कुमार देव ने बताया कि सचिव स्तर की इन बैठकों में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व भारत के ऊर्जा सचिव पंकज अग्रवाल करेंगे, जबकि नेपाली प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई ऊर्जा, जल संसाधन एवं सिंचाई मंत्रालय की सचिव सरिता दवाड़ी करेंगी.

उन्होंने बताया कि संयुक्त कार्य समूह की बैठक में नेपाल के ऊर्जा, जल संसाधन एवं सिंचाई मंत्रालय के संयुक्त सचिव और भारत के ऊर्जा मंत्रालय के उनके समकक्ष अधिकारी शामिल होंगे. वहीं, संयुक्त संचालन समिति की बैठक में दोनों देशों के संबंधित विभागों के सचिव हिस्सा लेंगे.

काठमांडू में उर्जा सहयोग के मुद्दे पर बैठकें

दरअसल एक अधिकारी ने बताया कि भारत और नेपाल इस हफ्ते काठमांडू में उर्जा सहयोग के मुद्दे पर ‘जॉइंट वर्किंग ग्रुप’ और ‘जॉइंट स्टीयरिंग कमेटी’ की बैठकें करने वाले हैं. ये बैठकें 14 और 15 जुलाई को होंगी. नेपाल के मंत्रालय के संयुक्त प्रवक्ता संदीप कुमार देव के अनुसार, पावर सेक्रेटरी स्तर की बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व भारत के पावर सेक्रेटरी पंकज अग्रवाल करेंगे, जबकि नेपाली प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व ऊर्जा और जल संसाधन मंत्रालय की सेक्रेटरी सरिता दवाडी करेंगी.

दोनों देशों के उर्जा विभागों के सचिव होंगे शामिल

‘जॉइंट वर्किंग ग्रुप’ की बैठक में नेपाल के ऊर्जा, जल संसाधन और सिंचाई मंत्रालय के संयुक्त सचिव और भारतीय ऊर्जा मंत्रालय के उनके समकक्ष अधिकारी शामिल होंगे, जबकि ‘जॉइंट स्टीयरिंग कमेटी’ की बैठक में दोनों देशों के संबंधित विभागों के सचिव शामिल होंगे. अधिकारी ने बताया कि इन बैठकों में नेपाल और भारत के बीच एनर्जी सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की जाएगी.

रिन्यूएबल एनर्जी में सहयोग के लिए MoU पर हस्ताक्षर

इससे पहले, जनवरी में विदेश मंत्री एस. जयशंकर की नेपाल यात्रा के दौरान, नेपाल ने भारत को 10,000 मेगावाट बिजली निर्यात करने के लिए एक दीर्घकालिक समझौते और रिन्यूएबल एनर्जी में सहयोग के लिए एक MoU पर हस्ताक्षर किए थे, और संयुक्त रूप से तीन क्रॉस-बॉर्डर ट्रांसमिशन लाइनों का उद्घाटन किया था.

बैकॉक में बड़ा हादसा, पब में आग लगने से 27 लोगों की मौत , थाईलैंड पीएम ने जताया दुख

वर्ल्ड डेस्क / सत्ता संदेश

बैंकॉक के एक पब में भीषण आग लग गई, जिसमें कम से कम 27 लोगों की मौत हो गई। फायर ब्रिगेड ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। बचाव कर्मियों ने बताया कि आग लगने की सूचना आधी रात के आसपास मिली थी। सबसे पहले मौके पर पहुंचने वालों के ऑनलाइन शेयर किए गए फुटेज में थाई राजधानी में स्थित पब के सामने के दरवाजे से आग की भीषण लपटें निकलती और आसमान में घना काला धुआं उठता दिख रहा है, जबकि लोग वहां से भागने की कोशिश कर रहे थे।

थाईलैंड के प्रधानमंत्री अनुतिन चर्नविराकुल ने घटनास्थल पर पत्रकारों को बताया कि 27 लोगों की मौत हो गई है और कई लोगों को अस्पताल ले जाया गया है। उन्होंने कहा कि आग लगने के कारण की अभी जांच की जा रही है.

