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2029 तक नशामुक्त भारत का लक्ष्य, PIB चंडीगढ़ ने NCB के साथ किया ‘वार्तालाप’

भारत सरकार ने 2029 तक नशामुक्त भारत बनाने का लक्ष्य रखा है। PIB चंडीगढ़ ने NCB के सहयोग से ‘वार्तालाप’ आयोजित कर विजन डॉक्यूमेंट 2026-2029 की रणनीति पर चर्चा की।

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने वर्ष 2029 तक देश को ‘नशामुक्त भारत’ बनाने का संकल्प लिया है। इसी दिशा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा जून 2026 में ‘नशामुक्त भारत’ के लिए विजन डॉक्यूमेंट 2026-2029 का शुभारंभ किया गया था। इस विजन डॉक्यूमेंट के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से पत्र सूचना ब्यूरो (PIB), चंडीगढ़ ने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के सहयोग से बुधवार को चंडीगढ़ में ‘वार्तालाप’ कार्यक्रम आयोजित किया।

कार्यक्रम के दौरान विजन डॉक्यूमेंट 2026-2029 के प्रमुख पहलुओं, उद्देश्यों और रणनीतियों पर चर्चा की गई। मीडिया प्रतिनिधियों को नशामुक्त भारत अभियान के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने और समाज तक प्रमाणिक जानकारी पहुंचाने में मीडिया की भूमिका के बारे में भी जानकारी दी गई।

भारत सरकार के अनुसार, वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए स्वस्थ, अनुशासित और नशामुक्त युवा शक्ति महत्वपूर्ण आधार है। नशीले पदार्थों का दुरुपयोग स्वास्थ्य, परिवार, सामाजिक व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं को प्रभावित करता है। ऐसे में ‘नशामुक्त भारत 2029’ को ‘विकसित भारत 2047’ की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

‘डिटेक्ट, डिसरप्ट और डिस्ट्रॉय’ पर जोर

जुलाई 2026 से जुलाई 2029 तक की तीन वर्षीय कार्ययोजना को निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से हासिल करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। विजन डॉक्यूमेंट चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित है—खुफिया सूचना एवं अभियान आधारित प्रवर्तन, प्रीकर्सर एवं सिंथेटिक ड्रग्स नियंत्रण, मांग एवं हानि में कमी तथा क्षमता निर्माण एवं समन्वय।

इन चारों स्तंभों के लिए ‘डिटेक्ट, डिसरप्ट और डिस्ट्रॉय’ (Detect, Disrupt and Destroy) को परिचालन मंत्र बनाया गया है।

डिटेक्ट (Detect): मादक पदार्थों के स्रोत, तस्करी के मार्ग, तस्करों, तकनीक, भुगतान माध्यमों और प्रमुख संचालकों की पहचान करना।

डिसरप्ट (Disrupt): मादक पदार्थों के परिवहन, लॉजिस्टिक्स, प्रीकर्सर की आपूर्ति, डार्कनेट नेटवर्क, हवाला और ड्रग्स से जुड़े वित्तीय नेटवर्क को निशाना बनाना।

डिस्ट्रॉय (Destroy): अवैध ड्रग लैब, अवैध खेती, तस्करी से अर्जित संपत्तियों, गिरोहों के नेतृत्व और वितरण नेटवर्क को समाप्त करने पर जोर देना।

NCB और PIB अधिकारियों ने मीडिया को दी जानकारी

‘वार्तालाप’ का संचालन NCB चंडीगढ़ के जोनल डायरेक्टर अमनजीत सिंह, गृह मंत्रालय के अपर महानिदेशक (मीडिया) राज कुमार तथा PIB चंडीगढ़ की उप निदेशक सपना द्वारा किया गया।

कार्यक्रम में मीडिया प्रतिनिधियों को देशभर में मादक पदार्थों के खिलाफ की गई कार्रवाई की प्रमुख उपलब्धियों के बारे में जानकारी दी गई। इसमें नशीले पदार्थों की जब्ती, गिरफ्तारियां, जांच और जब्त किए गए मादक पदार्थों को नष्ट करने जैसी कार्रवाई शामिल रही।

