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मंत्रिमंडल ने ओडिशा और झारखंड के लिए दो मल्टी ट्रैकिंग परियोजना को दी मंजूरी

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति बुधवार को रेल मंत्रालय की लगभग 3,907 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली 2 परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं में निम्नलिखित शामिल हैं। जो पारादीप – हरिदासपुर – दोहरीकरण और राजखरसावा – डांगोअपोसी — चौथी लाइन है।

इस बढ़ी लाइन क्षमता से भारतीय रेलवे की परिचालन दक्षता और सेवा विश्वसनीयता में वृद्धि होगी। इस बहु-ट्रैकिंग प्रस्ताव से परिचालन को सुव्यवस्थित करने और भीड़भाड़ को कम करने में मदद मिलेगी। ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के नए भारत के विजन के अनुरूप हैं, जिसका उद्देश्य क्षेत्र के व्यापक विकास के माध्यम से इस क्षेत्र के लोगों को आत्मनिर्भर बनाना है, जिससे उनके रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अंतर्गत बनाई गई हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य एकीकृत योजना और हितधारकों के परामर्श के माध्यम से बहु-मार्गीय संपर्क और लॉजिस्टिक दक्षता को बढ़ाना है। इन परियोजनाओं से लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित होगी।

ओडिशा और झारखंड राज्य के 4 जिलों को शामिल करने वाली इन 2 (दो) परियोजनाओं से भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 145 किलोमीटर की वृद्धि होगी।

प्रस्तावित मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना से लगभग 1,526 गांवों की कनेक्टिविटी में सुधार होगा, जिनकी आबादी लगभग 14 लाख है।

प्रस्तावित क्षमता वृद्धि से देश भर के कई प्रमुख पर्यटन स्थलों- ललितगिरि बौद्ध परिसर, श्री बलदेवजेव मंदिर, मेघाहातुबुरु पहाड़ियां आदि के लिए रेल संपर्क में सुधार होगा।

ये प्रस्तावित परियोजनाएं कोयला, लौह अयस्क, डोलोमाइट, चूना पत्थर, जिप्सम आदि जैसी वस्तुओं के परिवहन के लिए आवश्यक मार्ग हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने पर प्रति वर्ष 44 मिलियन टन माल ढुलाई की अतिरिक्त क्षमता प्राप्त होगी। रेल पर्यावरण के अनुकूल और ऊर्जा कुशल परिवहन होने के कारण जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने और देश की लॉजिस्टिक लागत कम करने में सहायक होगी, साथ ही तेल आयात (6 करोड़ लीटर) को कम करेगी और कार्बनडाई ऑक्‍साइड उत्सर्जन (29 करोड़ किलोग्राम) को घटाएगी, जो 1 करोड़ पौधारोपण के बराबर है।

रायपुर में 250 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव के लिए 175 करोड़ की रेलवे परियोजना को मंजूरी

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारतीय रेलवे ने लोकोमोटिव रखरखाव अवसंरचना को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इसके अंतर्गत दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के अंतर्गत रायपुर स्थित हाई हॉर्स पावर डीजल शेड में 250 थ्री फेज इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव के लिए अतिरिक्त होमिंग सुविधाएं बनाने के उद्देश्‍य से 175 करोड़ रुपए की परियोजना को मंजूरी दी है।

होमिंग का तात्पर्य किसी लोकोमोटिव को एक निर्दिष्ट लोकोमोटिव शेड में जगह देने से है, जो उसके प्राथमिक रखरखाव केंद्र के रूप में कार्य करता है। होमिंग शेड की सुविधा लोकोमोटिव के निर्धारित रखरखाव, सुरक्षा निरीक्षण, मरम्मत और समग्र देखभाल के लिए होती है ताकि उसका सुरक्षित और कुशल संचालन सुनिश्चित हो सके।

यह परियोजना भारतीय रेलवे द्वारा इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव बेड़े के तेजी से विस्तार और पूरे नेटवर्क में माल ढुलाई तथा यात्री परिचालन में वृद्धि के अनुरूप रखरखाव बुनियादी ढांचे को बढ़ाने की दिशा में चल रहे प्रयासों के तहत स्वीकृत की गई है।