फायर ब्रिगेड ने आग पर पाया काबू

अधिकारियों ने बताया कि फायर ब्रिगेड को आग पर काबू पाने में लगभग आधा घंटा लगा। घटना के बाद की तस्वीरों में जले हुए टेबल-कुर्सियां और पब का क्षतिग्रस्त अंदरूनी हिस्सा दिखाई दे रहा है। थाईलैंड में पहले भी ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं। साल 2022 में, देश के पूर्वी हिस्से में एक म्यूजिक पब में आग लगने से 14 लोगों की मौत हो गई थी।

आग लगने से 66 लोगों की मौत

उससे एक दशक से भी पहले, 1 जनवरी 2009 को थाईलैंड की राजधानी के सांतिका नाइटक्लब में नए साल के जश्न के दौरान आग लगने से 66 लोगों की मौत हो गई थी। जिसमें 200 से अधिक लोग घायल हो गए थे। वह आग कथित तौर पर घर के अंदर आतिशबाजी के प्रदर्शन के कारण लगी थी।

भारतीय नौसेना का ₹1 लाख करोड़ मेगा प्लान, 16 स्वदेशी युद्धपोतों से बढ़ेगी समुद्री ताकत

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारतीय नौसेना आने वाले सालों में अपनी समुद्री ताकत को नई ऊंचाई देने की तैयारी कर रहा है। रक्षा सूत्रों के मुताबिक नौसेना करीब 1 लाख करोड़ की लागत से प्रोजेक्ट 15C, 17B, 18A के तहत 16 नए स्वदेशी युद्दपोत बनाने की योजना आगे बढ़ रही है। इनमें नई पीढ़ी के गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर, स्टेल्थ फ्रिगेट और विशाल सरफेस कॉम्बैटेंट शामिल होंगे।

क्यों जरूरी है यह मेगा प्रोजेक्ट?

पिछले एक दशक में चीन ने अपनी नौसेना का तेजी से विस्तार किया है. चीन हिंद महासागर में अपनी मौजूदगी भी लगातार बढ़ा रहा है. चीनी युद्धपोत, पनडुब्बियां और सर्विलांस जहाज नियमित रूप से हिंद महासागर क्षेत्र में दिखाई देते हैं. जिबूती में उसका पहला विदेशी नौसैनिक अड्डा पहले से सक्रिय है, जबकि पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह, श्रीलंका के हम्बनटोटा और हिंद महासागर के अन्य बंदरगाहों में चीन का बढ़ता निवेश भारत के लिए रणनीतिक चुनौती माना जाता है.

ऐसे में भारतीय नौसेना के लिए सिर्फ अपनी मौजूदा ताकत बनाए रखना पर्याप्त नहीं है. उसे भविष्य की जरूरतों के हिसाब से अधिक आधुनिक, लंबी दूरी तक ऑपरेट करने वाले और मल्टी लेवल के युद्धपोतों की जरूरत है.

3 मेगा प्रोजेक्ट, तीन बड़ी ताकत

#प्रोजेक्ट-15C

इस परियोजना के तहत 50,000 करोड़ की लागत से 4 नई पीढ़ी के गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर बनाए जाएंगे. इन युद्धपोतों में अत्याधुनिक रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, बेहतर एयर डिफेंस और लंबी दूरी तक सटीक हमला करने की क्षमता होगी. ये मौजूदा कोलकाता और विशाखापत्तनम क्लास डिस्ट्रॉयर से भी ज्यादा आधुनिक होंगे.

#प्रोजेक्ट-17B

इस परियोजना में 40,000 करोड़ को लागत से 6 स्टेल्थ फ्रिगेट बनाए जाएंगे. इनमें से 3 युद्धपोत मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) और 3 गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) बनाएंगे. स्टेल्थ तकनीक के कारण दुश्मन के रडार पर इनकी पहचान करना कठिन होगा. इनका इस्तेमाल एस्कॉर्ट मिशन, एंटी-सबमरीन ऑपरेशन, एयर डिफेंस और समुद्री निगरानी जैसे कई अभियानों में किया जाएगा.

#प्रोजेक्ट-18A

ये भारत का सबसे महत्वाकांक्षी सरफेस वॉरशिप प्रोजेक्ट माना जा रहा है. इसके तहत 6 विशाल युद्धपोत बनाए जाएंगे, जिनका वजन 14 से 15 हजार टन होगा. ये भारत में अब तक बने सबसे बड़े सतही युद्धपोतों में शामिल होंगे. इनमें लंबी दूरी तक ऑपरेशन, मजबूत एयर एवं मिसाइल डिफेंस, आधुनिक कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम और भविष्य के हथियारों को शामिल करने की क्षमता होगी.