विजन डॉक्यूमेंट में गुप्त ड्रग प्रयोगशालाओं के विनष्टीकरण, मादक पदार्थों से जुड़े अपराधियों एवं भगोड़ों को वापस लाने, विभिन्न प्रणालियों के एकीकरण और मापनीय राष्ट्रीय परिणाम हासिल करने पर भी जोर दिया गया है।

मांग, आपूर्ति और हानि में कमी पर फोकस

कार्यक्रम के दौरान नशामुक्त भारत के लिए आपूर्ति में कमी, मांग में कमी और हानि में कमी से जुड़े रोडमैप पर भी चर्चा हुई। सरकार के अनुसार मादक पदार्थों के नेटवर्क, वित्तीय संसाधनों और भगोड़ों को लक्षित करने के साथ-साथ समस्या से निपटने के लिए ‘संपूर्ण सरकार’ (Whole-of-Government) दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है।

नीति निर्माण से लेकर अभियोजन तक विभिन्न एजेंसियों के बीच संयुक्त कार्रवाई और समन्वय को मजबूत करना भी विजन डॉक्यूमेंट की प्राथमिकताओं में शामिल है।

यह विजन डॉक्यूमेंट संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों एवं विभागों, मादक पदार्थ कानून प्रवर्तन एजेंसियों और अन्य हितधारकों के साथ विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है। इसमें मादक पदार्थों की समस्या से जुड़े मांग में कमी, आपूर्ति में कमी और हानि में कमी के पहलुओं के लिए साझा रोडमैप तैयार किया गया है।

युवाओं और शैक्षणिक संस्थानों पर विशेष ध्यान

रोडमैप में सिंथेटिक ड्रग्स और डार्कनेट के जरिए होने वाली तस्करी से निपटने, युवाओं में नशीले पदार्थों के दुरुपयोग को रोकने, उपचार एवं पुनर्वास केंद्रों तक पहुंच बढ़ाने और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय मजबूत करने के उपाय शामिल किए गए हैं।

शिक्षा मंत्रालय, युवा एवं खेल क्षेत्र से जुड़े हितधारकों और शैक्षणिक संस्थानों के साथ मिलकर शिक्षण संस्थानों को नशामुक्त बनाने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। इसके अलावा NCC, NSS और My Bharat के माध्यम से ‘नशामुक्त भारत मित्र’ तैयार करने की योजना है, जो समाज में नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने में भूमिका निभाएंगे।

‘वार्तालाप’ कार्यक्रम के माध्यम से जनभागीदारी बढ़ाने और समाज तक सही एवं प्रमाणिक जानकारी पहुंचाने पर भी जोर दिया गया। कार्यक्रम में मीडिया को नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों के बारे में व्यापक जागरूकता पैदा करने और नशामुक्त भारत के लक्ष्य को जन-अभियान में बदलने के लिए महत्वपूर्ण माध्यम बताया गया।

नशामुक्त भारत 2029: सरकार का तीन साल का रोडमैप, ड्रग्स के खिलाफ चार स्तंभों पर रणनीति

नशामुक्त भारत 2029 के लक्ष्य को लेकर सरकार ने मादक पदार्थ नियंत्रण विज़न डॉक्यूमेंट 2026-2029 तैयार किया है। जानिए चार स्तंभों वाली रणनीति और चंडीगढ़ में आयोजित ‘वार्तालाप’ कार्यक्रम की पूरी जानकारी।

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने वर्ष 2029 तक देश को ‘नशामुक्त भारत’ बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसी दिशा में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 26 जून 2026 को ‘मादक पदार्थ नियंत्रण पर विज़न डॉक्यूमेंट 2026-2029’ जारी किया था। यह दस्तावेज नशीले पदार्थों की मांग, आपूर्ति और इससे होने वाले नुकसान को कम करने के लिए अगले तीन वर्षों का साझा रोडमैप प्रस्तुत करता है।

इसी विज़न डॉक्यूमेंट के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से पत्र सूचना ब्यूरो (PIB), चंडीगढ़ ने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के सहयोग से बुधवार को चंडीगढ़ में ‘वार्तालाप’ कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम के दौरान विज़न डॉक्यूमेंट के प्रमुख बिंदुओं, नशामुक्त भारत अभियान की रणनीति और मादक पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई में मीडिया की भूमिका पर चर्चा की गई।

