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केंद्र सरकार ने 16 फिक्स्ड डोज़ कॉम्बिनेशन दवाओं के निर्माण, बिक्री और वितरण पर लगाई रोक

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

जनस्वास्थ्य की रक्षा और दवाओं के तर्कसंगत उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक कदम उठाते हुए, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, 1940 की धारा 26ए के तहत अधिसूचना जारी कर 16 निश्चित खुराक संयोजनों के निर्माण, बिक्री और मानव उपयोग के लिए वितरण पर रोक लगा दी है।


यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद लिया गया है, जिसमें देश में उपलब्ध फिक्सड डोज़ कॉम्बिनेशन की व्यापक समीक्षा अनिवार्य की गई थी। इन निर्देशों के अनुपालन में, औषधि तकनीकी सलाहकार बोर्ड ने विभिन्न एफडीसी की जांच करने और उन एफडीसी की पहचान करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया जो तर्कहीन हैं, चिकित्सीय औचित्य का अभाव रखते हैं, या मानव स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं।


प्रतिबंधित एफडीएसी विभिन्न चिकित्सीय श्रेणियों से संबंधित हैं, जिनमें कुछ त्वचा संबंधी दवाएं, दर्द निवारक और ऐंठनरोधी दवाएं तथा एंटीबायोटिक-आधारित दवाएं शामिल हैं।


मंत्रालय ने कहा कि यह कार्रवाई सरकार के उन निरंतर प्रयासों के अनुरूप है जिनके तहत जनता को केवल सुरक्षित, प्रभावी और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित दवाएं ही उपलब्ध कराई जाती हैं। पहले भी, विस्तृत वैज्ञानिक समीक्षा के बाद कई तर्कहीन एफडीसी पर प्रतिबंध लगाया गया था, जो रोगी सुरक्षा और साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य सेवा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है।
मानव उपयोग के लिए चिन्हित 16 एफडीसी का बिक्री हेतु निर्माण, बिक्री और वितरण पर प्रतिबंध और आपूर्ति पूरे देश में तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित होगी।


सभी राज्य औषधि नियंत्रकों, नियामक प्राधिकरणों और प्रवर्तन एजेंसियों को अधिसूचनाओं का कड़ाई से कार्यान्वयन और अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। निर्माताओं, आयातकों, वितरकों और अन्य हितधारकों को भी कानून के प्रावधानों का अनुपालन करने के लिए आवश्यक सुधारात्मक उपाय करने की सलाह दी गई है।

श्री अमरनाथ यात्रा के लिए सामग्री की गाड़ियां रवाना

लुधियाना / सत्ता संदेश

हरिओम सेवा मंडल(रजि:) की ओर से हर वर्ष की तरह इस बार भी श्री अमरनाथ यात्रा के श्रद्धालुओं के लिए यात्रा मार्ग बालटाल-दुमेल, जम्मू कश्मीर में 21वाँ विशाल भंडारा लगाया जा रहा है। इस संदर्भ में हरिओम सेवा मंडल की ओर से सामग्री की गाड़ियां भेजी गई और आने वाले दिनों में अन्य गाड़ियां भी भेजी जाएगी।लुधियाना

इस अवसर पर चेयरमैन के के गाबा, प्रधान कृष्ण लाल बांसल ने बताया कि हरिओम सेवा मंडल (रजि:) को श्री अमरनाथ यात्रा श्राइन बोर्ड से मान्यता प्राप्त है। उन्होंने बताया कि इस भंडारे में यात्रियों के लिए भोजन, नहाने के लिए व्यवस्था, शाम के वक्त स्नेक्स, रात के लिए केसर वाला दूध और चाय कॉफी इत्यादि का 24 घंटे प्रबंध किया जाता है। आज बाबा बर्फानी श्री अमरनाथ के लिए कुणाल ग्रोवर (कुणाल डेवलपर) द्वारा गाड़ियों को हरी झंडी दी गई।

संस्था द्वारा श्री अमरनाथ यात्रियों के लिए लगाए जा रहे लंगरों की प्रशंसा करते हुए, हीना सिंगल (E9 फ़ाउंडेशन) ने कहा कि हर साल इतने बड़े स्तर पर आयोजन करना और यात्रियों के लिए 24 घंटे खाने-पीने का प्रबंध करना एक बहुत बड़ी सेवा है। उन्होंने शिव भक्तों से बड़ी गिनती में इस उद्देश्य को अपना समर्थन देने की अपील भी की।

इसी तरह, डॉ. राहुल (जे पी सी),डॉ. ओपी अरोड़ा, मनु अरोड़ा, रमन जगदंबा ने कहा कि हर साल तीर्थ यात्रियों की सेवा करके हरि ओम सेवा मंडल के सदस्य बहुत बड़ा पुण्य कमाते हैं और वह भी भोले बाबा के आगे प्रार्थना करते हैं कि वह इन पर अपना आशीर्वाद बनाए रखें।

इस दौरान वाइस चेयरमैन भूषण सिंगला, सीनियर वाइस प्रधान बंसी लाल, मीडिया इंचार्ज गौरव महेंद्रू, सचिव पुनीत मित्तल, संयुक्त सचिव दीपक गोयल, शिव सिंगला, मिंटू सिंगला, करण गाबा, नरेश सरीन, डॉ सुनील बांका, रजत बांसल, सुशांत बांसल, जिमी गाबा, अनिल चावला, हेमंत सिंगला, संकेत गोयल, केवल शर्मा इत्यादि भी मौजूद रहे।

इस वर्ष की पवित्र श्री अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई 2026 से शुरू होकर 28 अगस्त 2026 तक चलेगी। 57 दिनों तक चलने वाली यह यात्रा बालटाल-सोनमर्ग और नुनवान-पहलगाम दोनों मार्गों से संचालित होगी। यात्रा का समापन श्रावण पूर्णिमा और रक्षाबंधन के दिन होगा।