चीन के खिलाफ भारत की समुद्री रणनीति

भारत और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा अब सिर्फ हिमालयी सीमा तक सीमित नहीं है. आने वाले सालों में हिंद महासागर और इंडो-पैसिफिक इस प्रतिस्पर्धा का सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र बनेंगे. भारत के लगभग 95 प्रतिशत व्यापार (मात्रा के आधार पर) और बड़ी मात्रा में ऊर्जा आयात समुद्री मार्गों से होते हैं. यदि हिंद महासागर में किसी प्रतिद्वंद्वी देश का दबदबा बढ़ता है तो उसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है.

चीन की “स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स” रणनीति के तहत हिंद महासागर क्षेत्र में बंदरगाहों और बुनियादी ढांचे का विस्तार भारत के लिए चिंता का विषय रहा है. ऐसे में नए युद्धपोत भारतीय नौसेना को समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा, लंबी दूरी की तैनाती, कैरियर बैटल ग्रुप की रक्षा और किसी भी संकट की स्थिति में तेजी से जवाब देने की क्षमता देंगे.

आत्मनिर्भर भारत को भी मिलेगा बड़ा फायदा

इन परियोजनाओं का एक बड़ा उद्देश्य भारत के रक्षा विनिर्माण को मजबूत करना भी है. मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) जैसे सरकारी शिपयार्ड इन युद्धपोतों के निर्माण में अहम भूमिका निभाएंगे.

निर्धारित टाइमलाइन

• प्रोजेक्ट-15C: अगले एक साल में RFP जारी होने की संभावना, निर्माण लगभग तीन साल में शुरू होगा. • प्रोजेक्ट-17B: अगले 18 महीनों में RFP, निर्माण करीब चार साल में शुरू होगा. • प्रोजेक्ट-18A: अगले तीन सालों में RFP होगा, योजना अभी शुरुआती फेस में है.

हालांकि, ये तीनों योजना अभी शुरुआती चरण में है अंतिम निर्णय रक्षा मंत्रालय और केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद ही होगा.

क्या होगा सबसे बड़ा फायदा?

यदि ये तीनों परियोजनाएं समय पर पूरी होती हैं तो भारतीय नौसेना को 16 अत्याधुनिक युद्धपोत मिलेंगे. इससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री ताकत और डिटरेन्स मजबूत होगी, चीन की बढ़ती नौसैनिक मौजूदगी का संतुलित जवाब देने की क्षमता बढ़ेगी और भारत इंडो-पैसिफिक में एक प्रमुख समुद्री शक्ति के रूप में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकेगा.

मद्रास हाईकोर्ट के गोवध प्रतिबंध फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

मद्रास / सत्ता संदेश

सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें तमिलनाडु में कहीं भी बकरीद या किसी अन्य दिन गाय या बछड़े के वध पर रोक लगाने का निर्देश दिया गया था। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने तमिलनाडु सरकार द्वारा दायर स्पेशल लीव पिटिशन (SLP) पर नोटिस जारी करते हुए यह अंतरिम आदेश पारित किया। राज्य सरकार ने मद्रास हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें पूरे राज्य में गायों और बछड़ों के वध पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया गया था।

क्या कहा सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने?

बेंच ने कहा कि हाई कोर्ट के आदेश का अंतिम पैराग्राफ, जिसमें राज्यभर में प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया गया था, प्रथम दृष्टया सुधार की मांग करता है। राज्य सरकार की ओर से सीनियर एडवोकेट डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने पक्ष रखा।

सरकार ने हाई कोर्ट के फैसले पर क्या आपत्ति जताई?

