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PGIMER Chandigarh ने पूरे किए 63 साल, स्थापना दिवस पर AI आधारित हेल्थकेयर के भविष्य का विजन पेश

PGIMER Chandigarh के 63वें स्थापना दिवस पर BHU के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि AI डॉक्टरों की जगह नहीं लेगा, बल्कि उनकी क्षमताओं को बढ़ाकर स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा बदलाव लाएगा। PGI में अब 3000 बेड की क्षमता और मरीजों की वेटिंग लिस्ट में लगातार कमी का दावा किया गया।

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

स्वास्थ्य सेवा, चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में देश के प्रमुख संस्थानों में शामिल पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ ने उत्कृष्टता के 63 वर्ष पूरे कर लिए हैं। संस्थान के 63वें स्थापना दिवस समारोह में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई आधारित स्वास्थ्य सेवाओं के भविष्य पर विशेष जोर दिया गया। समारोह में मुख्य अतिथि बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि आने वाले समय में एआई डॉक्टरों की जगह नहीं लेगा, बल्कि उनकी क्षमताओं को कई गुना बढ़ाकर स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा।

पीजीआईएमईआर के NINE ऑडिटोरियम में आयोजित स्थापना दिवस समारोह में डॉ. अलका राव, निदेशक IMTECH चंडीगढ़, पीजीआईएमईआर के पूर्व निदेशक प्रो. योगेश चावला, डीन अकादमिक्स प्रो. संजय जैन, डीन रिसर्च प्रो. संजीव हांडा, चिकित्सा अधीक्षक-सह-प्रमुख अस्पताल प्रशासन विभाग प्रो. अशोक कुमार, वित्तीय सलाहकार रविंदर सिंह सहित संस्थान के पूर्व एवं वर्तमान डीन, विभागाध्यक्ष, वरिष्ठ फैकल्टी सदस्य, रेजिडेंट डॉक्टर, नर्सिंग अधिकारी और अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।

प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने अपने मुख्य संबोधन में पीजीआईएमईआर को एक सच्ची राष्ट्रीय धरोहर बताते हुए कहा कि संस्थान का योगदान केवल चंडीगढ़ या उत्तर भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देशभर में स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

उन्होंने कहा कि आज स्वास्थ्य सेवाओं में एआई को डॉक्टरों के विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि उनकी विशेषज्ञता और निर्णय क्षमता को मजबूत करने वाले एक शक्तिशाली उपकरण के रूप में देखना चाहिए। उनके अनुसार, एआई का सबसे प्रभावी उपयोग उन परिस्थितियों में हो रहा है जहां यह डॉक्टरों को हटाने के बजाय उन्हें बेहतर निर्णय लेने, अधिक जानकारी का विश्लेषण करने और मरीजों तक बेहतर सेवाएं पहुंचाने में मदद कर रहा है।

प्रो. चतुर्वेदी ने कहा कि एआई अब केवल तकनीक का आकर्षण या फैशनेबल विषय नहीं रह गया है। यह स्वास्थ्य सेवा, चिकित्सा अनुसंधान और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में तेजी से अपनी जगह बना रहा है। ऐसे में स्वास्थ्य संस्थानों को इससे दूरी बनाने के बजाय जिम्मेदारी और समझदारी के साथ इसे अपनाना होगा।

उन्होंने बताया कि एआई क्लिनिकल रिकॉर्ड, पैथोलॉजी रिपोर्ट और वैज्ञानिक साहित्य सहित बड़ी मात्रा में चिकित्सा संबंधी जानकारी का विश्लेषण करने में डॉक्टरों की मदद कर सकता है। इससे डॉक्टरों को आवश्यक जानकारी तेजी से उपलब्ध हो सकती है और उनकी कार्यक्षमता में वृद्धि हो सकती है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई विशेषज्ञता का स्थान नहीं लेगा, बल्कि डॉक्टरों के पास उपलब्ध ज्ञान और सूचना की क्षमता को बढ़ाएगा।

चिकित्सा अनुसंधान में एआई की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि इस तकनीक की मदद से शोधकर्ता अब ऐसे प्रश्नों की जांच कर सकते हैं, जिन पर पहले काम करना बहुत महंगा या अत्यधिक समय लेने वाला होता था। उन्होंने कहा कि एआई के कारण स्वास्थ्य और चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में नई संभावनाएं खुल रही हैं।

प्रो. चतुर्वेदी ने भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप हेल्थकेयर एआई विकसित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि केवल पश्चिमी देशों के डेटा पर प्रशिक्षित एआई सिस्टम भारतीय मरीजों की रोग-प्रवृत्तियों, आबादी और स्वास्थ्य संबंधी वास्तविकताओं को पूरी तरह नहीं समझ सकते। इसलिए भारत को केवल एआई तकनीक का उपभोक्ता बने रहने के बजाय भारतीय जरूरतों और परिस्थितियों के अनुरूप अपने समाधान विकसित करने होंगे।