नाभा में प्रशासन की लापरवाही: खुले सीवर मैनहोल में गिरा मासूम

नाभा / सत्ता संदेश

नाभा: शहर के वार्ड नंबर 18 स्थित मोहल्ला करतारपुरा में प्रशासन की गंभीर लापरवाही उस समय सामने आई जब एक मासूम बच्चा खुले पड़े सीवर मैनहोल में गिर गया। गनीमत रही कि मौके पर मौजूद स्थानीय लोगों की तत्परता और सूझबूझ से बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मोहल्ला करतारपुरा की एक गली में सीवर का मैनहोल लंबे समय से बिना ढक्कन के खुला पड़ा था। इसी दौरान वहां से गुजर रहा एक बच्चा अचानक संतुलन खो बैठा और खुले गड्ढे में जा गिरा। बच्चे की चीखें सुनते ही आसपास के लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और बचाव कार्य शुरू कर दिया।

स्थानीय लोगों ने काफी मशक्कत के बाद बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाला। घटना के बाद बच्चे को प्राथमिक सहायता दी गई। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते मदद नहीं मिलती तो हादसा बेहद गंभीर हो सकता था।

लोगों में प्रशासन के खिलाफ रोष

घटना के बाद इलाके के लोगों में नगर परिषद और प्रशासन के प्रति भारी नाराजगी देखने को मिली। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि संबंधित विभाग को कई बार खुले और क्षतिग्रस्त सीवर मैनहोल की जानकारी दी जा चुकी है, लेकिन समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

निवासियों ने कहा कि विकास और बुनियादी सुविधाओं को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। उनका कहना है कि शहर में कई स्थानों पर खुले सीवर और टूटे ढक्कन आम लोगों, विशेषकर बच्चों के लिए खतरा बने हुए हैं।

प्रशासन से कार्रवाई की मांग

मोहल्ला करतारपुरा के लोगों ने पंजाब सरकार और स्थानीय नगर परिषद से मांग की है कि शहर के सभी खुले और क्षतिग्रस्त सीवर मैनहोलों को तुरंत ढक्कनों से बंद किया जाए और नियमित निरीक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

स्थानीय निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि इस समस्या का जल्द समाधान नहीं किया गया तो वे प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। उनका कहना है कि किसी बड़े हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले से ही सुरक्षा उपाय किए जाने चाहिए।

फिलहाल इस घटना ने नगर परिषद की कार्यप्रणाली और शहर में बुनियादी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

पंजाब और पंजाबियों पर टिप्पणियां अस्वीकार्य, इतिहास और कुर्बानियों का सम्मान जरूरी: अशोक पराशर पप्पी

लुधियाना / सत्ता संदेश

लुधियाना से विधायक अशोक पराशर पप्पी ने पंजाब और पंजाबियों को लेकर हाल ही में की गई कथित टिप्पणियों की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि ऐसे बयान न केवल दुर्भाग्यपूर्ण हैं बल्कि पंजाब के गौरवशाली इतिहास और देश के लिए दिए गए बलिदानों का भी अपमान हैं।

एक बयान जारी करते हुए अशोक पराशर पप्पी ने कहा कि जिन लोगों ने पंजाब और पंजाबियों के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया है, उन्हें पंजाब के इतिहास, यहां के लोगों की कुर्बानियों और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान की कोई समझ नहीं है। उन्होंने कहा कि केवल राजनीतिक लाभ हासिल करने के लिए किसी राज्य और उसके नागरिकों के सम्मान को ठेस पहुंचाना बेहद शर्मनाक है।

उन्होंने कहा कि यदि कोई राजनीतिक दल या नेता पंजाबियों के इतिहास और उनके बलिदानों का सम्मान नहीं करता, तो उसे पंजाब के लोगों से वोट मांगने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। पंजाबियों ने हमेशा देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा के लिए अग्रणी भूमिका निभाई है और यह इतिहास किसी से छिपा नहीं है।

विधायक ने कहा कि पंजाबी हमेशा हर क्षेत्र में अग्रणी रहे हैं और भविष्य में भी अपनी मेहनत, साहस और समर्पण के दम पर आगे बढ़ते रहेंगे। उन्होंने कहा कि पंजाबियों के खिलाफ इस्तेमाल किए गए शब्द माफ करने योग्य नहीं हैं और बाद में केवल माफी मांग लेने से ऐसे बयानों की गंभीरता कम नहीं हो जाती।

अशोक पराशर पप्पी ने कहा कि पंजाब गुरुओं, पीरों और शहीदों की पवित्र धरती है। यहां के लोगों ने अपनी बहादुरी और बलिदानों से इतिहास रचा है। उन्होंने कहा कि पंजाबी न कभी किसी से डरे हैं और न ही किसी के सामने झुके हैं। जिसने भी पंजाब या पंजाबियों को कम आंकने की कोशिश की है, उसे हमेशा करारा जवाब मिला है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक ताकतें झूठे और भ्रामक प्रचार के जरिए अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने का प्रयास कर रही हैं। लेकिन पंजाब के लोग जागरूक हैं और सच तथा झूठ के बीच अंतर करना अच्छी तरह जानते हैं।

पप्पी ने विश्वास जताया कि पंजाब के लोग आने वाले 2027 के विधानसभा चुनावों में लोकतांत्रिक तरीके से ऐसे बयानों और सोच का जवाब देंगे। उन्होंने कहा कि पंजाब का सम्मान, गौरव और आत्मसम्मान हर हाल में बरकरार रखा जाएगा और किसी भी कीमत पर इसके साथ समझौता नहीं किया जाएगा।

बाबा बूटा भगत जी के सालाना जोड़ मेले में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

टांडा/उड़मुड़ / सत्ता संदेश

टांडा जिले के शहर दारापुर उड़मुड़ स्थित बाबा बूटा भगत जी के पावन दरबार में आयोजित तीन दिवसीय सालाना जोड़ मेले में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर माथा टेका और बाबा जी का आशीर्वाद प्राप्त किया। धार्मिक आस्था और श्रद्धा का यह विशाल आयोजन क्षेत्र की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

उत्तर भारत के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल बाबा बूटा भगत जी का दरबार श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है। श्रद्धालु बाबा बूटा भगत जी को ब्रह्मज्ञानी, महान तपस्वी और लोककल्याणकारी संत के रूप में मानते हैं। उनकी पावन स्मृति में प्रत्येक वर्ष जून माह में भव्य जोड़ मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं।

