पंचायती राज मंत्रालय ने ‘निर्भय चेतना’ पर तीन दिवसीय प्रशिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया
नई दिल्ली / सत्ता संदेश
पंचायती राज मंत्रालय ने निर्भया निधि परियोजना के अंतर्गत नई दिल्ली में 17 से 19 जून 2026 तक निर्भय चेतना पर तीन दिवसीय प्रशिक्षक प्रशिक्षण (टीओटी) कार्यक्रम का आयोजन किया । विश्व स्तर पर अपनी तरह के सबसे बड़े अभियान के रूप में मान्यता प्राप्त निर्भय चेतना, महिलाओं से संबंधित मुद्दों, जिनमें महिलाओं की सुरक्षा और संरक्षा शामिल है, के प्रति पुरुषों को संवेदनशील बनाने की एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पहल है, जिसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर लैंगिक रूप से संवेदनशील शासन को मजबूत करना है।
इस कार्यक्रम में ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया द्वारा विकसित निर्भय चेतना प्रशिक्षण मॉड्यूल का भी शुभारंभ किया गया। इस पहल का उद्देश्य मुख्य प्रशिक्षकों का एक समूह तैयार करना है जो पंचायती राज संस्थाओं के भीतर लैंगिक समानता, महिलाओं की सुरक्षा, अधिकारों और नेतृत्व पर पुरुष निर्वाचित प्रतिनिधियों को प्रशिक्षित करेंगे। पायलट बैच में छह राज्यों – असम, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा और उत्तराखंड – के लगभग 40 मुख्य प्रशिक्षक शामिल थे और यह सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विस्तारित होने वाले एक क्रमबद्ध प्रशिक्षण मॉडल की नींव के रूप में कार्य करेगा।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए पंचायती राज मंत्रालय के श्री विवेक भारद्वाज ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा, गरिमा और समान भागीदारी सुनिश्चित किए बिना विकसित भारत की परिकल्पना साकार नहीं हो सकती। उन्होंने जमीनी स्तर पर दृष्टिकोण और व्यवहार में सार्थक परिवर्तन लाने में सक्षम सामाजिक और लोकतांत्रिक परिवर्तन की संस्थाओं के रूप में पंचायतों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। निर्भय चेतना के उद्देश्य पर उन्होंने कहा कि यह पहल महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा और अवसरों को विकास के आवश्यक स्तंभों के रूप में स्थापित करके लैंगिक संवेदनशील नेतृत्व को बढ़ावा देना चाहती है।
इस कार्यक्रम में लैंगिक मुद्दों की गहन समझ विकसित करने, सामाजिक रूढ़ियों को चुनौती देने और लैंगिक रूप से संवेदनशील नेतृत्व को बढ़ावा देने के लिए विशेषज्ञ सत्रों, समूह चर्चाओं, प्रकरण अध्ययन और अनुभवात्मक शिक्षण के माध्यम से सहभागी दृष्टिकोण अपनाया गया। प्रमुख विषयों में सकारात्मक पुरुषत्व, सामुदायिक सहभागिता और महिलाओं की सुरक्षा, गरिमा और समावेशन को बढ़ावा देने में पंचायतों की भूमिका शामिल थी।