कार्यक्रम में बताया गया कि नशीले पदार्थों की समस्या केवल स्वास्थ्य और परिवार से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव सामाजिक व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ता है। सरकार के अनुसार, स्वस्थ और नशामुक्त युवा शक्ति ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

‘मादक पदार्थ नियंत्रण पर विज़न डॉक्यूमेंट 2026-2029’ चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित है। इनमें प्रवर्तन, खुफिया एवं अभियान आधारित कार्रवाई; प्रीकर्सर एवं सिंथेटिक ड्रग्स नियंत्रण; मांग एवं हानि में कमी; तथा क्षमता निर्माण, समन्वय एवं निगरानी शामिल हैं।

इस रणनीति के तहत ‘डिटेक्ट, डिसरप्ट और डिस्ट्रॉय’ को परिचालन मंत्र के रूप में अपनाया गया है। ‘डिटेक्ट’ के तहत मादक पदार्थों के स्रोत, तस्करी मार्ग, तस्करों, तकनीक और भुगतान माध्यमों की पहचान पर जोर है। ‘डिसरप्ट’ के तहत ड्रग्स की सप्लाई चेन, लॉजिस्टिक्स, प्रीकर्सर की आपूर्ति, डार्कनेट, हवाला और मादक पदार्थों से जुड़े वित्तीय नेटवर्क को निशाना बनाया जाएगा। वहीं ‘डिस्ट्रॉय’ के तहत अवैध ड्रग प्रयोगशालाओं, अवैध खेती, तस्करी से अर्जित संपत्तियों और वितरण नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई पर जोर दिया गया है।

विजन डॉक्यूमेंट में सिंथेटिक ड्रग्स और डार्कनेट के माध्यम से होने वाली तस्करी जैसी उभरती चुनौतियों से निपटने के साथ-साथ युवाओं को नशीले पदार्थों से दूर रखने, उपचार एवं पुनर्वास सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय मजबूत करने की रणनीति शामिल है।

कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि नशीले पदार्थों के खिलाफ लड़ाई में केवल कानून प्रवर्तन एजेंसियों की कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। इसके लिए सरकार के विभिन्न मंत्रालयों, राज्यों, कानून प्रवर्तन एजेंसियों, शैक्षणिक संस्थानों और समाज की संयुक्त भागीदारी पर जोर दिया जा रहा है।

‘वार्तालाप’ का संचालन NCB चंडीगढ़ के जोनल डायरेक्टर अमनजीत सिंह, गृह मंत्रालय के अपर महानिदेशक (मीडिया) राज कुमार तथा PIB चंडीगढ़ की उप निदेशक सपना द्वारा किया गया। इस दौरान मीडिया प्रतिनिधियों को नशामुक्त भारत अभियान के प्रति जागरूकता बढ़ाने और समाज तक प्रमाणिक जानकारी पहुंचाने की रणनीति से अवगत कराया गया।

मीडिया प्रतिनिधियों को मादक पदार्थों के खिलाफ देशभर में की जा रही कार्रवाई के विभिन्न पहलुओं की जानकारी भी दी गई। इसमें नशीले पदार्थों की जब्ती, गिरफ्तारियां, जांच और जब्त मादक पदार्थों के निस्तारण जैसी कार्रवाई शामिल है।

विजन डॉक्यूमेंट में शिक्षा संस्थानों को नशामुक्त बनाने के लिए शिक्षा मंत्रालय, युवा एवं खेल क्षेत्र से जुड़े हितधारकों तथा शैक्षणिक संस्थानों के साथ समन्वय की बात कही गई है। इसके अलावा NCC, NSS और My Bharat जैसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से ‘नशामुक्त भारत मित्र’ तैयार करने और समाज में जागरूकता बढ़ाने की योजना भी बताई गई है।