मेले के दौरान धार्मिक दीवान, भजन-कीर्तन, सत्संग, लंगर सेवा और विभिन्न सामाजिक एवं सेवा कार्यों का आयोजन किया गया। पूरे धार्मिक परिसर में भक्ति और श्रद्धा का वातावरण देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने बाबा जी के चरणों में नतमस्तक होकर सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

बाबा बूटा भगत समाध प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष चौधरी कमल सैनी ने बताया कि मेले में देश और विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक प्रबंध किए गए हैं। उन्होंने कहा कि बाबा जी के प्रति लोगों की अटूट आस्था है और हर वर्ष हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचकर अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं।

उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं का विश्वास है कि बाबा बूटा भगत जी के दरबार में सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य स्वीकार होती है और बाबा जी की कृपा से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यही कारण है कि हर साल मेले में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है।

कई दशकों से आयोजित हो रहा यह वार्षिक मेला न केवल धार्मिक महत्व रखता है बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक और सामाजिक विरासत को भी मजबूत करता है। मेले के दौरान पूरा इलाका श्रद्धा, सेवा और भाईचारे के रंग में रंगा नजर आया।

इस अवसर पर मैनेजर प्रभ दयाल सहोता, बलबीर सिंह, बलदेव सिंह, जोगिंदर सिंह, गुरप्रीत सिंह, नवदीप सिंह छात्रु, ब्रह्म सैनी, गुर भगत सिंह, मोहन लाल, राजकुमार, अमन धत्त, जसप्रीत सिंह सैनी हरसी पिंड सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति और श्रद्धालु उपस्थित रहे।

पुलिस ने जब्त वाहनों की सार्वजनिक नीलामी, 19 गाड़ियों की बिक्री से जुटे 1.51 लाख रुपये

अमृतसर / सत्ता संदेश

रिपोर्ट: विक्रमजीत सिंह / कैमरामैन: तरजिंदर सिंह

कमिश्नरेट पुलिस अमृतसर द्वारा विभिन्न मामलों में जब्त किए गए वाहनों की सार्वजनिक नीलामी (पब्लिक ऑक्शन) का आयोजन पुलिस लाइन्स, अमृतसर में किया गया। इस नीलामी के माध्यम से लंबे समय से पुलिस के कब्जे में रखे गए केस प्रॉपर्टी वाहनों का नियमानुसार निपटारा किया गया।

इस संबंध में जानकारी देते हुए डीसीपी इन्वेस्टिगेशन रविंदर पाल सिंह ने बताया कि कमिश्नर पुलिस अमृतसर के निर्देशों के तहत यह सार्वजनिक नीलामी आयोजित की गई थी। नीलामी प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न कराया गया।

उन्होंने बताया कि इस ऑक्शन में अमृतसर और गुरदासपुर जिलों से कुल 14 बोलीदाताओं (बिडर्स) ने हिस्सा लिया। नीलामी के दौरान विभिन्न श्रेणियों के कुल 19 वाहनों की बोली लगाई गई और सफल बोलीदाताओं को वाहन आवंटित किए गए।

डीसीपी रविंदर पाल सिंह के अनुसार, नीलामी के माध्यम से कुल 1,51,000 रुपये की राशि प्राप्त हुई है। यह प्रक्रिया पुलिस रिकॉर्ड में लंबित पड़े जब्त वाहनों के निपटारे और सरकारी संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि ऐसी नीलामियां समय-समय पर आयोजित की जाती हैं ताकि केस प्रॉपर्टी के रूप में लंबे समय से रखे गए वाहनों का कानूनी प्रक्रिया के तहत निपटारा किया जा सके और पुलिस परिसरों में अनावश्यक रूप से खड़े वाहनों की संख्या कम की जा सके।

अधिकारियों ने कहा कि भविष्य में भी निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार इस तरह की सार्वजनिक नीलामी आयोजित की जाती रहेगी।

चेयरमैन राजिंदर सिंह बसंत की अध्यक्षता में हुई खत्री अरोड़ा वेलफेयर बोर्ड मीटिंग

पंजाब / सत्ता संदेश

नए नियुक्त डिस्ट्रिक्ट चेयरमैन, वाइस चेयरमैन और स्टेट मेंबर साहिबाना को सम्मानित किया गया

पंजाब खत्री अरोड़ा वेलफेयर बोर्ड के चेयरमैन श्री राजिंदर सिंह बसंत जी की अध्यक्षता में बोर्ड की पहली मीटिंग बचत भवन मिनी सेक्रेटेरिएट में हुई। इस मीटिंग में चेयरमैन श्री राजिंदर सिंह बसंत जी, बोर्ड के मेंबर जिनमें अमृतसर से श्री प्रणव धवन, पटियाला से श्री राजेंद्र मोहन, जालंधर से श्री रिक्की मनोचा और माछीवाड़ा लुधियाना से श्री जसप्रीत सिंह काका शामिल थे, इन सभी को पंजाब सरकार ने शेरपा देकर सम्मानित किया और बोर्ड ने उन्हें शुभकामनाएं दीं। इस मौके पर MLA कुलवंत सिंह सिद्धू, अशोक पराशर पप्पी, मेयर प्रिंसिपल इंदरजीत कौर, डिस्ट्रिक्ट प्रेसिडेंट/चेयरमैन डिस्ट्रिक्ट प्लानिंग कमेटी जतिंदर सिंह खंगूरा, सीनियर वाइस चेयरमैन शरणपाल सिंह मक्कड़, चेयरमैन राजू कनौजिया, चेयरमैन केशव वर्मा, डायरेक्टर रविंदरपाल सिंह पाली और AAP नेता राज कुमार अग्रवाल खास तौर पर मौजूद थे।

