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हरिओम सेवा मंडल ने श्री अमरनाथ यात्रा के लिए सामग्री रवाना की

लुधियाना / सत्ता संदेश

हरिओम सेवा मंडल (रजि.) की ओर से हर वर्ष की तरह इस बार भी श्री अमरनाथ यात्रा के श्रद्धालुओं के लिए यात्रा मार्ग बालटाल-दुमेल, जम्मू-कश्मीर में 21वां विशाल भंडारा लगाया जा रहा है। इस संबंध में हरिओम सेवा मंडल की ओर से सामग्री से भरे तीन ट्रक वाहन रवाना किए गए

इस अवसर पर चेयरमैन के.के. गाबा और प्रधान कृष्ण लाल बंसल ने बताया कि हरिओम सेवा मंडल (रजि.) को श्री अमरनाथ यात्रा श्राइन बोर्ड द्वारा मान्यता प्राप्त है। उन्होंने बताया कि इस भंडारे में यात्रियों के लिए भोजन, स्नान की व्यवस्था, शाम के समय स्नैक्स, रात्रि के लिए केसर युक्त दूध तथा चाय-कॉफी आदि की 24 घंटे व्यवस्था की जाती है। आज बाबा बर्फानी के लिए तीन वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।

संस्था द्वारा श्री अमरनाथ यात्रियों के लिए लगाए जा रहे लंगरों की सराहना करते हुए हीना सिंगल (E9 फाउंडेशन) ने कहा कि हर वर्ष इतने बड़े स्तर पर आयोजन करना और यात्रियों के लिए 24 घंटे भोजन एवं पेयजल की व्यवस्था करना बहुत बड़ी सेवा है। उन्होंने शिव भक्तों से बड़ी संख्या में इस सेवा कार्य को अपना समर्थन देने की भी अपील की।

इसी प्रकार, डॉ. राहुल (जेपीसी), डॉ. ओ.पी. शर्मा, मनु अरोड़ा और रमन जगदंबा ने कहा कि हर वर्ष तीर्थयात्रियों की सेवा करके हरिओम सेवा मंडल के सदस्य बहुत बड़ा पुण्य अर्जित करते हैं। उन्होंने यह भी प्रार्थना की कि भोले बाबा अपनी कृपा और आशीर्वाद इन पर सदैव बनाए रखें।

इस दौरान वाइस चेयरमैन भूषण सिंगला, वरिष्ठ उपप्रधान बंसी लाल, मीडिया इंचार्ज गौरव महिंद्रू, सचिव पुनीत मित्तल, संयुक्त सचिव दीपक गोयल, शिव सिंगला, मिंटू सिंगला, करण गाबा, नरेश सरीन, डॉ. सुनील बांका, रजत बंसल, सुशांत बंसल, जिमी गाबा, अनिल चावला, हेमंत सिंगला, संकेत गोयल, केवल शर्मा आदि भी उपस्थित रहे।

इस वर्ष की पवित्र श्री अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई 2026 से प्रारंभ होकर 28 अगस्त 2026 तक चलेगी। 57 दिनों तक चलने वाली यह यात्रा बालटाल-सोनमर्ग तथा नुनवान-पहलगाम दोनों मार्गों से संचालित की जाएगी। यात्रा का समापन श्रावण पूर्णिमा और रक्षाबंधन के दिन होगा।

अमित शाह ने NCORD की 10वीं बैठक की अध्यक्षता की, ‘मादक पदार्थ नियंत्रण विज़न डॉक्यूमेंट 2026-2029’ जारी

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली के विज्ञान भवन में नार्को-को ऑर्डिनेशन सेंटर की 10वीं शीर्ष-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। केन्द्रीय गृह मंत्री ने “मादक पदार्थ नियंत्रण पर विज़न डॉक्यूमेंट (2026-2029)” और “एनसीबी वार्षिक रिपोर्ट -2025” का विमोचन और जम्मू और गुवाहाटी में NCB के ज़ोनल कार्यालयों का ई-उद्घाटन भी किया। अमित शाह ने ‘ऑनलाइन ड्रग्स डिस्पोज़ल फोर्टनाइट कैंपेन’ की शुरुआत भी की जिसमे 6,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के 2,09,500 किलोग्राम नशीले पदार्थों को नष्ट करने का लक्ष्य रखा गया है।