सरकार की तीन वर्षीय रणनीति में आपूर्ति में कमी, मांग में कमी और हानि में कमी—तीनों स्तरों पर समानांतर कार्रवाई का खाका तैयार किया गया है। साथ ही नेटवर्क-केंद्रित प्रवर्तन, वित्तीय नेटवर्क पर कार्रवाई, भगोड़ों के खिलाफ कार्रवाई, अवैध प्रयोगशालाओं पर शिकंजा और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय को प्राथमिकता दी गई है।

‘वार्तालाप’ के दौरान मीडिया को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में प्रमाणिक और जिम्मेदार जानकारी समाज तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य नशामुक्त भारत के लक्ष्य में जनभागीदारी बढ़ाना और नशीले पदार्थों के खिलाफ जागरूकता अभियान को मजबूत करना रहा।

NISD और पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला के बीच MoU, सोशल वेलफेयर और युवा सशक्तिकरण पर मिलकर करेंगे काम

ड्रग्स के खिलाफ जागरूकता, रिसर्च, ट्रेनिंग और स्पोर्ट्स को मिलेगा बढ़ावा; सुखविंदर सिंह बिंद्रा बोले- युवाओं को नशे से दूर रखना हमारी प्राथमिकता

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अधीन कार्यरत नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल डिफेंस (NISD) और पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला के बीच नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस साझेदारी का उद्देश्य सोशल प्रोटेक्शन को मजबूत करना, सोशल वेलफेयर को प्रशासनिक प्रशिक्षण का हिस्सा बनाना, संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बढ़ावा देना, क्षमता निर्माण और क्षेत्रीय स्तर पर प्रभावी हस्तक्षेप सुनिश्चित करना है।

MoU हस्ताक्षर कार्यक्रम में पंजाबी यूनिवर्सिटी की ओर से डॉ. दमनजीत संधू और डॉ. जगजीत सिंह चट्ठा मौजूद रहे। वहीं मुख्य अतिथि के रूप में सुखविंदर सिंह बिंद्रा, सदस्य (NISD) एवं स्पेशल मेंबर/इनवाइट (NCCDR), सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार उपस्थित रहे। कार्यक्रम में डॉ. एच.सी. श्रीधर चाणक्य रंगा रेड्डी, विवेक कुमार और तान्या सेनगुप्ता सहित अन्य अधिकारी भी शामिल हुए।

इस अवसर पर सुखविंदर सिंह बिंद्रा ने कहा कि यह साझेदारी सोशल वेलफेयर के क्षेत्र में रिसर्च, एविडेंस-बेस्ड पॉलिसी और समावेशी विकास को नई दिशा देगी। साथ ही देशभर में सोशल प्रोटेक्शन सिस्टम को और अधिक मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।

उन्होंने बताया कि इससे पहले भी NISD ने सामाजिक पहल को आगे बढ़ाने के लिए देश भगत यूनिवर्सिटी (DBU) के साथ भी MoU किया था। उनका कहना था कि मंत्रालय का प्रमुख उद्देश्य युवाओं को नशे से दूर रखना और उन्हें सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ना है।

बिंद्रा ने कहा कि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार के नेतृत्व में मंत्रालय युवाओं के कल्याण, उनके विकास और नशे के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने के लिए लगातार कार्य कर रहा है। उन्होंने ड्रग्स के दुरुपयोग को रोकने में युवा सशक्तिकरण, जागरूकता अभियान और खेलों की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण बताया।

उन्होंने जानकारी दी कि आने वाले समय में युवाओं को खेलों की ओर प्रेरित करने के लिए स्पोर्ट्स किट वितरित की जाएंगी और विभिन्न खेल गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि युवाओं की ऊर्जा सकारात्मक दिशा में लगे और वे नशे जैसी बुराइयों से दूर रहें।

बिंद्रा ने कहा कि पंजाब यूथ डेवलपमेंट बोर्ड के पूर्व स्टेट चेयरपर्सन के रूप में भी उन्होंने युवाओं को खेलों से जोड़ने और नशे से दूर रखने के लिए कई पहल की थीं। उस दौरान यूथ क्लबों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में खिलाड़ियों को निःशुल्क स्पोर्ट्स किट वितरित की गईं और खिलाड़ियों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया गया। उन्होंने कहा कि आज भी उनका विभाग खिलाड़ियों और युवाओं की हर संभव सहायता के लिए प्रतिबद्ध है।