राज्य सरकार ने दलील दी कि हाई कोर्ट का आदेश तमिलनाडु पशु संरक्षण अधिनियम, 1958 के विपरीत है। इस कानून के तहत सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी प्रमाण पत्र के आधार पर 10 वर्ष से अधिक उम्र की उन गायों के वध की अनुमति दी जाती है, जो काम करने और प्रजनन के लिए अनुपयुक्त हो चुकी हों। सरकार ने यह भी कहा कि पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960, पशु क्रूरता निवारण (वध गृह) नियम, 2001, तमिलनाडु शहरी स्थानीय निकाय अधिनियम, 1998 तथा तमिलनाडु शहरी स्थानीय निकाय नियम, 2023 जैसे अन्य कानून वध की प्रक्रिया और शर्तों को नियंत्रित करते हैं, लेकिन इनमें कहीं भी पूर्ण प्रतिबंध का प्रावधान नहीं है। राज्य का कहना है कि पूर्ण प्रतिबंध लगाकर हाई कोर्ट ने वैधानिक कानून की जगह न्यायिक कानून बना दिया।विज्ञापन

हाईकोर्ट ने यह आदेश कब और किस याचिका पर दिया था?

मद्रास हाईकोर्ट की बेंच, जिसमें जस्टिस जीआर स्वामीनाथन और जस्टिस वी लक्ष्मीनारायण शामिल थे, ने 27 मई को बकरीद से ठीक पहले यह आदेश पारित किया था। यह फैसला हिंदू मक्कल काची के महासचिव के. सूर्या प्रशांत द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनाया गया था। याचिकाकर्ता ने केवल यह मांग की थी कि वध निर्धारित स्थानों पर ही कराया जाए, लेकिन हाई कोर्ट ने इससे आगे बढते हुए गायों और बछड़ों के वध पर कहीं भी और किसी भी दिन पूर्ण प्रतिबंध लगाने का व्यापक आदेश दे दिया।

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में किस आधार का हवाला दिया था?

आदेश पारित करते समय हाई कोर्ट ने एक सरकारी आदेश का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि दूध उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए गो वध पर प्रतिबंध आवश्यक है। हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के उन पुराने फैसलों का भी उल्लेख किया, जिनमें कहा गया था कि बकरीद के अवसर पर गो वध इस्लाम की अनिवार्य धार्मिक प्रथा नहीं है।

राज्य सरकार ने कानूनी दलील में क्या कहा?

राज्य सरकार ने कहा कि जब मौजूदा कानून निर्धारित स्थानों पर गायों की एक विशेष श्रेणी के वध की अनुमति देता है, तब उसके विपरीत कोई न्यायिक निर्देश नहीं दिया जा सकता। सरकार ने यह भी आपत्ति जताई कि हाई कोर्ट ने सरकारी आदेश संख्या 1715 पर भरोसा किया, जबकि उसकी वैधता या लागू होने का सवाल अदालत के सामने कभी उठा ही नहीं था। सरकार का कहना है कि कोई भी कार्यकारी आदेश राज्य में लागू कानूनों से ऊपर नहीं हो सकता।

क्या हाई कोर्ट ने याचिका के दायरे से बाहर जाकर फैसला दिया?

स्पेशल लीव पिटिशन में राज्य सरकार ने कहा कि हाई कोर्ट के समक्ष दायर रिट याचिका केवल कोयंबटूर में बकरीद के दौरान सार्वजनिक स्थानों पर गायों के वध को रोकने तक सीमित थी। इसके बावजूद डिवीजन बेंच ने मामले का दायरा बढाते हुए पूरे राज्य में गायों के वध पर हर परिस्थिति में प्रतिबंध लगा दिया, यहां तक कि अधिकृत बूचड़खानों में भी, जबकि याचिकाकर्ता ने ऐसी कोई राहत नहीं मांगी थी। सरकार का कहना है कि अदालत ने ऐसी राहत प्रदान कर दी, जिसके लिए न तो कोई प्रार्थना की गई थी और न ही उस पर बहस हुई थी।

फैसले को विरोधाभासी क्यों बताया गया? 

राज्य सरकार ने कहा कि हाई कोर्ट ने अपने फैसले के एक हिस्से में यह माना कि जानवरों का वध केवल अधिकृत बूचड़खानों में ही किया जा सकता है, लेकिन दूसरी ओर उसने यह भी निर्देश दिया कि बकरीद या किसी भी अन्य दिन कोई गाय या बछड़ा नहीं काटा जाना चाहिए। सरकार के अनुसार, ये दोनों बातें एक दूसरे के विपरीत हैं और फैसला स्वयं ही विरोधाभासी हो जाता है।

पुलिस की तैयारी को लेकर सरकार ने क्या कहा? 