गृह मंत्री ने कहा कि ड्रग तस्करी, संगठित अपराध, नार्को टेरर फाइनेंस और सीमापार के आतंकी नेटवर्क के वित्त पोषण के साथ यह समस्या एक Evolving Narco Terrorism Ecosystem भी बन चुकी है। हमारे देश की आंतरिक सुरक्षा, अर्थतंत्र और युवा पीढ़ी के भविष्य की सुरक्षा के लिए हमें इस समस्या पर पूर्ण विजय प्राप्त करनी ही होगी। हम Death Triangle और Death Crescent के बीच में स्थित हैं और ड्रोन-आधारित ड्रॉप्स, समुद्री मार्गों से कंटेनराइज्ड कार्गो, डार्कनेट, क्रिप्टो पेमेंट, ऑर्डर टू डिलीवरी मॉडल, पार्सल का उपयोग आदि तरीकों से ड्रग का कारोबार करने वालों ने हमारी लड़ाई को और कठिन बना दिया है।

अमित शाह ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी ने 2047 में विकसित भारत का एक लक्ष्य रखा है और नशामुक्त भारत का लक्ष्य भी प्रधानमंत्री जी ने हमें दिया है। प्रधानमंत्री मोदी जी द्वारा दिए गए इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए 2026 से 2029 तक का रोडमैप चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित है। पहला स्तंभ –Enforcement, Intelligence और Operations। इसका उद्देश्य है कि पूरे नेटवर्क पर लक्षित इंटेलिजेंस लीड कार्रवाई करें और नेटवर्क को नष्ट कर दें। दूसरा स्तंभ है –Precursors एवं Synthetic Drug Control। हमें उत्पादन स्तर पर ही नशे को रोकने की रणनीति अपनानी पड़ेगी। तीसरा स्तंभ- Demand और Harm Reduction के अभियान को समाज, शिक्षा और पुनर्वसन के माध्यम से हमें आगे बढ़ाना होगा। Capacity Building, Coordination और Monitoringके चौथे स्तंभ की रचना तंत्र को सक्षम, समन्वित, जवाबदेह और आधुनिक बनाने के लिए की गई है। यह रोडमैप Whole of Government Approach और Whole of Society Approach को ध्यान में रखकर बनाया गया है।इस रोडमैप में भारत के हर नागरिक का रोल समाहित किया गया है, लेकिन नागरिकों को प्रेरित करने का काम सभी राज्य सरकारें और भारत सरकार के सभी विभागों के सचिवों को करना पड़ेगा। इस रोडमैप की सफलता और लक्ष्यों की समय पर सिद्धि की जिम्मेदारी भी साझा है और उसकी निगरानी की भी व्यवस्था तय की गई है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई वर्णन हम तीन शब्दों में कर सकते हैं –Detect, Disrupt और Destroy। हमने सीमावर्ती और संवेदनशील जिलों में HUMINT,टेक्निकल इंटेलिजेंस और कम्युनिटी पुलिसिंग के माध्यम से हमें – विदेश से देश में ड्रग पहुंचाने वाले, देश में उसे राज्यों तक पहुंचाने वाले और राज्यों से उपयोगकर्ता तक पहुंचाने वाले – तीनों प्रकार के कार्टेल को नष्ट करने के लिए आगे बढ़ना होगा।

केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेन्द्र कुमार ने हरिद्वार में नशा विरोधी जनजागरूकता अभियान का नेतृत्व किया

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

नशा मुक्त भारत सप्ताह के दौरान 1.31 करोड़ से अधिक नागरिकों ने विभिन्न जन-जागरूकता एवं सामुदायिक जनभागीदारी कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। 17 जून से 26 जून 2026 तक मनाए गए इस अभियान के अंतर्गत नशा मुक्ति मित्र पंजीकरण अभियान, सेमिनार और वेबिनार, बच्चों एवं युवाओं के लिए प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम, नुक्कड़ नाटक, लघु नाटिकाएं, स्लोगन लेखन प्रतियोगिताएं, ई-प्रतिज्ञाएं, जन-जागरूकता रैलियां, योग सत्र, हस्ताक्षर अभियान, निबंध लेखन प्रतियोगिताएं, चित्रकला प्रतियोगिताएं तथा सामुदायिक सहभागिता से जुड़े अनेक अन्य कार्यक्रम आयोजित किये गए।