चेयरमैन श्री राजिंदर सिंह बसंत जी ने पंजाब सरकार द्वारा नए नियुक्त किए गए पदाधिकारियों को सम्मानित किया, जिनमें स्टेट मेंबर भूपिंदर सिंह टकर, अरुण कुमार मल्होत्रा, गुरचरण सिंह चान, मोहिंदर सिंह प्रूथी, डॉ. गुरप्रीत सिंह बब्बर – डिस्ट्रिक्ट चेयरमैन बलविंदर कुमार कर्ण, भारत ज्योति, नवनीत सिंह, मनीष बजाज, गगन छाबड़ा, वरिंदर सहदेव, साहिल कपूर, राज कुमार, श्री जैन, संजीव कुमार धवन, हरीश सत्यन, विकास कपूर, तरसेम लाल उप्पल, चिराग थापर – डिस्ट्रिक्ट वाइस चेयरमैन चरणप्रीत सिंह लांबा, मंदीप कुमार सोनी, तरसेम कालरा, दीपक सोनी, कमल कुमार, गुरबख्श सिंह ओबेरॉय, मुनीश सूद, मनोहर लाल अरोड़ा, कुलदीप सिंह, जसपाल सिंह, कुलवंत राय कटारिया, मोहिंदर सिंह शामिल थे।

चेयरमैन श्री राजिंदर सिंह बसंत जी ने अपने भाषण में माननीय मुख्यमंत्री श्री भगवंत सिंह मान जी, श्री मनीष सिसोदिया जी और श्री अरविंद केजरीवाल जी का खास शुक्रिया अदा किया जिन्होंने उन्हें यह अहम ज़िम्मेदारी सौंपी। उन्होंने कहा कि पंजाब में खत्री अरोड़ा कम्युनिटी की संख्या बहुत ज़्यादा है और यह कम्युनिटी राज्य की तरक्की में अहम योगदान दे रही है।

एस. बसंत ने आगे कहा कि वह आने वाले विधानसभा चुनाव में पूरी कम्युनिटी को एक साथ लाकर आम आदमी पार्टी की सरकार बनाने के लिए काम करेंगे। उन्होंने पूरे पंजाब के डिस्ट्रिक्ट चेयरमैन और डिस्ट्रिक्ट वाइस चेयरमैन को भी इस काम में शामिल होने का न्योता दिया।

हेल्दी एजिंग के लिए योग: ज़िंदगी के हर साल को बेहतर कैसे बनाएं

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारत की सदियों से एक खास पहचान रही है। यह पहचान ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के महान विचार में छिपी है – यानी पूरी दुनिया को एक यूनिट और सभी जीवों को एक मानना। भारत के इसी आध्यात्मिक ज्ञान पर आधारित, योग एक पुराना विज्ञान है जो शरीर, मन और आत्मा के बीच बैलेंस बनाता है। योग के बेसिक एलिमेंट्स में आसन (फिजिकल पोस्चर), प्राणायाम (सांस लेने की तकनीक) और मेडिटेशन शामिल हैं। इन एलिमेंट्स के कॉम्बिनेशन से फिजिकल फिटनेस, मेंटल क्लैरिटी और इमोशनल बैलेंस बेहतर होता है।

27 सितंबर, 2014 को यूनाइटेड नेशंस जनरल असेंबली को संबोधित करते हुए, माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने दुनिया को रहने लायक और सस्टेनेबल बनाने के मकसद से लोगों की लाइफस्टाइल में बदलाव लाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया था। उन्होंने कहा था कि योग मन और शरीर, सोच और काम, संयम और संतोष, इंसान और प्रकृति के बीच तालमेल और हेल्थ और वेल-बीइंग से जुड़े एक होलिस्टिक विज़न का संगम है। माननीय प्रधानमंत्री के अनुरोध पर, 11 दिसंबर 2014 को, यूनाइटेड नेशंस जनरल असेंबली ने 174 से ज़्यादा देशों के एक जॉइंट प्रस्ताव को मंज़ूरी दी, जिसमें 21 जून को ‘इंटरनेशनल योग दिवस’ घोषित किया गया। 2015 से, दुनिया भर में लाखों लोग योग करने के लिए पब्लिक जगहों पर एक साथ आ रहे हैं, इस तरह हमारे पुराने ज्ञान को एक ग्लोबल मूवमेंट में बदल रहे हैं।

इस साल 21 जून को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी कोलकाता में योग दिवस समारोह की अगुवाई करेंगे, जबकि मैं इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए लद्दाख में रहूँगा। पिछले कई सालों में, मैंने भी योग और पंचकर्म के नियमित अभ्यास के लाभों का अनुभव किया है। इन दोनों को अक्सर सिस्टर साइंस कहा जाता है। इन बहुत समृद्ध करने वाले व्यक्तिगत अनुभवों ने मुझे योग और मानव कल्याण पर इसके गहरे प्रभाव पर अपने विचार साझा करने के लिए प्रेरित किया है।

योग: भारत की एक शाश्वत विरासत
‘योग’ का शाश्वत अभ्यास, जो शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक कल्याण से जुड़ा है, माना जाता है कि हमारी सभ्यता की शुरुआत के साथ ही शुरू हो गया था। योग की परंपरा में, जहाँ भगवान शिव को पहला योगी या ‘आदि योगी’ और पहला गुरु या ‘आदि गुरु’ माना जाता है, वहीं महर्षि पतंजलि को ‘शास्त्री योग का जनक’ माना जाता है क्योंकि उन्होंने ‘योग सूत्रों’ में योग के सिद्धांतों को व्यवस्थित रूप से शामिल किया था। महर्षि पतंजलि का तमिलनाडु के साथ गहरा आध्यात्मिक संबंध है। ऐसा माना जाता है कि उनकी शारीरिक जीव समाधि भी तिरुपत्तूर में है।

हमारे पूजनीय ऋषियों और मुनियों ने दुनिया को योग का अनमोल खजाना दिया। सालों के ध्यान, तपस्या और आध्यात्मिक अभ्यास के बाद, इन ऋषियों और मुनियों ने एक पूरा सिस्टम बनाया जो शरीर, मन और आत्मा को जोड़ता है। श्री रामकृष्ण परमहंस ने योग के तीन महान रास्ते बताए हैं – ज्ञान योग, जो ज्ञान और समझ का रास्ता है; कर्म योग, जो निस्वार्थ सेवा और सही काम का रास्ता है; और भक्ति योग, जो शुद्ध प्रेम और भक्ति का रास्ता है। उन्होंने सिखाया कि तीनों रास्ते आखिरकार परम सत्य की प्राप्ति में मिल जाते हैं।