उन्होंने दूरस्थ स्वास्थ्य सेवाओं, रेडियोलॉजी, अस्पताल प्रबंधन और साक्ष्य आधारित निर्णय लेने में एआई की बड़ी संभावनाओं का उल्लेख किया। साथ ही कहा कि सर्जरी जैसे जटिल शारीरिक कार्यों के क्षेत्र में एआई को अभी और विकास की जरूरत है।

चिकित्सा शिक्षा के भविष्य पर बोलते हुए प्रो. चतुर्वेदी ने कहा कि आने वाले समय में केवल तथ्यों को याद करना पर्याप्त नहीं होगा। मेडिकल शिक्षा को क्लिनिकल निर्णय क्षमता, वैज्ञानिक साक्ष्यों के मूल्यांकन, आलोचनात्मक सोच और मरीजों के साथ प्रभावी संवाद पर अधिक ध्यान देना होगा।

अपने संबोधन के दौरान उन्होंने एआई के भविष्य को लेकर कहा कि इसकी पहली पीढ़ी ने इंसानों को जानकारी खोजने में मदद की, अगली पीढ़ी निर्णय लेने में सहायता कर रही है और भविष्य की पीढ़ी इंसानों को कार्रवाई करने में मदद करेगी।

इससे पहले पीजीआईएमईआर के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने संस्थान की बढ़ती क्षमता, मरीजों के बढ़ते विश्वास, किफायती स्वास्थ्य सेवाओं और लगातार कम होती वेटिंग लिस्ट पर प्रकाश डाला।

उन्होंने बताया कि हाल ही में प्रधानमंत्री द्वारा दो प्रमुख केंद्रों के उद्घाटन के बाद संस्थान की क्षमता में बड़ा विस्तार हुआ है। एडवांस्ड मदर एंड चाइल्ड सेंटर और एडवांस्ड न्यूरोसाइंस सेंटर के शुरू होने से पीजीआईएमईआर में 800 नए बेड जुड़े हैं। पहले संस्थान में करीब 2200 बेड थे, जो अब बढ़कर 3000 हो गए हैं।

प्रो. विवेक लाल ने कहा कि पीजीआईएमईआर का उद्देश्य केवल इलाज की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं को आम मरीज की पहुंच में लाना है। उन्होंने आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से मरीजों को मिलने वाले लाभ और अमृत फार्मेसी आउटलेट्स के जरिए उपलब्ध किफायती जेनेरिक दवाओं का भी उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि गंभीर और लंबे समय तक चलने वाली बीमारियों के इलाज में मरीजों को करोड़ों रुपये की बचत हो रही है। संस्थान में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन इसके बावजूद वेटिंग लिस्ट कम हो रही है, जो सेवा वितरण प्रणाली में सुधार और संस्थान की बढ़ती क्षमता का संकेत है।

पीजीआईएमईआर के निदेशक ने संस्थान की प्रगति का श्रेय डॉक्टरों, नर्सिंग अधिकारियों, तकनीकी कर्मचारियों और प्रशासनिक स्टाफ सहित पूरे पीजीआई परिवार को दिया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में संस्थान बुनियादी ढांचे, डायग्नोस्टिक सेवाओं, मानव संसाधन और अन्य उभरते स्वास्थ्य संस्थानों के साथ सहयोग को और मजबूत करेगा।

उन्होंने विशेष रूप से बनारस हिंदू विश्वविद्यालय सहित अन्य संस्थानों के साथ सहयोग और मार्गदर्शन की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि पीजीआईएमईआर देश में उभरते स्वास्थ्य और चिकित्सा संस्थानों की मदद करने के लिए हमेशा तैयार है।

स्थापना दिवस समारोह के दौरान संस्थान के 35 कर्मचारियों को उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी, पीजीआईएमईआर निदेशक प्रो. विवेक लाल, डीन अकादमिक्स प्रो. संजय जैन और डीन रिसर्च प्रो. संजीव हांडा ने सम्मानित कर्मचारियों को प्रशंसा प्रमाण-पत्र और स्मृति चिह्न प्रदान किए।

सम्मानित होने वालों में हॉस्पिटल अटेंडेंट, सैनिटेशन स्टाफ, माली, सुरक्षा कर्मचारी, प्रशासनिक अधिकारी, लैब टेक्नीशियन, टेक्निकल असिस्टेंट और नर्सिंग अधिकारियों सहित विभिन्न विभागों के कर्मचारी शामिल रहे।

समारोह के अंत में डीन रिसर्च प्रो. संजीव हांडा ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। इसके साथ ही पीजीआईएमईआर के 63वें स्थापना दिवस समारोह का औपचारिक समापन हुआ।

पीजीआईएमईआर ने अपने 63 वर्षों के सफर में स्वास्थ्य सेवा, चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में एक मजबूत पहचान बनाई है। अब संस्थान का फोकस आधुनिक तकनीक, बढ़ती मरीज क्षमता और एआई जैसे उभरते क्षेत्रों को अपनाते हुए स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी, किफायती और सुलभ बनाने पर है।