कार्यक्रम के अंत में सुखविंदर सिंह बिंद्रा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार का युवाओं के सशक्तिकरण और सामाजिक विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों के लिए आभार व्यक्त किया।

डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी ने ड्रग्स के खिलाफ जागरुकता सेमिनार का किया आयोजन

लुधियाना / सत्ता संदेश

डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी, लुधियाना ने ड्रग्स के खिलाफ़ जागरूकता सेमिनार और शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया

पंजाब स्टेट लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी, SAS नगर से मिली गाइडलाइंस के मुताबिक, डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी, लुधियाना ने NALSA की ड्रग अवेयरनेस एंड वेलनेस नेविगेशन-ए ड्रग-फ्री इंडिया स्कीम के तहत अलग-अलग जागरूकता सेमिनार और शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किए।

जागरूकता सेमिनार के दौरान, ड्रग्स के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आर्थिक बुरे असर, ड्रग्स की रोकथाम, इलाज और रिहैबिलिटेशन के बारे में डिटेल में जानकारी दी गई। इसके अलावा, लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटीज़ एक्ट, 1987 के तहत मिलने वाली फ्री लीगल एड, लोक अदालतों और दूसरी लीगल सर्विसेज़ के बारे में भी जानकारी दी गई और यह भी बताया गया कि योग्य लोग डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी के ज़रिए फ्री लीगल एड का फायदा उठा सकते हैं।

इस मौके पर सेंट्रल जेल, बोरस्टल जेल, महिला जेल और ऑब्जर्वेशन होम में मौजूद कैदियों को ड्रग्स न लेने की शपथ दिलाई गई। सभी लोगों ने ड्रग्स से दूर रहने, अपने परिवार और समाज को ड्रग्स के बुरे असर के बारे में जागरूक करने और ड्रग-फ्री पंजाब और ड्रग-फ्री भारत बनाने में एक्टिव रूप से योगदान देने का वादा किया।

इसके अलावा, GHG सिधवान खुर्द, लुधियाना के स्टूडेंट्स के लिए एक वेबिनार ऑर्गनाइज़ किया गया और स्टूडेंट्स को ड्रग्स से दूर रहने के लिए मोटिवेट किया गया। पैरा-लीगल वॉलंटियर्स ने इस स्कीम के बारे में एक वीडियो भी अलग-अलग जगहों पर चलाया।

आखिर में, डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी, लुधियाना ने सभी नागरिकों से ड्रग्स के खिलाफ चल रहे कैंपेन में एक्टिव रूप से हिस्सा लेने, नई पीढ़ी को ड्रग्स से बचाने और एक हेल्दी, सेफ और ड्रग-फ्री समाज बनाने के लिए मिलकर काम करने की अपील की।

अमित शाह ने NCORD की 10वीं बैठक की अध्यक्षता की, ‘मादक पदार्थ नियंत्रण विज़न डॉक्यूमेंट 2026-2029’ जारी

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली के विज्ञान भवन में नार्को-को ऑर्डिनेशन सेंटर की 10वीं शीर्ष-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। केन्द्रीय गृह मंत्री ने “मादक पदार्थ नियंत्रण पर विज़न डॉक्यूमेंट (2026-2029)” और “एनसीबी वार्षिक रिपोर्ट -2025” का विमोचन और जम्मू और गुवाहाटी में NCB के ज़ोनल कार्यालयों का ई-उद्घाटन भी किया। अमित शाह ने ‘ऑनलाइन ड्रग्स डिस्पोज़ल फोर्टनाइट कैंपेन’ की शुरुआत भी की जिसमे 6,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के 2,09,500 किलोग्राम नशीले पदार्थों को नष्ट करने का लक्ष्य रखा गया है।