इन अतिरिक्त होमिंग सुविधाओं से भारतीय रेलवे को रायपुर डिपो में मौजूदा बुनियादी ढांचे का बेहतर उपयोग करने में मदद मिलेगी, साथ ही भविष्य में तकनीकी विस्तार के लिए आवश्यक स्थान भी उपलब्ध होगा।

पीएम मोदी के दौरे से पहले केंद्रीय मंत्री ने जालंधर कैंट रेलवे स्टेशन का किया निरिक्षण

जालंधर / सत्ता संदेश

रेल मंत्रालय तथा खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय में राज्य मंत्री रवनीत सिंह ने फिरोजपुर मंडल के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पुनर्विकसित जालंधर कैंट (जेआरसी) रेलवे स्टेशन का दौरा कर पीएम नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित आगमन की तैयारियों का जायजा लिया। प्रधानमंत्री 17 जुलाई 2026 को इस स्टेशन पुनर्विकास परियोजना का उद्घाटन करने वाले हैं।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा रेल सूचना एवं प्रसारण और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव का हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पंजाब के लोगों को यह ऐतिहासिक सौगात प्रदान करने तथा क्षेत्र के एक महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन को विश्वस्तरीय यात्री सुविधा केंद्र में परिवर्तित करने के लिए वे उनके प्रति कृतज्ञ हैं।

लगभग 110 वर्ष पुराने जालंधर कैंट रेलवे स्टेशन का पुनर्विकास लगभग ₹125 करोड़ की लागत से किया गया है। इस परियोजना में स्टेशन की ऐतिहासिक वास्तुकला को संरक्षित रखते हुए पंजाब की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाने वाले तत्वों को भी समाहित किया गया है।

पुनर्विकसित स्टेशन में विशाल डबल-हाइट एयर कॉन्कोर्स, मजबूत स्टील प्लेटफॉर्म रूफिंग, स्लिप-प्रतिरोधी फर्श, ऊर्जा-कुशल एलईडी प्रकाश व्यवस्था, शहर के दोनों ओर से सुविधाजनक प्रवेश तथा 6 मीटर और 9 मीटर चौड़ाई वाले दो नए फुट ओवर ब्रिज (एफओबी) जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं।

अन्य प्रमुख सुविधाओं में 40 मीटर चौड़ी ट्रफ रूफ, जो 200 मीटर लंबे प्लेटफॉर्म (8,720 वर्गमीटर) को कवर करती है, 36 मीटर चौड़ा 1,770 वर्गमीटर का एयर कॉन्कोर्स, 300 वर्गमीटर क्षेत्रफल वाला नया द्वितीय प्रवेश स्टेशन भवन तथा 4,855 वर्गमीटर का पार्किंग क्षेत्र शामिल है।

वर्तमान में जालंधर कैंट रेलवे स्टेशन पर प्रतिदिन औसतन 7,500 यात्रियों का आवागमन होता है। स्टेशन पर 66 अप तथा 66 डाउन ट्रेनों का ठहराव है, जिनमें दो जोड़ी वंदे भारत एक्सप्रेस, एक हमसफर एक्सप्रेस, एक गरीब रथ एक्सप्रेस तथा अनेक मेल/एक्सप्रेस और यात्री ट्रेनें शामिल हैं। यह स्टेशन पूर्णतः यात्री सेवाओं के लिए समर्पित है तथा यहां किसी प्रकार का माल परिवहन नहीं किया जाता।

निरीक्षण के दौरान श्री रवनीत सिंह ने यात्री सुविधाओं एवं चल रही तैयारियों का विस्तृत अवलोकन किया तथा पुनर्विकास कार्यों की गुणवत्ता पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उन्नत सुविधाओं से युक्त यह स्टेशन यात्रियों की सुविधा में उल्लेखनीय वृद्धि करेगा तथा भारतीय रेलवे की आधुनिक, सुरक्षित, सुगम एवं विश्वस्तरीय अवसंरचना विकसित करने की प्रतिबद्धता का प्रतीक बनेगा। साथ ही, यह पंजाब की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को भी प्रभावी रूप से प्रदर्शित करेगा।

भारतीय रेलवे ने बोंडामुंडा रेल फ्लाईओवर के लिए 135 करोड़ की दी मंजूरी

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारतीय रेल ने माल ढुलाई क्षमता और परिचालन दक्षता को महत्वपूर्ण बढ़ावा देते हुए, दक्षिण पूर्वी रेल में बोंडामुंडा ‘ए’ केबिन से बोंडामुंडा लिंक ‘बी’ केबिन तक 4.59 किलोमीटर लंबे रेल फ्लाईओवर के निर्माण को 135 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी दे दी है।