नशा मुक्त भारत सप्ताह का आयोजन मादक पदार्थों के दुरुपयोग एवं अवैध तस्करी के विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय दिवस के उपलक्ष्य में किया गया। इस सप्ताह का समापन 26 जून 2026 को उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित देव संस्कृति विश्वविद्यालय (डीएसवीवी) में आयोजित राष्ट्रीय जन-जागरूकता कार्यक्रम के साथ हुआ।

इस कार्यक्रम की शोभा केन्‍द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेन्द्र कुमार, देव संस्कृति विश्वविद्यालय (डीएसवीवी) के प्रो वाइस चांसलर डॉ. चिन्मय पंड्या तथा अन्य गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति से बढ़ी।

कार्यक्रम के अंतर्गत डॉ. वीरेन्द्र कुमार के नेतृत्व में नशा मुक्त रैली आयोजित की गई, जिसमें लगभग 4,000 नागरिकों ने भाग लिया। यह भागीदारी नशे के दुरुपयोग के विरुद्ध राष्ट्रीय अभियान के प्रति जनता के व्यापक समर्थन का प्रतीक रही। इस अवसर पर केन्‍द्रीय मंत्री ने उपस्थित लोगों को ‘नशा मुक्ति की शपथ’ तथा ‘गरिमापूर्ण वृद्धावस्था की शपथ’ दिलाई। इसके माध्यम से सरकार ने नशा-मुक्त, समावेशी और संवेदनशील समाज के निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पुनः दोहराया।इस कार्यक्रम में ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से हजारों लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिभागियों में छात्र, युवा, विभिन्न आध्यात्मिक संगठनों के स्वयंसेवक, उत्तराखंड सरकार के प्रतिनिधि तथा अन्य स्थानीय हितधारक शामिल थे। इसके अलावा, देशभर के राज्यों और केन्‍द्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों, विभिन्न मंत्रालयों एवं विभागों, अनुदान सहायता प्राप्त संस्थानों, नशा मुक्ति एवं व्यसन उपचार केन्‍द्रों तथा अन्य संबंधित हितधारकों ने भी कार्यक्रम में भाग लेकर ‘नशा मुक्त भारत’ के निर्माण के प्रति अपनी सामूहिक प्रतिबद्धता दोहराई।

कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग तथा अखिल विश्व गायत्री परिवार के बीच नशा मुक्त भारत अभियान (एनएमबीए) और अटल वयो अभ्युदय योजना (एवीवाईएवाई) के अंतर्गत समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर करना रहा। इन समझौतों का उद्देश्य जन-जागरूकता बढ़ाने, सामुदायिक एकजुटता को मजबूत करने, मादक पदार्थों की मांग में कमी लाने तथा ‘गरिमापूर्ण वृद्धावस्था’ के संदेश के माध्यम से देशभर में वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण को बढ़ावा देना है।

कार्यक्रम के दौरान नशा मुक्त भारत अभियान (एनएमबीए) के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में राज्यों एवं केन्‍द्र शासित प्रदेशों, जिलों, विभिन्न मंत्रालयों एवं विभागों तथा अनुदान सहायता प्राप्त संस्थानों द्वारा किए गए प्रयासों स्‍वीकृत करते हुए उनकी सराहना की गई। साथ ही, ‘नशा मुक्ति मित्रों’ को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता फैलाने और समुदायों को अभियान से जोड़ने में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त, नशा मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत राज्य सरकारों द्वारा आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं तथा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विभिन्न हितधारकों को नशामुक्त समाज के निर्माण में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

नशा मुक्त भारत सप्ताह–2026 तथा मादक पदार्थों के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय दिवस के सफल आयोजन ने ‘संपूर्ण सरकार’ और ‘संपूर्ण समाज’ की सहभागिता पर आधारित दृष्टिकोण से सरकार की नशा-मुक्त समाज के निर्माण के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को एक बार फिर दोहराया। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने सभी नागरिकों, संस्थानों, युवा संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों तथा सामुदायिक हितधारकों से इस राष्ट्रीय जनआंदोलन में सक्रिय रूप से सहभागी बनने और “नशा मुक्त भारत, खुशहाल भारत” के संकल्प को साकार करने में अपना योगदान देने का आह्वान किया।