याचिका में सरकार ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि हाई कोर्ट ने यह मान लिया कि सार्वजनिक स्थानों पर गायों का वध किया जा रहा था या किया जाएगा, जबकि पुलिस ने अपने जवाबी हलफनामे में स्पष्ट कहा था कि पहले से ही सभी एहतियाती कदम उठा लिए गए हैं। सरकार के अनुसार, यह सुनिश्चित किया गया था कि सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी तरह का वध न हो और धार्मिक बलि केवल बंद तथा सार्वजनिक नजर से दूर स्थानों तक ही सीमित रहे। सरकार का कहना है कि हाई कोर्ट का निष्कर्ष राज्य द्वारा पेश किए गए तथ्यों के विपरीत है।

पिज्ज़ा से निकली जिंदा सुंडी | फूड कैफे और ग्रॉसरी स्टोर पर स्वास्थ्य विभाग का बड़ा एक्शन

माछीवाड़ा / सत्ता संदेश

रिपोर्ट : परमिंदर वर्मा

माछीवाड़ा साहिब में एक फूड कैफे से खरीदे गए पिज्ज़ा में सुंडी निकलने का मामला सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए फूड कैफे और उससे जुड़े एक ग्रॉसरी स्टोर पर छापेमारी की, जहां कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।

जानकारी के अनुसार, गांव हेडों बेट निवासी विशाल ने स्थानीय हंगरी प्वाइंट से खाने के लिए पीज़ा ऑर्डर किया था। जब पीज़ा उनकी टेबल पर पहुंचा तो उन्होंने उसमें एक सुंडी रेंगती हुई देखी। विशाल ने तुरंत इसकी शिकायत कैफे के मैनेजर से की। मैनेजर ने पीज़ा बदलने की पेशकश की, लेकिन विशाल ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया और पूरे मामले की सूचना स्वास्थ्य विभाग को दे दी।

सूचना मिलते ही एसएमओ डॉ. लखविंदर सिंह के निर्देश पर डॉ. दविंदर वर्मा के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची। जांच के दौरान फूड कैफे में साफ-सफाई और खाद्य सुरक्षा से जुड़ी कई कमियां मिलीं। डॉ. दविंदर वर्मा ने बताया कि कैफे के मैनेजर ने भी पीज़ा में सुंडी मिलने की बात स्वीकार की।

इसके बाद नगर कौंसिल के इंस्पेक्टर भूपिंदर सिंह ने फूड कैफे का चालान कर नियमानुसार कार्रवाई की। निरीक्षण के दौरान कैफे में घरेलू गैस सिलेंडर भी मिला। हालांकि मैनेजर ने दावा किया कि वह सिलेंडर किसी कर्मचारी का है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि यदि व्यापक जांच की जाए तो कई होटल, फूड कैफे और रेहड़ी संचालकों द्वारा व्यावसायिक सिलेंडरों की जगह घरेलू गैस सिलेंडरों का इस्तेमाल किए जाने का खुलासा हो सकता है।

स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कैफे के ऊपर स्थित मोर ग्रॉसरी स्टोर की भी जांच की, जहां बड़ी मात्रा में दो महीने से अधिक समय पहले एक्सपायर हो चुके खाद्य उत्पाद बिक्री के लिए रखे मिले। विभाग ने एक्सपायर्ड सामान जब्त कर नगर कौंसिल की कूड़ा ट्रॉली में नष्ट करवाया और स्टोर का भी चालान किया। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की कि बाहर का भोजन खाते समय सतर्क रहें और किसी भी खाद्य पदार्थ को खरीदने से पहले उसकी एक्सपायरी तिथि अवश्य जांचें।

जसपालों में अवैध नशा मुक्ति केंद्र पर पुलिस की छापेमारी, 4 लोगों के खिलाफ केस दर्ज

खन्ना / सत्ता संदेश

खन्ना जिले के जसपालों में चल रहे अवैध नशा मुक्ति केंद्र पर कार्रवाई करते हुए छापेमारी की हैष। बता दें कि इस दौरान खन्ना एसएसपी डॉ दर्पण अहलूवालिया के निर्देश पर थाना सदर खन्ना आर पुलिस चौकी की टीम ने ये कार्रवाई की।

इस दौरान केंद्र में मौजूद 16 लोगों को मुक्त कराया गया, जबकि केंद्र संचालित करने के आरोप में चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने अवैध केंद्र को तत्काल प्रभाव से बंद भी करवा दिया। यह कार्रवाई थाना सदर खन्ना के एसएचओ पवित्र सिंह ग्रेवाल के नेतृत्व में की गई।