गृह मंत्री ने कहा कि ड्रग तस्करी, संगठित अपराध, नार्को टेरर फाइनेंस और सीमापार के आतंकी नेटवर्क के वित्त पोषण के साथ यह समस्या एक Evolving Narco Terrorism Ecosystem भी बन चुकी है। हमारे देश की आंतरिक सुरक्षा, अर्थतंत्र और युवा पीढ़ी के भविष्य की सुरक्षा के लिए हमें इस समस्या पर पूर्ण विजय प्राप्त करनी ही होगी। हम Death Triangle और Death Crescent के बीच में स्थित हैं और ड्रोन-आधारित ड्रॉप्स, समुद्री मार्गों से कंटेनराइज्ड कार्गो, डार्कनेट, क्रिप्टो पेमेंट, ऑर्डर टू डिलीवरी मॉडल, पार्सल का उपयोग आदि तरीकों से ड्रग का कारोबार करने वालों ने हमारी लड़ाई को और कठिन बना दिया है।

अमित शाह ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी ने 2047 में विकसित भारत का एक लक्ष्य रखा है और नशामुक्त भारत का लक्ष्य भी प्रधानमंत्री जी ने हमें दिया है। प्रधानमंत्री मोदी जी द्वारा दिए गए इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए 2026 से 2029 तक का रोडमैप चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित है। पहला स्तंभ –Enforcement, Intelligence और Operations। इसका उद्देश्य है कि पूरे नेटवर्क पर लक्षित इंटेलिजेंस लीड कार्रवाई करें और नेटवर्क को नष्ट कर दें। दूसरा स्तंभ है –Precursors एवं Synthetic Drug Control। हमें उत्पादन स्तर पर ही नशे को रोकने की रणनीति अपनानी पड़ेगी। तीसरा स्तंभ- Demand और Harm Reduction के अभियान को समाज, शिक्षा और पुनर्वसन के माध्यम से हमें आगे बढ़ाना होगा। Capacity Building, Coordination और Monitoringके चौथे स्तंभ की रचना तंत्र को सक्षम, समन्वित, जवाबदेह और आधुनिक बनाने के लिए की गई है। यह रोडमैप Whole of Government Approach और Whole of Society Approach को ध्यान में रखकर बनाया गया है।इस रोडमैप में भारत के हर नागरिक का रोल समाहित किया गया है, लेकिन नागरिकों को प्रेरित करने का काम सभी राज्य सरकारें और भारत सरकार के सभी विभागों के सचिवों को करना पड़ेगा। इस रोडमैप की सफलता और लक्ष्यों की समय पर सिद्धि की जिम्मेदारी भी साझा है और उसकी निगरानी की भी व्यवस्था तय की गई है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई वर्णन हम तीन शब्दों में कर सकते हैं –Detect, Disrupt और Destroy। हमने सीमावर्ती और संवेदनशील जिलों में HUMINT,टेक्निकल इंटेलिजेंस और कम्युनिटी पुलिसिंग के माध्यम से हमें – विदेश से देश में ड्रग पहुंचाने वाले, देश में उसे राज्यों तक पहुंचाने वाले और राज्यों से उपयोगकर्ता तक पहुंचाने वाले – तीनों प्रकार के कार्टेल को नष्ट करने के लिए आगे बढ़ना होगा।

केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेन्द्र कुमार ने हरिद्वार में नशा विरोधी जनजागरूकता अभियान का नेतृत्व किया

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

नशा मुक्त भारत सप्ताह के दौरान 1.31 करोड़ से अधिक नागरिकों ने विभिन्न जन-जागरूकता एवं सामुदायिक जनभागीदारी कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। 17 जून से 26 जून 2026 तक मनाए गए इस अभियान के अंतर्गत नशा मुक्ति मित्र पंजीकरण अभियान, सेमिनार और वेबिनार, बच्चों एवं युवाओं के लिए प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम, नुक्कड़ नाटक, लघु नाटिकाएं, स्लोगन लेखन प्रतियोगिताएं, ई-प्रतिज्ञाएं, जन-जागरूकता रैलियां, योग सत्र, हस्ताक्षर अभियान, निबंध लेखन प्रतियोगिताएं, चित्रकला प्रतियोगिताएं तथा सामुदायिक सहभागिता से जुड़े अनेक अन्य कार्यक्रम आयोजित किये गए।