बिश्केक में SCO विमेन्स फोरम 2026 में भारत ने महिला-नेतृत्व वाले विकास के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री, श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने आज किर्गिज़ गणराज्य के बिश्केक में आयोजित एससीओ विमेन्स फोरम 2026 को वीडियो संदेश के माध्यम से संबोधित किया। उन्होंने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) तथा उसके पारस्परिक सम्मान, समानता और सर्वसम्मति के सिद्धांतों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता की पुनर्पुष्टि की और साझेदारी को सुदृढ़ करने तथा संगठन के साझा विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।

आर्थिक विकास में महिलाओं की भूमिका विषय पर आयोजित पैनल सत्र में भारत का उद्घाटन वक्तव्य और प्रारंभिक टिप्पणी प्रस्तुत करते हुए मंत्री महोदया ने इस बात पर बल दिया कि महिलाएं केवल विकास की लाभार्थी नहीं हैं, बल्कि उसकी सबसे सशक्त प्रेरक शक्तियों में से एक हैं। यही महिला-नेतृत्व वाले विकास के संबंध में भारत की परिकल्पना और वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य का मूल आधार है।

मंत्री महोदया ने उल्लेख किया कि लगभग 10 करोड़ महिलाएं 90 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हुई हैं, जिनमें से 30 लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। उन्होंने मिशन शक्ति और मिशन पोषण 2.0 को महिलाओं की सुरक्षा, देखभाल तथा आर्थिक भागीदारी को आगे बढ़ाने वाले प्रमुख स्तंभों के रूप में रेखांकित किया।

भारत ने पूरे क्षेत्र में महिलाओं के आर्थिक नेतृत्व और कल्याण को आगे बढ़ाने के लिए एससीओ के साझेदार देशों के साथ अपने अनुभव साझा करने तथा सहयोग को और सुदृढ़ करने की अपनी तत्परता भी दोहराई।

आइसलैंड में भारतीय दूतावास और एपीडा ने पहली बार भारतीय आमों का प्रसार कार्यक्रम आयोजित किया

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

आइसलैंड की राजधानी रेक्याविक स्थित भारतीय दूतावास ने कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के सहयोग से 24 जून 2026 को रेक्याविक तथा 25 जून 2026 को उत्तरी आइसलैंड के अक्यूरेरी में भारतीय आमों का प्रसार कार्यक्रम आयोजित किया। इन कार्यक्रमों में भारतीय आमों की समृद्ध विविधता और उनके निर्यात की अपार संभावनाओं को प्रदर्शित किया गया। आइसलैंड में यह पहला भारतीय आम प्रोत्साहन कार्यक्रम था।

भारत के राजदूत श्री आर. रवीन्‍द्र ने भारत की विश्व-प्रसिद्ध आम की विभिन्न किस्मों की विशिष्टताओं पर प्रकाश डाला और आइसलैंड में भारतीय आमों के निर्यात के विस्तार की व्यापक संभावनाओं पर जोर दिया।

आइसलैंड के विदेश मंत्रालय में व्यापार समझौता निदेशक स्वेन के. एइनार्सन ने भारत–ईएफटीए व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौते (टीईपीए) से मिलने वाले अवसरों और उसके माध्यम से आइसलैंड में भारतीय आमों के आयात को बढ़ावा मिलने की संभावनाओं पर अपने विचार साझा किए।

आइसलैंड ट्रेड फेडरेशन के महासचिव ओलाफुर स्टीफेंसन ने कहा कि आइसलैंड के कारोबारी समुदाय में भारत के प्रति रुचि लगातार बढ़ रही है। उन्होंने विशेष रूप से भारतीय कृषि उत्पादों, खासकर आमों के आयात में वृद्धि की संभावनाओं को बेहद उत्साहजनक बताया।

भारतीय दूतावास की सचिव अनिशा तोमर ने भारत में आम उत्पादन पर एक प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश है। साथ ही, उन्होंने गुणवत्ता आश्वासन, बाजार तक पहुंच और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसार कर, आम के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार की पहलों की भी जानकारी दी।