इस परियोजना का उद्देश्य राउरकेला-बोंडामुंडा के महत्वपूर्ण खंड पर भीड़भाड़ को कम करना है, जो एक महत्वपूर्ण औद्योगिक गलियारा है तथा खनन और इस्पात उत्पादन की गतिविधियों के विस्तार के कारण माल ढुलाई यातायात में तेजी से वृद्धि करने की सख्त आवश्यकता है।

एक महत्वपूर्ण औद्योगिक गलियारे पर क्षमता वृद्धि

एसएआईएल के बारसुआ-ताल्डीह-काल्टा खनन परिसर के विस्तार, राउरकेला स्टील प्लांट में बढ़े हुए उत्पादन और इस उच्च-घनत्व नेटवर्क (एचडीएन) मार्ग को दोगुना करने की योजना के कारण राउरकेला-बोंडामुंडा खंड में माल ढुलाई में काफी वृद्धि होने की उम्मीद है।

रेल यातायात में अपेक्षित वृद्धि को देखते हुए, भारतीय रेल ने नए रेल फ्लाईओवर के निर्माण को मंजूरी दे दी है, जो यात्रियों और मालगाड़ियों के बीच क्रॉसिंग संबंधी टकराव को कम करते हुए ट्रेनों की निर्बाध आवाजाही को सुविधाजनक बनाएगा।

बोंडामुंडा यार्ड में भीड़ कम करना और माल ढुलाई दक्षता में सुधार करना

प्रस्तावित फ्लाईओवर भारी मालगाड़ियों को यात्री ट्रेनों से अलग करेगा, जिससे बोंडामुंडा यार्ड में भीड़भाड़ काफी कम हो जाएगी। इस अलगाव से देश के महत्वपूर्ण औद्योगिक माल ढुलाई गलियारों में से एक पर लाइन की क्षमता, परिचालन दक्षता, ट्रेनों की विश्वसनीयता और समग्र नेटवर्क प्रदर्शन में सुधार होगा।

परियोजना के चालू होने पर, इससे प्रति वर्ष अतिरिक्त 8 मिलियन टन (एमटीपीए) माल ढुलाई यातायात को संभालने में सुविधा होने की उम्मीद है, जिससे खनिजों और औद्योगिक उत्पादों की निकासी मजबूत होगी और माल परिवहन में भविष्य की वृद्धि को समर्थन मिलेगा।

इस परियोजना को भारतीय रेल के ऊर्जा, खनिज और सीमेंट कॉरिडोर के तहत चिन्हित किया गया है, जो देश भर में औद्योगिक विकास, माल ढुलाई में तेजी लाने और रसद दक्षता बढ़ाने के लिए रेल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की दिशा में राष्ट्रीय उद्देश्य को बल देता है।

भारतीय रेलवे ने पूर्वी तट रेलवे के 631 रूट किलोमीटर पर ₹270 करोड़ की लागत से ‘कवच’ प्रणाली को मंजूरी दी

नई दिल्ली सत्ता संदेश

भारतीय रेल ने स्वदेशी प्रौद्योगिकी के जरिए रेल सुरक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 270 करोड़ रुपये की लागत से पूर्वी तट रेलवे के 631 रूट किलोमीटर (आरकेएम) पर कवच लगाने की मंजूरी दे दी है। कवच एक ऐसी व्यवस्था है जो ट्रेन टक्कर को रोकने का काम करती है।

इस परियोजना में पूर्वी तट रेलवे के छह महत्वपूर्ण रेल मार्ग खंडों जैसे-बघुआपाल-बुढ़पंक, हरिदासपुर-पारादीप, खुर्दा रोड (केयूआर)-बलांगीर, नौपाड़ा-गुनुपुर, लांजीगढ़ रोड-जूनागढ़ और बोब्बिली-सलूर को कवर करती है।