आज, योग भूगोल, संस्कृति और धर्म की सीमाओं को पार कर चुका है। यह भारत के ऋषियों के शाश्वत ज्ञान और मानवता की भलाई में उनके शाश्वत योगदान का जीता-जागता सबूत है।

स्वस्थ उम्र बढ़ने के लिए योग
हर साल, हमारे देश में पूरे जोश और एक सार्थक थीम के साथ अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है। इस साल की थीम ‘स्वस्थ उम्र बढ़ने के लिए योग’ का खास महत्व है। हेल्थकेयर और पब्लिक हेल्थ सिस्टम में अच्छी तरक्की और मौत की दर में कमी की वजह से, दुनिया भर में लोगों की औसत उम्र बढ़ी है। भारत भी इस बड़े डेमोग्राफिक बदलाव को देख रहा है। यूनाइटेड नेशंस पॉपुलेशन फंड (UNFPA) की ‘इंडिया एजिंग रिपोर्ट 2023’ के मुताबिक, 2050 तक भारत में हर पांच में से लगभग एक व्यक्ति 60 साल से ज़्यादा उम्र का होगा।

लंबी उम्र के इस अनमोल तोहफे का जश्न मनाते हुए, समाज की यह भी बड़ी ज़िम्मेदारी है कि वह यह पक्का करे कि ज़िंदगी के इन ज़्यादा सालों का मतलब सिर्फ़ उम्र बढ़ना ही नहीं है, बल्कि उन सालों में ज़िंदगी की क्वालिटी भी बेहतर हो। इस संदर्भ में, इंटरनेशनल योगा डे (IDY) 2026 की थीम – “स्वस्थ उम्र बढ़ने के लिए योग” – एक बहुत ही सही संदेश के तौर पर सामने आई है।

इस डेमोग्राफिक बदलाव की वजह से भारत में ‘सिल्वर इकॉनमी’ बढ़ी है, जो मुख्य रूप से हेल्थकेयर से जुड़े सामान और सर्विस और सीनियर सिटिज़न्स की ज़रूरतों पर फोकस करती है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि इसकी कीमत अब लगभग 73,000 करोड़ रुपये है। आने वाले सालों में इस सेक्टर के काफी बढ़ने की उम्मीद है।

आज के दौर में बढ़ती उम्र की असलियत ने दिखाया है कि कैसे बुज़ुर्ग लोग अलग-अलग तरह की चुनौतियों और कमज़ोरियों के एक मुश्किल जाल से जूझ रहे हैं। इस बारे में, वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन ने भी दुनिया भर में बुज़ुर्गों में नॉन-कम्युनिकेबल बीमारियों, मेंटल हेल्थ की चिंताओं और सोशल आइसोलेशन के बढ़ते बोझ पर बार-बार ज़ोर दिया है।
मेरा यह भी मानना ​​है कि लोगों को कम उम्र से ही योग से जोड़ना आज की ज़रूरत है। योग की प्रैक्टिस जितनी जल्दी शुरू की जाएगी, ज़िंदगी भर उतने ही ज़्यादा फ़ायदे मिलेंगे। मुझे यह जानकर बहुत खुशी हुई कि नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 में योग को हेल्थ, वेल-बीइंग और वैल्यूज़-बेस्ड एजुकेशन के एक ज़रूरी हिस्से के तौर पर खास जगह दी गई है। यह युवाओं को योग से जोड़ने की दिशा में एक पॉज़िटिव कदम है। इससे स्टूडेंट्स में डिसिप्लिन, कॉन्संट्रेशन, इमोशनल बैलेंस और एक हेल्दी लाइफस्टाइल को ज़रूर बढ़ावा मिलेगा।

इस तरह, हम पाते हैं कि दुनिया भर में बदलते डेमोग्राफिक हालात के बीच, भारत दुनिया को सफल तरक्की का एक अनोखा मॉडल दे रहा है – एक ऐसा मॉडल जो पुरानी सभ्यताओं के ज्ञान और मॉडर्न साइंटिफिक सबूतों के बीच एक अच्छा तालमेल बनाता है – और वह है योग।

योग – आज के ज़माने में बढ़ती उम्र से जुड़ी समस्याओं का समाधान
आज, मॉडर्न साइंस हमारे ऋषियों और योगियों की हमेशा रहने वाली बातों को सही साबित कर रहा है, जिन्होंने अनुशासित जीवन, योग और आध्यात्मिक अभ्यास से बहुत लंबी उम्र, स्फूर्ति और मानसिक स्पष्टता हासिल की। ​​हाल के सालों में योग के इलाज वाले पहलुओं में एकेडमिक और क्लिनिकल दिलचस्पी तेज़ी से बढ़ी है।

नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ़ हेल्थ (NIH) और हार्वर्ड मेडिकल स्कूल जैसे बड़े संस्थानों और लैंसेट जैसे कई जाने-माने रिसर्च जर्नल्स ने अपनी रिसर्च में दिखाया है कि रेगुलर योग करने से बुज़ुर्गों में बैलेंस, फ्लेक्सिबिलिटी और मोबिलिटी बेहतर होती है। इससे उनके गिरने का डर और खतरा बहुत कम हो जाता है। रिसर्च से यह भी पता चला है कि योग हड्डियों की डेंसिटी बढ़ाता है, आर्थराइटिस का दर्द कम करता है, सांस लेने की क्षमता में सुधार करता है, ब्लड प्रेशर को स्थिर करता है और कार्डियोवैस्कुलर हेल्थ को बेहतर बनाता है।

फसल से आगे : किसान की नई आर्थिक आज़ादीभारत की नई कृषि यात्रा : फसल से आगे, समृद्धि की ओर