इन कार्यक्रमों में आयातकों, राजनयिक समुदाय के सदस्यों, आइसलैंड के विभिन्न व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के प्रतिनिधियों तथा आइसलैंड के विदेश मंत्रालय के अधिकारियों की उल्लेखनीय भागीदारी रही, जिससे कार्यक्रम को व्यापक सफलता मिली।

कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों को भारतीय आमों की चार प्रमुख किस्‍मों—दशहरी, चौसा, लंगड़ा और केसर—का स्वाद चखाया। इन आमों के बेहतरीन स्वाद, मनमोहक सुगंध और उत्कृष्ट गुणवत्ता की सभी ने भरपूर सराहना की। यह आयोजन व्यावसायिक संबंधों को मजबूत करने, भारतीय कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने तथा भारत और आइसलैंड के बीच बढ़ती आर्थिक साझेदारी को और सुदृढ़ बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ।

वर्तमान में आइसलैंड मुख्य रूप से थाईलैंड, ब्राज़ील, कंबोडिया, घाना और पेरू से आमों का आयात करता है। वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं की सीमित उपलब्धता के कारण इन देशों के आमों ने आइसलैंड के बाजार में अपनी मजबूत उपस्थिति बनाई है। वर्ष 2025 में आइसलैंड ने लगभग 33 लाख अमेरिकी डॉलर (3.3 मिलियन अमेरिकी डॉलर) मूल्य के आमों का आयात किया, जिसमें से लगभग 10 लाख अमेरिकी डॉलर (1 मिलियन अमेरिकी डॉलर) मूल्य के आम केवल थाईलैंड से आयात किए गए थे। भारतीय मिशन द्वारा स्थानीय उपभोक्ताओं के साथ बातचीत के दौरान यह जानकारी सामने आई कि आइसलैंड के लोग आम काफी पसंद करते हैं और विशेष रूप से स्मूदी, डेज़र्ट (मिष्ठान) तथा फ्रूट सलाद में उनका सेवन करना पसंद करते हैं। इससे स्पष्ट होता है कि आइसलैंड के बाजार में भारतीय आमों के लिए पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं।

तेजा कलां गुरुद्वारा की दीवार पर लगाए गए बोर्ड, CM भगवंत मान को लेकर जारी आदेश का हवाला

गुरुद्वारा प्रबंधन ने कहा- श्री अकाल तख्त साहिब के निर्देशों के अनुसार लगाए गए बोर्ड, सरपंच और स्थानीय लोगों ने टिप्पणी से किया इनकार

फतेहगढ़ चूड़ियां / सत्ता संदेश:

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से जुड़े हालिया विवाद के बीच फतेहगढ़ चूड़ियां के निकट स्थित गांव तेजा कलां के ऐतिहासिक गुरुद्वारा बाबा बुड्ढा साहिब की बाहरी दीवार पर कुछ बोर्ड लगाए जाने का मामला सामने आया है। गुरुद्वारा प्रबंधन का कहना है कि ये बोर्ड श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से जारी निर्देशों के अनुरूप लगाए गए हैं।

जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री भगवंत मान के कथित वायरल वीडियो के बाद श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से एक आदेश जारी किया गया था। गुरुद्वारा प्रबंधन का दावा है कि उसी आदेश के संदर्भ में गुरुद्वारा परिसर के मुख्य द्वार की दीवार पर संबंधित बोर्ड लगाए गए हैं।

इस संबंध में गुरुद्वारा बाबा बुड्ढा साहिब के मैनेजर जगदीप सिंह ने बताया कि बोर्ड श्री अकाल तख्त साहिब के निर्देशों के अनुसार लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि गुरुद्वारा प्रबंधन ने जारी आदेश के अनुरूप यह कदम उठाया है।

वहीं, जब इस मामले में गांव के सरपंच मंदीप सिंह से संपर्क किया गया तो उन्होंने इस विषय पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। गांव के अन्य स्थानीय लोगों ने भी इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से कुछ भी कहने से परहेज किया।

फिलहाल इस मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा बनी हुई है। हालांकि, प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