स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली का विस्तार

स्वीकृत कार्य भारतीय रेल के उस व्यापक कार्यक्रम का हिस्सा है जिसके तहत रेलवे नेटवर्क पर एलटीई-आधारित संचार प्रणाली के साथ कवच प्रणाली को तैनात किया जा रहा है। कवच भारत की स्वदेशी रूप से विकसित स्वचालित ट्रेन सुरक्षा (एटीपी) प्रणाली है, जिसे खतरे के सिग्नल पार करने (एसपीएडी), अति-गति और ट्रेन दुर्घटनाओं को रोककर सुरक्षा बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह प्रणाली ट्रेनों की आवाजाही पर लगातार नज़र रखती है और आवश्यकता पड़ने पर स्वचालित रूप से ब्रेक लगा देती है, जिससे परिचालन सुरक्षा में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

बेहतर सुरक्षा, गति और विश्वसनीयता

इन मार्गों पर कवच प्रणाली की स्थापना से स्वचालित ट्रेन सुरक्षा और टक्कर से बचाव की क्षमता बढ़ेगी जिससे ट्रेन संचालन में उच्च स्तर की सुरक्षा प्राप्त करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, कवच प्रणाली घने कोहरे सहित प्रतिकूल मौसम की स्थितियों में भी ट्रेनों की सुरक्षित और अधिक विश्वसनीय आवाजाही सुनिश्चित करती है, जिससे सेवा की विश्वसनीयता और समयबद्धता में सुधार होता है।

पूर्वी तट रेलवे में सुरक्षा अवसंरचना को मजबूत करना

इस परियोजना से पूर्वी तट रेलवे द्वारा सेवा प्रदान किए जाने वाले ओडिशा और पड़ोसी क्षेत्रों के प्रमुख खंडों में यात्री और मालगाड़ी दोनों के संचालन को लाभ मिलने की उम्मीद है। इससे उच्च घनत्व वाले और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मार्गों पर कवच नेटवर्क के विस्तार के लिए भारतीय रेल के चल रहे अभियान को और मजबूती मिलेगी ।

भारतीय रेलवे ने उत्तरी रेलवे के अंबाला मंडल के लिए ‘कवच परियोजना’ की दी स्वीकृति

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

रेल सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारतीय रेलवे ने उत्तरी रेलवे के अंबाला मंडल के शेष ब्रॉड गेज रेल खंडों पर ‘कवच’ प्रणाली स्थापित करने की स्‍वीकृति प्रदान की है। यह परियोजना 811 किलोमीटर के मार्ग को कवर करती है और इसके लिए 201 करोड़ रुपये की लागत स्वीकृत की गई है। इस कार्य को भारतीय रेलवे के शेष मार्गों पर ‘एलटीई-आधारित संचार नेटवर्क’ के साथ कवच प्रणाली के प्रावधान वाले व्यापक कार्यक्रम के तहत मंजूरी दी गई है।

इस स्वीकृत कार्य के अंतर्गत अंबाला मंडल के कई महत्वपूर्ण रेल मार्ग शामिल होंगे, जिनमें अंबाला छावनी-लुधियाना, कालका-चंडीगढ़-न्यू मोरिंडा-साहनेवाल, सरहिंद-दौलतपुर चौक, राजपुरा-बठिंडा-श्री गंगानगर और लुधियाना-धुरी-जाखल रेलखंड शामिल हैं।

ये मार्ग हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश राज्यों को जोड़ने वाले प्रमुख रेल गलियारों के रूप में कार्य करते हैं। यहां से भारी मात्रा में यात्री और मालगाडि़यों का आवागमन होता है, जो इस पूरे क्षेत्र में लोगों और सामान की आवाजाही में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

‘कवच’ स्वदेशी रूप से विकसित एक स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है, जिसे परिचालन सुरक्षा बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह प्रणाली रेड सिग्नल पार करने की घटनाओं को रोकने में मदद करती है, असुरक्षित स्थितियों से बचने के लिए आवश्यकता पड़ने पर स्वचालित रूप से ब्रेक लगाती है, गंभीर परिस्थितियों में ट्रेन की गति को नियंत्रित करती है और ट्रेनों की आपस में होने वाली टक्करों के जोखिम को काफी हद तक कम करती है।

भारतीय रेलवे अपने नेटवर्क पर अधिक व्‍यस्‍तता वाले और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मार्गों पर सुरक्षा, विश्वसनीयता और क्षमता बढ़ाने के निरंतर प्रयासों के तहत चरणबद्ध तरीके से ‘कवच’ प्रणाली का विस्तार कर रहा है।