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में बीते 12 वर्षों में भारतीय कृषि एक नए दौर में प्रवेश कर चुकी है। पहले हमारी सबसे बड़ी चिंता यह थी कि देश में अनाज की कमी न हो, किसी तरह भूख से बचाव हो जाए। आज मोदी जी की दूरदर्शिता और किसान‑हितैषी नीतियों ने कृषि को सिर्फ “उत्पादन का क्षेत्र” नहीं रहने दिया, बल्कि किसान की समृद्धि, जोखिम‑सुरक्षा, पोषण सुरक्षा, हरित तकनीक और ग्रामीण विकास का समन्वित आधार बना दिया है। हरित क्रांति के बाद पहली बार नीतियों का फोकस केवल “कितना उत्पादन” पर नहीं, बल्कि “किसान की वास्तविक आय कितनी, खेती कितनी टिकाऊ, और ग्रामीण अर्थव्यवस्था कितनी मज़बूत” पर आ गया है। इसी सोच से दलहन–तिलहन मिशन, कॉटन मिशन, प्राकृतिक खेती मिशन, प्रधानमंत्री धन–धान्य कृषि योजना, खेत बचाओ अभियान, डिजिटल कृषि और शोध–नवाचार; सबको एक ही व्यापक दृष्टि से जोड़ा जा रहा है।

उत्पादन से आगे : आय, सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था

आज भारत खाद्यान्न उत्पादन में 3765.63 लाख टन के रिकॉर्ड स्तर पर है, जो देश के इतिहास में सबसे ज्यादा है। धान, गेहूँ, मक्का, दालें और तिलहन- सभी में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई है। यह केवल ज्यादा पैदावार नहीं, बल्कि कुल ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आए विस्तार और मजबूती का प्रमाण है। साथ‑साथ, मोदी सरकार ने किसान की जोखिम‑सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM‑KISAN) के तहत अब तक 22 किस्तों के माध्यम से किसानों के खातों में सीधे 4.27 लाख करोड़ रुपए से अधिक की सहायता पहुँच चुकी है, जिससे 9 करोड़ से ज़्यादा किसान परिवारों को हर साल नियमित आय‑समर्थन मिलता है। वहीं, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) ने देशभर में करोड़ों किसान‑आवेदनों को कवर करते हुए फसल के नुकसान की स्थिति में एक मज़बूत बीमा कवच दिया है। सिंचाई, ग्रामीण सड़कों, कृषि‑अवसंरचना, वेयरहाउस और कोल्ड‑चेन में निवेश ने उत्पादन, भंडारण और बाज़ार तक पहुँच- तीनों को मजबूत किया है। कृषि अब सिर्फ खेत की मेड़ तक सीमित नहीं है। डेयरी, मत्स्य, कुक्कुट, बागवानी, मधुमक्खी‑पालन, खाद्य‑प्रसंस्करण, भंडारण, ग्रामीण उद्योग, सौर ऊर्जा और सेवा‑क्षेत्र; सब मिलकर नई ग्रामीण अर्थव्यवस्था का निर्माण कर रहे हैं।

दलहन, तिलहन और कॉटन मिशन : आत्मनिर्भरता और मूल्य–सुरक्षा

लंबे समय तक दालें, खाद्य तेल और कपास– तीनों क्षेत्र हमारी पूरी क्षमता से पीछे रहे। हम दालों और तेलों के लिए आयात पर निर्भर रहे और कपास में भी किसानों को वैश्विक उतार‑चढ़ाव का सामना करना पड़ा। मोदी सरकार ने इन तीनों को रणनीतिक प्राथमिकता देते हुए अलग‑अलग मिशन के रूप में आगे बढ़ाया है। राष्ट्रीय दलहन मिशन के माध्यम से तुअर, उड़द, मसूर, चना और अन्य दालों का क्षेत्र और उत्पादकता बढ़ाने के लिए बीज से लेकर बाज़ार तक पूरी वैल्यू चेन पर काम हो रहा है– उच्च‑उपज किस्में, क्लस्टर आधारित खेती, प्रसंस्करण इकाइयाँ, MSP का सुदृढ़ ढाँचा, सरकारी खरीद, भंडारण और निर्यात तक। लक्ष्य यह है कि भारत दालों में पूरी तरह आत्मनिर्भर बने, आयात बिल घटे और किसानों को उच्च मूल्य वाली इन फसलों से स्थायी आय मिले। इसी तरह तिलहन मिशन के ज़रिए सरसों, सोयाबीन, सूरजमुखी, तिल और पाम ऑयल जैसी फसलों पर विशेष जोर दिया जा रहा है। यह केवल पैदावार बढ़ाने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता, किसानों को बेहतर दाम और देश की तेल सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में व्यापक रणनीति है। इसके साथ‑साथ कॉटन मिशन के तहत कपास की उच्च‑उपज और कीट‑रोधी किस्में, उन्नत कृषि‑प्रणालियाँ, कीट‑प्रबंधन, फसल विविधीकरण, टेक्सटाइल वैल्यू–चेन से बेहतर जुड़ाव और गुणवत्ता सुधार पर काम हो रहा है। कपास भारत के लाखों किसानों के लिए नकदी फसल है; मिशन का उद्देश्य है कि किसान को उत्पादन के साथ‑साथ वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा योग्य गुणवत्ता, बेहतर मूल्य और स्थिर आय भी मिल सके।

प्राकृतिक खेती मिशन : 1 करोड़ किसान, 75 लाख हेक्टेयर की नई राह

तेज़ी से बढ़ती रासायनिक निर्भरता, मिट्टी की थकान और भूजल पर दबाव– ये सब हमें आगाह कर रहे हैं कि खेती के तरीके बदलने होंगे। इसी समझ के साथ हमारे विजनरी प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में प्राकृतिक खेती को एक राष्ट्रीय मिशन के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। हमारा संकल्प है कि 1 करोड़ किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए सेंसिटाइज़ किया जाए, उनमें से लगभग 18 लाख किसानों को सक्रिय रूप से प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए तैयार किया जाए और चरणबद्ध रूप से करीब 75 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को प्राकृतिक खेती के दायरे में लाया जाए।