यह समाचार संबंधित पक्षों के बयानों पर आधारित है। मामले में यदि भविष्य में प्रशासन या अन्य संबंधित संस्थाओं की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया आती है, तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

फतेहगढ़ चूड़ियां में जर्जर सड़क से लोग परेशान, एक महीने से अधूरा पड़ा निर्माण कार्य

बारिश के बाद गहरे गड्ढों ने बढ़ाई मुश्किलें, लोगों ने प्रशासन से जल्द सड़क बनाने की मांग की

फतेहगढ़ चूड़ियां / सत्ता संदेश

फतेहगढ़ चूड़ियां में डेरा रोड चुंगी से पुलिस स्टेशन और बद्दोवाल चौक तक सड़क की बदहाल स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है। पिछले एक महीने से अधिक समय से सड़क निर्माण अधूरा होने के कारण क्षेत्र में बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। हाल ही में हुई बारिश के बाद स्थिति और गंभीर हो गई है, जिससे लोगों को रोजाना आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि सड़क की खराब हालत के कारण न केवल यातायात प्रभावित हो रहा है, बल्कि आसपास के व्यापार पर भी असर पड़ा है। कई दुकानदारों का कहना है कि ग्राहकों की आवाजाही कम होने से उनका काम-धंधा प्रभावित हुआ है।

पीड़ित मलूक सिंह, डॉ. अमरबीर सिंह और अन्य स्थानीय लोगों ने बताया कि सड़क को खोदे हुए एक महीने से अधिक समय हो चुका है, लेकिन निर्माण कार्य अब तक पूरा नहीं किया गया। बारिश के कारण गड्ढों में पानी भर गया है और उनकी गहराई बढ़ गई है, जिससे दोपहिया वाहन चालकों, स्कूली बच्चों और पैदल चलने वालों को लगातार दुर्घटना का खतरा बना हुआ है।

स्थानीय लोगों ने बताया कि इसी मार्ग पर पुलिस स्टेशन, डीएसपी कार्यालय, सेवा केंद्र, सांझ केंद्र, तहसील कॉम्प्लेक्स तथा तीन स्कूल स्थित हैं। प्रतिदिन हजारों लोगों को इसी सड़क से गुजरना पड़ता है, लेकिन बदहाल सड़क के कारण उन्हें भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।

निवासियों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि सड़क निर्माण कार्य को प्राथमिकता के आधार पर जल्द पूरा कराया जाए, ताकि लोगों को राहत मिल सके और संभावित हादसों से बचा जा सके।

वहीं, इस संबंध में ठेकेदार के प्रतिनिधि ने बताया कि निर्माण कार्य में देरी का एक कारण सीवरेज बोर्ड से अपेक्षित सहयोग नहीं मिलना है। उन्होंने दावा किया कि संबंधित विभागों के बीच समन्वय होने के बाद सड़क का निर्माण जल्द पूरा कर दिया जाएगा।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।

महाबोधि महाविहार का प्रबंधन बौद्ध समुदाय को सौंपने की मांग, राष्ट्रपति को भेजा गया ज्ञापन

बोधगया मंदिर एक्ट 1949 को रद्द करने की अपील, विटिकशिला महा बुद्ध विहार ट्रस्ट ने उठाई मांग

नई दिल्ली/ सत्ता संदेश

विटिकशिला महा बुद्ध विहार ट्रस्ट ने भारत के राष्ट्रपति को एक ज्ञापन भेजकर बोधगया मंदिर एक्ट, 1949 को निरस्त करने और महाबोधि महाविहार का प्रबंधन पूरी तरह बौद्ध समुदाय को सौंपने की मांग की है।

ट्रस्ट द्वारा भेजे गए ज्ञापन में कहा गया है कि बोधगया विश्वभर के बौद्ध श्रद्धालुओं के लिए सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में से एक है। इसी स्थान पर भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी और यहीं से बौद्ध धर्म का संदेश पूरी दुनिया में प्रसारित हुआ। ऐसे में इस ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले स्थल का प्रबंधन बौद्ध समुदाय के हाथों में होना चाहिए।

ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि वर्ष 1949 में लागू किया गया बोधगया मंदिर एक्ट महाबोधि महाविहार के प्रबंधन के लिए बनाया गया था, लेकिन वर्तमान समय में इस कानून के कुछ प्रावधान बौद्ध समुदाय की धार्मिक परंपराओं, भावनाओं और अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं हैं।

ट्रस्ट का कहना है कि महाबोधि महाविहार केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के करोड़ों बौद्ध अनुयायियों की आस्था का केंद्र है। इसलिए इसके संचालन, संरक्षण और धार्मिक व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी पूरी तरह बौद्ध समुदाय को सौंपी जानी चाहिए, ताकि इसकी परंपराओं और धार्मिक विरासत का संरक्षण उनकी मान्यताओं के अनुसार किया जा सके।

बौद्ध संगठनों ने केंद्र सरकार से मांग की है कि बोधगया मंदिर एक्ट, 1949 की समीक्षा करते हुए आवश्यक संशोधन या इसे निरस्त करने पर विचार किया जाए और महाबोधि महाविहार का प्रशासन एवं प्रबंधन बौद्ध समुदाय को सौंपा जाए।

फिलहाल इस ज्ञापन पर केंद्र सरकार या संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस मांग पर क्या निर्णय लेती है और क्या बोधगया मंदिर एक्ट, 1949 में किसी प्रकार का संशोधन या बदलाव किया जाता है।

यह मुद्दा धार्मिक आस्था, विरासत संरक्षण और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ा होने के कारण आने वाले समय में व्यापक चर्चा का विषय बन सकता है।

हेमकुंड साहिब यात्रा विवाद: निहंग सिंहों का जत्था उत्तराखंड बॉर्डर पहुंचा, गिरफ्तार श्रद्धालुओं की रिहाई की मांग

करणप्रयाग में श्रद्धालुओं के साथ कथित मारपीट और दुर्व्यवहार के विरोध में पंजाब से पहुंचे सैकड़ों निहंग सिंह

पांवटा साहिब/उत्तराखंड बॉर्डर

हेमकुंड साहिब यात्रा के दौरान उत्तराखंड के करणप्रयाग में पंजाब से गए निहंग सिंह श्रद्धालुओं के साथ कथित मारपीट और अभद्र व्यवहार के विरोध में वीरवार शाम पंजाब से सैकड़ों निहंग सिंह पांवटा साहिब होते हुए उत्तराखंड सीमा पर पहुंच गए। स्थिति को देखते हुए उत्तराखंड पुलिस ने सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी।

जानकारी के अनुसार, उत्तराखंड पुलिस को दिन में ही निहंग सिंहों के जत्थे के उत्तराखंड पहुंचने की सूचना मिल गई थी। इसके बाद हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर स्थित कुलहाल बॉर्डर पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।

बताया जा रहा है कि कुछ दिन पहले हेमकुंड साहिब यात्रा के दौरान करणप्रयाग में पार्किंग को लेकर विवाद हो गया था। आरोप है कि इस दौरान कुछ स्थानीय लोगों और निहंग सिंह श्रद्धालुओं के बीच कहासुनी के बाद मारपीट हुई। श्रद्धालुओं का यह भी आरोप है कि घटना के दौरान उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया।

इसी घटना के विरोध में पंजाब से निहंग सिंहों का जत्था उत्तराखंड सीमा तक पहुंचा। प्रदर्शन कर रहे निहंग सिंहों की प्रमुख मांग है कि उत्तराखंड पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए चार निहंग सिंहों को तुरंत रिहा किया जाए। साथ ही, जिन स्थानीय लोगों पर मारपीट के आरोप हैं तथा जिन पुलिस कर्मियों पर दुर्व्यवहार के आरोप लगाए गए हैं, उनके खिलाफ निष्पक्ष जांच कर सख्त कार्रवाई की जाए।

स्थिति को देखते हुए पुलिस और प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं। सीमा क्षेत्र में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं और अधिकारियों द्वारा प्रदर्शनकारियों से बातचीत के जरिए मामले का शांतिपूर्ण समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है।

फिलहाल मामले को लेकर पुलिस और प्रशासन की ओर से आगे की कार्रवाई जारी है। दोनों पक्षों के आरोपों की जांच की जा रही है और प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने तथा अफवाहों से बचने की अपील की है।