“CSIR-IMTECH में VCARE-2026 शुरू, 60 से ज्यादा शोधकर्ता सीखेंगे नैतिक पशु अनुसंधान के गुर”
चंडीगढ़ / सत्ता संदेश
बायोमेडिकल और प्रीक्लिनिकल रिसर्च में पशु संसाधनों के नैतिक एवं वैज्ञानिक उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सीएसआईआर-सूक्ष्मजीव प्रौद्योगिकी संस्थान (CSIR-IMTECH) में पांच दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला VCARE-2026 का शुभारंभ किया गया। कार्यशाला का आयोजन IMTECH सेंटर फॉर एनिमल रिसोर्सेज एंड एक्सपेरिमेंटेशन (iCARE) की ओर से CSIR Integrated Skill Initiative के तहत 7 से 11 सितंबर तक किया जा रहा है।
इस राष्ट्रीय कार्यशाला में देशभर के प्रमुख शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों से 60 से अधिक शोधकर्ता हिस्सा ले रहे हैं। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शोधकर्ताओं और संबंधित कर्मचारियों को प्रयोगशाला पशुओं की हैंडलिंग, बायोसेफ्टी, गुड लेबोरेटरी प्रैक्टिस (GLP) और पशु अनुसंधान में नैतिक मानकों से संबंधित व्यावहारिक एवं तकनीकी प्रशिक्षण देना है।
कार्यशाला में बायोमेडिकल रिसर्च में पशु संसाधनों के जिम्मेदार और नैतिक उपयोग के साथ-साथ बायोटेक्नोलॉजी और फार्मास्युटिकल क्षेत्र में उनके महत्व पर विशेष जोर दिया जा रहा है। खासतौर पर वैक्सीन विकास और नई दवाओं की खोज से जुड़े प्रीक्लिनिकल रिसर्च में पशु मॉडलों की भूमिका पर विशेषज्ञ प्रशिक्षण दिया जाएगा।
कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर CSIR-IMTECH के iCARE प्रमुख डॉ. नीरज खत्री ने प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने in vivo प्रयोगों में प्रशिक्षित और दक्ष कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक शोध में पशु संसाधनों के उचित प्रबंधन और प्रयोग के लिए विशेषज्ञ प्रशिक्षण बेहद जरूरी है।
CSIR-IMTECH की निदेशक डॉ. अल्का राव ने मेडिकल और बायोमेडिकल रिसर्च में प्रयोगशाला पशुओं की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने इस विशेष क्षेत्र में क्षमता निर्माण के लिए iCARE टीम की ओर से आयोजित कार्यशाला की सराहना की।

कार्यशाला का औपचारिक उद्घाटन PGIMER चंडीगढ़ के फार्माकोलॉजी विभाग के प्रोफेसर विकास मेधी ने किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल प्रोफेसर मेधी ने नैतिक, गुणवत्ता-आधारित और पुनरुत्पादनीय पशु अनुसंधान को मजबूत करने के लिए क्षमता निर्माण की आवश्यकता पर जोर दिया।
अपने संबोधन में उन्होंने पशु अनुसंधान में Good Laboratory Practice (GLP) के महत्व पर चर्चा की। उन्होंने नियामक नियमों का पालन, गुणवत्ता आश्वासन, मानकीकृत प्रक्रियाओं और डेटा की प्रामाणिकता को विश्वसनीय प्रीक्लिनिकल रिसर्च की बुनियादी जरूरत बताया।
उद्घाटन सत्र के दौरान गणमान्य अतिथियों की मौजूदगी में कार्यशाला मैनुअल भी जारी किया गया। इस अवसर पर CSIR-IMTECH की निदेशक डॉ. अल्का राव ने मुख्य अतिथि प्रोफेसर विकास मेधी का सम्मान किया।
पांच दिवसीय तकनीकी कार्यक्रम में IIT रोपड़, NIPER, IISER, INST, BRIC-NABI मोहाली, पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़, NBRC मानेसर, LUVAS हिसार, GADVASU लुधियाना और CSIR-IMTECH सहित कई प्रमुख संस्थानों के विशेषज्ञ प्रशिक्षण देंगे।

कार्यशाला में प्रतिभागियों को सैद्धांतिक जानकारी के साथ-साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। उनके ज्ञान और कौशल का मूल्यांकन थ्योरी परीक्षा तथा प्रैक्टिकल असेसमेंट के माध्यम से किया जाएगा। इसके अलावा प्रतिभागियों से प्राप्त फीडबैक के आधार पर भविष्य में होने वाले प्रशिक्षण कार्यक्रमों को और बेहतर बनाने का प्रयास किया जाएगा।
CSIR-IMTECH में मौजूद iCARE सुविधा अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे के साथ उच्च गुणवत्ता वाले प्रयोगशाला पशु संसाधन उपलब्ध कराती है। इनमें आनुवंशिक रूप से परिभाषित माउस मॉडल, चूहे, हैम्स्टर और खरगोश शामिल हैं। इन संसाधनों का उपयोग अत्याधुनिक बायोमेडिकल और प्रीक्लिनिकल रिसर्च को आगे बढ़ाने में किया जाता है।
VCARE-2026 के माध्यम से शोधकर्ताओं को नैतिक पशु अनुसंधान से जुड़े उन्नत कौशल, वैज्ञानिक प्रक्रियाओं और सर्वोत्तम प्रथाओं से परिचित कराया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार, इस तरह के क्षमता निर्माण कार्यक्रम भारत में बायोमेडिकल और फार्मास्युटिकल विज्ञान में अनुसंधान, नवाचार और वैज्ञानिक प्रगति को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
CSIR-IMTECH सूक्ष्मजीव विज्ञान के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर का प्रमुख अनुसंधान संस्थान है, जिसकी स्थापना 1984 में हुई थी। संस्थान का उद्देश्य बुनियादी वैज्ञानिक खोजों को अत्याधुनिक तकनीकों और प्लेटफॉर्म के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा तथा औद्योगिक क्षेत्र की जरूरतों से जोड़ते हुए एक मजबूत ट्रांसलेशनल रिसर्च इकोसिस्टम विकसित करना है।