इस दौरान स्पेशल ब्रांच के प्रभारी जरनैल सिंह, एसएसपी खन्ना के रीडर राव वीरेंद्र सिंह, पुलिस चौकी कोट के प्रभारी करमजीत सिंह, एएसआई कुलविंदर सिंह सहित बड़ी संख्या में पुलिस कर्मी मौजूद रहे। पुलिस जांच में सामने आया कि गांव जसपालों में एक निजी मकान में बिना किसी वैध अनुमति के नशा मुक्ति केंद्र चलाया जा रहा था। आरोप है कि यहां भर्ती प्रत्येक व्यक्ति से हर महीने 5 से 6 हजार रुपये तक की फीस वसूली जाती थी।

एसएचओ पवित्र सिंह ग्रेवाल ने बताया कि इस मामले में गुरमीत सिंह पुत्र हरदेव सिंह निवासी जसपालों, रजिंदर कौर पत्नी हरदेव सिंह निवासी जसपालों, वरिंदर सिंह पुत्र सुरजीत सिंह निवासी शाहपुर और हरप्रीत सिंह पुत्र जगतार सिंह निवासी चौंदा के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। छापामारी के बाद मुक्त कराए गए 16 लोगों की स्वास्थ्य जांच के लिए एसएमओ पायल डॉक्‍टर हरविंदर सिंह की मेडिकल टीम को बुलाया गया।

मेडिकल टीम ने सभी को मरीज मानते हुए उनकी सहमति के आधार पर सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों में भेजने की सिफारिश की है। पुलिस का कहना है कि जिले में बिना अनुमति संचालित नशा मुक्ति केंद्रों और अन्य अवैध गतिविधियों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भविष्य में भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। खन्‍ना से परमिंदर वर्मा की रिपोर्ट

राजपुरा के नीलम अस्पताल में युवती की मौत से मचा बवाल, पिता ने इंसाफो के लिए खोला मोर्चा

पटियाला / सत्ता संदेश

पटियाला जिले के राजपुरा में स्थित नीलम अस्पताल एकबार फिर विवादों के घेरे में आ गया है। बता दें कि 19 साल की युवती की इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजनों ने डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। वहीं, दिव्यांग पिता पिछले कई घंटों से अपनी बेटी को न्याय दिलाने की मांग को लेकर अस्पताल के बाहर धरने पर बैठे हैं।

मृतका खुशप्रीत जिला पटियाला के सनौर हलके के गांव भुनरहेड़ी की रहने वाली थी। उसके पिता करमजीत सिंह के अनुसार, वह 8 जुलाई को अपनी बेटी को पित्त की पथरी के ऑपरेशन के लिए नीलम अस्पताल लेकर आए थे। 9 जुलाई को उसका ऑपरेशन किया गया, लेकिन ऑपरेशन के दो दिन बाद 11 जुलाई को उसकी मौत हो गई।

परिजनों का आरोप है कि डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन की कथित लापरवाही के कारण खुशप्रीत की जान गई। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

घटना के बाद गुस्साए परिजनों और ग्रामीणों ने अस्पताल के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया और अस्पताल परिसर में भी हंगामा किया। उनका कहना था कि बार-बार अस्पताल प्रबंधन से वरिष्ठ अधिकारियों को बुलाने की मांग की गई, लेकिन कई घंटे बीत जाने के बावजूद कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। मीडिया द्वारा भी लगातार अस्पताल प्रबंधन से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन समाचार लिखे जाने तक अस्पताल का कोई वरिष्ठ अधिकारी या प्रबंधक आधिकारिक बयान देने के लिए सामने नहीं आया।

मौके पर भारतीय किसान यूनियन शादीपुर के प्रदेश नेता मेजर सिंह मर्दांपुर भी पहुंचे। उन्होंने कहा कि परिवार के अनुसार अस्पताल की लापरवाही के कारण 19 वर्षीय खुशप्रीत की मौत हुई है। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की। फिलहाल अस्पताल प्रबंधन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, पुलिस और प्रशासन से परिजनों की शिकायत के आधार पर आगे की कार्रवाई की मांग की जा रही है। राजपुरा से दीपक कुमार की रिपोर्ट