यह परिवर्तन धीरे‑धीरे, वैज्ञानिक प्रमाणों और किसानों के अपने अनुभव के आधार पर आगे बढ़ रहा है। छोटे किसानों को प्रेरित किया जा रहा है कि वे अपनी कुछ भूमि पर प्राकृतिक खेती का मॉडल बनाकर देखें; उन्हें प्रशिक्षण, स्थानीय संसाधनों पर आधारित पैकेज, प्रमाणन, ब्रांडिंग और बाज़ार‑जुड़ाव में मदद दी जा रही है। उद्देश्य यह है कि मिट्टी की उर्वरता बढ़े, रासायनिक लागत घटे, जलवायु झटकों के सामने फसलें अधिक टिकाऊ हों और उपभोक्ताओं को स्वास्थ्यप्रद, पोषक भोजन मिल सके।

प्रधानमंत्री धन–धान्य कृषि योजना और फोकस में 100 कम उत्पादन वाले ज़िले

भारत जैसे विशाल देश में कुछ क्षेत्र बहुत तेज़ी से आगे बढ़ते हैं, जबकि कुछ ज़िले अलग‑अलग वजहों से पीछे रह जाते हैं। इस असमानता को कम करने के लिए प्रधानमंत्री धन–धान्य कृषि योजना की संकल्पना की गई है। इस योजना के तहत लगभग 100 कम उत्पादन वाले ज़िलों की पहचान की गई है, जहाँ प्रति हेक्टेयर पैदावार राष्ट्रीय औसत से काफी कम है और किसान अपेक्षित लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। इन ज़िलों में 11 विभागों की 36 योजनाओं का कन्वर्जेन्स कर एक समग्र पैकेज दिया जा रहा है– सिंचाई, मृदा स्वास्थ्य, बीज, उर्वरक, फसल विविधीकरण, पशुपालन, बागवानी, कृषि–उपकरण, कौशल विकास, अवसंरचना और बाज़ार‑जुड़ाव; सबको एक साथ जोड़कर। सोच यह है कि योजनाएँ अलग‑अलग “साइलो” में न चलें, बल्कि किसान के खेत और गाँव को केंद्र में रखकर सब मिलकर काम करें। इससे नीति का फोकस केवल “कितना उत्पादन” से आगे बढ़कर इस पर आया है कि कहाँ उत्पादन कम है, वहाँ लक्षित निवेश और प्रयास से कैसे बढ़ाया जाए, और उससे किसान की आय कैसे ऊपर उठे।

“खेत बचाओ अभियान” : मिट्टी, पानी और किसान का संतुलन

उत्पादन बढ़ाने की दौड़ में कई जगहों पर मिट्टी और पानी पर दबाव बढ़ा है। असंतुलित उर्वरक उपयोग, भूजल का अत्यधिक दोहन और सीमित फसल चक्र ने खेत की सेहत को प्रभावित किया है। यदि समय रहते दिशा न बदली जाए तो आने वाली पीढ़ियों के लिए हम कमजोर खेत और थकी हुई मिट्टी छोड़ेंगे। इस चुनौती को देखते हुए “खेत बचाओ अभियान” शुरू किया गया है। यह अभियान केवल मिट्टी बचाने का नहीं, बल्कि किसान की आय, भोजन की गुणवत्ता और भविष्य की खाद्य सुरक्षा की रक्षा का अभियान है। इसके पाँच मुख्य संदेश हैं- हर किसान मिट्टी परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का उपयोग करे, डीएपी और यूरिया पर अत्यधिक निर्भरता कम करे और संतुलित NPK, सूक्ष्म पोषक तत्व, जैव एवं नैनो उर्वरकों को अपनाए, हरी खाद, जैविक खाद और एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन को बढ़ावा दे, नकली बीज, उर्वरक और कीटनाशकों के विरुद्ध सतर्क रहे और प्रशासन को तुरंत सूचना दे तथा प्राकृतिक खेती और जलवायु–अनुकूल पद्धतियों की ओर संगठित रूप से बढ़े। लक्ष्य यह नहीं कि उर्वरक अचानक कम कर दिए जाएँ, बल्कि यह है कि हर किसान सही मात्रा, सही समय और सही मिश्रण का उपयोग करे, ताकि मिट्टी की सेहत लंबे समय तक बनी रहे, लागत घटे और उत्पादन भी सुरक्षित रहे।

विज्ञान, डिजिटल कृषि और ICAR की भूमिका

इन सभी प्रयासों की रीढ़ विज्ञान, अनुसंधान और डिजिटल तकनीक है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) और राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रणाली ने 2014–25 के बीच लगभग 3,000 जलवायु‑सहनशील फसल किस्में विकसित की हैं, जिनमें सूखा, बाढ़, लू, लवणीयता और अन्य तनावों को झेलने की क्षमता है। कुल मिलाकर 3,800 से ज़्यादा उच्च‑उपज किस्में और 200 से अधिक बायोफोर्टिफाइड किस्में जारी की गई हैं, जो उत्पादकता के साथ‑साथ पोषण सुरक्षा भी मजबूत करती हैं। डिजिटल कृषि मिशन और “एग्रीस्टैक” के तहत किसान पहचान (Farmer IDs), फसल प्लॉटों का डिजिटलीकरण, ड्रोन‑आधारित सेवाएँ, कीट‑रोग निगरानी, मौसम–आधारित और लोकेशन–स्पेसिफिक सलाह जैसी व्यवस्थाएँ बन रही हैं। इससे लैब से लैंड और डेटा से निर्णय तक की दूरी तेजी से कम हो रही है। ई‑नाम, किसान सारथी, KVK नेटवर्क, मोबाइल संदेश, व्हाट्सऐप समूह, सामुदायिक रेडियो और सोशल मीडिया– इन सबके माध्यम से वैज्ञानिक, विस्तारकर्मी और किसान–नेता सीधे किसान से संवाद कर पा रहे हैं। कृषि और ग्रामीण विकास को भी एक साथ, समग्र दृष्टि से देखा जा रहा है। सड़क, बिजली, इंटरनेट, स्व‑सहायता समूह, FPO, ग्रामीण उद्योग और कौशल विकास– ये सभी कार्यक्रम जब कृषि के साथ कदम–ताल करके चलते हैं, तभी गाँवों में रोज़गार, उद्यमिता और सामाजिक परिवर्तन की गति बढ़ती है।