रेलवे ने अहमदाबाद डिवीजन के लिए 140 करोड़ रुपये की कवच परियोजना को मंजूरी दी

गुजरात / सत्ता संदेश

रेलवे ने रेल सुरक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, गुजरात के पश्चिमी रेलवे के अहमदाबाद डिवीजन के 48 ब्लॉक खंडों में फैले 598 किलोमीटर मार्ग पर कवच परियोजना के चौथे चरण को मंजूरी दी है। इस परियोजना को रेलवे मार्गों पर लॉन्ग टर्म इवोल्यूशन (एलटीई) आधारित संचार तकनीक के साथ कवच उपलब्ध कराने के लिए बनाए गए व्यापक कार्यक्रम के अंतर्गत 140 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृत किया गया है।


इससे पहले, अहमदाबाद डिवीजन के लगभग 702 किलोमीटर मार्ग पर कवच के लिए पहले ही स्वीकृति दी जा चुकी है। वर्तमान परियोजना की मंजूरी के साथ, डिवीजन के शेष खंड भी कवच प्रणाली के अंतर्गत आ जाएंगे, जिससे पूरे डिवीजन में स्वदेशी ट्रेन सुरक्षा प्रणाली के व्यापक उपयोग का मार्ग प्रशस्त होगा।


कवच स्वदेशी रूप से विकसित स्वचालित ट्रेन सुरक्षा (एटीपी) प्रणाली है जिसे परिचालन सुरक्षा बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह प्रणाली खतरे के सिग्नल को पार करने (एसपीएडी) से रोकने, गंभीर परिस्थितियों में स्वचालित रूप से ब्रेक लगाकर रेल की गति को नियंत्रित करके दुर्घटनाओं के जोखिम को काफी हद तक कम करती है।


रेलवे सुरक्षा को मजबूत करने और रेल संचालन को आधुनिक बनाने के अपने निरंतर प्रयासों के तहत पूरे नेटवर्क में कवच कार्यक्रम का विस्तार कर रहा है।

महबूबनगर–सिकंदराबाद–मेडचल रेल सेक्शन पर बिजली व्यवस्था होगी और मजबूत

दिल्ली / सत्ता संदेश

भारतीय रेल ने दक्षिण मध्य रेलवे के महबूबनगर–सिकंदराबाद–मेडचल रेल सेक्शन पर रेल संचालन को और अधिक सक्षम बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण परियोजना को मंजूरी दी है। इसके तहत मौजूदा 1×25 केवी इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम को आधुनिक 2×25 केवी सिस्टम में अपग्रेड किया जाएगा। लगभग 141 किलोमीटर लंबे इस रेल सेक्शन पर यह कार्य ₹285.01 करोड़ की लागत से किया जाएगा।

यह परियोजना भारतीय रेल के उन प्रयासों का हिस्सा है, जिनके तहत देश के व्यस्त रेल मार्गों की क्षमता बढ़ाई जा रही है। 2×25 केवी सिस्टम लागू होने से ट्रेनों को अधिक स्थिर और बेहतर बिजली आपूर्ति मिलेगी, जिससे रेल संचालन और अधिक सुचारु, सुरक्षित एवं विश्वसनीय बनेगा।

महबूबनगर–सिकंदराबाद–मेडचल रेल सेक्शन देश के महत्वपूर्ण हाई डेंसिटी नेटवर्क मार्गों में शामिल है। यह धर्मवरम–डोन–महबूबनगर–सिकंदराबाद–मेडचल–मुदखेड़–इंदौर–अजमेर रेल कॉरिडोर का हिस्सा है, जहां बड़ी संख्या में यात्री और मालगाड़ियां संचालित होती हैं।

परियोजना पूरी होने के बाद इस मार्ग पर ट्रेनों के संचालन में और सुधार होगा। मालगाड़ियों की आवाजाही अधिक सुगम होगी, जिससे माल परिवहन की गति और क्षमता दोनों बढ़ेंगी। इसके साथ ही क्षेत्र में व्यापार, उद्योग और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।

यह परियोजना भारतीय रेल के आधुनिक और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप रेल नेटवर्क विकसित करने के संकल्प को और मजबूत करेगी तथा यात्रियों और उद्योग जगत दोनों को इसका लाभ मिलेगा।