नशा मुक्त भारत सप्ताह का आयोजन मादक पदार्थों के दुरुपयोग एवं अवैध तस्करी के विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय दिवस के उपलक्ष्य में किया गया। इस सप्ताह का समापन 26 जून 2026 को उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित देव संस्कृति विश्वविद्यालय (डीएसवीवी) में आयोजित राष्ट्रीय जन-जागरूकता कार्यक्रम के साथ हुआ।

इस कार्यक्रम की शोभा केन्‍द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेन्द्र कुमार, देव संस्कृति विश्वविद्यालय (डीएसवीवी) के प्रो वाइस चांसलर डॉ. चिन्मय पंड्या तथा अन्य गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति से बढ़ी।

कार्यक्रम के अंतर्गत डॉ. वीरेन्द्र कुमार के नेतृत्व में नशा मुक्त रैली आयोजित की गई, जिसमें लगभग 4,000 नागरिकों ने भाग लिया। यह भागीदारी नशे के दुरुपयोग के विरुद्ध राष्ट्रीय अभियान के प्रति जनता के व्यापक समर्थन का प्रतीक रही। इस अवसर पर केन्‍द्रीय मंत्री ने उपस्थित लोगों को ‘नशा मुक्ति की शपथ’ तथा ‘गरिमापूर्ण वृद्धावस्था की शपथ’ दिलाई। इसके माध्यम से सरकार ने नशा-मुक्त, समावेशी और संवेदनशील समाज के निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पुनः दोहराया।इस कार्यक्रम में ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से हजारों लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिभागियों में छात्र, युवा, विभिन्न आध्यात्मिक संगठनों के स्वयंसेवक, उत्तराखंड सरकार के प्रतिनिधि तथा अन्य स्थानीय हितधारक शामिल थे। इसके अलावा, देशभर के राज्यों और केन्‍द्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों, विभिन्न मंत्रालयों एवं विभागों, अनुदान सहायता प्राप्त संस्थानों, नशा मुक्ति एवं व्यसन उपचार केन्‍द्रों तथा अन्य संबंधित हितधारकों ने भी कार्यक्रम में भाग लेकर ‘नशा मुक्त भारत’ के निर्माण के प्रति अपनी सामूहिक प्रतिबद्धता दोहराई।

कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग तथा अखिल विश्व गायत्री परिवार के बीच नशा मुक्त भारत अभियान (एनएमबीए) और अटल वयो अभ्युदय योजना (एवीवाईएवाई) के अंतर्गत समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर करना रहा। इन समझौतों का उद्देश्य जन-जागरूकता बढ़ाने, सामुदायिक एकजुटता को मजबूत करने, मादक पदार्थों की मांग में कमी लाने तथा ‘गरिमापूर्ण वृद्धावस्था’ के संदेश के माध्यम से देशभर में वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण को बढ़ावा देना है।

कार्यक्रम के दौरान नशा मुक्त भारत अभियान (एनएमबीए) के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में राज्यों एवं केन्‍द्र शासित प्रदेशों, जिलों, विभिन्न मंत्रालयों एवं विभागों तथा अनुदान सहायता प्राप्त संस्थानों द्वारा किए गए प्रयासों स्‍वीकृत करते हुए उनकी सराहना की गई। साथ ही, ‘नशा मुक्ति मित्रों’ को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता फैलाने और समुदायों को अभियान से जोड़ने में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त, नशा मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत राज्य सरकारों द्वारा आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं तथा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विभिन्न हितधारकों को नशामुक्त समाज के निर्माण में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

नशा मुक्त भारत सप्ताह–2026 तथा मादक पदार्थों के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय दिवस के सफल आयोजन ने ‘संपूर्ण सरकार’ और ‘संपूर्ण समाज’ की सहभागिता पर आधारित दृष्टिकोण से सरकार की नशा-मुक्त समाज के निर्माण के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को एक बार फिर दोहराया। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने सभी नागरिकों, संस्थानों, युवा संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों तथा सामुदायिक हितधारकों से इस राष्ट्रीय जनआंदोलन में सक्रिय रूप से सहभागी बनने और “नशा मुक्त भारत, खुशहाल भारत” के संकल्प को साकार करने में अपना योगदान देने का आह्वान किया।