फसल की मात्रा से आगे, किसान के विश्वास की ओर बढ़ते ठोस कदम

आने वाले वर्षों में भारत को दुनिया की खाद्य, पोषण और जलवायु चुनौतियों के बीच अपने कृषि‑तंत्र को और मजबूत बनाना है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का विज़न स्पष्ट है-किसान की आय बढ़े, उसकी मेहनत का उचित सम्मान और मूल्य मिले, दालों, तिलहनों और कपास में आत्मनिर्भरता से पोषण, तेल और वस्त्र सुरक्षा मजबूत हो। PM‑KISAN, PMFBY, प्राकृतिक खेती, खेत बचाओ अभियान और जलवायु‑अनुकूल तकनीकों से खेत की मिट्टी, पानी और किसान की सुरक्षा सुनिश्चित हो।प्रधानमंत्री धन–धान्य कृषि योजना के माध्यम से कम उत्पादन वाले ज़िलों में लक्षित निवेश से क्षेत्रीय असमानता घटे और हर किसान आगे बढ़े। विज्ञान, अनुसंधान और डिजिटल तकनीक से खेती कुशल, लचीली, टिकाऊ और प्रतिस्पर्धी बने।

जब खेत बचेगा, तब किसान बचेगा। जब किसान बचेगा, तब कृषि बचेगी और जब कृषि बचेगी, तब भारत का भविष्य सुरक्षित, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनेगा। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में यही हमारी नई कृषि यात्रा का सार है– फसल से आगे, किसान के विश्वास और ग्रामीण भारत की समृद्धि की ओर।

(लेखक केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री हैं।)

RRU ने 261 पंजाब पुलिस अधिकारियों को क्लाउड AI और प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग का प्रशिक्षण दिया

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

गांधीनगर, गुजरात – राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (RRU) ने अपने सूचना प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और साइबर सुरक्षा संकाय (SITAICS) के माध्यम से 15 से 17 जून 2026 तक पंजाब पुलिस के 261 अधिकारियों के लिए तीन दिवसीय फाउंडेशन कोर्स “क्लाउड AI 101 और प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग” का सफलतापूर्वक ऑनलाइन लाइव वर्चुअल मोड में आयोजन किया। कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय की डीन (प्रभारी) डॉ. जसबीरकौर थधानी के उद्घाटन भाषण से हुआ, जिन्होंने बताया कि AI उपकरण अधिकारियों को बढ़ती सूचनाओं के प्रबंधन और नियमित कागजी कार्रवाई को स्वचालित करने में मदद करते हैं, जिससे उनका निर्णय उन मामलों पर केंद्रित हो पाता है जहां इसकी सबसे अधिक आवश्यकता होती है। कार्यक्रम का संचालन SITAICS के निदेशक डॉ. चंद्रेश पारेख ने किया और इसका समन्वय SITAICS के सहायक प्रोफेसर श्री पूजन शाह ने किया।

नौ सत्रों और छह घंटे के व्यावहारिक प्रशिक्षण में फैला यह पाठ्यक्रम विशेष रूप से कानून प्रवर्तन अधिकारियों के लिए तैयार किया गया था। पहले दिन एआई के मूल सिद्धांतों, लार्ज लैंग्वेज मॉडल आर्किटेक्चर और प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग को शामिल किया गया, जिसमें प्रभावी प्रॉम्प्टिंग के चार स्तंभों – भूमिका, कार्य, संदर्भ और आउटपुट प्रारूप – का परिचय दिया गया। प्रतिभागियों ने ओलामा और एलएम स्टूडियो जैसे ऑफ़लाइन एआई उपकरणों का भी अध्ययन किया, जिससे गूगल एआई एज गैलरी जैसे ऐप्स के साथ इंटरनेट कनेक्टिविटी के बिना सुरक्षित एआई उपयोग संभव हो सका।

दूसरे दिन दस्तावेज़ इंटेलिजेंस पर ध्यान केंद्रित किया गया, जहां प्रतिभागियों ने क्लाउड प्रोजेक्ट्स और नोटबुकएलएम का उपयोग करके क्रॉस-डॉक्यूमेंट नॉलेज बेस बनाए और उद्धरण-आधारित बहु-दस्तावेज़ विश्लेषण किया। इस सत्र में भासिनी का भी परिचय दिया गया, जो भारतीय क्षेत्रीय भाषाओं में पाठ और वाक् प्रसंस्करण के लिए एक मेक-इन-इंडिया एआई टूल है। तीसरे दिन जैपियर के माध्यम से जिम्मेदार एआई गवर्नेंस, रेड-टीमिंग और नो-कोड ऑटोमेशन को एक साथ लाया गया। समापन भाषण रजिस्ट्रार (प्रभारी) डॉ. धर्मेशकुमार प्रजापति ने दिया, जिन्होंने प्रशिक्षण के सफल समापन पर सभी प्रतिभागियों को बधाई दी और इस बात पर जोर दिया कि एआई-सहायता प्राप्त सभी कार्यप्रवाहों में मानवीय भागीदारी अपरिहार्य है।

प्रतिभागियों की प्रतिक्रिया अत्यंत सकारात्मक रही। अधिकारियों ने प्रशिक्षण को अत्यधिक ज्ञानवर्धक बताया और कहा कि सुव्यवस्थित सामग्री, व्यावहारिक उदाहरण और प्रत्यक्ष अभ्यास सत्रों ने एआई उपकरणों और त्वरित इंजीनियरिंग तकनीकों के बारे में उनकी समझ को काफी बढ़ाया है। कई प्रतिभागियों ने प्रौद्योगिकी के विकास के साथ-साथ अद्यतन रहने की उत्सुकता भी व्यक्त की और अनुरोध किया कि भविष्य के कार्यक्रमों में एआई में नवीनतम प्रगति को शामिल किया जाए – एक ऐसी आवश्यकता जिसे राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय निरंतर और अद्यतन पाठ्यक्रमों के माध्यम से पूरा करने का इरादा रखता है।

राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय का उद्देश्य विश्व स्तर पर राज्य पुलिस बलों और राष्ट्रीय सुरक्षा संगठनों को विभिन्न एआई उपकरणों को अपनाने और प्रभावी ढंग से उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करना है ताकि उनकी क्षमताओं को मजबूत किया जा सके और परिचालन प्रभावशीलता में सुधार किया जा सके।